Jaal -जाल compleet

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raj..
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Re: Jaal -जाल

Unread post by raj.. » 15 Dec 2014 03:14

जाल पार्ट--93

गतान्क से आगे......

"नही,वकील साहब हमे कोई ऐतराज़ नही.",वकील की बात पे प्रणव,रीता & शिप्रा ने 1 दूसरे को देखा & फिर रीता ने जवाब दिया. "अच्छी बात है.तो मेरा काम ख़त्म होता है.मिस्टर.प्रणव,समीर के बाद दे फॅक्टो Cएओ तो आप ही हैं.अब आप ही कि ये ज़िम्मेदारी बनती है कि जल्द से जल्द शेर्होल्डर्स की मीटिंग बुलाएँ & फिर ग्रूप के मालिकाना हक़ की बाते सॉफ करे." "जी,वकील साहब.",वकील ने सब से विदा ली तो प्रणव उसे बाहर तक छ्चोड़ने आया.उसे यकीन नही हो रहा था कि उसका सपना सच होने वाला था.उसके ज़हन मे पिच्छले 10 दिनो की बाते घूम रही थी.वो यक़ीनन समीर की ही लाश थी.उसने भी पहचाना था & रंभा ने भी.उसे महादेव शाह पे बहुत गुस्सा आया था कि उसने उसे बिना बताए ये काम कर दिया.वो शाह को चाह कर भी फोन नही कर सकता था क्यूकी मामला अभी पोलीस के हाथ से निकला नही था. समीर की लाश 1 ताबूत मे बंद कर मेहरा परिवार के बंगल के 1 हाल मे रखी गयी थी जहा सभी उसे श्रद्धांजलि देने आ रहे थे.शाह भी आया & वही सबकी नज़र बचा समीर ने उस से ये सवाल किया. "पर प्रणव,मैने कुच्छ नही किया.मैं तो बस सोच ही रहा था इस बारे मे & ये हादसा हो गया." "मतलब आपने नही कराया ये सब?",प्रणव की आँखे हैरत से फॅट गयी थी..तो क्या तक़दीर उसपे मेहेरबान थी?..अब उसे सारी ज़िंदगी इस राज़ को सीने मे दबाए रखने की भी ज़रूरत नही थी. समीर की मौत की खबर सुनते ही रीता ने उसका गिरेबान पकड़ लिया था & उसपे इल्ज़ाम लगाया था कि समीर का आक्सिडेंट करवा उसे लाचार बनाने के चक्कर मे प्रणव ने ही ये सब कराया था.बड़ी मुश्किल से प्रणव अपनी सास को समझा पाया था.वो सच बोल रहा था & रीता को उसपे यकीन करना ही पड़ा था..बस अब 15 दिन बाद सब कुच्छ उसका होगा..रंभा तो बस नाम की मालकिन होगी. "प्रणव..",वो अपना नाम सुन ख़यालो से बाहर आया. "ह-हां..अरे रंभा.बोलो?" "मैं कुच्छ दिन के लिए यहा से बाहर जाना चाहती हू." "बाहर?कहा?.. क्यू?" "बस प्रणव यहा रहने मे अब मेरा जी घबराता है." "मैं तुम्हारी हालत समझता हू,रंभा पर बस मीटिंग हो जाने दो फिर चली जाना." "मीटिंग कब तक होगी?" "देखो,जल्द से जल्द भी कर्वाऊं तो भी 15-20 दिन तो लग ही जाएँगे." "तो प्लीज़ प्रणव मुझे जाने दो,मैं मीटिंग के लिए आ जाऊंगी." "पर जाओगी कहा?" "क्लेवर्त." "क्लेवर्त?" "हां,प्रणव.मैं यहा से दूर जाना चाहती हू & वो जगह मुझे पसंद है." "ओक,मैं वाहा होटेल वाय्लेट मे इत्तिला कर देता हू." "थॅंक्स,प्रणव.",रंभा बड़ी शालीनता से उसके गले लगी,"..तुम मेरा कितना बड़ा सहारा हो ये तुम्हे पता नही." "प्लीज़,रंभा.ऐसी बाते कर मुझे शर्मिंदा ना करो.",दोनो पूरी तरह से नाटक कर रहे थे पर जहा रंभा प्रणव की हक़ीक़त से वाकिफ़ थी वही प्रणव अभी भी अंधेरे मे था. रंभा & शाह की देवेन & विजयंत मेहरा के हराड जाने के बाद 1 मुलाकात हुई थी जिसमे उन्होने समीर की मौत की सारी प्लॅनिंग की थी.शाह ने पर्दे के पीछे रह के 1 ट्रक ड्राइवर को ये काम सौंपा था.रंभा उसके साथ हर वक़्त मौजूद रही थी.दोनो ने उसी दिन तय कर लिया था की किस दिन रंभा क्लेवर्त जाएगी & उसके बाद किस दिन दोनो शादी करेंगे. रंभा अगले दिन क्लेवर्त के होटेल वाय्लेट पहुँची.अगले 3 दिनो तक वो 1 दुखी विधवा का नाटक करती रही & चौथे दिन उसने उसी बुंगले मे जाने की बात कही जहा वो & विजयंत ठहरे थे & देवेन चोरी से घुसा था.अब होटेल वालो को क्या करना था इस से.वो मालकिन थी जहा मर्ज़ी जाए,जो मर्ज़ी करे! रंभा ने विजयंत के उस दोस्त से पहले ही बात कर ली थी & उसने खुशी-2 उसे वाहा की चाभी दी थी.रंभा 1 रात वाहा रही & अगली सुबह 1 बॅग लेके 1 कार खुद चलके उस मंदिर पे पहुँची जहा उसे महादेव शाह से शादी करनी थी. उस मंदिर के 1 कमरे मे उसने कपड़े बदले.शाह अपनी होने वाली दुल्हन के लिए गहने लाया था जिन्हे रंभा ने अपने बदन पे सजाया.इस मौके के लिए उसने खुद ही 1 सारी चुनी थी.उसी सारी मे 2 घंटे बाद वो शाह की बीवी बन चुकी थी.पति की मौत के 15 दिनो बाद ही रंभा ने दूसरी शादी कर ली थी. मंदिर से निकलते-2 शाम ढल चुकी थी.रंभा ने अपनी कार महादेव शाह के ड्राइवर के सुपुर्द की & खुद उसकी कार मे बैठ उसके साथ उसके बंगल को चल दी.शाह ने उसे इस बारे मे भी पहले ही बता दिया था.शाह बहुत खुश था.उसे तो लग रहा था की वो दुनिया का सबसे खुशकिस्मत इंसान है.वो कार चलते हुए बार-2 अपनी नयी-नवेली दुल्हन को देखे जा रहा था.अपनी खुशी मे उसका ध्यान उस कार पे नही गया जो मंदिर से ही उसके पीछे लगी थी. मंदिर क्लेवर्त के बाहर था & शाह का घर भी वाहा से दूर था.घर जाने से पहले रास्ते मे शाह ने खाना पॅक करवाया जिसे घर पहुँचते ही दोनो ने खाया.ये सब निबटते रात के 10 बज गये. "ओह!रुकिये ना!",शाह ने खाना ख़त्म होते ही अपनी दुल्हन को बाहो मे भर लिया था,"ऐसे नही.",रंभा उसे खुद से दूर करती शोखी से मुस्कुराइ,"..आज हमारी सुहागरात है & वो ऐसे नही मानूँगी मैं.मेरा कमरा सज़ा है या नही?",कमर पे हाथ रख उसने अपने शौहर से सवाल किया. "उपर जाके देख लो.",शाह की आँखो मे उसकी बात से वासना के लाल डोरे तैरने लगे थे. "ठीक है.आपको जब बुलाऊं तब आईएगा.",रंभा साथ लाया बाग उठा मुस्कुराती सीढ़िया चढ़ने लगी.शाह वही हॉल मे बैठ गया & टीवी देख वक़्त काटने लगा.45 मिनिट बाद उसके कानो मे रंभा के बुलाने की आवाज़ आई तो वो किसी जवान लड़के की तरह सीढ़िया फलंगता उपर कमरे तक पहुँचा. महादेव शाह कमरे मे दाखिल हुआ तो सामने का नज़ारा देख उसका दिल खुशी & रोमांच से भर गया.फूलो से भारी सेज के बीचोबीच गहरे लाल रंग के लहँगे मे लाल ओढनी मे चेहरा छिपाए रंभा बैठी थी.मद्धम रोशनी माहौल को & रोमानी बना रही थी.शाह मुस्कुराता बिस्तर की ओर बढ़ा & अपनी दुल्हन के पास बैठ उसका घूँघट उठाया.रंभा की माँग मे टीका चमक रहा था & नाक मे नाथ.उसकी आँखे हया के मारे बंद थी.रंभा ने ये सारा नाटक शाह को अपने जाल मे फँसाए रखने के लिए किया था पर सच्चाई ये थी की माहौल ने उसपे भी असर किया था & उसकी शर्म पूरी तरह से नाटक नही थी. शाह ने रंभा की ठुड्डी पकड़ उसका चेहरा उपर किया.उसे यकीन नही हो रहा था की उसने शादी कर ली थी.जिस चीज़ को वो सारी उम्र फ़िज़ूल समझता रहा,आज इस लड़की की वजह से वो उसकी ज़िंदगी का सबसे अहम हिस्सा बन गयी थी.रंभा की धड़कने तेज़ हो गयी थी..ऐसा तो उसे समीर के साथ अपनी पहली सुहागरात के वक़्त भी महसूस नही हुआ था..शाह उसके रूप को निहारे जा रहा था..वो इस चेहरे को चूम चुका था,इस नशीले जिस्म के रोम-2 से अच्छी तरह वाकिफ़ था..उसे बाहो मे भर जी भर के प्यार किया था उसने..मगर फिर भी आज वो उसे नयी लग रही थी,आनच्छुई लग रही थी. शाह आगे झुका & रंभा के सुर्ख लाबो को हल्के से चूम लिया.रंभा ने शर्मा के मुँह फेर लिया.शाह मुस्कुराया & उसके सर से ओढनी को नीचे सरका दिया.ऐसा करते ही उसकी सांस तेज़ हो गयी & उसका हलक सूख गया.रंभा ने चोली ही ऐसी पहनी थी.स्ट्रिंग बिकिनी के टॉप की तरह गले मे माला की तरह 1 डोरी & पीठ पे2 पतली बँधी डोरियो के सहारे उसके सीने को ढँकी चोली के गले से उसका क्लीवेज नज़र आ रहा था.शाह ने पीछे देखा & रंभा की नंगी पीठ देख उसका लंड खड़ा हो गया.रंभा ने बहुत ढूँदने के बाद ये चोली पसंद की थी क्यूकी उसे पता था कि उसे इसमे देख उसका दूसरा शौहर जोश मे पागल हो जाएगा. रंभा के मेहंदी लगे हाथ उसके घुटनो पे थे.शाह झुका & उसके हाथो को चूम लिया.रंभा ने शर्मा के हाथ पीछे खिचने चाहे तो शाह ने उसका बाया हाथ पकड़ लिया & उसकी हथेली चूम ली.रंभा उसके होंठो की च्छुअन से सिहर उठी.शाह उसकी कलाई से कंगन & चूड़िया उतारते हुए चूमने लगा.कुच्छ ही पॅलो मे बिस्तर के 1 कोने मे उसकी दोनो कलाईयो से उतरे कंगन & चूड़िया पड़ी थी & शाह उसके दोनो हाथो को बेतहाशा चूमे जा रहा था.रंभा शर्म से मुस्कुराते हुए हाथ छुड़ाने की कोशिश कर रही थी पर शाह की पकड़ मज़बूत थी. उसके हाथो को पकड़े हुए शाह उसके चेहरे पे झुका & उसके बाए गाल को चूमने लगा.रंभा अब मस्त हो रही थी.शाह उसके दाए गाल को चूमने लगा पर उसकी नाथ आड़े आने लगी.शाह ने उसकी नाथ उतारी & उसे बाहो मे भर लिया.नंगी पीठ पे उसके आतूरता से फिरते हाथो ने रंभा को मस्ती मे सिहरा दिया & वो उसकी बाहो मे पिघलने लगी.शाह उसके चेहरे को अपने होंठो की गर्माहट से लाल किए जा रहा था.शाह उसके बाए गाल को चूमते हुए उसके बाए कान तक पहुँचा जहा लटका झुमका उसे चुभ गया.