मां बेटे का संवाद

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The Romantic
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Re: मां बेटे का संवाद

Unread post by The Romantic » 16 Dec 2014 10:24

मां बेटे का संवाद--4

gataank se aage.................

"चल बदमाश ... अब खाना बनाने देगा या नहीं?"

"बना ना अम्मा, सच अब नहीं रहा जाता, फटाफट पराठे बना ले और फ़िर तू भी मेरे साथ बैठ जा खाने पे, नहीं तो फ़िर बाद में खायेगी, साफ़ सफ़ाई में आधा घंटा बरबाद करेगी और ये तेरा गुलाम, तेरे रूप का मतवाला बेटा लंड पकड़कर बैठा रह जायेगा"

"चल हो गया बेटा, आ जा और खा ले"

"मां ... तेरे मुंह से खाऊंगा आज"

"अरे ये क्या हो गया है तेरे को? भूख लगी है ना? तो खा ना हाथ से, वैसे देरी हो जायेगी बेटा"

"मैं खा रहा हूं अम्मा पर बीच बीच में एक एक निवाला दे ना तेरे मुंह से, तेरे मुंह के स्वाद से खाने का जायका दूना हो जाता है अम्मा"

"ठीक है मेरे लाल ... अं... अं .... ये ऽ ले ऽ "

"और चबा अम्मा, जरा मुंह का स्वाद लगने दे ..."

"अं ... क्यां ... नॉलॉ..यंक ... लं ... ड़का है ... अं अं .. ले"

"मजा आगया मां, बस हर दो मिनिट में एक निवाला देती जा .... आज मस्त पिक्चर लाया हूं ... बेडरूम चल और मेरी बाहों में आ, फ़िर दिखाता हूं, तुझे मजा आ जायेगा"

"सच बेटे? पिछले हफ़्ते वाली भी बहुत अच्छी थी ....वैसी ही है क्या?"

"थोड़ी अलग है अम्मा पर मजा आयेगा तुझे. पिछले वाले में लंड ही लंड थे, आज बस चूतें ही चूतें हैं."

"अं ... अं .... ले बें ... टा ... तें ...रा ... निवॉला ... फ़िर तेरी ज्यादा पसंद की है, मुझे क्यों दिखाना चाहता है?

"अम्मा नाटक मत कर, उस दिन जिस औरत को वो चार चार मर्द चोद रहे थे, उस औरत की गोरी गोरी चूत देख कर कैसे बोल रही थी कि बेटा कितनी प्यारी चूत है ... चूसने को मन करता है मेरा भी ..., और पिछले महने वाली पिक्चर देखते वक्त बोल रही थी कि वो औरत कैसे मस्त चूत चाट रही थी उस लड़की की, काश कोई औरत मेरी भी ऐसी चाटती"

"नालायक ... अम्मा की बात पकड़ कर रखता है तू ... अब मस्ती में तो कुछ भी मुंह से निकल जाता है रे ..."

"नहीं अम्मा, मस्ती में मन की बात होंठों पर आ जाती है. वैसे इसीलिये आज बस चूतें और बुरें दिखलाऊंगा तेरे को, तेरी हर खुशी में मेरी खुशी है. अच्छा ये बता मां, तेरा मन होता है और किसी से चुदवाने को? याने तू इतनी गरम है, मैं थक जाता हूं पर तेरी भूख नहीं मिटती, बोल तो इंतजाम करूं कूछ, तेरी जैसी मतवाली माल औरत को चोदने को तो कोई भी तैयार हो जायेगा खुशी से ... लाऊं आपने यार दोस्तों को? या नौकर रख लूं एकाध, दिन भर तुझे चोदा करेगा."

"बेटा ... क्यों अपनी अम्मा को ऐसे शब्द कह रहा है ... मुझसे नाराज है क्या ... बोल ना ... तेरे सिवा मैंने किसी की ओर आंख उठा कर भी नहीं देखा मेरे बच्चे और तू .... हं ..."

"अरे बुरा मत मान मां, मैं नाराज होकर नहीं कह रहा, सच कह रहा हूं, तुझे मैं हर खुशी देना चाहता हूं ... मैं जानता हूं कि तेरी तबियत कितनी गरम है ... अगर तेरे मन में और लंडों से चुदवाने का खयाल आता हो तो ये तेरा अधिकार है अम्मा .... अपने मन को मत मार"

ये क्या कहता है बेटे ... तेरे सिवा किसी से चुदाने की मैं सोच भी नहीं सकती ... तू इतना प्यारा है ... मेरा लाड़ला बेटा है ... मेरी ही चूत से निकला है, खूबसूरत जवान है.... तुझसे चुदाने में जो मजा है वो और कहां मेरे लाल?"

