खूनी हवेली की वासना compleet

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raj..
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Re: खूनी हवेली की वासना

Unread post by raj.. » 17 Dec 2014 13:37

खूनी हवेली की वासना पार्ट --52

गतान्क से आगे........................

6. और ठीक उसी टाइम, इंदर जी आप नीचे आए. चारो तरफ अंधेरा था इसलिए आपने तो पुरुषोत्तम जी को वहाँ खड़े देख लिया पर वो आपको नही देख पाए. आपने देखा के लाइट गयी हुई है और ठाकुर के कमरे के बाहर एक लड़की खड़ी है जो की आपको लगा के कामिनी है. बस आप ज़रा ग़लती यहाँ कर बैठे के आपने सोचा लड़की कमरे में जा रही है जबकि लड़की कमरे से बाहर आई थी. आपने भी वही देखा जो पुरुषोत्तम साहब ने देखा. एक लड़की ऐसी हालत में के कोई भी देख कर कह देगा के वो अंदर क्या करके आई है. अब जबकि आप सोच रहे थे के लड़की कामिनी है, तो जो आपने देखा वो देख कर आप पर क्या बीती होगी वो मैं बस सोच ही सकता हूँ. एक बाप और बेटी के बीच ऐसा रिश्ता, छ्हि छ्हि छ्हि ... गुस्सा तो बहुत आया होगा, नही?"

"आप अपनो हद से बाहर जा रहे हैं" अब तक खामोश बैठी कामिनी बोली

"अपनी औकात में रह ख़ान" पुरुषोत्तम चिल्लाया

"शट अप" ख़ान उससे भी ऊँची आवाज़ में चिल्लाया और कमरे में फिर खामोशी च्छा गयी.

" 7. खैर. कुच्छ देर बाद ही लाइट आ गई. उसके बाद तकरीबन 9.30 बजे तेज ठाकुर अपने बाप के कमरे में उनसे बात करने पहुँचे थे" ख़ान ने बात जारी रखी "वो वसीयत को लेकर झगड़ा करने गये थे. कुच्छ कहा सुनी हुई और इससे पहले के बात आगे बढ़ती, सरिता देवी अपने पति के कमरे में आ पहुँची और तेज ठाकुर गुस्से में पावं पटकते चले गये.

8. 9:40 के करीब सरिता देवी अपने पति के कमरे में पहुँची. उनके आने के बाद ही तेज ठाकुर उनके कहने पर वहाँ गये थे.

9. 9:45 के करीब ठाकुर ने भूषण को बुलाकर गाड़ी निकालने को कहा. कहाँ जाना था ये नही बताया और खुद सरिता देवी भी ये नही जानती थी के उनके पति कहाँ जा रहे हैं.

10. 10:00 बजे के करीब भूषण वापिस ठाकुर के कमरे में चाबी लेने गया. ठाकुर उस वक़्त कमरे में अकेले थे और सरिता देवी बाहर कॉरिडर में बैठी थी.

11. 10:00 के करीब ही जब भूषण ठाकुर के कमरे से बाहर निकला तो पायल कमरे में गयी ये पुच्छने के लिए के ठाकुर को और कुच्छ तो नही चाहिए था. पायल के हिसाब से ठाकुर ने उसको मना कर दिया और वो ऐसे ही बाहर आ गयी. पर ये एक पर्फेक्ट मौका था पायल या बिंदिया दोनो के लिए के ठाकुर साहब का काम तमाम करें. दौलत का जो हिस्सा इतनी मुश्किल से हाथ लगा था, वो अपने नाम ही रहता.

12. चंदर, बेटे तू कहता है के तू हवेली के गेट पर था पर जै के आने से पहले तुझे वहाँ किसी ने नही देखा था. गेट से घूमकर हवेली के पिछे की तरफ आना, ठाकुर साहब का खून करना और वापिस गेट पर पहुँच जाना, ज़्यादा मुश्किल और टाइम खपाने वाला काम नही था.

13. 10:05 के करीब जब भूषण कार पार्किंग की और जा रहा था तब उसने और ठकुराइन ने जै को हवेली में दाखिल होते हुए देखा.

14. 10:15 पर जब पायल किचन बंद करके अपने कमरे की ओर जा रही थी तब उसने ठाकुर के कमरे से जै को बाहर निकलते देखा. वो पूरा खून में सना हुआ था जिसके बाद उसने चीख मारी.

15. उसकी चीख की आवाज़ सुनकर जै को समझ नही आया के क्या करे. वो पायल को बताने लगा के अंदर ठाकुर साहब ज़ख़्मी हैं और इसी वक़्त पुरुषोत्तम और तेज आ गये. जब उन्होने जै को खून में सना देखा और अपने बाप को अंदर नीचे ज़मीन पर पड़ा देखा तो वो जै को मारने लगे.

16. जै भागकर किचन में घुस गया और अंदर से दरवाज़ा बंद कर लिया.

17. 10:45 के करीब मुझे फोन आया था के ठाकुर का खून हो गया है जिसके बाद मैं हवेली पहुँचा."

बात पूरी करके ख़ान चुप हो गया.

"ओके" किरण बोली "थ्ट्स वेल एक्सप्लेंड. बट दा क्वेस्चन ईज़ स्टिल दा सेम. खून किया किसने था? विच वन ईज़ दा मर्डरर?

"दट वन" ख़ान ने अपनी अंगुली ड्रॉयिंग हॉल में मौजूद एक इंसान की तरफ उठाई "देर ईज़ अवर मर्डरर, दा वन हू किल्ड ठाकुर"

"इस सारे किस्से में सबसे गौर तलब बात ये है के हर किसी की गवाही किसी ना किसी ने दी है और ठाकुर साहब को उनकी मौत से 10 में पहले तक किसी ने ज़िंदा देखा था, मतलब के खून 10 मिनट में हुआ था. इसी बात ने मुझे सबसे ज़्यादा उलझा रखा था पर आक्च्युयली यही बात सबसे बड़ा क्लू थी" ख़ान ने समझाना शुरू किया

1. सरिता देवी - पूरी शाम अपने कमरे में थी. हर रात सोने से पहले अपने पति के कमरे में जाती थी और थोड़ी देर बात करके वापिस अपने कमरे में ही आकर सो जाती थी. उस रात भी ठाकुर साहब के कमरे में पहुँची और तकरीबन 10 बजे तक रही. इस बात की गवाही घर के 2 नौकर दे सकते हैं. पहले बिंदिया जो ठकुराइन की व्हील चेर को धकेल कर यहाँ से वहाँ ले जाती है. वो ही ठकुराइन को व्हील चेर पर बैठाती और उतारती है. उसने उस रात ठकुराइन को कमरे से ठाकुर के कमरे तक छ्चोड़ा और करीब 15-20 मिनट बाद कमरे से बाहर लाकर कॉरिडर में छ्चोड़ा. दूसरी गवाही भूषण दे सकता है जिसने ठकुराइन को पहले ठाकुर के कमरे में बात करते देखा और फिर बाद में कॉरिडर में बैठे देखा. इस पूरे वक़्त के दौरान ठाकुर साहब ज़िंदा थे.

2. पुरुषोत्तम सिंग - शाम को तकरीबन 6 बजे घर वापिस आए थे. अपने कमरे में गया और रात 8 बजे तक वहीं रहा. उसके बाद वो ऐसे ही थोड़ा घूमने के लिए बाहर निकला, शराब की दुकान से शराब खरीदी, नहर के किनारे बैठ कर पी और 9 बजे के करीब घर वापिस आए. पर इनके अपने कमरे में जाने के बाद भी ठाकुर साहब को ज़िंदा देखा गया था. इनके कमरे में होने की गवाही इनकी बीवी दे सकती हैं.

3. कुलदीप सिंग - इनकी गवाही इनकी बहेन दे सकती हैं जिन्होने इनको कमरे में देखा था. इनके कमरे में होने के वक़्त और बाद में भी ठाकुर साहब ज़िंदा थे.

5. कामिनी - इनकी गवाही इनके भाई देते हैं जिनके साथ ये खून होने के टाइम पर थी.

6. भूषण - रात 9 बजे वापिस अपने कमरे में पहुँचा. ठाकुर के बुलाने पर उनके कमरे में गया और फिर गाड़ी निकाली. इसकी गवाही ठकुराइन और खुद जै दे सकता है जिन्होने इसको खून के टाइम हवेली के बाहर खड़ा देखा.

7. बिंदिया - पूरा दिन ठकुराइन के साथ थी. बस क़त्ल के वक़्त अपने बेटी के साथ थी. इसकी गवाही इसकी बेटी दे सकती है.

8. पायल - बस एक आप मोह्तर्मा ही हैं जिनके बारे में ये कहा जा सकता है के आप ऐसा कर सकती हैं पर आपने ऐसा किया तो बाहर बैठी ठकुराइन को कुच्छ क्यूँ पता नही चला?

9. रूपाली - इनकी गवाही इनके पति देते हैं जिनके साथ ये खून होने के टाइम पर थी.

10. इंद्रासेन राणा - खून के वक़्त ये भी कमरे में ही थे. इसकी गवाही इनकी बहेन दे सकती हैं.

11. चंदर - जिस टाइम जै हवेली में दाखिल हुआ, ये गेट पर था और इसकी गवाही जै खुद दे सकता है.

ठाकुर साहब को आखरी बार ज़िंदा 3 लोगों ने देखा था, सरिता देवी, भूषण और पायल. पायल आखरी थी और भूषण ने उससे पहले पर इन दोनो ने ठाकुर साहब को सामने नही देखा था, सिर्फ़ बाथरूम में उनकी आवाज़ सुनी थी. वो बाथरूम में खड़े इनसे बात कर रहे थे.

