Raddi wala -रद्दी वाला

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The Romantic
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Re: Raddi wala -रद्दी वाला

Unread post by The Romantic » 16 Dec 2014 12:26

रद्दी वाला पार्ट--4

गतान्क से आगे................... दुनिया को नज़र अंदाज़ कर'के चुदाई का ज़बरदस्त मज़ा लेने के मूड मे दोनो आते जा रहे थे. इस दृश्या को देख कर रंजना का हाल अजीब सा हो चला था, खून का दौरा काफ़ी तेज़ होने के साथ साथ उसका सिर भी ज़ोरो से घूम रहा था और चूत के आस पास सुरसुराहट सी होती हुई उसे लग रही थी.दिल की धरकने ज़ोर ज़ोर से जारी थी.गला वा होंठ खुश्क पड़ते जा रहे थे और एक अजीब सा नशा उस पर भी छाता जा रहा था. ज्वाला देवी शराब पीती हुई बिरजू से बोले जा रही थी, उसकी बाँहें पीछे की ओर घूम कर बिरजू के गले का हार बनी हुई थी.ज्वाला देवी बिरजू को बार बार"सनम" और "सैय्या" के नाम से ही सम्भोधित करती जा रही थी.बिरजू भी उसे "रानी" ओर "मेरी जान" कह कह कर उसे दिलो जान से अपना बनाने के चक्कर मे लगा हुआ था. बिरजू का एक हाथ ज्वाला देवी की गदराई हुई कमर पर कसा हुआ था, और दोसरे हाथ मैं उसने शराब का ग्लास पकड़ रखा था. ज्वाला देवी की कमर मे पड़ा उसका हाथ कभी उसकी चूची पकड़ता और कभी नाभि के नीचे उंगलियाँ गढ़ाता तो कभी उसकी जांघें. फिर शराब का ग्लास उसने ज्वाला देवी के हाथ मैं थमा दिया. तब ज्वाला देवी उसे अपने हाथों से शराब पिलाने लगी. मौके का फ़ायदा उठाता हुआ बिरजू दोनो हाथों से उसकी भारी मोटी मोटी चूचियो को पकड़ कर ज़ोर ज़ोर से भींचता और नोचता हुआ मज़ा लेने मैं जुट जाता था.एकाएक ज्वाला देवी कुछ फुसफुसा और दोनो एक दूसरे की निगाहो मैं झाँक कर मुस्कुरा दिए.शराब का खाली गिलास एक तरफ रख कर बिरजू बोला, "जान मेरी !अब खड़ी हो जाओ."बिरजू की आग्या का तुरंत पालन करती हुई ज्वाला देवी मुस्कुराते हुए ठीक उसके सामने खड़ी हो गयी,बिरजू बड़े गौर से और चूत फाड़ निगाहो से उसे घूरे जा रहा था और ज्वाला देवी उसकी आँखों मैं आँखे डाल कर चूत की ज्वाला मैं मचलती हुई मुस्कुराते हुए अपने कपड़े उतारने मैं लग गयी. उसके हाथ तो अपना बदन नंगा करने मैं जुटे हुए थे मगर निगाहे बराबर बिरजू के चेहरे और लंड के उठान पर ही जमी हुई थी. अपने शरीर के लगभग सारे कपड़े उतारने के बाद एक ज़ोरदार अंगड़ाई ले कर ज्वाला देवी अपना निचला होंठ दन्तो मैं दबाते हुए बोली,"है ! मैं मर जाऊं सैयाँ ! आज मुझे उठने लायक मत छ्चोड़ना.सच बड़ा मज़ा देते हो तुम,मेरी चूत को घोट कर रख देते हो तुम." पॅंटी वा ब्रा मैं ज्वाला देवी इस उम्र मे लंड पर कयामत ढा रही थी.उसका नंगा बदन जो गोरा होने के साथ साथ गुद्देदार भींचने लायक भी था.लाल बल्ब की हल्की रौशिनी मैं बड़ा ही लंड मार साबित हो रहा था. वास्तव मैं रंजना को ज्वाला देवी इस समय इतनी खराब सी लगने लगी थी कि वो सोच रही थी कि काश ! मम्मी की जगह वो नंगी हो कर खड़ी होती तो चूत के अरमान आज आवश्या पूरे हो जाते.मगर सोचने से क्या होता है? सब अपने अपने मुक़द्दर का खाते है.बिरजू का लंड जब ज्वाला देवी की चूत के मुक़द्दर मैं लिखा है तो फिर भला रंजना की चूत की कुँवारी सील आज कैसे टूट सकती थी. जोश मैं आ कर बिरजू अपनी जगह छोड़ करखड़ा हुआ और मुस्कुराता हुआ ज्वाला देवी के ठीक सामने आ पहुँचा, कुच्छ पल तक उसने सिर से पाँव तक उसे देखने के बाद अपने कपड़े उतारने चलुकर दिए,एक एक करके सभी कपड़े उस्नेउतार कर रख दिए और वएक दम नंग धड़ंग हो कर अपना खड़ा लंड हाथ मैं पकड़ दबाते हुए सिसका, "हाई रानी आज! इसे जल्दी से अपनी चूत मैं ले लो."इस समय जिस दृष्टिकोण से रंजना अंदर के चुदाई दृश्या को देख रही थी उसमें ज्वाला देवी का सामने का यानी चूत और चूचियाँ तथा बिरजू की गांद और कमर यानी पिच्छवाड़ा उसे दिखाई पड़ रहा था.बिरजू की मर्दाना तंदुरुस्त मजबूत गांद और चौड़ा बदन देख कर रंजना अपने ही आप मे शर्मा उठी थी, अजीब सी गुदगुदी उसे अपनी चूचियो मे उठती हुई जान पड़ने लगी थी.बिरजू अभी कपड़े उतार कर सीधा खड़ा हुआ ही था कि ज्वाला देवी ने अपनी गुदाज वा मुलायम बाँहें उसकी गर्दन मे डाल दी और ज़ोर से उसे भींच कर वो बुरी तरह उससे चिपक गयी चुदने को उतावली हो कर बिरजू की गर्दन पर चूमि करते हुए वो धीरे से फुसफुसा कर बोली,"मेरे सनम ! बड़ी देर कर दी है तुमने ! अब जल्दी करो ना ! देखो,मारे जोश के मेरी तो ब्रा ही फटी जा रही है, मुझे बड़ी जलन हो रही है,अफ !मैं तो अब बर्दाश्त नही कर पा रही हूँ, आ जल्दी से मेरी चूत का बजा बजा दो सैयाँ आह."