झुमका बस कान के छेद मे लटका हुआ था.शाह ने उसे दन्तो से पकड़ा & उतार दिया & फिर उसकी कान की लौ को जीभ से हल्के से चटा & फिर काट लिया.रंभा मस्ती मे करही & जब उसके शौहर ने यही हरकत दाए कान के साथ दोहराई तो उसने भी उसे बाहो मे कस लिया. शाह उसके माथे को चूम रहा था.उसने उसकी माँग से टीका हटाया & अपने नाम का सिंदूर देख उसका दिल रंभा के लिए मोहब्बत & जोश से भर गया.उसने उसकी माँग चूमि & दाया हाथ पीछे ले जा उसके जुड़े को खोल दिया.रंभा की गोरी पीठ पे काली ज़ूलफे बिखर गयी.शाह उसकी रेशमी ज़ुल्फो को उसकी पीठ पे सहलाने लगा तो रंभा के जिस्म मे झुरजुरी दौड़ गयी.शाह उसे बाहो मे भर चूमते हुए लिटा रहा था.फूलो से भरे बिस्तर पे दोनो लेट गये & 1 दूसरे को चूमने लगे.दोनो के हाथ 1 दूसरे के जिस्म पे फिसल रहे थे & होठ सिले हुए थे.ज़ुबाने आपस मे गुत्थमगुत्था थी & जिस्म 1 दूसरे से मिलने को बेताब थे. रंभा इस वक़्त सब भूल चुकी थी.उसे उस कमरे के रोमानी माहौल के सिवा & किसी बात का होश नही था.पाजामे मे क़ैद शाह का लंड उसकी चूत पे दबा था,उसकी चूचियाँ वो अपने सीने से पीस रहा था & उसकी मज़बूत बाहे उसकी कमर को जकड़े हुई थी.शाह के मर्दाना जिस्म की नज़दीकी से रंभा की चूत अब बहुत मस्त हो गयी थी.शाह उसके होंठो को छ्चोड़ चूमता हुआ उसकी गर्देन पे आ गया.रंभा उसके बालो को सहला रही थी.शाह उसके क्लीवेज को चूम रहा था & उसका दाया हाथ उसके पेट पे घूम रहा था.वो उसकी नाभि को कुरेदता & फिर उसके चिकने पेट को सहलाने लगता.रंभा की चूत की कसक अब बहुत बढ़ गयी थी & वो अपनी जंघे आपस मे रगड़ने लगी थी.शाह को अब उसके जिस्म का तजुर्बा हो चुका था & वो अपनी दुल्हन की हालत बखूबी समझ रहा था. वो उसके सीने को चूमते हुए नीचे उतरा & उसके पेट को चूमने लगा.रंभा आहे भरने लगी.शाह अपनी ज़ुबान उसके पेट पे घुमाता & फिर पेट के हिस्से को मुँह मे भर चूस लेता.रंभा बिस्तर पे कसमसा रही थी & उसके बालो को नोच रही थी.शाह ने ज़ुबान उसकी नाभि मे उतार दी & घुमाने लगा.अब बात रंभा की बर्दाश्त के बाहर हो गयी.वो शाह के सर पकड़ उसकी ज़ुबान को अपनी नाभि से अलग करने की कोशिश करने लगी,उस से ये एहसास सहा नही जा रहा था.पर शाह ने उसकी कोशिश नाकाम कर दी & उसकी नाभि को & शिद्दत से चाटने लगा & तब तक चाटता रहा जब तक रंभा झाड़ नही गयी & सुबकने लगी. शाह उसके पैरो के पास चला गया & उन्हे चूमने लगा.ऐसा करने से उसके पैरो की पायल बजने लगी & उसकी रुनझुन ने माहौल को & रोमानी बना दिया.शाह उसके पैरो की उंगलियो को चूमने के बाद उपर बढ़ने लगा.जैसे-2 वो उपर बढ़ रहा था,वैसे-2 उसका लहंगा भी उपर सरकने लगा.ज्यो-2 उसकी गोरी टाँगे नुमाया हो रही थी,शाह का जोश भी बढ़ रहा था.रंभा अभी भी अपनी भारी-भरकम जंघे मस्ती मे आहत हो रगड़ रही थी.शाह उसकी टाँगो को चूमते हुए उसके घुटनो तक आ गया था & उन्हे चूम रहा था.उसके हाथ लहँगे को रंभा की कमर तक उठा चुके थे & उसकी मखमली जाँघो पे बेसब्री से घूम रहे थे.रंभा की आहें अब & तेज़ी से कमरे मे गूँज रही थी. शाह उसके घुटनो के बाद उसकी जाँघो पे आया & उन्हे ना केवल चूमने लगा बल्कि चूसने भी लगा.रंभा मस्ती मे बिस्तर की चादर & सर के नीचे के तकिये को भींच रही थी & ऐसा करने मे उसके हाथो तले बिस्तर पे बिछि फूलो की पंखुड़िया पिस रही थी.शाह उसकी चूत तक पहुँच गया था.लाल रंग की छ्होटी सी सॅटिन पॅंटी मे ढँकी चूत की नशीली खुश्बू नाक से टकराते ही शाह उसे चोदने को आतुर हो उठा पर वो जानता था की थोड़ा सब्र रखने से मज़ा भी दोगुना हो जाएगा. ------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------ क्रमशः....... JAAL paart--93 gataank se aage...... "nahi,vakil sahab hume koi aitraz nahi.",vakil ki baat pe Pranav,Rita & Shipra ne 1 dusre ko dekha & fir rita ne jawab diya. "achhi baat hai.to mera kaam khatm hota hai.mr.pranav,sameer ke baad de facto CEO to aap hi hain.ab aap hi ki ye zimmedari banti hai ki jald se jald shareholders ki meeting bulayen & fir group ke malikana haq ki baate saaf kare." "ji,vakil sahab.",vakil ne sab se vida li to pranav use bahar tak chhodne aaya.use yakin nahi ho raha tha ki uska sapna sach hone vala tha.uske zehan me pichhle 10 dino ki baate ghum rahi thi.vo yakinan sameer ki hi lash thi.usne bhi pehchana tha & rambha ne bhi.use Mahadev Shah pe bahut gussa aaya tha ki usne use bina bataye ye kaam kar diya.vo shah ko chah kar bhi fone nahi kar askta tha kyuki mamla abhi police ke hath se nikla nahi tha. sameer ki lash 1 tabut me band kar mehra parivar ke bungle ke 1 hal me rakhi gayi thi jaha sabhi use shraddhanjali dene aa rahe the.shah bhi aaya & vahi sabki nazar bacha sameer ne us se ye sawal kiya. "par pranav,maine kuchh nahi kiya.main to bas soch hi raha tha is bare me & ye hadsa ho gaya." "matlab aapne nahi karaya ye sab?",pranav ki aankhe hairat se phat gayi thi..to kya taqdeer uspe meherban thi?..ab use sari zindagi is raaz ko seene me dabaye rakhne ki bhi zarurat nahi thi. sameer ki maut ki khabra sunte hi rita ne uska gireban pakad liya tha & uspe ilzam lagaya tha ki sameer ka accident karwa use lachar banane ke chakkar me pranav ne hi ye sab karaya tha.badi mushkil se pranav apni saas ko samjha paya tha.vo sach bol raha tha & rita ko uspe yakin karna hi pada tha..bas ab 15 din baad sab kuchh uska hoga..rambha to bas naam ki malkin hogi. "pranav..",vo apna naam sun khayalo se bahar aaya. "h-haan..are rambha.bolo?" "main kuchh din ke liye yaha se bahar jana chahti hu." "bahar?kaha?.. kyu?" "bas pranav yaha rehne me ab mera ji ghabrata hai." "main tumhari halat samajhta hu,rambha par bas meeting ho jane do fir chali jana." "meeting kab tak hogi?" "dekho,jald se jald bhi karwaoon to bhi 15-20 din to lag hi jayenge." "to please pranav mujhe jane do,main meeting ke liye aa jaoongi." "par jaogi kaha?" "Clayworth." "clayworth?" "haan,pranav.main yaha se door jana chahti hu & vo jagah mujhe pasand hai." "ok,main vaha Hotel Violet me ittila kar deta hu." "thanks,pranav.",rambha badi shalinta se uske gale lagi,"..tum mera kitna bada sahara ho ye tumhe pata nahi." "please,rambha.aisi baate kar mujhe sharminda na karo.",dono puri tarah se natak kar rahe the par jaha rambha pranav ki haqeeqat se vakif thi vahi pranav abhi bhi andhere me tha. rambha & shah ki Deven & Vijayant Mehra ke Haraad jane ke baad 1 mulakat hui thi jisme unhone sameer ki maut ki sari planning ki thi.shah ne parde ke peechhe reh ke 1 truck driver ko ye kaam saunpa tha.rambha uske sath har waqt maujood rahi thi.dono ne usi din tay kar liya tha ki kis din rambha clayworth jayegi & uske baad kis din dono shadi karenge. rambha agle din clayworth ke hotel violet pahunchi.agle 3 dino tak vo 1 dukhi vidhwa ka natak karti rahi & chauthe din usne usi bungle me jane ki baat kahi jaha vo & vijayant thehre the & deven chori se ghusa tha.ab hotel valo ko kya karna tha is se.vo malkin thi jaha marzi jaye,jo marzi kare! rambha ne vijayant ke us dost se pehle hi baat kar li thi & usne khushi-2 use vaha ki chabhi di thi.rambha 1 raat vaha rahi & agli subah 1 bag leke 1 car khud chalake us mandir pe pahunchi jaha use mahadev shah se shadi karni thi. us mandir ke 1 kamre me usne kapde badle.shah apni hone vali dulhan ke liye gehne laya tha jinhe rambha ne apne badan pe sajaya.is mauke ke liye usne khud hi 1 sari chuni thi.usi sari me 2 ghante baad vo shah ki biwi ban chuki thi.pati ki maut ke 15 dino baad hi rambha ne dusri shadi kar li thi. Mandir se nikalte-2 sham dhal chuki thi.Rambha ne apni car Mahadev Shah ke driver ke supurd ki & khud uski car me baith uske sath uske bungle ko chal di.shah ne use is bare me bhi pehle hi bata diya tha.shah bahut khush tha.use to lag raha tha ki vo duniya ka sabse khushkismat insan hai.vo car chalate hue baar-2 apni nayi-naveli dulhan ko dekhe ja raha tha.apni khushi me uska