मेले के रंग सास,बहू और ननद के संग

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The Romantic
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Re: मेले के रंग सास,बहू और ननद के संग

Unread post by The Romantic » 19 Dec 2014 04:03

मेले के रंग सास,बहू और ननद के संग--3

गतान्क से आगे ............................................

सच पूछो तो मामी भी ज़रूर उनसे चुद्वाना चाह रही होंगी इसलिए एक बार भी ना-नुकूर किए बिना तुरंत ही मान गयी और दुल्हन की तरहा शर्मा रही थी.में और भाभी अपने हासे कंट्रोल नही कर पा रहे थी इसलिए हम किचन मे चल दिए और हँसने लगे मामी के नखरे देख कर.

मामा ने फिर मामी को कहा जाओ अपने कपड़े पॅक करो में तांगे का इंतेज़ाम करता हू और चले गये फिर मामी अपने कमरे के लिए जाने लगी तो विश्वनाथ उनके पीछे चलने लगे ,विश्वनाथ की आँख मामी की बड़ी गांद से हट ही नही रही थी मामी भी हिरण की तरह गंद हिला के चल रही थी मानो विश्वनाथ जी को उकसा रही हों, हम दोनो चुपके किचन से सब देख रहे थे फिर विश्वनाथ जी को मामी की हिलती गंद को देख कर और कंट्रोल नही हुआ और झट से उन्होने मामी की गांद को भींच दिया मामी ऊऊऊओिईइमाआ चिल्ला उठी में और भाभी तुरंत उनके पास गये और नखरे करते भाभी ने पूछा सासू मा क्या हुआ कोई? वो भोली कुछ नही बहू ख़टमल ने काट लिए और विश्वनाथ जी की तरफ़ हंस के अपने कमरे की ओर चले गयी,हम दोनो तो अब श्योर हो गये कि मामी चुदाई के लिए तैयार थी .विश्वनाथ जी तो अब भाभी की ओर देख भी नही रहे थे और मामी के पीछे उपर चले गये.

मेने भाभी को नखरे से कहा भाभी आप तेरी चूत का क्या होगा उसका लंड तो किसी और के पीछे दीवाना हो गया ,भाभी बोली चुप शैतान कोई सुन लेगा तो मे मर जाउन्गि,लेकिन में और भाभी को सता ने लगी और बोली भाभी क्या फ़ायदा तुम्हारी जवानी का जो तेरी सास के पीछे लौंदे भाग रहे हैं ,भाभी बोली चुप और किचन की तरफ चली गयी में भी भाभी के पीछे चली.कुछ समय बाद मामा तांगा लेकर आए और मामी जो कि नयी सारी पहेन कर सज धज कर आई जैसे सुहागरात पे जा रही थी मेने मज़ाक करते पूछा भी मामी आप तो दुल्हन के तारह लग रही है तो वो शर्मा कर बोली चुप कर और विश्वनाथ जी भी अपना बॅग ले कर नीचे आए और मामा ने उनसे कहा कि अपनी भाभी का ध्यान रखना वो हस के बोले आप फिकर मत करिए भाई सहाब भाभी का पूरा ध्यान रखूँगा मैं और भाभी तो मन ही मन हस रहे

और सोच रहे थे मामी की चूत का ध्यान रखेंगे विश्वनाथ जी औरमामी तांगे मे दोनो बैठ कर चले गये.

मामा ने कहा बेटी में बाज़ार जाके आता हू और चले गये में और भाभी किचन में गये और अपनी नोक झोक चालू करते घर के काम निपटा ने लगे,भाभी सब्जी काट रही थी काफ़ी चुप चाप थी तो मेने पूछा

भाभी क्यूँ चुप चाप बैठे हो वो नखरे कर के बोली मुझे तेरे भैया के याद आ रहे हे,मेंने झट से जबाब दिया भैया की याद या साली विश्वनाथ जी की लंड का याद आ रहा है,भाभी बोली चुप कर तुझ से तो बात करना ही बेकार हे ,में बोली अछा इतने नखरे साली अभी जाकर में मामा को उनकी बहू कितने लवाड़ो से अपनी चूत का उद्घाटन करवा चुकी है बोल देती हू उनको भी पता चले उनके प्यारी बहू के कारनामे,वो डर गयी और बोली मीना में तो मज़ाक कर रही थी तू तो मेरी बेस्ट फ्रेंड है सच में मुझे विश्वनाथ की रात की चुदाई याद आ रही थी कितना बड़ा लॅंड था उनका मानो भैंसे का लंड हो में तो सुबह से ठीक से चल भी नाही पा रही हू मेरे किस्मत फटी हुई है कि विश्वनाथ जी के वापस आने के पहेले मामा हमे घर छोड़देंगे मेरी चूत का क्या होगा ,में बोली मीना रानी तू तो बड़ी सायणी निकली फिकर मत कर अगर किसी लंड का इंतज़ाम नही हुआ तो तबेले में भैसा बँधा हुआ है उसके आगे घोड़ी बन जाना वो तेरी चूत की प्यास बुझा देगा ये सुनके भाभी बोली शैतान और मुझे मारने के लिए भागी और में भी भागी ,इसी वक्त मामा आ रहे थे तो भगा भागी में भाभी मामा से जा कर टकराई और मामा के उपर गिर गई ओई मा चिल्ला कर ,भाभी ने ब्लू कलर की शॉर्ट ब्लाउस पहेन रखी थी पिंक सारी के नीचे जो कि उनके जोबन को धक नाही पा रहा था ,