बिरजू उत्तर मे होंठो पर जीभ फ़िराता हुआ हंसा और बस फिर अगले पल अपनी दोनो मर्दानी ताक़तवर बाँहें फैला कर उसने ज्वाला देवी को मजबूती से जाकड़ लिया. जबरदस्त तरीके से भींचता हुआ लगातार काई चूमि उस'के मचलते फड़फदते होंठो और दाहाकते उभरे गोरे गोरे गालों पर काट'नि शुरू कर डाली. ज्वाला देवी मदमस्त हो कर बिरजू के मर्डाने बदन से बुरी तरह मतवाली हो कर लिपट लिपट जा रही थी.दोनो भारी उत्तेजना और चुदाई के उफान मैं भरे हुए ज़ोर ज़ोर से हान्फ्ते हुए पलंग की तरफ बढ़ते जा रहे थे.पलंग के करीब पहुँचते ही बिरजू ने एक झटके के साथ ज्वाला देवी का नंगा बदन पलंग पर पटक दिया. अपने आपको संभालने या बिरजू का विरोध करने की बजाए वो गेंद की तरह हँसती हुई पलंग पर धदाम से जा गिरी थी. पलंग पर पताकने के तुरंत बाद बिरजू ज्वाला देवी की तरफ लपका और उसके ऊपर झुक गया.अगले ही पल उसकी ब्रा खींच कर उसने चूचियो से अलग कर दी और उसके बाद चूत से पॅंटी भी झटके के साथ जोश मैं आ कर उसने इस तरह खेंची की पनटी ज्वाला देवी की कमर वा गंद का साथ छोड़ कर एकदम उसकी टाँगो मे आ कर गिरी. जैसे ही बिरजू का लंड हाथ मैं पकड़ कर ज्वाला देवी ने ज़ोर से दबाया तो वो झुंझला उठा, इसी झुंझलाहट और ताव मे आ कर उसने ज्वाला देवी की उठी हुई चूचियो को पकड़ कर बेरेहमी से खींचते हुए वो उनपर ख़तरनाक जानवर की तरह टूट पड़ा.ज्वाला के गुलाबी होंठो को जबरदस्त तरीके से पीना उसने शुरू कर डाला था. उस'के गालों को ज़ोर ज़ोर से भींच कर होंठ चूस्ते हुए वो अत्यंत जोशिलापन मह'सूस कर रहा था. चाँद पॅलो मैं उसने होंठो को चूस चूस कर उनकी मा चोद कर रख दी थी.जी भर कर होंठ पीने के बाद उसने एकदम ही ज्वाला देवी को पलंग पर घुमा कर चित्त पटक दिया और तभी उछल कर वो उस'के ऊपर सवार हो गया.अपने शरीर के नीचे उसे दबा कर उसका पूरा शरीर ही उसने ऐसे धक लिया मानो ज्वाला देवी उसके नीचे पिस कर रहेगी.बिरजू इस समय ज्वाला के बदन से लिपट लिपट करऔर उसे ज़ोरो से भींच कर अपना बदन उसके मुलायम जानने बदन पर बड़ी बेरेहमी से रगड़े जा रहा था. बदन से बदन पर घस्से मारता हुआ वो दोनो हाथों से चूचियों को ज़ोर ज़ोर से दबाता जा रहा था और बारी बरी से उसने चूचियो को मूँ'ह मैं ले ले कर तबीयत से चूसना भी स्टार्ट कर दिया था.बिरजू और ज्वाला देवी दोनो ही इस समय चुदाई की इच्च्छा मैं पागल हो चुके थे. बिरजू के दोनो हाथों को ज्वाला देवी ने मजबूती से पकड़ कर उसकी चूमि का जवाब चूमि से देना शुरू कर दिया था.ज्वाला देवी मस्ती मैं आ कर बिरजू के कभी गाल पर काट लेती तो कभी उस'के कंधे पर काट कर अपनी चूत की धधकति ज्वाला का प्रदर्शान करती जा रही थी. अपनी पूरी ताक़त से बिरजू को ज़ोर से वो भींचे जा रही थी. एकाएक ज्वाला ने बिरजू की मदद करने के लिए अपनी टाँगे ऊपर उठा कर अपने हाथों से टाँगों मैं फँसी हुई पॅंटी निकाल कर बाहर कर दी और कपड़े का नामोनिशान तक अपने बदन से उसने हटा कर रख दिया. उसकी तनी हुई चूचियों की उभरी हुई घुंडी और भारी गांद सभी रंजना को सॉफ दिखाई पड़ रहा था.बस उसे तमन्ना थी तो सिर्फ़ इतनी कि कब बिरजू का लंड अपनी आँखों से वो देख सके.सहसा ही ज्वाला देवी ने दोनो टाँगे ऊपर उठा कर बिरजू की कमर के इर्द गिर्द लपेट ली और जोंक की तरह उस'से लिपट गयी. दोनो ने ही अपना अपना बदन बड़ी ही बेरेहमी और ताक़त से एक दूसरे से रगड़ना शुरू कर दिया था. चूमि काट'ने की क्रिया बड़ी तेज़ ज़ुट जोशीलेपान से जारी थी. ज़ोर ज़ोर से हान्फ्ते सिसकारियाँ छ्चोड़ते हुए दोनो एक दूसरे के बदन की मा चोदने मैं जी जान एक किए दे रहे थे. तभी बड़ी फुर्ती से बिरजू ज़ोर ज़ोर से कुत्ते की तरह हांफता हुआ सीधा बैठ गया और तेज़ी से ज्वाला देवी की टाँगों की तरफ चला. इस पोज़िशन मे रंजना अपनी मम्मी को अच्छी तरह नंगी देख रही थी. उसने मह'सूस किया कि मम्मी की चूत उसकी चूत से काफ़ी बड़ी है. चूत की दरार काफ़ी चौड़ी उसे दिखाई दे रही थी. उसे ताज्जुब हुआ कि मम्मी की चूत इतनी काली होने के साथ साथ एकदम बॉल रहित सफाचत थी.कुछ दिन पहले ही बड़ी बड़ी झांतो का झुर्मुट स्वयं अपनी आँखों से उसने ज्वाला देवी की चूत पर उस समय देखा था, जब सुबह सुबह उसे जगाने के लिए गयी थी. इस समय ज्वाला देवी बड़ी बैचैन, चुदने को उतावली हुई जा रही ही. लंड सटाकने वाली नज़रो से वो बिरजू को एक तक देखे जा रही थी. चूत की चुदाई करने के लिए बिरजू टाँगों के बल बैठ कर ज्वाला देवी की जांघों, चूत की फांको और उसकी दरार पर हाथ फिराने मे लगा हुआ था और फिर एकदम से उसने घुट'ने के पास उसकी टाँग को पकड़ कर चौड़ा कर दिया. तत्पश्चात उसने पलंग के पास मेज़ पर रखकी हुई खुश्बुदार तेल की शीशी उठाई और उसमें से काफ़ी तेल हाथ मैं ले कर ज्वाला देवी की चूत पर अच्छी तरह से अंदर और बाहर इस तरह मलना शुरू किया की उसकी सुगंध रंजना के नथुनो मैं भी आ कर घुसने लगी.