"ओके" किरण बोली

"यही सोचकर मैने बाथरूम का जायज़ा लिया. थोड़ी सी अल्ट्रा वायिलेट लाइट डालने से ही वहाँ खून के धब्बे सॉफ दिखाई दे गये"

"आंड?" किरण बोली

"आंड ये के उनपर हमला पहले ही हो चुका था और वो बाथरूम में खड़े बहते खून को रोकने की कोशिश कर रहे थे. हमला करने वाला उनके अपने घर का था इसलिए शोर भी नही मचा सकते थे. बस खामोशी से भूषण को गाड़ी निकालने को कहा क्यूंकी वो डॉक्टर के पास जाना चाहते थे"

"ओह" भूषण बोला "उसको अपने सवाल का जवाब मिल गया के उस रात ठाकुर कहाँ जा रहे थे.

"उस रात ठाकुर साहब के कमरे से लड़की को निकलते देख पुरुषोत्तम जी ने सोचा के रूपाली हैं, इंदर को लगा के पायल है पर वही नज़ारा अगर एक माँ देखती तो उसको क्या लगता?"

कहता हुआ ख़ान ठीक सरिता देवी के सामने जा खड़ा हुआ.

"आपके पति आपके साथ नही सो सकते थे और दूसरी औरतों के साथ सो रहे थे ये बात आप जानती थी. पर उस रात जब पायल कमरे से निकली तो उसको 2 नही, 3 लोगों ने देखा था. पुरुषोत्तम ,इंदर और आपने. आपके गुस्से की अब इंतेहाँ नही रही जब आपको लगा के निकलने वाली आपकी अपनी बेटी है जो अपने बाप के साथ सोकर आई है. गुस्से में तपती आप ठाकुर साहब के कमरे में पहुँची. आपको आया देख तेज ठाकुर अपनी कमरे में चले गये. आप और ठाकुर साहब के बीच झगड़ा हुआ. गुस्से में आपके हाथ में स्क्रू ड्राइवर आ गया और आपने उसी से ठाकुर साहब पर हमला किया. मैं सिर्फ़ अंदाज़ा लगा सकता हूँ के उस वक़्त ठाकुर साहब आपकी व्हील चेर के नज़दीक ही थे इसलिए आप उनपर हमला कर सकी. स्क्रू ड्राइवर उनके सीने के अंदर पेवस्त हो गया और उस पतली सी चीज़ ने उनका लंग पंक्चर किया. ठाकुर साहब सेहतमंद आदमी थे इसलिए फ़ौरन गिरे नही. वो बाथरूम में गये और अपने ज़ख़्म च्छुपाने की कोशिश करने लगे क्यूंकी ये समझाने के लिए के उनकी पत्नी ने उनपर क्यूँ हमला किया उनको बहुत कुच्छ समझाना पड़ता. अपनी इज़्ज़त बचाने के लिए वो चुप रहे और भूषण को कह कर जल्दी गाड़ी निकालने को कहा. और यही वो वक़्त था जब बिंदिया, पायल और भूषण ने ठाकुर साहब को बाथरूम से बात करते हुए सुना. बिंदिया आपको कमरे के बाहर छ्चोड़ गयी थी इसलिए सबको यही लगा के आपके बाहर आ जाने के बाद तक ठाकुर साहब ज़िंदा थे जो कि असल में वो थे भी पर ज़्यादा देर तक नही रहे. लंग पंक्चर होने की वजह से उनकी साँस ज़्यादा देर नही चली. ठीक उसी वक़्त जै वहाँ पहुँचा और उसको वो ज़मीन पर गिरे पड़े मिले. सबको लगा के खून उसने किया है पर हक़ीक़त तो ये है के वो जानलेवा वार आप 15 मिनट पहले ही करके आ गयी थी"

थोड़ी देर के लिए सब चुप रहे.

"आप सही कह रहे हैं" अब तक चुप चाप सब सुन रही ठकुराइन बोली.

सरिता देवी अपना इक़बाल-ए-जुर्म कर चुकी थी और जै को जैल से रिहा कर दिया गया था.

ख़ान को भी उस छ्होटे से गाओं से वापिस हेडक्वॉर्टर में ट्रान्स्फर करने के ऑर्डर्स आ गये थे.

मीडीया में उस केस को फिर से ज़बरदस्त तरीके से उछाला गया और ख़ान को उम्मीद से कहीं ज़्यादा वाह-वाही मिली.

गाओं में उसकी वो आखरी रात थी. समान वो सारा पॅक कर चुका था.

"ओके आइ विल लीव नाउ" किरण सारा दिन उसके साथी ही थी और समान पॅक करने में उसका हाथ बटा रही थी "आंड आइ विल पिक यू अप टुमॉरो अट 11"

"मत जाओ ना" ख़ान ने उसका हाथ पकड़ते हुए कहा "रात यहीं रुक जाओ. सुबह साथ ही चल लेंगे"

"यू नो आइ कॅंट डू दट" किरण धीरे से उसे नज़दीक आते हुए बोली

"वाइ नोट?"

"बिकॉज़ काम है मुझे कुच्छ" किरण मुस्कुराते हुए बोली

"शाम के 6 बज रहे हैं. घर पहुँचते पहुँचते तुम्हें कम से कम 9 बज जाएँगे. काम तो जो भी है वैसे ही पूरा नही होगा"

"वो तुम मुझपे छ्चोड़ दो. खाना ख़ाके सो जाना, मैं कल सुबह पिक करती हूँ"

किरण के जाने के बाद ख़ान के पास करने को ख़ास कुच्छ नही था. उसने स्टोव पर चाइ रखी और रेडियो ऑन किया. एक गाज़ल की आवाज़ कमरे में फेल गयी.

"पूरी होगी आपकी हर फरमाइश,

एक भी ना हमसे टाली जाएगी,

आ पड़ा है आशिक़ी से वास्ता,

अब तबीयत क्या संभाली जाएगी ....."

क्रमशः........................................

खूनी हवेली की वासना पार्ट --52

gataank se aage........................

6. Aur theek usi time, Inder ji aap neeche aaye. Charo taraf andhera tha isliye aapne toh Purushottam ji ko vahan khade dekh liya par vo aapko nahi dekh paaye. Aapne dekha ke light gayi hui hai aur thakur ke kamre ke bahar ek ladki khadi hai jo ki aapko laga ke Kamini hai. Bas aap zara galti yahan kar bethe ke aapne socha ladki kamre mein ja rahi hai jabki ladki kamre se bahar aayi thi. Aapne bhi vahi dekha jo Purushottam sahab ne dekha. Ek ladki aisi halat mein ke koi bhi dekh kar keh dega ke vo andar kya karke aayi hai. Ab jabki aap soch rahe the ke ladki Kamini hai, toh jo aapne dekha vo dekh kar aap par kya beeti hogi vo main bas soch hi sakta hoon. Ek baap aur beti ke beech aisa rishta, chhhi chhhi chhhi ... gussa toh bahut aaya hoga, nahi?"

"Aap apno had se bahar ja rahe hain" Ab tak khamosh bethi Kamini boli

"Apni aukaat mein reh Khan" Purushottam chillaya

"Shut up" Khan usse bhi oonchi aawaz mein chillaya aur kamre mein phir khamoshi chha gayi.

" 7. Khair. Kuchh der baad hi light aa gai. Uske baad takreeban 9.30 baje Tej Thakur apne baap ke kamre mein unse baat karne pahunche the" Khan ne baat jaari rakhi "Vo vaseeyat ko lekar jhagda karne gaye the. Kuchh kaha suni hui aur isse pehle ke baat aage badhti, Sarita Devi apne pati ke kamre mein aa pahunchi aur Tej Thakur gusse mein paon patakte chale gaye.

8. 9:40 ke kareeb Sarita Devi apne pati ke kamre mein pahunchi. Unke aane ke baad hi Tej Thakur unke kehne par vahan gaye the.

9. 9:45 ke kareeb Thakur ne Bhushan ko bulakar gaadi nikalne ko kaha. Kahan jaana tha ye nahi bataya aur khud Sarita Devi bhi ye nahi jaanti thi ke unke pati kahan ja rahe hain.

10. 10:00 baje ke kareeb Bhushan vaapis Thakur ke kamre mein chaabi lene gaya. Thakur us waqt kamre mein akele the aur Sarita Devi bahar corridor mein bethi thi.

11. 10:00 ke kareeb hi jab Bhushan Thakur ke kamre se bahar nikla toh Payal kamre mein gayi ye puchhne ke liye ke Thakur ko aur kuchh toh nahi chahiye tha. Payal ke hisaab se Thakur ne usko mana kar diya aur vo aise hi bahar aa gayi. Par ye ek perfect mauka tha Payal ya Bindiya dono ke liye ke Thakur Sahab ka kaam tamam karen. Daulat ka jo hissa itni mushkil se haath laga tha, vo apne naam hi rehta.

12. Chander, bete tu kehta hai ke tu Haweli ke gate par tha par Jai ke aane se pehle tujhe vahan kisi ne nahi dekha tha. Gate se ghoomkar Haweli ke pichhe ki taraf aana, thakur sahab ka khoon karna aur vaapis gate par pahunch jana, zyada mushkil aur time khapane wala kaam nahi tha.

13. 10:05 ke kareeb jab Bhushan car parking ki aur ja raha tha tab usne aur Thakurain ne Jai ko haweli mein daakhil hote hue dekha.

14. 10:15 par jab Payal kitchen band karke apne kamre ki aur ja rahi thi tab usne Thakur ke kamre se Jai ko bahar nikalte dekha. Vo poora khoon mein sana hua tha jiske baad usne cheek maari.

