मेरी बेकाबू जवानी compleet

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raj..
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Re: मेरी बेकाबू जवानी

Unread post by raj.. » 12 Nov 2014 04:08


पति जी ने मुझे सुबह को उठाया और मैं अपने घर चली गयी. में घर जाके फ्रेश होके कॉलेज के लिए निकल पड़ी. जैसे ही मैं पति जी के घर मे घुसने वाली थी के पति जी मुझे पकड़ के चूमने लगे और हम दोनो एक दूसरे को देर तक चूमते रहे. पति जी ने मुझे कहा “ जया आज मैं तुम्हे कॉलेज छोड़ने आउन्गा, तुम्हारी नयी गाड़ी मे”. मेने देखा कि पति जी ने अपने जिस्म के उपर एक कपड़ा भी नही पहना था, तो मेने आश्चर्य से पति जी की ओर देखते हुए पूछा कि “ पति जी आप तो बिल्कुल नंगे है और मुझे कॉलेज छोड़ने आएँगे”. इस पर पति जी ने कहा “ अरे मेरी पगली हम दोनो तो पार्किंग मे से सीधे गाड़ी मे बैठ के कॉलेज के लिए चले जाएँगे तो उसमे कपड़े की क्या ज़रूरत, और तुम्हे पता नही है इस गाड़ी मे अंदर कौन बैठा है वो बाहर से नही दिखता और मुझे थोड़े ही कॉलेज जाना है”. और इतना कहते ही पति जी मेरे हाथ को पकड़ के मुझे पार्किंग मे गाड़ी के पास ले जाके गाड़ी चालू करके कॉलेज के लिए निकल पड़े. मेरे घर से कॉलेज जाने के लिए करीब पैदेल 20 मिनट लगते है, लेकिन मेने देखा कि पति जी ने गाड़ी को किसी और रास्ते से ले लिया, हालाकी मुझे सूरत सिटी के रास्ते के बारे मे ज़्यादा जानकारी नही थी इस लिए मे चुप बैठी रही.


एक बड़ा सा रोड आया, जिस के उपर कुछ गाडिया ही दौड़ रही थी. पति जी ने गाड़ी को एक छोटे से बगीचे के पास जाके खड़ी कर दिया. उन्होने मुझे पीछे की सीट पे जाने के लिए इशारा किया और खुद भी पीछे की सीट पे आके मेरे बाजू राइट साइड मे बैठ गये. उन्होने अपने लेफ्ट हाथ को मेरी गर्दन मे डाल दिया और मेरे होंठो को चूमने लगे. फिर थोड़ी देर के बाद उन्होने मेरी कॉलेज के ड्रेस के शर्ट के पहले बटन को अपने राइट हाथ से खोला और मेरी गर्दन के पास जाके वाहा से चूमते हुए नीचे जाने लगे. उनके ऐसा करते ही मेने अपने दोनो हाथो से उनके चेहरे को पकड़ के उपर किया और उनसे धीमी आवाज़ मे कहा “ पति जी आप मुझे नंगा मत कीजिए, मुझे कॉलेज के लिए जाना है”. पति जी ने मुझे गुस्से भरी आँखो से देखा, मैं बहुत डर गयी थी. उन्होने मेरा कहना अनसुना किया और जहा रुके थे वही से चूमना सुरू किया. पति जी ने धीरे धीरे मेरे शर्ट के सारे बटन को खोला और हर बटन के खोलने पर उस के नीचे नंगे जिस्म को चूमा. उन्होने मेरे शर्ट को अपने दोनो हाथो से मेरे स्तन के उपर से हटा दिया और मेरे दोनो स्तन को अपने हाथो से दबा दिया, मैने ईक सिसकारी ली और अपने जिस्म को ढीला छोड़ दिया.

