बात एक रात की compleet

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rajaarkey
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Re: बात एक रात की

Unread post by rajaarkey » 11 Dec 2014 03:53

raj sharma stories

बात एक रात की--13

गतान्क से आगे.................

"नगमा ये काम अच्छे से कर सकती है, ब्यूटी पार्लर में काम करती है वो. वो पूरा लुक चेंज कर देगी आपका" राज ने कहा.

"ये ठीक रहेगा" मोहित ने कहा

"ठीक है...लेकिन उसके लिए भी तो बाहर तो जाना ही पड़ेगा" पद्‍मिनी ने कहा.

"मैं उसे यही बुला लाउन्गा...उसका बापू यहा नही है...उसे आने में कोई दिक्कत नही होगी"

"ह्म.....जल्दी करो फिर" पद्‍मिनी ने कहा.

राज ने नगमा को पूरी कहानी बताई और उसे उनकी मदद करने के लिए मना लिया.

"तू ये सब क्यों कर रहा है, तेरा दिल तो नही आ गया उस लड़की पर"

"ऐसा कुछ नही है...मुसीबत में फँसी लड़की की कौन मदद नही करेगा" राज ने कहा.

"तेरे जैसा दिल फेंक ऐसी बाते करता है हा" नगमा ने कहा.

"जब से तुझ से काँटा भिड़ा है कसम से कहीं और नही घुसाया मैने अपना लंड" राज ने कहा.

"तो फिर कहा घुसाया है" नगमा ने पूछा.

"अभी कल रात ही तो तेरी गान्ड मारी थी, दुबारा घुस्सा के दिखाउ क्या" राज ने नगमा के बूब्स को मसल्ते हुए कहा.

"चल छ्चोड़ हर वक्त तुझे यही सूझता है"

"अरे हां नगमा एक बात और कहनी थी" राज ने कहा.

"अब क्या है?"

"एक और मदद करनी होगी तुझे मेरी"

"बताओ और क्या करूँ अपने राज के लिए मैं."

"तुझे एक रात के लिए भोलू हवलदार के पास रुकना होगा"

"अपने गुरु के आगे तो पारोष चुके हो मुझे, शरम नही आती तुम्हे मैं क्या कोई रंडी हूँ"

"पागल हो क्या बस एक बार की बात है, तुझे ये काम करना ही होगा"

"मैं ऐसा कुछ नही करूँगी"

"गुरु को भी तो दी थी तूने, और एक बार की ही तो बात है"

"शकल देखी है तूने उसकी उसके साथ तो कोई कुतिया भी ना करे, मेरी तो बात ही दूर है"

"अब उस से कुछ काम निकलवाया है तो कीमत तो उसे चुकानी ही पड़ेगी"

"मैं सोच कर बताउन्गि, पहले तू मुझे तेरा पहला काम करने दे"

"ठीक है सोच लो...करना तो तुझे पड़ेगा ही...तू मज़े करना...उसकी शकल देखना ही मत आँखे बंद रखना"

"ह्म्म तू बहुत कमीना है"

"क्यों गुरु जे जब तेरी मारी थी मज़ा नही आया था क्या तुझे"

"हां तो मज़े के लिए किसी के भी आगे झुक जाउ मैं...मेरा भी स्टॅंडर्ड है"

"क्या बात है, वो तो है...बस एक बार मेरी बात मान ले फिर कभी ऐसा करने को नही

कहूँगा"

"ठीक है, कब करना होगा मुझे काम ये. सिर्फ़ आज का दिन और रात है मेरे पास, कल बापू आ जाएगा"

"भोलू भी आज के लिए ही बोल रहा था, तू रात 9 बजे पहुँच जाना उसके पास"

"चल ठीक है, तेरे लिए एक बार और सही"

"वाह-वाह जैसे तुझे तो मज़ा लेना ही नही"

"भोलू से मज़ा लेने का मैं सोच भी नही सकती ओके...ये काम मैं बस तुम्हारे लिए करूँगी"

"चल ठीक है अब सारा समान उठा ले और जल्दी चल मेरे साथ."

"ठीक है...बस 10 मिनट में चलते हैं."

"तेरी सेक्सी बहन कहा है आज"

"कॉलेज गयी है वो"

"बड़ी जल्दी चली गयी आज"

"तुम्हे क्या करना उसका"

"जवानी फूट रही है उसकी, इस से पहले कि कोई और हाथ मार जाए मुझे कुछ करना होगा"

"चुप कर और चल अब"

"तुम दौनो बहनो की एक साथ लूँगा कभी"

"ज़्यादा सपने मत देख और चल अब, मैं तैयार हूँ."

नगमा अपना सारा समान ले कर राज के साथ मोहित के कमरे पर आ जाती है. मोहित और राज नगमा को पद्‍मिनी के पास छोड़ कर बाहर आ जाते हैं.

"ह्म्म तो आप हो पद्‍मिनी, बहुत सुंदर हो" नगमा ने पद्‍मिनी को देख कर कहा.

"तुम भी कम नही हो तभी तो......" पद्‍मिनी ने हंस कर कहा.

"तभी तो मतलब!"

"कुछ नही तुम अपना काम सुरू करो" पद्‍मिनी ने कहा

"ये सब मैं राज के लिए कर रही हूँ वरना यहा कभी नही आती मैं"

"राज के लिए तुम कुछ भी कर लेती हो" पद्‍मिनी ने पूछा.

"हां तो मेरा बहुत अच्छा दोस्त है वो"

"मैं अच्छे से जानती हूँ की कितना अच्छा दोस्त है वो तुम्हारा, शोषण कर रहा है वो तुम्हारा"

"हा...हा...हे..हे मेरा सोसन और राज...हो ही नही सकता"

"उसने तुम्हे अपने गुरु मतलब मोहित के साथ.....तुम जानती हो मैं क्या कह रही हूँ"

"राज की बात बताउ"

"हां बोलो" पद्‍मिनी ने कहा

"बहुत मज़े किए थे मैने मोहित के साथ. राज की तरह उसका भी मोटा तगड़ा लंड है...बहुत अच्छे से मारी थी उसने मेरी गान्ड, हां बस थोड़ी देर बहुत दर्द हुआ था पर बाद में तो मज़ा ही मज़ा था"

"छी... तुम्हे शरम नही आती ऐसी बाते करते हुए" पद्‍मिनी ने कहा.

"शरम तो लड़को से की जाती है तुझ से क्या शरम क्या तुम मज़ा नही लेती लंड का"

"मैं शादी शुदा हूँ, मुझे तेरे जैसी लत नही है"

"ह्म्म तो क्या हुआ तेरा मर्द तो अच्छे से मारता होगा ना तेरी"

"मैं अपने पति को छोड़ चुकी हूँ, अपने मायके में हूँ" पद्‍मिनी ने कहा.

"फिर कैसे काम चलता है तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड तो होगा ही"

"नही कोई नही है, तुम अपना काम करो अब"

"काम भी हो जाएगा, अच्छा ये तो बता कि कितना बड़ा था तेरे मर्द का"

"तुझे उस से क्या मतलब? तू जल्दी काम शुरू कर हमे देर हो रही है"

"मुझे आदमियों के लंड के बारे में सुन-ना अच्छा लगता है"

"तो मैं क्या करूँ?"

"आप तो नाराज़ हो गयी...मैं तो बस यू ही मज़ाक कर रही हूँ"

"सादे पाँच इंच था उनका...अब काम शुरू करें"

"बस सादे पाँच इंच, उतने से तेरा क्या होता होगा" नगमा ने हंस कर कहा.