15. Uski cheekh ki aawaz sunkar Jai ko samajh nahi aaya ke kya kare. Vo Payal ko batane laga ke andar Thakur Sahab zakhmi hain aur isi waqt Purushottam aur Tej aa gaye. Jab unhone Jai ko khoon mein sana dekha aur apne baap ko andar neeche zameen par pada dekha toh vo Jai ko maarne lage.

16. Jai Bhagkar kitchen mein ghus gaya aur andar se darwaza band kar liya.

17. 10:45 ke kareeb mujhe phone aaya tha ke Thakur ka khoon ho gaya hai jiske baad main haweli pahuncha."

Baat poori karke Khan chup ho gaya.

"Ok" Kiran boli "Thats well explained. But the question is still the same. Khoon kiya kisne tha? Which one is the murderer?

"That one" Khan ne apni anguli drawing hall mein maujood ek insaan ki taraf uthayi "There is our murderer, the one who killed Thakur"

"Is saare kisse mein sabse gaur talab baat ye hai ke har kisi ke gawahi kisi na kisi ne di hai aur Thakur sahab ko unki maut se 10 mein pehle tak kisi ne zindaa dekha tha, matlab ke khoon 10 min mein hua tha. Isi baat ne mujhe sabse zyada uljha rakha tha par actually yahi baat sabse bada clue thi" Khan ne samjhana shuru kiya

1. Sarita Devi - Poori shaam apne kamre mein thi. Har raat sone se pehle apne pati ke kamre mein jaati thi aur thodi der baat karke vaapis apne kamre mein hi aakar so jaati thi. Us raat bhi Thakur Sahab ke kamre mein pahunchi aur takreeban 10 baje tak rahi. Is baat ki gawahi ghar ke 2 naukar de sakte hain. Pehle Bindiya jo Thakurain ki wheel chair ko dhakel kar yahan se vahan le jaati hai. Vo hi Thakurain ko wheel chair par bethati aur utarti hai. Usne us raat Thakurain ko kamre se Thakur ke kamre tak chhoda aur kareeb 15-20 min baad kamre se bahar lakar Corridor mein chhoda. Doosri gawahi Bhushan de sakta hai jisne Thakurain ko pehle Thakur ke kamre mein baat karte dekha aur phir baad mein corridor mein bethe dekha. Is poore waqt ke dauran Thakur Sahab zinda the.

2. Purushottam Singh - Shaam ko takreeban 6 baje ghar vaapis aaye the. Apne kamre mein gaya aur raat 8 baje tak vahin raha. Uske baad vo aise hi thoda ghoomne ke liye bahar nikla, sharab ki dukaan se sharab khadiri, nehar ke kinare bethkar pi aur 9 baje ke kareeb ghar vapis aaye. Par inke apne kamre mein jaane ke baad bhi Thakur Sahab ko zinda dekha gaya tha. Inke kamre mein hone ki gawahi inki biwi de sakti hain.

3. Kuldeep Singh - Inki gawahi inki behen de sakti hain jinhone inko kamre mein dekha tha. Inke kamre mein hone ke waqt aur baad mein bhi Thakur Sahab zinda the.

5. Kamini - Inki gawahi inke bhai dete hain jinke saath ye khoon hone ke time par thi.

6. Bhushan - Raat 9 baje vaapis apne kamre mein pahuncha. Thakur ke bulane par unke kamre mein gaya aur phir gaadi nikali. Iski gawahi thakurain aur Khud Jai de sakta hai jinhone isko khoon ke time haweli ke bahar khada dekha.

7. Bindiya - Poora din Thakurain ke saath thi. Bas qatl ke waqt apne beti ke saath thi. Iski gawahi iski beti de sakti hai.

8. Payal - Bas ek aap mohtarma hi hain jinke baare mein ye kaha ja sakta hai ke aap aisa kar sakti hain par aapne aisa kiya toh bahar bethi thakurain ko kuchh kyun pata nahi chala?

9. Rupali - Inki gawahi inke pati dete hain jinke saath ye khoon hone ke time par thi.

10. Indrasen Rana - Khoon ke waqt ye bhi kamre mein hi the. Iski gawahi inki behen de sakti hain.

11. Chander - Jis tim Jai haweli mein daakhil hua, ye gate par tha aur iski gawahi Jai khud de sakta hai.

Thakur Sahab ko aakhri baar zinda 3 logon ne dekha tha, Sarita Devi, Bhushan aur Payal. Payal aakhri thi aur Bhushan ne usse pehle par in dono ne Thakur Sahab ko saamne nahi dekha tha, sirf bathroom mein unki aawaz suni thi. Vo bathroom mein khade inse baat kar rahe the.

"Ok" Kiran boli

"Yahi sochkar maine bathroom ka jaayza liya. Thodi si ultra voilet light daalne se hi vahan khoon ke dhabbe saaf dikhai de gaye"

"And?" Kiran boli

"And ye ke unpar hamla pehle hi ho chuka tha aur vo bathroom mein khade behte khoon ko rokne ki koshish kar rahe the. Hamla karne wala unke apne ghar ka tha isliye shor bhi nahi macha sakte the. Bas khamoshi se Bhushn ko gaadi nikalne ko kaha kyunki vo doctor ke paas jana chahte the"

"Oh" Bhushan bola "Usko apne sawal ka jawab mil gaya ke us raat thakur kahan ja rahe the.

"Us raat Thakur Sahab ke kamre se ladki ko nilakte dekh Purushottam ji ne socha ke Rupali hain, Inder ko laga ke Payal hai par vahi nazara agar ek maan dekhti toh usko kya lagta?"

Kehta hua Khan theek Sarita Devi ke saamne ja khada hua.

"Aapke pati aapke saath nahi so sakte the aur doosri auraton ke saath so rahe the ye baat aap janti thi. Par us raat jab Payal kamre se nikli toh usko 2 nahi, 3 logon ne dekha tha. Purushottam ,Inder aur aapne. Aapke gusse ki ab intehaan nahi rahi jab aapko laga ke nikalne wali aapki apni beti hai jo apne baap ke saath sokar aayi hai. Gusse mein tapti aap thakur sahab ke kamre mein pahunchi. Aapko aaya dekh Tej Thakur apni kamre mein chale gaye. Aap aur thakur sahab ke beech jhagda hua. Gusse mein aapke haath mein screw driver aa gaya aur aapne usi se thakur sahab par hamla kiya. Main sirf andaza laga sakta hoon ke us waqt Thakur Sahab aapki wheel chair ke nazdeek hi the isliye aap unpar hamla kar saki. Screw driver unke seene ke andar pevast ho gaya aur us patli si cheez ne unka lung puncture kiya. Thakur Sahab sehatmand aadmi the isliye fauran gire nahi. Vo bathroom mein gaye aur apne zakhm chhupane ki koshish karne lage kyunki ye samjhane ke liye ke unki patni ne unpar kyun hamla kiya unko bahut kuchh samjhana padta. Apni izzat bachane ke liye vo chup rahe aur Bhushan ko keh kar jaldi gaadi nikalne ko kaha. Aur yahi vo waqt tha jab Bindiya, Payal aur Bhushan ne thakur sahab ko bathroom se baat karte hue suna. Bindiya aapko kamre ke bahar chhod gayi thi isliye sabko yahi laga ke aapke bahar aa jaane ke baad tak thakur sahab zinda the jo ki asal mein vo the bhi par zyada der tak nahi rahe. Lung puncture hone ki vajah se unki saans zyada der nahi chali. Theek usi waqt Jai vahan pahuncha aur usko vo zameen par gire pade mile. Sabko laga ke khoon usne kiya hai par haqeeqat toh ye hai ke vo jaanleva vaar aap 15 min pehle hi karke aa gayi thi"

Thodi der ke liye sab chup rahe.

"Aap sahi keh rahe hain" Ab tak chup chap sab sun rahi Thakurain boli.

Sarita Devi apna iqbaal-e-jurm kar chuki thi aur Jai ko jail se riha kar diya gaya tha.

Khan ko bhi us chhote se gaon se vaapis headquarter mein transfer karne ke orders aa gaye the.

Media mein us case ko phir se zabardast tarike se uchhala gaya aur Khan ko ummeed se kahin zyada vah-vahi mili.

Gaon mein uski vo aakhri raat thi. Saman vo sara pack kar chuka tha.

"Ok i will leave now" Kiran sara din uske saathi hi thi aur saman pack karne mein uska haath bata rahi thi "And i will pick you up tomorrow at 11"

"Mat jao na" Khan ne uska haath pakadte hue kaha "Raat yahin ruk jao. Subah saath hi chal lenge"

"You know i cant do that" Kiran dheere se use nazdeek aate hue boli

"Why not?"

"Because kaam hai mujhe kuchh" Kiran muskurate hue boli

"Shaam ke 6 baj rahe hain. Ghar pahunchte pahunchte tumhein kam se kam 9 baj jayenge. Kaam toh jo bhi hai vaise hi poora nahi hoga"

"Vo tum mujhpe chhod do. Khana khaake so jana, main kal subah pick karti hoon"

Kiran ke jaane ke baad Khan ke paas karne ko khaas kuchh nahi tha. Usne stove par chaai rakhi aur radio on kiya. Ek ghazal ki aawaz kamre mein phel gayi.

"Poori hogi aapki har farmaish,

Ek bhi na hamse taali jaayegi,

Aa pada hai aashiqi se wasta,

Ab tabiat kya sambhali jaayegi ....."

kramashah........................................


raj..
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Re: खूनी हवेली की वासना

Unread post by raj.. » 17 Dec 2014 13:38

खूनी हवेली की वासना पार्ट --53

गतान्क से आगे........................

वो चाइ को स्टोव से उतार कर कप में डाल ही रहा था के फोन बज उठा. नंबर ठाकुर के वकील का था .

"हां वकील साहब" ख़ान ने फोन उठाते हुए कहा "कैसे याद किया?"