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Re: Raddi wala -रद्दी वाला

Unread post by The Romantic » 16 Dec 2014 12:26

अपनी चूत पर किसी मर्द से तेल मालिश करवाने के लिए रंजना भी मचल उठी थी. उसने खुद ही एक हाथ से अपनी चूत को ज़ोर से दबा कर एक ठंडी सांस सी खींची और अंदर की चुदाई देखने मैं उसने सारा ध्यान केंद्रित कर दिया.ज्वाला देवी की चूत तेल से तर करने के पश्चात बिरजू का ध्यानआपने खड़े हुए लंड पर गया.और जैसे ही उसने अपने लंबे और मोटे लन्ड़ को पकड़ कर हिलाया कि बाहर खड़ी रंजना की नज़र पहली बार लंड पर पड़ी. इतनी देर बाद इस शानदार डंडे के दर्शन उसे नसीब हुए थे, लंड को देखते ही रंजना का कलेजा मूँ'ह को आ गया था. उसे अपनी साँस गले मैं फँसती हुई जान पड़ी. वाकई बिरजू का लंड बेहद मोटा, सख़्त और ज़रूरत से ज़्यादा ही लंबा था.देखने मे लकड़ी के खूँटे की तरह वो उस समय दिखाई पड़ रहा था. शायद इतने शानदार लंड की वजह ही थी कि ज्वाला देवी जैसी इज़्ज़तदार औरत भी उस'के इशारो पर नाच रही थी. रंजना को अपनी सहेली की राज शर्मा की कही हुई शायरी याद आ गयी थी, "औरत को नहीं चाहिए ताज़ो तख्त, उसको चाहिए लंड लंबा, मोटा और सख़्त."हाँ तो बिरजू ने एक हाथ से अपने लंड को पकड़ा और दूसरे हाथ से तेल की शीशी उल्टी करके लंड के ऊपर तेल की धार उसने डाल दी. फ़ौरन शीशी मेज़ पर रख कर उसने उस हाथ से लंड पर मालिश करनी शुरू कर दी. मालिश के कारण लंड का तनाव, कडपन और भी ज़्यादा बढ़ गया. चूत मैं घुसने के लिए वो ज़हरीले साँप की तरह फुफ्कारने लगा था.ज्वाला देवी लंड की तरफ कुछ इस अंदाज़ मैं देख रही थी मानो लंड को निगल जाना चाह'ती हो या फिर आँखों के रास्ते पी जाना चाह'ती हो. सारे काम निबटा कर बिरजू खिसक कर ज्वाला देवी की टाँगों के बीच मैं आ गया.उसने टाँगो को जारोरत के मुताबिक मोड़ा और फिर घुटनो के बल उसके ऊपर झुकते हुए अपने खूँटे जैसे सख़्त लंड को ठीक चूत के फड़फदते छेद पर टीका दिया. इसके बाद बिरजू पंजो के बल तोड़ा ऊपर उठा. एक हाथ से तो वो तन्तनाते लंड को पकड़े रहा और दूसरे हाथ से ज्वाला देवी की कमर को उसने धर दबोचा.इतनी तैयारी करते ही ज्वाला देवी की तरफ आँख मारते हुए उसने चुदाई का इशारा किया. परिणाम स्वरूप, ज्वाला देवी ने अपने दोनो हाथों की उंगलियों से चूत का मूँ'ह चौड़ा किया. अब चूत के अंदर का लाल लाल हिस्सा सॉफ दिखाई दे रहा था. बिरजू ने चूत के लाल हिस्से पर अपने लंड का सुपाड़ा टीका कर पहले खूब ज़ोर ज़ोर से उसे चूत पर रगड़ा. इस तरह चूत पर गरम सुपादे की रगड़ाई से ज्वाला देवी लंड सटकने को बैचैन हो उठी, "देखो ! देर ना करो डालो .. ऊपर ऊपर मत रहने दो.. आहह. पूरा अंदर कर दो उऊफ़ ससीई स."ज्वाला देवी के मचलते अरमानो को महसूस कर बिरजू के सब्र का बाँध भी टूट गया और उसने जान लगा कर इतने जोश से चूत पर लंड को दबाया कि आराम के साथ पूरा लंड सरकता चूत मे उतर गया.ऐसा लग रहा था जैसे लंड के चूत मैं घुसते ही ज्वाला देवी की भड़कट्ी हुई चूत की आग मैं किसी ने घी टपका दिया हो, यानी वो और भी ज़्यादा बेचैन सी हो उठी.और जबरदस्त धक्कों द्वारा चुदने की इक्च्छा मैं वो मच्लि जा रही थी. बिरजू की कमर को दोनो हाथों से कस कर पकड़ वो उसे अपनी ओर खींच खींच कर पागलो की तरह पेश आ रही थी. बड़ी बेचैनी से वो अपनी गर्दन इधर उधर पटकते हुए अपनी दोनो टाँगों को भी उच्छाल उच्छल कर पलंग पर मारे जा रही थी.लंड के स्पर्श ने उसके अंदर एक जबरदस्त तूफान सा भर कर रख दिया था. अजीब अजीब तरह की आसपस्ट आवाज़े उस'के मूँ'ह से निकल रही थी, "ओह्ह मेरे राजा मार, जान लगा दे.इसे फाड़ कर रख दे .. रद्दी वाले आज रुक मत अरी मार ना मुझे चीर कर रख दे. दो कर दे मेरी चूत फाड़ कर आह.. स." बिरजू के चूत मैं लंड रोक'ने से ज्वाला देवी को इतना गुस्सा आ रहा था कि वो इस स्तिथि को सहन ना करके ज़ोरो से बिरजू के मुँह पर चाँटा मारने को तैयार हो उठी थी.मगर तभी बिरजू ने लंड को अंदर किया ओर थोडा दबा कर चूत से सटा दिया और दोनो हाथों से कमर को पकड़ कर वो कुच्छ ऊपर उठा और अपनी कमर तथा गांद को ऊपर उठा कर ऐसा उच्छला की ज़ोरो का धक्का ज्वाला देवी की चूत पर जा कर पड़ा.इस धक्के मे मोटा,लंबा और सख़्त लंड चूत मैं तेज़ी से घुसता चला गया था और इस बार सूपदे की चोट चूत की तलहटी पर जा कर पड़ी थी. इतनी ज़ोर से मम्मी की चूत पर हमला होता देख कर रंजना बुरी तरह काँप उठी मगर अगले ही पल उस'के असचर्या का ठिकाना ही नही रहा क्योंकि ज्वाला देवी ने कोई दिक्कत इस भारी धक्के के चूत पर पड़ने से नहीं ज़ाहिर की थी, बल्कि उसने बिरजू को बड़े ही ज़ोरों से मस्ती मैं आ कर बाँहों मे भींच लिया था.इस अजीब वारदात को देख कर रंजना को अपनी चूत के अंदर एक ना दिखाई देने वाली आग जलती हुई महसूस हुई. उस'के अंदर सोई हुई चुदाई की इच्च्छा भी प्रज्वलित हो उठी थी. उसे लगा कि चूत की आग पल पल शोलो मैं बदलती जा रही है. चूत की आग मैं झुलस कर वो घबरा सी गयी और उसे चक्कर आने शुरू हो गये. इतना सब कुच्छ होते हुए भी चुदाई का दृश्या देखने मैं बड़ा अजीब सा मज़ा उसे प्राप्त हो रहा था, वहाँ से हट'ने के बारे मैं वो सोच भी नही सकती थी. उसकी निगाहे अंदर से हट'ने का नाम ही नहीं ले रही थी. जबकि शरीर धीरे धीरे जवाब देता जा रहा था. अब उसने देखा कि बिरजू का लंड चूत के अंदर घुसते ही मम्मी बड़े अजीब से मज़े से मतवाली हो कर बुरी तरह उस'से लिपट गयी थी और अपने बदन तथा चूचियों और गालों को उससे रगड़ते हुए धीरे धीरे मज़े की सिसकारियाँ छ्चोड़ रही थी,"पेलो. वाह..रे. मारो. एशह एसेच. म. हद. हो गयी वाहह और्र मज़ा दो और दो सी आह उफ़".लंड को चूत मैं अच्छी तरह घुसा कर बिरजू ने मोर्चा संभाला.