"वो तो ठीक है अम्मा पर तू है बड़ी गरम, एक आदमी से तेरी ये गरमी ठंडी नहीं होगी. मेरे को मालूम है कि दिन में मैं नहीं होता तब तू तड़पती रहती है बदन की इस गरमी से, मेरा बस चलता तो दिन भर घर रहता पर मां ... नौकरी करना है ... और वैसे भी लंड आखिर कितनी बार खड़ा होगा ... मुझे कभी कभी लगता है मां के तेरे को कम से कम एक और लंड चाहिये"

"चल अब इस विषय की बात मत कर ... मैं देख लूंगी ... अरे मैं लाती हूं ना केले और ककड़ी ... तुझे तो मालूम ही है ... भले ही उनमें वो बात न हो जो ... और तू चूसता भी तो है मेरे लाल ... इतना अच्छा लगता है मुझे बुर चुसवा कर ... मेरी बुर पूरी खुश हो जाती है ... चल खाना हो गया ना, अब ले चल मुझे. साफ़ सफ़ाई सुबह उठ कर कर लूंगी"

"वा अम्मा अभी अभी नखरे कर रही थी और अब खुद ही बेताब है. .... क्या बात है ... चूत वाली पिक्चर के नाम से मजा आ रहा है लगता है."

"तू कुछ भी समझ पर चल ना अब."

"चल अम्मा, नंगी होकर आजा मेरे कमरे में, मैं तब तक पिक्चर लगाता हूं. आज ब्रा और पैंटी भी निकाल दे, पूरी नंगी हो जा, ब्रा पैंटी में तेरे से मुहब्बत करने का टाइम नहीं है, पिक्चर भी लंबी है."

..... कुछ देर के बाद ....

"अरे ये कुरसी में क्यों बैठा है, लेटे लेटे नहीं देखेगा पिछली दफ़ा जैसे?"

"वो उसमें ठीक से नाहीं दिखता अम्मा, गर्दन दुखती है"

"अरे पिछली बार तो मजे से देखी थी, याने मैं नीचे पट लेटी थी और तू मेरे ऊपर चढ़ कर ... बस हिल बहुत रहा था तू ... बार बार बस धक्के लगा रहा था."

"अब लंड तेरी गांड में हो तो धक्के लगाने का मन तो होगा ही मां, इसीलिये आज तुझे गोद में बिठा कर दिखाऊंगा, चल जल्दी आ, ऐसे खड़े हो जा मेरे सामने... अरे ऐसे नहीं, मेरी ओर पीठ करके ... पिक्चर नहीं देखनी है क्या? चल लंड ले मेरा अपनी गांड में और बैठ गोद में"

"पिक्चर देखनी है बेटे पर तू ऐसे बैठता है तो तेरे ऊपर बैठ कर चोदने में बड़ा मजा आता है मेरे लाल. चोद लेने दे ना एक बार, तेरी कसम. एक बार लंड तूने पीछे डाला कि आगे की मेरी इस सौतन की तुझे सुध ही नहीं रहती "

"मां, अब उतावली न हो, तेरी इस जालिम सौतन की ... चूत के लिये भी इंतजाम किया है मां, ये देख"

"हाय, ये केले कहां से लाया रे? बहुत बड़े हैं, पिछले हफ़्ते तो छोटे वाले लाया था. पर बेटे, वो टूट जाते हैं बार बार. मजा नहीं आता, और बिना छिले तू डालता नहीं है"

"और क्या मां, बिना छिले डाले तो तेरी चूत का रस कैसे लगेगा उसमें. फ़िकर मत कर, ये आधे कच्चे हैं, टूटेंगे नहीं. वो आज आते आते ये केले दिख गये, मद्रासी केले, एक एक फ़ुट के, ये हैं तेरी चूत के लायक - नहीं तो वो छोटे वाले तो तेरी चूत ऐसे खा जाती है जैसे ..... अब बक बक मत कर और आ जा .... हां ऐसे .... लौड़ा तेरी गांड पर रखता हूं .. अरे चूतड़ पकड़कर खींच ना, जरा छेद खोल ... हां ऐसे ... अब बैठ जा मेरे लंड पर

"ओह ... उई मां ... दुखता है बेटे"

मां अभी तो बस सुपाड़ा अंदर गया है ... पूरी नीचे बैठ जा मेरी गोद में .... ये ... अब देख कैसे सप्प से अंदर गया .... आ जा चुम्मा दे मुझे ... तेरे मम्मे दबाने में मजा आता है अम्मा ऐसे गोद में बिठा कर गांड मारते वक्त. ले पिक्चर शुरू करता हूं"

जोर से दबा ना मम्मे ऽ हाऽ य ऽ कैसा खड़ा है रे तेरा .... दुखता है ... इतना मोटा है .... लगता है जैसे मेरे पेट में घुस गया है .... कैसा मेरी गांड के पीछे पड़ा रहता है रे नालायक, ओह ...."

