Hindi Sex Stories By raj sharma

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rajaarkey
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Re: Hindi Sex Stories By raj sharma

Unread post by rajaarkey » 15 Dec 2014 04:30

नरगिस--1

मेरा नाम नरगिस है .. मैं एक मुस्लिम परिवार की बेटी हूँ मेरे घर मे मेरी एक छोटी बहेन है और अम्मी है .. मेरे अब्बू का एन्तेकाल कुच्छ सालों पहले हो गया था.. उनके जाने के बाद मेरी अम्मी के भाइयों ने भी हम से हाथ खीच लिया अब सारे परिवार की ज़िम्मेदारी मेरे ऊपर आ गई थी ..

मैं करती भी क्या पड़ाई ख़तम करके एक अच्छी से नौकरी करना चाहती थी.. मैं दूसरी लड़कियों की तरह कभी अपनी लाइफ जी ही नही पाई हर कदम पे समझौता ही करती रही … शायद ये ही मेरा नसीब बन गया था.. अब तो आदत से हो गई थी..

मेरा रुटीन बिल्कुल बना हुआ था.. सुबह उठना और पहले तय्यार हो के ट्यूशन पढ़ने जाती और वही से ऑफीस निकल जाती … फिर शाम को जब थक हार के घर आती तो मेरी छोटी बहन को पढ़ाती .. फिर अम्मा के साथ बैठ के बातें करती और फिर अगले दिन की तय्यारी रात मे कर के सो जाती .. मुझे लेट होने का शौक नही था सो मैं अपने कपड़े रात मे ही तय्यार कर के रख लेती थी..

मगर मुझे वो दिन आज भी याद रहे गा.. .. वो मेरी ज़िंदगी का सबसे मनहूस दिन था.. वो दिन था.. सॅटर्डे का दिन अगले दिन छुट्टी थी मैं रोज़ी को पढ़ा के लेट गई थी.. काफ़ी थकि हुई थी मगर जाग रही थी कि कल तो सनडे है आराम से उठना था.. तो कोई टेशन नही थी ..

मैं और मेरी बहेन रोज़ी हम एक कमरे मे लेट ते है .. और अम्मी दूसरे कमरे मे लेट ती है. वो कमरा मेरे कमरे से थोड़ी दूरी पे है.. उसके साथ ही किचन लगा हुआ है.. और बीच मे आँगन है .. मुझे थोड़ी प्यास लगी थी मैं उठी कि चलो पानी पी लू फिर आ के लेटुंगी ..

मैं जैसे ही अम्मी के कमरे के पास से गुज़री मुझे कुच्छ बातें करने की आवाज़ आई .. मेरे पैर रुक गये मैं चौंक गई कि ये अम्मी किससे बातें कर रही है.. मुझे लगा कि कहीं कोई भाई तो वापिस नही आ गया .. जिससे दिल के हाल बयान हो रहे हूँ ये सोच के मैं अम्मी के कमरे की तरफ बढ़ी ही थी कि मेरे पैर रुक गये .. मुझे आवाज़ जानी पहेचानी लगी ..

अरे.. मेरे खुदा.. ये तो .. नजीब अंकल की थी नेजीब अंकल मेरे अब्बू के दोस्त है.. और अक्सर घर आते रहेते थे .. अम्मी को वो बहेन मानते थे.. मगर ये आवाज़ें मुझे परेशान कर गई थी .. मैने धीरे से अम्मी के कमरे की खिड़की से झाँक के देखा ..तो अंदर का नज़ारा ही कुच्छ और था… मेरी .. अम्मी …. (मैं कहना नही चाहती मगर कह रही हूँ ) ..

पूरी नंगी लेटी थी .. और मेरे नजीब अंकल उनके ऊपर ही लदे हुए थे ये देख के मैं शरम से पानी पानी हो गई.. मैं करूँ क्या.. मैं उल्टे पावं वापिस आ गई.. और अपने पलंग पे लेट गई.. तभी मुझे फिर से प्यास महसूस हुई क्यो कि पानी तो मैं पीना ही भूल गई थी.. मैं वापिस किचन मे गई और बिना आवाज़ किय मैने पानी पिया और ..

वापिस जाने लगी .. तो मेरा दिल बोला .. यार नरगिस अम्मी कर क्या रही हैं ये तो देख ले .. हो सकता है कि तूने जो देखा और जो समझा वो अलग अलग हो .. .. मैने भी ये ही सोचा .. तभी मुझे एक बात सूझी .. मैं फ़ौरन किचन के रौशन्दान पे चढ़ गई और अंदर देखने लगी ..

अंदर अम्मी बिल्कुल नंगी बेड पे लेटी थी और नेजीब अंकल उनके ऊपर लदे हुए थे उनका .. .. मोटा सा सामान .. काला काला .. मेरी अम्मी की… पेशाब की जगह पे था.. मुझे आज ये मालूम है कि उनको क्या कहते है.. .. मेरा कहने का मतलब है.. कि अंकल का लंड मेरी अम्मी की चूत मे धसा हुआ था… और अम्मी अपनी टाँगों को फैलाए ..

अंकल से लिपटी पड़ी हुई थी .. और अंकल उनकी चुदाई कर रहे थे.. यह खुदा ये मैं क्या देख रही हूँ … अम्मी तो इनको अपना भाई कहती थी .. फिर ..ये सब क्या है.. मगर अब मुझे देखने मे मज़ा आ रहा था.. नजीब अंकल कस कस के धक्के मार रहे थे और अम्मी उच्छल उच्छल के उनके धक्के अपनी कमर और चूत पे रोक रही थी ..

फ़चा फॅक की आवाज़ें पूरे कमरे मे गूँज रही थी .. अम्मी बड़े मज़े के साथ अपनी चूत को चुद्वा रही थी.. मैं देख के हैरान थी.. मैं उतरने को हुई तो देखा मेरे पीछे मेरी छोटी बहन रोज़ी खड़ी थी.. वो मुझे देख के मुस्कुरा दी.. मैं गुस्सा हुई .और चुप चाप उतर के .. कमरे मे आ गई .. पीछे पीछे वो भी कमरे मे आ गई .. ..

“ क्या हुआ बाजी .. ?? “

कुच्छ नही .. तू क्या कर रही थी वहाँ पे

..अरे बाजी ये सीन तो मैं कई बार देख चुकी हूँ तुमको ही खबर नही है .. अम्मी तो कई लोगो के साथ ये करवाती है.

.क्या .. तू पागल तो नही हो गई है

नही बाजी मैं सच कह रही हूँ जब तुम घर पे नही होती तो अम्मी अपने यारों को बुला के ये सब ही तो करती है ..वरना इस घर का खर्चा कैसे चले.. “

मैने एक ज़ोरदार थप्पड़ उसके गाल पे रसीद कर दिया वो चुप चाप जा के बेड पे लेट गई .. मुझे खुद पे और सबसे ज़्यादा अपनी अम्मी पे गुस्सा आ रहा था.. कि वो ऐसा क्यो कर रही थी . मैं तो अम्मी को बहुत नेक औरत का दर्जा देती थी मगर मेरा विश्वास आज छलनी हो गया था..

मेरी आँखों से ना जाने कब आँसू निकल आए और मेरे चेहरे पे बहने लगे थी .. मैने आज तक अपनी असमात (जवानी या इज़्ज़त ) का सौदा किसी के साथ नही किया.. मेरी कितनी ही सहेलियाँ अपनी चूत को दिखा कर मुझसे उँची जॉब पा चुकी थी मगर मेरे लिए मेरी इज़्ज़त ही सबसे बड़ी थी ..

मगर आज मेरी इज़्ज़त धूल गई थी क्या थी मेरी इज़्ज़त … आज मैं एक धंधे वाली की बेटी बन गई थी . उस रात मैं सो नही सकी .. सुबह को मेरी आँखें सूजी हुई थी .. और रोज़ी भी मुझसे नाराज़ थी ..

मैं जल्दी ही उठी और अपने लिए कॉफी बनाके कमरे मे आ गई .. शायद अम्मी को रोज़ी ने बता दिया था तभी अम्मी मेरे कमरे मे दाखिल हुई और मुझे देख के बोली “ नरगिस .. “

जी अम्मी .. ?? “ मैने उनकी तरफ़ देख के बोला .. मेरा मन नही कर रहा था कि मैं उनसे बात भी करूँ .. मगर मैं उन्हे दिखाना नही चाहती थी कि मैं नाराज़ हूँ .

रोज़ी बता रही थी की … तुमने कल रात कुच्छ देखा .. और उससे बहुत परेशान हू .. “ मैं खामोश रही .. अम्मी ने फिर बोलना शुरू किया .. “ देखो बेटी .. जब तुम्हारे अब्बू का इंतेकाल हो गया और .. बच्चों की ज़िम्मेदारी मेरे ऊपर आई तो मैं ..बहुत परेशन हो गई .और कई लोगो से मैने सहारे की कोशिश करी मगर अकेली औरत पे सिर्फ़ लोग बुरी नज़र डालते है .. हेल्प कोई नही करता .. मेरे साथ भी ये ही हुआ.. मैं ज़माने की मार को सह ना सकी और तुम्हारी परवरिश के आगे मुझे अपनी इज़्ज़त का सौदा करना पड़ा फिर जब एक बार मैने सौदा किया तो .. फिर तो ..

मेरी हिम्मत भी बढ़ गई और आमदनी का एक ज़रिया भी खुल गया.. मैं तुमको क्या बताऊ .. मैं कैसे कैसे लोगों के साथ सोती आई हूँ मगर आपने बच्चों पे ये साया मैं पड़ने नही देना चाहती थी.. तभी मैने आज तक शादी नही की और तुमको आज तक पता नही चला कि मैं क्या कर के पैसे कमाती हूँ.. तुम लोग कभी जान ही नही पाई .. ..

