सलीम जावेद की रंगीन दुनियाँ

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The Romantic
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Re: सलीम जावेद की रंगीन दुनियाँ

Unread post by The Romantic » 09 Nov 2014 16:16


छोटा ठाकुर भी बोल रहा था-
“ले ठकुराइन रान्न्न्न्न्नी ले ले मेरा लण्ड अपनी ओखली में। बड़ा तड़पाया है तूने मुझे। ले और ले। ले छोटे ठाकुर का यह लण्ड तेरा ही है। आाााााााहहहहह ऊऊऊऊऊऊऊहहह क्या मजा सिखाया है तूने। मैं तो तेरा गुलाम हो गया। ”
ठकुराइन चूतड़ उछाल उछाल कर छोटे ठाकुर का लण्ड अपनी चूत में ले रही थी और वो भी पूरे जोश को साथ चूचियों को दबादबाकर चोदे जा रहा था।
उफ्फ्फ्फ्फ्फ क्या आग सी लगी हुई थी दोनों को तन बदन में।
ठकुराइन ललकार कर कहती लगा ठाकुरों वाला धक्का छोटे ठाकुर राजा।
छोटा ठाकुर जवाब देता ये ले ठकुराइन रानी ले ले अपनी चूत में।
जरा और जोर से मार धक्का अपने लण्ड का छोटे ठाकुर राजा
ये लो रानी साहिबा ये लण्ड तो बना ही आपके लिए है ।”
“देख छोटे राज्ज्ज्जा मेरी चूत तो तेरे लण्ड की दीवानी हो गई। और जोर से और जोर से आाााााााााईईईईईईईईई छोटे ठाकुर राज्ज्ज्ज्जाााा। मैं गईईईईईईईईईईईईईईईई रे”
कहते हुए ठकुराइन ने छोटे ठाकुर को कस कर अपनी गोरी गुलाबी संगमरमरी मांसल बांहों में जकड़ लिया और उनकी चूत के ज्वालमुखी ने लावा छोड़ दिया।
मेरा भी गयाााााा ठकुराइन रान्न्न्न्न्न्न्न्न्न न्नीईईई ईईईईईईई तेरीईईईईईईईईईइ चूत में ले ले पूरे लण्ड का रस चूस ले अपनी चूत से।
कहते हुए छोटे ठाकुर के लण्ड ने भी पानी छोड दिया और मैं हांफते हुए ठकुराइन की चूचियों पर सिर रखकर उनके गोरे गुलाबी संगमरमरी गदराये मांसल जिस्म को दबोचकर लेट गया।
यह छोटे ठाकुर की पहली चुदाई थी और ठकुराइन ने भी चुदाई सिखाने और चुदाने में आज नया लण्ड मिलने के जोश में बहुत मेहनत की थी इसलिए दोनों को काफी थकान सी महसूस हो रही थी। दोनों सो गए। कुछ देर बाद जब होश आया तो जय ठाकुर ने ठकुराइन भाभी के रसीले होठों का चुम्बन लेकर उन्हें जगाया। ठकुराइन ने करवट लेकर उसे अपने ऊपर से हटाया और बांहों में कस कर कान में फुसफुसा कर बोली-
“तुमने तो कमाल कर दिया लाला। क्या गजब की ताकत है तुम्हारे लण्ड में। ”
“कमाल तो आपने किया है भाभी। आजतक मुझे मालूम ही नहीं था कि अपने लण्ड का इस्तेमाल कैसे करना है। ये तो आपकी ही मेहरबानी है जो आज मेरे लण्ड को आपकी चूत की सेवा करने का मौका मिला। ”
अबतक उसका लण्ड उनकी चूत के बाहर आकर झांटों के जंगल में रगड़ मार रहा था।
ठकुराइन ने अपनी मुलायम गुदाज हथेलियों में छोटे ठाकुर का लण्ड थाम कर सहलाना शुरू किया। उनकी नाजुक उंगलियों का स्पर्श पाकर छोटे ठाकुर का लण्ड भी जग गया और एक अंगडाई लेकर ठकुराइन की पावरोटी सी फूली चूत पर ठोकर मारने लगा। ठकुराइन ने कस कर अपनी मुट्ठी में मेरे लण्ड को कैद कर लिया और बोली- “बहुत जान है तुम्हारे लण्ड में। देखो फिर फड़फड़ाने लगा। अब तो मैं इसे छोडुंगी नहीं। ”