"मां मैं तो तेरे पूरे बदन के पीछे दीवाना हूं और खास कर तेरी गांड का .... सच अम्मा, किसी बेटे को अपनी मां की गांड मारने में क्या आनंद आता है तू नहीं जानती ... लगता है कि कोई बड़ा बुरा गंदा सा ... हरामीपन का काम किया जा रहा है ... अब चपर चपर बंद कर और पिक्चर देख. देख उस जवान लड़की को, तू चपर चपर कर रही थी तब तक वो नंगी भी हो गयी देख"

"कितनी अच्छी लड़की है बेटे... बहुत खूबसूरत है .. देख कैसे मुठ्ठ मार रही है ... अकेली ही है ... तू कहता था कि और भी औरतें हैं इस पिक्चर में .... ये लड़की छोटी लगती है ना? लगता है स्कूल में है"

"छोटी वोटी कुछ नहीं अम्मा, बीस बाईस की होगी ... ये पिक्चर वाले बनी देते हैं उन्हें ऐसा ... स्कूल की लड़की जैसी चोटी बांध देते हैं ... अब देख उसकी मौसी आई ... देख कैसे भांजी को प्यार कर रही है .... अब देख पूरा पिक्चर ... अब कुछ देर में लड़की की मां भी आयेगी."

..... कुछ देर के बाद ....

"बेटे ... बेटे ... जोर से कर ना .... मन नहीं मानता रे ... झड़ा दे ना मुझको .... वो देख वो छिनाल औरत कैसे अपनी बेटी से जबरदस्ती चूत चुसवा रही है ... वो देख ... कैसे उसके बाल पकड़कर अपनी बुर पर उसका मुंह रगड़ रही है और वो दूसरी औरत .... उसकी मौसी ....हाय देख ना बेटे ... कैसे उस बच्ची की चूत पर पिल पड़ी है .... बेटे .... जोर से चोद ना मुझे केले से .... कितना जुल्मी है रे .... बस तरसाता जाता है .... मां की परवा नहीं है तुझे? ओह ऽ ओह ऽ"

....

....

"परवा कैसे नहीं है मां, तभी तो ये पिक्चर लाया हूं आज, मुझे पता था तुझे अच्छी लगेगी. अब ये केला अंदर बाहर तो कर रहा हूं, तू झड़ती नहीं है तो मेरा क्या कुसूर है, ये भी टूट जायेगा अगर ज्यादा जोर से किया तो, दो केले तो तोड़ चुकी है अब तक, देख कैसे यहां प्लेट पर पड़े हैं .... मां देखा ये केले कैसे लगते हैं ... जैसे घी और शहद में डुबोए हों ... मैं बाद में खाऊंगा मां मस्ती ले लेकर ..... ओह ऽ .... गांड सिकोड़ती है तो मजा आता है अम्मा.... और कर ना ... लगता है कि अभी तेरी कस के मार लूं, सच अम्मा .... तेरी गांड बहुत गरमा गरम है ... ले नीचे से ही तेरी मारता हूं ... ले .... ले .... ले ऽ"

...

...

ओह बेटे ... उई मां ... झड़ गयी रे मैं मेरे लाल ... ओह ऽ ओह ऽ कितना अच्छा लगता है रे ... ओह ... हाय ... पिक्चर खतम हो गयी रे ... उस लड़की पे क्या क्या करम किया उन दोनों छिनालों ने ... मैं होती तो और करती बेटे ... और लगा ना .... और पिक्चर नहीं है? ... ये वाला ही लगा दे ना फ़िर से .... वो देखा कैसे वो मौसी उस लड़की के मुंह में मूत भी रही थी ... और वो मुंहजली भी मजे लेकर पी रही थी जैसे शरबत हो ... तभी तूने झड़ा दिया ... ठीक से देख भी नहीं पाई ... लगा ना पिक्चर फ़िर से ...