पति जी तो पहले से ही नंगे थे, इसलिए जैसे ही वो मेरे होंठो को चूमने के लिए मेरे उपर झुके, उनका लंड मेरी स्कर्ट के उपर लगने लगा. उनके लंड के उपर थोड़ा सा पानी आ गया था, जिस ने मेरी स्कर्ट को थोड़ा सा गीला कर दिया. मेने ये महसूस करते ही अपने हाथो से स्कर्ट को हटाते हुए लंड को चूत के पास ले जाके रख दिया. मेरे मन मे तो पति जी के द्वारा किया जा रहा प्यार और कॉलेज जाने का डर चल रहा था, इसलिए मैं किसी एक पर ध्यान ना टिका सकी. ये जानते ही पति जी ने मेरे होंठो को चूमना छोड़ दिया और मेरे से अलग हो गये और मुझे उपर से नीचे तक देखने लगे. फिर पति जी ने कहा “ जया अपने कॉलेज ड्रेस को निकाल के बाजू मे रख दो. मेने पति जी की आज्ञा का पालन करते हुए अपने शर्ट और स्कर्ट को अपने जिस्म से निकाल के बाजू मे रख दिया और अब मैं भी पति जी की तरह बिल्कुल नंगी हो के अपनी गाड़ी मे बैठी थी. मेने अपने सिर को नीचे झुकाए पति जी के लंड को देख रही थी, तभी पति जी ने मेरे हाथो को अपने लंड के उपर रख दिया. फिर अपने हाथो से मेरे हाथो के उपर रख के लंड के उपर की चॅम्डी को नीचे से इपर करने लगे और कुछ देर के बाद अपने हाथो को मेरे हाथो के उपर से छोड़ दिया. मेने अपने आप पति जी के लंड के उपर की चॅम्डी को अपने हाथ उपर नीचे करने लगी.

लंड की उपर चॅम्डी को उपर नीचे करते हुए मेने देखा कि पति जी के लंड को नीचे करते वक़्त पति जी का लंड बिना चॅम्डी का हो जाता था. उनके लंड की चॅम्डी के नीचे का भाग काफ़ी गोरा था और वो कोई चिकन की बोटी जैसा था, मानो के चिकन लॉलीपोप जैसा. मुझे खाने चिकन लॉलीपोप बहुत पसंद था, इसलिए मेने पति जी से कहा “ पति जी आपका लंड तो एक दम चिकन लॉलीपोप के जैसा है” तो उस पर पति जी ने कहा “ हा जया रानी ये तुम्हारे लिए ही बना है. मेने तुम्हारी मम्मी से बात की थी के तुम्हे खाने मे क्या क्या पसंद है तो मुझे पता चला कि तुम्हे चिकन लॉलीपोप बहुत ही पसंद है. इसलिए मेने अपने लंड को कसरत करा के खास तुम्हारे लिए चिकन लॉलीपोप के जैसा बनाया है”. लंड को उपर नीचे करते हुए मेने पति जी से कहा “ आप को दर्द भी हुवा होगा जब आपने अपने लंड को सिर्फ़ मेरे लिए चिकन लॉलीपोप के जैसा बनाया”. पति जी ने कहा “ अरे मेरी जया रानी मेने तुम्हे पहले भी बताया था कि तुम्हारी ख़ुसी के लिए मैं कुछ भी कर सकता हू, ये तो बहुत ही मामूली चीज़ है”. मेरे दिल मे पति जी के लिए बहुत सा लगाव आ गया और मेने सीट पे से उठ के पति जी के पैरो को च्छू लिया. पति जी ने मुझे तुरंत ही मेरे कंधो से पकड़ के मुझे सीट पे लिटा दिया और खुद मेरे उपर लेट गये. पति जी ने मेरे बालो को अपने दोनो हाथो से पकड़ के उपर की ओर खिचा और मेरे होंठो को चूमने लगे.



मेने पति जी सीट पे से गिर ना जावे इस लिए अपने पैरो को फेलाते हुए पति जी के पैरो के लिए अपने पैरो के बीच मे जगह बना दी. थोड़ी देर तक होंठो को चूमने के बाद पति जी ने मेरे पैरो के बीच मे बैठ के मेरे दोनो पैरो को अपनी छाती के पास ले जाके रख दिया. अपने मोटे से लंड को मेरी चूत मे डाल दिया और मेरी कमर के दोनो बाजू को अपने हाथो से पकड़ के लंड और चूत की चुदाई शुरू कर दी. मेरे दोनो हाथ मेरे जिस्म के उपर थे, मेरे जिस्म मे बहुत सी आग लगी थी और पूरे जिस्म मे आग की लहरे दौड़ रही थी, इसलिए मेने अपने दोनो हाथो को मेरे सिर के पीछे ले जाके सीट के किनारे को पकड़ लिया. इधर मेरे ऐसा करने से ही पति जी लंड को चूत मे तेज़ी से अंदर बाहर करने लगे. मेरे जिस्म मे कुछ अजीब सा हो रहा था, इस वक़्त मे बस पति जी के लंड को मेरी चूत मे अंदर बाहर हो रहा था उसे ही महसूस कर रही थी. मेने हर वक़्त अहसास किया की लंड के अंदर जाते ही मेरी चूत मे हल्का दर्द हो ता है और लंड मेरी चूत की चॅम्डी को और अंदर करता हुवा अपने लिए जगह बना ने लगता था.