dhyan us car pe nahi gaya jo mandir se hi uske peechhe lagi thi. mandir clayworth ke bahar tha & shah ka ghar bhi vaha se door tha.ghar jane se pehle raste me shah ne khana pack karwaya jise ghar pahunchte hi dono ne khaya.ye sab nibtate raat ke 10 baj gaye. "oh!rukiye na!",shah ne khana khatm hote hi apni dulhan ko baaho me bhar liya tha,"aise nahi.",rambha use khud se door karti shokhi se muskurayi,"..aaj humari suhagraat hai & vo aise nahi manaungi main.mera kamra saja hai ya nahi?",kamar pe hath rakh usne apne shauhar se sawal kiya. "upar jake dekh lo.",shah ki aankho me uski baat se vasna ke laal dore tairne lage the. "thik hai.aapko jab bulaoon tab aaiyega.",rambha sath laya bag utha muskurati seedhiya chadhne lagi.shah vahi hall me baith gaya & tv dekh waqt katne laga.45 minute baad uske kano me rambha ke bulane ki aavaz aayi to vo kisi jawan ladke ki tarah seedhiya falangta upar kamre tak pahuncha. Mahadev Shah kamre me dakhil hua to samne ka nazara dekh uska dil khushi & romanch se bhar gaya.phoolo se bhari sej ke beechobeech gehre laal rang ke lehange me laal odhni me chehra chhipaye Rambha baithi thi.maddham roshni mahaul ko & romani bana rahi thi.shah muskurata bistar ki or badha & apni dulhan ke paas baith uska ghunghat uthaya.rambha ki mang me teeka chamak raha tha & naak me nath.uski aankhe haya ke mare band thi.rambha ne ye sara natak shah ko apne jaal me phansaye rakhne ke liye kiya tha par sachchai ye thi ki mahaul ne uspe bhi asar kiya tha & uski sharm puri tarah se natak nahi thi. Shah ne rambha ki thuddi pakad uska chehra upar kiya.use yakin nahi ho raha tha ki usne shadi kar lit hi.jis chiz ko vo sari umra fizul samajhta raha,aaj is ladki ki vajah se vo uski zindagi ka sabse aham hissa ban gayi thi.rambha ki dhadkane tez ho gayi thi..aisa to use Sameer ke sath apni pehli suhagraat ke waqt bhi mehsus nahi hua tha..shah uske roop ko nihare ja raha tha..vo is chehre ko chum chuka tha,is nashile jism ke rom-2 se achhi tarah vakif tha..use baaho me bhar ji bhar ke pyar kiya tha usne..magar fir bhi aaj vo use nayi lag rahi thi,anchhui lag rahi thi. Shah aage jhuka & rambha ke surkh labo ko halke se chum liya.rambha ne sharma ke munh fer liya.shah muskuraya & uske sar se odhni ko neeche sarka diya.aisa karte hi uski sans tez ho gayi & uska halak such gaya.rambha ne choli hi aisi pehni thi.string bikini ke top ki tarah gale me mala ki tarah 1 dori & pith pe2 patli bandhi doriyo ke sahare uske seene ko dhanki choli ke gale se uska cleavage nazar aa raha tha.shah ne peechhe dekha & rambha ki nangi pith dekh uska lund khada ho gaya.rambha ne bahut dhoondne ke baad ye choli pasand ki thi kyuki use pata tha ki use isme dekh uska dusra shauhar josh me pagal ho jayega. Rambha ke mehandi lage hath uske ghutno pe the.shah jhuka & uske hatho ko chum liya.rambha ne Sharma ke hath peechhe khichne chahe to shah ne uska baya hath pakad liya & uski hatheli chum li.rambha uske hotho ki chhuan se sihar uthi.shah uski kalai se kangan & chudiya utarte hue chumne laga.kuchh hi palo me bistar ke 1 kone me uski dono kalaiyo se utre kangan & chudiya padi thi & shah uske dono hatho ko bethasha chume ja raha tha.rambha sharm se muskurate hue hath chhudane ki koshish kar rahi thi par shah ki pakad mazbut thi. Uske hatho ko pakde hue shah uske chehre pe jhuka & uske baye gaal ko chumne laga.rambha ab mast ho rahi thi.shah uske daye gaal ko chumne laga par uski nath aade aane lagi.shah ne uski nath utari & use baaho me bhar liya.nangi pith pe uske aaturta se firte hatho ne rambha ko masti me sihra diya & vo uski baaho me pighalne lagi.shah uske chehre ko apne hotho ki garmahat se laal kiye ja raha tha.shah uske baye gaal ko chumte hue uske baye kaan tak pahuncha jaha latka jhumka use chubh gaya.jhumka bas kaan ke chhed me latka hua tha.shah ne use danto se pakda & utar diya & fir uski kaan ki lau ko jibh se halke se chata & fir kata liya.rambha masti me karahi & jab uske shauhar ne yehi harkat daye kaan ke sath dohrayi to usne bhi use baaho me kas liya. Shah uske mathe ko chum raha tha.usne uski mang se tika hataya & apne naam ka sindur dekh uska dil rambha ke liye mohabbat & josh se bhar gaya.usne uski mang chumi & daya hath peechhe le ja uske jude ko khol diya.rambha ki gori pith pe kali zulfen bikhar gayi.shah uski reshmi zulfo ko uski pith pe sehlane laga to rambha ke jism me jhurjhuri daud gayi.shah use baaho me bhar chumte hue lita raha tha.phoolo se bhare bistar pe dono let gaye & 1 dusre ko chumne lage.dono ke hath 1 dusre ke jism pe fisal rahe the & hoth sile hue the.zubane aapas me gutthamguttha thi & jism 1 dusre se milne ko betab the. Rambha is waqt sab bhul chuki thi.use us kamre ke romani mahaul ke siwa & kisi baat ka hosh nahi tha.pajame me qaid shah ka lund uski chut pe daba tha,uski chhatiya vo apne seene se pees raha tha & uski mazbut baahe uski kamar ko jakde hui thi.shah ke mardana jism ki nazdiki se rambha ki chut ab bahut mast ho gayi thi.shah uske hotho ko chhod chumta hua uski garden pe aa gaya.rambha uske baalo ko sehla rahi thi.shah uske cleavage ko chum raha tha & uska daya hath uske pet pe ghum raha tha.vo uski nabhi ko kuredta & fir uske chikne pet ko sehlane lagta.rambha ki chut ki kasak ab bahut bahd gayi thi & vo apni janghe aapas me ragadne lagi thi.shah ko ab uske jism ka tajurba ho chuka tha & vo apni dulhan ki halat bakhubi samajh raha tha. Vo uske seene ko chumte hue neeche utra & uske pet ko chumne laga.rambha aahe bharne lagi.shah apni zuban uske pet pe ghumata & fir pet ke hisse ko munh me bhar chus leta.rambha bistar pe kasmasa rahi thi & uske baalo ko noch rahi thi.shah ne zuban uski nabhi me utar di & ghumane laga.ab baat rambha ki bardasht ke bahar ho gayi.vo shah ke sar pakad uski zuban ko apni nabhi se alag karne ki koshish karne lagi,us se ye ehsas saha nahi ja raha tha.par shah ne uski koshish nakaam kar di & uski nabhi ko & shiddat se chatne laga & tab tak chaatata raha jab tak rambha jhad nahi gayi & subakne lagi. Shah uske pairo ke paas chala gaya & unhe chumne laga.aisa karne se uske pairo ki payal bajne lagi & uski runjhun ne mahaul ko & romani bana diya.shah uske pairo ki ungliyo ko chumne ke baad upar badhne laga.jaise-2 vo upar badh raha tha,vaise-2 uska lehanga bhi upar sarakne laga.jyo-2 uski gori tange numaya ho rahi thi,shah ka josh bhi badh raha tha.rambha abhi bhi apni bhari-bharkam janghe masti me aahat ho ragad rahi thi.shah uski tango ko chumte hue uske ghutno taka a gaya tha & unhe chum raha tha.uske hath lehange ko rambha ki kamar tak utha chuke the & uski makhmali jangho pe besabri se ghum rahe the.rambha ki aahen ab & tezi se kamre me gunj rahi thi. Shah uske ghutno ke baad uski jangho pe aaya & unhe na keval chumne laga balki chusne bhi laga.rambha masti me bistar ki chadar & sar ke neeche ke takiye ko bhinch rahi thi & aisa karne me uske hatho tale bistar pe bichhi phoolo ki pankhudiya pis rahi thi.shah uski chut tak pahunch gaya tha.laal rang ki chhoti si satin panty me dhanki chut ki nashili khushbu naak se takrate hi shah use chodne ko aatur ho utha par vo janta tha ki thoda sabr rakhne se maza bhi doguna ho jayega. ------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------ kramashah.......


raj..