"अब कल लगाऊंगा मां ... मेरे से सहन नहीं होता ... इन पिक्चरों में तो कुछ भी दिखाते हैं ... और गंदे गंदे करम होते हैं ... मैं और ले आऊंगा पर ओह ओह ऽ अब नीचे लिटा कर कायदे से तेरी मारता हूं .... मां कसम क्या गरम है तेरी गांड मां .... ले .. ये ले ... और जोर से पेलूं ... तेरी गां ऽ ड का ऽ ... कचू ऽ ...मर ... बना ऽ देता ऽ हूं आज ...ये ले ... ओह ... ओह .... ओह ... आह .... आह ऽ ऽ आह ऽ ऽ ऽ"

.... कुछ देर के बाद ....

"बेटे एक बात कहूं?"

"हां बोलो मां, हुकुम करो. आज तो मजा आ गया मां तेरी मारने में ... और वो केले भी क्या जायकेदार थे .... तेरी चूत का रस तो अमरित है मां अमरित. बोल क्या कह रही थी? और पिक्चर ले आऊं ऐसा ही? क्या बात है मां? चूतें भी भा गयीं आखिर तुझे."

"हां बेटे, कितनी खूबसूरत थी वो दोनो औरतें और वो लड़की तो सच में बहुत सुंदर थी. मुझे कमला की याद आ गयी बेटे."

"कौन कमला मां?"

"अरे वो मेरी चचेरी ननद की भांजी, बेचारी का कोई नहीं है, मां बाप बचपन में ही गुजर गये ना, वो उसकी मौसी ने ही पालपोसकर बड़ा किया है, वहीं रहती है, अब शादी की उमर हो गयी है करीब करीब."

"हां तो अम्मा? चाची शादी रचा रही है उसकी?"

"हां बेटे ... बोली नहीं पर लगता है मन में है उसके"

"चलो अच्छा है मां, लड़का देख तू भी उसके लिये"

"बेटे ... तू कर ले ना उससे शादी."

"मैं शादी वादी नहीं करने वाला अम्मा"

"अरे बहुत सुंदर लड़की है, जरा छोटी है, अभी उन्नीस की हुई होगी पर तू हां कहेगा तो मैं मना लूंगी सब को, आखिर मेरा बेटा भी तो जवान है, इतना कमाता है. वो लोग तो उछल पड़ेंगे, उनको भी कहां तुझसे अच्छा लड़का मिलेगा"

"अब मां, मैंने पहले ही कहा था कि शादी ब्याह की जरूरत नहीं है मुझे, तू जो है मेरी हर जरूरत पूरी करने को. और मैंने तेरे को वो मंगलसूत्र नहीं पहनाया था उस दिन?"

kramashah.............


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Re: मां बेटे का संवाद

Unread post by The Romantic » 16 Dec 2014 10:31

मां बेटे का संवाद--5

gataank se aage.................

"अरे वो तो ऐसे ही ... बदमाश कहीं का ... मेरे को तेरा मंगलसूत्र पहना देख कर तेरा लंड ऐसा हो गया था जैसे लोहे की सलाख ... वो बात अलग है बेटा ... वो तो मेरे तेरे बीच की बात है"

"पर मां, मेरे लिये तो तू ही मां है, तू ही मेरी बीवी, लुगाई, सब कुछ. अब उस लड़की से शादी करके मैं क्या करूंगा?"

"अरे कर ले ना. सच में बड़ी रूपवती है. तुझे बहुत पसंद आयेगी. बहू घर में आये तो मुझे भी कुछ आराम मिलेगा."

"तो क्या मैं तुझे इतना रगड़ता हूं कि तेरे को मेरे से आराम चाहिये?"

"हंस रहा है ना, हंस, और हंस, तेरे को मालूम है कि तू मुझे चौबीस घंटे रगड़ेगा फ़िर भी मैं तेरे को आशिर्वाद ही दूंगे मेरे राजा. अरे घर का भी काम होता है, अब मेरी उमर हो चली है, घर के काम को तो जवान बहू चाहिये ना?"

"ऐसा बोल. पर अम्मा, घर में कमला हो ना हो, चोदूंगा तो मैं बस तुझे ही. अब वो बालिका घर में रहेगी तो उसे पता चल ही जायेगा कि ये बेटा अपनी मां के पीछे दीवाना है. तब वह हाय तोबा नहीं मचायेगी?"

"अरे मैं सब संभाल लूंगी. उसे बता भी दूंगी."

अच्छा अम्मा? वो शादी को तैयार हो जायेगी अगर उसे पता चलेगा कि हमारे यहां तो मां बेटे का इश्क चलता है?

"शादी के बाद बताऊंगी. तब बच के कहां जायेगी? उसकी सुनता कौन है बाद में? शादी के बाद तो ऐसे जाल में फ़ंसा दूंगी कि पर मारेगी तो भी उड़ नहीं पायेगी.

"अच्छी डांट डपट के रखेगी? उससे काम करवायेगी अम्मा?"

