खेल खिलाड़ी का compleet

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raj..
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Re: खेल खिलाड़ी का

Unread post by raj.. » 09 Dec 2014 15:55

खेल खिलाड़ी का पार्ट--46

गतान्क से आगे............-

"बी,तुम आज रात आराम करो.",ए ने बी को उसका कमरा दिखाया,"..सी & डी,तुम दोनो अभी पहरे पे रहो.4 घंटे बाद मैं & ए तुम्हारी जगह आ जाएँगे."

"ओक,ए",डी ने बोला & उस कमरे के बाहर जिसमे अनीश क़ैद था 1 मेज़ & 2 कुर्सिया लगा के ताश की गद्दी,सिगरेट के पॅकेट्स & पानी की बॉटल रख के सी के साथ बैठ गया.

ए बेसमेंट से उपर आया & अपने कमरे मे दाखिल हो दरवाज़ा बंद कर लिया.उसकी उम्र कोई 30 बरस के आस-पास थी मगर शक्ल-सूरत से वो 24-25 से ज़्यादा का नही लगता था.उसका 6'2" लंबा जिस्म कसरती था & उसकी फुर्ती का नमूना कुच्छ ही देर पहले वरुण ने देखा था जब पूरे गॅंग ने अनीश को उस से छ्चीना था.

कमरे मे घुसते ही ए के होंठो पे मुस्कान फैल गयी.ए जिसका नक़ली नाम शोभा & असली दीप्ति था,अपने कपड़े उतार रही थी.उसकी नंगी पीठ ए की ओर थी & वो अपनी जीन्स उतार रही थी.आहट होने पे उसने गर्दन घुमाई & वो मुस्कुरा दी.दीप्ति का कद 5'3"था & वो बहुत गोरी नही थी लेकिन उसका रंग कम भी नही था.उसकी सूरत भी कोई बहुत ज़्यादा हसीन नही थी मगर 1 अजीब सी कशिश थी उसके चेहरे ,उसकी आँखो मे जो मर्दो को अपना दीवाना बना लेती थी.उसका बदन तो जैसे साँचे मे ढला था.24 बरस का जवान जिस्म बिल्कुल कसा हुआ था.ए की नज़रे तो उसकी काली पॅंटी मे क़ैद 36 इंच की गंद से हट ही नही रही थी & वो अपने कपड़े उतारता बस उसी अंग को घुरे जा रहा था.26 इंच पतली कमर के नीचे चौड़ी गंद देख के तो शायद कोई नमर्द भी जोश से भर उठता.

"यहा भी ए ही बुलाऊं तुम्हे?",दीप्ति घूमी & अपनी 36सी साइज़ की छातियाँ जिनपे भूरे निपल्स थे ए के सामने कर दी.

"तो और क्या बुलाना चाहती हो?,पूरी तरह से नंगा ए पॅंटी उतारती डिप्टी के करीब आया & उसके हाथो से पॅंटी लेके उसे सूँघा & फिर उसे परे उच्छल दिया & उसकी कमर को पकड़ उसका जिस्म अपने जिस्म से सटा लिया & उसकी गंद को अपने हाथो तले मसलते हुए उसके चेहरे को चूमने लगा.

"जुंगली..ज़ालिम..वहशी....ये बुलाना चाहती हू..आहह..हा...हा..!",दीप्ति उसकी बाहो मे कसमसाते हुए हँसने लगी.उसकी इस अदा ने ए को और जोश से भर दिया.वो उसकी गंद को & ज़ोर से भींचते हुए उसकी गर्दन चूमने लगा.

"ओह..अरशद..",यही नाम था उसका,"..आहह..उनह..",दीप्ति भी अपने आशिक़ की हर्कतो से गरम होने लगी थी.अरशद का 8 इंच लंबा लंड दोनो जिस्मो के बीच दबा हुआ था & उसके पेट पे उसका गरम एहसास उसे पागल कर रहा था.अरशद ने सर झुका के उसकी कसी चूचियो को अपने मुँह का निशाना बनाया तो दीप्ति के बदन मे बिजली दौड़ने लगी.उसकी आहें और मस्त हो गयी & वो अरशद के बालो को नोचने लगी.उसकी चूत मे कसक उठने लगी थी & थोड़ा-2 पानी भी रिसने लगा था.

"उम्म....यहा कितने दिन रहना होगा हमे..ऊव्ववव..!",अरशद ने उसके बाए निपल को दांतो से काट लिया था.

"अगर सब ठीक रहा तो 10 दीनो के अंदर ही काम निपटा के हम यहा से निकल जाएँगे.",उसने उसकी बाई चूची को दाए हाथ मे भर के ज़ोर से दबाया & फिर अपनी मुट्ठी से निकले उसके भूरे निपल पे जीभ चलाने लगा.

"..उउन्न्ह....मोहन लाल की दुकान लूटने के बाद इतनी जल्दी यहा आना क्या ठीक है?..उम्म..",उसने दाए हाथ को नीचे ले जा अरशद के लंड को पकड़ लिया & उसे प्यार से सहलाने लगी.

"ख़तरा तो है जानेमन मगर इस बार बहुत मोटा माल हाथ आने वाला है.इसके बाद चाहे तो काफ़ी दीनो तक ऐश कर सकते हैं.",अरशद ने उसकी चूचिया छ्चोड़ी & उसे घुमा दिया तो दीप्ति दीवार पे दोनो हाथ जमा के खड़ी हो गयी.अरशद अपने पंजो पे बैठ गया & दीप्ति की मखमली जाँघो को फैलाया & उन्हे सहलाते हुए पीछे से अपनी जीभ उसकी चूत मे फिरा दी.

"आहह....ऊहह....!",दीप्ति आहे भरती हुई अपने आशिक़ की जीभ की हर्कतो से मस्ती मे खो गयी & उसकी चूत से रस की धारा बहने लगी.कयि पलो तक अरशद उसकी चूत चाटता रहा & जैसे ही झड़ती हुई दीप्ति का जिस्म आकड़ा & वो दीवार छ्चोड़ ज़मीन पे गिरने लगी अरशद उठ खड़ा हुआ & उसकी कमर को थाम उसे बाई तरफ घुमाया तो उसने अपने हाथ वाहा रखे शेल्फ पे जमा दिए & अपनी गंद निकालते हुए झुक गयी.

अरशद ने प्यार से उसकी गंद को सहलाया & उसकी कमर पकड़ 1 ही झटके मे अपना लंड पीछे से उसकी नाज़ुक चूत मे घुसा दिया.

"एयैयीईयीयी..!",दीप्ति चीखी मगर उसके होंठो पे मुस्कान फैल गयी.अरशद का मोटा लंड हर बार उसे जिस्मानी खुशी की नयी-2 मंज़िलो से वाकिफ़ कराता था.अरशद खड़ा उसकी जाँघो & गंद की फांको को सहलाता उसे चोद रहा था.

"अब यहा दर्द तो नही होता?",दीप्ति की गंद की दाई फाँक पे 1 टॅटू बना हुआ था-1 फन काढ़े साँप का.

"उउन्न्ञन्...नही..जानू...आहह...!",अरशद आगे झुका & अपने हाथ दीप्ति के हाथो के उपर जमा दिए & उसके दाए कंधे को चूमने लगा.

"तुम्हे तो बहुत दर्द हुआ होगा ना?..ऊन्नह..!",उसने अरशद की दाई कलाई को सहलाया & उसपे लगे रिस्ट बॅंड को उतार दिया.उसकी कलाई के गिर्द वैसा ही टॅटू बना था,लगता था साँप उसकी कलाई पे लिपटा बैठा है.

"हां,थोड़ा सा.",वो फिर से उठ खड़ा हुआ था & उसके हाथ दीप्ति की मखमली पीठ से फिसलते हुए उसकी बगलो को सहलाते हुए उसकी मोटी चूचियो को मसल रहे थे.

"जानू....हम सबने ये टॅटू क्यू बनवाया हुआ है?",अरशद का दाया हाथ उसकी चूचियो को दबोच रहा था & बाया उसकी गंद की बाई फाँक & कमर की बगल मे गोलाई मे घूम रहा था.

"बस ऐसे ही मेरी जान.बी के गले पे देख मुझे ये बहुत अच्छा लगा तो मैने भी बनवा लिया & फिर मुझे ख़याल आया कि क्यू ना हम सब ये अपनी मर्ज़ी की जगह पे बनवा लें.पर तुम 1 बात बताओ?",अरशद के धक्के बहुत तेज़ हो गये थे & दीप्ति अब मस्ती मे चिल्ला रही थी,"..ऊव्ववव....आआअहह.....!",शेल्फ पे उसने अपने नखुनो के निशान छ्चोड़ दिए,उसकी चूत मे उठ रही कसक अब अपने चरम पे पहुँच गयी थी & उसका जिस्म मस्ती से सराबोर हो चुका था.अरशद के गहरे धक्के पे उसकी चूत के सब्र का बाँध टूट गया & वो झाड़ गयी & उसकी चूत से रस की नदी बहने लगी.

अरशद ने लंड बाहर खींचा & दीप्ति को बाहो मे उठा लिया & बिस्तर पे ले गया.बिस्तर पे लेटते ही दीप्ति ने अपनी टाँगे & बाहे फैला दी.अरशद उसकी टाँगो के बीच आया & लंड की नोकको उसकी चूत की दरार पे रखा.दीप्ति ने हाथ आगे बढ़ा के लंड को पकड़ उसका सूपड़ा अपनी चूत मे डाला,"क्या पुच्छ रहे थे?"

"कि तुमने ये टॅटू अपनी गंद पे क्यू बनवाया?",अरशद ने लंड बस आधा अंदर धकेला.

"उम्म...क्यूकी तुम्हे मेरी गंद कुच्छ ज़्यादा ही पसंद है.",दीप्ति का दिलकश चेहरा मस्ती की खुमारी मे और भी हसीन लग रहा था.अरशद ने कुच्छ हल्के धक्के लगाए तो लंड फिसल के चूत से बाहर आ गया,"..ऑफ ओह..!",दीप्ति झल्ला गयी.

"और अपने बाल क्यू छ्होटे करवा लिए तुमने?",अरशद का इशारा दीप्ति के गर्दन से उपर तक कटे बालो पे था.

"तुम्ही ने तो कहा था कि हुलिया बदलना है!",दीप्ति ने लंड को पकड़ दोबारा अपनी चूत का रास्ता दिखाया & इस बार उसने पूरे लंड को चूत मे घुसा कर ही अपना हाथ उसपे से हटाया,"..अब ये बेकार की बाते छ्चोड़ो..",उसने अरशद की बाँह पकड़ उसे अपने उपर लिटा लिया & अपनी नर्म बाहे & सुडोल टाँगो मे उसके जिस्म को क़ियड कर लिया,"..& मुझे जम के चोदो.",अरशद मुस्कुराया & अपनी महबूबा के होंठो से अपने होंठ सटा दिए & धक्के लगाते हुए उसकी चुदाई करने लगा.

वरुण पोलीस कॉलोनी मे घुस तो गया था मगर अब उसकी समझ मे नही आ रहा था कि आगे क्या करे.शुरू मे 4 मंज़िले क्वॉर्टर्स बने थे जिनमे दाखिल होना तो बहुत ही मुश्किल दिखाई दे रहा था.वो रास्ते पे आगे बढ़ा तो उसे अब 1 मंज़िल के एबीसीडी क्वॉर्टर्स दिखाई देने लगे.इन सभी क्वॉर्टर्स के आगे छ्होटा सा लॉन & पीछे की तरफ 1 गॅरेज & 1 कमरे का सर्वेंट क्वॉर्टर बना था.यहा उसे कुच्छ उम्मीद नज़र आई मगर ख़तरा बहुत ज़्यादा था.1 ज़रा सी ग़लती उसे सीधा सलाखो के पीछे पहुँचा सकती थी.

हर क्वॉर्टर के लगभग सारे कमरो की बत्तियाँ जली दिख रही थी यानी सभी के अंदर पूरा का पूरा परिवार मौजूद था.वो छिपता-छिपाता सभी क्वॉर्टर्स को देखता रहा कि तभी उसके कानो मे आवाज़ आई,"मैं जा रहा हू,मेम्साब.दरवाज़ा बंद कर लीजिए."

क्वॉर्टर के मैन दरवाज़े से 1 आदमी निकल रहा था जो देखने से अरदली लग रहा था.वो निकला & पीछे बने सर्वेंट क्वॉर्टर मे जाने लगा.लॉन के किनारो पे उगी ऊँची झाड़ियो के पीछे खड़ा वरुण ये सब देख रहा था कि तभी 1 लड़की आई & उसने दरवाज़ा बंद कर दिया.

मेघना ने बहादुर के जाते ही दरवाज़ा बंद किया & फिर अपने कमरे से अटॅच्ड बाथरूम मे चली गयी.अजीत ने फोन कर दिया था कि आज रात वो घर नही लौटेगा,वो प्रधान किडनॅपिंग केस मे बिज़ी था.मेघना ने लंबी ढीली स्कर्ट & टॉप पहना हुआ था.उसने टॉप निकाला & वॉशबेसिन पे खड़े हो मुँह धोने लगी.ठीक उसी वक़्त वरुण 1 खुली खिड़की से घर के अंदर दाखिल हुआ.

"मोना.",आवाज़ सुन झुक के मुँह धोती मेघना चौंकी....इस नाम से तो बस आज तक 1 ही शख्स ने उसे बुलाया था,"..वरुण..!",हैरत से मेघना की आँखे फॅट गयी & उसका हाथ उसके मुँह पे चला गया.उसके दिमाग़ मे उथल-पुथल मच गयी थी....सारी दुनिया के लिए मेघना हो तुम मगर मेरे लिए मेरी मोना....वरुण के अल्फ़ाज़ उसके ज़हन मे गूँज रहे थे....& तुम मेरे वरुण....दोनो ही की आँखे नम हो गयी थी.

"तुम यहा कैसे ?",भर्राए गले से बस इतनी ही आवाज़ निकल पाई मेघना के.