मैं ये सब सोच के पागल हो रही थी और मेरे पूरे जिस्म के उपर इस पागल पन का नासा छा रहा था. पति जी ने ये महसूस करते ही मेरे उपर झुक के मेरे होंठो को चूम के मुझे और पागल बना दिया. मेने तुरंत ही अपने जिस्म को कड़क करके अपनी चूत का पानी छोड़ दिया. पति जी ने मेरी चूत से पानी छूट ते ही लंड को बाहर निकाल दिया. पति जी ने तुरंत ही मेरी चूत के पास अपना मूह ले जाके मेरी चूत मे से निकले पानी को पी लिया और मेने अपने दोनो हाथो से उनके सिर को पकड़ के अपनी चूत मे और अंदर तक धकेल ने लगी. फिर पति जी ने खड़े होके कहा “ जया सुबह सुबह तुम्हारी जैसी कमसिन और नादान लड़की की चूत का पानी पीने का मज़ा ही कुछ अलग है. चलो अब तुम अपना कॉलेज ड्रेस पहेनॉ और हम तुम्हारी कॉलेज चलते है.

कॉलेज मे जाते ही दरवाजे पे खड़े चोकीदार ने दरवाजा खोला और गाड़ी अंदर जा पोहचि और मेने गाड़ी मे से बाहर निकल के पति जी को बाइ किया और अपने क्लास मे जा के बैठ गयी. रीसेसस होते ही मैं सीधे प्रिन्सिपल के ऑफीस मे जाके उनसे घर जाने की छुट्टी के लिए कहा. हमारे प्रिन्सिपल भी एक 55 साल के बुढ्ढे इंसान ही है. प्रिन्सिपल ने मुझे उपर से नीचे तक देखा और फिर कहा “ आज राज जी आए थे तुम्हे छोड़ने “ तो मेने कहा “ हा, वो हमारे घर के मालिक है, हम उनके घर के उपर के माले पे किराए के घर मे रहते है”. और प्रिन्सिपल ने मुझे घर जाने की इजाज़त दे दी. दोस्तो इस तरह मैं अपने पति के साथ अपनी ससुराल पहुच गई और हमने अपना खेल खेलना शुरू कर दिया जब मैं अठारह साल की हुई तो पति जी और मैने हमारी शादी की बात अपने मा बाप को बता दी पहले तो मम्मी पापा बहुत नाराज़ हुए लेकिन मेरी ज़िद के आगे वो मान गये अब मैं अपने पति राज शर्मा के साथ रहती हूँ और राज जी मेरी रोज चुदाई करते है मैं भी उनसे अपनी चूत गान्ड उछाल उछाल कर मरवाती हूँ
दोस्तो ये कहानी यही समाप्त होती फिर मिलेंगे एक और नई कहानी के साथ तब तक के लिए विदा आपका दोस्त राज शर्मा
समाप्त................................


raj..
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Re: मेरी बेकाबू जवानी

Unread post by raj.. » 12 Nov 2014 04:08


Meri Bekaabu jawaani--12


gataank se aage......

Date: 25-Jun-96. Thik rat ke 12 baje me pati ji ke gahr ke bahar khadi thi aur pati ji darvaje ke pass kisi se phone par bat karte sunai diye. Me unki bat sunke liye thori der vahi khadi rahi. Mene suna ko vo phone par kahe rahe the “ Are suno aaj ki rat ke liye ek double bed vala kamara book karna aur do insano ke liye khane pine ka bhi intejam karna, thik hai to hum karib 1 baje vaha pe aa jayenge, achha to me phone rakhata hu”. Me unki bate kan laga ke sun rahi thi aur pati ji ne kab darvaja khola aur mujhe piche se pakad liya aur mujhe pata hi nahi chala. Jab pati jji ne mujhe piche se pakad liya tab me ek dam se dar gayi aur pati ji ko jor se pakad liya. Pati ji ne mujhe baho me uthake bedroom me le gaye aur mene Kavita ji se aashirvad le liy aur bed pe jake let gayi. Mene dekha ke pati ji bedroom se bahar chale gaye aur karib 5 minat ke bad bedroom me aaye. Vo jab bedroom me aaye to unke hath me ek juice ka glass tha. Pati ji ne bed pe neri baju me aake baith ke, ek hath ko meri gardan me dal ke mujhe unke muh ki aur khich ke mere hontho ko chum liya aur juice ke glass ko mere hontho ke pass rakh ke use pine ka ishara kiya. Me sara juice pi gayi.