"हां बेटे, घर का काम भी करवाऊंगी और ... जरा अपनी भी सेवा करवाऊंगी."

"अच्छा ... अब समझा. अम्मा तू बड़ी चालू चीज है. बहू से सेवा करवायेगी, वो पिक्चर वाली सेवा? ओह अम्मा, क्या दिमाग पाया है तूने."

"अरे तो क्या हुआ? तू ही कह रहा था ना आज कि अम्मा किसी को ले आऊं क्या चोदने को अगर तेरा मन नहीं भरता. तो अब बहू ही ले आ, मैं उसी से मन बहला लूंगी."

"पर वो तो मैं किसी मर्द की बात कर रहा था, किसी तगड़े लंड वाले मर्द की. तेरी हवस क्या वो जरा सी छोकरी पूरी कर पायेगी? तेरे को चाहिये मस्त मूसल जैसा लौड़ा जो कभी ना झड़े"

"तेरा लंड क्या कम है? चूत में घुसता है तो स्वर्ग ले जाता है बेटे और गांड में ... उई मां ऽ ... हालत खराब कर देता है मेरी, तू नहीं जानता कि जब एक मां अपने बेटे का लंड पा लेती है तो उसे और कोई लंड नहीं भाता. तेरे बिना मैं किसी से नहीं चुदाऊंगी. हां कोई प्यारी सी लड़की मिल जाये तो बात और है. बहुत सुकून मिलेगा बेटे मुझे. तू नहीं जानता, तूने जो ये आग लगायी है मेरे बदन को वो बुझती नहीं है मेरे लाल. जब तू होता है तो अपनी अम्मा से चिपटा रहता है पर दोपहर को जब मैं अकेली होती हूं तो परेशान हो जाती हूं बेटे, मुठ्ठ मार कर भी आराम नहीं मिलता. वो केले, ककड़ी, गाजर - सब नाकारा हो जाते हैं. और जब तू काम से शहर के बाहर जाता है तो .... मैं पागल सी हो जाती हूं बेटे. ये जो पिक्चर तू लाता है ना, उन्हें देख देख कर अब मेरा भी मन होता है किसी औरत के बदन से बदन लगाने का. अगर बहू ले आये तो दोनों काम हो जायेंगे."

"चलो, मेरी अम्मा को और कोई तो मिला प्यास बुझाने को पर क्या हुआ अम्मा, एकदम से कमला कैसे खयाल में आ गयी तेरे? ऐसी क्या खास बात है उसमें? या तेरी बुर कुलबुलाती है उसकी कमसिन जवानी देख कर,अब मेरे को पता चला है कि तेरा कोई भरोसा नहीं मां"

"खास बात है ना उसमें. हमारे यहां बहू लानी हो तो जरा देख भाल कर चुननी पड़ेगी बेटे. और कमला में वो सब बातें हैं. वो सुंदर तो है ही, जरा चालू चीज भी है. मार खा चुकी है अपनी मौसी से कई बार. असल में एक दो बार पकड़ी गयी थी वहां की नौकरानी चंपा के साथ कुछ कर रही थी."

"अच्छा! अब समझा. तो कल जैसी पिक्चर में हीरोइन बनने लायक है?"

और क्या? पिछली बार जब मेरी ननद ने पकड़ा तो छत पर के कमरे में चंपा की टांगों के बीच मुंह दे कर बैठी थी बदमाश. तेरी चाची तो हाथ पैर ही तोड़ देती उसके, मैंने ही मना लिया कि शुकर करो किसी लड़के या मर्द के साथ मुंह काला नहीं किया. तब छोड़ा उसे. फ़िर भी कस के दो चार जड़ ही दिये थे उसको. रो रही थी तब मैंने ननद को नीचे भेजा और कमला को मना कर चुप किया. मुझे लिपट कर सहम कर बैठी ती बेचारी. मैंने तब हौले हौले उसकी छाती भी टटोल ली बेटे, छोटे छोटे हैं मम्मे पर एकदम अमरूद जैसे सख्त हैं, दबाने में मजा आयेगा"

"तेरे को या मेरे को?"

"दोनों को मेरे लाल. मैंने बात करके ये भी जान लिया कि उसको औरतें बहुत पसंद हैं, खास कर उमर में बड़े औरतें. तभी तो उस अधेड़ चंपा को दिल दे बैठी. अब वो घर आयेगी तो उसे मनाने में कोई मुश्किल नहीं होगी बेटे. मेरी सेवा करने को आसानी से मान जायेगी वो छोकरी. और उसे भी तो मैं सुख दूंगी."