"मेरे लिए बहुत था वो....हँसो मत"

"हां पर सादे पाँच इंच गहराई तक नही पहुँच पाएगा" नगमा ने चुटकी ली.

"साइज़ डज़ नोट मॅटर ओके"

"अँग्रेज़ी मुझे नही आती सिर्फ़ सातवी तक पढ़ी हूँ, हां मेरी छोटी बहन कॉलेज में है वो खूब सीख गयी है अँग्रेज़ी" नगमा ने कहा.

मैने कहा छोटे बड़े से कुछ फरक नही पड़ता"

"तुम्हे कैसे पता तुमने क्या दौनो तरह के लिए है चूत में"

"हे भगवान तू लड़की है विस्वास नही होता"

"बता तो क्या तूने दोनो लिए है अंदर"

"नही मैने बस अपने पति से किया है मैं तुम्हारे जैसी नही हूँ" पद्‍मिनी ने कहा.

"फिर तुम कैसे इतने विस्वास से कह सकती हो" नगमा ने कहा.

"मैं इस बारे में और बात नही करना चाहती" पद्‍मिनी ने कहा.

"एक बात तो सुन" नगमा ने हंसते हुए कहा.

"अब क्या है?"

"मैने दोनो ट्राइ किए है. राज से पहले मेरा टांका दिनेश से था. तेरे पति जितना ही था उसका. जब तक मैने राज का नही लिया तब तक मुझे भी नही पता था कि बड़े लंड का क्या मज़ा है."

"ये सब बकवास है...अब तुम काम शुरू करती हो या नही" पद्‍मिनी ने कहा.

"करती हूँ बाबा करती हूँ....."

नगमा आख़िर अपना काम शुरू कर देती है. पर बीच बीच में कुछ ना कुछ बोलती रहती है.

"देखो मैं तो अपना काम कर दूँगी, पर जो तुम्हे बहुत अच्छे से जानता है वो तुम्हे हर हाल में पहचान लेगा" नगमा ने कहा.

"पोलीस तो मुझे अच्छे से नही जानती...बस वो ना पहचान पाए"

"उनकी चिंता नही है, जिसने तुम्हे बहुत बार देखा हो वही तुम्हे पहचान पाएगा किसी और के बस की बात नही. वैसे भी पोलीस के पास तुम्हारी फोटो है जो कि टीवी पर दीखाई जा रही है. उस फोटो को देख कर कोई नही पहचान पाएगा तुम्हे"

"ह्म्म फिर ठीक है" पद्‍मिनी ने कहा

"अरे मुझे याद आया, मुझे भी एक पोलीस वाले के पास जाना है आज, काश मैं भी बच पाती"

"क्यों तुम्हे तो मज़ा लेने का शौक है, बचना क्यों चाहती हो" पद्‍मिनी ने कहा.

"तो क्या तुम्हे सब पता है कि मैं भोलू के पास जाउन्गि आज?" नगमा ने पूछा.

"हां" पद्‍मिनी ने जवाब दिया.

क्रमशः..............................

BAAT EK RAAT KI--13

gataank se aage.................

"nagma ye kaam achche se kar sakti hai, beauty parlour mein kaam karti hai vo. Vo pura look change kar degi aapka" Raj ne kaha.

"ye theek rahega" mohit ne kaha

"theek hai...lekin uske liye bhi to baahar to jaana hi padega" padmini ne kaha.

"main use yahi bula laaunga...uska bapu yaha nahi hai...use aane mein koi dikkat nahi hogi"

"hmm.....jaldi karo phir" padmini ne kaha.

Raj ne Nagma ko puri kahaani bataayi aur use unki madad karne ke liye mana liya.

"tu ye sab kyon kar raha hai, tera dil to nahi aa gaya us ladki par"

"aisa kuch nahi hai...musibat mein phansi ladki ki kaun madad nahi karega" Raj ne kaha.

"tere jaisa dil fenk aisi baate karta hai huh" nagma ne kaha.

"jab se tujh se kaanta bhida hai kasam se kahin aur nahi ghusaya maine apna lund" Raj ne kaha.

"to phir kaha ghusaaya hai" nagma ne pucha.

"abhi kal raat hi to teri gaanD maari thi, dubara ghussa ke dikhaaun kya" Raj ne nagma ke boobs ko masalte hue kaha.

"chal chhod har vakt tujhe yahi sujhta hai"

"arey haan nagma ek baat aur kahni thi" Raj ne kaha.

"ab kya hai?"

"ek aur madad karni hogi tujhe meri"

"bataao aur kya karun apne Raj ke liye main."

"tujhe ek raat ke liye bholu hawaldaar ke paas rukna hoga"

"apne guru ke aage to parosh chuke ho mujhe, sharam nahi aati tumhe main kya koi randi hun"

"paagal ho kya bas ek baar ki baat hai, tujhe ye kaam karna hi hoga"

"main aisa kuch nahi karungi"

"guru ko bhi to di thi tune, aur ek baar ki hi to baat hai"

"shakal dekhi hai tune uski uske saath to koi kutiya bhi na kare, meri to baat hi dur hai"

"ab us se kuch kaam nikalwaaya hai to keemat to use chukaani hi padegi"

"main soch kar bataaungi, pehle tu mujhe tera pahla kaam karne de"

"theek hai soch lo...karna to tujhe padega hi...tu maje karna...uski shakal dekhna hi mat aankhe band rakhna"

"hmm tu bahut kamina hai"

"kyon guru je jab teri maari thi maja nahi aaya tha kya tujhe"

"haan to maje ke liye kisi ke bhi aage jhuk jaaun main...mera bhi standard hai"

"kya baat hai, vo to hai...bas ek baar meri baat maan le phir kabhi aisa karne ko nahi

kahunga"

"theek hai, kab karna hoga mujhe kaam ye. Sirf aaj ka din aur raat hai mere paas, kal bapu aa jaayega"

"bholu bhi aaj ke liye hi bol raha tha, tu raat 9 baje pahunch jaana uske paas"

"chal theek hai, tere liye ek baar aur sahi"

"vaah-vaah jaise tujhe to maja lena hi nahi"

"bholu se maja lene ka main soch bhi nahi sakti ok...ye kaam main bas tumhaare liye karungi"

"chal theek hai ab saara samaan utha le aur jaldi chal mere saath."

"theek hai...bas 10 minat mein chalte hain."

"teri sexy bahan kaha hai aaj"

"college gayi hai vo"

"badi jaldi chali gayi aaj"

"tumhe kya karna uska"

"jawaani phoot rahi hai uski, is se pahle ki koi aur haath maar jaaye mujhe kuch karna hoga"

"chup kar aur chal ab"

"tum dauno bahno ki ek saath lunga kabhi"

"jyada sapne mat dekh aur chal ab, main taiyaar hun."

nagma apna sara samaan le kar Raj ke saath mohit ke kamre par aa jaati hai. Mohit aur Raj nagma ko padmini ke paas chod kar baahar aa jaate hain.

"hmm to aap ho padmini, bahut sunder ho" nagma ne padmini ko dekh kar kaha.

"tum bhi kam nahi ho tabhi to......" padmini ne hans kar kaha.

"tabhi to matlab!"

"kuch nahi tum apna kaam suru karo" padmini ne kaha

"ye sab main Raj ke liye kar rahi hun varna yaha kabhi nahi aati main"

"Raj ke liye tum kuch bhi kar leti ho" padmini ne pucha.