Pati ji ne mujhe bed pe lita diya aur khud mere upar let ke mere balo ko sehlate hue mere hontho ko chumne lage. Me madhos ho rahi thi, mere jism ki andar ek thandi hava ki lehar daud rahi thi aur use garam karne ke liye mene pati ji ke jism ko apne jism ke sath ragad ne lagi aur pati ji ke hontho ko chumne lagi. Kabhi kabhi me pati ji ke hontho ko jor se kat leti thi, kyunki mujse jism ki aag thandi nahi ho rahi thi. Us waqt pati ji ko aehsas ho gaya tha ki me kafi nase me hu, isliye unhone mujhe apne se dur kiya aur khud bed ke kinare jake khade ho gaye aur me bed pe nangi leti rahi. Vo mujhe vaha se gur ke dekh rahe the aur unki aankho me ek ajib si khichav thi ki me use rok nahi payi aur unke pass jane ke liye bed se utarne lagi. Bed se utar ne ke liye mene ek pair ko bahar kiya ki tabhi pati ji ne kaha “ Jayaa bed se utar ke nahi balke apne gutno ke bal bed pe chal ke mere pass aavo”. Me unki bat ka anadar nahi kar sakti thi isliye mene apne gutno ke bal hoke dhire dhire pati ji ke pass jane lagi. Pati ji ne kaha “ Jayaa aaj tum sach me ek jungli billi ki tarah lag rahi ho, tumhare jism ki andar aag bahar bhi dikh rahi hai, aur tumhari aankhe bhi bahut nasili aur kamukta se bahri hai, lagta hai aaj tum ko khuch alag tarike ka pyar karna padega”.

Me dhire dhire karke pati ji ke pahoch gayi aur jake unke pet ki nabhi ko chum liya aur dhire dhire karke unki chaatee aur gardan ko chumke unke hontho ko chumne lagi aur apne dono hatho ko unke balo me dal ke unhe apni aur khich ne lagi, lekin pati ji ne mujhe apne se aur dur karte hue Kavita ji ke photo ke pass chale gaye. Me bhi unki paltu kutiya ki tarah unke piche piche pati ji ke pass jake unhe pane jism se laga ke unki chaatee me muh chupake unke nipple ko chumne lagi. Unhone dono hatho ko mere sir ke balo me dal ke use dhire dhire gumane lage . Mano ke me ek nanhi bachhi hu is tarah vo mujhe pyar jata rahe the. Me unke is pyar bhare vyahar ko aur pane ke liye aur jor se unke jism ko apne jism ke sath daba diya aur mene unke nipple ko bhi kat diya.

Pati ji ne Kavita ji ke photo ki aur dekhte hue kaha “ Dekh Kavita aaj ye nanhi si bachhi ne mere pure jism ko sant kar diya aur mujhe koi sikyat ka muka bhi nahi deti, vake hi me yumne mere liye bhagvan se bade dil se prathna ki ke mujhe bilkul tumhari jaise hi patni mile. Halaki mene tumhare bhagvan ke pass jane ke bad bahut si ladkiyo se sex kiya hai, lekin vo sab mujhe santus karne me asafal rahi thi. Aaj barso bad tumhare kenhe par bhagvan ne meri sun li aur mere liye ek nadan, anhad, kamsin aur jism ki pyass se taras ti, nanhi si jan ko meri patni ke rup me mere samne pes kiya. Kavita tumhe yad hoga ki mene jab Mr Patel ko ye kar kiraye pe dene ke liye tumhe puchhha tha to tumne mujhe ek sanket diya tha ki jald hi mujhe ek nadan, apne se bado ka aadar karne vali aur sayad meri patni banne vali ladki milegi. Mene jab Mr Patel ke ghar ke logo ke bare me jana to mene socha ke unke family me to bas Jayaa hi hai jo meri patni ban sakti thi, kyunki Naz to pahle se hi sadi sudha thi. To mene tumhe Jayaa ke bare me pucha bhi tha to tumne kaha tha ki “ Raj ab tumhari zindagi badal ne vali hai aur Jayaa hi tumhari patni banegi aur vo hi tumhari zindagi me meri jagah le payegi”.