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Re: मेले के रंग सास,बहू और ननद के संग

Unread post by The Romantic » 19 Dec 2014 04:04

मामा की निगाए भाभी के जोबन से हट ही नही रही थी ,भाभी घर में हर वक्त घूघाट में रहती थी तो कभी मामा ने भाभी का चेहरा भी ठीक से नाही देखा होगा ,मेंने भाभी का हाथ थाम के उनको उठने की मदद करी और भाभी उठ के झट से अपने घूँगट में चली गयी और बोली ससुर जी देखिए ना मीना मुझे परेशान कर रहीहै ,मामा अभी भी भाभी के ब्लाउस को घूर कर कह रहे थे वीना टू अपनी भाभी को परेशान मत कर उसको घर का सारा काम करना पड़ ता है उसके काम मे हाथ बटा नाही तो तुझे आज ही गाओं .भेज दूँगा कह कर उपर अपने कमरे में चले गए,और उनके जाने के बाद भाभी फिर मेरे पीछे भागने लगी और में किचन की तरफ भागी पर भाभी ने पकड़ ही लिया मुझे और मेरी चूचिया भींच दी में दर्द से चिल्लाई साली रांड़ अपने ससुर को भी नही छोड़ा उनसे चुदवाएगी क्या,वो बोली चुप शैतान नही तो और एक बार भींच दूँगी,मुझे और परेशान मत कर मुझे अभी बहुत काम है में जा रही हू नहाने के बाद खाना भी पकाना है , तू चावल के लिए पानी चढ़ा दे चूल्‍हे पर ,भाभी अपनी ब्लाउस और ब्रा खोलने लगी और फिर पेटिकोट भी उतार दिया और नहाने गयी घर के पीछे बने कुए के पास,में भी किचन में गयी किचन की एक खिड़की घर के पिछवाड़े की तरफ खुली हुई थी तो में भाभी को देख सकती थी,विश्वनाथ जी के घर के पिछवाड़े के पास उनके पड़ोसी का भी पिछवाड़ा था और दो बच्चे जो की 9 या 10 भी क्लास में पढ़ रहे थे ,भाभी बच्चो की तरफ देखी और कुए से पानी निकाल कर नहाने लगी वो सोची होगी छोटे बच्चे हैं पर आज कल के बच्चो को तो आप जानते हैं ,भाभी ने जब अपने उपर पानी डाला तो उनकी सारी ट्रॅन्स्परेंट होने के कारण उनकी चूचियाँ सॉफ दिख ने लगी ,भाभी की लाल चड्डी भी दिखने लगी और यह देख बच्चो के हाथ अपने अपने आप हाफ पॅंट पे चले गये लगे लुल्ली से खेल ने ,भाभी ये

देख कर थोड़ा हस्ने लगी में भी हस्ने लगी बच्चे हो या बूढ़े औरत की चुचियाँ और गांद को कोई नज़र अंदाज नही कर सकता बाप रे हे भगवान,भाभी थोड़ी शरारत के मूड मे थी इसलिए उसने अपने पल्लू को चुचियो से थोड़ा हटा दिया अब बच्चो को भाभी की गोरी चुचियाँ नज़र आ रही थी और उनकी हाफ पॅंट में तंबू बनता जा रहा था तभी पीछे से आवाज़ आई किसी मर्द की जोनी बंटी कहाँ हो और एक मर्द जो कि 40 बरस का होगा और उनके पास आया और जो उसने देखा बच्चे क्या कर रहे थे तो उसने बच्चो के कान पकड़ कर डाँट लगाई,भाभी ने ये देख कर अपनी सारी को थोड़ा अड्जस्ट कर लिया लेकिन सब कुछ दिख रहा था कपड़े गीले होने के कारण से,फिर भाभी नहाने लगी और मेने चूल्‍हे पर पानी चढ़ा दिया फिर मेने खिड़की में देखा तो अब वोही मर्द फिर आया कुछ कपड़े ले कर और सुखाने लगा और एक बड़ी चादर के पीछे से चुपके चुपके भाभी की ओर देखने लगा भाभी ने उसकी ये हरकत देख ली और उसे और सता ने के लिए अपना एक पाँव कुए पा रख कर जाँघ पर साबून लगाने लगी यह देख कर वो आदमी तो संभाल ही नाही पाया और अपनी लूँगी में हाथ डाल ही दिया ,भाभी को ये सॉफ दिख रहा था फिर भाबी ने थोड़ा और सारी थोड़ी और उठा दी अब उनकी चड्डी सॉफ दिख रही थी फिर क्या वो भाया तो संभाल ही नाही पाए और सीधा अपनी लूँगी मे एक हाथ मे लेकर अपना 8 इंच का काले लंड को बाहर निकाल दिया और हिला ने लगे चादर के पीछे पर चादर ट्रॅन्स्परेंट थी तो भाभी को सब दिख रहा था तभी एक मोटी से औरत उन दोनो बच्चो के साथ आई जो उस आदमी के पत्नी लग रही थी बेलन लेकर आई और उसके कान पकड़ कर उसे घसीट कर ले गयी घर के अंदर और ज़ोर से धुलाई की आवाज़ आने लगी लगता था बच्चो ने अपने पिता से बदला ले लिया था ,