"haan to mera bahut achcha dost hai vo"

"main achche se jaanti hun ki kitna achcha dost hai vo tumhaara, sosan kar raha hai vo tumhaara"

"ha...ha...he..he mera sosan aur Raj...ho hi nahi sakta"

"usne tumhe apne guru matlab mohit ke saath.....tum jaanti ho main kya kah rahi hun"

"raaj ki baat bataaun"

"haan bolo" padmini ne kaha

"bahut maje kiye the maine mohit ke saath. Raj ki tarah uska bhi mota tagda lund hai...bahut achche se maari thi usne meri gaanD, haan bas thodi der bahut dard hua tha par baad mein to maja hi maja tha"

"chi... tumhe sharam nahi aati aisi baate karte hue" padmini ne kaha.

"sharam to ladko se ki jaati hai tujh se kya sharam kya tum maja nahi leti lund ka"

"main shadi shuda hun, mujhe tere jaisi lat nahi hai"

"hmm to kya hua tera mard to achche se maarta hoga na teri"

"main apne pati ko chod chuki hun, apne maayke mein hun" padmini ne kaha.

"phir kaise kaam chalta hai tumhaara koi boyfreind to hoga hi"

"nahi koi nahi hai, tum apna kaam karo ab"

"kaam bhi ho jaayega, achcha ye to bata ki kitna bada tha tere mard ka"

"tujhe us se kya matlab? Tu jaldi kaam shuru kar hame der ho rahi hai"

"mujhe aadmiyon ke lund ke baare mein sun-na achcha lagta hai"

"to main kya karun?"

"aap to naraaj ho gayi...main to bas yu hi majaak kar rahi hun"

"saade paanch inch tha unka...ab kaam shuru karein"

"bas saade paanch inch, utne se tera kya hota hoga" nagma ne hans kar kaha.

"mere liye bahut tha vo....hanso mat"

"haan par saade paanch inch gahraayi tak nahi pahunch paayega" nagma ne chutki li.

"size does not matter ok"

"angreji mujhe nahi aati sirf saatvi tak pahi hun, haan meri choti bahan college mein hai vo khub sikh gayi hai angreji" nagma ne kaha.

Maine kaha chote bade se kuch farak nahi padta"

"tumhe kaise pata tumne kya dauno tarah ke liye hai chut mein"

"hey bhagvaan tu ladki hai viswaas nahi hota"

"bata to kya tune daono liye hai ander"

"nahi maine bas apne pati se kiya hai main tumhaare jaisi nahi hun" padmini ne kaha.

"phir tum kaise itne viswaas se kah sakti ho" nagma ne kaha.

"main is baare mein aur baat nahi karna chaahti" padmini ne kaha.

"ek baat to shun" nagma ne hanste hue kaha.

"ab kya hai?"

"maine daono try kiye hai. Raj se pahle mera taanka dinesh se tha. Tere pati jitna hi tha uska. Jab tak maine Raj ka nahi liya tab tak mujhe bhi nahi pata tha ki bade lund ka kya maja hai."

"ye sab bakwaas hai...ab tum kaam shuru karti ho ya nahi" padmini ne kaha.

"karti hun baba karti hun....."

nagma aakhir apna kaam shuru kar deti hai. Par beech beech mein kuch na kuch bolti rahti hai.

"dekho main to apna kaam kar dungi, par jo tumhe bahut achche se jaanta hai vo tumhe har haal mein pahchaan lega" nagma ne kaha.

"police to mujhe achche se nahi jaanti...bas vo na pahchaan paaye"

"unki chinta nahi hai, jisne tumhe bahut baar dekha ho vahi tumhe pahchaan paayega kisi aur ke bas ki baat nahi. Vaise bhi police ke paas tumhaari photo hai jo ki tv par deekhaayi ja rahi hai. Us photo ko dekh kar koi nahi pahchaan paayega tumhe"

"hmm phir theek hai" padmini ne kaha

"arey mujhe yaad aaya, mujhe bhi ek police wale ke paas jaana hai aaj, kaas main bhi bach paati"

"kyon tumhe to maja lene ka sonk hai, bachna kyon chaahti ho" padmini ne kaha.

"to kya tumhe sab pata hai ki main bholu ke paas jaaungi aaj?" nagma ne pucha.

"haan" padmini ne jawaab diya.

Kramashah..............................

rajaarkey
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Re: बात एक रात की

Unread post by rajaarkey » 11 Dec 2014 03:54

raj sharma stories

बात एक रात की--14

गतान्क से आगे.................

"बहुत खराब है ये राज मुझे बदनाम करने पे तुला है...वैसे तुम्हारे कारण करना होगा मुझे उसके साथ" नगमा ने कहा.

"तो क्या हुआ एक और साइज़ आजमा लेना, तेरा क्या बिगड़ेगा...तुझे तो लत है इस सब की""

"तुम अगर भोलू को देखोगी तो तुम्हे पता चलेगा कि इतना आसान नही है ये काम"

"तो रहने दे" पद्‍मिनी ने कहा

"मैं राज के लिए करूँगी"

"वाह-वाह ये खूब रही...यकीन नही होता"

"देखो बहुत भद्दा है वो भोलू, मेरा बिल्कुल मन नही है उसे देने का"

"ह्म्म फिर रहने दो ना."

"नही मुझे राज के लिए जाना होगा. और क्या पता उसका लंड भी तगड़ा हो. आँखे मीच कर कर लूँगी"

"आ गयी ना हक़ीकत ज़ुबान पे"

"देखो जब मुझे ये काम करना ही है तो थोड़ा अपने मज़े के बारे में तो सोचूँगी ही"

"अभी फिलहाल अपने यहा के काम पे ध्यान दे" पद्‍मिनी ने कहा.

"मेरा पूरा ध्यान है यहा, थोड़ा मूह उपर करो...वैसे एक बात है"

"अब क्या है?"

"तुम्हारी चुचियाँ मुझ से बड़ी हैं, आदमी तो मरते होंगे इन चुचियों पर"

"चुप कर" पद्‍मिनी ने गुस्से में कहा

"पर मैं सच कह रही हूँ, अगर मैं लड़का होती तो अभी इन्हे बाहर निकाल कर खूब चूस्ति"

"हे भगवान यू आर टू मच..." पद्‍मिनी ने कहा.

"क्या कहा आपने"

"कुछ नही यही की मुझे देर हो रही है"

"बस हो गया काम, 15 मिनट और लगेंगे इन बालो को ध्यान से करना होगा"

"ह्म्म जल्दी करो"

थोड़ी देर नगमा चुप रही फिर अचानक बोली, "राज बहुत अच्छे से चूस्ता है मेरे निपल"

"तो मैं क्या करूँ, मैं भी चुस्वा लूँ क्या जाकर उस से"

"नही-नही मैने ऐसा तो नही कहा...आप ऐसा सोचना भी मत राज सिर्फ़ मेरा है"

"अपने राज को अपने पास रख मुझे कोई शौक नही है"

"मोहित आपके लिए ठीक रहेगा बहुत मोटा लंड है उसका भी, बिल्कुल राज की तरह पर मुझे पता नही कि उसे चुचियाँ चूसनी आती है की नही, अभी तक एक बार ही मिली हूँ उस से. उसने बिना कुछ किए मेरी गान्ड में डाल दिया था. दुबारा कोई मोका नही मिला उस से मिलने का"

"तुम्हे कोई और बात भी सूझती है इन बातो के अलावा"

"मुझे बस अपने राज की चिंता है, उस से दूर रहना, बहुत सुंदर हो तुम कहीं मेरा राज बहक जाए."