"सर आपकी तरफ से कोई जवाब ही नही आया तो मैने सोचा के मैं फोन करके पुच्छ लूँ" दूसरी तरफ से आवाज़ आई

"मेरी तरफ से कोई जवाब? किस बात का?"

"सर आपको एक फॅक्स भेजा था मैने पिच्छले हफ्ते"

"वकील साहब मेरी फॅक्स मशीन तो पता नही कब्से बंद पड़ी है. वैसे कहिए, मैं फोन पर ही बता देता हूँ" ख़ान ने कहा

"सर वो तेज ठाकुर के मरने के बाद मेरे पास मैल में उनकी वसीयत आई"

"तेज की वसीयत?"

"जी हां. और गेस कीजिए के अपने हिस्से की जायदाद वो किसको छ्चोड़ गये हैं?"

"किसे?" ख़ान ने हैरत से पुछा

"जायदेव सिंग ठाकुर को"

"जै को?" ख़ान हैरत में बोला

"जी हां" वकील ने कहा "मुझे थोड़ा अजीब लगा. पहला तो ये के वो जै को वसीयत छ्चोड़ गये, दूसरा उनके मरने के बाद मुझे वसीयत मिली, वो मौत जिसको एक आक्सिडेंट मना जा रहा था"

"यू आर राइट" ख़ान बोला "अजीब तो है"

"पर फिर मैने सोचा के जै ठाकुर अब रिहा हो गये हैं तो मैने बड़े ठाकुर और तेज, दोनो की वसीयत खोल दूं. आपने मना किया हुआ था ना, इसलिए सोचा के आपसे पुच्छ लूँ पहले"

"कब भेजा था आपने मुझे वो फॅक्स?" ख़ान ने कहा

"जिस दिन तेज ठाकुर की लाश मिली थी उससे 2-3 दिन बाद"

"ओके लेट मी हॅव ए लुक अट दा फॅक्स आंड कॉल यू बॅक" ख़ान ने कहा और अपनी फॅक्स मशीन ऑन की.

मशीन में पेपर नही था. उसने पेपर डाला.

फ़ौरन 4-5 पेज का फॅक्स आना शुरू हो गया.

पहला ठाकुर के वकील का फॅक्स था, तेज की वसीयत की एक कॉपी.

और फिर दूसरा फॅक्स आना शुरू हुआ. फॅक्स शर्मा की तरफ से था, तारीख उसी दिन की थी जब वो मरा था.

फॅक्सस को देखते देखते ख़ान का दिमाग़ घूमना लगा. लगा के चक्कर खाकर वो वहीं ज़मीन पर गिर पड़ेगा.

तस्वीर एक बार फिर टूटकर एक नये तरीके से जुड़ रही थी. इस बार तस्वीर किसी और की थी.

ख़ान ने अपनी फाइल से ठाकुर की पोस्ट मॉर्टेम रिपोर्ट की कॉपी और जै के फोन रेकॉर्ड्स की एक कॉपी निकाली.

जै के फोन पर उस रात मर्डर होने से ठीक पहले एक मोबाइल से कॉल गयी थी. नंबर रूपाली के नाम पर रिजिस्टर्ड था.

ठाकुर साहब की मौत लिंग पंक्चर से हुई. एक राइट आर्म के नीचे एक स्क्रू ड्राइवर 2 बार वार किया गया था. पहला वार एक मामूली सा ज़ख़्म था पर दूसरा वार जान लेवा साबित हुआ.

व्हील चेर पर बैठी एक कमज़ोर औरत एक हत्ते कत्ते आदमी पर 2 बार वार कैसे कर सकती है? और ऐसा वार कैसे कर सकती है के वार जान लेवा साबित हो?

"ऑफ कोर्स तुम बताओगे मुझे सबकी कमज़ोरी, तुम हवेली में रह चुके हो, तुम जानते हो सब" उसको जै से कही अपनी बात याद आई.

"मैने देखा है चंदू और बिंदिया को सर. जो चीज़ मैने अपनी आँखों से बार बार देखी, वो ग़लत कैसे हो सकती है?" जै की बात याद आ रही थी.

"ठकुराइन का नाजायज़ रिश्ता हो गया था किसी से" भूषण की बात याद आ रही थी "थोड़े टाइम बाद ही जै को भी निकाल दिया हवेली से अचानक और ठकुराइन को सीधी से धक्का दे दिया"

शर्मा का फॅक्स उसकी निगाहों के सामने रखा हुआ था. सर पकड़े ख़ान को समझ नही आ रहा था के क्या करे. थोड़ी देर बाद वो उठा, अपनी सर्विस रेवोल्वेर निकाली और जीप में बैठ कर गाओं से थोड़ा बाहर बने एक फार्म हाउस की तरफ चल पड़ा. वो फार्म हाउस तेज का था जो उसने सिर्फ़ अपनी अययाशी के लिए रखा हुआ था.

कुच्छ ही देर बाद वो फार्म हाउस के गेट पर था. बाहर जै की गाड़ी खड़ी थी और उसके साथ एक और कार पार्क्ड थी जिसके वहाँ होने की ख़ान उम्मीद कर भी रहा था.

"ख़ान" गेट जै ने खोला "तेरी जीप आती देख ली थी मैने"

सारी इज़्ज़त, ख़ान साहब, सर, आप , सब ख़तम. सीधा तू तदाक.

"कैसे आना हुआ?" उसने गेट खोला तो ख़ान अंदर चला आया.

"भाई रिहा हुए हो तुम, मैने सोचा के सेलेब्रेट कर रहे होंगे. इसलिए सेलेब्रेशन्स में शामिल होने चला आया" ख़ान ने कहा

"हां हां आ ना यार" जै बोला "तेरी ही वजह से तो जैल से निकला हूँ मैं. तू चिंता ना कर, बहुत पैसा मिलने वाला है तुझे, आख़िर जायदेव सिंग ठाकुर की जान बचाई है तूने. पिएगा कुच्छ?"

"नही शराब नही पीता मैं" ख़ान ने कहा "नाइस फार्महाउस"

"हाँ" जाई बोला "बहुत पसंद था मुझे और अब तेज भाय्या ये मेरे ही नाम कर गये"

उसकी बात सुनकर ख़ान मुस्कुराता हुए थोड़ा आगे को झुका.

"तेज की वसीयत अब तक खुली ही नही है. तुझे कैसे पता के ये फार्म हाउस तेज तेरे नाम कर गया था?"

जै ने चौंक कर ख़ान की तरफ देखा. थोड़ी देर के लिए दोनो की नज़रें मिली और अजीब सी खामोशी च्छा गयी.

"सब समझ आ गये तुझे, है ना?" जै ने सवाल किया.

ख़ान ने हां में गर्दन हिलाई.

"अब छ्चोड़ यार" जै ने कहा "मुझे छुड़वा कर तेरा भी फायडा ही हुआ है. सब तेरे लिए अच्छा बोल रहे हैं, फेमस हो गया है तू, अब पैसे भी दूँगा मैं तुझे. तेरा मेरा दोनो का फायडा हुआ है यार"

"बात तो सही कह रहा है तू जै" ख़ान उठकर खड़ा हुआ और कमरे में टहलने लगा, जैसे कमरे में रखी चीज़ों को देख रहा हो

"अच्छा एक बात बता" जै बैठा बैठा विस्की के घूँट लेता हुआ बोला "समझ कैसे आया तुझे?"

"कुच्छ चीज़ें थी जो पहले मैं अनदेखा कर गया. बाद में समझ आ गयी" ख़ान ने जवाब दिया

"जैसे के?"

"जैसे के तेरी बातें" ख़ान ने कहना शुरू किया "ये इन्वेस्टिगेशन तो मैं कभी खुद कर ही नही रहा था. तू करवा रहा था मुझसे इन्वेस्टिगेशन. सारे क्लूस तू दे रहा था, मैं तो बस तेरी लेड को फॉलो कर रहा था"

"हां ये तो है" जै मुस्कुराता हुआ बोला

"तूने कहा के तूने चंदर और बिंदिया को हवेली में बार बार साथ देखा, पर कैसे? तुझे तो हवेली में उनके आने से पहले ही निकाल दिया गया था और फिर कभी अंदर घुसने ही नही दिया गया"

"येस" जै ज़ोर से बोला

"तुझे हवेली से इसलिए निकाला गया क्यूंकी अपनी चाची, यानी के ठकुराइन के साथ नाजायज़ रिश्ता था तेरा जो कि ठाकुर को पता चल गया. उसी वजह से ठकुराइन को सीढ़ियों से धक्का दिया गया और तुझे हवेली से निकाल दिया गया"

"ये भी सही" जै दूसरा पेग बनाते हुए बोला

"उस शाम मुझे फोन रूपाली ने किया था?" ख़ान ने जै से सवाल किया तो उसने इनकार में गर्दन हिला दी.

"बाहर आ जाओ किरण" ख़ान ज़ोर से बोला "छुपने का कोई फायडा नही. मैने तुम्हारी गाड़ी बाहर खड़ी देख ली थी"

बाथरूम का दरवाज़ा खुला और सहमी सी किरण बाहर निकली. उसने चोर नज़रों से ख़ान की तरफ देखा और फिर नज़र घुमा ली.

"मीट माइ वाइफ" जै उसके करीब जाते हुए बोला "किरण सिंग ठाकुर"

"ऑफ कोर्स" ख़ान भी ज़ोर से बोला "ये तेरी बीवी है. तुम दोनो का तलाक़ कभी हुआ ही नही, वो तो एक झूठी कहानी सुना रही थी मुझे"

"आइ आम सॉरी ख़ान" किरण ऐसे बोली जैसे गले से शब्द ना निकल रहे हों

"अर्रे कोई बात नही" बीच में जै बोल पड़ा "हम ख़ान से माफी सूखी सूखी नही मानेंगे. इनाम देकर माँगेंगे. है ना ख़ान?"