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Re: Jaal -जाल

Unread post by raj.. » 15 Dec 2014 03:14

जाल पार्ट--94 गतान्क से आगे...... उसके हाथ रंभा की बगल मे गये & लहँगे को खोल उसके जिस्म से उतार दिया.अब रंभा केवल चोली & पॅंटी मे थी.शाह उसके हुस्न को देख दीवाना हो रहा था.वो झुका & अपनी दुल्हन को बाहो मे भरा तो उसकी मस्ती मे डूबी बीवी ने भी उसे बाहो मे कस लिया.रंभा के हाथ उसके कुर्ते मे घुस गये & उसकी पीठ पे घूमने लगे.रंभा उसकी पीठ को वैसे ही भींच रही थी जैसे बिस्तर की चादर को.वो भी शाह को नंगा देखना चाहती थी & उसने उसका कुर्ता खींच दिया. कुर्ता निकालने के बाद उसने शाह को पलट के बिस्तर पे लिटाया & उसके चेहरे पे किस्सस की झड़ी लगा दी.उसके हाथ शाह के सीन एके बालो को खींच रहे थे & कुच्छ ही देर बाद उसके होंठ भी उन्ही बालो मे थे.वो शाह के सीने को चूमती & फिर उसके निपल्स को चूस लेती.शाह आँखे बंद करके आह भरता तो वो सीने पे काट लेती.शाह जोश मे पागल हो रहा था.रंभा चूमते हुए उसके पेट तक आ पहुँची थी.उसने शाह की नाभि मे जीभ फिराई & फिर वाहा के बालो को दाँत मे पकड़ के खींचा.शाह का लंड अब पाजामे की क़ैद से बाहर आने को बिल्कुल बहाल हो गया. रंभा ने पाजामे की डोर को दाँत से पकड़ उसकी गाँठ खोली & उसे नीचे सरका दिया.शाह अब पूरा नंगा था.रंभा ने लंड की फोर्सकीन को दन्तो मे बहुत हल्के से पकड़ के नीचे की तरफ खींचा तो शाह दर्द & अंसती के मिलेजुले एहसास से कराहा.रंभा मुस्कुराइ & उसकी फॉरेस्किन को नीचे कर उसके प्रेकुं से गीले सूपदे को चूसने लगी.अब कसमसाने की बारी शाह की थी.रंभा उसके आंडो को दबाती उसके सूपदे को चुस्ती रही.उसके बाद उसने लंड को हिलाते हुए चूसना & चाटना शुरू कर दिया.जीभ की नोक को लंड की लंबाई पे चलाते हुए जब उसने आंडो को मुँह मे भरा तो शाह मस्ती से आहत हो उठ बैठा & रंभा को पकड़ के अपनी बाहो मे भर लिया. दोनो बिस्तर पे घुटनो पे खड़े 1 दूसरे से लिपटे चूम रहे थे.शाह उसकी नंगी कमर को मसल रहा था & वो शाह की उपरी बाहो & कंधो पे अपने हाथ गर्मजोशी से घुमा रही थी.शाह के हाथ उसकी कमर से फिसल उसकी पॅंटी मे घुस गये.रंभा को कोमल गंद पे उसके हाथो का सख़्त एहसास बहुत अच्छा लग रहा था.उसकी चूत मे सनसनाहट होने लगी थी.शाह उसकी गंद की फांको को कभी आपस मे दबाता तो कभी बिल्कुल फैला देता.रंभा ने मस्ती मे सर पीछे झुका लिया था & अब उसके हाथ शाह की पीठ पे थे.शाह उसके क्लीवेज को चूम रहा था. शाह ने रंभा की पॅंटी नीचे सर्काई & घुटनो पे ही उसके पीछे आ गया & उसकी ज़ुल्फो को उसके बाए कंधे के उपर से आगे कर दिया & उसकी गर्दन & पीठ को चूमने लगा.उसकी चोली की गाँठ के पास पहुँचते ही उसने उसे दन्तो से खींच के खोल दिया.वो चूमता वो नीचे बढ़ा & उसकी कमर के मांसल हिस्सो को जम के चूमा. रंभा की गंद शाह के होंठो का अगला निशाना थी & हर बार की तरह इस बार भी वो उसे देख पागल हो गया & उसकी फांको को चूमने ,चूसने के साथ-2 काटने भी लगा.उसने रंभा की पॅंटी को उसके जिस्म से पूरी तरह अलग किया & फिर घुटनो पे ही उसके पीछे आ खड़ा हुआ.रंभा के गले से चोली को निकाल उसने उसकी बाहे उपर कर दी & उन्हे सहलाने लगा.रंभा पीछे झुक गयी & उसके बाए गाल को चूमने लगी.गंद मे चुभता लंड अब उसके जिस्म की आग को बहुत भड़का चुका था.शाह के हाथ उसकी मुलायम चूचियो से आ लगे थे & उन्हे मसल रहे थे.रंभा के हाथ अपने शौहर के हाथो के उपर आ लगे & उन्हे बढ़ावा देने लगे.शाह का लंड गंद की दरार मे अटक चुक्का था & रंभा अब गंद पीछे धकेल अपने दिल की हसरत जता रही थी.शाह का बाया हाथ उसकी चूचियो से ही चिपका रहा & दाया नीचे आया & उसकी चूत मे घुस गया.रंभा ने पीछे सर झटकते हुए आह भरी & टाँगे फैला दी.काफ़ी देर तक उसकी गर्दन & गाल चूमते हुए शाह उसकी चूचियो & चूत से खेलता रहा.जब उसने देखा की रंभा की गंद लंड पे कुच्छ ज़्यादा ही ध्यान दे रही है तब उसने चूत से हाथ को अलग किया & उसकी जगह अपने लंड को उसमे उतार दिया.रंभा ने बाई बाँह शाह की गर्देन मे डाल दी & दाए हाथ को अपनी कमर को जकड़े शाह की दाई बाँह पे रख दिया & उसकी चुदाई का मज़ा लेने लगी. शाह जब धक्का लगता तो उसके लंड की आस-पास का हिस्सा रंभा की मोटी गंद से टकराता & उसके आंडो मे अजीब सा मज़ा पैदा होता जिसकी तासीर वो पूरे जिस्म मे महसूस करता.शाह रंभा के कंधो & चेहरे को चूमता हुआ धक्के लगाए जा रहा था.रंभा अपनी चूत के अंदर-बाहर होते शाह के मोटे लंड की रगड़ से पागल हो रही थी.उसकी चूत अब शाह के लंड पे & कसने लगी तो वो समझ गया कि रंभा झड़ने के करीब है.उसने धक्को की रफ़्तार बढ़ा दी & रंभा के दाए कंधे पे अपने होंठ दबा दिए & उसकी चूचियो को बहुत ज़ोर से भींचा.शाह का लंड चूत मे कुच्छ & अंदर जाने लगा & रंभा की चूत ने उसे अपनी क़ातिल गिरफ़्त मे कस लिया.रंभा अपने शौहर की बाहो मे झाड़ रही थी. वो निढाल हो आगे झुक गयी & बिस्तर पे घुटनो & हाथो पे हो गयी.शाह उसकी कमर पकड़े उसकी गंद की फांको को मसलता धक्के लगाए जा रहा था.रंभा मस्ती की 1 लहर से उतार दूसरी पे सवार हो गयी थी.वो & आगे झुकी & बिस्तर पे लेट गयी.शाह भी उसके उपर लेट गया & उसके जिस्म के नीचे हाथ ले जाके 1 बार फिर उसकी चूचियो को जाकड़ लिया.दोनो को जिस्मो के भर तले फूलो की पंखुड़िया पिस रही थी & उनकी खुश्बू कमरे मे फैल रही थी.रंभा शाह के नीचे मदहोशी मे आहे भरती छॅट्पाटा रही थी.शाह के लंड की रगड़ ने उसे फिर से झाड़वा दिया. शाह उसके जिस्म से उपर उठा & बिना लंड बाहर खींचे रंभा को घुमा के सीधा लिटा दिया.उसने उसकी बाई टांग को उठा के अपने दाए कंधे पे रखा & उसे चूमते हुए चोदने लगा.रंभा अब पूरी तरह मदहोश थी & अपने हाथो से अपने चेहरे & जिस्म को बेसरबरी से सहला रही थी. महादेव शाह के हर धक्के पे रंभा के पैरो की पायल बजती & उसकी छन-2 सुन रंभा को हया & मस्ती का मिलाजुला अजब मदहोश करने वाला एहसास होता.शाह तो उसकी बाई टांग को चूमते हुए पायल की खनक से मतवाला हो रहा था.रंभा पानी से निकली मच्चली की तरह बिस्तर पे छॅट्पाटा रही थी.शाह का लंड उसकी कोख पे छोटे पे चोट कर रहा था & वो मस्ती मे बावली हुई जा रही थी.उसके होंठो से आहो के साथ मस्तानी आवाज़ें निकल रही थी.शाह ने उसकी दूसरी टांग भी अपने दूसरे कंधे पे चढ़ा ली & आगे झुका. ऐसा करने से रंभा की गंद हवा मे उठ गयी & शाह का लंड उसकी चूत के & अंदर जा उसकी कोख पे थोड़ा और ज़ोर से चोट करने लगा.उसकी जंघे उसकी छातियो पे दबी थी & उसका शौहर उसके चेहरे को थाम उसे चूम रहा था.रंभा के हाथ शाह की बाहो से लेके कंधे & सर के बालो से लेके जाँघो तक घूम रहे थे.जब से शाह ने उसे सीधा करके चोदना शुरू किया था तब से रंभा कितनी बार झाड़ चुकी थी ये उसे पता नही था. वो शाह को बाहो मे भरना चाहती थी,अपनी कमर उचका उसकी ताल से ताल मिला चुदाई मे उसका भरपूर साथ देना चाहती थी पर शाह के कंधो पे चढ़ि उसकी टाँगे इस काम मे आड़े आ रही थी.शाह भी उसके जिस्म के साथ अपने जिस्म को पूरी तरह से मिलाना चाहता था.उसने उसकी टांगको कंधो से उतारा & दोनो प्रेमियो ने 1 दूसरे को आगोश मे भर लिया.रंभा ने अपनी टाँगे शाह की टाँगो पे चढ़ा फँसा दी & उनके सहारे कमर उचका उसके हर धक्के का जवाब देने लगी.शाह के हाथ उसके कंधो के नीचे से फिसल उसकी गंद के नीचे जा पहुँचे थे & उसकी फांको को मसल रहे थे.रंभा के हाथ शाह की पीठ & गंद को छल्नी करने मे जुटे थे. शाह भी बहुत तेज़ धक्के लगा रहा था & रंभा की कमर भी उतनी ही तेज़ी से उचक रही थी.दोनो के बेसब्र जिस्म अब बस चैन पा जाना चाहते थे.दोनो 1 दूसरे को ऐसे पकड़े हुए थे मानो छ्चोड़ने पे क़यामत आ जाएगी!कमरे मे जिस्मो के टकराने की आवाज़ के साथ-2 रंभा की आहें गूँज रही थी की तभी रंभा की तेज़ आह के साथ 1 और आह भी गूँजी.ये आह शाह ने भरी थी जोकि इस बात का एलान थी कि अपनी दुल्हन के साथ-2 वो भी झाड़ गया है.रंभा की कोख मे जैसे ही शाह का गर्म,गाढ़ा वीर्य गिरा उसके जिस्म मे दौड़ती बिजली और भी तेज़ हो गयी.वो झड़ने की ऐसी शिद्दत से बिल्कुल मदहोश हो गयी.शाह का जिस्म भी झटके पे झटके खाए जा रहा था.रंभा की चूत उसके लंड पे ऐसे कसी हुई थी मानो उसके सारे वीर्य को निचोड़ लेना चाहती हो.दोनो लंबी-2 साँसे ले रहे थे.शाह का सर रंभा की छातियो पे था & वो आँखे बंद किए अपनी दुनिया मे खोई हुई थी.कुच्छ पल बाद जब मदहोशी थोड़ी कम हुई तो दोनो मस्ती मे सराबोर प्रेमी 1 दूसरे को चूम 1 दूसरे को इतनी खुशी महसूस करने का शुक्रिया अदा करने लगे. "वाह!बहुत अच्छे!शाह जी विधवा से शादी कर आप तो आज समाज सेवक भी बन गये!",कमरे का दरवाज़ा धड़ाक से खुला & 1 खिल्ली उड़ाती आवाज़ आई तो दोनो चौंक के घूमे और सामने खड़े शख्स को देख हैरत से उनकी आँखे फॅट गयी. रंभा ने जल्दी से पैरो के पास रखी चादर खींच अपने नंगे बदन को ढँका. "वाह!बहूरानी..",कमर पे हाथ रखे रीता उसे देख मुस्कुरा रही थी,"..जवानी ने इतना परेशान कर दिया तुम्हे!", "रीता..",महादेव शाह अपने कपड़े पहनता उसकी ओर बढ़ा. "चुप,कामीने!",रीता गुस्से से चीखी,"..वही खड़ा रह धोखेबाज़!",शाह और रंभा ने देखा की रीता के दोनो तरफ प्रणव और शिप्रा आ खड़े हुए थे और प्रणव के हाथ मे 1 पिस्टल थी.