"अरे मेरी मा मुझे तेरे राज से कुछ लेना देना नही है और ना ही मोहित से कुछ लेना देना है. मैं यहा मजबूरी में फँसी हूँ और तुम ऐसी बाते कर रही हो"

"फिर ठीक है"

उसके बाद नगमा ने कोई बात नही की और चुपचाप अपने काम में लगी रही. जब काम ख़तम हो गया तो वो बोली, " लो हो गया तुम्हारा हुलिया चेंज, कोई नही पहचान पाएगा तुम्हे अब"

पद्‍मिनी ने खुद को शीसे में देखा और बोली, "बहुत बढ़िया, मैं तो खुद को पहचान ही नही पा रही हूँ"

"सब मेरा कमाल है"

"थॅंक यू नगमा इस सबके लिए"

"कोई बात नही...मुझे माफ़ करना मैं बात बहुत करती हूँ"

"वो तो ठीक है पर तुम्हारी बाते बहुत गंदी थी...मुझे अच्छा नही लगा"

ये सुन कर नगमा का चेहरा उतर गया और बोली, "ठीक है मैं चलती हूँ. भगवान आपको जल्द से जल्द आपको इस मुसीबत से निकाले"

"थॅंक यू" पद्‍मिनी ने कहा

नगमा के जाने के बाद मोहित और राज कमरे में वापिस आ जाते हैं. मोहित पद्‍मिनी को देख कर कहता है, "बहुत खूब, तेरी नगमा ने तो सच में हुलिया चेंज कर दिया"

"मुझे यकीन था कि नगमा ये काम कर सकती है" राज ने कहा.

"चला जाए फिर अब"

"हां बिल्कुल, मैने कार अरेंज कर ली है" मोहित ने कहा.

कुछ देर बाद पद्‍मिनी, मोहित और राज कार में थे, मोहित ड्राइव कर रहा था, राज उसके बगल में बैठा था और पद्‍मिनी पिछली सीट पर बैठी थी. कार अपनी मंज़िल की ओर बढ़े जा रही थी.

"तुझे पता है ना रास्ता" मोहित ने राज से पूछा.

"हां गुरु अभी सीधा चलो आगे जो गली आएगी उसी में है उसका घर" राज ने कहा.

"ह्म्म कॅटा कहा है" मोहित ने पूछा.

"मेरे पास है, चिंता मत करो" राज ने कहा.

"ध्यान रखना कहीं चल जाए ये देसी बंदूक बहुत ख़तरनाक होती है" मोहित ने कहा.

"तुम लोग बंदूक साथ लाए हो!" पद्‍मिनी ने हैरानी मे पूछा.

"हां मेडम ख़तरनाक कातिल है वो, हमे भी तो कुछ रखना होगा, क्या पता ज़रूरत पड़ जाए"

"हां पद्‍मिनी जी गुरु ठीक कह रहा है, ये देसी कॅटा बहुत काम आएगा"

"ठीक है जैसा तुम ठीक समझो" पद्‍मिनी ने कहा.

"गुरु बस मोड़ लो इस गली में" राज ने कहा.

जैसे ही मोहित ने कार को गली में मोड़ा राज बोला, "वो रहा उसका घर जहा 2 आदमी खड़े हैं"

"ये दोनो पोलीस वाले लगते हैं मुझे"

"ठीक कहा गुरु ये पोलीस वाले ही हैं"

"अब हम क्या करेंगे" पद्‍मिनी ने कहा.

"मैं ये लेटर लाया हूँ, मैं कौरीएर वाला बन कर जाउन्गा और उसे बाहर बुलाउन्गा साइन के लिए आप पहचान-ने की कोशिस करना कि वो वही है की नही"

"ये विटनेस उस के अलावा और कौन हो सकता है ये बिल्कुल वही है" पद्‍मिनी ने कहा

"वो तो है फिर भी एक बार उसे देख तो ले" मोहित ने कहा.

"अगर वो बाहर नही आया तो" पद्‍मिनी ने कहा.

"अपना लेटर रिसेव करने तो वो आएगा ही, राज जैसे मैने समझाया है वैसे ही करना"

"ठीक है गुरु" राज ने कहा.

राज कार से उतर कर एक लेटर हाथ में लेकर उस घर की तरफ बढ़ता है.

"श्री सुरिंदर जी यही रहते हैं?" राज ने सिविल कपड़े पहने पोलीस वाले से पूछा.

"हां यही रहते हैं वो, क्या काम है?"

"उनका कौरीएर है बुला दीजिए उन्हे रिसेव करना होगा ये"

पोलीस वाले ने घर की बेल बजाई. थोड़ी देर बाद एक आदमी बाहर निकला.

"आप ही सुरिंदर हो?" राज ने पूछा.

"हां बोलो क्या बात है?"

"आपका करियर है यहा साइन कर दीजिए" राज ने एक कागज उसकी ओर बढ़ा कर कहा.

दूर से पद्‍मिनी ने उस आदमी को देखा और तुरंत बोली, "ये वो नही है"

"क्या! ऐसा कैसे हो सकता है ध्यान से देखो" मोहित ने कहा.

"कार थोड़ी आगे लो" पद्‍मिनी ने कहा.

"ठीक है मैं कार उसके घर के आगे से निकालता हूँ फिर देख कर बताना" मोहित ने कहा.

कार को अपनी और आते देख राज ने मन ही मन कहा, "ये गुरु कार आगे क्यों ला रहा है मरवाएगा क्या"

कार उस घर के आगे से निकल गयी. पद्‍मिनी ने बड़े गौर से उस आदमी को देखा.

"ये वो नही है, आइ आम 100 पर्सेंट शुवर" पद्‍मिनी ने कहा.

"फिर इसने क्यों झुटि गवाही दी" मोहित ने कहा.

"इसका जवाब तो यही दे सकता है." पद्‍मिनी ने कहा.

मोहित ने कार गली के बाहर निकाल कर रोक ली ताकि राज को पिक कर सके.

राज ने आते ही पूछा, "वही था ना वो"

"नही, ये वो नही है" पद्‍मिनी ने कहा.

"क्या!" राज भी हैरान रह गया.

"अब क्या करें" राज ने कहा.

"पहले घर वापिस चलते हैं, मुझे तो ये कोई बहुत बड़ी सोची समझी साजिस लगती है. घर पर बैठ कर आराम से सोचेंगे कि आगे क्या करें"

क्रमशः..............................

BAAT EK RAAT KI--14

gataank se aage.................

"bahut khraab hai ye Raj mujhe badnaam karne pe tula hai...vaise tumhaare kaaran karna hoga mujhe uske saath" nagma ne kaha.

"to kya hua ek aur size aajma lena, tera kya bigdega...tujhe to lat hai is sab ki""

"tum agar bholu ko dekhogi to tumhe pata chalega ki itna asaan nahi hai ye kaam"

"to rahne de" padmini ne kaha

"main Raj ke liye karungi"

"vaah-vaah ye khub rahi...yakin nahi hota"

"dekho bahut bhadda hai vo bholu, mera bilkul man nahi hai use dene ka"

"hmm phir rahne do na."