दोनों अगल बगल लेटे हुए थे। ठकुराइन ने छोटे ठाकुर को चित्त लिटा दिया और उसकी जांघ पर अपनी जांघ चढ़ा कर लण्ड को हाथ से उमेठने लगी। साथ ही साथ भाभी अपनी कमर को हिलाते हुए अपनी चूत मेरी जांघ पर रगड़ने लगी। उनकी चूत पिछली चुदाई से अभी तक गीली थी और उसका स्पर्श मुझे पागल बनाए हुए था। अब जय ठाकुर से रहा नहीं गया और करवट लेकर ठकुराइन की तरफ मुंह कर के लेट गया। उनकी बड़ी बड़ी चूचियों को हाथों में थाम चेरी से निपल मुंह में दबा कर चूसते हुए अपना लण्ड को चूत के मुँह पर रगड़ने लगा। ठकुराइन एक सिसकारी लेकर जय ठाकुर से कस पर चिपक गई और जोर जोर से कमर हिलाते हुए अपनी का चूत मुँह मेरे लण्ड के सुपाड़े पर रगड़ने लगी। जय ठाकुर का लण्ड पूरे जोश में अकड़ कर लोहे की तरह सख्त हो गया था। अब ठकुराइन की बेताबी हद से ज्यादा बढ़ गई थी सो उन्होंने खुद चित्त होकर छोटे ठाकुर को अपने ऊपर खींच लिया।
ठकुराइन जय ठाकुर के लण्ड को पकड़ कर अपनी चूत पर रखती हुई बोली-
“बोलो छोटे ठाकुर राज्जा। सेकेन्ड राउन्ड हो जाए। ”
छोटे ठाकुर ने झट कमर उठा कर धक्का दिया और उसका लण्ड ठकुराइन की चूत को चीरता हुआ जड़ तक धंस गया। ठकुराइन चिल्लाई “जियो मेरे राज्जा। क्या शाट मारा है। अब मेरे सिखाए हुए तरीके से दो शॉट पर शॉट और फाड़ दो ठकुराइन की चूत को।”
ठकुराइन का प्रोत्साहन पाकर छोटा ठाकुर दूने जोश में आ गया और चूचियों को पकड़ कर हुमच हुमच कर उनकी की चूत में लण्ड पेलने लगा। पहली चुदाई से गीली ठकुराइन की चूत में लण्ड सटासट अन्दर बाहर हो रहा था। ठकुराइन नीचे से कमर उठा कर हर शॉट का पूरे जोश के साथ जवाब दे रही थी। ठकुराइन भाभी ने अपने दोनें हाथों से मुँह बोले देवर छोटे ठाकुर की कमर को पकड़ रखा था और जोर जोर से अपनी पावरोटी सी फूली चूत में उसका ठाकुरी फौलादी लण्ड डलवा रही थी। वह उसे इतना उठने देती कि बस लण्ड का सुपाड़ा अन्दर रहता और फिर जोर से नीचे खींचती हुई घप से लण्ड चूत में घुसड़वा लेती। पूरे कमरे में हमारी तेज सांस और फटाफट की आवाजें गूंज रही थी।
कुछ देर बाद ठकुराइन ने कहा-
“अब तू काफी सीख गया चल तुझे एक नया आसन सिखाती हूँ। ” और छोटे ठाकुर को अपने ऊपर से हटा कर किनारे कर दिया। लण्ड पक की आवाज के साथ बाहर निकल गया। वो चित्त लेटा था और लण्ड पूरे जोश में सीधा खडा था। ठकुराइन उठ कर घुटनों और हथेलियों पर उसके बगल में ही चौपाया बन गई। जय लण्ड को हाथ में पकड कर बस उनकी हरकत देखता रहा।
ठकुराइन ने उसे खींच कर उठाते हुए कहा –
“ऐसे पड़े पडे़ क्या देख रहा है । चल उठ अब पीछे से लण्ड डाल।
छोटे ठाकुर उठ कर ठकुराइन के पीछे आ कर घुटनों के बल बैठ गये ठकुराइन ने जांघों को फैला कर अपने गोल बड़े बड़े गद्देदार गुलाबी मस्ताने चूतड़ ऊपर को उठा दिए जिससे उनकी पावरोटी सी फूली रसीली चूत साफ नजर आने लगी। छोटे ठाकुर अपना फ़ौलादी लण्ड हाथ में पकड़कर उसका सुपाड़ा उनकी चूत पर रगड़ने लगा।

थोड़ी देर में जब उत्तेजना से ठकुराइन की चूत गीली हो गयी तो उन्होंने इशारा किया भाभी का इशारा समझ कर छोटे ठाकुर ने लण्ड का सुपाड़ा उनकी चूत पर रख कर धक्का मारा और लण्ड चूत को चीरता हुआ जड तक धंस गया। भाभी ने एक सिसकारी भर कर अपने चूतड़ पीछे कर के जय की जांघों से चिपका दिये।
छोटा ठाकुर ठकुराइन की संगमरमरी गदरायी पीठ से चिपक कर लेट गया और बगल से हाथ डाल कर उनकी दोनों बड़ी बड़ी बेल सी चूचियों को थाम कर दबाने लगा। वो भी मस्ती में धीरे धीरे चूतड़ों को आगे पीछे करके मजे लेने लगी। उनके मुलायम बड़े बड़े गद्देदार मस्ताने चूतड़ उसकी मस्ती को दोगुना कर रहे थे। लण्ड उनकी रसनही पावरोटी सी फूली चूत में आराम से आगे पीछे हो रहा था। मस्ती का वो आलम था कि बस पूछो मत।
कुछ देर यूंही मजा लेने के बाद ठकुराइन बोली-
“चल राज्जा अब आगे उठ कर शॉट लगाओ। अब रहा नहीं जाता।”