क्रमशः........................................

खूनी हवेली की वासना पार्ट --53

gataank se aage........................

Vo chaai ko stove se utar kar cup mein daal hi raha tha ke phone baj utha. Number thakur ke vakeel ka tha .

"Haan vakeel sahab" Khan ne phone uthate hue kaha "Kaise yaad kiya?"

"Sir aapki taraf se koi jawab hi nahi aaya toh maine socha ke main phone karke puchh loon" Doosri taraf se aawaz aayi

"Meri taraf se koi jawab? Kis baat ka?"

"Sir aapko ek fax bheja tha maine pichhle hafte"

"vakeel sahab meri fax machine toh pata nahi kabse band padi hai. Vaise kahiye, main phone par hi bata deta hoon" Khan ne kaha

"Sir vo Tej Thakur ke marne ke baad mere paas mail mein unki vaseeyat aayi"

"Tej ki vaseeyat?"

"Ji haan. Aur guess kijiye ke apne hisse ki jaaydad vo kisko chhod gaye hain?"

"Kise?" Khan ne hairat se puchha

"Jaidev Singh Thakur ko"

"Jai ko?" Khan hairat mein bola

"Ji haan" Vakeel ne kaha "Mujhe thoda ajeeb laga. Pehla toh ye ke vo Jai ko vaseeyat chhod gaye, doosra unke marne ke baad mujhe vaseeyat mili, vo maut jisko ek accident mana ja raha tha"

"You are right" Khan bola "Ajeeb toh hai"

"Par phir maine socha ke Jai Thakur ab riha ho gaye hain toh maine Bade thakur aur Tej, dono ki vaseeyat khol doon. Aapne mana kiya hua tha na, isliye socha ke aapse puchh loon pehle"

"Kab bheja tha aapne mujhe vo fax?" Khan ne kaha

"Jis din Tej Thakur ki laash mili thi usse 2-3 din baad"

"Ok let me have a look at the fax and call you back" Khan ne kaha aur apni fax machine on ki.

Machine mein paper nahi tha. Usne paper daala.

Fauran 4-5 page ka fax aane shuru ho gaya.

Pehla thakur ke vakeel ka fax tha, Tej ki vaseeyat ki ek copy.

Aur phir doosra fax aana shuru hua. Fax Sharma ki taraf se tha, tareekh usi din ki thi jab vo mara tha.

Faxes ko dekhte dekhte Khan ka dimag ghoomna laga. Laga ke chakkar khakar vo vahin zameen par gir padega.

Tasveer ek baar phir tootkar ek naye tarike se jud rahi thi. Is baar tasveer kisi aur ki thi.

Khan ne apni file se Thakur ki post mortem report ki copy aur Jai ke phone records ki ek copy nikali.

Jai ke phone par us raat murder hone se theek pehle ek mobile se call gayi thi. Number Rupali ke naam par registered tha.

Thakur Sahab ki maut ling puncture se hui. Ek right arm ke neeche ek screw driver 2 baar vaar kiya gaya tha. Pehla vaar ek mamuli sa zakhm tha par doosra vaar jaan leva saabit hua.

Wheel chair par bethi ek kamzor aurat ek hatte katte aadmi par 2 baar vaar kaise kar sakti hai? Aur aisa vaar kaise kar sakti hai ke vaar jaan leva saabit ho?

"OF course tum bataoge mujhe sabki kamzori, tum haweli mein reh chuke ho, tum jaante ho sab" Usko Jai se kahi apni baat yaad aayi.

"Maine dekha hai Chandu aur Bindiya ko sir. Jo cheez maine apni aankhon se baar baar dekhi, vo galat kaise ho sakti hai?" Jai ki baat yaad aa rahi thi.

"Thakurain ka naajayaz rishta ho gaya tha kisi se" Bhushan ki baat yaad aa rahi thi "Thode time baad hi Jai ko bhi nikal diya haweli se achanak aur Thakurain ko sidhi se dhakka de diya"

Sharma ka fax uski nigahon ke saamne rakha hua tha. Sar pakde Khan ko samajh nahi aa raha tha ke kya kare. Thodi der baad vo utha, apni service revolver nikali aur jeep mein bethkar gaon se thoda bahar bane ek farm house ki taraf chal pada. Vo farm house Tej ka tha jo usne sirf apni ayyashi ke liye rakha hua tha.

Kuchh hi der baad vo farm house ke gate par tha. Bahar Jai ki gaadi khadi thi aur uske saath ek aur car parked thi jiske vahan hone ki Khan ummeed kar bhi raha tha.

"Khan" Gate Jai ne khola "Teri jeep aati dekh li thi maine"

Saari izzat, Khan Sahab, Sir, aap , sab khatam. Sidha tu tadak.

"Kaise aana hua?" Usne gate khola toh Khan andar chala aaya.

"Bhai riha hue ho tum, maine socha ke celebrate kar rahe honge. Isliye celebrations mein shaamil hone chala aaya" Khan ne kaha

"Haan haan aa na yaar" Jai bola "Teri hi vajah se toh jail se nikla hoon main. Tu chinta na kar, bahut paisa milne wala hai tujhe, aakhir Jaidev Singh Thakur ki jaan bachayi hai tune. Piyega kuchh?"

"Nahi sharab nahi pita main" Khan ne kaha "Nice farmhouse"

"Haan" Jai bola "Bahut pasand tha mujhe aur ab Tej bhaiyya ye mere hi naam kar gaye"

Uski baat sunkar Khan muskurata hue thoda aage ko jhuka.

"Tej ki vaseeyat ab tak khuli hi nahi hai. Tujhe kaise pata ke ye farm house Tej tere naam kar gaya tha?"

Jai ne chaunk kar Khan ki taraf dekha. Thodi der ke liye dono ki nazren mili aur ajeeb si khamoshi chha gayi.

"sab samajh aa gaye tujhe, hai na?" Jai ne sawal kiya.

Khan ne haan mein gardan hilayi.

"Ab chhod yaar" Jai ne kaha "Mujhe chhudwake tera bhi fayda hi hua hai. Sab tere liye achha bol rahe hain, famous ho gaya hai tu, ab paise bhi doonga main tujhe. Tera mera dono ka fayda hua hai yaar"

"Baat toh sahi keh raha hai tu Jai" Khan uthkar khada hua aur kamre mein tehalne laga, jaise kamre mein rakhi cheezon ko dekh raha hao

"Achha ek baat bata" Jai betha betha whiskey ke ghoonth leta hua bola "Samajh kaise aaya tujhe?"

"Kuchh cheezen thi jo pehle main andekha kar gaya. Baad mein samajh aa gayi" Khan ne jawab diya

"Jaise ke?"

"Jaise ke teri baaten" Khan ne kehna shuru kiya "Ye investigation toh main kabhi khud kar hi nahi raha tha. Tu karva raha tha mujhse investigation. Saare clues tu de raha tha, main toh bas teri lead ko follow kar raha tha"

"Haan ye toh hai" Jai muskurata hua bola

"Tune kaha ke tune Chander aur Bindiya ko haewli mein baar baar saath dekha, par kaise? Tujhe toh haweli mein unke aane se pehle hi nikal diya gaya tha aur phir kabhi andar ghusne hi nahi diya gaya"

"Yep" Jai zor se bola

"Tujhe haweli se isliye nikala gaya kyunki apni chachi, yaani ke thakurain ke saath naajayaz rishta tha tera jo ki Thakur ko pata chal gayal. Usi vajah se Thakurain ko sidhiyon se dhakka diya gaya aur tujhe haweli se nikal diya gaya"

"Ye bhi sahi" Tej doosra peg banate hue bola

"Us shaam mujhe phone Rupali ne kiya tha?" Khan ne Jai se sawal kiya toh usne inkaar mein gardan hila di.

"Bahar aa jao Kiran" Khan zor se bola "Chhupne ka koi fayda nahi. Maine tumhari gaadi bahar khadi dekh li thi"

Bathroom ka darwaza khula aur sehmi si Kiran bahar nikli. Usne chor nazron se Khan ki taraf dekha aur phir nazar ghuma li.

"Meet my wife" Jai uske kareeb jaate hue bola "Kiran Singh Thakur"

"Of course" Khan bhi zor se bola "Ye teri biwi hai. Tum dono ka talaak kabhi hua hi nahi, vo toh ek jhuthi kahani suna rahi thi mujhe"

"I am sorry Khan" Kiran aise boli jaise gale se shabd na nikal rahe hon

"Arrey koi baat nahi" Beech mein Jai bol pada "Ham Khan se maafi sookhi sookhi nahi maanenge. Inaam dekar maangenge. Hai na Khan?"

kramashah........................................


raj..
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Re: खूनी हवेली की वासना

Unread post by raj.. » 17 Dec 2014 13:39

खूनी हवेली की वासना पार्ट --54

गतान्क से आगे........................

ख़ान ने भी मुस्कुराते हुए हां में सर हिलाया.

"तो ये रूपाली का क्या किस्सा है?" उसने जै से पुछा

"कॉलेज के ज़माने का किस्सा है" जै ने जवाब दिया

"ओह" ख़ान समझते हुए बोला "तो वो आप जनाब ही थे जिससे रूपाली का चक्कर चल रहा था शादी से पहले"

"यस" जै ने कहा "जब वो प्रेग्नेंट हुई तो उसके बाप को पता चल गया के बच्चे का बाप ठाकुर शौर्या सिंग का बेटा था, यानी की मैं, पता उन्हें लगा पुरुषोत्तम"

"और इसलिए उसकी शादी पुरुषोत्तम से हो गयी. दोनो के बाप ने एक दूसरे से बात करी और चुप चाप शादी करा दी. यानी के पुरुषोत्तम को आज तक नही पता के रूपाली से उसकी शादी इसलिए हुई थी क्यूंकी तुम उसके साथ इन्वॉल्व्ड थे. ऑफ कोर्स, प्रेग्नेन्सी वाली बात उठी ही नही, रूपाली के पिता को लगा के वो ठाकुर के बेटे के साथ इन्वॉल्व्ड थी इसलिए रिश्ता पुरुषोत्तम से करा दिया गया"

"यू आर राइट" जै बोला

"इसपर रूपाली ने क्या कहा?"