मैं हर कदम पे अपने जिस्म को बेचती रही … और तुम लोगों के लिए रोज़ी रोटी का इंतेज़ाम करती रही .. मगर तुमने कभी कुच्छ नही पूछा मगर आज तुम्हारी मा की हक़ीक़त तुम्हारे सामने आ गई है तो तुम मुझसे परेशान हो रही हो.. “ मैने कोई ग़लत काम नही किया है.. अब तुम मुझे बताओ.. क्या मेरी जगह तुम होती तो तुम क्या करती .. बच्चो का गला दबा देती या उनको कुएँ मे फैंक देती “

ये सब बातें आज मैने पहेली बार सुनी थी.. मेरी आँखों मे आँसू आ गये और मैं अम्मी से लिपट के खूब रोई .. फिर मैने उनको माफ़ कर दिया.. .. और हम दोनो .. आराम से बैठ गये और . बातें करने लगे .. तब अम्मी ने मुझे बताया कि वो किस किस के साथ सो चुकी हैं.. मैं अब जान गई थी कि अब कोई अच्छी फॅमिली का लड़का तो मुझसे शादी करेगा नही सो .. मुझे ऐसे ही मनी कमानी चाहिए.. ये ईज़ी मनी है ..

मैं इसे आसानी से कमा भी सकती हूँ और ज़्यादा मगज मारी करने की भी ज़रूरत नही है.. ये सोच के मैं आराम से थी .. तभी रोज़ी आ गई और अम्मी ने मुझे और रोज़ी को मिलवाया और .. हम दोनो बहने .. गले लग गयी .. मैं काफ़ी खुश थी .. फिर हम सबने खाना खाया और रात को अम्मी दुबारा.. नजीब अंकल के साथ चुदि .

उस दिन हम दोनो बहेनो ने देखा आज मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.. मैं सोचने लगी कि आम्मि की तो उमर भी हो रही है फिर भी कैसे मज़े ले लेती है और हमारी तो उमर है मज़े लेने की तो हम नही ले पा रहे है .. मैने रोज़ी से कहा “ रोज़ी मेरी बहेन .. ये अम्मी कितने मज़े लेती है.. क्या हमे ऐसा नही करना चाहिए.. “

बाजी .. आप ने ही मज़े नही लिए होंगे .. मैं तो ये काम बहुत पहले कर चुकी हूँ “ क्या.. “ ( मैं सबसे पीछे रहे गई थी . चुदाई के मामले मे .. “ ) मैं उसे हैरत से देख रही थी.. तब उसने मुझे उसके और युसुफ के बारे मे बताया … उसकी सहेली का भाई था.. जो उसे कई बार चोद चुका था.. मेरा ये सुन के बुरा हाल हो गया था ..

अब मुझे भी चुद जाना चाहिए था.. ये सोच के मैं मन ही मन मुस्कुराने लगी .. मगर मुझे शरम बहुत आ रही थी .. मैने अम्मी से कहा कि मैं भी अपना अकाउंट ( चूत मरवाने का ) खुलवाना चाहती हूँ तो अम्मी ज़ोर से हँसी और बोली ..

अगर तू कहे तो मैं तेरे लिए किसी रईस आदमी का इंतेज़ाम कर दूं जो खूब सारे पैसे देगा और मज़ा भी देगा.. मैने हां कर दी .. तब अम्मी ने एक शहेर के व्यापारी से बात की और मेरी चुदाई का दिन तय हो गया .. अगला सॅटर्डे मेरी चुदाई का दिन तय हो गया था..

मैं आप लोगों को बता दूं मैं एक नॉर्मल लड़की हूँ मेरी हाइट 5’5” है और मेरा फिग साइज़ .. 34”27”32” है.. मेरी चुचियाँ कुच्छ ज़्यादा ही बड़ी है.. जिनको देख के मुझे खुद शरम आती है.. मुझसे ज़्यादा रोज़ी मुझे ले के खुश थी उसने मुझे तय्यार किया और पूरे हफ्ते वो मुझे ब्लू फिल्म की सीडी दिखाती रही .. मैने कई तरह से चुद्ना देख लिया था.. और ये ही मुझे उस व्यापारी के साथ करना था.. ..

मैं अपनी तरंग मे डूबी शाम को सोई अगले दिन सॅटर्डे था.. मैं तय्यार होके बताई गई जगह पे पहुँच गई .. वो एक फार्म हाउस था.. वहाँ मुझे एक गार्ड अंदर ले गया .. मैं वहाँ एक लोन मे पड़ी कुर्सी पे बैठ गई . बहुत बड़ा बंगला अंदर बना था.. नौकर चाकर दिखाई नही पड़ रहे थे शायड छुट्टी पे होंगे..

थोड़ी देर मे एक आदमी के आने का एहसास मुझे हुआ मैने मूड के देखा तो एक बड़ी सी उमर का एक आदमी मेरे सामने खड़ा था.. उसकी उमर .. लगभग 52-53 साल की रही होगी .. मोटा सेठ था.. उसने मुझे भूके भेड़िए की नज़र से देखा मैं अंदर तक काँप गई .. ये .. क्या.. अम्मी ने मेरे साथ बहुत ग़लत किया . ऐसा आदमी.. ये तो मेरे बाप से भी बड़ी उमर का है.. ये सोच के मैं गुस्सा सी हो रही थी . तभी वो मेरे पास आ गया और बोला . “

हेलो.. मिस नरगिस .. मैं .. राज .. सॅंको इंडस्ट्रीस का मलिक हूँ .. आप को देख के मुझे बहुत खुशी हुई है… “ “ जी. .. म्‍म्म मुझे भी.. “ … “ आप घबराईय नही. .. मैं लड़कियों का कदरदान हूँ आप को यहाँ किसी किसम की दिक्कत नही होगी .. “ आप मेरे साथ आइए.. “ मैं उनके साथ चल दी ..

अंदर बहुत बड़ा हॉल कमरा था.. उसने कमरे के छोर पे सोफे पे बैठने को कहा मैं बैठ गई फिर उसने मुझे एक पेग बना के दिया.. मैने कसमसा के पीलिया. .. बड़ा आजीब सा स्वाद था… फिर वो मेरे सामने मुझसे आजीब आजीब सी बातें करते हुए पीता रहा फिर उसने मुझे कमरे मे चलने को कहा मैं उसके साथ साथ चल दी..

मैं उस दिन ब्लॅक ड्रेस पहेने हुए थी .. ब्लॅक जम्पर और सलवार .. उसने मुझे अपनी बीवी का कबाड़ दिखाया और बोला .. इसमे से कुच्छ पहेन लो.. ये सब टाइट फिट है .. मैने वैसे ही किया उसका दिया हुआ ड्रेस मैने पहेन लिया क्यो कि सेक्सी ड्रेस मेरे पास तो थे ही नही सो ..

उसे मैं अच्छी नही लग रही हूँगी जो उसने ड्रेस दिए उसने मेरे शरीर का एक एक भाग देखाई पड़ने लगा..वो ऑफ वाइट ड्रेस थी .. मेरी चुचियाँ उसने खूब उभर के आई थी.. और मेरे चूतड़ कस गये थे ये एक मिडी विथ ऊपर थी .. .. उसके नीचे स्लॅक्स पहेना जाता होगा..

मगर उसने मुझे स्लॅक्स नही दिया था.. मेरी गोरी गोरी टाँगे .. नीचे नज़र आने लगी थी .. मिडी .. मेरी घुटनो के उपर ही ख़तम हो गया था… और मेरी नरम नरम टाँगे दिखने लगी थी.. तभी .. वो मेरी चुचियों को देख के बोला.. .. “ आरे नरगिस तुम्हारी संतरे तो बहुत रसीले है .. मुझे चूसने दोगि .. “

मैं ऐसी बातें करने की आदि नही थी मुझे शरम आ रही थी .. लेकिन मैं उसे सेक्स भी करना चाह रही थी .. मैने मुस्कुरा के उसको देखा वो मुस्कुराता हुआ ..मेरे करीब आया और मेरी दाईं चुचि को पकड़ के ऊपर से ही दबाने लगा.. मेरा सारा शरीर मचलने लगा.. मैं तड़प सी गई थी क्यो कि आज मेरी चुचियों को किसी मर्द का पहेली बार हाथ लगा था..

मेरा दिल ज़ोरों से धड़कने लगा था.. तभी उसने मेरी कमर मे हाथ डालके मुझे अपनी ओर खींच लिया.. मैं उसे चिपक गई.. मेरा मेरा चेहरा उसके चेहरे के पास आ गया था.. उसकी गरम सांसो को मैं अपने चेहरे पे महसूस कर सकती थी.. तभी उसने अपने एक हाथ को मेरे चुतड़ों पे ले जा के मेरे एक तरफ के चूतड़ को दबाने लगा.. और मिडी उठा के मेरी पैंटी मे अपना हाथ पीछे से डाल दिया.

मैं उसे चिपक गई .. वो मेरी बाप की उमर का ज़रूर था मगर उसका शरीर खूब गाथा हुआ था.. मैं उसे किस करने लगी मैं मचल रही थी .. वो मुझे अपनी आगोश मे लिए चूम रहा था.. मैं भी उसका पूरा साथ दे रही थी.. लेकिन तभी मुझे दर्द महसूस हुआ .. उसने अपनी एक उंगली मारी गान्ड मे घुसेड दी थी.. ईईईईईईई आआआआआः

ये क्या कर रहे हू.. मैं उसे चिल्ला के बोली.. “ अरे रानी ..ये तुम्हारी गांद तो बड़ी मस्त नज़र आ रही है.. मैने उसे कहा .. ये मुझे अच्छा नही लग रहा है.. मैं ये सब तो पहले ही पॉर्न मूवी मे देख चुकी थी.. मगर मुझे उसको ये दिखाना था. कि मैं एक कुवारि शर्मीली लड़की हूँ उसने मेरे साथ सेक्स करने के मेरी अम्मी को 100000रुपये दिए थे और मुझे उसके साथ अब पूरे 3दिन गुज़ारने थे ..