छोटा ठाकुर उठ कर सीधा हो गया और ठकुराइन के चूतडों को दोनों हाथों से कस कर पकड़कर हमला बोल दिया। जैसा कि ठकुराइन भाभी ने सिखाया था पूरा लण्ड धीरे से बाहर निकाल कर जोर से अन्दर कर देता। शुरू तो धीरे धीरे किया लेकिन जैसे जैसे जोश बढ़ता गया धक्कों की रफ्तार भी बढती गई। धक्का लगाते समय ठकुराइन के चूतड़ों को कस के अपनी ओर खींच लेता ताकि शॉट तगड़ा पडे। ठकुराइन भी उसी रफ्तार से अपने चूतडों को आगे पीछे कर रही थी। दोनों की सांस तेज हो गई थी। ठकुराइन की मस्ती पूरे परवान पर थी। नंगे जिस्म जब आपस में टकराते तो धप धप की आवाज आती। जब हालत बेकाबू होने लगी तो जय ठकुराइन भाभी को फिर से चित्त कर उन पर सवार हो गया और भीषण चुदाई शुरू की। तभी भाभी ने उसे कस कर जकड़ लिया और अपनी चिकनी मोटी मोटी गोरी गुलाबी संगमरमरी जांघें उसकी कमरं पर कस कर जोर जोर से चूतड़ हिलाते हुए चिपक कर झड़ गई। तभी जय भी ठकुराइन भाभी की बड़ी बड़ी बेल सी चूचियों को हार्न की तरह जोर जोर से दबाते हुए झड़ गया और हांफते हुए उनके ऊपर लेट गया। दोनों काफी देर तक एक दूसरे से चिपके पड़े रहे।

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Re: सलीम जावेद की रंगीन दुनियाँ

Unread post by The Romantic » 09 Nov 2014 16:17


कुछ देर बाद ठकुराइन ने पूछा- “क्यों लाला कैसी लगी चुदाई।”
छोटे ठाकुर -
“हाय भाभी जी करता है जिन्दगी भर इसी तरह तुम्हारी चूत में लण्ड डाले पडा रहूं।”
ठकुराइन –
“जब तक बडे़ ठाकुर नहीं आते तब तक तो दिन हो या रात ये चूत तुम्हारी है। जो मर्जी हो कर सकते हो। फ़िलहाल अब थोड़ी देर आराम करते हैं।”
छोटे ठाकुर –
“नहीं भाभी। कम से कम एक बार तो और हो जाए। देखो मेरा लण्ड अभी भी बेकरार है ।”
ठकुराइन ने छोटे ठाकुर के लण्ड को अपनी गुदाज हथेली में कस लिया और बोली –
“ये तो ऐसे रहेगा ही चूत की खुशबू जो मिल गई है। पर देखो रात के तीन बज गए हैं। अगर सुबह टाईम से नहीं उठे तो हवेली के नौकरों को शक हो जाएगा। अभी तो सारा दिन सामने है और आगे के भी कई दिन हमारे हैं। जी भर कर मस्ती लेना। मेरा कहा मानोगे तो रोज नया स्वाद चखाउंगी।”
ठकुराइन का कहा मान कर छोटे ठाकुर ने जिद छोड़ दी ठकुराइन करवट लेकर लेट गई। छोटे ठाकुर उनकी गदरायी पीठ से सट बगल से हाथ डालकर दोनों हाथों में बड़ी बड़ी चूचियों थाम उनके बड़े बड़े गद्देदार गुलाबी चूतड़ों की दरार में लण्ड फंसा दिया और उनके मांसल कन्धों पर होंठ रख कर लेट गया। नींद कब आगई इसका पता ही नहीं चला।


भाग 2
सुबह जब अलार्म घड़ी बजी तो छोटे ठाकुर ने समय देखा। सुबह के सात बज रहे थे। ठकुराइन भाभी ने उसकी तरफ मुस्करा कर करवट लेकर देखा और एक गरमा गरम चुम्बन होठों पर जड़ दिया। उसने भी ठकुराइन भाभी को जकड़ कर उनके चुम्बन का जोरदार जवाब दिया। फिर ठकुराइन उठ कर अपने रोज के काम काज में लग गई। वह बहुत ही खुश थी और उनके गुनगुनाने की आवाज उसके कानों में शहद घोल रही थी। तभी घन्टी बजी और नौकरानी आशा आ गई।
उस दिन जय ठाकुर कालेज नहीं गये। नाश्ता करने के बाद वो पढ़ने बैठ गया। जब बेला की बेटी आशा कमरे में झाडू लगाने आई तब भी वो टेबल पर बैठा पढ़ाई करता रहा। पढ़ाई तो क्या खाक होती। बस रात का ड्रामा ही आँखों के सामने घूमता रहा। सामने खुली किताब में भी भाभी का संगमरमरी बदन उनकी दूध सी सफेद बेल सी चूचियां और पाव सी चूत ही नजर आ रही थी।
बाबू जरा पैर हटा लो झाड़ू देनी है।