"तुम चेंज कर लो फिर बताता हू.",वरुण की नज़रे 1 पल को सफेद ब्रा मे से झाँकते मेघना के दूधिया क्लीवेज पे पड़ी & वो फिर पलट के बाहर चला गया.मेघना को तब अपने हाल का एहसास हुआ & उसका चेहरा शर्म से लाल हो गया.उसने बाथरूम का दरवाज़ा बंद कर दिया & उस से पीठ लगा के आँखे मींच खड़ी हो गयी.

....दिल मे जो जज़्बातो की ऊहापोह थी वो आँखो के रास्ते बहने लगी.मेगना ने नल तेज़ कर दिया & सुबकने लगी.जब सारा गुबार निकल गया तो उसने मुँह धोया & कपड़े बदलने लगी....वरुण ने उसे ब्रा मे देखा तो क्या उसे वो बीते दिन याद आए होंगे?..उसे कली से फूल वरुण ने ही तो बनाया था...कितना नशा,कितना मज़ा था उसकी चुदाई मे.उसके जिस्म का तो दीवाना था वो..तो क्या आज भी..नही!अब वो 1 शादीशुदा औरत थी..अब नही!उसने विश्वास भरी नज़रो से खुद को शीशे मे देखा & बाथरूम से बाहर आई.

वरुण बिस्तर के कोने पे बैठा था.मेघना को बाहर आता देख वो उठ खड़ा हुआ,"तुम मुझे देख के हैरान हो & परेशान भी."वरुण के होंठो पे उदास सी मुस्कान थी,"..मगर मैं मजबूरी मे तुम्हारे पास आया हू,मोना.",& उसने अपने जैल से छूटने से लेके अभी तक की सारी दास्तान सुना दी.

"तुम पागल हो क्या वरुण?!",मेघना की भवे सिकुड़ी हुई थी,"..पहले तो तुम अपराधी नही थे मगर अब बनने जा रहे थे!"

"तो क्या करता?!",वरुण की आवाज़ तेज़ हो गयी,"..मुझे जो सज़ा मिली वो क्या सही थी?..तो फिर क्या ग़लत कर रहा था मैं जो प्रधान को उसके किए की सज़ा दे रहा था!"

"तो अब यू च्छुपते क्यू फिर रहे हो?!",मेघना ने धिक्कार भरी हँसी हँसी,"..जाओ & सीधा प्रधान के घर मे घुस के उसको मार दो या फिर उसका 1 और बेटा है उसका किडनॅप कर लो!"

"तुम्हे मेरी मदद नही करनी तो मत करो मगर यू मेरी बेइज़्ज़ती ना करो.",वरुण कमरे से बाहर जाने लगा तो मेघना ने आगे बढ़ के उसकी दाई बाँह थम ली & उसे अपनी ओर घुमाया.

"अपनी बेइज़्ज़ती तुम खुद कर रहे हो,वरुण.",वरुण ने देखा तो उसे वही पहले की उसके साथ कॉलेज जाने वाली उसकी गर्लफ्रेंड मोना नज़र आई,"माना की तुम्हारे साथ नाइंसाफी हुई मगर उसके बाद तुम उस नाइंसाफी का बदला ऐसे ले रहे हो 1 कायर की तरह!वरुण अवस्थी जोकि हर मुश्किल का सामना सीना ताने करता था आज 1 मासूम को किडनॅप कर रहा था ताकि उसके बाप से बदला ले सके?!",ये सवाल तो वरुण के ज़हन मे भी उठता था मगर हर बार वरुण उसे दबा देता था.आज मोना उसकी अंतरात्मा बन उसके सामने खड़ी थी & वो इस सवाल से किनारा नही कर सकता था.

"वरुण,1 बात बताओ ऐसा करने से तुम मे & प्रधान मे क्या फ़र्क रह जाता?..मानती हू कि क़ानून के रास्ते अदालत का दरवाज़ा खटखटाते तो पता नही कितना वक़्त लगता मगर वरुण उस लड़ाई के बाद मिली जीत का स्वाद इस जीत से तो कही ज़्यादा मीठा होता.",वरुण सर झुकाए खड़ा था.मोना की बातो की सच्चाई ने उसे शर्मिंदा कर दिया था,"..& वरुण उस लड़ाई मे मदद के लिए मैं खुद तुम्हारे साथ खड़ी हो जाती.",वरुण ने चौंक के उपर देखा.

"हां..शादीशुदा हू तो क्या हुआ मैं भी इंसान हू & किसी के साथ नाइंसाफी होते तो मैं भी बर्दाश्त नही कर सकती.जब तुम जैल मे थे तो मैने पापा से कहा की हमे तुम्हारी मदद करनी चाहिए मगर वो तो लड़की के पिता थे!",मेघना ने उदास सी हँसी हँसी,"..उन्हे तो उल्टा ये डर लग गया कि कही इस चक्कर मे मेरी शादी ही ना हो & फिर परिवार की इज़्ज़त का क्या होता!",मेघना खामोश हो गयी.वरुण ने उसे देखा तो उसे एहसास हुआ कि वो इधर कितना स्वार्थी हो गया था,उसे अपना गम सबसे बड़ा लगता था.मोना ने भी तो झेला था ना उसके चलते.उसने अपना बाया हाथ मेघना के कंधे पे रखा तो वो घूमी.

"अब क्या करोगे?"

"मुझे च्छूपने की जगह चाहिए फिर 1 आदमी है उसके पास मदद के लिए जाऊँगा.",वो मूसा के बारे मे सोच रहा था जोकि 2-3 दिनो मे जैल से बाहर आने वाला था.

"वो भी कोई ज़ारायंपेशा ही होगा?"

"हां,पर तुम ही बताओ मोना कि अब मैं क्या करू!ऐसी मुसीबत मे तो मुझे ऐसे ही लोगो का सहारा लेना पड़ेगा ना.अभी पोलीस के पास जाऊं तो वो ये जानते हुए भी कि मैं बेकसूर हू मेरी हालत ख़स्ता कर देंगे & फिर कही कुच्छ गड़बड़ हो गयी तो मुझे बलि का बकरा बना देंगे."

"सब पोलीस वाले ऐसे नही होते.",वरुण समझ गया कि वो अपने पति के बारे मे कह रही है.उसके दिल मे टीस सी उठी.

"माना की सभी ऐसे नही होते मगर ज़्यादातर ऐसे ही होते हैं & कही मेरा पाला ऐसे किसी से पड़ गया तो फिर.."

"हूँ.तुम्हे कितने दिनो के लिए च्छूपना है?"

"3 दिन."

"ठीक है.तुम यहा रहो."

"नही,मोना.मैं तुम्हे किसी ख़तरे मे नही डाल सकता & फिर.."

"& फिर?"

"तुम्हारी शादी हो चुकी है,मोना.तुम्हारे पति को पता चला तो..",वरुण ने जल्दी से बात ख़तम की,"..नही मोना मैं तुम्हारी खुशल ज़िंदगी मे ज़हर नही घोल सकता."

"कह लिया तो अब मेरी सुनो.इस क्वॉर्टर की छत पे 1 कमरा है जिसे हम स्टोर की तरह इस्तेमाल करते हैं.साल मे बस 1 बार दीवाली के मौके पे उसकी सफाई होती है.तुम वाहा रह सकते हो."

"मगर.."

"अगर-मगर छ्चोड़ो."

"मोना,तुम्हारे पति कहा पोस्टेड हैं?"

"छ्चोड़ो ना तुम्हे क्या करना उस से.",मोना ने बात टालने की कोशिश की.

"बताओ,मोना."

"क्राइम ब्रांच & वो इस केस को देख रहे हैं."

"मोना,अब मैं..-"

"-..तुम्हे मेरी कसम..",मोना ने उसकी बात काटी,"..तुम 3 दिन यहा रहोगे फिर चाहे जहा जाओ.",उसकी आँखो मे जो निश्चय था उसके सामने और सवाल करने की गुंजाइश अब रह नही गयी थी.वरुण ने सर झुका लिया.

"कुच्छ खाया है?",उसने इनकार मे सर हिलाया.

"बैठो.मैं कुच्छ लाती हू.",मोना घर की सभी खिड़किया बंद करने के बाद रसोई मे चली गयी.

...............................................

"आख़िर वो लड़का था कौन?",अरशद बिस्तर पे पाँव फैलाए उसके हेडबोर्ड से टेक लगाए बैठा टीवी पे न्यूज़ देख रहा था.

"हां,यही बात तो मेरी भी समझ मे नही आ रही कि आख़िर वो था कौन जोकि हमारी तरह ही इस बच्चे को उठाना चाहता था.",दीप्ति अरशद के बाई तरफ लेटी उसका लंड चूस रही थी.सवाल सुन उसने लंड को मुँह से तो निकाल लिया मगर उसे हिलाते ही रही.

"इसके बारे मे पता करना तो ज़रूरी है..",अरशद ने उसका मुँह वापस अपने लंड पे झुकाया,"..पर 1 बात अच्छी हुई है कि अभी पोलीस इस छोकरे को ढूँढने मे लगी है."

"मगर अरशद..",दीप्ति ने दोबारा उसके लंड को चूसना छ्चोड़ा,"..वाहा जो भी मौजूद था,उसने ये देखा होगा कि हमने लड़के को उस से छ्चीन लिया.तो हम ख़तरे से पूरी तरह बाहर तो नही हैं."

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कामुक कहानियाँ

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क्रमशः........

KHEL KHILADI KA paart--46

gataank se aage............-

"B,tum aaj raat aaram karo.",A ne B ko uska kamra dikhaya,"..C & D,tum dono abhi pehre pe raho.4 ghante baad main & E tumhari jagah aa jayenge."

"ok,A",D ne bola & us kamre ke bahar jisme Anish qaid tha 1 mez & 2 kursiya laga ke tash ki gaddi,cigarette ke packets & pani ki bottle rakh ke C ke sath baith gaya.

A basement se upar aaya & apne kamre me dakhil ho darwaza band kar liya.uski umra koi 30 baras ke aas-paas thi magar shakl-surat se vo 24-25 se zyada ka nahi lagta tha.uska 6'2" lamba jism kasrati tha & uski furti ka namuna kuchh hi der pehle varun ne dekha tha jab pure gang ne anish ko us se chheena tha.

kamre me ghuste hi A ke hotho pe muskan fail gayi.E jiska naqli naam Shobha & asli Dipti tha,apne kapde utar rahi thi.uski nangi pith A ki or thi & vo apni jeans utar rahi thi.aahat hone pe usne gardan ghumai & vo muskura di.dipti ka kad 5'3"tha & vo bahut gori nahi thi lekin uska rang kam bhi nahi tha.uski surat bhi koi bahut zyada hseen nahi thi magar 1 ajib si kashish thi uske chehre ,uski aankho me jo mardo ko apna deewana bana leti thi.uska badan to jaise sanche me dhala tha.24 baras ka jawan jism bilkul kasa hua tha.A ki nazre to uski kali panty me qaid 36 inch ki gand se hat hi nahi rahi thi & vo apne kapde utrata bas usi ang ko ghure ja raha tha.26 inch patli kamar ke neeche chaudi gand dekh ke to shayad koi namard bhi josh se bhar uthata.

"yaha bhi A hi bulaoon tumhe?",dipti ghumi & apni 36C size ki chhatiya jinpe bhure nipples the A ke samne kar diye.

"to aur kya bulana chahti ho?,puri tarah se nanga A panty utarti dipti ke karib aaya & uske hatho se panty leke use sungha & fir use pare uchhal diya & uski kamar ko pakad uska jism apne jism se sata liya & uski gand ko apne hatho tale maslate hue uske chehre ko chumne laga.

"jungli..zalim..vehshi....ye bulana chahti hu..aahh..haa...haa..!",dipti uski baaho me kasmasate hue hansne lagi.uski is ada ne A ko aur josh se bhar diya.vo uski gand ko & zor se bhinchte hue uski gardan chumne laga.

"oh..Arshad..",yehi naam tha uska,"..aahhhh..unhhhh..",dipti bhi apne aashiq ki harkato se garam hone lagi thi.arshad ka 8 icnh lumba lund dono jismo ke beech daba hua tha & uske pet pe uska garam ehsas use pagal kar raha tha.arshad ne sar jhuka ke uski kasi chhatiyo ko apne munh ka nishana banaya to dipti ke badan me bijli daudne lagi.uski aahen aur mast ho gayi & vo arshad ke baalo ko nochne lagi.uski chut me kasak uthne lagi thi & thoda-2 pani bhi risne laga tha.

"umm....yaha kitne din rehna hoga hume..oow.!",arshad ne uske baye nipple ko danto se kaat liya tha.

"agar sab thik raha to 10 dino ke andar hi kaam nipta ke hum yaha se nikal jayenge.",usne uski bayi choochi ko daye hath me bhar ke zor se dabaya & fir apni mutthi se nikle uske bhure nipple pe jibh chalane laga.

"..uunnhhhh....Mohan Lal ki dukan lootne ke baad itni jaldi yaha aana kya thik hai?..umm..",usne daye hath ko neeche le ja arshad ke lund ko pakad liya & use pyar se sehlane lagi.

"khatra to hai janeman magar is baar bahut mota maal hath aane vala hai.iske baad chahe to kafi dino tak aish kar sakte hain.",arshad ne uski choochiya chhodi & use ghuma diya to dipti deewar pe dono hath jama ke khadi ho gayi.arshad apne panjo pe baith gaya & dipti ki makhmali jangho ko failaya & unhe sehlate hue peechhe se apni jibh uksi chut me fira di.

"aahhh....oohhhh....!",dipti aahe bharti hui apne aashiq ki jibh ki harkato se masti me kho gayi & uski chut se ras ki dhara behne lagi.kayi palo tak arshad uski chut chatata raha & jaise hi jhadti hui dipti ka jism akda & vo deewar chhod zamin pe girne lagi arshad uth khada hua & uski kamar ko tham use baayi taraf ghumaya to usne apne hath vaha rakhe shelf pe jama diye & apni gand nikalte hue jhuk gayi.

arshad ne pyar se uski gand ko sehlaya & uski kamar pakad 1 hi jhatke me apna lund peechhe se uski nazuk chut me ghusa diya.

"aiyyeeee..!",dipti chikhi magar uske hotho pe muskan fail gayi.arshad ka mota lund har baar use jismani khushi ki nayi-2 manzilo se vakif karata tha.arshad khada uski jangho & gand ki fanko ko sehlata use chod raha tha.