"हां अम्मा, तू इतनी खूबसूरत है, किसी का भी मन डोल जायेगा."

अरे यही चिंता है मेरे को कि कमला को मैं कैसी लगूंगी. मोटी हो गयी हूं, थुलथुला बदन हो गया है मेरा."

"तो वो चंपा कहां विश्व सुंदरी है! मैंने देखा था पिछले साल जब गांव गया था. गिट्टी सी है, ये बड़े बड़े मम्मे हैं उसके और खाया पिया बदन है. वही तो राज है अम्मा तेरे रूप का, क्या माल भरा है तेरे बदन में, ये मोटे मोटे मम्मे, लटकते हुए, ये गोरी गोरी मोटी टांगें, वो कमला तो निछावर हो जायेगी तुझ पर अम्मा."

"सच कहता है बेटे? फ़िर बात चलाऊं?"

"जैसा तू ठीक समझे मां. पर वो छोकरी क्या सिर्फ़ तुझसे इश्क करेगी? मेरी मतलब है अम्मा कि वैसे मुझे तेरे सिवा और किसी की जरूरत नहीं है पर अगर खूबसूरत माल घर में ही आ जाये और वो भी हक का तो ... फ़िर मुंह मारने का मन तो होगा ना. वो लड़की कमला अपने सैंया को, एक मरद को - मुझे - मुंह मारने का मौका देगी या नहीं?"

"क्या बात करता है बेटे. आखिर तू उसका पति होगा. तुझे कैसे मना करेगी? और आखिर तू भी तो इतना सजीला नौजवान है. वो लड़की इस तरह की है मेरा मतलब है औरतों वाली फ़िर भी उसको इतनी तो समझ होगी कि पति की सेज तो उसे सजाना ही है. मैं भी समझा दूंगी. फ़िर बेटे, हम दोनों मिलकर उसे चोदा करेंगे. ये ध्यान रख कि वो अकेली है और हम दो हैं, जैसा चाहेंगे उस लड़की को करना पड़ेगा, ना करके जायेगी किधर? और एक बात बेटे ...."

"क्या अम्मा?"

"तेरे को गांड मारने का शौक है ना? मुझे हमेशा कहता है ना कि मैं रोज नहीं मरवाती! तू उसकी गांड मार लिया कर, चाहे तो सुबह शाम. मुझे थोड़ी राहत मिलेगी उस मुस्टंडे लंड से ... मेरे को सच में दुखता है बेटे"

"तेरी तो मैं जरूर मारूंगा मां, भले हफ़्ते में एक बार, ऐसी मोटी डनलोपिलो की गांड थोड़े होगी उसकी, बाकी मेरी कमला रानी को मेरा शौक सहना पड़ेगा. पर अम्मा, वो तैयार हो जायेगी? नखरा भी कर सकती है, आखिर औरत औरत वाले इश्क में तो गांड का तो कोई रोल ही नहीं है ना"

"उससे तुझे क्या करना, मैं तैयार करूंगी उसे. बेटे ऐसी लड़कियां ... मेरा मतलब है औरतों पर मरने वाली लड़कियां ... चुदाने में नखरा करती हैं अक्सर ... बुर चुसवाने में ज्यादा मजा आता है उन्हें ... इसलिये मैं कह दूंगी कि अगर चुदाई से बचना है तो गांड मरवा लिया कर. अगर नहीं मानेगी तो हाथ पैर मुंह बांध कर तेरे सामने डाल दूंगी, मारना उसकी जोर से ... थोड़ा रोयेगी धोयेगी शुरू में फ़िर मान जायेगी .... अखिर अपने पसंद की ऐसी ससुराल उसे कहां मिलेगी जो उसके असले इश्क का खयाल रखती हो?"

"और अपने पसंद की ऐसी मस्त सास उसे और कहां मिलेगी, है ना अम्मा? ... सच, मजा आ जायेगा अम्मा .... पर तेरी गांड भी मैं मारूंगा अम्मा... उसे नहीं छोड़ सकता."

"कहा ना, कभी कभी मार लिया कर, पर ज्यादा उसकी मारा कर जब मन चाहे."

"अम्मा, तेरा ये बेटा और बहू मिलकर तेरी सेवा किया करेंगे. जरा कल्पना कर कि मैं तुझे चोद रहा हूं और वो तुझे अपनी बुर का पानी पिला रही है. या तेरा बेटा तेरी गांड मार रहा है - अच्छा अच्छा नाराज मत हो तूने अभी कहा था कि तेरी ज्यादा न मारा करूं ... समझ ले मैं तेरी चूंचियां दबा कर तेरे मुंह में लंड देकर चुसवा रहा हूं और तेरी बहू तेरे सामने लेटकर अपनी जीभ से सास की बुर से पानी निकाल रही है. या जब मैं उसकी गांड मारा करूं, तू अपनी बुर से उसका मुंह बंद कर दिया कर ...."