छोटे ठाकुर चौंक कर हकीकत की दुनिया में वापस आये। देखा आशा कमर पर हाथ रखे पास खड़ी है। वो खड़ा हो गया और आशा झुक कर झाड़ू लगाने लगी। वो उसे यूं ही देखने लगा। आशा का रंग गेंहुआ अपने बाप बल्लू के जैसा, और भरा भरा बदन अम्मा के जैसा। तीखे नाक नक्श । बडे़ ही साफ सुथरे ढंग से सज संवर कर रहती थी। आज से पहले मैंने उस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया था। वो आती थी और अपना काम कर के चली जाती थी। पर आज की बात ही कुछ और थी। चुदाई की ट्रेनिंग पाकर एक रात में ही उसका नजरिया बदल गया था। अब वो हर औरत को चुदाई के नजरिये से देखने लगा था। उसे पता था कि आशा की गोरी चिट्टी मुटल्ली अम्मा बेला बड़े ठाकुर से जम के चुदवाती है हो सकता है ये भी चालू हो। आशा लाल हरी साड़ी पहने हुई थी जिसका पल्लू छाती पर से लाकर कमर में दबा लिया था। छोटा सा पर गहरे गले का चोलीनुमा ढीला ब्लाउज उसकी चूचियों को संभाले हुए था। जब वो झुक कर झाडू लगाने लगी तो ब्लाउज के गहरे गले से उसकी गोल गोल बेल सी चूचियां साफ दिखाई दे रही थी। छोटे ठाकुर का लण्ड फनफना कर तन गया। रात वाली ठकुराइन भाभी की चूचियां मेरे दिमाग में कौंध गई। तभी आशा ने नजर उठाई तो छोटे ठाकुर को एक टक घूरता पाकर उसने एक दबी सी मुस्कान दी और अपना आंचल संभाल कर चूचियों को छुपा लिया। अब वो छोटे ठाकुर की तरफ पीठ कर के टेबल के नीचे झाडू लगा रही थी। उसके चूतड़ तो और भी मस्त थे। गोल बड़े बड़े और गद्देदार। छोटा ठाकुर मन ही मन सोचने लगा कि इसके गद्देदार चूतड़ों पर लण्ड रगड़ने और चूचियों को मसलने में कितना मजा आएगा। बेखयाली में उसका हाथ तन्नाए हुए लण्ड पर पहुंच गया और पाजामे के ऊपर से ही उसे सहलाने लगा। तभी आशा अपना काम पूरा कर के पलटी और छोटे ठाकुर की हरकत देख कर मुंह पर हाथ रख कर हंसती हुई बाहर चली गई। छोटा ठाकुर झेंप कर कुर्सी पर बैठ पढ़ाई करने की कोशिश करने लगा।
जब आशा काम कर के चली गई तब ठकुराइन ने खाने के लिए बुलवा भेजा। जय डाईनिंग टेबल पर आ गया। ठकुराइन भाभी ने खाते समय पूछा-
“क्यों छोटे , आशा के साथ कोई हरकत तो नहीं की।”
वो अचकचा गया-
“नहीं तो। कुछ बोल रही थी क्या?”
ठकुराइन –
“नहीं कुछ खास नहीं। बस कह रही थी कि आप के देवर छोटे ठाकुर अब जवान हो गये हैं जरा खयाल रखना।”
वो कुछ नहीं बोला और चुपचाप खाना खा कर अपनी स्टडी टेबल पर आ कर पढ़ने बैठ गया। ठकुराइन ने हवेली का काम निबटवा कर नौकरों की बाकी के आधे दिन की छुटटी कर दी कि ठाकुर साहब हैं नहीं सो कोई खास काम शाम को है नहीं सो तुम लोग भी आराम करो। सबको भेज भाज कर ठकुराइन कमरे में आई और छोटे ठाकुर के सामने उसकी स्टडी टेबल पर बैठ गई और पैर सामने कुर्सी पर बैठे छोटे ठाकुर की दोनो जॉघों पर रख लिये। उसके हाथ से किताब लेते हुए बोली-
“ज्यादा पढ़ाई मत कर। सेहत पर असर पड़ेगा।”
और अपनी एक आंख दबा कर कनखी मार दी। फिर छोटे ठाकुर की दोनो टॉगों के बीच में अपने पैर के अंगूठे से उसका लण्ड सहलाते हुए बोली-
“छोटे ठाकुर तेरा लण्ड तो बहुत जोरदार है। कितना मोटा लम्बा और सख्त। रात जब तुने पहली बार मेरी चूत में डाला तो ऐसा लगा कि ये तो मेरी बुर को फाड़ ही डालेगा। सच कितना अच्छा होता अगर एक रात मैं बारी बारी से दोनों ठाकुरों के लण्ड अपनी चूत में लेकर मजे लेती और देखती दोनो ठाकुरों से एक साथ चुदवाकर कि कौन ऊंचा कलाकार है ।”