बंदूक देख रंभा के होश फाख्ता हो गये.उसका दिल बहुत ज़ोरो से धड़कने लगा.उसने सपने मे भी नही सोचा था कि खुद रीता वाहा आ जाएगी & वो भी इस रूप मे,"प्रणव,बांधो दोनो को." रीता ने उस से पिस्टल ले दोनो की ओर तान दी.प्रणव 1 छ्होटे से बॅग को लेके आगे बढ़ा.रंभा ने देखा की शाह बिल्कुल खामोश खड़ा था.प्रणव ने बॅग खोल 1 डक्ट टेप का रोल और 2 हथकड़िया निकाली & शाह के हाथ उसके बदन के पीछे बाँधने लगा.रंभा अपने कपड़े पहनने लगी.उसकी समझ मे नही आ रहा था कि आख़िर वो लोग उन्हे बाँध क्यू रहे हैं?..पोलीस बुलाके उन्हे उसके हवाले क्यू नही करते!..ऐसी सूरते हाल मे तो पोलीस को शक़ नही पूरा यकीन होगा कि समीर की मौत मे शाह और रंभा का ही हाथ है. "ले चलो दोनो को.",रीता का रूप देख रंभा को सबसे ज़्यादा हैरानी थी.तीनो ने दोनो बंधको को बाहर निकाल 1 कार मे डाला & चल दिए.दोनो के मुँह पे टेप लगा था & मुँह से आवाज़ निकाल मदद के लिए चिल्लाना नामुमकिन था.रंभा बाहर देख रही थी & उसकी समझ मे आ रहा था कि वो कहा जा रहे हैं. "उतरो!",रीता की कड़कदार आवाज़ गूँजी.रंभा ने बिल्कुल सही सोचा था,सब कंधार फॉल्स पे आ गये थे,"..महादेव शाह,बहुत शौक है ना तुम्हे ट्रस्ट ग्रूप का मालिक बनने का.तो आज तुम वही जाओगे जहा इस ग्रूप का पहला मालिक गया है.",रंभा चौंक गयी..तो क्या रीता ही विजयंत मेहरा के इस हाल की ज़िम्मेदार है. "चलो,प्रणव.फेंको दोनो को झरने मे.बहुत शौक है दोनो को रंगरेलिया मनाने का.अब दूसरी दुनिया मे जाके करना जितनी चुदाई करनी है!",रीता के होंठो पे शैतानी मुस्कान थी.ऐसा लगता था जैसे की वो रीता नही उसकी कोई हमशक्ल हो जो रीता होने का नाटक कर रही हो. "मुझे धोखा देने की सोच अच्छा नही किया,शाह.",प्रणव मुस्कुरा रहा था & शाह को झरने के पास बने बॅरियर की ओर ले जा रहा था.शाह अभी भी खामोश था.उसे यकीन नही हो रहा था कि उस से चूक कहा हुई..आज तक वो अपनी ज़िंदगी मे बस 1 उसूल मानता आया था वो ये कि किसी भी लड़की को ज़रूरत से ज़्यादा करीब नही आने दो.उसने वो उसूल तोड़ा & आज देखो उसका खेल ख़त्म होने वाला है.प्रणव ने उसके मुँह से टेप निकाला. "1 सवाल का जवाब मिलेगा?",शाह ने पुछा तो प्रणव ने अपनी सास को देखा. "पुछो.",रीता कमर पे हाथ रखे खड़ी थी. "तुम्हे हम दोनो के बारे मे पता कैसे चला?" ------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------ क्रमशः....... JAAL paart--94 gataank se aage...... Uske hath rambha ki bagal me gaye & lehange ko khol uske jism se utar diya.ab rambha keval choli & panty me thi.shah uske husn ko dekh deewana ho raha tha.vo jhuka & apni dulhan ko baaho me bhara to uski masti me dubi biwi ne bhi use baaho me kas liya.rambha ke hath uske kurte me ghus gaye & uski pith pe ghumne lage.rambha uski pith ko vaise hi bhinch rahi thi jaise bistar ki chadar ko.vo bhi shah ko nanga dekhna chahti thi & usne uska kurta khinch diya. Kurta nikalne ke baad usne shah ko palat ke bistar pe litaya & uske chehre pe kisses ki jhadi laga di.uske hath shah ke seen eke baalo ko khinch rahe the & kuchh hi der baad uske honth bhi unhi balo me the.vo shah ke seene ko chumti & fir uske nipples ko chus leti.shah aankhe band karke aah bharta to vo seene pe kaat leti.shah josh me pagal ho raha tha.rambha chumte hue uske pet taka a pahunchi thi.usne shah ki nabhi me jibh firayi & fir vaha ke baalo ko dant me pakad ke khincha.shah ka lund ab pajame ki qaid se bahar aane ko bilkul behaal ho gaya. Rambha ne pajame kid or ko dant se pakad uski ganth kholi & use neeche sarka diya.shah ab pura nanga tha.rambha ne lund ki forskin ko danto me bahut halke se pakad ke neeche ki taraf khincha to shah dard & amsti ke milejule ehsas se karaha.rambha muskurayi & uski foreskin ko neeche kar uske precum se gile supade ko chusne lagi.ab kasmasane ki bari shah ki thi.rambha uske ando ko dabati uske supade ko chusti rahi.uske baad usne lund ko hilate hue chusna & chatna shuru kar diya.jibh ki nok ko lund ki lambai pe chalate hue jab usne ando ko munh me bhara to shah masti se aahat ho uth baitha & rambha ko pakad ke apni baaho me bhar liya. Dono bistar pe ghutno pe khade 1 dusre se lipate chum rahe the.shah uski nangi kamar ko masal raha tha & vo shah ki upri baaho & kandho pe apne hath garmjoshi se ghuma rahi thi.shah ke hath uski kamar se fisal uski panty me ghus gaye.rambha ko komal gand pe uske hatho ka sakht ehsas bahut achha lag raha tha.uski chut me sansanahat hone lagi thi.shah uski gand ki fanko ko kabhi aapas me dabata to kabhi bilkul faila deta.rambha ne masti me sar peechhe jhuka liya tha & ab uske hath shah ki pith pe the.shah uske cleavage ko chum raha tha. Shah ne rasmbha ki panty neeche sarkayi & ghutno pe hi uske peechhe aa gaya & uski zulfo ko uske baye kandhe ke upar se aage kar diya & uski gardan & pith ko chumne laga.uski choli ki ganth ke paas pahunchte hi usne use danto se khinch ke khol diya.vo chumta hu neeche badha & uski kamar ke mansal hisso ko jum ke chuma. Rambha ki gand shah ke hotho ka agla nishana thi & har baar ki tarah is baar bhi vo use dekh pagal ho gaya & uski fanko ko chumne ,chusne ke sath-2 kaatne bhi laga.usne rambha ki panty ko uske jism se puri tarah alag kiya & fir ghutno pe hi uske peechhe aa khada hua.rambha ke gale se choli ko nikal usne uski baahe upar kar di & unhe sehlane laga.rambha peechhe jhuk gayi & uske baye gaal ko chumne lagi.gand me chubhta lund ab uske jism ki aag ko bahut bhadka chuka tha.shah ke hath uski mulayam chhatiyo se aa lage the & unhe masal rahe the.rambha ke hath apne shauhar ke hatho ke upar aa lage & unhe badhawa dene lage.shah ka lund gand ki darar me atak chukka tha & rambha ab gand peechhe dhakel apne dil ki hasrat jata rahi thi.shah ka baya hath uski chhatiyo se hi chipka raha & daya neeche aaya & uski chut me ghus gaya.rambha ne peechhe sar jhatakte hue aah bhari & tange phaila di.kafi der tak uski gardan & gaal chumte hue shah uski choochiyo & chut se khelta raha.jab usne dekha ki rambha ki gand lund pe kuchh zyada hi da rahi hai tab usne chut se hath ko alag kiya & uski jagah apne lund ko usme utar diya.rambha ne bayi banh shah ki garden me daal di & daye hath ko apni kamar ko jakde shah ki dayi banh pe rakh diya & uski chudai ka maza lene lagi. Shah jab dhakka lagata to uske lund kea aas-paas ka hissa rambha ki moti gand se takrata & uske ando me ajib sa maza paida hota jiski taseer vo pure jism me mehsus karta.shah rambha ke kandho & chehre ko chumta hua dhakke lagaye ja raha tha.rambha apni chut ke andar-bahar hote shah ke mote lund ki ragad se pagal ho rahi thi.uski chut ab shah ke lund pe & kasne lagi to vo samajh gaya ki rambha jhadne ke karib hai.usne dhakko ki raftar badha di & rambha ke daye kandhe pe apne honth daba diye & uski choochiyo ko bahut zor se bhincha.shah ka lund chut me kuchh & andar jane laga & rambha ki chut ne use apni qatil giraft me kas liya.rambha apne shauhar ki baaho me jhad rahi thi. Vo nidhal ho aage jhuk gayi & bistar pe ghutno & hatho pe ho gayi.shah uski kamar pakde uski gand ki fanko ko masalta dhakke lagae ja raha tha.rambha masti ki 1 lehar se utar dusri pe savar ho gayi thi.vo & aage jhuki & bistar pe let gayi.shah bhi uske upar let gaya & uske jism ke neeche hath le jake 1 baar fir uski choochiyo ko jakad liya.dono ko jismo ke bhar tale phoolo ki pankhudiya pis rahi thi & unki khushbu kamre me phail rahi thi.rambha shah ke neeche madhoshi me aahe bharti chhatpata rahi thi.shah ke lund ki ragad ne use fir se jhadwa diya. Shah uske jism se upar utha & bina lund bahar khinche rambha ko ghuma ke seedha lita diya.usne uski bayi tang ko utha ke apne daye kandhe pe rakha & use chumte hue chodne laga.rambha ab puri tarah madhosh thi & apne hatho se apne chehre & jism ko besarbri se sehla rahi thi. Mahadev Shah ke har dhakke pe Rambha ke pairo ki payal bajti & uski chhan-2 sun rambha ko haya & masti ka milajula ajab madhosh karne vala ehsas hota.shah to uski bayi tang ko chumte hue payal ki khanak se matwala ho raha tha.rambha pani se nikli machhli ki tarah bistar pe chhatpata rahi thi.shah ka lund uski kokh pe chote pe