"क्या कह सकती थी" जै बोला "हम दोनो अपना मुँह खोल ही नही सकते थे इसलिए चुप रहे. सोचा के वो आ तो हवेली ही रही है तो मिलते रहेंगे. पर फिर मेरी शादी किरण के साथ करा दी गयी. पहले पहले तो मुझे किरण से नफ़रत ही थी बट देन आइ स्लोली फेल्ल फॉर हेर, माइ ओन वाइफ"

"वाउ" ख़ान ने कहा "सो लेट मी गेट दिस स्ट्रेट. तो हुआ कुच्छ यूँ था .....

"कॉलेज में तुम्हें रूपाली मिली" ख़ान के जै से कहना शुरू किया "तुम दोनो का चक्कर चला, वो प्रेग्नेंट हुई और कन्फ्यूज़ होकर उसके माँ बाप ने उसकी शादी तुम्हारी जगह पुरुषोत्तम से करा दी. फिर तुम्हारी शादी किरण से हो गयी"

"नही थोड़ा सा ग़लत हो गया" जै ने खुद ही बताना शुरू कर दिया "पहले मेरी शादी किरण से हुई, फिर ठाकुर को मेरे और अपनी बीवी के बारे में पता चल गया जिसके चलते मुझे हवेली से निकाल दिया गया और चाची को सीधी से धक्का दे दिया. फिर उसके बाद रूपाली और पुरुषोत्तम की शादी हुई"

"ओके" ख़ान ने कहा "बोलते रहो"

"दौलत तो मुझे मिली नही पर मैं और किरण शहर आ गये और नयी लाइफ शुरू की. कुच्छ पास्ट मेरा था, कुच्छ इसका और हम दोनो ने ही उसको भूलना बेहतर समझा. नयी लाइफ शुरू हुई आंड वी बोथ फेल्ल फॉर ईच अदर"

"नाइस" ख़ान ने ताना सा मारा

"अब आता हूँ उस शाम की बात पर जबकि खून हुआ था. मैं और किरण लोंग ड्राइव पर निकले थे. गाड़ी चलाते चलाते हम गाओं तक ही आ पहुँचे और ठीक उसी टाइम मेरे फोन पर रूपाली की कॉल आई. जिस वक़्त चाची ने चाचा पर स्क्रू ड्राइवर से वार किया था उस वक़्त रूपाली खिड़की पर ही खड़ी थी. उसने वो वार होते देख लिया था आंड फॉर सम रीज़न, सबसे पहले उसने कॉल मुझे की. यू नो मैं अब भी उससे कभी कभी बात कर लेता था. वो आज तक प्यार करती है मुझे"

"लकी मॅन" ख़ान ने फिर ताना मारा

"खैर, उसका फोन आया के चाची ने ठाकुर साहब का खून कर दिया है. मैं वहाँ सिर्फ़ मौत में शामिल होने गया था, और कोई वजह नही थी पर जब वहाँ मैं और किरण पहुँचे, तो माजरा ही कुच्छ और था. मौत तो हुई ही नही थी. चाची बाहर बैठी थी. मैने किरण को गाड़ी में ही छ्चोड़ा और चाचा के कमरे में पहुँचा"

"और वहाँ पहुँचकर तुमने देखा के वार तो उनपर किया गया था पर वो मरे नही थे" ख़ान ने बीच में कहा

"राइट पर काफ़ी खून बह गया था उनका. कमज़ोर लग रहे थे जिसका फायडा मैने उठाया. जानलेवा वार उनपर मैने किया था" जै ने कहा

"वहीं सबकी नाक के नीचे तुमने खून किया, जबकि हवेली में इतने लोग मौजूद थे. तुम्हें लगा था के खून करके तुम शोर मचा दोगे और ठकुराइन फस जाएगी क्यूंकी पहली चोट उन्होने दी थी"

"राइट" जै ने कहा

"और इसीलिए आप मोह्तर्मा" ख़ान किरण की तरफ घूमा "मुझे वो पट्टी पढ़ा रही थी के. वो खून के 4 फनडस वाली, मकसद, मौका, ताक़त और पता नही क्या क्या वाहियात. आप सिर्फ़ मेरा दिमाग़ घुमाने की कोशिश कर रही थी क्यूंकी खून आपके पति ने किया था और उसने सोच समझ कर नही, उस वक़्त बिना सोचे समझे एक कमज़ोर लम्हे में खून कर दिया था"

"आक्च्युयली शराब भी पी हुई थी मैने इसलिए काफ़ी नशे में था" जै ने बात जोड़ी

"एस. तुमने बिना सोचे समझे खून कर दिया जिसके चलते अगर मैं ना होता तो शायद तुम फस भी जाते. मेरा शक तुम्हारी तरफ ना जाए इसलिए किरण ने मेरे दिमाग़ में ये बात घुसाई के खून बहुत सोच समझकर की जाने वाली चीज़ है. आप यू ही किसी के घर में घुसके सबके बीच खून नही कर देते"

"यू आर राइट अगेन" जै फिर से एक पेग बनाता हुआ बोला "खैर, वार तो मैने कर दिया पर बात तब खराब हो गयी जब मुझसे पहले उस साली नौकरानी ने शोर मचा दिया. मैने खून खून कहके ठकुराइन की तरफ इशारा करना था पर उस साली रंडी ने चिल्ला चिल्ला कर मेरी तरफ इशारा कर दिया"

"और सबने तुम्हें मारना शुरू कर दिया" ख़ान ने आगे बात जोड़ी "किरण उस वक़्त भी बाहर कार में बैठी थी. इसने पोलीस स्टेशन के नंबर पर फोन मिलाया. फोन बजा पर क्यूंकी रात हो चुकी थी तो थाने में किसी ने उठाया नही. कॉल फॉर्वर्डिंग सर्विस ने वो कॉल मेरे नंबर पे फॉर्वर्ड कर दी. ऐसा ही हुआ था कुच्छ?"

"जब हम पोलीस स्टेशन के सामने से उस शाम गुज़रे थे तो बाहर वो बोर्ड लगा देख लिया था के 24 घंटे आप पोलीस की मदद के लिए इस नंबर पे फोन कर सकते हैं. वो नंबर मुझे याद था और वही मैने घुमा दिया" किरण ने कहा

"उसके बाद तू आया, मुझे बचाया और फिर अरेस्ट कर लिया. मुझे तो लगा था के फस गया मैं पर फिर पता नही क्यूँ तू मुझे बचाने आ गया" जै ने कहा

"और फिर जब तुमने ये बात अपनी बीवी को बताई तो उसने तुम्हें बताया के जो इनस्पेक्टर तुम्हें बचाना चाहता है वो तो आक्च्युयली उसका पुराना आशिक़ है. इसलिए तुमने उसे फिर मेरे पास भेज दिया ताकि मेरा शक़ तुम्हारी तरफ ना घूमे और तुम्हें पता चलता रहे के मैं क्या इन्वेस्टिगेट कर रहा हूँ"

"और इसलिए भी के किरण के ज़रिए मैं धीरे धीरे तेरी इन्वेस्टिगेशन में मदद भी करता रहूं" जै ने कहा "वैसे एक बात बता, तुझे पता कैसे चला के ये मेरी बीवी है?"

"शर्मा को मॅरेज ब्यूरो भेजा था मैने" ख़ान ने बताया "इस उम्मीद पर के कुलदीप और पायल या इंदर और कामिनी की शादी का पता चल जाए. शर्मा मुझसे एक कदम आगे निकला. उसने वहाँ जाकर ठाकुर के पूरे खानदान के शादी के रेकॉर्ड्स निकाल लिए. और वहाँ उसको तुम्हारी और किरण की शादी के रेकॉर्ड्स मिले. दूसरी बात जो उसको उस दिन पता चली वो ये थी के रूपाली और पुरुषोत्तम ने डाइवर्स क्लेम फाइल किया हुआ था. ये दोनो डॉक्युमेंट्स उसने मुझे उस दिन फॅक्स किए पर क्यूंकी मेरी फॅक्स मशीन बंद थी इसलिए ये मुझे आज मिले"

थोड़ी देर के लिए सब चुप रहे.