जय के हाथ उनके पैरों को सहलाते हुए धीरे धीरे उनकी पिण्डलियों की तरफ बढ़ने लगे उनका लंहगा ऊपर सरकने लगा।
“तुम कितनी अच्छी हो भाभी”
वो बोला- “मुझे अपनी चूत देकर चोदना सिखाया।”
धीरे धीरे छोटे ठाकुर ने ठकुराइन का लंहगा उनके घुटनों तक ऊपर सरका दिया और उनकी पिण्डलियों को दोनों हाथों से सहलाने हथेलियों में दबोचने लगा। बीच बीच में उत्तेजित हो उनकी गोरी गोरी गुलाबी पिण्डलियों पर दॉत भी गड़ा देता था। धीरे धीरे ठकुराइन का लंहगा उनकी के जांघों तक ऊपर सरककर पहुंच गया और जयठाकुर उनकी मोटी मोटी केले के तने जैसी चिकनी गोरी गुलाबी जांघों पिण्डलियों को दोनों हाथों से सहलाने हथेलियों में दबोचने लगा। बीच बीच में उत्तेजित हो जहॉ तहॉ मुँह भी मार रहे थे। फिर छोटे ठाकुर मारे उत्तेजना के खड़े हो गये और ठकुराइन के रसीले होंठों को अपने होंठों में दबाकर चूसने लगे और उनका लंहगा अपने हाथों से उनकी के जांघों से ऊपर कर उनकी चूत और चूतड़ों को नंगा करने की कोशिश करने लगे ठकुराइन ने टेबिल पर बैठ बैठे बारी बारी से दायें बायें झुककर अपने बड़े बड़े भारी चूतड़ों को उठा कर उनकी मदद की अब उनका लंहगा उनकी कमर तक सिमट गया था आज ठकुराइन नीचे कुछ भी नहीं पहने हुई थी और अब वो कमर के नीचे बिलकुल नंगी थी। उनके बड़े बड़े गद्देदार गुलाबी चूतड़ गोरी गुलाबी रेशमी पावरोटी सी फूली चूत मोटी मोटी नर्म चिकनी गोरे गुलाबी जांघें और पिण्डलियां देख कर छोटे ठाकुर उत्तेजना के मारे जहॉ तहॉ नोचने हथेलियों में दबोचने मुँह मारने लगे। ठकुराइन के मुँह से सिसकारियॉं छूटने लगी। ठकुराइन ने छोटे ठाकुर का सर दोनों हाथों में थाम उसका मुँह अपने उभरे सीने पर रख दिया। छोटे ठाकुर अपने हाथ उनकी गदराई पीठ पर कस कर उनके बड़े बड़े उरोजों पर अपना चेहरा रगड़ने लगे। छोटा ठाकुर एक हाथ पीछे ले जाकर उनके ब्लाउज के बटन खोलते हुए दूसरा हाथ ब्लाउज के अन्दर डाल उनके उरोज सहलाने लगा और निपल पकडकऱ मसलने लगा। फिर एक हाथ से उरोज सहलाते हुए दूसरा हाथ नीचे ले जाकर ठकुराइन का विशाल चूतड़ पकड़ लिया।ठकुराइन से रहा नहीं गया तो छोटे ठाकुर के नारे को ढीला कर के ऊपर से ही हाथ घुसा कर छोटे ठाकुर के फौलादी लण्ड को सहलाने लगी फिर अपनी दोनों मोटी मोटी नर्म चिकनी जांघों के बीच दबाकर मसल़ने लगी अब छोटे ठाकुर के होंठ और हाथ उनके सारे गदराये जिस्म की ऊँचाइयों व गहराइयों पर पहुँच रहे थे और सहला टटोल दबोच रहे थे उनके गदराये जिस्म पर जॅहा तॅहा मुँह मार रहे थे और ठकुराइन धीरे धीरे टेबिल के पीछे की दीवार से सटती जा रही थी धीरे धीरे वे पूरी तरह सट गयीं, केवल दोनों टांगे छोटे ठाकुर की कमर से लपेट ली थी। छोटे ठाकुर उनके गदराये जिस्म को दोनों हाथों मे दबोचकर उनके ऊपर झुककर बड़ी बड़ी चूचियों और सारे गदराये जिस्म की ऊँचाइयों व गहराइयों पर जॅहा तॅहा मुंह मार रहे थे बीच बीच मे उनके निप्पलो को बारी बारी से होंठों में ले कर चुभला व चूस रहा था। ठकुराइन छोटे ठाकुर का लण्ड अपनी चूत पर रगड़ते हुए बोली –
“टेबिल चुदाई सीखेगा।”
छोटे ठाकुर –
“ये क्या होता है?”
ठकुराइन –
“सीखेगा तब तो जानेगा। इसके बड़े फायदे हैं जैसेकि कपड़े नहीं उतारने पड़ते और यदि किसी के आने की आहट हो तो जल्दी से हट सकते हैं जैसे कुछ कर ही नहीं रहे थे इसे चोरी की चुदाई या फ़टाफ़ट चुदाई भी कहते हैं।”
छोटे ठाकुर –
“तब तो जरूर सीखूँगा।”
ठकुराइन –
“तो जल्दी से आजा।”
छोटे ठाकुर-
“जैसा आप कहें, पर कैसे?”