"कैसा करता है रे ... गंदी गंदी बातें सुनाकर फ़िर से मुझे पानी छूटने लगा."

"तो क्या हुआ अम्मा, आ जा बैठ जा मेरे मुंह पर. और देख ले, तेरा पानी पी कर फ़िर से तेरी गांड मारूंगा आज. मरवा और अपनी बहू के बारे में सोच. चल आ जा अम्मा ........."

"आती हूं मेरे लाल, आज तो मैं बहुत खुश हूं, ऐसे मौके पर तो मुंह मीठा करना चाहिये, वो बर्फ़ी ले आऊं?"

"बर्फ़ी वर्फ़ी कुछ नहीं अम्मा, देना हो तो तेरा दूध दे दे"

"अरे बार बार वही कहता है, अब दूध कैसे पिलाऊं तेरे को, और बहू आ रही है ना! दूध पिला देगी एक साल बाद!"

"उसकी तो फ़िर सोचूंगा, पर मां, सच में, मन नहीं मानता, तेरा दूध, तेरे बदन का ये रस पीने को इतना दिल करता है ... लंड साला पागल कर देता है"

"बेटा .... वो तू ... मेरा दूध पीने की बात करता है ना हरदम ? बुर का रस काफ़ी नहीं पड़ता तेरे को?"

"कहां अम्मा ... दूध पीने को मैं इसलिये बेताब हूं कि - बहुत मन होता है कि पेट भर के पियूं तेरे बदन का रस .... तेरी बुर का रस लाजवाब है पर बस दो तीन चम्मच ही मिलता है अम्मा. बस इसलिये बार बार दूध पिलाने को कहता हूं अम्मा "

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Re: मां बेटे का संवाद

Unread post by The Romantic » 16 Dec 2014 10:31

"दूध अब कहां बेटे पर .... बेटे तुझे अपना .... मेरा मतलब है एक और बात है मेरे बदन में जो तुझे पेट भर के पिला सकती हूं...."

"क्या अम्मा, बोल ना ...."

"अरे कैसे बोलूं ... शरम आती है .... तुझे अच्छा ना लगे तो ... डर लगता है"

"अब बता ना अम्मा ... कुछ तो बोल"

"अरे अब क्या बोलूं ... इतनी देर देर तक कहां कहां मुंह लगाये रहता है मेरे बदन में ... उतनी देर में चाहे तो आरम से कई बार पेट भरके पी सकता है मेरा लाड़ला ..."

"मां ... तेरा मतलब वही है ना जो मैं समझ रहा हूं? तू यही कह रही है ना कि ..."

"हां बेटे .... मेरा मूत पियेगा?"

"अम्मा ... अम्मा तू सौ साल जिये ... तूने तो मेरे मन की बात कह दी .... एक दो हफ़्ते से मैं सोच रहा हूं, एक बार लगा कि जबरदस्ती तेरे साथ बाथरूम घुस जाऊं, फ़िर लगता था कि कैसे कहूं ... तुझे अटपटा ना लग जाये."

"बहुत आस है रे मेरे मन में .... हमेशा यही सोचती रहती हूं कि मेरा बेटा मां के बदन के रस के लिये तरस रहा है और मैं उसकी इतनी सी भी इच्छा पूरी नहीं कर सकती ... इतनी आस है तेरी कुछ पीने की अपने अम्मा के बदन से और .... और मैं कुछ नहीं कर रही हूं .... बोल बेटे .... पियेगा?"

"चल अम्मा, मूत दे मेरे मुंह में अभी यहीं पर .... आ जा अम्मा."

"अरे पगला हो गया है क्या .... यहां नहीं ... छलक जायेगा .... पहली बार है ... चल बाथरूम में चल ... पर सोच ले मेरे लाल फ़िर से ... बाद में मौके पर पीछे हट जायेगा तो ... मैं नहीं सहन कर पाऊंगी बेटे"

"सोच लिया मां ... कब का सोच कर रखा है मैंने ... कर दे ना अम्मा यहीं पर, जल्दी पिला दे .... मुझसे नहीं रुका जाता अब"

"चल ना मेरे दिल के टुकड़े ... बाथरुम में, आज तो चल, अब तो हमेशा पिलाऊंगी बेटे, फ़िर कहीं भी पी लिया करना. तू नहीं जानता मेरे लाल, कितनी इच्छा होती है तुझे अपने बदन से .... तेरी हर प्यास बुझाने की मेरे बच्चे .....मैं तो निहाल हो जाऊंगी आज ..."