"तुमने मारा था उसे?" ख़ान ने किरण से पुछा

"किराए के गुंडे थे यार" जवाब जै ने दिया

"मैं उस दिन कुच्छ काम से मॅरेज ब्यूरो गयी थी और मुझे वहाँ शर्मा मिल गया. कुच्छ अजीब तरीके से रिक्ट कर रहा था. कुच्छ पेपर्स थे उसके हाथ में"

"जो कि हमारी शादी के पेपर्स थे. इसने मुझे फोन किया, मैने इसको एक किराए के गुंडे का नंबर दिया" जै ने कहा

"और इसने फोन करके वो गुंडे शर्मा के पिछे लगा दिए जिन्होने उसको इस तरह से मारा के स्यूयिसाइड लगे. और क्यूंकी तुम उसके साथ थी, इसीलिए शर्मा मुझे फोन पर सब कुच्छ नही बता सकता था, बस ये डॉक्युमेंट्स फॅक्स कर दिए जो अफ़सोस के मुझे टाइम पर नही मिले"

"राइट अगेन" जै ने कहा

"तुमने रूपाली को भी ऐसी ही कोई कहानी सुना रखी है? के तुम शादी करोगे उससे?" ख़ान ने पुछा

"बिल्कुल" जै ने कहा "आक्च्युयली तेज को मारने का प्लान तो मेरा और रूपाली का बहुत पहले का था. वो साला थर्कि जानता था के पुरुषोत्तम अपनी बीवी को बिस्तर पर खुश नही कर सकता इसलिए वो खुद अपनी भाभी के चक्कर में था. रूपाली घास नही डालती थी"

"और फिर वो उस दिन जैल में तुमसे मिलने पहुँची. जान कर वो गाड़ी कामिनी की लाई थी जिससे किसी को उसपर शक ना हो और हुआ भी ऐसा ही. मैने उसको दूर से देखा और गाड़ी कामिनी की देखी तो मुझे लगा के कामिनी तुमसे मिलने आई है"

"बिल्कुल" जै ने कहा "प्लान मेरा और रूपाली का बहुत लंबा था पर सही मौका नही मिल पा रहा था. उस दिन रूपाली घूमने के बहाने तेज के साथ बाहर निकली, नशे की हालत में उससे वसीयत पर साइन कराए और नहर में धक्का देकर वापिस आ गयी"

"स्वीट" ख़ान बोला "तो ये तुम्हारा ओरिजिनल प्लान था दौलत हासिल करने का. इरादा तेज को मारने का था तो उस दिन ठाकुर को क्यूँ टीका दिया?"

"साफ सी बात है यार. अगर तेज दौलत मेरे नाम करके मर जाता तो तुम्हें लगता है के वो बुड्ढ़ा ठाकुर अगर ज़िंदा होता तो ऐसा होने देता? उसका मरना तो बहुत ज़रूरी था"

"यस. यू आर राइट"

"फिर से आते हैं उस शाम की बात पे. जब पायल ने शोर मचाया तो तू फस गया. किरण ने मुझे फोन किया और मैं वहाँ पहुँचा. तो तूने उस वक़्त क्यूँ नही बताया के ठाकुर पर पहला वार ठकुराइन ने किया था?"

"अगर बता देता तो 10 सवाल और उठ जाते के मुझे कैसे पता, अगर मुझे पता था तो मैं वहाँ क्या करने गया था, किसने बताया था मुझे और सबसे बड़ी बात, ठकुराइन व्हील चेर पर बैठी एक कमज़ोर औरत थी. कौन मानता मेरी बात? और फिर बुढ़िया भी तो साली स्यानी निकली. खुद भी अपने मुँह से बोली नही के उसने भी ठाकुर पे वार किया था"

"शुरू मैं अगर तू मुझे बताता तो शायद मैं भी नही मानता" ख़ान बोला "पर हां, आख़िर में उसने चुप चाप अपना जुर्म मान लिया ये सोच कर के ठाकुर को उसने मारा है. उस बेचारी को क्या पता के मारा तो असल में उसके बाद तुमने था. वैसे चंदू और बिंदिया के बारे में तुझे रूपाली ने बताया था ना? जो बाद में तूने मुझे ये कहकर बताया था के तूने खुद कई बार उन्हें साथ देखा है?"

जै ने हां में सर हिलाया. तब तक ख़ान ने अपनी जेब में हाथ डाला और रेवोल्वेर बाहर निकली.

"लेट्स गो देन" उसना दरवाज़े की तरफ इशारा किया

"वेर?" जै बोला

"टू दा जैल" ख़ान ने कहा "जहाँ से तुझे मैने निकाला था"

"और तुझे ऐसा क्यूँ लगता है के मैं तेरे साथ चल भी लूँगा?"

"देख कुच्छ करना मत जै वरना तुझे गोली मारने में मुझे ज़रा भी अफ़सोस नही होगा. इस फार्महाउस को चारों तरफ से पोलिसेवालो ने घेर रखा है. अब तक कुच्छ पोलिसेवालो ने रूपाली को भी तेज के मर्डर केस में अरेस्ट कर लिया होगा क्यूंकी यहाँ आने से पहले कुच्छ को भेज कर आया था मैं"

जै के चेहरे पर गुस्सा धीरे धीरे नज़र आने लगा था

"तेरा खेल ख़तम हो गया जै. जैल के अंदर बैठ कर जो खेल तू खेल रहा था वो था तो बहुत खूब पर उसमें ग़लती से मैं शामिल हो गया. तू था खेल का मास्टर माइंड और हम तो बस तेरे हाथों की कठपुतलियाँ थे जो तेरी ही सोच के अनुसार चल रहे थे. पर अब और नही ......"

अचानक अब तक चुप चाप खड़ी किरण ने कुच्छ हरकत की. उसके हाथ में पिस्टल जैसी कोई चीज़ ख़ान को नज़र आई. फ़ौरन ही जिस गन का निशाना जै की तरफ था, वो किरण की तरफ घूमी, एक गोली की आवाज़ गूँजी और अगले ही पल किरण ज़मीन पर पड़ी थी.

"किरण" ख़ान ज़ोर से चिल्लाया और फ़ौरन आगे बढ़कर किरण को थाम लिया.

मौका देख कर जै गेट की तरफ भागा पर ख़ान ने उसको रोकने की कोई कोसिश नही की क्यूंकी बाहर खड़े 10 पोलिसेवाले जै के बाहर आने का ही इंतेज़ार कर रहे थे.

"किरण ... किरण" ख़ान ने नीचे बैठते हुए उसके गाल को धीरे से थपथपाया पर उसकी किरण की आँखों से ज़िंदगी की रोशनी कब की ख़तम हो चुकी थी.

बाहर से कुच्छ गोलियाँ चलने की आवाज़ आई. और फिर जाई की दर्द भारी चीख सुनाई दी.

दोस्तो इस तरह खूनी हवेली की वासना से भरी हुई इस मिस्ट्री के सारे राज खुल गये दोस्तो आप को कहानी कैसी लगी ज़रूर लिखना आपका दोस्त राज शर्मा

समाप्त

दा एंड

खूनी हवेली की वासना पार्ट --54

gataank se aage........................

Khan ne bhi muskurate hue haan mein sar hilaya.

"Toh ye Rupali ka kya kissa hai?" Usne Jai se puchha

"College ke zamane ka kissa hai" Jai ne jawab diya

"Ohhhhhhhhh" Khan samajhte hue bola "Toh vo aap janab hi the jisse Rupali ka chakkar chal raha tha shaadi se pehle"

"Yep" Jai ne kaha "Jab vo pregnant hui toh uske baap ko pata chal gaya ke bachche ka baap Thakur Shaurya singh ka betha tha, yaani ki main, pat unhen laga Purushottam"

"Aur isliye uski shaadi Purushottam se ho gayi. Dono ke baap ne ek doosre se baat kari aur chup chap shaadi kara di. Yaani ke Purushottam ko aaj tak nahi pata ke Rupali se uski shaadi isliye hui thi kyunki tum uske saath involved the. Of course, pregnancy wali baat uthi hi nahi, Rupali ke pita ko laga ke vo thakur ke bete ke saath involved thi isliye rishta purushottam se kara diya gaya"

"You are right" Jai bola

"Ispar Rupali ne kya kaha?"

"Kya keh sakti thi" Jai bola "Ham dono apna munh khol hi nahi sakte the isliye chup rahe. Socha ke vo aa toh haweli hi rahi hai toh milte rahenge. Par phir meri shaadi Kiran ke saath kara di gayi. Pehle pehle toh mujhe Kiran se nafrat hi thi but then i slowly fell for her, my own wife"

"Wow" Khan ne kaha "So let me get this straight. Toh hua kuchh yun tha .....

"College mein tumhein Rupali mili" Khan ke Jai se kehna shuru kiya "Tum dono ka chakkar chala, vo pregnant hui aur confuse hokar uske maan baap ne uski shaadi tumhari jagah Purushotta se kara di. Phir tumhari shaadi Kiran se ho gayi"

"Nahi thoda sa galat ho gaya" Jai ne khud hi batana shuru kar diya "Pehle meri shaadi Kiran se hui, phir thakur ko mere aur apni biwi ke baare mein pata chal gaya jiske chalte mujhe haweli se nikal diya gaya aur chachi ko sidhi se dhakka de diya. Phir uske baad Rupali aur Purushottam ki shaadi hui"

"Ok" Khan ne kaha "Bolte raho"

"Daulat toh mujhe mili nahi par main aur Kiran shehar aa gaye aur nayi life shuru ki. Kuchh past mera tha, kuchh iska aur ham dono ne hi usko bhulana behtar samjha. Nayi life shuru hui and we both fell for each other"

"Nice" Khan ne taana sa mara

"Ab aata hoon us shaam ki baat par jabki khoon hua tha. Main aur Kiran long drive par nikle the. Gaadi chalate chalate ham gaon tak hi aa pahunche aur theek usi time mere phone par Rupali ki call aayi. Jis waqt chachi ne chacha par screw driver se vaar kiya tha us waqt Rupali khidki par hi khadi thi. Usne vo vaar hote dekh liya tha and for some reason, sabse pehle usne call mujhe ki. You know main ab bhi usse kabhi kabhi baat kar leta tha. Vo aaj tak pyaar karti hai mujhe"

"Lucky man" Khan ne phir tana mara

"Khair, uska phone aaya ke chachi ne thakur sahab ka khoon kar diya hai. Main vahan sirf maut mein shaamil hone gaya tha, aur koi vajah nahi thi par jab vahan main aur Kiran pahunche, toh majra hi kuchh aur tha. Maut toh hui hi nahi thi. Chachi bahar bethi thi. Maine Kiran ko gaaadi mein hi chhoda aur chacha ke kamre mein pahuncha"