यानी सारी रातें और सारे दिन मुझे सिर्फ़ उसके साथ चुद्ना था.. और कुच्छ नही .. अब वो मेरी ऊपर बढ़ा और मेरी ड्रेस को खोलने लगा.. मैने बिना .. विरोध के अपने कपड़े उतार लेने दिए.. और मैं अब बिल्कुल नंगी हो गई थी .. नंगी होने की कला मुझे रोज़ी ने खूब सिखा दी थी.. .

मैं नंगी होने के बाद उसके कपड़े खोलने लगी और थोड़ी देर मे ही मैने उसको भी नंगा कर दिया.. और हम दोनो.. अब मज़े से एक दूसरे के जिस्मो से खेलने लगे .. उसके सीने पे लगभग सारे बाल सफेद हो गये थे .. मगर .. उसका सीना बहुत चौड़ा था.. मैं उसके सीने पे हाथ फेर के उसे किस करने लगी उसने मुझे रोका और मेरी चुचियों को अपने हाथो मे ले के दबाने लगा..

क्रमशः……………………..

NARGIS

Mera Naam Nargis hai .. Mai ek muslim parivar ki beti hoon mere ghar mai meri ek choti bahen hai aur ammi hai .. mere abbu ka entekal kuchh salon pahle ho gaya tha.. unke jane ke baad meri ammi ke bhaiyon ne bhi humpe se hanth kinch liya ab sare pariwar ki jimmedari mere oopar aa gai thi ..

Mai karti bhi kya padai khatam karke ek achhi se naukri karna chahti thi.. mai dusri ladkiyon ki tarah kabhi apni life ji hi nahi paai har kadam pe samjhauta hi karti rahi … shayd ye hi mera nasieb ban gaya tha.. ab to aadat se ho gai thi..