ठकुराइन ने टेबिल से लगी दीवार से पीठ लगा अपने दोनों पैर मोड़कर टेबिल पर कर लिए और दोनों हाथों से अपनी चूत की फांके फैलायी और बोली–
“ऐसे।”
बसछोटे ठाकुर ने अपने फौलादी लण्ड का सुपाड़ा उस पर धरा। ठकुराइन ने अपने हाथ से उसका लण्ड पकड़कर निशाना ठीक किया। ठकुराइन की मोटी मोटी नर्म चिकनी गोरी गुलाबी जांघों भारी नितंबों के बीच मे उनकी गोरी पावरोटी सी फूली चूत का मुँह खुला था। चूत के मुँह की दोनों फूली फांको के ऊपर धरा अपना फौलादी लण्ड का सुपाड़ा देख छोटे ठाकुर अपना सुपाड़ा ठकुराइन की चूत पर रगड़ने लगे।
ठकुराइन से जब उत्तेजना बरदास्त नहीं हुई तो चिल्लाई “अबे जल्दी लण्ड डाल।”
और तभी उत्तेजना में आपे से बाहर हो छोटे ठाकुर ने झपट़कर दोनों हाथों मे बड़ी बड़ी चूचियाँ दबोच झुककर उनके गुलाबी होंठों पर अपने होंठ रखकर लण्ड का सुपाड़ा चूत मे धकेला सुपाड़ा अन्दर जाते ह़ी उनके मुँह से निकला “उम्म्म्म्म्म्महहहहहहहहहहह शाबाश छोटे अब धीरे धीरे बाकी लण्ड भ़ी चूत मे डालदे।”
वो बड़ी बड़ी चूचियों को जोर जोर से दबाने गुलाबी होंठों को चूसने लगा। ठकुराइन की चूत बैठे होने से बेहद टाइट लग रही थी पर जैसे लण्ड अन्दर खिचा जा रहा हो या चूत अपने मुंह की दोनों फूली फांको मे लण्ड दबाकर उसे अन्दर चूस रही हो। पूरा लण्ड अन्दर जाते ह़ी ठकुराइन के मुँह से निकला-
“आहहहहहहहहहहहहहहह आह वाहहहह छोटे शाबाश अब लगा धक्के।”
छोटे ठाकुर ने थोड़ा सा लण्ड बाहर निकालकर वापस धक्का मारा दो तीन बाहर ह़ी धीरे धीरे ऐसा किया था कि ठकुराइन –
वाहहहह बेटा शाबाश अब लगा धक्के पे धक्का धक्के पे धक्का और जोर जोर से लगा धक्के पे धक्का । चोद ठकुराइन की चूत को अपने लण्ड से। मेरी चूचियों और जिस्म का रस चूस और जोर जोर से चोद।”
छोटे ठाकुर ने ठकुराइन की मोटी मोटी नर्म चिकनी गोरी गुलाबी जांघों को दोनों हाथों मे दबोचकर उनके ऊपर झुककर बड़ी बड़ी गुलाबी चूचियों के साथ खेलते और सारे गदराये जिस्म की ऊचाइयों व गहराइयों पर जॅहा तॅहा मुंह मारते हुए जोर जोर से धक्के पे धक्का लगाकर चोदने लगे। हर धक्के पे उनके मुंह से आवाजें आ रही थीं आह आहहहह आहहहहहहहहहहहहहहह।
ठकुराइन ने अपनी दोनों टांगे मोड़कर टेबिल पर कर रखी थी जिससे उनकी संगमरमरी जांघें छोटे ठाकुर सीने की सीध में और पावरोटी सी फूली चूत बड़े बड़े गद्देदार गुलाबी भारी चूतड लण्ड की सीध में हो गये थे जिन्हें देख देख जय पगला रहा था साथ ही उसका लण्ड भी ठकुराइन की चूत की जड़ तक धॉंसकर जा रहा था हर धक्के पे उनकी चिकनी संगमरमरी जांघें और भारी चूतड़ छोटे ठाकुर की जांघों और लण्ड के आस पास टकराकर गुदगुदे गददे का मजा दे रहे थे जब ठकुराइन के थिरकते हुए बड़े गद्देदार गुलाबी भारी चूतड़ों से छोटे ठाकुर की जांघें टकराती तो लगता कोई तबलची तबले पर थाप दे रहा हो। पूरे कमरे में चुदाई की थप थप फट फट गूंज रही थी। छोटे ठाकुर दोनों हाथों मे उनकी संगमरमरी जांघें और भारी चूतड़ों को दबोचकर उनकी गुलाबी मांसल पिण्डलियों पर जॅहा तॅहा कभी मुंह मारते कभी दांतों मे दब चूसते हुए चोदने लगा ठकुराइन भी अपने चूतड़ हिला हिला कर गोरी पावरोटी सी फूली चूत मे जड़तक लण्ड धॅंसवाकर चुदवा रही थी। करीब आधे घ्ंटे तक वो पागलों की तरह उनके गदराये गोरे गुलाबी नंगे जिस्म को दोनों हाथों मे दबोचकर उनके ऊपर झुककर बड़ी बड़ी गुलाबी चूचियों के साथ खेलते तो कभी दांतों मे दबा निप्पलो को तो कभी बारी बारी से होंठों में ले कर चुभलाते व चूसते हुए और सारे गदराये जिस्म की ऊचाइयों व गहराइयों पर संगमरमरी जांघों और भारी चूतड़ों पर जहॉ तहॉं मुंह मारते हुए चोदता रहा। ठकुराइन बार बार ललकार रही थी-
“चोद ले छोटे राजा चोद ले अपनी भाभी की आज फाड़ डाल इसे। शाबाश मेरे शेर। मजा ले ले जवानी का। और जोर से छोटे राज्जा और जोर से। फाड़ डाल तू आज मेरी तो। नीचे से अपने चूतड़ उछाल उछाल कर चुदवाती रही कि अचानक ऐसा लगा जैसे जिस्म ऐठ रहे हों तभी ठकुराइन ने नीचे से जोर से अपने चूतड़ों को उछाला और छोटे ठाकुर ने अगला धक्का मारा कि उनके जिस्मों से जैसे लावा फूट पडा़ । ठकुराइन के मुँह से जोर से निकला- “उहहहहहहहहहहह ।”