Mere chehre ko apne dono hatho me lete hue pati ji ne kaha “ Jayaa mene jab tumhe dekha tha to mene Kavita ko saf mana kar diya tha me is nanhi si jan ke sath jism ki pyass nahi buja paunga, lekin Kavita ne kaha “ Raj is ladki ko mene hi bheja hai aur tum iske sath kuch bhi karo ye tumhe kabhi bhi asantus nahi karegi aur tumhari jism ki pyass ko apne jivan ka kartvya bana ke rakhegi”. Is liye mene pehli hi bar me tumhare najuk hontho ko vhuma tha, kyunki me janta tha ki gav ki ladki ko jism ki pyass ke bare me adhik jan kari nahi hoti hai aur mene dhire dhire karke tumhe apne aur karib le aaya aur aaj dekho ke tum mere samne bilkul nangi khadi hoke apne jism ki pyass ko bujane ke liye mere sath lipat ke khadi ho. Jayaa me janta hu ke itni choti umar me lund ko chut me lena bahut kathin hai, Kavita bhi jab mrei patni bani thi vo 18 sal kit hi aur mene suhagrat me hi use ek nadan kali se phul bana diya tha aur vo jab bhagvan ke pass chali gayi to me bilkul adhura reh gaya”. Itna kehte hi pati ji ki aankho me se aansu bhara aa gaye. Mene unke chehre ko apne hatho me leke unki aankho ke pass apne nazuk hontho ko leje ke aansu ko pi liya aur pati ji ko apni chaatee me dono satn ko biche me rakh ke unke balo me hatho ko dal ke jor se daba diya. Meri aankho me bhi aansu aagye the aur mene halke se kaha “ Pati ji ab aap koi chinta mat karna, me aa chuki hu aapki zindagi me, aapke har dukh ko sukh me tabdil kar ne ke liye”.

Apne aansu ko pati ji ke balo me girt e hue dekh mene pati ji se kaha “ Me aapse ek vinti karti hu ke aap Kavita ji ke photo ko is kamare me se nikal ke bahar hall me rakh de, kyunki jab bhi aap unki tasvir ko dekh te hai ato aap bade bhavuk ho jate hai aur mujse ye dekha nahi jata. Me bas yahi chahti hu ki jis tarah aap mujhe har waqt khus rakh te hai to aap bhi har waqt khus raha kare”. Is par pati ji ne turant hi khade hoke mujhe dekh ne lage aur me dark e mare apni najar ko niche jukaye khadi rahi. Pati ji ne Kavita ji ke photo ke pass jake use dival pe se nikal ke almari me rakh diya. Me bahut khus ho gayi aur almari ke pass hi pati ji ko piche se pakda ke unki pith ko chumne lagi. Pati ji ne mujhe piche se aage karte hue mere hontho ko chuma aur apne dono hatho ko mere satn pe le jake use ke jos se dabane lage. Hum dono ek dusre ke jism pe bahut hi teji se hahto ko gumate hue hontho ko kat ne aur chumne lage.

Pati ji ne mujhe kamar se utha ke bed pe lita diya aur meri chut me apna lund dal ke mujhe chodne lage. Is bar kuch samay ke bad mujhe bhi maja aane laga aur mene bhi maja lene ke liye apne pairo ko pati ji ke kamar ke upar aur pati ji ki gan ke pass rakh diya. Lund jab bhi meri chut ke andar jata me apne pairo ko jor se pati ji ki gan ke upar daba ti thi aur lund ke bahar aate hi me unhe dhila chod deti thi. Mere aisa karne se pati ji kafi khus hue aur unhone lund ko teji se andar bahar karne lage. Meri chut ne ek bar pani chod diya aur usne pati ji ke lund ko bhiga diya. Lund meri chut ke pani se bhigte hi aur andar tak jane laga aur hum dono ko kafi maja aane laga aur hum don one kafi lambe waqt take k dusre ko chod te rahe. Aur hum dono ek dusre ki bhao me nange hi so gaye.