"nahi mujhe Raj ke liye jaana hoga. Aur kya pata uska lund bhi tagda ho. aankhe meech kar kar lungi"

"aa gayi na hakeekat jubaan pe"

"dekho jab mujhe ye kaam karna hi hai to thoda apne maje ke baare mein to sochungui hi"

"abhi philhaal apne yaha ke kaam pe dhyaan de" padmini ne kaha.

"mera pura dhyaan hai yaha, thoda muh upar karo...vaise ek baat hai"

"ab kya hai?"

"tumhaari chuchiyan mujh se badi hain, aadmi to marte honge in chuchiyon par"

"chup kar" padmini ne gusse mein kaha

"par main sach kah rahi hun, agar main ladka hoti to abhi inhe baahar nikaal kar khub choosti"

"hey bhagvaan you are too much..." padmini ne kaha.

"kya kaha aapne"

"kuch nahi yahi ki mujhe der ho rahi hai"

"bas ho gaya kaam, 15 minat aur lagenge in baalo ko dhyaan se karna hoga"

"hmm jaldi karo"

thodi der nagma chup rahi phir achchaanak boli, "Raj bahut achche se choosta hai mere nipple"

"to main kya karun, main bhi chusva lun kya jaakar us se"

"nahi-nahi maine aisa to nahi kaha...aap aisa sochna bhi mat Raj sirf mera hai"

"apne Raj ko apne paas rakh mujhe koi sonk nahi hai"

"mohit aapke liye theek rahega bahut mota lund hai uska bhi, bilkul Raj ki tarah par mujhe pata nahi ki use chuchiyan choosni aati hai ki nahi, abhi tak ek baar hi mili hun us se. Usne bina kuch kiye meri gaanD mein daal diya tha. Dubaara koi moka nahi mila us se milne ka"

"tumhe koi aur baat bhi sujhti hai in baato ke alaava"

"mujhe bas apne Raj ki chinta hai, us se dur rahna, bahut shunder ho tum kahin mera Raj bahak jaaye."

"arey meri maa mujhe tere Raj se kuch lena dena nahi hai aur na hi mohit se kuch lena dena hai. Main yaha majboori mein phansi hun aur tum aisi baate kar rahi ho"

"phir theek hai"

uske baad nagma ne koi baat nahi ki aur chupchaap apne kaam mein lagi rahi. Jab kaam khatam ho gaya to vo boli, " lo ho gaya tumhaara huliya change, koi nahi pahchaan paayega tumhe ab"

padmini ne khud ko sheese mein dekha aur boli, "bahut badhiya, main to khud ko pahchaan hi nahi pa rahi hun"

"sab mera kamaal hai"

"thank you nagma is sabke liye"

"koi baat nahi...mujhe maaf karna main baat bahut karti hun"

"vo to theek hai par tumhaari baate bahut gandi thi...mujhe achcha nahi laga"

ye shun kar nagma ka chehra utar gaya aur boli, "theek hai main chalti hun. Bhagvaan aapko jald se jald aapko is musibat se nikaale"

"thank you" padmini ne kaha

nagma ke jaane ke baad mohit aur Raj kamre mein vaapis aa jaate hain. Mohit padmini ko dekh kar kahta hai, "bahut khub, teri nagma ne to sach mein huliya change kar diya"

"mujhe yakin tha ki nagma ye kaam kar sakti hai" Raj ne kaha.

"chala jaaye phir ab"

"haan bilkul, maine car arrange kar li hai" mohit ne kaha.

Kuch der baad padmini, mohit aur Raj car mein the, mohit drive kar raha tha, Raj uske bagal mein baitha tha aur padmini peechli seat par baithi thi. Car apni manjil ki aur badhe ja rahi thi.

"tujhe pata hai na raasta" mohit ne Raj se pucha.

"haan guru abhi seedha chalo aage jo gali aayegi usi mein hai uska ghar" Raj ne kaha.

"hmm katta kaha hai" mohit ne pucha.

"mere paas hai, chinta mat karo" Raj ne kaha.

"dhyaan rakhna kahin chal jaaye ye desi bandook bahut khatarnaak hoti hai" mohit ne kaha.

"tum log bandook saath laaye ho!" padmini ne hairani me pucha.

"haan madam khatarnaak kaatil hai vo, hame bhi to kuch rakhna hoga, kya pata jaroorat pad jaaye"

"haan padmini ji guru theek kah raha hai, ye desi katta bahut kaam aayega"

"theek hai jaisa tum theek samjho" padmini ne kaha.

"guru bas mod lo is gali mein" Raj ne kaha.

Jaise hi mohit ne car ko gali mein moda Raj bola, "vo raha uska ghar jaha 2 aadmi khade hain"

"ye dono police waale lagte hain mujhe"

"theek kaha guru ye police waale hi hain"

"ab hum kya karenge" padmini ne kaha.

"main ye letter laaya hun, main courier wala ban kar jaaunga aur use baahar bulaaunga sign ke liye aap pehchaan-ne ki koshis karna ki vo vahi hai ki nahi"

"ye witness us ke alaava aur kaun ho sakta hai ye bilukul vahi hai" padmini ne kaha

"vo to hai phir bhi ek baar use dekh to le" mohit ne kaha.

"agar vo baahar nahi aaya to" padmini ne kaha.

"apna letter recieve karne to vo aayega hi, Raj jaise maine samjhaaya hai vaise hi karna"

"theek hai guru" Raj ne kaha.

Raj car se utar kar ek letter haath mein lekar us ghar ki taraf badhta hai.

"shri surinder ji yahi rahte hain?" Raj ne civil kapde pahne police waale se pucha.

"haan yahi rahte hain vo, kya kaam hai?"

"unka courier hai bula dijiye unhe recieve karna hoga ye"

police waale ne ghar ki bell bajaayi. Thodi der baad ek aadmi baahar nikla.

"aap hi surinder ho?" Raj ne pucha.

"haan bolo kya baat hai?"

"aapka courier hai yaha sign kar dijiye" Raj ne ek kaagaj uski aur badha kar kaha.

Dur se padmini ne us aadmi ko dekha aur turant boli, "ye vo nahi hai"

"kya! Aisa kaise ho sakta hai dhyaan se dekho" mohit ne kaha.

"Car thodi aage lo" padmini ne kaha.

"theek hai main car uske ghar ke aage se nikaalta hun phir dekh kar bataana" mohit ne kaha.

Car ko apni aur aate dekh Raj ne man hi man kaha, "ye guru car aage kyon la raha hai marvaayega kya"

car us ghar ke aage se nikal gayi. Padmini ne bade gaur se us aadmi ko dekha.

"ye vo nahi hai, i am 100 percent sure" padmini ne kaha.

"phir isne kyon jhuti gavaahi di" mohit ne kaha.

"iska jawaab to yahi de sakta hai." padmini ne kaha.

Mohit ne car gali ke baahar nikaal kar rok li taaki Raj ko pick kar sake.

Raj ne aate hi pucha, "vahi tha na vo"

"nahi, ye vo nahi hai" padmini ne kaha.

"kya!" Raj bhi hairaan rah gaya.

"ab kya karein" Raj ne kaha.

"pahle ghar vaapis chalte hain, mujhe to ye koi bahut badi sochi samjhi saajis lagti hai. Ghar par baith kar araam se sochenge ki aage kya karein"

Kramashah..............................


rajaarkey
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Re: बात एक रात की

Unread post by rajaarkey » 11 Dec 2014 03:55

raj sharma stories

बात एक रात की--15

गतान्क से आगे.................

बॅक टू फार्म हाउस :-..........