Mera routine bilkul bana hua tha.. subhah uthna aur pahle tayyar ho ke tuition padane jaati aur vahi se office nikal jaati … fir shaam ko jab thak har ke ghar aati to meri choti bahe ko padati .. fir amma ke saath baith ke baaten karti aur fir agle din ki tayyari raat mai kar ke so jaati .. mujhe late hone ka shauk nahi tha so mai apne kapde raat mai hi tayyar kar ke rakh leti thi..
Magar mujhe vo din aaj bhi yaad rahe ga.. .. vo meri zindagi ka sabse manhoos din tha.. vo din tha.. Saturday ka din agle din chhutti thi mai rozi ko pada ke laet gai thi.. kafi thaki hui thi magar jag rahithi ki kal to Sunday hai aaram se uthna tha.. to koi tention nahi thi ..
Mai aur meri bahen rozi hum ek kamre mai laet te hai .. aur ammi dusre karmre mai laeti hai. Vo kamra mere kamre se thodi doori pe hai.. uske saath hi kitchen laga hua hai.. aur beech mai aangan hai .. mujhe thodi pyas lagi thi mai uthi ke chalo paani pee lon fir aa ke letungi ..
Mai jaise hi ammi ke kamre ke paas se guzri mujhe kuchh baaten karne ki aawaz aai .. mere pair ruk gay mai chawonk gai ki ye ammi kisse baaten kar rahi hai.. mujhe laga ki kahin koi bhai to vapis nahi aa gaya .. jisse dil ke haal bayan ho rahe hoon ye soch ke mai ammi ke kamre ki taraf badi hi ti ki mere pair ruk gay .. mujhe aawaz jaani pahechani lagi ..
Are.. Meere Khuda.. ye to .. Najeeb Uncle ki thi Najib uncle mere abbu ke dost hai.. aur aksar ghar aate rahete the .. ammi ko vo bahen maante the.. magar ye aawazen mujhe pareshaan kar gai thi .. maine dhire se ammi ke kamre ki khidki se jhanke ke dekha ..to andar ka nazara hi kuchh aur tha… meri .. ammi …. (mai kahna nahi chahti magar kah rahi hoon ) ..
Puri nangi leti thi .. aur mere Najeeb uncle unke oopar hi lade huy the ye dekh ke mai sharam se paani paani ho gai.. mai karun kya.. mai ulte paon vapis aa gai.. aur apne palang pe laet gai.. tabhi mujhe fir se pyas mahsuus hui kyo ki paani to mai peena hi bhool gai thi.. mai vapis kitchen mai gai aur bina aawaz kiy maine paani piya aur ..
Vapis jaane lagi .. to mera dil bola .. yaar nargis ammi kar kya rahi hain ye to dekh le .. ho sakta hai ki tune jo dekha aur jo samjha vo alag alag ho .. .. maine bhi ye hi socha .. tabhi mujhe ek baat sujhi .. main fauran kitchen ke raushandaan pe chad gai aur andar dekhne lagi ..
Andar ammi bilkul nangi bed pe leti thi aur Najib uncle unke oopar lade hue the unka .. .. mota sa saaman .. kala kaala .. meri ammi ki… peshab ki jagah pet ha.. mujhe aaj ye malum hai ki unko kya kahete hai.. .. mera kahene ka matlab hai.. ki uncle ka land meri ammi ki chut mai dhasa hua tha… aur ammi apni tangon ko failay ..
Uncle se lipti padi hui thi .. aur uncle unki chudaai kar rahe the.. Yah KHUDA ye mai kya dekh rahi hoon … ammi to enko apna bhai kahti thi .. fir ..ye sab kya hai.. magar ab mujhe dekhne mai maza aa raha tha.. Najeeb uncle kas kas ke dhakke maar rahe the aur ammi uchhal uchhal ke unke dhakke apni kamar aur chut pe rok rahi thi ..
Facha fach ki aawazen pure kamre mai gounj rahi thi .. ammi bade maze ke saath apni chut ko chudwa rahi thi.. mai dekh ke hairan thi.. mai utarne ko hui to dekha mere peehe meri choti bahen rozi khadi thi.. vo mujhe dek ke muskura di.. mai gussa hui .aur chup chaap utar ke .. kamre mai aa gai .. peeche peeeche vo bhi kamre mai aa gai .. .. “ kya hua baaji .. ?? “
Kuchh nahi .. tu kya kar rahi thi vahan pe ..Are baaji ye scene to mai kai baar dekh chuki hoon tumko hi khabar nahi hai .. ammi to kai logo ke saath ye karwati hai..kya .. to pagal to nahi ho gai hai Nahi baaji mai sach kah rahi hoon jab tum ghar pe nahi hoti to ammi apne yaaron ko bula ke ye sab hi to karti hai ..varna es ghar ka kharcha kaisae chale.. “
Maine ek zordar thappad uske gaal pe raseed kar diya vo chup chaap jaa ke bed pe laet gai .. mujhe khud pe aur sabse jada apni ammi pe ghusaa aa raha tha.. ki vo aisa kyo kar rahi thi . mai to ammi ko bahut naek aurat ka darja deti thi magar mera vishwas aaj chaalni ho gaya tha..
Meri aankhon se naa jaane kab aansun nikal aay aur mere chehre pe bahene lage thi .. maine aaj tak apni asmat (jawani ya izzat ) ka sauda kisi ke saath nahi kiya.. meri kitni hi saheliyan apni chut ko dek ker mujhse unchi job pa chuki thi magar mere liye meri izzat hi sabse badi thi ..
Magar aaj meri izzat dhul gai thi kya thi meri izzat … aaj mai ek dhandhe wali ki beti ban gai thi . us raat mai so nahi saki .. subah ko meri aankhen suoji hui thi .. aur Rozi bhi mujhse naraz thi ..
Mai jaldi hi uthi aur apne liye coffee banake kamre mai aa gai .. shayd ammi ko rozi ne bata diya tha tabhi ammi mere kamre mai dakhil hui aur mujhe dek ke boli “ Nargis .. “
Ji ammi .. ?? “ maine unki tarf dekh ke bola .. mera man nahi kar raha tha ki mai unse baat bhi karun .. magar mai unhe dikhana nahi chahti thi ki mai naraz hoon .
Rozi bata rahi thi ki … tumne kal raat kuchh dekha .. aur use bahut pareshan hoo .. “ mai khamosh rahi .. ammi ne fir bolna shuru kia .. “ Dekho beti .. jab tumhare abbu ka intekal ho gaya uar .. bachchon ki zimmedari mere oopar aai to mai ..
Bahut pareshan ho gai .aur kai logo se maine sahare ki koshish kari magar akeli aurat pe sirf log buri nazar daalte hai .. help koi nahi karta .. mere saath bhi ye hi hua.. mai zamane ki maar ko sah na saki aur tumhari parwarish ke aage mujhe apni izzat ka sauda karna pada fir jab ek baar maine sauda kiya to .. fir to ..
Meri himmat bhi bad gai aur aamdani ka ek zariya bhi khul gaya.. mai tumko kya bataon .. mai kaise kaise logon ke saath soti aai hoon magar aapne bachchon pe ye saaya mai padne nahi dena chahti thi.. tabhi maine aaj tak shaadi nahi ki aur tumko aaj tak pata nahi chala ki mai kya kar ke paise kamati hoon.. tum log kabhi jaan hi nahi paai .. ..
Mai har kadam pe apne jism ko bechti rahi … aur tum logon ke liy rozi roti ka intezam karti rahi .. magar tumne kabhi kuchh nahi puchaa magar aaj tumhari maa ki haqiqat tumhare samne aa gai hai to tum mujhse pareshan ho rahi ho.. “ maine koi galat kaam nahi kiya hai.. ab tum mujhe batao.. kya meri jagah tum hoti to tum kya karti .. bachcho ka gala daba deti ya unko kuyen mai faink deti “
Ye sab baaten aaj maine paheli baar suni thi.. meri aankhon mai aanson aa gay aur mai ammi se lipat ke khub roi .. fir maine unko maaf kar diya.. .. aur hum dono .. aaram se baith gaye aur . baaten karne lage .. tab ammi ne mujhe bataya ki vo kis kis ke saath so chuki hain.. main ab jaan gai ti ki ab koi achhi family ka ladka to mujhse shaadi karega nahi so .. mujhe aise hi money kamani chahiy.. ye esye mani hai ..
Mai ise aasani se kama bhi sakti hoon aur zyaa magaj maari karne ki bhi zarurat nahi hai.. ye soch ke mai aaram se thi .. tabhi Rozi aa gai aur ammi ne mujhe aur Rozi ko milwaya aur .. hum dono bahene .. gale lag gay .. mai kafi khush thi .. fir hum sabne khana khaya aur raat ko ammi dubara.. Najeeb uncle ke saath chudi .
Us din hum dono baheno ne dekha aaj mujhe bahut mazaa aa rha tha.. mai sochne lagi ki aami ki to umar bhi ho rahi hai fir bhi kaise maze le leti hai aur humari to umar hai maze lene ki to hum nahi le paa rahe hai .. maine Rozi se kaha “ Rozi meri bahen .. ye ammi kitne maze leti hai.. kya hame aisa nahi karna chahiy.. “
Baaji .. aap ne hi maze nahi liy honge .. mai to ye kaam bahut pahle kar chuki hoon “ kya.. “ ( mai sabse peeche rahe gai thi . chudaai ke mamle mai .. “ ) mai use hairat se dekh rahi thi.. tab usne mujhe auske aur yusuf ke bare mai bataya … uski saheli ka bhai tha.. jo use kai baar chod chuka tha.. mera ye sun ke bura haal ho gaya tha ..
Ab mujhe bhi chud jaanaa chahiye tha.. ye soch ke mai man hi man muskurane lagi .. magar mujhe sharam bahut aa rahi thi .. maine ammi se kaha ki mai bhi apna account ( chut marwane ka ) khulwana chahti hoon to ammi zor se hansi aur boli ..
Agar tu kahe to mai tere liy kisi rais aadmi ka intezam kar doon jo khub saare paise dega aur maza bhi dega.. maine haann kar di .. tab ammi ne ek shaher ke vyapari se baat ki aur meri chudaai ka din tay ho gaya .. agla Saturday meri chudaai ka din tay ho gaya tha..
Mai aap logon ko bata doon mai ek normal ladki hoon meri hight 5’5” hai aur mera fig size .. 34”27”32” hai.. meri chuchiyan kuchh zyada hi badi hai.. jinko dekh ke mujhe khud sharam aati hai.. mujhse zyada Rozi mujhe le ke khush thi usne mujhe tayyar kiya aur pure hafte vo mujhe blue film ki CD dikhati rahi .. maine kai tarah se chudna dekh liya tha.. aur ye hi mujhe us vyapari ke saath karna tha.. ..
Mai apni tarang mai dubi shaam ko soi agale din Saturday tha.. mai tayyar hoke batai gai jagah pe pahunch gai .. vo ek farm house tha.. mai mujhe ek guard andar le gaya .. mai vahan ek loan mai padi kursi pe baith gai . bahut bada bangle andar bana tha.. naukar chakar dikhai nahi pad rahe the shaayd chhutti pe hoonge..
Thodi der mai ek aadmi ke aane ka ehsaas mujhe hua maine mud ke dekha to ek badi si umar ka ek aadmi mere saaamne khada tha.. uski umar .. lagbhag 52-53 saal ki rahi hoogi .. mota saeth tha.. usne mujhe bhuke bhediy ki nazar se dekha mai andar tak kaanp gai .. ye .. kya.. ammi ne mere saaath bahut galat kiya . aisa aadmi.. ye to mere baap se bhi badi umar ka hai.. ye soch ke mai gussa si ho rahi thi . tabhi vo mere paas aa gya aur bola . “
Hello.. Miss Nargis .. Mai .. Raj .. Sanko Industries ka malik hoon .. aap ko dekh ke mujhe bahut khushi hui hai… “ “ Ji. .. Mmm mujhe bhi.. “ … “ aap ghabraiy nahi. .. mai ladkiyon ka kadardaan hoon aap ko yahana kisi kisam ki dikkat nahi hoogi .. “ aap mere saath aaiye.. “ mai unke saath chal di ..
Andar bahut bada hall kamra tha.. usne kamre ke chhor pe sofe pe baithne ko kaha mai baith gai fir usne mujhe ek peg bana ke diya.. maine kasmasa ke peelia. .. bada aajib sa swad tha… fir vo mere saamne mujhse aajib aajib se baaten karte huy peeta rhaa fir usne mujhe kamre mai chalne ko kaha mai uske saath saath chal di..
Mai us din black dress pahene huy thi .. black jampar aur salwar .. usne mujhe apni biwi ka kabad dikhaya aur bola .. isme se kuchh pahen lo.. ye sab tight fit hai .. maine vaise hi kiya uska diya hua dress maine pahen liya kyo ki sexy dress mere paas to the hi nahi so ..
Use mai achhi nahi lag rahi hoongi jo usne dress die usne mere shareir ka eke k bhag dekhai padne laga..vo off white dress thi .. meri chuchiyan usne khub ubhar ke aai thi.. aur mere chutad kas gay the ye ek midi with oopar thi .. .. uske nieche slacks pahena jaat hoga..
Magar usne mujhe slacks nahi diya tha.. meri gori gori tange .. neeche nazar aane lagi thi .. midi .. meri ghutno ke upr hi khatam ho gaya tha… aur meri naram naram tangent dikhne lagi thi.. tabhi .. vo meri chuchiyon ko dekh ke bola.. .. “ aare Nargis tumhari santare to bahut rasiele hai .. maujhe choosne dogi .. “
Mai aisi baaten karne ki aadi nahi thi mujhe sharam aa rahi thi .. lakin mai use sex bhi karna chah rahi thi .. maine muskura ke usko dekha vo muskurata hua ..mere kareeb aaya aur meri dayin chuchi ko pakad ke oopar se hi dabane laga.. mera sara sharir machalne laga.. mai tadap si gai thi kyo ki aaj meri chuchiyon ko kisi mard ke paheli baar hanth laga tha..
Mera dil zoron se dhadakne laga tha.. tabhi usne meri kamar mai hanth dalke mujhe apni oor khinch liya.. mai use chipak gai.. mera mera chehra uske chehre ke paas aa gay tha.. uski garam saanso ko mai apne chehre pe mahsoos kar sakti thi.. tabhi usne apne ek hanth ko mere chutdon pe le ja ke mere ek taraf ke chutad ko dabane laga.. aur midi utha ke meri panty mai apna hanth peeche se dal diya.
Mai use chipak gai .. vo meri baap ki umar ka zarur tha magar uska sharir khub gatha hua tha.. mai use kiss karne lagi mai machal rahi thi .. vo mujhe apni aagosh mai liye choom raha tha.. mai bhi uska pura saath de rahi thi.. lakin tabhi mujhe dard mahsuos hua .. usne apni ek ungli mari gaand mai ghused di thi.. iiiiiiii aaaaaaaaah
Ye kya kar rahe hoo.. mai use chilla ke boli.. “ Are raani ..ye tumhari gaand to badi mast nazar aa rahi hai.. maine use kaha .. Ye mujhe achha nahi lag raha hai.. mai ye sab to pahle hi porn movie mai dekh chuki thi.. magar mujhe usko ye dikhana tha. Ki mai ek kuwanri sharmili ladki hoon usne mere saath sex karne ke meri ammi ko 100000Rs diy the aur mujhe uske saath ab pure 3din guzarne the ..
Yaani saari raaten aur saare din mujhe sirf uske saath chudna tha.. aur kuchh nahi .. ab vo meri oopar bada aur meri dress ko kholne laga.. maine bina .. virodh ke apne kapde utarlene diy.. aur mai ab bilkul nangi ho gai thi .. nangi hone ki kala mujhe rozi ne khub sikha di thi.. .
Mai nangi hone ke baad uske kapde kholne lagi aur thodi der mai hi maine usko bhi nanga kar diya.. aur hum dono.. ab maze se ek dusre ke jismo se khelne lage .. uske siene pe lagbhag sare baal safed ho gay the .. magar .. uska seena bahut chauda tha.. mai uske seene pe hanth fair ke use kiss karne lagi usne mujhe roka aur meri chuchiyon ko apne haatho mai le ke dabane laga..

Kramashah……………………..


rajaarkey
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Re: Hindi Sex Stories By raj sharma

Unread post by rajaarkey » 15 Dec 2014 04:31

नरगिस--2

गतान्क से आगे……………..

मुझे पूरी पॉर्न मूवी ध्यान आने लगी, मुझे लगा मेरी ही पॉर्न मूवी बन रही हो.. राज अब तो एक दम ऐसे मुझे चूम रहा था.. कि उसको देख के मुझे मूवी के कई कॅरक्टर ध्यान आने लगे थे.. मैं उसका पूरा सहयोग कर रही थी तभी पास पड़े बेड पे उसने मुझे लिटाया और मेरे ऊपर टूट पड़ा .. मेरी चुचियों का बुरा हाल कर दिया था ..

वो उनको चूस रहा था. और दबा दबा के वह कुच्छ पीने की कोशिश कर रहा था.. मगर मेरी चुचियो से कुच्छ निकल नही रहा था.. .. वो उनको दबा दबा के चूस्ता ही जा रहा था फिर राज मेरे पेट को चूमते हुए मेरी टाँगो के बीच पहुँच गया .. वो एक शातिर आदमी था.. वो मेरी भावनाओ को भड़काने का पूरा तरीका जानता था..

उसने अपनी जीभ मेरी .. चूत पे रख दी.. मैने आँखे बंद कर ली . मेरा पूरा बदन एक तरंग मे मस्त हो रहा था.. पूरा बदन लहरा ने लगा था.. तभी मुझे लगा कि उसकी जीभ मेरी चूत मे अंदर जाने लगी थी .. वो उसको भी चूसने लगा.. मैं बुरी तरह से पागल हो गई ..