उसने एक हाथ से तो ज्वाला देवी की मुलायम कमर को मजबूती से पकड़ा और दूसरा हाथ उसकी भारी उभरी हुई गांद के नीचे लगा कर बड़े ज़ोर से हाथ का पंजा, गांद के गोश्त मे गढ़ाया. ज़ोर ज़ोर से गांद का गूदा वो मसले जा रहा था. ज्वाला देवी ने भी जवाब मैं बिरजू की मर्दानी गांद को पकड़ा और ज़ोर से उसे खेंचते हुए चूत पर दबाव देती हुई वो बोली, "अब इसकी धज्जियाँ उड़ा दो सैय्या. आह ऐसे काम चलने वाला नहीं है.. पेलो आह." उस'के इतना कह'ते ही बिरजू ने संभाल कर ज़ोरदार धक्का मारा और कहा, "ले. अब नहीं छ्चोड़ूँगा. फाड़ डालूँगा तेरी.." इस धक्के के बाद जो धक्के चालू हुए तो गजब ही हो गया. चूत पर लंड आफ़त बन कर टूट पड़ा था.ज्वाला देवी उसकी गांद को पकड़ कर धक्के लगवाने और चूत का सत्यानाश करवाने मैं उसकी सहायता किए जा रही थी. बिरजू बड़े ही ज़ोरदार और तरकीब वाले धक्के मार मार कर उसे चोदे जा रहा था. बीच बीच मैं दोनो हाथों से उसकी चूचियों को ज़ोर ज़ोर से दबाते हुए वो बुरी तरह उस'के होंठो और गालों को काट'ने मे भी कोई कसर नही छ्चोड़ रहा था.चूत मे लंड से ज़ोरदार घस्से छ्चोड़ता हुआ वो चुदाई मैं चार चाँद लगाने मे जुटा हुआ था.चूत पर घस्से मारते हुए वो बराबर चूचियो को मूँ'ह मैं दबाते हुए घुंडीयों को खूब चूज़ जा रहा था. ज्वाला देवी इस समय मज़े मैं इस तरह मतवाली दिखाई दे रही थी कि अगर इस सुख के बदले उन पॅलो मैं उसे अपनी जान भी देनी पड़े तो वो बड़ी खुशी ख़ुसी से अपनी जान भी दे देगी,मगर इस सुख को नही छोड़ेगी. अचानक बिरजू ने लंड चूत मैं रोक कर अपनी झांते वा आँड चूत पर रगड़ने शुरू कर दिए.झांतो वा आंदो के गुदगूदे घससो को खा खा कर ज्वाला देवी बेचैनी से अपनिगांद को हिलाते हुए छूट पर धक्कों का हमला करवाने के लिए बड़बड़ा उठी, "हाई उई झाँते मत रगाडो.. वाहह तुमहरे आनन्द गुदगुदी कर रहे हैं सनम, उई मान भी जाओ आयी चोदो पेलो आह रुक क्यो गये ज़ालिम आहह मत तरसाओ आहह.. अब तो असली वक़्त आया है धक्के मारने का. मारो खूब मारो जल्दी करो.. आज चूत के टुकड़े टुकड़े .. फाड़ डालो इसे हाय बड़ा मोटा है.. आइईए." बिरजू के जोश ज्वाला देवी के यूँ मचलने सिसकने से कुच्छ इतने ज़्यादा बढ़ उठे अपने ऊपर वो काबू ना कर सका और सीधा बैठ कर जबरदस्त धक्के चूत पर लगाने उसने शुरू कर दिए. अब दोनो बराबर अपनी कमर वा गांद को चलाते हुए ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाए जा रहे थे.पलंग बुरी तरह से चरमरा रहा था और धक्के लगने से फ़चक-फ़चक की आवाज़ के साथ कमरे का वातावरण गूँज उठा था. ज्वाला देवी मारे मज़े के ज़ोर ज़ोर से किल्कारियाँ मारने लगी थी, और बिरजू को ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने के लिए उत्साहित कर रही थी,"राजा.और तेज़.. और तेज़.. बहुत तेज़.. रुकना मत. जितना चाहो ज़ोर से मारो धक्का.. आह. हाँ. ऐसे ही. और तेज़. ज़ोर से मारो आहह." बिरजू ने आव देखा ना ताव और अपनी सारी ताक़त के साथ बड़े ही ख़ूँख़ार चूत फाड़ धक्के उसने लगाने प्रारंभ कर दिए. इस समय वो अपने पूरे जोश और उफान पर था. उस'के हर धक्के मैं बिजली जैसी चमक और तेज़ कड़कड़ाहट महसूस हो रही थी.दोनो की गांद बड़ी ज़ोरो से उछले जा रही थी. ओलों की टॅप-टॅप की तरह से वो पलंग को तोड़े डाल रहे थे.ऐसा लग रहा था जैसे वो दोनो एक दूसरे के अंदर घुस कर ही दम लेंगे, या फिर एक दूसरे के अंग और नस नस को तोड़ मरोड़ कर रख देंगे.उन दोनो पर ही इस समय क़ातिलाना भूत पूरी तरह सवार था. सह'सा ही बिरजू के धक्कों की रफ़्तार असाधारण रूप से बढ़ उठी और वो ज्वाला देवी के शरीर को तोड़ने मरोड़ने लगा. ज्वाला देवी मज़े मैं मस्तानी हो कर दुगने जोश के साथ चीखने चिल्लाने लगी,"वाह मेरे प्यारे.. मार.. और मार हां बड़ा मज़ा आ रहा है.वा तोड़ दे फाड़ डाल, खा जा छ्चोड़ना मत अफ स मार जमा के धक्का और दे पूरा चोद इसे हाय."और इसी के साथ ज्वाला देवी के धक्कों और उच्छलने की रफ़्तार कम होती चली गयी. बिरजू भी ज़ोर ज़ोर से उछलने के बाद लंड से वीर्या फैंकने लगा था. दोनो ही शांत और निढाल हो कर गिर पड़े थे. ज्वाला देवी झाड़ कर अपने शरीर और हाथ पाँव ढीला छ्चोड़ चुकी थी तथा बिरजू उसे ताक़त से चिपताए बेहोश सा हो कर आँखे मून्दे उस'के ऊपर गिर पड़ा था और ज़ोर ज़ोर से हाँफने लगा था. इतना सब देख कर रंजना का मन इतना खराब हुआ कि आगे एक दृश्या भी देखना उसे मुश्किल जान पड़ने लगा था. उसने गर्दन इधर उधर घुमा कर अपने सुन्न पड़े शरीर को हरकत दी,इसके बाद आहिस्ता से वो भारी मन, काँपते शरीर और लरखड़ाते हुए कदमो से अपने कमरे मे वापस लौट आई. अपने कमरे मैं पहुँच कर वो पलंग पर गिर पड़ी, चुदाई की ज्वाला मे उसका तन मन दोनो ही बुरी तरह छटपटा रहे थे,उसका अंग अंग मीठे दर्द और बेचैनी से भर उठा था,उसे लग रहा था कि कोई ज्वालामुखी शरीर मैं फट कर चूत के रास्ते से निकल जाना चाहता था.अपनी इस हालत से च्छुतकारा पाने के लिए रंजना इस समय कुच्छ भी करने को तैयार हो उठी थी,मगर कुच्छ कर पाना शायद उस'के बस मैं ही नहीं था. सिवाय पागलो जैसी स्तिथि मैं आने के. इच्च्छा तो उसकी ये थी कि कोई जवान मर्द अपनी ताक़तवर बाँहों मैं ज़ोरो से उसे भींच ले और इतनी ज़ोर से दबाए की सारे शरीर का कचूमर ही निकल जाए.मगर ये सोचना एकदम बेकार सा उसे लगा था.अपनी बेबसी पर उसका मन अंदर ही अंदर फूँका जा रहा था. एक मर्द से चुदाई करवाना उसके लिए इस समय जान से ज़्यादा अनमोल था, मगर ना तो चुदाई करने वाला कोई मर्द इस समय उसको मिलने जा रहा था और ना ही मिल सकने की कोई उम्मीद या असर आस पास उसे नज़र आ रहे थे. उसने अपने सिरहाने से सिर के नीचे दबाए हुए तकिये को निकाल कर अपने सीने से भींच कर लगा लिया और उसे अपनी कुँवारी आनच्छुई चूचियो से लिपटा कर ज़ोरो से दबाते हुए वो बिस्तर पर औंधी लेट गयी.सारी रात उसने मम्मी और बिरजू के बीच हुई चुदाई के बारे मैं सोच सोच कर ही गुज़ार दी. क्रमशः........................

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Re: Raddi wala -रद्दी वाला

Unread post by The Romantic » 16 Dec 2014 12:27