"ab yaha dard to nahi hota?",dipti ki gand ki dayi fank pe 1 tattoo bana hua tha-1 fan kadhe sanp ka.

"uunnnn...nahi..janu...aahhhhh...!",arshad aage jhuka & apne hath dipti ke hatho ke upar jama diye & uske daye kandhe ko chumne laga.

"tumhe to bahut dard hua hoga na?..oonnhhhh..!",usne arshad ki dayi kalai ko sehlaya & uspe lage wrist band ko utar diya.uski kalai ke gird vaisa hi tattoo bana tha,lagta tha sanp uski kalai pe lipta baitha hai.

"haan,thoda sa.",vo fir se uth khada hua tha & uske hath dipti ki makhmali pith se fisalte hue uski baglo ko sehlate hue uski moti choochiyo ko masal rahe the.

"janu....hum sabne ye tattoo kyu banwaya hua hai?",arshad ka daya hath uski choochiyo ko daboch raha tha & baya uski gand ki bayi fank & kamar ki bagal me golai me ghum raha tha.

"bas aise hi meri jaan.B ke gale pe dekh mujhe ye bahut achha laga to maine bhi banwa liya & fir mujhe khayal aaya ki kyu na hum sab ye apni marzi ki jagah pe banwa len.par tum 1 baat batao?",arshad ke dhakke bahut tez ho gaye the & dipti ab masti me chilla rahi thi,"..oow...aaaaahhhhh.....!",shelf pe usne apne nakhuno ke nishan chhod diye,uski chut me uth rahi kasak ab apne charam pe pahunch gayi thi & uska jism masti se sarabor ho chuka tha.arshad ke gehre dhakke pe uski chut ke sabr ka bandh tut gaya & vo jhad gayi & uski chut se ras ki nadi behne lagi.

arshad ne lund bahar khincha & dipti ko baaho me utha liya & bistar pe le gaya.bistar pe letate hi dipti ne apni tange & baahe faila di.arshad uski tango ke beech aaya & lund ki nok uski chut ki darar pe rakha.dipti ne hath aage badha ke lund ko pakad uska supada apni chut me dala,"kya puchh rahe the?"

"ki tumne ye tattoo apmni gand pe kyu banwaya?",arshad ne lund bas aadaha andar dhakela.

"umm...kyuki tumhe meri gand kuchh zyada hi pasand hai.",dipti ka dilkash chehra masti ki khumari me aur bhi haseen lag raha tha.arshad ne kuchh halke dhakke lagaye to lund fisal ke chut se bahar aa gaya,"..off oh..!",dipti jhalla gayi.

"aur apne baal kyu chhote karwa liye tumne?",arshad ka ishara dipti ke gardan se upar tak kate baalo pe tha.

"tumhi ne to kaha tha ki huliya badalna hai!",dipti ne lund ko pakad dobara apni chut ka rasta dikhaya & is baar usne pure lund ko chut me ghusa kar hi apna hath uspe se hataya,"..ab ye bekar ki baate chhodo..",usne arshad ki banh pakad use pane upar lita liya & apni narm baahe & sudol tango me uske jism ko qiad kar liya,"..& mujhe jum ke chodo.",arshad muskuraya & apni mehbooba ke hotho se apne honth sata diye & dhakke lagate hue uski chudai karne laga.

Varun police colony me ghus to gaya tha magar ab uski samajh me nahi aa raha tha ki aage kya kare.shuru me 4 manzile quarters bane the jinme dakhil hona to bahut hi mushkil dikhayi de raha tha.vo raste pe aage badha to use ab 1 manzil ke abde quarters dikhayi dene lage.in sabhi quarters ke aage chhota sa lawn & peechhe ki taraf 1 garage & 1 kamre ka servant quarter bana tha.yaha use kuchh umeed nazar aayi magar khatra bahut zyada tha.1 zara si galti use seedha salakho ke peechhe pahuncha sakti thi.

har quarter ke lagbhag sare kamro ki battiyan jali dikh rahi thi yani sabhji ke andar pura ka pura parivar maujood tha.vo chhipta-chhipaata sabhi quarters ko dekhta raha ki tabhi uske kano me aavaz aayi,"main ja raha hu,memsaab.darwaza band kar lijiye."

quarter ke main darwaze se 1 aadmi nikal raha tha jo dekhne se ardali lag raha tha.vo nikla & peechhe bane servant quarter me jane laga.lawn ke kinaro pe ugi oonchi jhadiyo ke peechhe khada varun ye sab dekh raha tha ki tabhi 1 ladki aayi & usne darwaza band kar diya.

Meghna ne bahadur ke jate hi darwaza band kiya & fir apne kamre se attached bathroom me chali gayi.Ajit ne fone kar diya tha ki aaj raat vo ghar nahi lautega,vo Pradhan kidnapping case me busy tha.meghna ne lambhi dhili skirt & taop pehna hua tha.usne top nikala & washbasin pe khade ho munh dhone lagi.thik usi waqt varun 1 khuli khidki se ghar ke andar dakhil hua.

"Mona.",aavaz sun jhuk ke munh dhoti meghna chaunki....is naam se to bas aaj tak 1 hi shakhs ne use bulaya tha,"..varun..!",hairat se meghna ki aankhe phat gayi & uska hath uske munh pe chala gaya.uske dimagh me uthal-puthal mach gayi thi....sari duniya ke liye meghna ho tum magar mere liye meri mona....varun ke alfaz uske zehan me gunj rahe the....& tum mere varun....dono hi ki aankhe nam ho gayi thi.

"tum yaha kaise ?",bharraye gale se bas itni hi aavaz nikal payi meghna ke.

"tum change kar lo fir batata hu.",varun ki nazre 1 pal ko safed bra me se jhankte meghna ke doodhiya cleavage pe padi & vo fir palat ke bahar chala gaya.meghna ko tab apne haal ka ehsas hua & uska chehra sharm se laa ho gaya.usne bathroom ka darwaza band kar diya & us se pitha laga ke aankhe meench khadi ho gayi.

....dil me jo jazbato ki oohapoh thi vo aankho ke raste behne lagi.megna ne nal tez kar diya & subakne lagi.jab sara gubar nikal gaya to usne munh dhoya & kapde badalne lagi....varun ne use bra me dekha to kya use vo beete din yaad aaye honge?..use kali se phool varun ne hi to banaya tha...kitna nasha,kitna maza tha uski chudai me.uske jism ka to deewana tha vo..to kya aaj bhi..nahi!ab vo 1 shadishuda aurat thi..ab nahi!usne vishwas bhari nazro se khud ko shishe me dekha & bathroom se bahar aayi.

varun bistar ke kone pe baitha tha.meghna ko bahar aata dekh vo uth khada hua,"tum mujhe dekh ke hairan ho & pareshan bhi."mvarun ke hotho pe udas si muskan thi,"..magar main majburi me tumhare paas aaya hu,mona.",& usne apne jail se chhutne se leke abhi tak ki sario dastan suna di.

"tum pagal ho kya varun?!",meghna ki bhave sikudi hui thi,"..pehle to tum apradhi nahi the magar ab banane ja rahe the!"

"to kya karta?!",varun ki aavaz tez ho gayi,"..mujhe jo saza mili vo kya sahi thi?..to fir kya galat kar raha tha main jo pradhan ko uske kiye ki saza de raha tha!"

"to ab yu chhupte kyu fir rahe ho?!",meghna ne dhikkar bhari hansi hansi,"..jao & seedha pradhan ke ghar me ghus ke usko maar do ya fir uska 1 aur beta hai uska kidnap kar lo!"

"tumhe meri madad nahi karni to mat karo magar yu meri beizzati na karo.",varun kamre se bahar jane laga to meghna ne aage badh ke uski dayi banh tham li & use apni or ghumaya.

"apni beizzati tum khud kar rahe ho,varun.",varun ne dekha to use vahi pehle ki uske sath college jane wali uski girlfriend mona nazar aayi,"mana ki tumhare sath nainsafi hui magar uske baad tum us nainsafi ka badla aise le rahe ho 1 kayar ki tarah!Varun Awasthi joki har mushkil ka samna seena tane karta tha aaj 1 masoom ko kidnap kar raha tha taki uske baap se badla le sake?!",ye sawal to varun ke zehan me bhi uthata tha magar har baar varun use daba deta tha.aaj mona uski antaratma ban uske samne khjadi thi & vo is sawal se kinara nahi kar sakta tha.

"varun,1 baat batao aisa karne se tum me & pradhan me kya fark reh jata?..manti hu ki kanoon ke raste adalat ka darwaza khatkhatate to pata nahi kitna waqt lagta magar varun us ladai ke baad mili jeeta ka swad is jeet se to kahi zyada meetha hota.",varun sar jhukaye khada tha.mona ki baato ki sachchai ne use sharminda kar diya tha,"..& varun us ladai me mada ke liye main khud tumhare sath khadi ho jati.",varun ne chaunk ke upar dekha.

"haan..shadishuda hu to kya hua main bhi insan hu & kisi ke sath nainsafi hote to main bhi bardasht nahi kar sakti.jab tum jail me the to maine papa se kaha ki hume tumhari madad karni chahiye magar vo to ladki ke pita the!",meghna ne udas si hansi hansi,"..unhe to ulta ye darr lag gaya ki kahi is chakkar me meri shadi hi na ho & fir parivar ki izzat ka kya hota!",meghna khamosh ho gayi.varun ne use dekha to use ehsas hua ki vo idhar kitna swarthi ho gaya tha,use apna ghum sabse bada lagta tha.mona ne bhi to jhela tha na uske chalte.usne apna baya hath meghna ke kandhe pe rakha to vo ghumi.

"ab kya karoge?"

"mujhe chhupne ki jagah chahiye fir 1 aadmi hai uske paas madad ke liye jaoonga.",vo Musa ke bare me soch raha tha joki 2-3 dino me jail se bahar aane vala tha.

"vo bhi koi zarayampesha hi hoga?"

"haan,par tum hi batao mona ki ab main kya karu!aisi musibat me to mujhe aise hi logo ka sahara lena padega na.abhi police ke paas jaoon to vo ye jante hue bhi ki main bekasur hu meri halat khasta kar denge & fir kahi kuchh gadbad ho gayi to mujhe bali ka bakra bana denge."

"sab police vale aise nahi hote.",varun samajh gaya ki vo apne pati ke bare me keh rahi hai.uske dil me tees si uthi.

"maana ki sabhi aise nahi hote magar zyadatar aise hi hote hain & kahi mera pala aise kisi se pad gaya to fir.."

"hun.tumhe kitne dino ke liye chhupna hai?"

"3 din."

"thik hai.tum yaha raho."

"nahi,mona.main tumhe kisi khatre me nahi dal sakta & fir.."

"& fir?"

"tumhari shadi ho chuki hai,mona.tumhare pati ko pata chala to..",varun ne jaldi se baat khjatn ki,"..nahi mona main tumhari khushal zindagi me zehar nahi ghol sakta."

"keh liya to ab meri suno.is quarter ki chhat pe 1 kamra hai jise hum store ki tarah istemal karte hain.saal me bas 1 baar diwali ke mauke pe uski safai hoti hai.tum vaha reh sakte ho."

"magar.."

"agar-magar chhodo."

"mona,tumhare pati kaha posted hain?"

"chhodo na tumhe kya karna us se.",mona ne baat talne ki koshish ki.

"batao,mona."

"crime branch & vo is case ko dekh rahe hain."

"mona,ab main..-"

"-..tumhe meri kasam..",mona ne uski baat kati,"..tum 3 din yaha rahoge fir chahe jaha jao.",uski aankho me jo nishchay tha uske samne aur sawal karne ki gunjaish ab reh nahi gayi thi.varun ne sar jhuka liya.

"kuchh khaya hai?",usne inkar me sar hilaya.

"baitho.main kuchh lati hu.",mona ghar ki sabhi khidkiya band karne ke baad rasoi me chali gayi.

"Aakhir vo ladka tha kaun?",Arshad bistar pe panv failaye uske headboard se tek lagaye baitha tv pe news dekh raha tha.

"haan,yehi baat to meri bhi samajh me nahi aa rahi ki aakhir vo tha kaun joki humari tarah hi is bachche ko uthana chata tha.",Dipti arshad ke bayio taraf leti uska lund chus rahi thi.sawal sun usne lund ko munh se to nikal liya magar use hilate hi rahi.

"iske bare me pata karna to zaruri hai..",arshad ne uska munh vapas apne lund pe jhukaya,"..par 1 baat achhi hui hai ki abhi police is chokre ko dhundane me lagi hai."

"magar arshad..",dipti ne dobara uske lund ko chusna chhoda,"..vaha jo bhi maujood tha,usne ye dekha hoga ki humne ladke ko us se chheen liya.to hum khatre se puri tarah bahar to nahi hain."


raj..
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Re: खेल खिलाड़ी का

Unread post by raj.. » 09 Dec 2014 15:56

खेल खिलाड़ी का पार्ट--47

गतान्क से आगे............-

"हां,मेरी जान.",अरशद झुका & अपनी महबूबा के भरे-2 होंठो को चूम लिया,"..मगर पोलीस के पास उस लड़के को छ्चोड़ & कोई सुराग नही है.इस वक़्त उनका प्लान होगा कि उस लड़के को ढूंडे & उस से ये जाने कि हम कौन थे..कही हमारी उसकी दुश्मनी तो नही & इसमे वक़्त लगेगा जोकि हमारे लिए अच्छा होगा."

"बच्चे के घर पे फोन कब करोगे?",दीप्ति की उंगलिया अरशद के आंडो को सहला रही थी.

"परसो.उसने ऐसा ही करने को कहा है.अब प्लान मे कुच्छ चेंज होता है तो और बात है."

"तुम्हे वो अजीब नही लगता?",दीप्ति ने अरशद के लंड के सुपडे पे जीभ फिराई तो अरशद उसकी गंद को दबाने लगा.

"हमारे धंधे मे सभी अजीब होते हैं,डार्लिंग.",तभी उसकी नज़र घड़ी पे पड़ी,"..अरे,4 घंटे हो गये.चलो,सी & डी को उनकी ड्यूटी से आराम दें.",दोनो बिस्तर से उतर के कपड़े पहनने लगे.