मैं सच कह रही हूँ सर, इसने मुझे चाकू दीखया था" पूजा ने चौहान से कहा.

"रामू तू पागल है क्या, इतनी हसीन लड़की को लंड दीखाया जाता है ना कि चाकू" चौहान ने हंसते हुए कहा.

"बिल्कुल सही कहा यार, रामू तू जा अपना काम कर" परवीन ने कहा.

"क्या धूप खिली है तेरे बर्तडे पे यार, इस धूप में इसका बदन सोने जैसा चमक रहा है" चौहान ने कहा.

"हां यार आज दिन खिला-खिला है, चल काम शुरू करें"

"जैसे तेरी मर्ज़ी, मैं तो लंड चुस्वाउंगा पहले इस से बाद मारूँगा इसकी" चौहान ने कहा.

"ठीक है तू लंड चुस्वा मैं इसकी गान्ड मारूँगा" परवीन ने कहा.

"मुझे थोड़ा आराम तो दो, अभी दर्द है हर जगह" पूजा गिड़गिडाई.

"कहा दर्द है मेरी गुलबो सॉफ-सॉफ बता ना, मैं मालिस कर दूँगा" परवीन ने कहा.

"हां-हाँ बोलो मैं भी मालिस करने के लिए तैयार हूँ" चौहान ने भी चुस्की ली.

"आप दोनो को सब पता है, मज़ाक मत करो, सच में दर्द हो रहा है" पूजा ने कहा.

"हमे कुछ नही पता समझाओ तो कुछ" परवीन ने कहा.

"इतने बड़े-बड़े पूरे के पूरे डाल दिए मेरे अंदर, दर्द नही होगा क्या?" पूजा झल्ला कर बोली.

"यार चौहान लड़की ठीक कह रही है इसकी चूत और गान्ड फाड़ डाली हमने आज. इसकी चूत और गान्ड को मालिस की शख्त ज़रूरत है" परवीन ने कहा.

"चल फिर दोनो एक साथ मालिस करते हैं" चौहान घिनोनी हँसी के साथ बोला.

"मुझे कुछ समझ नही आ रहा, वाहा मालिस कैसे होगी" पूजा ने उत्सुकता में पूछा.

पूजा की बात सुनते ही दोनो हँसने लगे. चौहान ने अपने लंड को हाथ मे पकड़ा और उसे हिलाते हुए बोला, "पूजा जी बहुत भोली हो आप, ये देखिए ये लंड है ना मालिस के लिए, कब से तैयार खड़ा है आपके लिए. मेरा मन तो तुम्हारे मूह में देने का था, अब जब तुम्हारी गान्ड में दर्द हो रहा है तो चलो थोड़ी मालिस ही कर देता हूँ"

पूजा ने चौहान के हाथ में हिलते हुए लंड को देखा और अपनी नज़रे झुका ली. वो समझ गयी कि दौनो फिर से एक साथ घुस्साने वाले हैं उसके अंदर. "कमीना है ये इनस्पेक्टर, ऐसे पोलीस वाले होंगे तो देश का क्या होगा," पूजा ने मन ही मन कहा.

"तू गान्ड की मालिस करेगा?" परवीन ने कहा.

"अगर तुझे गान्ड चाहिए तो मैं चूत संभाल लूँगा, जैसी तेरी मर्ज़ी, आख़िर तू बर्तडे बॉय है"

"नही कोई बात नही, बाद में पोज़िशन चेंज कर लेंगे" परवीन ने कहा.

परवीन पूजा के पास आया और उसे बाहों में भर लिया. उसका तना हुआ लंड पूजा के पेट से टकरा रहा था. परवीन ने पूजा के होंटो को अपने होंटो में दबा लिया.

"उम्म्म"

"क्या हुआ मेरी गुलाबो अभी तो लंड तेरी चूत में घुसा ही नही पहले ही चिल्लाने लगी"

"दाँत लग गये आपके मेरे होन्ट पर"

"कोई बात नही गुलाबो, घर जाएगी तो तुझे याद आएगा कि किसी मर्द से पाला पड़ा था"

पूजा ने कुछ नही कहा

चल मेरी गोदी में आजा तुझे हवा में झोते दे दे कर चोदुन्गा" परवीन ने कहा और पूजा को उपर उठा कर उसकी चूत में लंड घुस्सा दिया.

"आअहह धीरे से" पूजा कराह उठी.

चौहान पूजा के पीछे आ गया और उसकी गान्ड पर अपना लंड टीका दिया.

"सर धीरे से डालना" पूजा ने चौहान से कहा.

"घबराओ मत पूजा जी, अब आपकी गान्ड खुल चुकी है, आराम से जाएगा ये लंड इस बार" चौहान ने कहा और एक झटके में पूरा का पूरा लंड पूजा की गान्ड में उतार दिया.

"उूउऊययययययीीईईई माआ" पूजा कराह उठी.

"अब 2 लंड तेरे अंदर हैं कैसा लग रहा है मेरी गुलाबो"

"पहली बार से दर्द कम है" पूजा ने कहा.

"देखा काम आ रही है ना मालिस, बेकार में डर रही थी" चौहान ने कहा.

पूजा के दोनो हाथ परवीन के गले पर लिपटे थे. परवीन उसे दौनो हाथो से हवा में उठाए था. चौहान पूजा की गान्ड में लंड फँसाए खड़ा था. बहुत ही अजीब सी पोज़िशन बन रही थी तीनो की.

परवीन ने पहला धक्का मारा पूजा के अंदर

"आआहह"

"क्या हुआ पूजा जी मज़ा आ रहा है क्या चूत में" चौहान ने कहा.

पूजा ने कोई जवाब नही दिया. लेकिन उसकी 'आअहह' सारी कहानी कह रही थी

चौहान ने अपना लंड पूजा की गान्ड की गहराई से बाहर की ओर खींचा और ज़ोर से वापिस अंदर धकेल दिया और बोला, "ले तेरी गान्ड में भी मज़ा ले"

"आआहह"

"चल अब एक साथ मारेंगे" परवीन ने कहा.

"ठीक है.... वन, टू, थ्री.... लेट्स फक दा बिच"

और पूजा के अंदर आगे पीछे दोनो तरफ से लंड के धक्को की बोचार शुरू हो गयी.

"आआअहह....ओह....नूऊओ....यस"

"पूजा जी.... व्हाट यस?" चौहान ने हंसते हुए पूछा.

"नतिंग.....आआअहह"

हर एक धक्का पूजा के अंदर तूफान मच्चा रहा था.

"नूऊऊओ......प्लीज़ स्टॉप......" पूजा का पानी छूट गया था.

"अभी तो शुरूवात है मेरी गुलाबो, बहुत बार पानी छोड़ॉगी तुम" परवीन ने कहा.

"नही प्लीज़.....आआआहह एक बार और हो गया रूको ना...."

"हा...हा...हे...हे" दाओनो खिलखिला कर हँसने लगे.

पूजा ने आँख खोली तो उसने देखा की दूर हरी झाड़ियों के पीछे रामू खड़ा था. "ये कमीना नौकर हमे देख रहा है" पूजा धीरे से बड़बड़ाई. वो ये बात बताना ही चाहती थी की.......

"आआअहह नही......" एक और ऑर्गॅज़म ने पूजा को कराहने पर मजबूर कर दिया.

पूजा जब होश में आई तो उसने दुबारा रामू की और देखा. रामू अपनी पंत की ज़िप खोल रहा था.