chot kar raha tha & vo masti me bawli hui ja rahi thi.uske hontho se aaho ke sath mastani aavazen nikal rahi thi.shah ne uski dusri tang bhi apne dusre kandhe pe chadha li & aage jhuka. aisa karne se rambha ki gand hawa me uth gayi & shah ka lund uski chut ke & andar ja uski kokh pe thoda & zor se chot karne laga.uski janghe uski chhatiyo pe dabi thi & uska shauhar uske chehre ko tham use chum raha tha.rambha ke hath shah ki baaho se leke kandhe & sar ke baalo se leke jangho tak ghum rahe the.jab se shah ne use seedha karke chodne shuru kiya tha tab se rambha kitni baar jhad chuki thi ye use pata nahi tha. vo shah ko baaho me bharna chahti thi,apni kamar uchka uski taal se taal mila chudai me uska bharpur sath dena chahti thi par shah ke kandho pe chadhi uski tange is kaam me aade aa rahi thi.shah bhi uske jism ke sath apne jism ko puri tarah se milana chahta tha.usne uski tangko kandho se utara & dono premiyo ne 1 dusre ko agosh me bhar liya.rambha ne apni tange shah ki tango pe chadha phansa di & unke sahare kamar uchka uske har dhakke ka jawab dene lagi.shah ke hath uske kandho ke neeche se fisal uski gand ke neeche ja pahunche the & uski phanko ko masal rahe the.rambha ke hath shah ki pith & gand ko chhalni karne me jute the. shah ba bahut tez dhakke laga raha tha & rambha ki kamar bhi utni hi tezi se uchak rahi thi.dono ke besabr jism ab bas chain pa jana chahte the.dono 1 dusre ko aise pakde hue themano chhodne pe qayamat aa jayegi!kamre me jismo ke takrane ki aavaz ke sath-2 rambha ki aahen gunj rahi thi ki tabhi rambha ki tez aah ke sath 1 & aah bhi gunji.ye aah shah ne bhari thi joki is baat ka elan thi ki apni dulhan ke sath-2 vo bhi jhad gaya hai.rambha ki kokh me jaise hi shah ka garm,gadha virya gira uske jism me daudti bijli & bhi tez ho gayi.vo jhadne ki aisi shiddat se bilkul madhosh ho gayi.shah ka jism bhi jhatke pe jhatke khaye ja raha tha.rambha ki chut uske lund pe aise kasi hui thi mano uske sare virya ko nichod lena chahti ho.dono lambi-2 sanse le rahe the.shah ka sar rambha ki chhatiyo pe tha & vo aankhe band kiye apni duniya me khoyi hui thi.kuchh pal baad jab madhoshi thodi kam hui to dono masti me sarabor premi 1 dusre ko chum 1 dusre ko itni khushi mehsus karane ka shukriya ada karne lage. "vaah!bahut achhe!shah ji vidhwa se shadi kar aap to aaj samaj sevak bhi ban gaye!",kamre ka darwaza dhadak se khula & 1 khilli udati aavaz aayi to dono chaunk ke ghume & samne khade shakhs ko dekh hairat se unki aankhe phat gayi. Rambha ne jaldi se pairo ke paas rakhi chadar khinch apne nange badan ko dhanka. "vaah!bahurani..",kamar pe hath rakhe Rita use dekh muskura rahi thi,"..jawani ne itna pareshan kar diya tumhe!", "Rita..",Mahadev Shah apne kapde pehanta uski or badha. "chup,kamine!",rita gusse se chikhi,"..vahi khada reh dhokhebaaz!",shah & rambha ne dekha ki rita ke dono taraf Pranav & Shipra aa khade hue the & pranav ke hath me 1 pistol thi.banduk dekh rambha ke hosh fakhta ho gaye.uska dil bahut zoro se dhadakne laga.usne sapne me bhi nahi socha tha ki khud rita vaha aa jayegi & vo bhi is roop me,"pranav,bandho dono ko." rita ne us se pistol le dono ki or taan di.pranav 1 chhote se bag ko leke aage badha.rambha ne dekha ki shah bilkul khamosh khada tha.pranav ne bag khol 1 duct tape ka roll & 2 hathkadiya nikali & shah ke hath uske badan ke peechhe bandhne laga.rambha apne kapde pehanane lagi.uski samajh me nahi aa raha tha ki aakhir vo log unhe bandh kyu rahe hain?..police bulake unhe uske hawale kyu nahi karte!..aisi surate haal me to police ko shaq nahi pura yakin hoga ki Sameer ki maut me shah & rambha ka hi hath hai. "le chalo dono ko.",rita ka roop dekh rambha ko sabse zyada hairani thi.teeno ne dono bandhako ko bahar nikal 1 car me dala & chal diye.dono ke munh pe tape laga tha & munh se aavaz nikal madad ke liye chillana namumkin tha.rambha bahar dekh rahi thi & uski samajh me aa raha tha ki vo kaha ja rahe hain. "utro!",rita ki kadakdar aavaz gunji.rambha ne bilkul sahi socha tha,sab Kamdhar Falls pe aa gaye the,"..mahadev shah,bahut shauk hai na tumhe Trust Group ka mailk banane ka.to aaj tum vahi jaoge jaha is group ka pehla malik gaya hai.",rambha chaunk gayi..to kya rita hi Vijayant Mehra ke is haal ki zimmedar hai. "chalo,pranav.fenko dono ko jharne me.bahut shauk hai dono ko rangreliya manane ka.ab dusri duniya me jake karna jitni chudai karni hai!",rita ke hotho pe shaitani muskan thi.aisa lagta tha jaise ki vo rita nahi uski koi humshakl ho jo rita hone ka natak kar rahi ho. "mujhe dhokha dene ki soch achha nahi kiya,shah.",pranav muskura raha tha & shah ko jahrne ke paas bane barriere ki or le ja raha tha.shah abhi bhi khamosh tha.use yakin nahi ho raha tha ki us se chuk kaha hui..aaj tak vo apni zindagi me bas 1 usul manta aaya tha vo ye ki kisi bhi ladki ko zarurat se zyada karib nahi aane do.usne vo usul toda & aaj dekho uska khel khatm hone vala hai.pranav ne uske munh se tape nikala. "1 sawal ka jawab milega?",shah ne puchha to pranav ne apni saas ko dekha. "puchho.",rita kamar pe hath rakhe khadi thi. "tumhe hum dono ke bare me pata kaise chala?" ------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------ kramashah.......


raj..
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Re: Jaal -जाल

Unread post by raj.. » 15 Dec 2014 03:15

जाल पार्ट--95

गतान्क से आगे......

"सब तुम्हारी ग़लती थी,दयाल.",रंभा की आँखे हैरत से फॅट गयी..दयाल!..उसकी मा की ज़िंदगी बेनूर करने वाला,देवेन को जैल भिजवाने वाला दयाल,"..तुमने मुझे भेजा था ना वो पता चेक करने के लिए.उस पते को चेक कर मैं किसी काम से ट्रस्ट फिल्म्स के दफ़्तर जा रही थी.वाहा के बेसमेंट मे मैने तुम्हारी कार देखी.पहले तो मैने सोचा कि तुम्हे रोकू पर फिर ना जाने क्यू सोचा कि देखु तुम यहा क्या कर रहे हो.उसके बाद तुम्हारा पीछा किया & उस दिन से पीछा ही कर रही हू." "..और ये सोच रहे हो ना कि मेरी कार तुम कैसे नही पहचान पाए तो मेरे धोखेबाज़ आशिक़ मेरी कार मे कुच्छ गड़बड़ थी और मैं अपनी बेटी की कार लेके आई थी.",रंभा टेप के पीछे से चिल्लाना चाह रही थी.उसकी आँखो मे आँसू छलक आए थे.वो इस वक़्त बहुत असहाय महसूस कर रही थी.इतने दिन वो अपने दुश्मन के साथ हमबिस्तर होती रही और उसका भरपूर मज़ा उठाती रही..उसे खुद से घिन हो गयी..क्यू है वो ऐसी?..अपने जिस्म की गुलाम! प्रणव शाह को झरने के किनारे तक ले गया था & धक्का देने ही वाला था की सारा इलाक़ा रोशनी से नहा गया और 1 कड़कदार आवाज़ गूँजी,"रुक जाओ!" रंभा,रीता,प्रणव & शिप्रा सभी उस आवाज़ के मालिक से अच्छी तरह वाकिफ़ थे.रंभा के कानो मे जैसे ही वो आवाज़ पड़ी उसका दिल खुशी से भर गया & राहत महसूस करते ही उसकी रुलाई छूट गयी.रीता & उसके बेटी-दामाद उस आवाज़ को सुन जहा के तहा जम गये थे.उन्हे यकीन नही हो रहा था.उन्होने देखा तो 4 पोर्टबल फ्लडलाइट्स की रोशनी से उनकी आँखे चुन्धिया गयी & रोशनी के पीछे से 1 लंबा-चौड़ा शख्स सामने आया जिसे देख हैरानी और ख़ौफ्फ ने उन्हे आ घेरा. "नही..!",रीता बस इतना ही बोल पाई कि उस शख्स के पीछे 1 और इंसान आ खड़ा हुआ..ऐसा नही हो सकता था..2 मरे इंसान ऐसे कैसे वापस आ सकते थे.विजयंत मेहरा अपने बेटे के साथ उनके सामने खड़ा था. किसी ने रीता के हाथ से पिस्टल ली तो उसने देखा 1 अंजान शख्स उसकी पिस्टल ले उसे 1 किनारे ले जा रहा था.अचानक वाहा बहुत सारे लोग आ गये थे और 1 बूढ़ा सा शख्स जिसके गाल पे निशान था शाह और प्रणव की ओर बढ़ रहा था.उस शख्स ने बॅरियर पार किया और उस घबराहट मे भी रीता ने देखा कि दयाल उसे देख बौखला गया था..दयाल..शातिर दयाल बौखला गया था! "आज मेरी तलाश ख़त्म हुई कमिने!",देवेन ने प्रणव को किनारे धकेला & शाह/दयाल का गिरेबान पकड़ लिया,"..बहुत चालाक है तू पर मेरे मामूली से जाल मे फँस गया.हैं!",देवेन मुस्कुरा रहा था.1 आदमी रंभा की हथकड़ी खोल रहा था & उसके मुँह से टेप हटा रहा था. "देवेन..",रंभा रोती हुई उसके करीब आई. "आओ,रंभा.यही है वो कमीना जिसने मेरी & सुमित्रा की ज़िंदगी उजाड़ दी थी." "देवेन,मैं इसके.." "कोई बात नही.उसका ज़िम्मेदार भी मैं ही हू.मुझे पता चल गया था कि ये कौन है फिर भी मैने तुम्हे नही बताया क्यूकी मुझे इसके बच निकलने का डर था.