ए,बी,सी,डी & ई-ये पाँचो बिल्कुल अलग किस्म के लोग थे मगर जुर्म या फिर प्यार या दोस्ती ने इन सब को 1 साथ 1 गेंग बनाके रखा हुआ था.इन सब मे सबसे ज़्यादा उम्र वाला था बी यानी बालू.फौज से निकलने के बाद बालू के जुए की लत ने उसे जुर्म का सहारा लेने पे मजबूर कर दिया.वो हथियारो का एक्सपर्ट था & बहुत ही दिलेर भी.उसकी कोई कमज़ोरी थी तो वो थी पत्ते.ताश देखते ही वो पागल हो जाता था & जुआ अब उसके खून के साथ बह रहा था.

इस बी की मुलाकात ए से 1 जुएखाने मे ही हुई थी.ए यानी अरशद इस गॅंग का लीडर था.ए 1 बड़े अच्छे ख़ानदान से था मगर उसके वालिद की मौत के बाद परिवार थोड़ा बिखर सा गया.उस वक़्त ए बस 14 साल का था.उसकी मा जब अपने खाविंद की मौत के गम से उबरी तो उसे ये नयी आज़ाद ज़िंदगी बड़ी रास आई & वो अपने यारो मे खो अपने बच्चे से बेरूख़् हो गयी.अरशद को पढ़ने का बड़ा शौक था & वो बड़े अच्छे नंबर्स से स्कूल पास करने के बाद कॉलेज मे दाखिल हुआ जहा कि अपने दोस्तो की पैसे की मुश्किलो को सुलझाने के लिए पहले उसने छ्होटी-मोटी धोखाधड़ी की & फिर धीरे-2 संगीन जुर्म करने लगा.

यही उसकी मुलाकात डी यानी देव से हुई.देव & बालू लगभग 1 ही उम्र के थे मगर देव पेशेवर अपराधी था.पैसो के लिए वो क़त्ल छ्चोड़ कोई भी काम कर सकता था.अरशद ने उसके साथ मिलके काम करना शुरू किया तो दोनो को बहुत फ़ायदा हुआ.अरशद का तेज़ दिमाग़ & नयी सोच & देव का तजुर्बा जब मिले तो दोनो पे पैसो की बारिश होने लगी & फिर जब उनके साथ बालू आया तब तो फिर उनकी कामयाबी और ज़्यादा बढ़ गयी!

और फिर अरशद 1 क्लब मे दीप्ति से टकराया.दीप्ति की कहानी भी उसी के जैसी थी & दोनो को 1 दूसरे के करीब आते,1 दूसरे के दिलो मे जगह बनाते कोई ज़्यादा वक़्त नही लगा.दीप्ति दिलेर भी थी & पैसो के लिए अपना जिस्म इस्तेमाल करने से उसे परहेज़ भी नही था.उसके आने के बाद तो गॅंग के लिए ख़तरा और भी कम हो गया.दीप्ति के रूप के जाल मे फँसा शिकार जब उसके जिस्म मे उतरने को तैय्यार होता तभी ये तीनो उसपे हमला कर देते.बेचारा शिकार बदनामी के डर से बात दबा जाता था & इस तरह से उनका गॅंग क़ानून के शिकंजे से बचा हुआ था.

इस गॅंग का सबसे कम उम्र का मेंबर सी यानी चार्ली 1 अनाथ था जोकि बड़ी छ्होटी उम्र मे ही इस दुनिया की कड़वी अछाईयो से वाकिफ़ हो गया था.उसी ने अरशद का ध्यान इस ओर दिलाया था कि सभी के नाम अँग्रेज़ी के आल्फबेट के पहले 4 लेटर्स से शुरू हो रहे हैं.जब इस किडनॅपिंग के दौरान कोड नामे रखने की बात आई तो सभी ने चार्ली की बात मान ए,बी,सी,डी नाम रखे & दीप्ति ने खुद को ई बना लिया क्यूकी डी नाम देव का था.

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"क्या?!!",जसजीत प्रधान गुस्से से भरा हुआ था,"जेसीपी साहब,आप मेरे बच्चे की ज़िंदगी 1 अंजान आदमी के हाथो मे कैसे दे सकते हैं?!"

"मिस्टर.प्रधान,प्रोफेसर अजिंक्या दीक्षित को आप कोई ऐरा-ग़ैरा मत समझिए.वो बहुत काम का आदमी है.",दोनो प्रधान के बुंगले की स्टडी मे थे.

"है तो वो 1 राइटर ना!..उसे क्या पता क्या ख़तरा है इसमे..उसे पता है क्या कि जब असलियत मे गोली चलती है तो क्या होता है?!",प्रधान की आवाज़ मे गुस्सा & बच्चे की चिंता झलक रही थी.

"जी हां,प्रधान साहब,अजिंक्या दीक्षित जानता है कि गोली जब लगती है तो उस वक़्त कैसा दर्द होता है..",जेसीपी सिंग & प्रधान चौंक गये,दरवाज़ा खोल प्रोफेसर अंदर दाखिल हो रहा था,"..शुरू मे लगता है जैसे कोई चीज़ चुभि मगर उसके बाद बहुत ही तेज़ दर्द होता है & अपने खून की गर्मी का एहसास जब अपनी ही स्किन पे होता है तो दिल मे ख़ौफ़ भर जाता है."

"माफी चाहत हू यू इस तरह दाखिल हुआ.मैं ही हू अजिंक्या दीक्षित.",प्रधान ने बस सर हिलाया,"..सर,आप बुरा ना माने तो मैं बस इनसे अकेले मे बात करू?"

"ज़रूर,अजिंक्या.",सिंग साहब को उसके आने से राहत हुई थी.वो उठे & स्टडी से बाहर चले गये.

"सवाल आपके बच्चे का है मिस्टर.प्रधान & आपका हक़ बनता है कि आप मेरे बारे मे सब जाने.",प्रोफेसर ने अपने बारे मे बताना शुरू किया & प्रधान की आँखे हैरत से फट गयी.

"आइ'एम सॉरी,प्रोफेसर.",प्रोफेसर ने जब अपनी दास्तान कह ली तो कुच्छ पलो की चुप्पी के बाद जसजीत बोला,"मैने बिना जाने आपके उपर सवाल उठाए....पर मैं बहुत परेशान हू..अनीश कहा है किस हाल मे..ये सोच-2 के मेरा दिमाग़ फटा जा रहा है."

"यकीन मानिए,मैं समझ सकता हू.म्र्स.प्रधान कैसी हैं?"

"अभी तो डॉक्टर ने उसे नींद की गोली देके सुलाया है.वो खुद को इस बात का ज़िम्मेदार मान रही है."

"हूँ.मिस्टर.प्रधान मुझे अनीश के बारे मे बताइए.",स्टडी टेबल पे अंजलि & दोनो बच्चो की रखी तस्वीरो की तरफ प्रोफेसर ने देखा.

"अनीश हमारी पहली औलाद है,प्रोफेसर & सभी की आँखो का तारा है.उसकी पैदाइश यही डेवाले मे हुई थी..",& प्रधान ने अनीश के बारे मे पुच्छे प्रोफेसर के हर सवाल का जवाब दिया.

"थॅंक यू,मिस्टर.प्रधान.मैं आपके बच्चे को वापस लाने मे कोई कसर नही छ्चोड़ूँगा पर उसे इस मुश्किल मे डालने वालो को पकड़ना मेरी ज़िम्मेदारी नही है."

"ठीक है,प्रोफेसर.उन्हे तो मैं खुद देख लूँगा.",जसजीत की आवाज़ मे जो कठोरता थी उसने प्रोफेसर को चौंका दिया..औलाद का प्यार इंसान को क्या से क्या बना देता था.

"जी.",प्रोफेसर स्टडी से बाहर निकल आया.जेसीपी सिंग,डीसीपी वेर्मा,दिव्या,अजीत समेत लगभग पूरा का पूरा क्राइम ब्रांच वाहा मौजूद था.

"मुझे अब आपलोगो से आख़िरी बार सारी बाते सॉफ करनी है.",प्रोफेसर जेसीपी साहब से मुखातिब था.

"वो घर & फोन लाइन कहा दे रहे हैं मुझे?"

"लोहिया पार्क मे 1 कोने का बुंगला है जिसमे 4 कमरे हैं.वाहा तुम,एसीपी दिव्या माथुर & 1 और अफ़सर तुम्हारे साथ रहेगा.फोन नंबर की 10 लाइन्स को पोलीस के ऑपरेटर्स कल सवेरे 10 बजे से हॅंडल करना शुरू करेंगे.उनकी हर कॉल को कोई ना कोई एसीपी रंक का अफ़सर वही क्राइम ब्रांच मे सुनता रहेगा & जैसे ही कोई काम की कॉल लगेगी उसे तुम्हारे बंगल के फोन पे फॉर्वर्ड कर दिया जाएगा."

"..तुम्हारे घर की सिक्यॉरटी कड़ी रहेगी मगर इस तरह से की आस-पास रहने वालो को ज़रा भी शक़ ना हो की वाहा पोलीस के लोग हैं."

"सर,जब भी किडनॅपर्स कॉंटॅक्ट करेंगे तो आप उनकी कॉल ट्रेस करने की कोशिश करेंगे मगर आप उन्हे पकड़ने की कोशिश नही करेंगे."

"व्हाट?",जेसीपी साहब चौंके.

"सर,अजिंक्या किडनॅपर्स को ये यकीन दिलाना चाहता है कि वो उनसे सौदा करने को तैय्यार है & पोलीस उन्हे कोई नुकसान नही पहुचाएगी.",डीसीपी वेर्मा ने अपने सीनियर अफ़सर को समझाया.

"मगर वेर्मा ?"

"सर,मैने पहले कहा था कि मैं अपनी शर्तो पे काम करूँगा & मेरा मक़सद बस बच्चे को सही-सलामत वापस लाना है."

"ओके.",सिंग साहब को ये बात बिल्कुल पसंद नही आई थी.

"मैं सवेरे 7 बजे तक उस बंगल मे शिफ्ट हो जाऊँगा,सर."

"ओके,अजिंक्या.बेस्ट ऑफ लक."

"थॅंक यू,सर."

"मोना,प्लीज़..मैं तुम्हारे कमरे मे कैसे सो सकता हू?"

"तो दूसरे कमरे मे सोके खुद को & मुझे,दोनो को उलझन मे डालो.",मेघना ने बिस्तर की चादर ठीक की.वरुण खामोश खड़ा रहा,"सवेरे-2 मैं तुम्हे उपर स्टोर मे च्छूपा दूँगी लेकिन तब तक तुम्हे यही रहना होगा."

"पर अगर किसी दूसरे कमरे मे सोऊ तो क्या हर्ज़ है?"

"हर्ज़ ये है कि उस कमरे मे चलते एसी या जली बत्ती देख अगर किसी को ये शक़ हो गया कि मेरे अलावा भी घर मे कोई है तो मेरी इज़्ज़त का क्या होगा?",बात तो मोना ने ठीक कही थी.

"ठीक है मगर मैं यहा फर्श पे सोउँगा."

"ठीक है.",मेघना ने चादर उठाई & वरुण का बिस्तर बेड के बगल मे फर्श पे लगाने लगी.

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नीना अपने पति & बेटे के साथ अपने जेठ के घर पे ही थी.उसे भी समझ नही आ रहा था कि आख़िर उसके जैसे & कौन सोच रहा था.तभी उसका मोबाइल बजा,महेश अरोरा उसे फोन कर रहा था,"हेलो."

'सब गड़बड़ हो गया."

"नही,कुच्छ भी गड़बड़ नही हुआ है.",नीना हल्के से मुस्कुराइ.दरअसल महेश का प्लान अनीश को नही अंजलि को किडनॅप करने का था.नीना ने हीरा को अपने हुस्न के जाल मे फँसा के उस से ये राज़ उगलवा ही लिया था.महेश & नीना ने अनीश को अगवा करने का तय किया था & महेश का इस तरह से उस से छिपा के प्लान बदलने से उसने उसपे भरोसा करना अब छ्चोड़ दिया था.

"क्या बक रही हो?",महेश की खिज सॉफ झलक रही थी.

"देखो,हमे बच्चे के अगवा होने से मतलब था ना.",नीना ने आसपास देखा कि कोई उसे सुन तो नही रहा था,"..तो वो हो गया.अब जसजीत परेशान रहेगा & हमारा रास्ता सॉफ रहेगा."

"हूँ..वो तो है..मैने हीरा & उसके साथी को कुच्छ पैसे पकड़ा दिए हैं मगर अब करें क्या?!"

"कुच्छ नही..1-2 दिन देखते हैं क्या होता है फिर सोचते हैं."

"ओके.",फोन काट गया.

अब जो करना है मुझे करना है..तुम अब किसी काम के नही महेश अरोरा..तुमने मुझे धोखा देने की सोची भी कैसे?..तुम्हे तो बाद मे देखूँगी..अभी तो मैं बस इस मौके का फ़ायदा उठा लू.

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अंधेरे कमरे मे मेघना बिस्तर पे & वरुण फर्श पे खामोश लेटे थे.दोनो की आँखो से नींद कोसो दूर थी & दोनो बीते दीनो की याद मे खोए थे....वक़्त भी क्या-2 खेल खेलता है!..1 वक़्त वो था जब दोनो ऐसी तन्हाई के लिए तरसते थे & आज जब तन्हाई थी तो दोनो के बीच ऐसी दूरियाँ आ गयी थी जो शायद ही कभी कम होती.

अरसे बाद वरुण को अपनी टाँगो के बीच हरकत होती महसूस हो रही थी.बाथरूम मे उसकी निगाह मेघना के सीने पे गयी थी & अभी उसके ज़हन मे वही कटाव घूम रहा था.मेघना वक़्त के साथ और खूबसूरत हो गयी थी.

मेघना को भी बीती बातें याद आ रही थी.उसकी चूचियो को चूस्ते हुए वरुण पागल हो जाता था.अपने मुँह मे 1 चूची को भर वो तब तक चूस्ता जब तक उसकी सांस उसे इजाज़त देती & मेघना का जोश के मारे बुरा हाल हो जाता.दिल ने वो रंगीन लम्हा याद किया तो जिस्म मे कसक सी उठी उसने करवट ले अपनी कसमसाती चूत को जाँघो के बीच भींच उसे शांत करने की कोशिश की & आँखे बंद कर सोने की कोशिश करने लगी.