मुझे लग रहा था. कि मेरी चूत आग मे फँस गई हो मैं बुरी तरह से निढाल हो रही थी .. उसका एक हाथ मेरी चुचि पे था.. मैं अपनी चुचियों को खुद दबाने लगी थी उसे मुझे कुच्छ आराम मिल रहा था.. मैं बल खा रही थी और वो मेरी चूत को मज़े से चूस रहा था.. थोड़ी ही देर मे मेरी चूत पानी छ्चोड़ गई…

फिर उसने मुझे उठाया और मेरे मुँह मे अपना लंड दे दिया.. या खुदा कितना मोटा लंड था.. बड़ा भी मगर उसे देख के मुझे जाने क्या हुआ मैने उसे साथ से मुँह मे ले लिया और चूसने लगी .. थोड़ी ही देर मे वो खूब चिकना और मोटा तगड़ा सा तय्यार हो गया .. अब मैं समझ गई कि अब मेरी चुदाई की इच्छा पूरी हो जायगी .. तब

राज ने मुझे .. चित लिटाया और .. मेरी चूत को खोल के अपने लंड को मेरी चूत के मूँह पे रख दिया मैने अपनी कमर को कुच्छ उठा दिया जिससे लंड जाने मे कुच्छ परेशानी ना हो तभी वो मेरे ऊपर कुच्छ झुका और मैं कुच्छ समझ पाती तभी उसने मेरे कंधों को पकड़ के एक कस के धक्का मारा मेरी टाँगे पूरी फैली थी .. इस लिए लंड को जगह बनाने मे कोई दिक्कत नही हुई मगर मेरी मा चुद गई.. मैं पूरी कस के चिल्ला दी.. मेरा पूरा बदन .. तड़प गया मुझे लगा कि मेरी चूत पूरी फट गई हो.

उसका पूरा लंड एक बार मे मेरी चूत की दीवारों पे दबाव डालता हुआ … मेरी चूत मे जा के धँस गया था.. वो हिल भी नही पा रह आ था .. मैं तड़प के उसे लिपट गई .. तब उसने मेरी चिन को अपने मुँह मे लिया और चूसने लगा .. और दोनो हाथो से मेरी चुचियों को दबाने लगा.. फिर तभी मुझे एहसास हुआ कि उसका लंड अब आगे पीछे होने लगा है ..

उसका लंड मेरी चूत की दीवारों पे रगड़ डालता हुआ मेरी चूत मे अंदर बाहर जाने आने लगा था.. तब मुझे धीमे धीमे मज़ा आने लगा.. और मैं उसका साथ देने लगी तब उसकी रफ़्तार तेज़ होने लगी .. और मैं कमर उचका उचका के उसका साथ देने लगी अब मैं मस्त हो गई थी .. मुझे चुदने मे बहुत मज़ा आ रहा था…

वो काफ़ी देर मेरी चुदाई करता रहा.. उसकी टक्कारें मेरे हौसले को और बढ़ा रही थी.. कभी वो मेरी गर्दन चूमता कभी मेरे होंठो पे अपने होंठो को रख के चूमता और धक्के पे धक्के दिए जा रहा था.. अब उसके धक्के मेरी चूत की जड़ पे लग रहे थे.. और मैं मस्ती मे चुदने लगी थी… उसका लंड मुझे बहुत अच्छा लगने लगा था..

मैं पूरी टाँगो को फैला चुकी थी .. वो खूब मज़े से चुदाई करने लगा.. जब उसका लंड मेरी चूत मे अंदर जाता मैं उचक जाती और जब बाहर निकलता तो अपने स्थान पे वापिस आजाती .. ये करते करते उसके धक्के मेरी चूत पे तेज़ हो गये और थोड़ी देर मे एक घायल शेर की तरह कुच्छ कस के धक्के मार मार के वो मेरे ऊपर ही गिर गया उसके लंड ने शायद मेरी चूत के अंदर कुच्छ छ्चोड़ दिया था..

और वो गरम गरम द्रव मेरी चूत से बह कर बाहर आने लगा था.. उसका लंड आभी भी मेरी चूत मे ही घुसा हुआ था.. मैं वैसी ही पड़ी रही वो भी मेरी चुचियों पे अपना सिर रख के लेटा रहा और थोड़ी देर मे उसने अपना लंड मेरी चूत से निकाल लिया.. उसका लंड अब लंड नही रह गया था.. वो मुरझा के लोलो बन गया था..

मुझे अपने पहली चुदाई मे बहुत मज़ा आया था .. मैने उठ के देखा .. बेड पे कुछ खून के दाग मौजूद थे मैं समझ गई कि मेरी झिल्ली फट गई थी .. आज मैं एक कुँवारी कली से फूल बन गई थी .. राज थोड़ी देर वैसे ही लेटा रहा फिर मुझे प्यार करने लगा मैं उसके बालों मे उंगलिया डाल के सहलाती रही और .. प्यार करती रही .. थोड़ी ही देर मे वो फिर गरम हो गया और बोला .. “ जान और कुच्छ करना चाहोगी .. “

मैने शर्मा के हां कर दी .. वो खुश हो गया और .. मेरी चुचियों को फिर से चूमने लगा .. अब मेरी चुचिया दर्द कर रही थी .. पूरी लाल हो रही थी क्यो कि राज ने उनको खूब कस कस के चूसा था.. और दबाया भी था.. तभी वो मेरे सीने पे आके बोला लो मेरे इस शेर को जगा लो उसने अपना लंड मेरे मुँह के पास कर दिया मैने अपने हाथो से उसके लंड को पकड़ा उस पे उसका माल लगा हुआ था.. यानी वीर्य ..

मैने उसे मुँह मे लिया आजीब सा स्वाद था वो .. मगर मुझे अच्छा लगा था.. और मैं मज़े से उसे चूसने लगी थोड़ी ही देर मे उसका लंड पूरी तरह खड़ा हो गया.. और मेरी लार से चिकना और मोटा लगने लगा था.. उसने मेरे सिर पे हाथ रख के मेरे मुँह को अपने लंड पे दबाया उसका लंड मेरी गर्दन तक चला गया था.. मेरी साँस सी रुकने लगी मैने खों खों करते हुए झटके से उसके लंड को मुँह से निकाला ..

मेरी आँखों से आँसू निकलने लगे थे.. उसका लंड बहुत मोटा था जो मेरी गर्दन मे अटक गया था.. .. थोड़ी देर के लिए.. मेरी पूरी लार उसके लंड को भिगो गई थी.. मैं काफ़ी संतुष्ट थी वो भी मज़े से मेरे साथ सेक्स का मज़ा लूट रहा था.. तब उसने मुझे पलट के कुतिया की तरह खड़े होने को कहा मैं अपनी कोहनी और घुटनो के बल खड़ी हो गई .. मैं चौपाए की तरह खड़ी थी.. वो मेरे पीछे पहुँच गया

और मेरे चुतड़ों को अपने हाथो से फैला के मेरी गांद देखने लगा.. मैं समझ गई कि आब ये मेरी गांद मारेगा.. .. मैं खुश हो रही थी.. कि .. आज मैं सारे तरीके सीख जाउन्गि .. तभी उसने बेड के पास से एक तेल की शीशी उठाई और मेरी गांद पे कुच्छ बूंदे डाली .. और अपनी एक उंगली से उसने वो तेल मेरी गांद के द्वार पे फैला दिया और उंगली मेरी गांद मे घुसा के उसकी दीवारो को भी चिकना कर दिया ..

फिर शायद उसने अपने लंड पे भी तेल लगाया और फिर मेरी गांद को अपने हाथो से दौनो चुतड़ों की सहयता से खोला और अपना लंड मेरी गांद पे रख के अंदर पुश करने लगा .. मुझे लगा कि मेरी गांद फट के छितरे छितरे हो जायगी .. बहुत कस के पेन हो रहा था.. मगर मैं उससे गांद मरवाने मे इतनी मस्त हो रही थी कि मुझे आज फटने चिरने का कोई गम नही था .. आहह..हाइईईईईईईईईईई कस के एक धक्का मेरी गांद पे पड़ा अओर मेरी साँस ही रुक गई ..

पूरा लंड मेरी गांद मे धंसता चला गया आअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह मुझसे सहेन नही हो रहा था वो दर्द .. तभी उसने अपने दोनो हाथो से मेरी कमर पकड़ के अपने लंड को आगे पीछे करना शुरू कर दिया मैं कुतिया की तरह ही झुकी रही और उसका लंड मेरी गांद मे आगे पीछे जाने आने लगा.. अब मेरा दर्द कम होने लगा. .

और थोड़ा .. मज़ा भी आने लगा.. राज मेरी कमर को कस के पकड़ के मेरी गांद मारने लगा था.. और कस कस के उसके धाक्के मेरी गांद पे पड़ रहे थे .. मैं मस्ती के साथ अपनी गांद मरवा रही थी.. और थोड़ी ही देर मे वो .. मेरी गांद मे ही झाड़ गया ..

और ..फिर पास मे ही कटे पेड़ की तरह ढह गया.. … हम दोनो को बहुत मज़ा आया था.. मैं काफ़ी खुश थी और अम्मी को दुआएँ दे रही थी .. . उन 3 दिनो मे ना जाने राज ने मुझे कितनी बार चोदा.. मगर ये ज़रूर जानती हूँ कि पहली चुदाई मुझे बहुत मज़ा दे गई थी .. अब मेरी चूत पूरे शहेर के लिए खुल गई थी .. .. उस रात राज ने मुझे 6-7 बार चोदा और 4 बार गांद मारी थी..