"Aur vahan pahunchkar tumne dekha ke vaar toh unpar kiya gaya tha par vo mare nahi the" Khan ne beech mein kaha

"Right par kaafi khoon beh gaya tha unka. Kamzor lag rahe the jiska fayda maine uthaya. Jaanleva vaar unpar maine kiya tha" Jai ne kaha

"Vahin sabki naak ke neeche tumne khoon kiya, jabki haweli mein itne log maujood the. Tumhein laga tha ke khoon karke tum shor macha doge aur Thakurain phas jaayegi kyunki pehli chot unhone di thi"

"Right" Jai ne kaha

"Aur isiliye aap mohtarma" Khan Kiran ki taraf ghooma "Mujhe vo patti padha rahi thi ke. Vo khoon ke 4 fundas wali, maksad, mauka, taakat aur pata nahi kya kya vaahiyat. Aap sirf mera dimag ghumane ki koshish kar rahi thi kyunki khoon aapke pati ne kiya tha aur usne soch samajh kar nahi, us waqt bina soche samjhe ek kamzor lamhe mein khoon kar diya tha"

"Actually sharab bhi pi hui thi maine isliye kaafi nashe mein tha" Jai ne baat jodi

"Yep. Tumne bina soche samjhe khoon kar diya jiske chalte agar main na hota toh shayad tum phas bhi jaate. Mera shak tumhari taraf na jaaye isliye Kiran ne mere dimag mein ye baat ghusayi ke khoon bahut soch samajhkar ki jaane wali cheez hai. Aap yuun hi kisi ke ghar mein ghuske sabke beech khoon nahi kar dete"

"You are right again" Jai phir se ek peg banata hua bola "Khair, vaar toh maine kar diya par baat tab kharab ho gayi jab mujhse pehle us saaali naukrani ne shor macha diya. Maine khoon khoon kehke Thakurain ki taraf ishara karna tha par us saali randi ne chilla chilla kar meri taraf ishara kar diya"

"Aur sabne tumhein maarna shuru kar diya" Khan ne aage baat jodi "Kiran us waqt bhi bahar car mein bethi thi. Isne police station ke number par phone milaya. Phone baja par kyunki raat ho chuki thi toh thaane mein kisi ne uthaya nahi. Call forwarding service ne vo call mere number pe forward kar di. Aisa hi hua tha kuchh?"

"Jab ham police station ke saamne se us shaam guzre the toh bahar vo board laga dekh liya tha ke 24 ghante aap police ki madad ke liye is number pe phone kar sakte hain. Vo number mujhe yaad tha aur vahi maine ghuma diya" Kiran ne kaha

"Uske baad tu aaya, mujhe bachaya aur phir arrest kar liya. Mujhe toh laga tha ke phas gaya main par phir pata nahi kyun tu mujhe bachane aa gaya" Jai ne kaha

"Aur phir jab tumne ye baat apni biwi ko batayi toh usne tumhein bataya ke jo inspector tumhein bachana chahta hai vo toh actually uska purana aashiq hai. Isliye tumne use phir mere paas bhej diya taaki mera shaq tumhari taraf na ghume aur tumhein pata chalta rahe ke main kya investigate kar raha hoon"

"Aur isliye bhi ke Kiran ke zariye main dheere dheere teri investigation mein madad bhi karta rahun" Jai ne kaha "Vaise ek baat bata, tujhe pata kaise chala ke ye meri biwi hai?"

"Sharma ko marriage beureau bheja tha maine" Khan ne bataya "Is ummeed par ke Kuldeep aur Payal ya Inder aur Kamini ki shaadi ka pata chal jaaye. Sharma mujhse ek kadam aage nikla. Usne vahan jakar thakur ke poore khandan ke shaadi ke records nikal liye. Aur vahan usko tumhari aur Kiran ki shaadi ke records mile. Doosri baat jo usko us din pata chali vo ye thi ke Rupali aur Purushottam ne divore claim file kiya hua tha. Ye dono documents usne mujhe us din fax kiye par kyunki meri fax machine band thi isliye ye mujhe aaj mile"

Thodi der ke liye sab chup rahe.

"Tumne mara tha use?" Khan ne Kiran se puchha

"Kiraye ke gunde the yaar" Jawab Jai ne diya

"Main us din kuchh kaam se marriage beureau gayi thi aur mujhe vahan Sharma mil gaya. Kuchh ajeeb tarike se react kar raha tha. Kuchh papers the uske haath mein"

"Jo ki hamari shaadi ke papers the. Isne mujhe phone kiya, maine isko ek kiraye ke gunde ka number diya" Jai ne kaha

"Aur isne phone karke vo gunde sharma ke pichhe laga diya jinhone usko is tarah se mara ke suicide lage. Aur kyunki tum uske saath thi, isiliye Sharma mujhe phone par sab kuchh nahi bata sakta tha, bas ye documents fax kar diye jo afsos ke mujhe time par nahi mile"

"Right again" Jai ne kaha

"Tumne Rupali ko bhi aisi hi koi kahani suna rakhi hai? Ke tum shaadi karoge usse?" Khan ne puchha

"Bilkul" Jai ne kaha "Actually Tej ko maarne ka plan toh mera aur Rupali ka bahut pehle ka tha. Vo sala tharki janta tha ke purushotta apni biwi ko bistar par khush nahi kar sakta isliye vo khud apni bhabhi ke chakkar mein tha. Rupali ghaas nahi daalti thi"

"Aur phir vo us din Jail mein tumse milne pahunchi. Jaan kar vo gaadi Kamini ki laayi thi jisse kisi ko uspar shak na ho aur hua bhi aisa hi. Maine usko door se dekha aur gaadi Kamini ki dekhi toh mujhe laga ke Kamini tumse milne aayi hai"

"Bilkul" Jai ne kaha "Plan mera aur Rupali ka bahut lamba tha par sahi mauka nahi mil pa raha tha. Us din Rupali ghoomne ke bahane Tej ke saath bahar nikli, nashe ki halat mein usse vaseeyat par sign karaye aur nehar mein dhakka dekar vaapis aa gayi"

"Sweet" Khan bola "Toh ye tumhara original plan tha daulat haasil karne ka. Irada Tej ko maarne ka tha toh us din Thakur ko kyun tika diya?"

"Saaf si baat hai yaar. Agar Tej daulat mere naam karke mar jata toh tumhein lagta hai ke vo buddha thakur agar zindai hota toh aisa hone deta? Uska marna toh bahut zaroori tha"

"Yep. You are right"

"Phir se aate hain us shaam ki baat pe. Jab Payal ne shor machaya toh tu phas gaya. Kiran ne mujhe phone kiya aur main vahan pahuncha. Toh tune us waqt kyun nahi bataya ke thakur par pehla vaar thakurain ne kiya tha?"

"Agar bata deta toh 10 sawal aur uth jaate ke mujhe kaise pata, agar mujhe pata tha toh main vahan kya karne gaya tha, kisne bataya tha mujhe aur sabse badi baat, thakurain wheel chair par bethi ek kamzor aurat thi. Kaun manta meri baat? Aur phir budhiya bhi toh saali shaani nikli. Khud bhi apne munh se boli nahi ke usne bhi thakur pe vaar kiya tha"

"shuru main agar tu mujhe batata toh shayad main bhi nahi manta" Khan bola "Par haan, aakhir mein usne chup chap apna jurm maan liya ye soch kar ke thakur ko usne mara hai. Us bechari ko kya pata ke mara toh asal mein uske baad tumne tha. Vaise Chandu aur Bindiya ke baare mein tujhe Rupali ne bataya tha na? Jo baad mein tune mujhe ye kehkar bataya tha ke tune khud kai baar unhen saath dekha hai?"

Jai ne haan mein sar hilaya. Tab tak Khan ne apni jeb mein haath dala aur revolver bahar nikali.

"Lets go then" Usna darwaze ki taraf ishara kiya

"Where?" Jai bola

"To the jail" Khan ne kaha "Jahan se tujhe main nikala tha"

"Aur tujhe aisa kyun lagta hai ke main tere saath chal bhi loonga?"

"Dekh kuchh karna mat Jai varna tujhe goli maarne mein mujhe zara bhi afsos nahi hoga. Is farmhouse ko chaaron taraf se policewalo ne gher rakha hai. Ab tak kuchh policewalo ne Rupali ko bhi Tej ke murder case mein arrest kar liya hoga kyunki yahan aane se pehle kuchh ko bhej kar aya tha main"

Jai ke chere par gussa dheere dheere nazar aane laga tha

"Tera khel khatam ho gaya jai. Jail ke andar bethkar jo khel tu khel raha tha vo tha toh bahut khoob par usmein galti se main shaamil ho gaya. Tu tha khel ka master mind aur ham toh bas tere haathon ki kathputliyan the jo teri hi soch ke anusar chal rahe the. Par ab aur nahi ......"

Achanak ab tak chup chap khadi Kiran ne kuchh harkat ki. Uske haath mein pistol jaisi koi cheez Khan ko nazar aayi. Fauran hi jis gun ka nishana Jai ki taraf tha, vo Kiran ki taraf ghoomi, ek goli ki aawaz goonji aur agle hi Pal Kiran zameen par padi thi.

"Kiran" Khan zor se chillaya aur fauran aage badhkar Kiran ko thaam liya.

Mauka dekh kar Jai gate ki taraf bhaga par Khan ne usko rokne ki koi kosish nahi ki kyunki bahar khade 10 policewale Jai ke bahar aane ka hi intezaar kar rahe the.

"Kiran ... Kiran" Khan ne neeche bethte hue uske gaal ko dheere se thapthapaya par uski Kiran ki aankhon se zindagi ki roshni kab ki khatam ho chuki thi.

Bahar se kuchh goliyan chalne ki aawaz aayi. Aur phir Jai ki dard bhari cheekh sunai di.

THE END