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"सर,क्या हम प्रोफेसर की सारी शर्ते सच मे मान रहे हैं?",डीसीपी वेर्मा ने अपने बॉस से पुचछा,"नही ना?"

"आप खुद समझदार हैं,वेर्मा साहब.",जेसीपी सिंग मुस्कुराए.

"ओक,सर.लोहिया पार्क वाले मकान मे तो वैसे अभी हमारे आदमी बग्स लगा रहे हैं मगर मैं एसीपी नामित भट्ट को भी कह दूँगा कि वो मकान की हर बात के बारे मे हमे इनफॉर्म करता रहे & प्रोफेसर जो भी कहे कॉल ट्रेस होते ही हम अपने आदमी उन गुणडो के पीछे लगा देंगे."

"गुड."

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ठीक सवेरे 5 बजे प्रोफेसर अजिंक्या दीक्षित बंगल पे पहुँच गया था.पोलीस वालो ने ये सोचा ही नही था क्यूकी उसने 7 बजे का वक़्त दिया था.बंगल के अंदर प्रोफेसर ने अपने कमरे के जायज़ा लिया & अपने बेड के उपर लगी पैंटिंग को देख के मुस्कुराया,वो जानता था की उसकी बाते सुनने के लिए पोलीस वालो ने कमरा क्या घर भर मे बग्स लगाए होंगे.उसके पीछे-2 1 पोलीस वाला कमरे मे उसका सूटकेस लिए आ गया था.प्रोफेसर ने उसे आँख के कोने से देखा & बाथरूम मे घुस गया.

उस कॉन्स्टेबल के कमरे से बाहर जाते ही प्रोफेसर बाहर आया & उस पैंटिंग को उठा के देखा,वाहा 1 बिजली का पॉइंट था जोकि गोल प्लास्टिक कवर से ढका था.प्रोफेसर ने फ़ौरन जेब से 1 स्विस नाइफ निकाली & उसके स्क्रु ड्राइवर से उस कवर के पेंच को खोल उसके पीछे देखा तो उसे बग सॉफ नज़र आया.उसने बग को बिना छेड़े कवर को वापस लगाया & उसके उपर पैंटिंग टांग दी.

कांमरे मे रखे फोन को उठा के भी उसने खोला तो वाहा भी 1 बग था.कमरे मे तीसरा बग कमरे के शेल्फ पे रखे प्लास्टिक के फूलो के गुलदस्ते मे छिपा था.अब प्रोफेसर को पता था कि बग कहा लगे हैं & उनकी संख्या से उसने उनकी रेंज का भी पता लगा लिया था.

7.30 बजे दिव्या अपना समान लिए वाहा पहुँची तो प्रोफेसर उसे घर की छत पे ले गया,"क्या बात है?"

"तुमसे कुच्छ बाते करनी हैं.",छत पे उनकी बातें सुने जाने का कोई ख़तरा नही था मगर प्रोफेसर जानता था कि अभी कोई ना कोई उपर ज़रूर आएगा.जब कंट्रोल रूम मे बैठे उनकी बाते सुनने की कोशिश करते लोग ये कहेंगे कि घर मे प्रोफेसर & दिव्या की बातो की कोई आवाज़ नही आ रही है तो फिर कोई ना कोई चेक करने तो उपर आएगा ही.प्रोफेसर को इस बात से कोई ऐतराज़ नही था,आख़िर पोलीस वाले अपना काम ही कर रहे थे मगर उन्हे पता नही था कि थोड़ी सी जल्दबाज़ी या 1 ग़लत कदम बच्चे की जान को ख़तरे मे डाल सकता था.

"देखो,नीचे मेरे कमरे मे बग्स लगे हैं,तुम्हारे कमरे मे भी ज़रूर होंगे."

"क्या?मगर क्यू?के डिपार्टमेंट को मुझपे भरोसा नही?",दिव्या गुस्से से बोली.

"वो बात नही है.वो बेचारे सिर्फ़ अपना काम कर रहे हैं.मैने तो तुम्हे बस बताया है."

'हूँ.",दिव्या को ये बात बहुत नागवार गुज़री थी.

"मुझे तुम्हे कुच्छ और भी बताना था."

"क्या?"

"तुम जानती हो कि मुझे ही इस काम के लिए क्यू चुना गया है?",दिव्या ने इनकार मे सर हिलाया.

"दिव्या,मैं भी तुम्हारी तरह 1 पोलीस अफ़सर था."

"क्या?!",दिव्या चौंक पड़ी.

"हां,मैने भी पोलीस फोर्स जाय्न की थी.घर मे पैसे की कोई कमी नही थी लेकिन मुझे ये काम बड़ा रोमांचक लगता था फिर मुझे कॉलेज के दीनो से ही अपराधियो की सोच मे बड़ा इंटेरेस्ट था.मुझे बड़ा आश्चर्या होता था कि आख़िर वो क्या बता थी जो 1 अपराधी को अपराध करने को उकसाती थी.."

"..मैने अपनी थीसिस भी इसी टॉपिक पे तैय्यार की थी फिर जब पोलीस अफ़सर बना तो अपने पढ़े हुए को अपने काम मे इस्तेमाल करने की कोशिश करने लगा.मेरी शुरुआती पोस्टिंग 1 देहात मे हुई & वाहा कुच्छ महीनो बाद ही गाँव की मुखिया की छ्होटी सी बेटी को 1 घायल डाकू ने अगवा कर लिया.एनकाउंटर हुआ था जिसमे उसके साथी मारे गये थे मगर वो बच गया था & अपनी जान बचाने के लिए उसने उस नन्ही जान को अपनी ढाल बना लिया.."

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कामुक कहानियाँ

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क्रमशः........

KHEL KHILADI KA paart--47

gataank se aage............-

"haan,meri jaan.",arshad jhuka & apni mehbooba ke bhare-2 hontho ko chum liya,"..magar police ke paas us ladke ko chhod & koi surag nahi hai.is waqt unka plan hoga ki us ladke ko dhoonde & us se ye jaane ki hum kaun the..kahi humari uski dushmani to nahi & isme waqt lagega joki humare liye achha hoga."

"bachche ke ghar pe fone kab karoge?",dipti ki ungliya arshad ke ando ko sehla rahi thi.

"parso.usne aisa hi karne ko kaha hai.ab plan me kuchh change hota hai to aur baat hai."

"tumhe vo ajeeb nahi lagta?",dipti ne arshad ke lund ke supade pe jibh firayi to arshad uski gand ko dabane laga.

"huamre dhandhe me sabhi ajeeb hote hain,darling.",tabhi uski nazar ghadi pe padi,"..are,4 ghante ho gaye.chalo,C & D ko unki duty se aaram den.",dono bistar se utar ke kapde pehanane lage.

A,B,C,D & E-ye pancho bilkul alag kism ke log the magar jurm ya fir pyar ya dosti ne in sab ko 1 sath 1 ganag banake rakha hua tha.in sab me sabse zyada umra vala tha B yani Balu.fauj se nikalne ke baad balu ke jue ki lat ne use jurm ka sahara lene pe majboor kar diya.vo hathyaro ka expert tha & bahut hi diler bhi.uski koi kamzori thi to vo thi patte.tash dekhte hi vo pagal ho jata tha & jua ab uske khun ke sath beh raha tha.

is B ki mulakat A se 1 juekhane me hi hui thi.a yani arshad is gang ka leader tha.a 1 bade achhe khandan se tha magar uske valid ki maut ke baad parivar thoda bikhar sa gaya.us waqt a bas 14 saal ka tha.uski maa jab apne khawind ki maut ke ghum se ubri to use ye nayi azad zindagi badi raas aayi & vo apne yaaroe me kho apne bachche se berukh ho gayi.arshad ko padhne ka bada shauk tha & vo bade achhe numbers se school paas karne ke baad college me dakhil hua jaha ki apne dosto ki paise ki mushkilo ko suiljhane ke liye pehle usne chhoti-moti dhokhadhadi ki & fir dhire-2 sangin jurm karne laga.

yehi uski mulakat D yani Deva se hui.deva & balu lagbhag 1 hi umra ke the magar deva peshevar apradhi tha.paiso ke liye vo qatl chhod koi bhi kaam kar sakta tha.arshad ne uske sath milke kaam karna shuru kiya to dono ko bahut fayda hua.arshad ka tez dimagh & nayi soch & deva ka tajurba jab mile to dono pe paiso ki barish hone lagi & fir jab unke sath balu aaya tab to fir unki kamyabi aur zyada badh gayi!

aur fir arshad 1 club me dipti se takraya.dipti ki klahani bhi usi ke jaisi thi & dono ko 1 dusre ke karib aate,1 dusre ke dilo me jagah banate koi zyada waqt nahi laga.dipti diler bhi thi & paiso ke liye apna jism istemal karne se use parhez bhi nahi tha.uske aane ke baad to gang ke liye khatra aur bhi kam ho gaya.dipti ke roop ke jaal me fansa shikar jab uske jism me utarne ko taiyyar hota tabhi ye teeno uspe humla kar dete.bechara shikar badnami ke darr se baat daba jata tha & is tarah se unka gang kanoon ke shikanje se bacha hua tha.

is gang ka sabse kam umra ka member C yani Charlie 1 anath tha joki badi chhoti umra me hi is duniya ki kadvi achaiyo se vakif ho gaya tha.usi ne arshad ka dhyan is or dilaya tha ki sabhi ke naam angrezi ke alphabet ke pehle 4 letters se shuru ho rahe hain.jab is kidnapping ke dauran code name rakhne ki baat aayi to sabhi ne charlie ki baat maan a,b,c,d naam rakhe & dipti ne khud ko e bana liya kyuki d naam deva ka tha.

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"kya?!!",Jasjit Pradhan gusse se bhara hua tha,"JCP sahab,aap mere bachche ki zindagi 1 anjan aadmi ke hatho me kaise de sakte hain?!"

"Mr.Pradhan,Professor Ajinkya Dixit ko aap koi aira-gaira mat samajhiye.vo bahut kaam ka aadmi hai.",dono pradhan ke bungle ki study me the.

"hai to vo 1 writer na!..use kya pata kya khatra hai isme..use pata hai kya ki jab asliyat me goli chalti hai to kya hota hai?!",pradhan ki aavaz me gussa & bachche ki chinta jhalak rahi thi.

"ji haan,pradhan sahab,ajinkya dixit janta hai ki goli jab lagti hai to us waqt kaisa dard hota hai..",JCP singh & pradhan chaunk gaye,darwaza khol professor andar dakhil ho raha tha,"..shuru me lagta hai jaise koi chiz chubhi magar uske baad bahut hi tez dard hota hai & apne khun ki garmi ka ehsas jab apne hi skin pe hota hai to dil me khauf bhar jata hai."

"mafi chahat hu yu is tarah dakhil hua.main hi hu ajinkya dixit.",pradhan ne bas sar hilaya,"..sir,aap bura na mane to main bas inse akele me baat karu?"

"zarur,ajinkya.",singh sahab ko uske aane se rahat hui thi.vo uthe & study se bahar chale gaye.

"sawal aapke bachche ka hai mr.pradhan & aapka haq banta hai ki aap mere bare me sab jane.",professor ne apne bare me batana shuru kiya & pradhan ki aankhe hairat se fat gayi.

"i'm sorry,professor.",professor ne jab apni dastan keh li to kuchh palo ki chuppi ke baad jasjit bola,"maine biona jane aapke upar sawal uthaye....par main bahut pareshan hu..Anish kaha hai kis haal me..ye soch-2 ke mera dimagh fata ja raha hai."

"yakin maniye,main samajh sakta hu.Mrs.Pradhan kaisi hain?"

"abhi to doctor ne use nind ki goli deke sulaya hai.vo khud ko is baat ka zimmedar maan rahi hai."

"hun.mr.pradhan mujhe anish ke bare me bataiye.",study table pe Anjali & dono bachco ki rakhi tasviro ki taraf professor ne dekha.

"anish humari pehli aulad hai,professor & sabhi ki aankho ka tara hai.uski paidaish yehi Devalay me hui thi..",& pradhan ne anish ke bare me puchhe professor ke har sawal ka jawab diya.

"thank you,mr.pradhan.main aapke bachche ko vapas lane me koi kasar nahi chhodunga par use is mushkil me dalne valo ko pakadna meri zimmedari nahi hai."

"thik hai,professor.unhe to main khud dekh lunga.",jasjit ki aavaz me jo kathorta thi usne professor ko chaunka diya..aulad ka pyar insan ko kya se kya bana deta tha.

"ji.",professor study se bahar nikal aaya.JCP singh,DCP Verma,Divya,Ajit samet lagbhag pura ka pura crime branch vaha maujood tha.

"mujhe ab aaplogo se aakhiri baar sari bate saaf karni hai.",professor JCP sahab se mukhatib tha.

"vo ghar & fone line kaha de rahe hain mujhe?"

"Lohia Park me 1 kone ka bungla hai jisme 4 kamre hain.vaha tum,ACP Divya Mathur & 1 aur afsar tumhare sath rahega.fone number ki 10 lines ko police ke operators kal savere 10 baje se handle karna shuru karenge.unki har call ko koi na koi ACP rank ka afsar vahi crime branch me sunta rahega & jaise hi koi kaam ki call lagegi use tumhare bungle ke fone pe forward kar diya jayega."

"..tumhare ghar ki securtiy kadi rahegi magar is tarah se ki aas-paas rehne valo ko zara bhi shaq na ho ki vaha police ke log hain."

"sir,jab bhi kidnappers contact karenge to aap unki call trace karne ki koshish karenge magar aap unhe pakadne ki koshish nahi karenge."

"what?",JCP sahab chaunke.

"sir,ajinkya kidnappers ko ye yakin dilana chahta hai ki vo unse sauda karne ko taiyyar hai & police unhe koi nuksan nahi pahuchayegi.",DCP verma ne apne senior afsar ko samjhaya.

"magar verma ?"

"sir,maine pehle kaha tha ki main apni sharto pe kaam karunga & mera maqsad bas bachche ko sahi-salamat vapas lana hai."

"ok.",singh sahab ko ye baat bilkul pasand nahi aayi thi.