"बस्टर्ड......" पूजा के मूह से निकल गया.

परवीन और चौहान पूजा की छूट और गान्ड मारने में इतने व्यस्त थे की उन्हे पूजा की गाली सुनाई ही नही दी.

अगले ही पल पूजा फिर ज़ोर से छील्लाई "ऊऊओह.....म्‍म्म्ममम" एक और ऑर्गॅज़म ने उसे घेर लिया.

जब पूजा ने दुबारा आँखे खोली तो पाया की रामू झाड़ियों में अपनी ज़िप खोले खड़ा है और उसकी ज़िप में से भारी भरकम लंड लटक रहा है. लंड रामू के रंग की तरह काले नाग की तरह काला था. रामू का लंड पूजा को बिल्कुल उस हबसी के लंड की तरह लग रहा था जिसको उसनो होटेल में पॉर्न मोविए में देखा था.

"ओह गोद वो तो और भी बड़ा है" पूजा बदबाआई.

"क्या बड़ा है मेरी जान" चौहान ने इस बार उसकी आवाज़ शन ली

"झाड़ियों में वो नौकर मुझे अपना वो दिखा रहा है" पूजा ने कहा.

"कहा है?" चौहान ने कहा.

"वो वही था सच कह रही हूँ" पूजा ने कहा.

"तू क्यों बेचारे रामू के पीछे पड़ी है, कभी कहती है उसने चाकू दिखाया और कभी कहती है कि लंड दिखाया. तू अपनी चूत और गान्ड की चुदाई पे ध्यान दे" परवीन ने कहा.

पूजा फिर से परवीन और चौहान के धक्को में खो गयी.

"दोस्त मैं तो अपना पानी छोड़ने जा रहा हूँ, तू कब तक मारेगा गान्ड" परवीन ने कहा.

"मैं भी फीनिस करने वाला हूँ, चल दोनो स्पीड से चोदते हैं" चौहान ने कहा.

फिर पूजा की चूत और गान्ड में लंड के धक्को की वो बोचार सुरू हुई कि पूजा की साँसे फूलने लगी.

"आआअहह.......ऊऊऊहह......म्‍म्म्ममम....." एक के बाद एक ऑर्गॅज़म होता रहा.

अचानक दोनो लंड थम गये. पूजा को अपने अंदर हॉट लावा सा महसूस हुआ.

"आआहह मज़ा आ गया यार मस्त लड़की है ये" परवीन ने कहा.

"मैं तो इसकी गान्ड का दीवाना हो गया हूँ, क्या गान्ड है साली की" चौहान ने कहा.

पूजा अपनी आँखे बंद किए परवीन की गोदी में अटकी रही. परवीन और चौहान के लंड अभी भी उसके अंदर फँसे थे.

"मज़ा आ गया कसम से" चौहान ने कहा.

पूजा परवीन और चौहान के बीच हवा में झूल रही थी. दोनो के लंड अभी भी पूजा के अंदर फँसे थे.

"यार मुझे ड्यूटी भी करनी है, मुझे जाना होगा अब, इस किल्लर के केस ने परेशान कर रखा है नही तो आज पूरा दिन यही रहता" चौहान ने कहा और एक झटके में अपना लंड पूजा की गान्ड से बाहर खींच लिया.

"मुझे भी ज़रूरी काम है, मैं भी निकलता हूँ" परवीन ने भी अपना लंड पूजा की चूत से बाहर खींच लिया.

"तुझे क्या काम है?" चौहान ने पूछा

"और क्या काम होगा, ज़रूर नये शिकार की तलाश में निकलेगा ये खूनी" पूजा ने मन ही मन कहा.

"है कुछ ज़रूरी काम बाद में बताउन्गा" परवीन ने कहा.

"चलो पूजा जी कपड़े पहन लो कहीं हमारा मन ना बदल जाए" चौहान ने हंसते हुए कहा.

पूजा ने बिना कुछ कहे जल्दी से घास पर बिखरे अपने कपड़े बटोरे और जल्दी से पहन लिए.

परवीन पूजा के पास आया और बोला, "जो बात चौहान को बताई है, किसी और को बताई तो तुम्हारी खैर नही"

"क्या कह रहा है बेचारी के कान में" चौहान ने पूछा.

"कुछ नही, पूछ रहा था की दुबारा कब मिलोगि?"

पूजा कुछ नही बोली.

"उस दिन तुम दोनो सहेलियों को देख कर मन मचल उठा था मेरा. देखो क्या किस्मत पाई है मैने आज खूब रगड़ रगड़ कर मारी है मैने तुम्हारी"

क्रमशः..............................

BAAT EK RAAT KI--15

gataank se aage.................

Back to farm house :-

main sach kah rahi hun sir, isne mujhe chaku deekhaya tha" puja ne chauhan se kaha.

"ramu tu paagal hai kya, itni hasin ladki ko lund deekhaaya jaata hai na ki chaaku" chauhan ne hanste hue kaha.

"bilkul sahi kaha yaar, ramu tu ja apna kaam kar" parveen ne kaha.

"kya dhup khili hai tere birthday pe yaar, is dhup mein iska badan sone jaisa chamak raha hai" chauhan ne kaha.

"haan yaar aaj din kheela-kheela hai, chal kaam shuru karein"

"jaise teri marji, main to lund chusvaaunga pahle is se baad maarunga iski" chauhan ne kaha.

"theek hai tu lund chusva main iski gaanD maarunga" parveen ne kaha.

"Mujhe thoda araam to do, abhi dard hai har jagah" puja gidgidaayi.

"kaha dard hai meri gulabo saaf-saaf bata na, main maalis kar dunga" parveen ne kaha.

"haan-haan bolo main bhi maalis karne ke liye taiyaar hun" chauhan ne bhi chuski li.

"aap dono ko sab pata hai, majaak mat karo, sach mein dard ho raha hai" puja ne kaha.

"hame kuch nahi pata samjhaao to kuch" parveen ne kaha.

"itne bade-bade pure ke pure daal diye mere ander, dard nahi hoga kya?" puja jhalla kar boli.

"yaar chauhan ladki theek kah rahi hai iski chut aur gaanD phaad daali hamne aaj. Iski chut aur gaanD ko maalis ki shakth jaroorat hai" parveen ne kaha.

"chal phir daono ek saath maalis karte hain" chauhan ghinoni hansi ke saath bola.

"mujhe kuch samajh nahi aa raha, vaha maalis kaise hogi" puja ne utsukta mein pucha.

Puja ki baat sunte hi daono hansne lage. Chauhan ne apne lund ko haath me pakda aur use hilaate hue bola, "puja ji bahut bholi ho aap, ye dekhiye ye lund hai na maalis ke liye, kab se tiyaar khada hai aapke liye. Mera man to tumhaare muh mein dene ka tha, ab jab tumhaari gaanD mein dard ho raha hai to chalo thodi maalis hi kar deta hun"

puja ne chauhan ke haath mein hilte hue lund ko dekha aur apni najre jhuka li. Vo samajh gayi ki dauno phir se ek saath ghussaane waale hain uske ander. "kamina hai ye inspector, aise police waale honge to desh ka kya hoga," puja ne man hi man kaha.

"tu gaanD ki maalis karega?" parveen ne kaha.

"agar tujhe gaanD chaahiye to main chut sambhaal lunga, jaisi teri marji, aakhir tu birthday boy hai"

"nahi koi baat nahi, baad mein position change kar lenge" parveen ne kaha.