में फिर उनके पास दबे पावं जा कर बोली भाभी तो वो चौंक पड़ी और तभी कमरे की खिड़की भी किसी ने बंद कर दी भाभी झट से उठ कर अपनी चड्डी उपर कर के घर की ओर चलने लगी ,में भी उनके पीछे चली गयी ,भाभी के कमरे में अरे भाभी तुम तो रंडी निकली बाप तो बाप बच्चो को भी नही छोड़ा भाभी कपड़े पेहेन्ते हुई बोली क्या बोल रही हो मुझे कुछ समझ में नही आ रहा ,मेने उसकी खुली चुचि को पकड़ लिया और बोली साली में तेरी सारी हरकत किचन से देख रही थी इतनी सती सावित्री मत बन,साली बच्चो कों भी नही बक्सा साली तुझे इतनी चूत में खुजली हो रही है तो भैसे के पास चल तेरी चूत फाड़ देगा वो. वो मुझसे अपनी चुचि छुड़वाने की कोशिश कर के बोली तुम्हे तो हर वक्त वोही सूझता है छोड़ो मुझे मुझे बहुत काम है नही तो मैं चिल्लाउन्गि ससुरजी को ,मेने माँ का नाम सुनकर उसको छोड़ दिया और बोली ठीक है भाभी में तुम्हे देख लूँगी ,में बाहर चली आई तो मेरी नज़र उस खिड़की पर पड़ी वो तो मामा के रूम का खिड़की थी और घर में तो में ,भाभी और मामा ही थे क्या मामा भाभी को देख रहे थे,मेरे मन मे सवाल गूँज रहा था,पर मेने भाभी को कुछ नही कहा और भाभी के साथ मस्ती मज़ाक मे खाना पकाने लगी और दोपहर हो गयी,

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Re: मेले के रंग सास,बहू और ननद के संग

Unread post by The Romantic » 19 Dec 2014 04:05

मुझे भाभी ने कहा जाओ मामा को खाने के लिए बुला दो ,में उपर मामा के कमरे में जा कर दरवाजे को खोल ही रही थी कि मामा किस से बात कर रहे थे मैं सुनने लगी ,मामा -देखो मेने जैसे कहा वैसे करना

मुझे कोई गडबड़ी नही चाहिए रात को 12 बजे आना में पीछे के दरवाजे के पास होउँगा ,तुम्हे अच्छा इनाम मिलेगा.

मैं दरवाजा खोल के अंदर गयी तो देखा मामा फोन पे बात कर रहे थे और मामा ने मुझे देख कर झट से फ़ोन रख दिया उनके चेहरे पर घबराहट हुई थी मानो साप सूंघ लिया हो मेने बोला मामा आओ खाना लग गया है वो बोले तू जा में आता हू,में नीचे आ रही थी पर मेरे मन मे हज़ारो सवाल गूँज रहे थे मामा नीचे आए और खाना खाने लगे और कुछ देर बाद भाभी जो कि नहाने के बाद एक पिंक सारी और पिंक ब्लाउस में थी आकर दाल देने लगी भाभी झूकि हुई थी तो मामा को भाभी की चुचियो के दर्शन हो रहे थे घूँघट में होने के बाबजूद ,मामा ने उस दिन 2-3 बार भाभी को बुलाया और उनकी चुचियो का मज़ा उठाया खाना के बहाने और फिर कहा बहू आज का खाना बहुत संदर था.फिर हम ननद भाभी खाने लगे और मेने भाभी से पूछा मामा आज कल अपनी बहू की कुछ ज़्यादा तारीफ कर रहे है वो बोली

में हू ही तारीफ के काबिल ,मेने भाभी से मेरी मन की बात नही कही क्यूंकी भाभी जो भी हो अपने ससुर्जीका आदर करना था.मेने टॉपिक चेंज करते पूछा भाभी मामी तो अब मज़े ही मज़े मे खूब चुदे गी विशवनाथ जी से भाभी बोली हां री हमारी ऐसी किस्मत कहाँ,क्यूँ भैंसा है ना भाभी तुम्हारी चूत की प्यास भुजाने के लिए भाभी बोली चुप शैतान मामा सुन लेंगे.खाने के बाद भाभी बोली चल तबेले मे मेरे साथ भैसे को खाना देना है में बोली क्यूँ भाभी चुदवाने की इच्छा हो रही है क्या वो बोली चुप कर और चल हम तबेले गये और भैसे को भाभी ने खाना दिया और घर के सारे काम कर के लेटे थे कि हम दोनो की नींद लग गयी,

क्रमशः.....................................