. Raddi Wala paart--4 gataank se aage................... Duniya ko nazar andaaz kar'ke chudai ka zabardast maza lene ke mood mai dono aate ja rahe the. Is drishya ko dekh kar Ranjna ka haal ajeeb sa ho chala tha, khoon ka daura kafi tez hone ke saath sath uska sir bhi zoro se ghoom raha tha aur choot ke aas paas sursuraahat si hoti huee use lag rahi thee.Dil ki dharkane zor zor se jari thi.Gala wa honth khushk padte ja rahe the aur ek ajeeb sa nasha us par bhi chata ja raha tha. Jwala Devi sharaab peeti huee Birju se bole jaa rahi thee, uski baanhen peechhe ki or ghoom kar Birju ke gale ka haar bani huee thee.Jwala Devi Birju ko baar baar"Sanam" aur "Saiyyan" ke naam se hi sambhodhit karti jaa rahi thee.Birju bhi use "Raani" or "Meri jaan" kah kah kar use dilo jaan se apna banaane ke chakkar mai laga hua tha. Birju ka ek haath Jwala Devi ki gadraai huee kamar par kasa hua tha, aur dosre haath main usne sharab ka glass pakad rakha tha. Jwala Devi ki kamar mai pada uska hath kabhi uski choochi pakadta aur kabhi naabhi ke neeche ungliyaan gadata to kabhi uski jaanghen. phir sharab ka glass usne Jwala Devi ke haath main thamaa diya. Tab Jwala Devi use apne haathon se sharaab pilaane lagee. mauke ka faida uthaata hue Birju dono hathon se uskee bhaari moti motee choochiyo ko pakad kar zor zor se bheenchta aur nochta hua maza lene main jut jata tha.Ekaek Jwala Devi kuch fusfusai aur dono ek doosre ki nigaho main jhaank kar muskura diye.Sharab ka khali gilas ek taraf rakh kar Birju bola, "Jaan meri !ab khari ho jaao."Birju ki aagya ka turant palan karti hui Jwala Devi muskurate hue theek uske saamne khari ho gayi,Birju bade gaur se aur choot fad nigaho se use ghoore jaa raha tha aur Jwala Devi uski aankhon main aankhe Daal kar choot ki jwaala main machalti huee muskuraate hue apne kapde utaarne main lag gayee. Uske haath to apna badan nanga karne main jute hue the magar nigahe barabar Birju ke chehre aur lund ke uthan par hi jami hui thee. Apne shareer ke lagbhag saare kapde utarne ke baad ek zordar angdayee le kar Jwala Devi apna nichla honth danto main dabate hue boli,"Hai ! main mar jaaoon saiyaan ! aaj mujhe uthne layak mat chhodna.Sach bada maza dete ho tum,meri choot ko ghot kar rakh dete hotum." Panty wa bra main Jwala Devi is umr mai lund par kayamt dha rahi thee.Uska nanga badan jo gora hone ke saath saath guddedaar bheenchne laayak bhi tha.laal bulb ki halki raushini main bada hi lund maar saabit ho raha tha. Vastav main Ranjna ko Jwala Devi is samay itni kharaab si lagne lagi thee ki wo soch rahi thee ki kaash ! mummy ki jagah wo nangi ho kar khari hoti to choot ke arman aaj avashya poore ho jate.Magar sochne se kya hota hai? Sab apne apne mukaddar ka khate hai.Birju ka lund jab Jwala Devi ki choot ke mukaddar main likha hai to phir bhala Ranjna ki choot ki kunwaari seal aaj kaise toot sakti thee. Josh main aa kar Birju apni jagah chod kar khara hua aur muskurata hua Jwala Devi ke theek saamne aa pahuncha, kuchh pal tak usne sir se paanv tak use dekhne ke baad apne kapde utaarne chalukar diye,ek ek karke sabhi kapde usneutar kar rakh diye aur woek dam nang dhadang ho kar apna khara lund hath main pakad dabaate hue siska, "Hai raani aaj! Ise jadli se apni choot main le lo."Is samay jis drishtikon se Ranjna andar ke chudai drishya ko dekh rahi thee usmen Jwala Devi ka saamne ka yaani choot aur choochiyaan tatha Birju ki gaand aur kamar yani pichhwada use dikhayi pad raha tha.Birju ki mardana tandurust majboot gaand aur chauda badan dekh kar Ranjna apne hi aap mai Sharma uthi thi, ajeeb si gudgudi use apni choochiyo mai uthti huee jan padne lagi thee.Birju abhi kapde utaar kar seedha khara hua hi tha ki Jwala Devi ne apni gudaj wa mulayam banhen uski gardan mai Daal di aur zor se use bhench kar wo buri tarah usse chipak gayi.Chudne ko utawali ho kar Birju ki gardan par chumi karte hue wo dheere se fusfusa kar boli,"Mere sanam ! badi der kar di hai tumne ! Ab jaldi karo na ! dekho,mare josh ke meri to bra hi fati jaa rahi hai, mujhe badi jalan ho rahi hai,Uff !main to ab bardaasht nahee kar paa rahi hoon, aah jaldi se meri choot ka baja baja do saiyan aah."Birju uttar mai hontho par jeebh firata hua hansa aur bas phir agle pal apni dono mardani taqatwar banhen faila kar usne Jwala Devi ko majboti se jakad liya. Jabardast tareeke se bheenchta hua lagataar kayee chumi us'ke machalte fadfadate hontho aur dahakte ubhre gore gore gaalon par kaat'ni shuru kar Daali. Jwala Devi madmast ho kar Birju ke mardane badan se buri tarah matwali ho kar lipat lipat jaa rahi thi.Dono bhaari uttejana aur chudai ke ufaan main bhare hue zor zor se haanfte hue palang ki taraf badhte jaa rahe the.Palang ke kareeb pahunchte hi Birju ne ek jhatke ke sath Jwala Devi ka nanga badan palang par patak diya. Apne aapko sambhalne ya Birju ka virodh karne ki bajaye wo gend ki tarah hansti huee palang par dhadam se jaa giri thee. Palang par patakne ke turant bad Birju Jwala Devi ki taraf lapka