"main savere 7 baje tak us bungle me shift ho jaoonga,sir."

"ok,ajinkya.best of luck."

"thank you,sir."

"Mona,please..main tumhare kamre me kaise so sakta hu?"

"to dusre kamre me soke khud ko & mujhe,dono ko uljhan me dalo.",Meghna ne bistar ki chadar thik ki.Varum khamosh khada raha,"savere-2 main tumhe upar store me chhupa dungi lekin tab tak tumhe yahi rehna hoga."

"par agar kisi dusre kamre me soun to kya harz hai?"

"harz ye hai ki us kamre me chalte AC ya jali batti dekh agar kisi ko ye shaq ho gaya ki mere alawa bhi ghar me koi hai to meri izzat ka kya hoga?",baat to mona ne thik kahi thi.

"thik hai magar main yaha farsh pe sounga."

"thik hai.",meghna ne chadar uthai & varun ka bistar bed ke bagal me farsh pe lagane lagi.

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Nina apne pati & bete ke sath apne jeth ke ghar pe hi thi.use bhi samajh nahi aa raha tha ki aakhir uske jaise & kaun soch raha tha.tabhi uska mobile baja,Mahesh Arora use fone kar raha tha,"hello."

'sab gadbad ho gaya."

"nahi,kuchh bhi gadbad nahi hua hai.",nina halke se muskurayi.darasal mahesh ka plan Anish ko nahi Anjali ko kidnap karne ka tha.nina ne Hira ko apne husn ke jaal me phansa ke us se ye raaz ugalwa hi liya tha.mahesh & nina ne anish ko agwa karne tay kiya tha & mahesh ka is tarah se us se chhipa ke plan badalne se usne uspe bharosa karna ab chhod diya tha.

"kya bak rahi ho?",mahesh ki khij saaf jhalak rahi thi.

"dekho,hume bachche ke agwa hone se matlab tha na.",nina ne aaspaas dekha ki koi use sun to nahi raha tha,"..to vo ho gaya.ab Jasjit pareshan rahega & humara rasta saaf rahega."

"hun..vo to hai..maine hira & uske sathi ko kuchh paise pakda diye hain magar ab karen kya?!"

"kuchh nahi..1-2 din dekhte hain kya hota hai fir sochte hain."

"ok.",fone kat gaya.

ab jo karna hai mujhe karna hai..tum ab kisi kaam ke nahi mahesh arora..tumne mujhe dhokha dene ki sochi bhi kaise?..tumhe to baad me dekhungi..abhi to main bas is mauke ka fayda utha lu.

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andhere kamre me meghna bistar pe & varun farsh pe khamosh lete the.dono ki aankho se nind koso door thi & dono beete dino ki yaad me khoye the....waqt bhi kya-2 khel khelta hai!..1 waqt vo tha jab dono aisi tanhayi ke liye tarste the & aaj jab tanhayi thi to dono ke beech aisi dooriyan aa gayi thi jo shayad hi kabhi kam hoti.

arse baad varun ko apni tango ke beech harkat hoti mehsus ho rahi thi.bathroom me uski nigah meghna ke seene pe gayi thi & abhi uske zehan me vahi katav ghum raha tha.meghna waqt ke sath aur khubsurat ho gayi thi.

meghna ko bhi beeti baaten yaad aa rahi thi.uski chhatiyo ko chuste hue varun pagal ho jata tha.apne munh me 1 chhati ko bhar vo tab tak chusta jab tak uski sans use ijazat deti & meghna ka josh ke mare bura haal ho jata.dil ne vo rangin lamha yaad kiya to jism me kasak si uthi usne karwat le apni kasmasati chut ko jangho ke beech bhinch use shant karne ki koshish ki & aankhe band kar sone ki koshish karne lagi.

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"sir,kya hum Professor ki sari sharte sach me maan rahe hain?",DCP Verma ne apne boss se puchha,"nahi na?"

"aap khud samajhdar hain,Verma sahab.",JCP Singh muskuraye.

"ok,sir.Lohia Park vale makan me to vaise abhi humare aadmi bugs laga rahe hain magar main ACP Namit Bhatt ko bhi keh dunga ki vo makan ki har baat ke bare me hume inform karta rahe & professor jo bhi kahe call trace hote hi hum apne aadmi un gundo ke peechhe laga denge."

"good."

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thik savere 5 baje Professor Ajinkya Dixit bungle pe pahunch gaya tha.police valo ne ye socha hi nahi tha kyuki usne 7 baje ka waqt diya tha.bungle ke andar professor ne apne kamre ke jayza liya & apne bed ke upar lagi painting ko dekh ke muskuraya,vo janta tha ki uski baate sunane ke liye police valo ne kamer kya ghar bhar me bugs lagaye honge.uske peechhe-2 1 policevala kamre me uska suitcase liye aa gaya tha.professor ne use aankh ke kone se dekha & bathroom me ghus gaya.

us constable ke kamre se bahar jate hi professor bahar aaya & us painting ko utha ke dekha,vaha 1 bijli ka point tha joki gol plastic cover se dhaka tha.professor ne fauran jeb se 1 swiss knife nikali & uske scerw driver se us cover ke pench ko khol uske peechhe dekha to use bug saaf nazar aaya.usne bug ko bina chhede cover ko vapas lagaya & uske upar painting tang di.

kanmre me rakhe fone ko utha ke bhi usne khola to vaha bhi 1 bug tha.kamre me teesra bug kamre ke shelf pe rakhe plastic ke phoolo ke guldaste me chhipa tha.ab professor ko pata tha ki bug kaha lage hain & unki sankhya se usne unki range ka bhi pata laga liya tha.

7.30 baje Divya apna saman liye vaha pahunchi to professor use ghar ki chhat pe le gaya,"kya bata hai?"

"tumse kuchh baate karni hain.",chhat pe unki baaten sune jane ka koi khatra nahi tha magar professor janta tha ki abhi koi na koi upar zarur aayega.jab control room me baithe unki baate sunane ki koshish karte log ye kahenge ki ghar me professor & divya ki baato ki koi aavaz nahi aa rahi hai to fir koi na koi check karne to upar aayega hi.professor ko is baat se koi aitraz nahi tha,aakhir police vale apna kaam hi kar rahe the magar unhe pata nahi tha ki thodi si jaldbazi ya 1 galat kadam bachche ki jaan ko khatre me daal sakta tha.

"dekho,neeche mere kamer me bugs lage hain,tumhare kamre me bhi zarur honge."

"kya?magar kyu?kay department ko mujhpe bharosa nahi?",divya gusse se boli.

"vo baat nahi hai.vo bechare sirf apna kaam kar rahe hain.maine to tumhe bas bataya hai."

'hun.",divya ko ye baat bahut nagawar guzri thi.

"mujhe tumhe kuchh aur bhi batana tha."

"kya?"

"tum janti ho ki mujhe hi is kaam ke liye kyu chuna gaya hai?",divya ne inkar me sar hilaya.

"divya,main bhi tumhari tarah 1 police afsar tha."

"kya?!",divya chaunk padi.

"haan,maine bhi police force join ki thi.ghar me paise ki koi kami nahi thi lekin mujhe ye kaam bada romanchak lagta tha fir mujhe college ke dino se hi apradhiyo ki soch me bada interest tha.mujhe bada aashcharya hota tha ki aakhir vo kya bata thi jo 1 apradhi ko apradh karne ko uksati thi.."

"..maine apni thesis bhi isi topic pe taiyyar ki thi fir jab police afsar bana to apne padhe hue ko apne kaam me istemal karne ki koshish karne laga.meri shuruati posting 1 dehat me hui & vaha kuchh mahino baad hi ganv ki mukhiya ki chhoti si beti ko 1 ghayal dacoit ne agwa kar liya.encounter hua tha jisme uske sathi mare gaye the magar vo bach gaya tha & apni jaan bachane ke liye usne us nahi jaan ko apna dhal bana liya.."

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kaamuk kahaaniyaan

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kramashah........


raj..
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Re: खेल खिलाड़ी का

Unread post by raj.. » 09 Dec 2014 15:56

खेल खिलाड़ी का पार्ट--48

गतान्क से आगे............-

"..वाहा उस वक़्त मैं ही सबसे सीनियर अफ़सर था.नज़दीक के बड़े थाने से जब तक मदद आती तब तक वो डाकू ना जाने कर क्या देता.तो मैने उस से बात करनी शुरू की & कोई 6 घंटे की कोशिश के बाद उस डाकू ने ना केवल उस बच्ची को छ्चोड़ा बल्कि आत्म-समर्पण भी कर दिया.इसके बाद मेरी पोस्टिंग शहर मे हुई & इत्तेफ़ाक़ देखो कि फिर 1 ऐसी ही स्थिति वाहा भी आ गयी & उस से भी मुझे ही निपटना पड़ा.इस बार 1 बॅंक मे करीब 25 लोगो को 1 डकेट ने बंधक बना लिया.मैने उस से भी कोई 3 घंटे तक बात की होगी & वो धीरे-2 करके लोगो को छ्चोड़ने लगा.जब केवल 5 मर्द उसके क़ब्ज़े मे थे तब पोलीस अंदर घुसी & उसे मार गिराया.."

"..इन 2 वाकयो के बाद मुझे ऐसे मामलो का एक्सपर्ट समझा जाने लगा.मुझे भी इस बात की खुशी थी मगर फिर कुच्छ ऐसा हुआ जिसने मेरी ज़िंदगी ही बदल दी.",प्रोफेसर ने दिव्या की आँखो मे झाँका,"..तुम्हे लगता है ना कि मैने कभी शादी क्यू नही की?..मेरे घर मे मेरा बेडरूम ऐसा क्यू लगता है जैसे उसमे उस रात जब हम दोनो वाहा थे,उस से पहले शायद ही कभी कोई आया हो?",दिव्या ने बस हां मे सर हिलाया.

"..तो सुनो,दिव्या.उसका नाम दीपाली था.मेरी जान,मेरी ज़िंदगी थी वो..",प्रोफेसर की आवाज़ मे नर्मी & उस नर्मी के पीछे च्छूपा दर्द दिव्या से च्छूपा नही रहा,"..हम दोनो शादी करने वाले थे.सब कितने खुश थे..वो..मैं..हमारे परिवार वाले..कि 1 दिन उसका अफ़रन हो गया."

"क्या?!",दिव्या चौंक पड़ी.

"हां,उसके पिता 1 जाने-माने नेता थे & उनके किसी दुश्मन ने ऐसा करवाया था.मामला बहुत नाज़ुक था & उसके पिता के रसुख के चलते पोलीस बहुत फूँक-2 के कदम उठा रही थी.जब किडनॅपर्स से बात करने का मुद्दा खड़ा हुआ तो पोलीस कमिशनर ने मुझे खुद बुलाके ऐसा करने को कहा.मैं तो अजीब दुविधा मे था.अपने जज़्बातो की वजह से मुझे नही लगता था कि मैं ये काम कर पाऊँगा लेकिन फिर लगता था कि मैं खुद ही क्यू ना अपनी जान से प्यारी दीपाली को बचाऊँ."

"..मैने हाँ कर दी & काम शुरू किया.सब कुच्छ बिल्कुल ठीक जा रहा था.फिरौती की रकम तय हो गयी,उन्होने हमे यकीन दिलाया कि दीपाली को उन्होने कोई नुकसान नही पहुचाया है & पैसे मिलते ही वो उसे सही-सलामत हमारे हवाले कर देंगे.वो जगह तय हुई जहा पैसो & दीपाली की अदला-बदली होनी थी.हम वाहा पहुँचे.."

"..जंगल के बीच मे मैं पैसो से भरा बॅग लेके वाहा पहुँचा.पोलीवे वाले बड़ी दूरी से सब देख रहे थे.सबको सख़्त हिदायत थी कि जब तक दीपाली हमारे पास आ नही जाती कोई कुछ नही करेगा.जैसा तय हुआ था वैसे ही मैं आगे बढ़ा & तय जगह पे बने 1 कपड़े के गोल घेरे मे बॅग रख के पलट के वापस आ खड़ा हुअ. उसमे 1 नक़ाबपोश खड़ा था.वो आया बॅग उठाके पैसे चेक किए फिर मेरी ओर देख सर हिलाया & वापस अपनी जगह पे चला गया.वाहा से दीपाली जिसकी आँखो पे पट्टी बँधी थी,उसे उसने चलने को कहा.दीपाली धीरे-2 आगे बढ़ रही थी & पीछे सॉफ दिख रहा था कि किडनॅपर्स भागने की तैय्यारि कर रहे हैं.उनका काम हो गया था.."

"..मलाल तो मुझे भी हो रहा था कि उन कमिनो को मैं अपने हाथो से सज़ा नही दे पाऊँगा मगरा मैं मजबूर था.सब ठीक चल रहा था कि पता नही कैसे 1 नर्वस पोलीस वाले ने भागते हुए किडनॅपर्स पे गोली चला दी & उसके बाद तो वाहा कोहराम मच गया.वो बदमाश भी गोलिया चलाने लगे.मैं ज़मीन पे गिर अपने को गोलियो से बचाने लगा & चिल्ला-2 के फाइरिंग रोकने को कहने लगा.केवल 5-7 मिनिट तक ही गोलिया चली होंगी मगर उन 7 मिनिट्स मे मेरी दुनिया उजड़ चुकी थी.किडनॅपर्स की 1 गोली मेरी दीपाली के सीने के पार हो गयी थी.",प्रोफेसर खामोश हो गया.

"..उसके बाद मैने नौकरी छोड़ दी & विदेश चला गया.क्रिमिनल साइकॉलजी पे रिसर्च की & वापस मुल्क आके वही नॉवेल्स लिखने लगा.ये शहर मेरा घर है मगर मैं यहा रहना नही चाहता था क्यूकी वो दर्दनाक यादें यहा मुझे चैन से जीने नही देती थी.इस दौरान ना जाने कितनी लड़कियो के साथ मेरे ताल्लुक़ात हुए मगर कही भी मुझे वो सुकून नही मिला जिसे मैं तलाश रहा था.फिर मुझे लगा कि अब वो यादें मुझे परेशान नही करेंगी तो मैं यहा वापस आ गया.."