फिर अगले दिनो तो उसने मुझे बेड चोदने नही दिया.. मैं 3दिन और 4रातें उसके पास थी.. वो मेरी चूत का खूब मज़ा उठाता रहा.. ऐसी चुदाई मैने आज तक दुबारा नही करवाई … और उस दिन के बाद से राज ने मुझे कभी नही बुलाया.. उसे कुँवारी लड़कियों का ही शौक है.. और मैं अब पुरानी हो चुकी थी.. .. लेकिन राज मेरा पहला चोद्ने वाला है .. मैं उसे कभी नही भूल सकती

समाप्त

NARGIS--2

gataank se aage……………..
Mujhe puri porn movie dhyaan aane lagi, laga meri hi porn movie ban rahi ho.. Raj ab to ek dam aise mujhe choom raha tha.. ki usko dekh ke mujhe movie ke kai character dhayan aane lage the.. mai uska pura sahyog kar rahi thi tabhi paas pade bed pe usne mujhe litaya aur mere oopar toot pada .. meri chuchiyon ka bura haal kar diya tha ..
Vo unko choos raha tha. Aur daba daba ke vah kuchh peene ki koshish kar raha tha.. magar meri chuchiyno se kuchh nikal nahi raha tha.. .. vo unko daba daba ke choosta hi jaa rha tha fir usne mere paet ko choomte hue meri tango ke beech pahunch gaya .. vo ek shatir aadmei tha.. vo meri bhawnao ko bhadkane ka pura tarika jaanta tha..
Usne apni jibh meri .. chut pe rakh di.. maine aankhe band kar li . mera pura badan ek tarang mai mast ho raha tha.. puar badan laher ne laga tha.. tabhi mujhe laga ki uski jibh meri chut mai andar jaane lagi thi .. vo usko bhi chusne laga.. mai buri tarah se paagal ho gai ..
Mujhe lag raha tha. Ki meri chut aag mai fans gai hoo mai buri tarah se nidhal ho rahi thi .. uska ek hanath meri chuchi pe tha.. mai apni chuchiyon ko khud dabane lagi thi use mujhe kuchh aaram mil raha tha.. mai bal kha rahi thi aur vo meri chut ko maze se choos raha tha.. thodi hi der mai meri chut paani chhod gai…
Fir usne mujhe uthaya aur mere munhe mai apna land de diya.. Yaa KHUDA kitan mota land tha.. bada bhi magar use dekh ke mujhe jaane kya hua maine use sat se munh mai le liya aur choosne lagi .. thodi hi der mai vo khub chikna aur mota tagda sa tayyar ho gaya .. ab mai samajh gai ki aab meri chudaai ki ichha puri ho jaygi .. tab
Raj ne mujhe .. chit litaya aur .. meri chut ko khol ke apne land ko meri chut ke munhh pe rakh diya maine apni kamar ko kuchh utha diya jisse land jaane mai kuchh pareshaani na ho tabhi vo mere oopar kuchh jhuka aur mai kuchh samajh pati tabhi usne mere kandhon ko pakad ke ek kas ke dhakka maar meri tange puri faili thi .. es liy land ko jagah banana mai ko dikkat nahi hui magar meri maa chud gai.. mai puri kas ke chilla di.. mera pura badan .. tadap gaya mujhe laga ki meri chut puri fat gai ho.
Uska pura land ek bar mai meri chut ki diwaron pe dabaw daalta hua … meri chut mai jaa ke das gaya tha.. vo hil bhi nahi paa rah a tha .. mai tadap ke use lipat gai .. tab usne meri chin ko apne munh mai liya aur chusne laga .. aur dono haatho se meri chuchiyon ko dabaane laga.. fir tabhi mujhe ehsaas hua ki uska land ab aage peeche hone laga hai ..
Uska land meri chut ki diwaron pe ragad daalta hua meri chut mai andar bahar jaane aane laga tha.. tab mujhe dhime dhime maza aane laga.. aur mai uska saath dene lagi tab uski takkare tez hone lagi .. aur mai kamar uchhka uchhka ke uska saath dene lagi ab mai mast ho gai thi .. mujhe chudane mai bahut maaza aa rahah tha…
Vo kafi der meri chudaai karta rha.. uski takkaren mere hausle ko aur badha rahi thi.. kabhi vo meri gardan chumta kabhi mere hontho pe apne hontho ko rakh ke chumta uar dhakke pe dhakke diy jaa rha tha.. ab uske dhakke meri chut ki jad pe lag rahe the.. aur mai masti mai chudane lagi thi… uska land mujhe bahut achha lgane laga tha..
Mai puri tango ko faila chuki thi .. vo khub maze se chudaai karne laga.. jab uska land meri chut mai andar jaata mai uchahk jaati aur jab bahar nikalta to apne sthan pe vapis aajati .. ye kate karte uske dhakke meri chut pe tez ho gay aur thodi der mai ek ghayal shaer ki tarah kuchh kas ke dhakke maar maar ke vo mere oopar hi gir gaya uske land ne shayad meri chut ke andar kuchh chhod diya tha..
Aur vo garam garam drav meri chut se bah eke bahar aane laga tha.. uska land aabhi bhi meri chut mai hi ghusa hua tha.. mai vaisi hi padi rahi vo bhi meri chuchiyon pe apna sir rakh ke leta rha aur thodi der mai usne apna land meri chut se nikal liya.. uska land ab land nahi rah gaya tha.. vo murjha ke lolo ban gaya tha..
Mujhe apne pahli chudaai mai bahut maza aai thi .. maine uth ke dekha .. bed pe kuchh khuon ke daag majud the mai samajh gai ki meri jhilli fat gai thi .. aaj mai ek kuwanri kali se phool ban gai thi .. raj thodi der vaise hi leta rha fir mujhe pyar karne laga mai usske baalon mai ungliya daal ke sahlati rahi aur .. pyar karti rahi .. thodi hi der mai vo fir garam ho gaya aur bola .. “ Jaan aur kuchh karna chahogi .. “
Maine Sharma ke haan kar di .. vo khush ho gaya aur .. meri chuchiyon ko fir se chumne laga .. ab meri chuchiya dard kar rahi thi .. puri laal ho rahi thi kyo ki raaj ne unko khub kas kas ke choosa tha.. aur dabaya bhi tha.. tabhi vo mere seeene pe aake bola lo mere is shaer ko jaga lo usne apna land mere munh ke paas kar diya maine apne haatho se uske land ko pakda us pe uska maal laga hua tha.. yaani viery ..
Maine use mujh mai liya aajib sa swad tha vo .. magar mujhe achha laga tha.. aur mai maze se use choosne lagi thodi hi der mai uska land puri tarah khada ho gaya.. aur meri laar se chikna aur mota lagne laga tha.. usne mere sir pe haanth rakh ke mere munh ko apne land pe dabaya uska land meri gardan tak chala gaya tha.. meri saans si rukne lagi maine khon khon karte hue jhatke se uske land ko munh se nikala ..
Meri aankhon se aansoo nikalne lage the.. uska land bahut mota tha jo meri gardan mai atak gaya tha.. .. thodi der ke liy.. meri puri laar uske land ko bhigo gai thi.. mai kafi santusht thi vo bhi maze se mere saath sex ka maza luot raha tha.. tab usne mujhe palat ke kutiyaa ki tarah khade hone ko kaha mai apne kohni aur ghutno ke bal khadi ho gai .. mai chawopayon ki tarah khadi thi.. vo mere peeche pahunch gaya
Aur mere chutdon ko apne haatho se faila ke meri gaand dekhne laga.. mai samajh gai ki aab ye meri gaand maarega.. .. mai khush ho rahi thi.. ki .. aaj mai saare tarike sikh jaaongi .. tabhi usne bed ke pas se ek tel ki shishi uthai aur meri gaand pe kuchh buonden dali .. aur apni ek ungli se usne vo tel meri gaand ke dwar pe faila diya aur ungli meri gaand mai ghusa ke uski dewaron ko bhi chikna kar diya ..
Fir shayd usne apne land pe bhi tel lagaya uar fir meri gaand ko apne haatho se douno chutdon ki sahayta se khola aur apna land meri gaand pe rakh ke andar push karne laga .. mujhe laga ki meri gaand fat ke chitre chitre ho jaaygi .. bahut kas ke pain ho raha tha.. magar mai use gaand marwane mai etni mast ho rahi thi ki mujhe aaj fatne chirne ka kaoi gam nahi tah .. Aahh..hi kas ke ek dhakka meri gaand pe pada aaur meri saans hi ruk gai ..
Pura land tdasa hua meri gaand mai dhansta chala gya aaa mujhse sahen nahi ho raha tha vo dard .. tabhi usne apne dono haatho se meri kamar padak ke apne land ko aage peeche karna shuru kar diya mai kutiyaa ki tarah hi jhuki rahi aur uska land meri gaand mai aage peeche jaane aane laga.. ab mera dard kam hone laga. .
Aur thoda .. maza bhi aane laga.. Raj meri kamar ko kas ke pakad ke meri gaand maarne laga tha.. aur kas kas ke uske dhaakke meri gaand pe pad rahe the .. mai masti ke saath apni gaand marwa rahi thi.. aur thodi hi der mai vo .. meri gaand mai hi jhad gya ..
Aur ..fir paas mai hi kate ped ki tarah dah gaya.. … hum dono ko bahut maza aaya tha.. mai kafi khush thi aur ammi ko duaayen de rahi thi .. . un 3 dino main na jaane Raj ne mujhe kitni baar choda.. magar ye zaruur jaanti hoon ki pahli chudaai mujhe bahut maza de gai thi .. ab meri chut pure shaher ke liy khul gai thi .. .. us raat Raj ne mujhe 6-7 baar choda aur 4 baar gaand maari thi..
Fir agle dino to usne mujhe bed chodane nahi diya.. mai 3din aur 4raaten uske paas thi.. vo meri chuoot ka khub maza utha tar aha.. aaisi chudaai maine aaj tak dubara nahi karwai … aur us din ke baad se raj ne mujhe kabhi nahi bulaya.. use kuwanri ladkiyon ka hi shauk hai.. aur mai ab purani ho chuki thi.. .. lakin Raj mera pahela chodne wala hai .. mai use kabhi nahi bhool sakti

samaapt

rajaarkey
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Re: Hindi Sex Stories By raj sharma