Parveen puja ke paas aaya aur use baahon mein bhar liya. uska tana hua lund puja ke pet se takra raha tha. Parveen ne puja ke honto ko apne honto mein daba liya.

"ummm"

"kya hua meri gulabo abhi to lund teri chut mein ghussa hi nahi pahle hi cheellaane lagi"

"daant lag gaye aapke mere hont par"

"koi baat nahi gulabo, ghar jaayegi to tujhe yaad aayega ki kisi mard se paala pada tha"

puja ne kuch nahi kaha

chal meri godi mein aaja tujhe hava mein jhute de de kar chodunga" parveen ne kaha aur puja ko upar utha kar uski chut mein lund ghussa diya.

"aaahhhhh dheere se" puja karaah uthi.

Chauhan puja ke peeche aa gaya aur uski gaanD par apna lund tika diya.

"sir dheere se daalna" puja ne chauhan se kaha.

"ghabraao mat puja ji, ab aapki gaanD khul chuki hai, araam se jaayega ye lund is baar" chauhan ne kaha aur ek jhatke mein pura ka pura lund puja ki gaanD mein utaar diya.

"uuuuyyyyyyiiiiiii maaa" puja karaah uthi.

"ab 2 lund tere ander hain kaisa lag raha hai meri gulabo"

"pahli baar se dard kam hai" puja ne kaha.

"dekha kaam aa rahi hai na maalis, bekaar mein dar rahi thi" chauhan ne kaha.

Puja ke daono haath parveen ke gale par lipte the. Parveen use dauno haatho se hava mein uthaaye tha. Chauhan puja ki gaanD mein lund phansaaye khada tha. Bahut hi ajeeb si position ban rahi thi teeno ki.

Parveen ne pahla dhakka maara puja ke ander

"aaaahhhhh"

"kya hua puja ji maja aa raha hai kya chut mein" chauhan ne kaha.

Puja ne koi jawaab nahi diya. Lekin uski 'aaahhh' saari kahaani kah rahi thi

chauhan ne apna lund puja ki gaanD ki gahraayi se baahar ki aur kheencha aur jor se vaapis ander dhakel diya aur bola, "le teri gaanD mein bhi maja le"

"aaaahhhh"

"chal ab ek saath maarenge" parveen ne kaha.

"theek hai.... one, two, three.... lets fuck the bitch"

aur puja ke ander aage peeche daono taraf se lund ke dhakko ki bochaar shuru ho gayi.

"aaaaahhhhhh....oh....nooooo....yes"

"puja ji.... what yes?" chauhan ne hanste hue pucha.

"nothing.....aaaaahhhhhh"

har ek dhakka puja ke ander toofaan machcha raha tha.

"nooooooo......please stop......" puja ka paani chut gaya tha.

"abhi to shuruvaat hai meri gulabo, bahut baar paani chodogi tum" parveen ne kaha.

"nahi please.....aaaaaahhhhhhhh ek baar aur ho gaya ruko na...."

"ha...ha...he...he" daono khilkhila kar hansne lage.

Puja ne aankh kholi to usne dekha ki dur hari jhaadiyon ke peeche ramu khada tha. "ye kamina naukar hame dekh raha hai" puja dheere se badbadaayi. Vo ye baat bataana hi chaahti thi ki.......

"aaaaahhhhhh nahi......" ek aur orgasm ne puja ko karaahne par majboor kar diya.

Puja jab hosh mein aayi to usne dubaara ramu ki aur dekha. Ramu apni pant ki zip khol raha tha.

"bastard......" puja ke muh se nikal gaya.

Parveen aur chauhan puja ki chut aur gaanD maarne mein itne vyast the ki unhe puja ki gaali sunaayi hi nahi di.

Agle hi pal puja phir jor se cheellaayi "ooooohhhh.....mmmmmm" ek aur orgasm ne use gher liya.

Jab puja ne dubaara aankhe kholi to paaya ki ramu jhaadiyon mein apni zip khole khada hai aur uski zip mein se bhaari bharkam lund latak raha hai. Lund ramu ke rang ki tarah kaale naag ki tarah kaala tha. Ramu ka lund puja ko bilkul us habsi ke lund ki tarah lag raha tha jisko usno hotel mein porn movie mein dekha tha.

"oh god vo to aur bhi bada hai" puja badbaaayi.

"kya bada hai meri jaan" chauhan ne is baar uski awaaj shun li

"jhadiyon mein vo naukar mujhe apna vo deekha raha hai" puja ne kaha.

"kaha hai?" chauhan ne kaha.

"vo vahi tha sach kah rahi hun" puja ne kaha.

"tu kyon bechaare ramu ke peeche padi hai, kabhi kahti hai usne chaku deekhaya aur kabhi kahti hai ki lund deekhaya. Tu apni chut aur gaanD ki chudaayi pe dhyaan de" parveen ne kaha.

Puja phir se parveen aur chauhan ke dhakko mein kho gayi.

"dost main to apna paani chodne ja raha hun, tu kab tak maarega gaanD" parveen ne kaha.

"main bhi finis karne waala hun, chal dono speed se chodate hain" chauhan ne kaha.

Phir puja ki chut aur gaanD mein lund ke dhakko ki vo bochaar suru huyi ki puja ki saanse phoolne lagi.

"aaaaahhhhhh.......oooooohhhhhhh......mmmmmm....." ek ke baad ek orgasm hota raha.

Achchaanak daono lund tham gaye. Puja ko apne ander hot laava sa mahsoos hua.

"aaaahhhh maja aa gaya yaar mast ladki hai ye" parveen ne kaha.

"main to iski gaanD ka deevana ho gaya hun, kya gaanD hai saali ki" chauhan ne kaha.

Puja apni aankhe band kiye parveen ki godi mein atki rahi. Parveen aur chauhan ke lund abhi bhi uske ander phanse the.

"maja aa gaya kasam se" chauhan ne kaha.

Puja parveen aur chauhan ke beech hava mein jhul rahi thi. Dauno ke lund abhi bhi puja ke ander phanse the.

"yaar mujhe duty bhi karni hai, mujhe jaana hoga ab, is killer ke case ne pareshaan kar rakha hai nahi to aaj pura din yahi rahta" chauhan ne kaha aur ek jhatke mein apna lund puja ki gaanD se baahar kheench liya.

"mujhe bhi jaroori kaam hai, main bhi nikalta hun" parveen ne bhi apna lund puja ki chut se baahar kheench liya.

"tujhe kya kaam hai?" chauhan ne pucha

"aur kya kaam hoga, jaroor naye shikaar ki talaash mein niklega ye khuni" puja ne man hi man kaha.

"hai kuch jaroori kaam baad mein bataaunga" parveen ne kaha.

"chalo puja ji kapde pahan lo kahin hamaara man na badal jaaye" chauhan ne hanste hue kaha.

Puja ne bina kuch kahe jaldi se ghaas par bikhre apne kapde batore aur jaldi se pahan liye.

Parveen puja ke paas aaya aur bola, "jo baat chauhan ko bataayi hai, kisi aur ko bataayi to tumhaari khair nahi"

"kya kah raha hai bechari ke kaan mein" chauhan ne pucha.

"kuch nahi, puch raha tha ki dubaara kab milogi?"

puja kuch nahi boli.

"us din tum daono saheliyon ko dekh kar man machchal utha tha mera. Dekho kya kismat paayi hai maine aaj khub ragad ragad kar maari hai maine tumhaari"

Kramashah..............................