"..फिर तुम मिली & मैं अपने अतीत के घूम से सच मे बाहर आ गया,दिव्या.पर उपरवाले का खेल देखो,उसने फिर से वही उलझन मेरे सामने ला खड़ी की है.",प्रोफेसर फीकी सी हँसी हंसा.

"मगर इस बार नतीजा दूसरा होगा.",दिव्या की बात जिस भरोसे से कही गयी थी उसने प्रोफेसर को भी विश्वास पहुचेया.तभी 1 कॉन्स्टेबल छत पे आ गया.

"सर,चाइ तैय्यार है."

"ठीक है,चलो."

................................

नीना ने सोच लिया था कि अब उसे क्या करना है.जसजीत की परेशानी से अब वो शायद ही अपने कॅंपेन पे ध्यान दे पता.हां,ये ज़रूर था कि उसे सिंपती वोट्स मिलने के चान्सस बढ़ गये थे लेकिन अगर वो इस हादसे से परेशान हो ऐसे ही बेरूख़् रहा तो क्या पता जाने हार भी आ सकती है & ऐसे मे लोक विकास को फ़ायदा होता & उस से भी ज़्यादा फ़ायदा होता बलदेव काबरा उर्फ भाय्या जी को.नीना का अगला निशाना अब वही था.

नीना ने सोच लिया था कि भाय्या जी से कहा मिलना है & क्या करना है.भाय्या जी हर रोज़ सवेरे सैर करने पार्क जाते थे & नीना ने वही उनसे मिलने का सोचा था.भाय्या जी ट्रॅक सूट पहने टहल रहे थे.पार्क मे सवेरे सैर करने वालो की भीड़ थी.भाय्या जी अकेले टहलते थे & उस बड़े पार्क का 1 पूरा चक्कर लगाते थे.पार्क के दूर के हिस्से मे थोड़ी कम भीड़ थी.

वो चले जा रहे थे कि तभी पीछे से कोई उनसे आ टकराया,"अफ!",पीछे से आ रही जॉगिंग करती नीना जानबूझ के भाय्या जी से टकराई थी.टकरा के वो लड़खड़ा के गिरने लगी तो भाय्या जी ने उसका बाया बाज़ू थाम लिया.

नीना ने काले रंग की टी-शर्ट & ट्रॅक पॅंट पहनी थी.उसके नर्म बाज़ू की च्छुअन ने भाय्या जी के जिस्म मे झुरजुरी दौड़ा दी.नीना ने उठाते हुए अपनी बाई छाती भी उनसे सटा दी थी भाय्या जी ने भी मौके का फ़ायदा उठाते हुए उसकी पीठ पे हाथ रख दिया.नीना समझ गयी कि उसके जिस्म का असर उसपे हो चुका है,"आइ'एम सॉरी.",वो बड़ी नज़ाकत से बोली.

"कोई बात नही.आपको कही लगी तो नही?",भाय्या जी का 1 हाथ उसके बाज़ू & दूसरा अभी भी उसकी पीठ पे था.

"नही.",नीना ने भी ऐसा नही जताया कि पराए मर्द के हाथो से उसे को तकलीफ़ है,"ओह माइ गॉड!",उसने हैरान होने का नाटक किया,"आप भाय्या जी है ना?"

"जी!",भाय्या जी हँसे.पीछे से कोई जॉगिंग करता आ रहा था,"..क्यू ना वाहा चल के बैठ के बात करें?",भाय्या जी ने थोड़ी दूर पे रखी बेंच की ओर इशारा किया.इस खूबसूरत औरत के बारे मे जाने बिना उसे जाने नही देना चाहते थे.

"ज़रूर.",दोनो बेंच की ओर चले गये.

"वैसे आप मुझे बलदेव कह सकती हैं.आपकी तारीफ जान सकता हू?"

"मेरा नाम नीना है नीना प्रधान.",प्रधान नाम से भाय्या जी की भवे 1 पल को सिकुड़ी.

"जी..थोड़ा अजीब लग रहा है पर आपने शायद समझ ही लिया होगा मैं जसजीत जी के छ्होटे भाई की बीवी हू."

"बड़ी खुशी हुई आपसे मिलके."

"ये बात आप दिल से कह रहे हैं या बस रस्म निभा रहे हैं.",नीना की बात मे हल्की सी शोखी थी.अब भाय्या जी को उसके अंदाज़ से ये समझ मे नही आया कि वो उन्हे छेड़ रही थी या फिर सच मे सवाल कर रही थी.इस बात ने उनके दिल मे नीना के बारे मे और जानने की ख्वाहिश को और मज़बूत कर दिया.

"बड़ा दुख हुआ कि आपको लगा कि मैं बस रस्मी तौर पे ऐसा कह रहा हू..",भाय्या जी ने उसकी आँखो मे झाँका तो नीना ने भी अपनी पलके बिल्कुल नही झपकाई,"..आपसे मिलके भला किसे खुशी नही होगी!"

"शुक्रिया.",नीना दिलकश अंदाज़ मे हँसी & अपना बदन थोड़ा सा उनकी ओर घुमा दिया ताकि उसकी चूचियाँ उनकी नज़र मे आती रहें,"..मुझे तो लगा था कि आप मुझे दुश्मन ही समझेंगे."

"आपके जैसा दुश्मन भी हो तो अपने को खुश किस्मत समझूंगा.वैसे ये बेकार बाते हैं,नीना जी.हम अलग-2 दलो मे हैं इसका ये मतलब तो नही कि हम दुश्मन हैं."

"कितनी अच्छी सोच है आपकी!",नीना ने 1 लंबी सांस भारी & अपनी बाँहो को अपने सीने के नीचे क्रॉस कर दाए हाथ से बाए & बाए हाथ से दाए बाज़ू को सहलाया.ऐसा करने से उसकी मोटी चूचियाँ थोड़ा और उभर आई.भाय्या जी की निगाहे तो उसकी गोलाईयो से चिपक ही गयी थी.उन्होने अपने ट्रॅक पॅंट मे अपने खड़े होते लंड को शांत रहने को कहा मगर वो तो नीना के हुस्न & उसकी करीबी से बावला हो रहा था!

"आप थोड़ा परेशान दिख रही हैं..ओह्ह..",फिर जैसे उन्हे कुच्छ याद आया,"..जसजीत जी के बच्चे की किडनॅपिंग से परेशान है ना आप?"

"जी वो तो है ही मगर..",नीना ने बात अधूरी छ्चोड़ भाय्या जी को थोड़ा और उलझाया.

"मगर क्या?"

"छ्चोड़िए,बलदेव जी..अब ऐसे मौके पे ऐसी बात करूँगी तो आप ना जाने क्या समझें."

"यकीन कीजिए ग़लत तो नही ही समझूंगा.",बलदेव जी मुस्कुराए & उसके कंधे पे हाथ रखा.हाथ रखते हुए उन्होने टी-शर्ट के गले मे से नुमाया उसके बाए कंधे के हिस्से को च्छू लिया & वाहा की नर्मी ने उनके लंड को और पागल कर दिया.

"बलदेव जी,जो भी हुआ बहुत बुरा हुआ & शायद सबसे बड़ी सज़ा अंजलि भाभी भुगत रही हैं.",उस वक़्त जो भी नीना को सुनता,यही सोचता कि उसे कितना लगाव था अपने जेठ के परिवार से!

"मगर ये हुआ क्यू?",वो अब बिल्कुल घूम गयी थी & उसका बाया घुटना भाय्या जी के दाए घुटने से च्छू रहा था,"..मैं थोड़ी फ़लसफ़े की बात कर रही हू,बलदेव जी."

"मैं सुन रहा हू,नीना जी.",बलदेव जी ने उसके घुटने के उपर उसकी जाँघ को थपथपाया.नीना सब देख रही थी & मन ही मन खुश हो रही थी.जैसा उसने सोचा था सब उस से कही ज़्यादा तेज़ी से हो रहा था.

"इंसान अपने मतलब,अपने स्वार्थ मे सब भूल जाता है & फिर उसकी ग़लतियो की सज़ा उसके करीबियो को भुगतनी पड़ती हैं.",नीना बिल्कुल संजीदा थी.

"हूँ.आपका इशारा शायद आपके जेठ की ओर है?"

"जी..",उसने लंबी सांस ली & बेंच पे पीछे पीठ टीका दी & सर पीछे झुका दिया जैसे बड़ी परेशान हो.भाय्या जी की नज़र उसकी गोरी गर्दन पे पड़ी तो उनक दिल किया की अभी उसे बाहो मे भर उसकी चूचियो को अपने सीने से दबा के उसकी नर्म गर्दन को चूम लें,"..भाय्या तो बस अपने काम,अपनी हसरातो को पूरा करने मे डूबे रहे & अब देखिए क्या हो गया!"

"..आप तो जानते ही होंगे कि मेरे पति बद्डल से चुनाव लड़ रहे हैं?"

"जी हां."

"सोचिए,भाय्या के होते उन्हे इनडिपेंडेंट खड़ा होना पड़ रहा है.अब इस मौके पे ऐसी बात करूँगी तो आप सोचेंगे कि कितनी मतलबी औरत है.ऐसे मौके पे भी जेठ की बुराई & अपनी परेशानियो का दुखड़ा रो रही है."

"जी नही बल्कि मैं तो ये सोच रहा हू कि आपने मुझे इस काबिल समझा की अपना दुख मुझसे बाँट रही हैं.",नीना की आख़िरी बात ने भाय्या जी के दिमाग़ मे 1 नया ख़याल पैदा किया था.वो सोच रहे थे अगर उनके सबसे बड़े दुश्मन का अपना भाई उनके साथ हो जाए & साथ मे ये हसीना भी अगर मेहेरबान हो उनके बिस्तर की शोभा बनाना मंज़ूर कर ले तो कितना अच्छा हो!

"आप सच मे 1 बहुत भले इंसान हैं,बलदेव जी.",नीना ने आँखो मे थोड़ा सा पानी लाया.

"अरे..ये क्या..आप तो जज़्बाती हो गयीं?",भाय्या जी ने मौका देख अपना बाया हाथ नीना की पीठ को सहलाने मे लगा दिया,"..वैसे अगर आपको बुरा ना लगे तो 1 पेशकश करू."

"ज़रूर बेझिझक कहिए",नीना ने घड़ियाली आँसू पोन्छे & सीधे होके बैठ गयी मगर इस तरह से उसकी बाई जाँघ का काफ़ी हिस्सा भाय्या जी की दाई जाँघ से सटा रहे.वो समझ गयी थी कि भाय्या जी का अब 1 ही मक़सद है-उसके जिस्म को हासिल करना.

"आप अपने पति को लेके चिंतित लगती हैं.मैं ये कह रहा था कि अगर आप कहें तो मैं उनकी मदद कर सकता हू."

"सच!मगर कैसे?",नीना ने उनका बाया हाथ पकड़ लिया तो भाय्या जी का लंड उनके अंडरवेर मे और जद्दोजेहद करने लगा.उस वक़्त सच मे उनके दिमाग़ ने काम करना बंद कर दिया था.कभी-2 समझदार से समझदार इंसान ग़लती कर बैठता है.भाय्या जी को 1 पल के लिए भी ये एहसास नही हुआ कि आख़िर नीना अपने घर से इतनी दूर जॉगिंग करने क्यू आई थी.वैसे नीना के पास इसका जवाब तैय्यार था कि वो जेठ के घर ठहरी थी इसलिए यहा आ गयी थी मगर कोई उस से ये पुच्छ ता कि ये लिबास भी वो क्या कल अपने साथ लेके आई थी?..नही,रात भर मे उसने ये प्लान बनाया था.उसे पता था की बलदेव काबरा इसी पार्क मे सैर के लिए आता था & उसे शीशे मे उतारने के लिए वो सवेरे-2 अपने घर गयी थी & वाहा से कपड़े बदल सीधा यहा आई थी.

"देखिए,ये बाते यहा करना ठीक नही लगता.हम कही और मिल सकते हैं?"

"हां,लेकिन.."

"लेकिन क्या नीना जी?"

"देखिए,हम सियासी तौर पे तो दुश्मन है ना.ऐसे मे हमारी मुलाकात होते किसी ने देख लिया तो आप तो आजकल के मेडियावालो को जानते ही हैं."

"हूँ..आप मेरे सरकारी बंगल पे क्यू नही आ जाती.मैं वाहा अकेला ही होता हू.",भाय्या जी ने अकेला लफ्ज़ पे थोड़ा ज़ोर दिया.उनका हाथ नीना की पीठ से उसकी दाई उपरी बाँह पे आ गया था.

"ठीक है.कुच्छ बाते तन्हाई मे ही हो तो अच्छा रहता है.",नीना ने फिर वोही हल्की सी शोख मुस्कान दे भाय्या जी के दिल मे उलझन पैदा कर दी & उनसे उनके बुंगले का पता & मिलने का वक़्त लेके वाहा से निकल गयी.भाय्या जी सैर से लौटते पूरे रास्ते यही अटकल लगताए रहे कि नीना की आख़िरी बात मासूमियत से कही गयी थी या फिर उनकी बातो मे छिपे उनके बुलावे का जवाब था.

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कामुक कहानियाँ

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क्रमशः........

KHEL KHILADI KA paart--48

gataank se aage............-

"..vaha us waqt main hi sabse senior afsar tha.nazdik ke bade thane se jab tak madad aati tab tak vo dacoit na jane kar kya deta.to maine us se baat karni shuru ki & koi 6 ghante ki koshish ke baad us dacoit ne na kewal us bachchi ko chhoda balki aatm-samarpan bhi kar diya.iske baad merio postin shehar me hui & ittefaq dekho ki fir 1 aisi hi sthiti vaha bhi aa gayi & us se bhi mujhe hi nipatna pada.is baar 1 bank me karib 25 logo ko 1 dacoit ne bandhak bana liya.maine us se bhi koi 3 ghante tak baat ki hogi & vo dhire-2 karke logo ko chhodne laga.jab keval 5 mard uske kabze me the tab police andar ghusi & use maar giraya.."

"..in 2 vakyo ke baad mujhe aise mamlo ka expert samjha jane laga.mujhe bhi is baat ki khushi thi magar fir kuchh aisa hua jisne meri zindagi hi badal di.",professor ne divya ki aankho me jhanka,"..tumhe lagta hai na ki maine kabhi shadi kyu nahi ki?..mere ghar me mera bedroom aisa kyu lagta hai jaise usme us raat jab hum dono vaha the,us se pehle shayad hi kabhi koi aaya ho?",divya ne bas haan me sar hilaya.