नीचे से अपनी कमर और चूतड़ों का दबाव डालकर अपनी चूत मे जड़ तक लण्ड धॉंसकर झड रही थी और वो भी उनके गदराये जिस्म को बुरी तरह दबाते पीसते हुए दोनों हाथों मे उनके चूतड़ों को दबोचकर अपने लण्ड पर दबाते हुए चूत की जड़तक लण्ड धॉंसकर झड रहा था। जब दोनों झड चुके तब भी बुरी तरह चिपटे हुए थे ।दोनों उसी तरह से चिपके हुए पलंग पर लेट गए और थकान की वजह से सो गए।


क्रमश:……………॥

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Re: सलीम जावेद की रंगीन दुनियाँ

Unread post by The Romantic » 09 Nov 2014 16:21

रंगीन हवेली
भाग 4
नतीजा आशा की अक्लमन्दी का



छोटे ठाकुर बड़ी ठकुराइन के साथ नंग धडंग एक दूसरे से लिपट कर सो रहे थे। जब छोटे ठाकुर की आंख खुली तो देखा अन्धेरा हो गया था। जय ने धीरे से ठकुराइन का हाथ अपने ऊपर से हटाया और टेबल लैम्प आन कर दिया ताकि भाभी की नींद में खलल ना पडे। फिर वापस पलंग पर ठकुराइन के पास आकर बैठ गया। ठकुराइन अब हाथ पैर फैला कर नंगी चित्त पड़ी थी। वो उनके खूबसूरत संगमरमरी गोरे गुलाबी बदन को निहारने लगा। ठकुराइन की मस्त बड़ी बड़ी दूध सी सफेद गुलाबी चूचियां तनी हुई थी। । चिकना भरा भरा बदन। पतली कमर। फैले हुए बड़े बड़े गद्देदार गुलाबी चूतड़़। केले के तने सी मोटी मोटी नर्म चिकनी गोरी गुलाबी कसी हुई जांघें और पिण्डलियां और अपना पूरा जलवा दिखाती हुई ठकुराइन की गोरी गुलाबी रेशमी पावरोटी सी फूली रसीली चूत। छोटे ठाकुर से और रहा नहीं गया। उसने झुक कर भाभी की प्यारी चूत का चुम्बन ले लिया। फिर उठ कर ठकुराइन भाभी की गदराई जांघों के बीच आ गया। हौले से भाभी की जांघों को और फैलाया और जीभ से धीरे धीरे भाभी की चूत को सहलाने लगा। चुदक्कड़ औरतें नींद में भी चुदवाने के मूड में रहती हैं सो ठकुराइन ने नींद में ही अपने आप अपनी जांघें फैला दी। अब उनकी गुलाबी चूत का मुंह थोडा सा खुल गया था। ठकुराइन की मस्ती देख कर छोटे ठाकुर से और रहा नहीं गया। उनका ठाकुरी लण्ड अबतक तन कर फन फनाने लगा था। वो घुटनों के बल झुक गया और अपना सुपाड़ा ठकुराइन की चूत के दरवाजे पर रख कर रगड़ने लगा। चुदक्कड़ ठकुराइन ने नींद में ही अपनी जांघें और फैलायी छोटे ठाकुर ने एक अपने फौलादी सुपाड़े से चूत के दाने को सहलाना शुरू कर दिया। ठकुराइन शायद सपने में भी चुदवा रही थी सो सोते सोते ही कमर हिलाने लगी। छोटे ठाकुर ने हल्का सा धक्का दिया। ठकुराइन की चूत तो अपना रस छोड़ ही रही थी। घप से सुपाड़ा अन्दर दाखिल हो गया। फिर वो ठकुराइन के ऊपर सीधा होकर लेट गया और उनकी एक निपल को मुंह में लेकर चूसते हुए कस कर कमर का धक्का लगाया। उसका पूरा का पूरा लण्ड दनदनाता हुआ ठकुराइन की चूत के अन्दर चला गया।
ठकुराइन चौंक कर उठ गई और बोली –
“कौन है।”
छोटे ठाकुर ने ठकुराइन के होठों को चूमते हुए कहा आपकी चूत का दीवाना देवर।
ठकुराइन ने मुस्कुराते हुए जय को बांहों में जकड़ लिया और बोली –
“अरे वाह रे चुदक्कड़ ठाकुर। ये ठाकुर साले एक ही दिन में पूरे एक्सपर्ट हो जाते हैं। मुझे सोते सोते ही चोदना शुरू कर दिया। कल तक तो यह भी नहीं मालूम था कि अपने आठ इंच के लण्ड का करना क्या है।”
जय ठाकुर ने भी ठकुराइन के सेब से गालों को काटते हुए जवाब दिया –
“यह तो तुम्हारी मेहरबानी है भाभी वरना मेरी जवानी यूं ही निकल जाती। क्या करूं भाभी तुम्हारी मस्त नंगी जवानी को देख कर रहा नहीं गया। बुरा नहीं मानना।”
ठकुराइन ने छोटे ठाकुर को और कस कर जकड़ कर नीचे से चूतड़ उछालते हुए जवाब दिया –
“अरे नहीं छोटे राजा। बुरा काहे मानूंगी।मजा तो मुझे भी बहुत आ रहा है।”
ठकुराइन का जवाब पाकर जय बहुत खुश हुआ उसने जोश में एक झटके से लण्ड बाहर निकाला और ठकुराइन की चूत में जड़ तक धांस दिया फिर कमर हिला हिला कर चोदते हुए पूछा भाभी अगर बड़े ठाकुर इस चुदायी के बारे में जान जाएं तो क्या हो।
ठकुराइन ने पूरे जोश में चूतड़ उठा उठा कर चुदाते हुए जवाब दिया –
“जब तूने पूछ ही लिया है तो चल तुझे एक राज की बात बताती हूँ। बड़े ठाकुर जानते हैं।”
“क्या मतलब?”