Unread post by rajaarkey » 15 Dec 2014 04:35

दो कामुक सहेलियाँ-1

इंसान के हर काम मे पहली बार एक झिझक होती है. जब एक बार काम कर लिया तो सब परदे उठ जाते हैं. ऐसी ही कहानी दो सहेलिओं और उनके भाइयों की है जिसको मे पेश कर रही हूँ. उम्मीद है आपको पसंद आएगी. “साली, शिल्पा, तेरे भैया कहाँ हैं आज? विनोद भैया से बात कर के बहुत मज़ा आता है. कितने अच्छे हैं विनोद भैया! कितना बालिश्ट जिस्म है उनका?” नीता ने अपनी प्यारी सहेली से कहा. वो अभी अभी कल एक फिल्म देखने का प्रोग्राम बना कर हटी थी. नीलम थियेटर मे एक सेक्सी इंग्लीश फिल्म लगी थी जिसकी 2 टिकेट्स नीता ले कर आई थी. शिल्पा जो कि 18 साल की सेक्सी लड़की थी सब समझती थी. नीता उसके भैया से इश्क करती थी और विनोद भैया भी नीता को गौर से घूरते रहते थे.

नीता थी ही इतनी खूबसूरत. उसकी उमर 22 साल की थी जब कि शिल्पा की उमर 17 साल की थी. नीता का भाई सुरेश 16 साल का था जब कि विनोद, 24 साल का था. नीता मांसल जिस्म की मलिका, गोरा रंग, भरा हुआ जिस्म, मोटे गोल नितंब जो उसकी जींस फाड़ कर बाहर आने को मचलते और उसके चुचियाँ उसकी ब्रा भी ढक नहीं पाती थी. नीता की खूबसूरती देख कर तो शिल्पा का मन भी खराब हो जाता, हालाँकि वो कोई लेज़्बीयन नहीं थी. शिल्पा ने अपनी सहेली के चूतड़ पर ज़ोरदार थप्पड़ मारते हुए कहा,” क्या बात है बहुत याद आ रही है विनोद भैया की? कहीं विनोद भैया को अपना सजना बनाने का इरादा तो नहीं है? ऐसा है तो अभी से तुझे भाभी कहना शुरू कर देती हूँ. वैसे भैया भी बहुत इंटेरेस्ट लेते हैं तुझ मे. तेरी चुचि पर नज़र रहती है उनकी. मुझे तो लगता है कि उनकी पैंट मे कुच्छ उठ जाता है तुझे देख कर. मेरी बन्नो, क्या बात है?”

नीता शरम से लाल हो गयी. उसका दिल ज़ोर से धड़कने लगा. उसकी चूत फड़ फडा उठी अपपनी सहेली के बात सुन कर.” चल चुप कर. जो मन मे आता है बक देती है. वो जैसे तेरे भैया हैं, वैसे ही मेरे भैया हैं. तेरा तो दिमाग़ उल्टा ही चलता है” नीता ने नाटक करते हुए कहा. नीता ने नज़र छुपा कर विनोद की टेबल पर अपना लव लेटर किताब के नीचे रख दिया. लेकिन शिल्पा शीशे मे से सब देख रही थी. उसने नाटक करते हुए कुच्छ नहीं कहा लेकिन आज उसने अपने भाई और सहेली के इश्क के राज़ का पर्दाफाश करने की ठान ली.

नीता असल मे विनोद से इश्क करती थी लेकिन शिल्पा से नहीं कह सकती थी. मन ही मन वो विनोद को कई बारी नंगा कर चुकी थी और जानती थी कि विनोद भी उसको इश्क करता है. कई बारी विनोद मज़ाक मज़ाक मे नीता की गांद पर हाथ फेर चुका था जिस से नीता के दिल मैं हलचल मच जाती थी.” काश विनोद मुझे बाहों मे भर कर भींच ले और मेरी चूत मे अपना लंड पेल दे!!!” नीता यही सोच रही थी. शिल्पा वैसे जानती थी कि दोनो मे कुच्छ चल रहा है लेकिन आज अपनी सहेली का लेटर पढ़ कर सब पता चल जाएगा.

” ठीक है, मेरी नीता रानी, अगर नहीं बताना तो मत बता. अगर मुझे अपने आप पता चला कि तू मेरे भैया से इश्क फरमा रही है तो समझ ले कि मैं तुझे नंगा कर के तेरे जिस्म के हर अंग को वैसे ही चुमूंगी जैसे मेरे भैया चूमते होंगे” शिल्पा हंस कर बोली और उसने साथ नीता को आलिंगन मे ले कर उसके होंठों पर अपने होंठ रख कर किस करना शुरू कर दिया. नीता अचंभित रह गयी अपनी सहेली की इस हरकत से. शिल्पा की 36 डी ब्रा मे क़ैद चुचि अपनी सहेली की चुचि से टकराने लगी और उसके हाथ नीता की पीठ और चुतडो पर रेंगने लगे. नीता का मुँह हैरानी से खुल गया और शिल्पा ने अपनी ज़ुबान उसके अंदर घुसेड दी. नीता ना चाहते हुए भी शिल्पा की ज़ुबान को चूसने लगी. दोनो सहेलियाँ एक लेज़्बीयन कामुक चुंबन मे क़ैद हो गयी. नीता के हाथ खुद ब खुद शिल्पा की चुचि पर चले गये और वो उनको प्यार से दबाने लगी. शिल्पा की चुचि कड़ी हो चुकी थी और दोनो सहेलियाँ कामुकता मे डूब कर एक दूसरी को किस कर रही थी.

चुंबन चलता रहा और दोनो एक दूसरे के जिस्म को सहलाती रही. दोनो की चूत रस से भीग गयी और दोनो को एक नयी किस्म की उत्तेजना होने लगी. शिल्पा ने एक हाथ नीता की जांघों मे घुसा दिया और उसकी मस्त चूत को दबाने लगी. चुंबन ख़तम होते ही नीता बोली,” साली, विनोद भैया का नाम ले कर तू खुद मुझे उत्तेजित कर रही है मेरी शिल्पा. क्या बात है एक तरफ तेरा भाई मुझे पटाने की कोशिश करता है दूसरी तरफ तू? मैं किधर जाऊ? तुम दोनो भाई बेहन के चक्कर मे मैं कहीं रगड़ी ना जाऊ! भाई तो लंड खड़ा कर के बैठा है तो बेहन मुझे अपनी लेज़्बीयन बना देने पर तुली हुई है. लगता है मेरी खैर नहीं”

लेकिन सच ये था कि नीता बहुत गर्म चुकी थी और उसकी चूत रस टपका रही थी. वो गौर से अपनी सहेली शिल्पा को देख रही थी जिसके स्तन ऊपर नीचे हो रहे थे और साँस तेज़ी से चल रही थी. ” मैने तो सोचा तेरे साथ ही ब्लू फिल्म चला लूँ, मेरी बन्नो. कोई बात नहीं कुच्छ ही दिनो मे विनोद भैया मेरे लिए कंप्यूटर ले कर आने वाले हैं. दोनो बैठ कर राज शर्मा स्टॉरीज डॉट कॉम देखेंगे और नई नई सेक्सी कहानियाँ पढ़ेंगे, ठीक है?” नीता ने अपनी सखी को फिर याद करवाया,” लेकिन कल 2 बजे तैयार रहना राज शर्मा स्टॉरीज पढ़ने के लिए”

शिल्पा अपनी सखी को बाहर तक छोड़ कर वापिस आई तो उसका सीना धक धक कर रहा था. वो सीधा विनोद भैया की किताबों के पास गयी और नीता का छुपाया हुआ लेटर निकालने लगी. काँपते हाथों से उसने लेटर खोला,” मेरे प्यारे विनोद भैया! ये क्या आप मुझ से और मैं आप से प्यार करती हूँ लेकिन ये भैया क्यो? नहीं मेरे विनोद सजना, अब हमारे मिलन का दिन आ गया है. मैं आपकी प्यारी बहना को फिल्म दिखाने के बहाने कल 2 बजे थियेटर ले जाऊगी और फिर बहाना बना कर मैं अपने साजन के पास चली आउन्गि. फिर तुम होगे और मैं! फिर हमारा मिलन होगा और इस बार हमारे बीच कुच्छ नही होगा, कपड़े भी नहीं, नीता आपके सामने उस रूप मे होगी जिस रूप मे इस दुनिया मे आई थी, यानी कि आपकी नीता बिल्कुल नंगी आपके सामने आना चाहती है. अब कल मिलेंगे मेरे साजन, मेरे विनोद भैया!!”

शिल्पा लेटर को पढ़ कर कामुक होने लगी.” तो मेरी सहेली मेरे भैया से चुदवाने की प्लान बना चुकी है और वो भी मुझ से चोरी!” शिल्पा सोच मे पड़ गयी. तो मुझे गायब करने के लिए मेरी प्यारी सखी मुझे फिल्म देखने भेज रही है. कोई बात नहीं, मेरी नीता रानी, मेरा नाम भी शिल्पा है. शिल्पा ने चिट्ठी एक बार फिर पढ़ी और फिर उसने अपने विनोद भाई का इंतज़ार शुरू कर दिया. वो नहा कर बाथरूम से बाहर निकली और उसने एक मलमल का कुर्ता और पाजामा पहन लिया और नीचे ना ब्रा और ना ही पैंटी पहनी. कुर्ते की पॉकेट जो कि उसकी बाई चुचि पर लगी हुई थी, उसमे उसने चिट्ठी डाल ली.