Pati ji ne mujhe subah ko uthaya aur me apne ghar chali gayi. Mene ghar jake fresh hoke collge ke liye nikal padi. Jaise hi me pati ji ke ghar me gusne vali thi ke pati ji ne mujhe pakad ke chumne lage aur hum dono ek dusre ko der tak chumte rahe. Pati ji ne mujhe kaha “ Jayaa aaj me tumhe collge chodne aaunga, tumhari nayi gadi me”. Mene dekha ki pati ji ne apne jism ke upar ek kapda bhi nahi pahana tha, to mene aashrya se pati ji ki aur dekhate hue pucha ki “ Pati ji aap to bilkul nange hai aur mujhe college chodne aayenge”. Is par pati ji ne kaha “ Are meri pagli hum dono to parking me se sidhe gadi me baith ke collge ke liye chale jayenge to usme kapde ki kya zarurt, aur tumhe pata nahi hai is gadi me andar kaun baitha hai vo bahar se nahi dikhata aur mujhe thori hi college jana hai”. Aur itna kehte hi pati ji ne mere hath ko pakad ke mujhe parking me gadi ke pass le jake gadi chalu karke collge ke liye nikal pade. Mere ghar se college jane ke liye karib paidel 20 minat lagte hai, lekin mene dekha ki pati ji ne gadi ko kisi aur raste se le li, halaki mujhe Surat City ke raste ke bare me jyada jankari nahi thi is liye me chup baithi rahi.

Ek bada sa road aaya, jis ke upar kuch gadiya hi daud rahi thi. Pati ji ne gadi ko ek chote se bagiche ke pass jake khadi kar diya. Unhone mujhe piche ki seat pe jane ke liye ishara kiya aur khud bhi piche ki seat pe aake mere baju right side me baith gaye. Unhone apne left hath ko meri gardan me dal diya aur mere hontho ko chumne lage. Phir thori der ke bad unhone meri college ke dress ke shirt ke pahle button ko apne right hath se khola aur meri gardan ke pass jake vaha se chumte hue niche jane lage. Unke aisa karte hi mene apne dono hatho se unke chehre ko pakad ke upar kiya aur unse dhimi aavaz me kaha “ Pati ji aap mujhe nanga mat kijiye, mujhe collge ke liye jana hai”. Pati ji ne mujhe gusse bhari aankho se dekha, me bahut dar gayi thi. Unhone mera kehna ansuna kiya aur jaha ruke the vahi se chumna suru kiya. Pati ji ne dhire dhire mere shirt ke sare button ko khola aur har button ke kholne par us ke niche nange jism ko chuma. Unhone mere shirt ko apne dono hatho se mere stan ke upar se hata diya aur mere dono stan ko apne hatho se daba diya, men eek siskari li aur apne jism ko dhila chod diya.

Pati ji to pahle se hi nange the, isliye jaise hi vo mere hontho ko chumne ke liye mere upar juke, unka lund meri skirt ke upar lagne laga. Unke lund ke upar thoda sa pani aa gaya tha, jis ne mere skirt ko thoda sa gila kar diya. Mene ye mehsus karte hi apne hatho se skirt ko hatate hue lund ko chut ke pass le jake rakh diya. Mere man me to Pati ji ke davra kiya ja raha pyar aur college jane ka dar chal raha tha, isliye me kisi ek par dhyan na taka saki. Ye jante hi Pati ji ne mere hontho ko chumna chod diya aur mere se alag ho gaye aur mujhe upar se niche tak dekhne lage. Phir pati ji ne kaha “ Jayaa apne college dress ko nikal ke baju me rakh do. Mene pati ji ki aagna ka palan karte hue apne shirt aur skirt ko apne jism se nikal ke baju me rakh diya aura b me bhi pati ji ki tarah bilkul nangi ho ke apni gadi me baithi thi. Mene apne sir ko niche jukaye pati ji ke lund ko dekh rahi thi, tabhi pati ji ne mere hatho ko apne lund ke upar rakh diya. Phir apne hatho se mere hatho ke upar rakh ke lund ke upar ki chamdi ko niche se ipar karne lage aur kuch der ke bad apne hatho ko mere hahto ke upar se chod diya. Mene apne aap pati ji ke lund ke upar ki chamdi ko apne hath upar niche karne lagi.