"चलो अम्मा .... और अम्मा आज मेरा यह लंड अब ऐसा खड़ा हो गया है कि रात भर मारूंगा आज तेरी ..... मां कसम .... तेरी कसम ... मार मार के आज फ़ुकला कर दूंगा तेरी गांड .... तेरे बदन का ये अमरित पी कर अम्मा .... ऐसा जोश चढे़आ है अम्मा मेरे लंड को सिर्फ़ उसके बारे में सोचने से ... तब जब पी लूंगा तो ये क्या करेगा .... आज तेरी गांड की खैर नहीं अम्मा"

"मार लेना बेटे ... कुछ महने की तो बात है, फ़िर बहू भी आ जायेगी मेरा दर्द कम करने को."

"मां ... एक बात तो बता . वो बहू को भी पिलायेगी क्या? वो पिक्चर जैसे?"

"और क्या? उसका भी तो हक है अपनी सास के बदन पर. मन में बात थी कब से मेरे, आज पिक्चर में देखा तो कल्पना करने लगी कि मेरी बहू है और मैं उसके मुंह में मूत रही हूं, बड़ा मजा आया बेटे, फ़िर सोचा कि सिर्फ़ बहू क्यों, मेरे बेटे को भी शायद मजा आये. इसलिये सोचा कि कह ही डालूं तुझे .... अब चल बेटे, तेरे मुंह में मूतूंगी तभी चैन आयेगा मुझे ... आ जा मेरे लाल .... आ जा."

"वो कमला पियेगी ना अम्मा?"

"पियेगी बेटा, झट से पियेगी, मैं पहचान गयी हूं उसको, बड़ी बदमाश छिनाल सी लड़की है, हर चीज करेगी वो ये मुझे यकीन है. और मान लो नहीं किया तो ... तो भी मैं इसे छोड़ने वाली नहीं बेटे ... मुश्कें बांध कर जबरदस्ती भी करनी पड़े तो करूंगी ... पर लगता है उसकी नौबत नहीं आयेगी"

"अम्मा, एक मेरे मन की भी बात सुन ले. ये तो शुरुआत है. तेरी गांड चूस रहा था ना अम्मा? बहुत मस्त स्वाद आता है अम्मा. उंगली से घी लगाने के बाद मैंने उंगली चूसी थी, मजा आ गया मां. अब सोच ले, सिर्फ़ पिलायेगी मुझे अपने बदन से या ...."

"या क्या बेटे? बोल ना?"

"खिलाने की नहीं सोची? सच मां, तेरे बदन से मैं खाना भी चाहता हूं."

"कैसी गंदी बात करता है रे .... नालायक ...."

"अब इसमें गंदा क्या है? आज मैंने नहीं कहा था कि लगता है तेरी गांड में मिठाई भर दूं और वहीं से खा लूं?"

"वो ... अच्छा उसकी बात कर रहा है ... मेरे को लगा ..."

"तुझे क्या लगा मां? बोल? बोल ना. अब गंदी बात कौन सोच रहा है?"

"चल बदमाश ... वैसे बुर में केला तो तू रोज डालता है और खाता है ..."

"बस वैसे ही केला गांड में डाल दूंगा ... वो पिछले हफ़्ते जब तू हलुआ बना रही थी मां ... और मैं वहीं खड़ा खड़ा तेरी गांड मार रहा था ... याद आया?"

"याद कैसे नहीं आयेगा मूरख ... वो कढ़ाई उलटते उलटते बची थी नालायक"

"बस उस दिन मन में आ गया कि अगर वो हलुआ तेरी गांड में भर दूं और वहां से खाऊं तो क्या मजा आयेगा"

"अच्छा ये बात है ... तभी एकदम से बीच में हुमक कर झड़ गया था ... मैं भी अचरज में पड़ गयी थी कि आज क्या हुआ नहीं तो आधे घंटे तक मारे बिना मेरे को नहीं छोड़ता कभी ... ओह ... ओह ... कैसी कैसी बातें करने लगा रे तू अब ... देख ये बुर फ़िर बहने लगी"

"बहेगी ही, आखिर मेरी चुदैल मां की बुर है! आखिर बेटे को खिलाने में किस मां को मजा नहीं आता मां? सोच ले, मैं इंतजार करूंगा मां."

"हां सोचूंगी मेरे लाल सोचूंगी, तू तो पागल है, पर अब चल ना, जल्दी चल बाथरूम में"

"चल अम्मा, उठा के ले चलता हूं."

समाप्त