शाम को विनोद जब घर आया तो शिल्पा सोफे पर बैठी उसका इंतज़ार कर रही थी. विनोद ने एक नज़र अपनी बेहन पर डाली तो एक बार तो वासना उसके दिल मे जाग उठी. साली क्या मस्त है उसकी बेहन! शिल्पा 17 वर्षीय अती सेक्सी लड़की थी. रंग चाहे सांवला लेकिन नैन नक्श कातिल थे उसके. कुरती से बाहर निकलने को तड़प रही थी उसकी जवानी. उसके स्तन के उभार ग़ज़ब ढा रहे थे और सॉफ दिख रहा था कि वो कुरती के नीचे नंगी थी. अपनी बेहन के निपल देख कर विनोद भूल गया कि वो उसकी बेहन है. शिल्पा के खुले बाल उसको और भी मस्त बना रहे थे. विनोद का लंड सलाम करने लगा और उसको इस बात पर शरम भी आ रही थी कि वो अपनी बेहन को देख कर ही उत्तेजित हो रहा था.

क्रमशः……………………….

Do kamuk saheliyaan-1

insan ke har kaam me pehli bari ek jhijhak hoti hai. Jab ek bar kam kar liya to sab padrde uth jate hain. Aisi hi kahani do sahelion aur unke bhaiyon ki hai ko me pesh kar rahi hoon. Umeed hai aapko pasand aayegi. “Sali, Shilpa, tere bhaiya kahan hain aaj? Vinod bhaiya se baat kar ke bahut maza aata hai. Kitne achhay hain Vinod bhaiya! Kitna balisht jism hai unka?” Neeta ne apni pyari saheli se kaha. Vo abhi abhi kal ek film dekhne ka program bana kar hati thee. Neelam theatre me ek sexy English film lagi thee jiski 2 tickets Neeta le kar aayi thee. Shilpa jo ki 18 saal ki sexy ladaki thee sab samjhati thee. Neeta uske bhaiya se ishk karti thee aur Vinod bhaiya bhi Neeta ko gaur se ghurte rehte thay.

Neeta thee hi itni khubsurat. Uski umar 22 saal ki thee jab ki Shilpa ki umar 17 saal ki thee. Neeta ka bhai Suresh 16 saal ka tha jab ki Vinod, 24 saal ka tha. Neeta mansal jism ki malika, gora rang, bhara hua jism, mote gol nitamb jo uski jeens phad kar bahar aane ko machalte aur uske chuchiyaan uski bra bhi dhak nahin pati thee. Neeta ki khubsurti dekh kar to Shilpa ka man bhi kharab ho jata, halanki vo koi lesbian nahin thee. Shilpa ne apni saheli ke chutad par zordar thapad marte hue kaha,” Kya baat hai bahut yaad aa rahi hai Vinod bhaiya ki? Kahin Vinod bhaiya ko apna sajna banane ka irada to nahin hai? Aisa hai to abhi se tujhe Bhabhi kahana shuru kar deti hoon. Vaise bhaiya bhi bahut interest lete hain tujh me. Teri chuchi par nazar rehti hai unki. Mujhe to lagata hai ke unki paint me kuchh uth jata hai tujhe dekh kar. Meri banno, kya baat hai?”

Neeta sharam se laal ho gayi. Uska dil zor se dhadakane laga. Uski chut phad phada uthi appni saheli ke baat sun kar.” chal chup kar. Jo man me aata hai bak deti hai. Vo jaise tere bhaiya hain, vaise hi mere bhaiya hain. Tera to dimag ulta hi chalta hai” Neeta ne natak karte hue kaha. Neeta ne nazar chupa kar Vinod ke table par apna love letter kitab ke neechey rakh diya. Lekin Shilpa sheeshe me se sab dekh rahi thee. Usne natak karte hue kuchh nahin kaha lekin aaj usne apne bhai aur saheli ke ishk ke raaz ka pardafash karne ki than li.

Neeta asal me Vinod se ishk karti thee lekin Shilpa se nahin keh sakti thee. Man hi man vo Vinod ko kai bari nanga kar chuki thee aur janti thi ki Vinod bhi usko ishk karta hai. Kai bari Vinod mazak mazak me Neeta ki gaand par hath fer chuka tha jis se Neeta ke dil main hulchul mach jati thee.” Kash Vinod mujeh bahon me bhar kar bheench le aur meri chut me apna lund pel de!!!” Neeta yahi soch rahi thee. Shilpa vaise janti thi ki dono me kuchh chal raha hai lekin aaj apni saheli ka letter padh kar sab pata chal jayega.

” Theek hai, meri Neeta Rani, agar nahin batana to mat bata. Agar mujhe apne aap pata chala ki tu mere bhaiya se ishk farma rahi hai to samajh le ki main tujhe nanga kar ke tere jism ke har ang ko vaise hi chumungi jaise mere bhaiya chumte honge” Shilpa hans kar boli aur usne saath Neeta ko alingan me le kar uske honthon par apne honth rak kar kis karna shuru kar diya. Neeta achambhit reh gayi apni saheli ki is harkat se. Shilpa ki 36 DD bra me quaid chuchi apni saheli ki chuchi se takrane lagi aur uske haath Neeta ki peeth aur chutaDo par rengne lage. Neeta ka munh hairani se khul gaya aur Shilpa ne apni zuban uske andar ghused dee. Neeta na chahte hue bhi Shilpa ki zuban ko chusne lagi. Dono saheliyaan ek lesbian kamuk chumban me qaid ho gayi. Neeta ke haath khud b khud Shilpa ki chuchi par chale gaye aur vo unko pyar se dabaane lagi. Shilpa ki chuchi kadi ho chuki thee aur dono saheliyaan kamukta me doob kar ek dusri ko kis kar rahi thee.

chumban chalta raha aur dono ek dusre ke jism ko sehlati rahi. Dono ki chut ras se bheeg gayi aur dono ko ek nayi kism ki uttejanaa hone lagi. Shilpa ne ek haath Neeta ki janghon me ghusa diya aur uski mast chut ko dabane lagi. chumban khatam hote hi Neeta boli,” Sali, Vinod bhaiya ka naam le kar tu khud mujhe uttejit kar rahi hai meri Shilpa. Kya baat hai ek taraf tera bhai mujhe patane ki koshish karta hai dusri taraf tu? Main kidhar jaaoo? Tum dono bhai behan ke chakkar me main kahin ragadi na jaaoo! Bhai to lund khada kar ke baitha hai to behan mujhe apni lesbian bana dene par tuli hui hai. Lagata hai meri khair nahin”

Lekin sach ye tha ki Neeta bahut garm chuki thee aur uski chut ras tapka rahi thee. Vo gaur se apni saheli Shilpa ko dekh rahi thee jiske satan oopar neechey ho rahe thay aur saans tezi se chal rahi thee. ” Maine to soch tere saath hi blue film chala loon, meri banno. Koi baat nahin kuchh hi dino me Vinod bhaiya mere liye computer le kar aaney wale hain. Dono baith kar raj sharma storeej dot com dekhenge our nai nai sexi kahaaniyaan padhenge, theek hai?” Neeta ne apni sakhi ko fir yaad karwaayaa,” Lekin kal 2 baje taiyar rehna raj sharma storeej padhne ke liye”

Shilpa apni sakhi ko bahar tak chod kar vapis aayi to uska seena dhak dhak kar raha tha. Vo seedha Vinod bhaiya ki kitabon ke pass gayi aur Neeta ka chupaya hua letter nikalne lagi. Kampte hathon se usne letter khola,” Mere pyare Vinod bhaiya! Ye kya aap mujh se aur main aap se pyar karti hoon lekin ye Bhaiya kyo? Nahin mere Vinod sajna, ab hamare milan ka din aa gaya hai. main aapki pyari behna ko film dikhaane ke bahane kal 2 baje theatre el jaaoogi aur fir bahana bana kar main apne sajan ke pass chali aaungi. Fir tum hoge aur main! Fir hamara milan hoga aur is bar hamare beech kuchh nahi hoga, kapde bhi nahin, Neeta aapke samne us roop me hogi jis roop me is duniya me aayi thee, yaani ki aapki Neeta bilkul nangi aapke samne aana chahti hai. Ab kal milenge mere sajan, mere Vinod bhaiya!!”

Shilpa letter ko padh kar kamuk hone lagi.” To meri saheli mere bhaiya se chudavaane ki plan bana chuki hai aur vo bhi mujh se chori!” Shilpa soch me pad gayi. To mujhe gayab karne ke liye meri pyari sakhi mujhe film dekhne bhej rahi hai. Koi baat nahin, meri Neeta rani, mera naam bhi Shilpa hai. Shilpa ne chithi ek bar fir padhi aur fir usne apne Vinod bhai ka intzar shuru kar diya. Vo naha kar bathroom se bahar nikali aur usne ek malmal ka kurta aur pajama pehan liya aur neechey na bra aur na hi painty pehni. Kutte ki pocket jo ki uski bayi chuchi par lagi hui thee, usme usne chithi dal li.

Sham ko Vinod jab ghar aaiya to Shilpa sofe par baithi uska intzar kar rahi thee. Vinod ne ek nazar apni behan par dali to ek bar to vasna uske dil me jag uthi. Sali kya mast hai uski behan! Shilpa 17 varshiya ati sexy ladaki thee. Rang chahe sanwla lekin nain naksh katil thay uske. Kurti se bahar nikalne ko tadap rahi thi uski jawani. Uske satan ke ubhar gazab dha rahe thay aur saaf dikh raha tha ki vo kurti ke neechey nangi thee. Apni behan ke nipple dekh kar Vinod bhool gaya ki vo uski behan hai. Shilpa ke khule bal usko aur bhi mast bana rahe thay. Vinod ka lund salam karne laga aur usko is baat par sharam bhi aa rahi thee ki vo apni behan ko dekh kar hi uttejit ho raha tha.

kramashah……………………….