aur uske oopar jhuk gaya.Agle hi pal uski bra kheench kar usne chochiyo se alag kar di aur uske bad choot se panty bhi jhatke ke saath josh main aa kar usne is tarah khenchi ki panty Jwala Devi ki kamar wa gand ka sath chod kar ekdam uski tango mai aa kar giri. Jaise hi Birju ka lund haath main pakad kar Jwala Devi ne zor se dabaya to wo jhunjhala utha, isi jhunjhalahat aur taav mai aa kar usne Jwala Devi ki uthee hui choochiyo ko pakad kar berehmi se kheenchte hue wo unpar khatarnak janwar ki tarah toot pada.Jwala ke gulabi hontho ko jabardast tareeke se peena usne shuru kar Daala tha. us'ke gaalon ko zor zor se bheench kar honth chooste hue wo atyant joshilapan mah'soos kar raha tha. chand palo main usne hontho ko choos choos kar unki maa chod kar rakh di thee.Ji bhar kar honth peene ke baad usne ekdam hi Jwala Devi ko palang par ghuma kar chitt patak diya aur tabhi uchal kar wo us'ke oopar sawar ho gaya.Apne shareer ke neeche use daba kar uska poora shareer hi usne aise dhak liyatha mano Jwala Devi uske neeche pis kar rahegi.Birju is samay Jwala ke badan se lipat lipat karaur use zoro se bheench kar apna badan uske mulayam janane badan parbadi berehmi se ragade jaa raha tha. Badan se badan par ghasse maarta hua wo dono haathon se choochiyon ko zor zor se dabata jaa raha tha aur baari bari se usne choochiyo ko mun'h main le le kar tabiyat se chosna bhi start kar diya tha.Birju aur Jwala Devi dono hi is samay chudai ichchha main paagal ho chuke the. Birju ke dono haathon ko Jwala Devi ne majbooti se pakad kar uski chumi ka jawab chumi se dena shuru kar diya tha.Jwala Devi masti main aa kar Birju ke kabhi gaal par kaat letee to kabhi us'ke kandhe par kaat kar apni choot ki dhadhakti jwaala ka pradarshaan karti jaa rahi thee. Apni poori taaqat se Birju ko zor se wo bheenche jaa rahi thee. Ekaek Jwala ne Birju ki madad karne ke liye apni tange oopar utha kar apne haathon se taangon main fansi huee panty nikaal kar baahar kar di aur kapde ka naamonishaan tak apne badan se usne hata kar rakh diya. Uski tani huee choochiyon ki ubhri huee ghundi aur bhaari gaand sabhi Ranjna ko saaf dikhayee pad raha tha.Bas use tamanna thee to sirf itni ki kab Birju ka lund apni ankhon se wo dekh sake.Sahsa hi Jwala Devi ne dono tange oopar uthaa kar Birju ki kamar ke ird gird lapet li aur jonk ki tarah us'se lipat gayee. Dono ne hi apna apna badan badi hi berehmi aur taqat se ek doosre se ragadna shuru kar diya tha. Chumi kaat'ne ki kriya badi tez zut joshilepan se jaari thee. Zor zor se haanfte siskaariyaan chhodte hue dono ek doosre ke badan ki ma chodne main ji jaan ek kiye de rahe the. tabhi badi furti se Birju zor zor se kutte ki tarah haanfta hua seedha baith gaya aur tezi se Jwala Devi ki tangon ki taraf chala. Is position mai Ranjna apni mummy ko achchhee tarah nangi dekh rahi thee. Usne mah'soos kiya ki mummy ki choot uski choot se kaafi badi hai. Choot ki daraar kaafi chaudi use dikhaayee de rahi thee. Use taajjub hua ki mummy ki choot itni kaali hone ke sath sath ekdam baal rahit safachat thee.kuch din pahale hi badi badi jhanto ka jhurmut swayam apni aankhon se usne Jwala Devi ki choot par us samay dekha tha, jab subah subah use jagaane ke liye gayee thee. Is samay Jwala Devi badi baichain, chudne ko utawali huee jaa rahi hee. lund satakne wali nazro se wo Birju ko ek tak dekhe ja rahi thee. Choot ki chudai karne ke liye Birju taangon ke bal baith kar Jwala Devi ki jaanghon, choot ki phaanko aur uski darar par hath firane mai laga hua tha aur phir ekdam se usne ghut'ne ke paas uski taang ko pakad kar chauda kar diya. Tatpashchaat usne palang ke paas mez par rakhkhi huee khushbudar tel ki sheeshi uthaai aur usmen se kaafi tel haath main le kar Jwala Devi ki choot par achchee tarah se andar aur bahar is tarah malna shuru kiya ki uski sugandh Ranjna ke nathuno main bhi aa kar ghusne lagi.Apni choot par kisi mard se tel malish karwane ke liye Ranjna bhi machal uthee thee. Usne khud hi ek haath se apni choot ko zor se daba kar ek thandi sans si kheenchi aur andar ki chudai dekhne main usne sara dhyan kendrit kar diya.Jwala Devi ki choot tel se tar karne ke pashchat Birju ka dhyanapne khare hue lund par gaya.Aur jaise hi usne apne lambe aur mote lnd ko pakad kar hilaaya ki baahar khari Ranjna ki nazar pahalee baar lund par paree. Itni der baad is shaandar dande ke darshan use naseeb hue the, lund ko dekhte hi Ranjna ka kaleja mun'h ko aa gaya tha. Use apni saans gale main fansti hui jan paree. Waakai Birju ka lund behad mota, sakht aur jaroorat se jyada hi lamba tha.Dekhne mai lakdi ke khoonte ki tarah wo us samay dikhayee pad raha tha. shaayad itne shandar lund ki wajah hi thee ki Jwala Devi jaisi izzatdaar aurat bhi us'ke ishaaro par naach rahi thee. Ranjna ko apni saheli ki kahi huee shayari yaad aa gayee thee, "Aurat ko naheen chaahiye taazo takhth, usko chaahiye lund lamba, mota aur sakht."Haan to Birju ne ek haath se apne lund ko pakda aur doosre