इसके लिए तुम मुझे जो भी सज़ा दोगि,मुझे मंज़ूर है.",रंभा बिलखती उसके सीने से लग गयी & उसके सीने पे मुक्के मारने लगी.1 आदमी दयाल को वाहा से ले जा रहा था तो देवेन ने उसे रोका,"..बस थोड़ी के लिए देर इसके हाथ खोल इसे मेरे हवाले कर दो.",उस आदमी ने दयाल की हथकड़ी खोल दी. देवेन ने दयाल का गिरेबान पकड़ा और उसे पीटने लगा.उस आदमी ने देवेन को रोकने की कोशिश की पर तभी दूर खड़े 1 शख्स ने अपना हाथ उठा उसे ऐसा करने से रोका.देवेन दयाल को बुरी तरह मार रहा था. "देवेन..इतनी नफ़रत है तो मुझे धकेल दे ना इस झरने मे.",दयाल मुस्कुराया तो देवेन ने उसके पेट मे 1 घूँसा जडा. "साले!तू खुद को बहुत शातिर समझता है ना!",उसने उसके जबड़े पे करारा वार किया,"..मैं तुझे यहा से धकेल दू ताकि तू फ़ौरन मर जाए.नही,दयाल..जैसे मैं जैल मे सड़ा हू वैसे तू भी उन सलाखो के पीछे सड़ेगा..हर वक़्त खुद को कॉसेगा & 1 रोज़ सलाखो से सर पीट-2 के अपनी जान दे देगा.",देवेन ने उसे पकड़ के उसी शख्स की ओर धकेल दिया जो उसे पकड़ने आया था.उसने दयाल को हथकड़ी बँधी और उसे ले गया. "हो गया भाई देवेन तुम्हारा.",अमोल बपत वाहा आया तो देवेन मुस्कुरा दिया. "इसे तो क़यामत तक पीटता रहू तो भी मेरा जी नही भरेगा,बपत साहब." "तो चलो यार,शर्मा साहब इंतेज़ार कर रहे हैं & फिर ज़रा मेहरा परिवार के लोगो के चेहरे तो देखो.सबको असल बात तो बताई जाए." "चलिए.",देवेन हंसा और रंभा के कंधे पे हाथ रख 1 कार की तरफ बढ़ गया. सवेरे के 3 बज रहे थे जब वो क्लेवर्त पोलीस के हेडक्वॉर्टर पहुँचे.रीता,प्रणव & शिप्रा अभी भी हैरत और शायद शॉक मे थे. "देवेन जी..",1 करीब 45 बरस के मून्छो वाले शख्स ने देवेन को इशारा किया,"..सारी बात बताने के लिए आपसे बेहतर कोई शख्स नही है.तो शुरू कीजिए.",सभी 1 कमरे मे बैठे थे. "थॅंक यू,शर्मा साहब,"..ये मिस्टर.एस.के.शर्मा हैं,क्बाइ के स्पेशल क्राइम्स डिविषन मे स्प हैं और ये हैं मिस्टर.अमोल बपत,गोआ के फॉरिनर्स रेजिस्ट्रेशन ऑफीस के हेड & झरने पे जो बाकी लोग थे,वो सभी CBई या लोकल पोलीस के आदमी हैं." "..मैने जब अख़बार मे इश्तेहार दिया तो दयाल ने किसी को उस पते को चेक करने के लिए भेजा तो मुझे विजयंत मेहरा की फ़िक्र हो गयी..अरे-2 मैने रीता जी को तो बताया ही नही कि उनके शौहर हमे कैसे मिले.",सभी हंस पड़े सिवाय रीता & उसके बच्चो के.देवेन ने विजयंत के मिलने का किस्सा बताया. "तो मैं यहा से हराड चला गया पर जाने से पहले मैने बपत साहब को सारी बात बताई.बपत साहब ने बहुत सोचने के बाद शर्मा साहब से कॉंटॅक्ट किया.आप दोनो की जितनी तारीफ की जाए कम है..",वो दोनो अफसरो से मुखातिब हुआ,"..कहा जाता है कि पोलीस हमेशा देर से पहुँचती है पर उस दिन आपकी वजह से पोलीस वक़्त से पहले पहुँची.." "..दयाल ने शाम को फिर किसी पैसे लेके काम करने वाले गुंडे को वाहा भेजा & वो पोलीस के हाथ लग गया.शर्मा साहब ने सूझ-बूझ दिखाते हुए उस गुंडे के ज़रिए महादेव शाह का पता लगा लिया & जब मुझे शाह की तस्वीर दिखाई गयी तो मैने अपने दुश्मन को फ़ौरन पहचान लिया.बपत साहब तो धोखा खा गये थे." "अरे यार!..बीसेसर गोबिंद का मेकप इतना ज़बरदस्त किया था इसने कि मुझे दोनो की शक्ल मे कोई समानता दिखी ही नही!",कमरे मे फिर हल्की हँसी गूँजी,"..वो तो हमने 1 फेस डिटेक्षन & आइडेंटिफिकेशन सॉफ़्टवर्रे के ज़रिए इस आदमी के नक़ली नामो वाले पासपोर्ट्स की फोटोस से शाह के फोटो मिलाए & फिर हमे इसी के दयाल होने का यकीन हो गया." "तो ये थी दयाल की कहानी.CBई ने इसकी निगरानी शुरू कर दी.ये चाहते तो पहले ही दिन दयाल को गिरफ्तार कर सकते थे पर मेरे कहने पे ना केवल इन्होने विजयंत की गुत्थी सुलझाने की गरज से इसे गिरफ्तार नही किया बल्कि उस काम मे भी हमारी मदद की." "..समीर का आक्सिडेंट हुआ पर उसे बस मामूली खरॉच आई थी.दयाल ने जिस ट्रक ड्राइवर को ये काम सौंपा था उसे हमने गिरफ्तार किया & फिर उसने हमारी देख-रेख मे आक्सिडेंट करने के बाद दयाल से वही बोला जो हमने उस से कहवाया.मॉर्चुवरी से 1 समीर के हुलिए से मिलती-जुलती लाश पहले ही तैय्यार थी.उसे समीर के कपड़े पहना के हमने कार मे डाला.चेहरा ज़ख़्मी था & किसी को शुबहा नही हुआ की लाश समीर की नही जबकि असली समीर सीबीआई के पास था.." "..समीर को हमने विजयंत के सामने किया & कमाल हो गया!" "हां..",विजयंत खड़ा हो गया,"..आगे की कहानी मैं सुनाता हू.शर्मा साहब ने 1 बहुत उम्दा डॉक्टर से मेरी जाँच करवाई थी & उसी के कहे मुताबिक समीर और मेरी मुलाकात कंधार पे करवाई गयी.उस वक़्त मैनेक्या महसूस किया ये मैं बयान नही कर सकता..लगा जैसे दिमाग़ मे 1 धमाका हुआ..अनगिनत तस्वीरे 1 साथ उभरने & गायब होने लगी & मेरा सरदर्द से फटने लगा & मैं बेहोश हो गया & जब होश आया तो मुझे सब याद आ गया था.." "..उस रात फोन आने के बाद मैं सोनिया के साथ कंधार पहुँचा.सोनिया को मैने ब्रिज कोठारी को जज़्बाती चोट पहुचाने की गरज से अपने इश्क़ के जाल मे फँसाया था.जब मैं वाहा पहुँचा तो मुझे समीर झरने के पास बँधा दिखा.मैं भागता उसके पास गया कि ब्रिज भी वाहा आ गया और मुझपे टूट पड़ा.हम गुत्थमगुत्था थे जब मैने देखा कि समीर अपनी जगह से उठ खड़ा हुआ.उसके हाथ बँधे नही थे बस उसकी कलाईयो पे रस्सी लिपटी थी.मैने सोचा कि मेरा बेटा मुझे बचाएगा..",विजयंत समीर को घूर रहा था,".पर उसने मुझे ब्रिज सहित किनारे से धकेल दिया & मेरे पीछे-2 उस मासूम सोनिया को भी.",कमरे मे बिल्कुल खामोशी थी. "क्यू किया तुमने ऐसा समीर?",विजयंत ने बहुत हल्की आवाज़ मे पुछा. ""क्यूकी आपने कामया को अपनी हवस का शिकार बनाया था.",समीर की आंखो मे पानी था & साथ ही अँगारे भी. "शिप्रे ने मेरे गुजरात से लौटने पे जो पार्टी दी थी,उसमे मैने आप दोनो को कमरे से बाहर आते देख लिया था.कामया मेरा पहला प्यार थी & मैं गुस्से से बौखला उठा था.उसी ने मुझे बताया कि आप उसे बलcक्मैल करते हैं कि अगर वो आपके साथ नही सोई तो आप उसका करियर तबाह कर देंगे." "झूठ बक रही थी वो.अपनी मर्ज़ी से सोती थी वो मेरे साथ.मेरी बात पे यकीन नही होगा पर पोलीस की बात पे होगा ना!",विजयंत ने अभी तक समीर से उस से ये सारी बाते नही की थी.शर्मा के इशारे पे 1 इनस्पेक्टर कमरे से बाहर गया & जब लौटा तो कामया उसके साथ थी,"..अब बताओ आगे की कहानी." "हरपाल सिंग पैसो और कामया के जिस्म के लालच मे मेरे साथ मिल गया.उसका पार्टी मे नशे मे बकना,मेरे खिलाफ बात करना सब प्लान का हिस्सा था.रंभा से शादी और आपसे झगड़ा & फिर पंचमहल आना सब मैने सोच रखा था.मैं जानता था की गायब हुआ तो आप मेरी तलाश मे ज़रूर आएँगे." "पर मैं ही क्यू?",रंभा गुस्से मे थी. "क्यूकी तुम ही सामने थी और तुमसे इश्क़ का नाटक करना भी आसान था." "हरपाल का क्या हुआ?" "मुझे नही पता.वो पैसे लेके गायब हो गया." "अच्छा और कोई नही था तुम्हारे साथ?",विजयंत की मुस्कान मे गुस्से से भी ज़्यादा दर्द था. "मोम थी.ये बदला मैने मोम के लिए भी लिया था.आप बस अयस्शिया करते रहते & वो बेचारी अकेली बैठी रहती.मोम ने मेरा पूरा साथ दिया इस बात मे." ------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------ क्रमशः....... JAAL paart--95 gataank se aage...... "sab tumhari galti thi,Dayal.",rambha ki aankhe hairat se phat gayi..dayal!..uski maa ki zindagi benoor karne vala,Deven ko jail bhijwane vala dayal,"..tumne mujhe bheja tha na vo pata check karne ke liye.us pate ko check kar main kisi kaam se Trust Films ke daftar ja rahi thi.vaha ke basement me maine tumhari car dekhi.pehle to maine socha ki tumhe roku par fir na jane kyu socha ki dekhu tum yaha kya kar rahe ho.uske baad tumhara peechha kiya & us din se peechha hi kar rahi hu." "..& ye soch rahe ho na ki meri car tum kaise nahi pehchan paye to mere dhokhebaz aashiq meri car me kuchh gadbad thi & main apni beti ki car leke aayi thi.",rambha tape ke peechhe se chillana chah rahi thi.uski aankho me aansu chhalak aaye the.vo is waqt bahut asahay mehsus kar rahi thi.itne din vo apne dushman ke sath humbistar hoti rahi & uska bharpur maza uthati rahi..use khud se ghin ho gayi..kyu hai vo aisi?..apne jism ki ghulam! pranav shah ko jharne ke kinare tak le gaya tha & dhakka dene hi vala tha ki sara ilaka rsohni se naha gaya & 1 kadakdar aavaz gunji,"ruk jao!" rambha,rita,pranav & shipra sabhi us aavaz ke malik se achhi tarah vakif the.rambha ke kano me jaise hi vo aavaz padi uska dil khushi se bhara gaya & rahat mehsus karte hi uski rulayi chhut gayi.rita & uske beti-damad us aavaz ko sun jaha ke taha jum gaye the.unhe yakin nahi ho raha tha.unhone dekha to 4 portable floodlights ki roshni se unki aankhe chundhiya gayi & roshni ke peechhe se 1 lamba-chauda shakhs samne aaya jise dekh hairani & khauff ne unhe aa ghera. "nahi..!",rita bas itna hi bol payi ki us shakhs ke peechhe 1 & insan aa khada hua..aisa nahi ho sakta tha..2 