“मतलब ये क़ि जब हमारी शादी हुई सुहाग रात में बड़े ठाकुर ने प्यार मोहब्बत की बातों के बाद मुझे बाहों में भर पहले धीरे धीरे कपड़ों के ऊपर से ही मेरा जिस्म सहलाते रहे मैं झूठमूठ ना ना कर रही थी फिर धीरे धीरे जैसे जैसे हमारा उत्तेजना बढ़ी उन्होंने मेरे ना नुकुर के बावजूद मेरे कपडे़ साड़ी ब्लाउज ब्रा पेटीकोट उतार डाले और मेरे स्तनों के साथ खेलने नितंबों जांघों पिण्डलियां को सहलाने दबोचने लगे जब चुप रहने की लाख कोशिश के बावजूद मारे उत्तेजना के मेरी सिसकियॉं तेज होने लगी तो उन्होंने हौले से मेरी जांघों को फैलाकर अपने घोंड़े जैसे लण्ड का फौलादी सुपाड़ा मेरी बुरी तरह से पनिया रही फूल सी चूत पर रखकर रगड़ा तो मुझसे चूतड़ उठाये बगैर रहा नहीं गया बड़े ठाकुर समझ गये और मेरी ना नुकुर के बावजूद तीन चार जोरदार धक्कों में अपना पूरा घोंड़े जैसा लण्ड मेरी पनियाई चूत में धांस दिया और चोदने लगे। थोड़ी ही देर में हम दोनों जान गये कि दोनो ही शौकीन मिजाज हैं उन्होंने यह बात मुझपर जाहिर कर दी और समझाया कि उन्हें ऐसी ही शौकीन मिजाज पत्नी चाहिए थी क्योंकि वो खुद शौकीन मिजाज हैं और उन्हें वेसी ही औरतें पसन्द हैं हवेली की तमाम खुबसूरत नौकरानियॉ उनसे चुद चुकी हैं और जबतब चुदती रहती हैं। उन्हें नयी नयी चूतें और चूतें बदल बदल कर चोदने का शौक है। इससे जो चूतें वो सालों से चोद रहे हैं उन्हें भी जब कभी चोदते हैं तो वो नयी चूत का मजा देतीं हैं। इतना शानदार तजुर्बे की सुनने के बाद मैं उनसे पूरी तरह खुल गयी थी सो इसी तरह जोर जोर से चूतड़ उछाल कर चुदाते हुए पूछा –
“मेरे लिये क्या हुक्म है ठाकुर राजा मैं क्या करूँ कि जब भी आप मेरी चूत चोदें तो मुझे भी आपका लण्ड नया लगे और हमदोनों को भरपूर मजा आये।”
ठाकुर साहब बोले –
“मेरी इन तमाम खुबसूरत नौकरानियों के के मुस्टंडे आदमी भी तो हमारे नौकर हैं वे सब आपकी नजर है जैसे चाहे इस्तेमाल करें। फिर आप हमारी ठकुराइन हैं शेरनी हैं जब चाहें जहॉ चाहें मुँह मार लें मुझे क्या एतराज हो सकता है।”
ठकुराइन ने अपनी टांगों को ऊपर कर के जय ठाकुर की कमर पर कस आगे बताया-
“चालाक ठाकुर ने कह तो दिया कि चुदवा लो पर कहॉ से और कैसे शुरू करें यह नहीं बताया। मैंने भी मारे हेकड़ी के नहीं पूछा । तभी तू आया मेरी नजर तुझ पर पड़ी और मैंने तुझे अपना पहला शिकार बना लिया ।....”
जय ठाकुर जोर से धक्का मारते हुए बोले –
“पहला और आखरी अब आपको और शिकार तलाश करने की कोई जरूरत नहीं बन्दे का लण्ड आपकी खिदमत में हमेशा तैनात रहेगा।”
ठकुराइन ने अपनी दोनों टांगे उठाकर जय के कंध़ों पर रख दी और चूतड़ उछालते हुए समझाया –
“भूल गया बड़े ठाकुर के तजुर्बे वाली बात लण्ड और चूतें बदल बदलकर इस्तेमाल करने से उनका नयापन बना रहता है। लेकिन मेरा पहला शिकार वो भी कॅुवारा लण्ड होने के कारण मेरी चूत में तेरा हिस्सा रूपये में एक आने भर हमेशा रहेगा।”
“ क्या खुब याद दिलाया भाभी मैं तो भूल ही गया था। मेरा हिस्सा पक्का करने का शुक्रिया।”
ठकुराइन कोई बात नहीं मेरी मानोगे तो ऐसे ही खुब मजे करोगे इसी बात पर चल आसन बदलते हैं।
ठकुराइन की बात सुन जय बहुत खुश हुआ बोला ष्ठीक है।
और फट से लण्ड बाहर निकाल लिया ठकुराइन पलंग पर पेट के बल लेट गई और अपने घुटनों के बल होकर अपने चूतड हवा में उठा दिए। देखने लायक नजारा था।