haath se tel ki sheeshi ulti karke lund ke oopar tel ki dhaar usne Daal di. Fauran sheeshi mez par rakh kar usne us hath se lund par malish karni shuru kar di. Maalish ke kaaran lund ka tanaav, kadapan aur bhi jyaada baDh gaya. hoot main ghusne ke liye wo zehreele saamp ki tarah fufkaarne laga tha.Jwala Devi lund ki taraf kuch is andaz main dekh rahi thee maanoo lund ko nigal jaana chaah'tee ho ya phir aankhon ke raaste pee jaana chaah'tee ho. Saare kaam nibta kar Birju khisak kar Jwala Devi ki taangon ke beech main aa gaya.Usne tango ko jarorat ke mutabik moda aur phir ghutno ke bal uske oopar jhukte hue apne khoonte jaise sakht lund ko theek choot ke fadfadate chhed par tika diya. Iske baad Birju panjo ke bal thoda oopar uthaa. Ek haath se to wo tantanaate lund ko pakde raha aur doosre haath se Jwala Devi ki kamar ko usne dhar dabocha.Itni taiyaree karte hi Jwala Devi ki taraf aankh maarte hue usne chudai ka ishaara kiya. Parinaam swaroop, Jwala Devi ne apne dono haathon ki ungliyon se choot ka mun'h chauda kiya. Ab choot ke andar ka laal laal hissa saaf dikhayee de raha tha. Birju ne choot ke laal hisse par apne lund ka supaada tika kar pahale khoob zor zor se use choot par ragada. Is tarah choot par garam supaade ki ragdaayee se Jwala Devi lund ssatakne ko baichain ho uthee, "Dekho ! der na karo Daalo .. oopar oopar mat rahne do.. aahh. Poora andar kar do uuf ssii ssi."Jwala Devi ke machalte armaano ko mahsoos kar Birju ke sabr ka bandh bhi toot gaya aur usne jaan laga kar itne josh se choot par lund ko dabaaya ki aram ke saath poora lund sarakta choot mai utar gaya.Aisa lag raha tha jaise lund ke choot main ghuste hi Jwala Devi ki bhadakti huee choot ki aag main kisi ne ghee tapka diya ho, yaani wo aur bhi jyaada bechain si ho uthee.Aur jabardast dhakkon dwara chudne ki icchha main wo machli jaa rahi thee. Birju ki kamar ko dono haathon se kas kar pakad wo use apni or kheench kheench kar paagalo ki tarah pesh aa rahi thee. Badi bechaini se wo apni gardan idhar udhar patakte hue apni dono taangon ko bhi uchhaal uchhal kar palang par mare jaa rahi thi.lund ke sparsh ne uske andar ek jabardast tufaan sa bhar kar rakh diya tha. Ajeeb ajeeb tarah ki aspast aawaaze us'ke mun'h se nikal rahi thee, "Ohh mere raja maar, jaan laga de.Ise faad kar rakh de .. raddi waale aaj ruk mat aree maar na mujhe cheer kar rakh de. do kar de meri choot faad kar aah.. sii." Birju ke choot main lund rok'ne se Jwala Devi ko itna gussa aa raha tha ki wo is stithi ko sahan na karke zoro se Birju ke munh parchanta maarne ko taiyaar ho uthee thee.Magar tabhi Birju ne lund ko andar kiya or thoda daba kar choot se sata diya aur dono haathon se kamar ko pakad kar wo kuchh oopar utha aur apni kamar tatha gaand ko oopar uthaa kar aisa uchhlaa ki zoro ka dhakka Jwala Devi ki choot par jaa kar pada.Is dhakke mai mota,lamba aur sakht lund choot main tezi se ghusta chala gaya tha aur is baar supade ki chot choot ki talhati par ja kar pari thee. Itni zor se mummy ki choot par hamla hota dekh kar Ranjna buri tarah kaamp uthee magar agle hi pal us'ke ascharya ka thikana hi nahee raha kyonki Jwala Devi ne koi dikkat is bhari dhakke ke choot par padne se naheen zaahir ki thee, balki usne Birju ko bade hi zoron se masti main aa kar banhon mai bheench liya tha.Is ajeeb waardaat ko dekh kar Ranjna ko apni choot ke andar ek na dikhayee dene wali aag jalti hui mahsoos hui. us'ke andar soyee huee chudai ichchha bhi prajwalit ho uthee thee. use laga ki choot ki aag pal pal sholo main badalti jaa rahi hai. Choot ki aag main jhulas kar wo ghabra si gayee aur use chakkar aane shuru ho gaye. Itna sab kuchh hote hue bhi chudai ka drishya dekhne main bada ajeeb sa maza use praapt ho raha tha, wahaan se hat'ne ke baare main wo soch bhi nahee sakti thi. Uski nigaahe andar se hat'ne ka naam hi naheen le rahi thee. Jabki shareer dheere dheere jawab deta jaa raha tha. Ab usne dekha ki Birju ka lund choot ke andar ghuste hi mummy bade ajeeb se maze se matwaali ho kar buri tarah us'se lipat gayee thee aur apne badan tatha choochiyon aur galon ko usse ragadte hue dheere dheere maze ki siskariyan chhod rahi thi,"Pelo. wah..re. Maro. eishh sh. m. Had. Ho gayee waahh aurr maza do aur do si ah uf".lund ko choot main acchi tarah ghusa kar Birju ne morcha sambhala.Usne ek hath se to Jwala Devi ki mulayam kamar ko majbooti se pakda aur doosra haath uski bhaari ubhri huee gaand ke neeche laga kar bade zor se haath ka panja, gaand ke gosht me gaDaya. Zor zor se gaand ka gooda wo masle jaa raha tha. Jwala Devi ne bhi jawab main Birju ki mardani gaand ko pakda aur zor se use khenchte hue choot par dabav deti huee wo boli, "Ab iski dhajjiyaan udaa do saiyya. ah aise kaam chalne waala naheen hai.. pelo ah." us'ke itna kah'te hi Birju ne sambhal kar zordaar dhakka maara aur kaha, "Le. ab naheen chhodunga. faad Dalunga teri.." Is dhakke ke baad jo dhakke chaalu hue to gajab hi ho gaya. Choot par lund aafat ban kar