mare insan aise kaise vapas aa sakte the.vijayant mehra apne bete ke sath unke samne khada tha. kisi ne rita ke hath se pistol li to usne dekha 1 anjan shakhs uski pistol le use 1 kinare le ja raha tha.achanak vaha bahut sare log aa gaye the & 1 boodha sa shakhs jiske gaal pe nishan tha shah & pranav ki or badh raha tha.us shakhs ne barrier paar kiya & us ghabrahat me bhi rita ne dekha ki dayal use dekh baukhla gaya tha..dayal..shatir dayal baukhla gaya tha! "aaj meri talash khatm hui kamine!",deven ne pranav ko kinare dhakela & shah/dayal ka gireban pakad liya,"..bahut chalak hai tu par mere mamuli se jaal me phans gaya.hain!",deven muskura raha tha.1 aadmi rambha ki hathkadi khol raha tha & uske munh se tape hata raha tha. "deven..",rambha roti hui uske karib aayi. "aao,rambha.yehi hai vo kamina jisne meri & Sumitra ki zindagi ujad di thi." "deven,main iske.." "koi baat nahi.uska zimmedar bhi main hi hu.mujhe pata chal gaya tha ki ye kaun hai fir bhi maine tumhe nahi bataya kyuki mujhe iske bach nikalne ka darr tha.iske liye tum mujhe jo bhi saza dogi,mujhe manzur hai.",rambha bikalhti uske seene se lag gayi & uske seene pe mukke marne lagi.1 aadmi dayal ko vaha se le ja raha tha to deven ne use roka,"..bas thodi ke liye der iske hath khol ise mere hawale kar do.",us aadmi ne dayal ki hathkadi khol di. deven ne dayal ka gireban pakda & use pitne laga.us aadmi ne deven ko rokne ki koshish ki par tabhi door khade 1 shakhs ne apna hath utha use aisa karne se roka.deven dayal ko buri tarah maar raha tha. "deven..tini nafrat hai to mujhe dhakel de na is jharne me.",dayal muskuraya to deven ne uske pet me 1 ghunsa jada. "sale!tu khud ko bahut shatir samajhta hai na!",usne uske jabde pe karara var kiya,"..main tujhe yaha se dhakel du taki tu fauran mar jaye.nahi,dayal..jaise main jail me sada hu vaise tu bhi un salakho ke peechhe sadega..har waqt khud ko kosega & 1 roz salakho se sar peet-2 ke apni jaan de dega.",deven ne use pakad ke usi shakhs ki or dhakel diya jo use pakadne aaya tha.usne dayal ko hathkadi bandhi & use le gaya. "ho gaya bhai deven tumhara.",Amol Bapat vaha aaya to deven muskura diya. "ise to qayamat tak peetata rahu to bhi mera ji nahi bharega,bapat sahab." "to chalo yaar,Sharma sahab intezar kar rahe hain & fir zara Mehra parivar ke logo ke chehre to dekho.sabko asal baat to batayi jaye." "chaliye.",deven hansa & rambha ke kandhe pe hath rakh 1 car ki taraf badh gaya. savere ke 3 baj rahe the jab vo clayworth police ke headquarter pahunche.rita,pranav & shipra abhi bhi hairat & shayad shock me the. "Deven ji..",1 karib 45 baras ke moonchho vale shakhs ne deven ko ishara kiya,"..sari baat batane ke liye aapse behtar koi shakhs nahi hai.to shuru kijiye.",sabhi 1 kamre me baithe the. "thank you,Sharma sahab,"..ye Mr.S.K.Sharma hain,CBI ke special crimes division me SP hain & ye hain Mr.Amol Bapat,Goa ke foreigners registration office ke head & jharne pe jo baki log the,vo sabhi CBI ya local police ke aadmi hain." "..maine jab akhbar me ishtehar diya to Dayal ne kisi ko us pate ko check karne ke liye bheja to mujhe Vijayant Mehra ki fikr ho gayi..are-2 maine Rita ji ko to batay hi nahi ki unke shauhar hume kaise mile.",sabhi hans pade siway rita & uske bachcho ke.deven ne vijayant ke milne ka kissa bataya. "to main yaha se Haraad chala gaya par jane se pehle maine bapat sahab ko sari baat batayi.bapat sahab ne bahut sochne ke baad sharma sahab se contact kiya.aap dono ki jitni tarif ki jaye kam hai..",vo dono afsaro se mukhatib hua,"..kaha jata hai ki police humesha der se pahunchti hai par us din aapki vajah se police waqt se pehle pahunchi.." "..dayal ne sham ko fir kisi paise leke kaam karne vale gunde ko vaha bheja & vo police ke hath lag gaya.sharma sahab ne sujh-bujh dikhate hue us gunde ke zariye Mahadev Shah ka pata laga liya & jab mujhe shah ki tasvir dikhayi gayi to maine apne dushman ko fauran pehchan liya.bapat sahab to dhokha kha gaye the." "are yaar!..Bisesar Gobind ka makeup itna zabardast kiya tha isne ki mujhe dono ki shakl me koi samanta dikhi hi nahi!",kamre me fir halki hansi gunji,"..vo to humne 1 face detection & identification softwarre ke zariye is aadmi ke naqli namo vale passports ki photos se shah ke photo milaye & fir hume isi ke dayal hone ka yakin ho gaya." "to ye thi dayal ki kahani.CBI ne iski nigrani shuru kar di.ye chahte to pehle hi din dayal ko giraftar kar sakte the par mere kehne pe na keval inhone Vijayant ki gutthi suljhane ki garaz se ise giraftar nahi kiya balki us kaam me bhi humari madad ki." "..Sameer ka accident hua par use bas mamuli kharoch aayi thi.dayal ne jis truck driver ko ye kaam saunpa tha use humne giraftar kiya & fir usne humari dekh-rekh me accident karne ke baad dayal se vahi bola jo humne us se kahwaya.mortuary se 1 sameer ke huliye se milti-julti lash pehle hi taiyyar thi.use sameer ke kapde pehna ke humne car me dala.chehra zakhmi tha & kisi ko shubaha nahi hua ki lash sameer ki nahi jabki asli sameer cbi ke paas tha.." "..sameer ko humne vijayant ke samne kiya & kamal ho gaya!" "haan..",vijayant khada ho gaya,"..aage ki kahani main sunata hu.sharma sahab ne 1 bahut umda doctor se meri janch karwayi thi & usi ke kahe mutabik sameer & meri mulakat Kamdhar pe karvayi gaya.us waqt mainekya mehsus kiya ye mai bayan nahi kar sakta..laga jaise dimagh me 1 dhamaka hua..anginat tasveere 1 sath ubharne & gayab hone lagi & mera sardard se phatne laga & main behosh ho gaya & jab hosh aaya to mujhe sab yaad aa gaya tha.." "..us raat phone aane ke baad main Soniya ke sath kamdhar pahuncha.soniya ko maine Brij Kothari ko jazbati chot pahuchahne ki garaj se apne ishq ke jaal me phansaya tha.jab main vaha pahuncha to mujhe sameer jharne ke paas bandha dikha.main bhagta uske paas gaya ki brij bhi vaha aa gaya & mujhpe ttot pada.hum gutthamguttha the jab maine dekha ki sameer apni jagah se uth khada hua.uske hath bahde nahi the bas uski kalaiyo pe rassi lipati thi.maine socha ki mera beta mujhe bachayega..",vijayant sameer ko ghur raha tha,".par usne mujhe brij sahit kinare se dhakel diya & mere peechhe-2 us masum soniya ko bhi.",kamre me bilkul khamoshi thi. "kyu kiya tumne aisa sameer?",vijayant ne bahut halki aavaz me puchha. ""kyuki aapne kamya ko apni hawas ka shikar banaya tha.",sameer ki aaankho me pani tha & sath hi angare bhi. "Shipre ne mere Gujarat se lautne pe jo party di thi,usme maine aap dono ko kamre sr bahar aate dekh liya tha.Kamya mera pehla pyar thi & main gusse se baukhla utha tha.usi ne mujhe bataya ki aap use balckmail karte hain ki agar vo aapke sath nahi soyi to aap uska career tabah kar denge." "jhuth bak rahi thi vo.apni marzi se soti thi vo mere sath.meri baat pe yakin nahi hoga par police ki bata pe hoga na!",vijayant ne abhi tak sameer se us se ye sari baate nahi ki thi.Sharma ke ishare pe 1 inspector kamre se bahar gaya & jab lauta to Kamya uske sath thi,"..ab batao aage ki kahani." "Harpal Singh paiso & kamya ke jism ke lalach me mere sath mil gaya.uska party me nashe me bakna,mere khilaf baat karna sab plan ka hissa tha.Rambha se shadi & aapse jhagda & fir Panchmahal aana sab maine soch rakha tha.main janta tha ki gayab hua to aap meri talash me zarur ayenge." "par main hi kyu?",rambha gusse me thi. "kyuki tum hi samne thi & tumse ishq ka natak karna bhi aasan tha." "harpal ka kya hua?" "mujhe nahi pata.vo paise leke gayab ho gaya." "achha & koi nahi tha tumahre sath?",vijayant ki muskan me gusse se bhi zyada dard tha. "mom thi.ye badla maine mom ke liye bhi liya tha.aap bas ayasshiya karte rehte & vo bechari akeli baithi rehti.mom ne mera pura sath diya is baat me." ------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------ kramashah.......