"..to suno,divya.uska naam Deepali tha.meri jaan,meri zindagi thi vo..",professor ki aavaz me narmi & us narmi ke peechhe chhupa dard divya se chhupa nahi raha,"..hum dono shadi karne vale the.sab kitne khush the..vo..main..humare parivar wale..ki 1 din uska apharan ho gaya."

"kya?!",divya chaunk padi.

"haan,uske pita 1 jane-mane neta the & unke kisi dushman ne aisa karwaya tha.mamla bahut nazuk tha & uske pita ke rasukh ke chalte police bahut phunk-2 ke kadam utha rahi thi.jab kidnappers se baat karne ka mudda khada hua to police commissioner ne mujhe khud bulake aisa karne ko kaha.main to ajib duvidha me tha.apne jazbato ki vajah se mujhe nahi lagta tha ki main ye kaam kar paoonga lekin fir lagta tha ki main khud hi kyu na apni jaan se pyari deepali ko bachaoon."

"..maine haan kar di & kaam shuru kiya.sab kuchh bilkul thik ja raha tha.firauti ki rakam tay ho gayi,unhone hume yakin dilaya ki deepali ko unhone koi nuksan nahi pahuchaya hai & paise milte hi vo use sahi-salamat humare hawale kar denge.vo jagah tay hui jaha paiso & deepali ki adla-badli honi thi.hum vaha pahunche.."

"..jungle ke beech me main paiso se bhara bag leke vaha pahuncha.polive vale badi doori se sab dekh rahe the.sabko sakht hidayat thi ki jab tak deepali huamre paas aa nahi jati koi kuch nahi karega.jaisa tay hua tha vaise hi main aage badha & tay jagah pe bane 1 kapde ke gol ghere me bag rakh ke palat ke vapas aa khada hua.asmen 1 naqabposh khada tha.vo aaya bag uthake paise check kiye fir meri or dekh sar hilaya & vapas apni jagah pe chala gaya.vaha se deepali jiski aankho pe pattyi bandhi thi,use usne chalne ko kaha.deepali dhire-2 aage badh rahi thi & peechhe saaf dikh raha tha ki kidnappers bhagne ki taiyyari kar rahe hain.unka kaam ho gaya tha.."

"..malal to mujhe bhi ho raha tha ki un kamino ko main apne hatho se saza nahi de paoonga magara main majboor tha.sab thik chal raha tha ki pata nahi kaise 1 nervous policevale ne bhagte hue kidnappers pe goli chala di & uske baad to vaha kohram mach gaya.vo budmash bhi goliya chalane lage.main zamin pe gir apne ko goliyo se bachane laga & chilla-2 ke firing rokne ko kehne laga.keval 5-7 minute tak hi goliya chali hongi magar un 7 minutes me meri duniya ujad chuki thi.kidnappers ki 1 goli meri deepali ke seene ke paar ho gayi thi.",professor khamosh ho gaya.

"..uske baad maine naukri chod di & videsh chala gaya.criminal psychology pe research ki & vapas mulk aake vahi novels likhne laga.ye shehar mera ghar hai magar main yaha rehna nahi chahta tha kyuki vo dardnak yaaden yaha mujhe chain se jine nahi deti thi.iis dauran na jane kitni ladkiyo ke sath mere tallukat hue magar kahi bhi mujhe vo sukun nahi mila jise main talash raha tha.fir mujhe laga ki ab vo yaaden mujhe pareshan nahi karengi to main yaha vapas aa gaya.."

"..fir tum mili & main apne atit ke ghum se sach me bahar aa gaya,divya.par uparwale ka khel dekho,usne fir se vahi uljhan mere samne la khadi ki hai.",professor fiki si hansi hansa.

"magar is baar natija dusra hoga.",divya ki baat jis bharose se kahi gayi thi usne professor ko bhi vishwas pahuchaya.tabhi 1 constable chhat pe aa gaya.

"sir,chai taiyyar hai."

"thik hai,chalo."

Nina ne soch liya tha ki ab use kya karna hai.Jasjit ki pareshani se ab vo shayad hi apne campaign pe dhyan de pata.haan,ye zarur tha ki use sympathy votes milne ke chances badh gaye the lekin agar vo is hadse se pareshan ho aise hi berukh raha to kya pata Jan Hit haar bhi askti hai & aise me Lok Vikas ko fayda hota & us se bhi zyada fayda hota Baldev Kabra urf Bhaiyya ji ko.nina ka agla nishana ab vahi tha.

nina ne soch liya tha ki bhaiyya ji se kaha milna hai & kya karna hai.bhaiyya ji har roz savere sair karne park jate the & nina ne vahi unse milne ka socha tha.bhaiyya ji track suit pehne tehal rahe the.park me savere sair karne valo ki bhid thi.bhaiyya ji akele tehalte the & us bade park ka 1 pura chakkar lagate the.park ke door ke hisse me thodi kam bheed thi.

vo chale ja rahe the ki tabhi peechhe se koi unse aa takraya,"uff!",peechhe se aa rahi jogging karti nina jaanbujh ke bhaiyya ji se takrayi thi.takra ke vo ladkhada ke girne lagi to bhaiyya ji ne uska baya bazu tham liya.

nina ne kale rang ki t-shirt & track pant pehni thi.uske narm bazu ki chhuan ne bhaiyya ji ke jism me jhurjhuri dauda di.nina ne uthate hue apni baayi chhati bhi unse sata di tio bhaiyya ji ne bhi mauke ka fayda uthate hue uski pith pe hath rakh diya.nina samajh gayi ki uske jism ka asar uspe ho chuka hai,"i'm sorry.",vo badi nazakat se boli.

"koi baat nahi.aapko kahi lagi to nahi?",bhaiyya ji ka 1 hath uske bazu & dusra abhi bhi uski pith pe tha.

"nahi.",nina ne bhi aisa nahi jatay ki paraye mard ke hatho se use ko taklif hai,"oh my god!",usne hairan hone ka natak kiya,"aap bhaiyya ji hai na?"

"ji!",bhaiyya ji hanse.peechhe se koi jogging karta aa raha tha,"..kyu na vaha chal ke baith ke baat karen?",bhaiyya ji ne thodi door pe rakhi bench ki or ishara kiya.is khubsurat aurat ke bare me jane bina use jane nahi dena chahte the.

"zarur.",dono becnh ki or chale gaye.

"vaise aap mujhe baldev keh sakti hain.aapki tarif jaan sakta hu?"

"mera naam nina hai Nina Pradhan.",pradhan naam se bhaiyya ji ki bhave 1 pal ko sikudi.

"ji..thoda ajib lag raha hai par aapne shayad samajh hi liya hoga main jasjit ji ke chhote bhai ki biwi hu."

"badi khushi hui aapse milke."

"ye baat aap dil se keh rahe hain ya bas rasm nibha rahe hain.",nina ki baat me halki si shokhi thi.ab bhaiyya ji ko uske andaz se ye samajh me nahi aaya ki vo unhe chhed rahi thi ya fir sach me sawal kar rahi thi.is baat ne unke dil me nina ke bare me aur jaanane ki khwahish ko aur mazbut kar diya.

"bada dukh hua ki aapko laga ki main bas rasmi taur pe aisa keh raha hu..",bhaiyya ji ne uski aankho me jhanka to nina ne bhi apni palke bilkul nahi jhapkayi,"..aapse milke bhala kise khushi nahi hogi!"

"shukriya.",nina dilkash andaz me hansi & apna badan thoda sa unki or ghuma diya taki uski chhatiya unki nazar me aati rahen,"..mujhe to laga tha ki aap mujhe dushman hi samjhenge."

"aapke jaisa dushman bhi ho to apne ko khush kismat samjhunga.vaise ye bekar baate hain,nina ji.hum alag-2 dalo me hain iska ye matlab to nahi ki hum dushman hain."

"kitni achhi soch hai aapki!",nina ne 1 lumbi sans bhari & apni baho ko apne seene ke neeche cross kar daye hath se baye & baye hath se daye bazu ko sehlaya.aisa karne se uski moti chhatiya thoda aur ubhar aayi.bhaiyya ji ki nigahe to uski golaiyo se chipak hi gayi thi.unhone apne track pant me apne khade hote lund ko shant rehne ko kaha magar vo to nina ke husn & uski karibi se bawla ho raha tha!

"aap thoda pareshan dikh rahi hain..ohh..",fir jaise unhe kuchh yaad aaya,"..jasjit ji ke bachche ki kidnapping se pareshan hai na aap?"

"ji vo to hai hi magar..",nina ne baat adhuri chhod bhaiyya ji ko thoda aur uljhaya.

"magar kya?"

"chhodiye,baldev ji..ab aise mauke pe aisi baat karungi to aap na jane kya samjhen."

"yakin kijiye galat to nahi hi samjhunga.",baldev ji muskuraye & uske kandhe pe hath rakha.hath rakhte hue unhone t-shirt ke gale me se numaya uske baye kandhe ke hisse ko chhu liya & vaha ki narmi ne unke lund ko aur pagal kar diya.

"baldev ji,jo bhi hua bahut bura hua & shayad sabse badi saza Anjali bhabhi bhugat rahi hain.",us waqt jo bhi nina ko sunta,yehi sochta ki use kitna lagav tha apne jeth ke parivar se!

"magar ye hua kyu?",vo ab bilkul ghum gayi thi & uska baya ghutna bhaiyya ji ke daye ghutne se chhu raha tha,"..main thodi falsafe ki baat kar rahi hu,baldev ji."

"main sun raha hu,nina ji.",baldev ji ne uske ghutne ke upar uski jangh ko thapthapaya.nina sab dekh rahi thi & man hi man khush ho rahi thi.jaisa usne socha tha sab us se kahi zyada tezi se ho raha tha.

"insan apne matlab,apne swarth me sab bhul jata hai & fir uski galtiyo ki saza uske karibiyo ko bhugatni padti hain.",nina bilkul sanjida thi.

"hun.aapka ishara shayad aapke jeth ki or hai?"

"ji..",usne lumbi sans li & bench pe peechhe pith tika di & sar peechhe jhuka diya jaise badi pareshan ho.bhaiyya ji ki nazar uski gori gardan pe padi to unak dil kiya ki abhi use baaho me bhar uski choochiyo ko apne seene se dabake uski narm gardan ko chum len,"..bhaiyya to bas apne kaam,apni hasrato ko pura karne me dube rahe & ab dekhiye kya ho gaya!"

"..aap to jante hi honge ki mere pati Baddal se chunav lad rahe hain?"

"ji haan."

"sochiye,bhaiyya ke hote unhe independent khada hona pad raha hai.ab is mauke pe aisi baat karungi to aap sochenge ki kitni matlabi aurat hai.aise mauke pe bhi jeth ki burai & apni pareshaniyo ka dukhda ro rahi hai."

"Ji nahi balki main to ye soch raha hu ki aapne mujhe is kabil samjha ki apna dukh mujhse bant rahi hain.",Nina ki aakhiri baat ne Bhaiyya ji ke dimagh me 1 naya khayal paida kiya tha.vo soch rahe agar unke sabse bade dushman ka apna bhai unke sath ho jaye & sath me ye haseena bhi agar meherban ho unke bistar ki shobha banana manzur kar le to kitna achha ho!

"aap sach me 1 bahut bhale insan hain,baldev ji.",nina ne aankho me thoda sa pani laya.

"are..ye kya..ap to jazbati ho gayin?",bhaiyya ji ne mauka dekh apna baya hath nina ki pith ko sehlane me laga diya,"..vaise agar aapko bura na lage to 1 peshakash karu."

"zarur bejhijhak kahiye",nina ne ghadiyali aansu ponchhe & seedhe hoke baith gayi magar is tarah se uski bayi jangh ka kafi hissa bhaiyya ji ki dayi jangh se sata rahe.vo samajh gayi thi ki bhaiyya ji ka ab 1 hi maqsad hai-uske jism ko hasil karna.

"aap apne pati ko leke chintit lagti hain.main ye keh raha tha ki agar aap kahen to main unki madad kar sakta hu."

"sach!magar kaise?",nina ne unka baya hath pakad liya to bhaiyya ji ka lund unke underwear me aur jaddojehad karne laga.us waqt sach me unke dimagh ne kaam karna band kar diya tha.kabhi-2 samajhdar se samajhdar insan galti kar baithata hai.bhaiyya ji ko 1 pal ke liye bhi ye ehsas nahi hua ki aakhir nina apne ghar se itni dur jogging karne kyu aayi thi.vaise nina ke paas iska jawab taiyyar tha ki vo jeth ke ghar thehri thi isliye yaha aa gayi thi magar koi us se ye puchh ta ki ye libas bhi vo kya kal apne sath leke aayi thi?..nahi,raat bhar me usne ye plan banaya tha.use pata tha ki Baldev Kabra isi park me sair ke liye aata tha & use shishe me utarne ke liye vo savere-2 apne ghar gayi thi & vaha se kapde badal seedha yaha aayi thi.

"dekhiye,ye baate yaha karna thik nahi lagta.hum kahi aur mil sakte hain?"

"haan,lekin.."

"lekin kya nina ji?"

"dekhiye,hum siyasi taur pe to dushman hai na.aise me humari mulakat hote kisi ne dekh liya to aap to aajkal ke mediawalo ko jante hi hain."

"hun..aap mere sarkari bungle pe kyu nahi aa jati.main vaha akela hi hota hu.",bhaiyya ji ne akela lafz pe thoda zor diya.unka hath nina ki pith se uski dayi upri banh pe aa gaya tha.

"thik hai.kuchh baate tanhai me hi ho to achha rehta hai.",nina ne fir vohi halki si shokh muskan de bhaiyya ji ke dil me uljhan paida kar di & unse unke bungle ka pata & milne ka waqt leke vaha se nikal gayi.bhaiyya ji sair se lautate pure raste yehi atkal lagatae rahe ki nina ki aakhiri baat masumiyat se kahi gayi thi ya fir unki baato me chhipe unke bulawe ka jawab tha.

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kaamuk kahaaniyaan

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kramashah........