toot pada tha.Jwala Devi uski gaand ko pakad kar dhakke lagwane aur choot ka satyanash karnwane main uski sahaayta kiye jaa rahi thee. Birju bade hi zordaar aur tarkeeb wale dhakke maar maar kar use chode jaa raha tha. Beech beech main dono haathon se uski choochiyon ko zor zor se dabaate hue wo buri tarah us'ke hontho aur gaalon ko kaat'ne mai bhi koi kasar nahee chhod raha tha.Choot mai lund se zordar ghasse chhodta hua wo chudai main chaar chand agane mai juta hua tha.Choot par ghasse marte hue wo barabar choochiyo ko mun'h main dabate hue ghundiyon ko khoob choose jaa raha tha. Jwala Devi is samay maze main is tarah matwali dikhaayee de rahi thee ki agar is sukh ke badle un palo main use apni jaan bhi deni pade to wo badi khushi khusi se apni jan bhide degi,magar is sukh ko nahichodegi. Achanak Birju ne lund choot main rok kar apni jhante wa aand choot par ragadne shuru kar diye.jhanto wa aando ke gudgude ghasso ko kha kha kar Jwala Devi bechaini se apnigaand ko hilaate hue choot par dhakkon ka hamla karwaane ke liye badbadaa uthee, "Haai uuee jhaante mat ragado.. Wahh tumahre aannd gudgudi kar rahe hain sanam, uuee maan bhi jaao aiee chodo pelo aah ruk kyo gaye zaalim aahh mat tarsao aahh.. ab to asli waqt aaya hai dhakke marne ka. maro khoob maaro jaldi karo.. aaj choot ke tukde tukde .. Fad Daalo ise haay bada mota hai.. aiie." Birju ke josh Jwala Devi ke yun machalne sisakne se kuchh itne jyada baDh uthe apne oopar wo kabu na kar saka aur sidha baith kar jabardast dhakke choot par lagaane usne shuru kar diye. Ab dono barabar apni kamar wa gaand ko chalaate hue zor zor se dhakke lagaye ja rahe the.Palang buri tarah se charmara raha tha aur dhakke lagne se fachak-fachak ki awaz ke sath kamre ka vatawaran goonj uthaa tha. Jwala Devi maare maze ke zor zor se kilkaariyaan marne lagi thee, aur Birju ko zor zor se dhakke maarne ke liye utsaahit kar rahi thee,"Raaja.Aur tez.. Aur tez.. bahut tez.. rukna mat. jitna chaaho zor se maaro dhakka.. aah. Haan. aise hi. aur tez. Zor se maaro ahh." Birju ne aav dekha na taav aur apni sari taqat ke sath bade hi khunkhar choot faad dhakke usne lagane prarambh kar diye. Is samay wo apne poore josh aur ufaan par tha. us'ke har dhakke main bijli jaisi chamak aur tez kadkadahat mahsus ho rahi thi.Dono ki gaand badi zoro se uchale jaa rahi thee. Olon ki tap-tap ki tarah se wo palang ko tode Daal rahe the.Aisa lag raha tha jaise wo dono ek doosre ke andar ghus kar hi dam lenge, ya phir ek doosre ke ang aur nas nas ko tor marod kar rakh denge.Un dono par hi is samay qatilana bhoot poori tarah sawar tha. sah'sa hi Birju ke dhakkon ki raftaar asadharan roop se baDh uthee aur wo Jwala Devi ke shareer ko todne marodne laga. Jwala Devi maze main mastaani ho kar dugne josh ke sath cheekhne chillane lagi,"Waah mere pyaare.. maar.. aur maar haan bada maza aa raha hai.wah tor de faad Daal, khaa jaa chhodna mat uff ssi maar jama ke dhakka aur de poora chod ise haay."Aur isi ke sath Jwala Devi ke dhakkon aur uchhalne ki raftaar kam hoti chali gayee. Birju bhi zor zor se uchalne ke baad lund se virya phainkne laga tha. Dono hi shaant aur nidhaal ho kar gir pade the. Jwala Devi jhad kar apne shareer aur haath paanv dheela chhod chuki thee tatha Birju use taqat se chiptaye behosh sa ho kar aankhe moonde us'ke oopar gir pada tha aur zor zor se haanfne laga tha. Itna sab dekh kar Ranjna ka man itna kharaab hua ki aage ek drishya bhi dekhna use mushkil jaan padne laga tha. Usne gardan idhar udhar ghuma kar apne sunn pade shareer ko harkat di,iske bad aahista se wo bhaari man, kaampte shareer aur larkhadaate hue kadmo se apne kamre mai waapas laut aayee. Apne kamre main pahunch kar wo palang par gir paree, chudai ki jwaala mai uska tan man dono hi buri tarah chatpata rahe the,uska ang ang meethe dard aur bechaini se bhar uthaa tha,use lag raha tha ki koi jwaalamukhi shareer main fat kar choot ke raaste se nikal jaana chaahta tha.Apni is halat se chhutkaara paane ke liye Ranjna is samaya kuchh bhi karne ko taiyaar ho uthee thi,magar kuchh kar paana shaayad us'ke bas main hi naheen tha. Siwaay paaglo jaisi stithi main aane ke. Ichchha to uski ye thee ki koi jawaan mard apni taqatwar baanhon main zoro se use bheench le aur itni zor se dabaaye ki saare shareer ka kachumar hi nikal jaye.Magar ye sochna ekdam bekar sa use laga tha.Apni bebasi par uska manandar hi andar funkaa jaa raha tha. Ek mard se chudai karwana uske liye is samay jaan se jyaada anmol tha, magar na to chudai karne waala koi mard is samay usko milne jaa raha tha aur na hi mil sakne ki koi ummeed ya asar aas paas use nazar aa rahe the. Usne apne sirhaane se sir ke neeche dabaaye hue takiye ko nikaal kar apne seene se bheench kar laga liya aur use apni kunwari anchhuee choochiyo se lipta kar zoro se dabate hue wo bistar par aundhi let gayee.Sari raat usne mummy aur Birju ke beech huee chudai ke baare main soch soch kar hi guzaar di. kramshah.........................