Lund ki upar chamdi ko upar niche karte hue mene dekha ki pati ji ke lund ko niche karte waqt pati ji ka lund bina chamdi ka ho jata tha. Unke lund ki chamdi ki niche ka bhag kafi gora tha aur vo koi chicken ki boti jaisa tha, mano ke chicken lollypop jaisa. Mujhe khane chicken lollypop bahut pasand tha, isliye mene pati ji se kaha “ Pati ji aapka lund to ek dam chicken lollypop ke jaisa hai” to us par pati ji ne kaha “ Ha Jayaa rani ye tumhare liye hi bana hai. Mene tumhari mummy se bat ki thi ke tumhe khane me kya kya pasand hai to mujhe pata chala ki tumhe chicken lollypop bahut hi pasan hai. Isliye mene apne lund ko kasarat kara ke khas tumhare liye chicken lollypop ke jaisa banaya hai”. Lund ko upar niche karte hue mene pati ji se kaha “ Aap ko dard bhi huva hoga jab aapne apne lund ko sirf mere liye chicken lollypop ki jaisa banaya”. Pati ji ne kaha “ Are meri Jayaa rani mene tumhe pahle bhi bataya tha ki tumhari khusi ke liye me kuch bhi kar sakta hu, ye to bahut hi mamuli chij hai”. Mere dil me pati ji ke liye bahut sa lagav aa gaya aur mene seat pe se uth ke pati ji ke pairo ko chhu liya. Pati ji ne mujhe turant hi mere kandho se pakad ke mujhe seat pe lita diya aur khud mere upar let gaye. Pati ji mere balo ko apne dono hatho se pakad ke upar ki aur khicha aur mere hontho ko chumne lage.


Mene pati ji seat pe se gir na jave is liye apne pairo ko felate hue pati ji ke pairo ke liye apne pairo ke bich me jagah bana di. Thori der tak hontho ko chumne ke bad pati ji ne mere pairo ke bich me baith ke mere dono pairo ko pani chaatee ke pass le jake rakh diya. Apne mote se lund ko meri chut me dal diya aur meri kamar ke dono baju ko apne hatho se pakad ke lund aur chut ki chudai saru kar di. Mere dono hath mere jism ke upar the, mere jism me bahut si aag lagi thi aur pure jism me aag ki lahre daud rahi thi, isliye mene apne dono hatho ko mere sir ke piche le jake seat ke kinare ko pakad liya. Idhar mere aisa karne se hi pati ji ne lund ko chut me teji se nadir bahar karne lage. Mere jism me kuch ajib sa ho raha tha, is waqt me bas pati ji ke lund ko meri chut me andar bahr ho raha tha use hi mehsus kar rahi thi. Mene har waqt aehsas kiya ki lund ke andar jate hi meri chut me halka dard ho ta hai aur lund meri chut ki chamdi ko aur andar karta huva apne liye jagah bana ne lagta tha.

Me ye sab soch ke pagal ho rahi thi aur mere pure jism ke upar is pagal pan ka nasa cha raha tha. Pati ji ne ye mehsus karte hi mere upar juk ke mere hontho ko chum ke mujhe aur pagal bana diya. Mene turant hi apne jism ko kadak karke apni cut ka pani chod diya. Pati ji ne meri chut se pani chut te hi lund ko bahar nikal diya. Pati ji ne turant hi meri chut ke pass apna muh le jake meri chut me se nikale pani ko pi liya aur mene apne dono hahto se unke sir ko pakad ke apni chut me aur andar tak dhakel ne lagi. Phir pati ji ne khade hoke kaha “ Jayaa subah subah tumhari jaisi kamsin aur nadan ladki ke chut ka pani pine ka maja hi kuch alag hai. Chalo ab tum apna college dress peheno aur hum tumhari college chalet hai.

College me jate hi darvaje pe khade chokidar ne darvaja khola aur gadi andar ja pohachi aur mene gadi me se bahar nikal ke pati ji ko bye kiya aur apne class me ja ke baith gayi. Recesses hote hi me sidhe principal ke office me jake unse ghar jane ki chutti ke liye kaha. Hamare principal bhi ek 55 sal ke budhhe insane hi hai. Principal ne mujhe upar se niche tak dekha aur phir kaha “ Aaj Raj ji aaye the tumhe chodne “ to mene kaha “ Ha, vo hamare ghar ke malik hai, hum unke ghar ke upar ke male pe kiraye ke ghar me rehte hai”. Aur principal ne mujhe ghar jane ki ijajat de di.

samaapt.......................

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