कुँवारियों का शिकार compleet

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rajaarkey
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Re: कुँवारियों का शिकार

Unread post by rajaarkey » 06 Dec 2014 14:10

कुँवारियों का शिकार--30

गतान्क से आगे..............

अगले दिन नाज़िया को सीधे ही मेरे बेडरूम में पहुँचा दिया गया ताकि उसकी मालिश की जा सके. तनवी ज़ाकिया को लेकर नीचे चली गयी और मैने नाज़िया की मालिश करने के लिए तेल की शीशी उठा ली. जात जाते तनवी कह गयी के आज पट्टी बाँधने की ज़रूरत नही पड़ेगी. आज नाज़िया ने ट्रॅक सूट पहना हुआ था जिसका टॉप फ्रंट ज़िप वाला था. मैने नाज़िया से पूछा के आज वो कैसा महसूस कर रही है. उसने बताया के दर्द तो बिल्कुल नही है और अब तो ऐसा लगता ही नही के उसे चोट भी कभी लगी थी. मैने कहा के बहुत अच्छी बात है. मैने नाज़िया को कहा के उसका पाजामा उतारना पड़ेगा. उसने मुस्कुराते हुए अपना पाजामा उतार दिया और अपनी आँखें बंद करके लेट गयी. मैने उसकी पट्टी खोली और साथ ही खपकची भी निकाल दी. फिर उसकी टाँग को उठाकर अपनी गोद में रख लिया और मालिश करने लगा. पट्टी ज़्यादा टाइट करके बँधी होने से उसकी जाँघ और पिंडली पर निशान पड़े हुए थे जिनको मैं मालिश से ठीक कर रहा था. मैने उसकी मालिश करते हुए उसकी टाँग घुटने पर से मोडके उसकी जाँघ पर प्यार से हाथ फेरते कहा के दर्द तो नही है. वो सिहर गयी और बोली के दर्द तो नही है पर उसको फिर कल जैसा लगने लगा है. मैने कहा के कोई बात नही मैं कल की तरह फिर उसे ठीक कर दूँगा. वो शर्मा गयी और कुच्छ नही बोली. मैं जाकर एक टवल ले आया और पास में रख लिया. कमरे का दरवाज़ा मैने लॉक कर दिया. फिर मैने उसको ओर प्यार से देखा और उसकी दोनो जांघों पर प्यार से हाथ फेरने लगा. उसकी आँखें लाल होने लगीं और वो मस्ती में आने लगी.

मैने उसको उठाकर अपने ऊपेर के कपड़े उतारे और उसकी पीठ की ओर बैठकर उससे अपनी गोद में बिठा लिया और उसका भी टॉप उतार दिया. कल की तरह उसने आज भी अंदर कुच्छ नही पहना हुआ था. अब नाज़िया एक पॅंटी में मेरी गोद में बैठी हुई थी. मैने अपने दोनो हाथ उसकी बगलों से लेजाकार उसस्के कड़क मम्मों पर रख दिए तो वो ज़ोर से कांप गयी और उसकी सीत्कार निकल गयी. मैने अपने हाथों से उसकी दोनो मम्मे दबाने शुरू कर दिए. उसके छ्होटे छ्होटे निपल्स एक दम खड़े हो गये थे और मेरे हाथों में गुदगुदी कर रहे थे. मैने नाज़िया के ऊपेरी शरीर को अपने एक बाजू पर करते हुए अपना मुँह नीचे किया और उसके एक उभार को अपने मुँह मे ले लिया. दूसरे उभार पर मेरे हाथ की सख्तियाँ बदस्तूर चल रही थीं. मैं दोनो मम्मों को बारी बारी अपने मुँह से चुभलाने लगा. एक मेरे मुँह में होता तो दूसरा मेरे हाथों में. 4-5 मिनट में ही नाज़िया पूरी मस्ती में आ गयी और उत्तेजना से उसका चेहरा और आँखें लाल हो गयीं. उसस्के मुँह से आआआआआः, ऊऊऊऊओ की आवाज़ें निकलने लगीं. उसने अपना हाथ नीचे अपनी पॅंटी में कसी चूत पर रख दिया और अपनी चूत को दबाने लगी. मैने उससे प्यार से कहा के पॅंटी गीली हो जाएगी तो उसने पूछा की क्या करूँ? मैने कहा के ऐसे में यही करना चाहिए के इसको उतार दो. उसने शरम से अपनी आँखें बंद कर लीं और अपनी पॅंटी भी उतार दी.

मैं उसको अपने से अलग करके खड़ा हो गया और उसे लिटा कर बोला के रूको पहले मैं भी तुम्हारी पोज़िशन में आ जाऊ. वो चुप रही. उसकी साँसें तेज़ चल रही थीं और वो अपना एक हाथ अपने भारी मम्मे पर रख कर उसे दबा रही थी और दूसरे हाथ से अपनी चूत को सहला रही थी. नाज़िया के सर के नीचे दो तकिये लगाकर मैं उसकी टाँगों के बीच में आ गया और उसकी टाँगें उठाकर अपने कंधों पर ऐसे रखीं के उसकी टाँगें घुटनों से मुड़कर मेरी पीठ पर लटक गयीं. इस हालत में उसकी चूत मेरे मुँह के बहुत करीब आ गयी. चूत की लकीर पर पानी की बूँदें चमक रही थीं. मैने अपने दोनो हाथ उसकी जांघों पर रख कर उंगलियों से उसकी चूत के दोनो फांको को खोल दिया. उसकी दोनो गुलाबी पुट्तियाँ फड़फदा रही थीं और उसकी चूत अंदर से एकदम लाल गुलाबी रंग की नज़र आ रही थी. मैने ज़ोर से साँस ली और उसकी चूत से आ रही मादक सुगंध मुझे दीवाना करने लगी. मैने अपनी जीभ निकाली और उसकी चूत की दोनो पंखुड़ियों को चाटने लगा. उसने ज़ोर से एक सिसकारी ली और बोली कि यह क्या कर रहे हो? मैने कहा के तुम्हें मज़ा आ रहा है ना? नाज़िया आहिस्ता से बोली कि हां. तो मैने कहा के बस फिर कुच्छ मत बोलो और मज़ा लेती रहो. मैं जो भी जैसे भी कर रहा हूँ मुझे करने दो. वो चुप हो गयी.

मैने अपनी जीभ वापिस उसकी चूत पर लगा दी और उसकी गुलाब की पंखुड़ियों को अपनी जीभ को ऊपेर नीचे करके और दबा के चाटने लगा. ऊपेर जाते हुए मैं अपनी जीभ से उसके भज्नासे को भी अपनी जीभ से रगड़ रहा था. नाज़िया च्चटपटाने लगी और बोली के हाआआआआआए माआआआआआ ईईईईईई मूवूयूयूवूऊवूऊवयझीयीईयी क्य्ाआआआअ हूऊऊऊओ राआआआआआाआआआआआ हाआआआआआई. आईसीईईई हीईीईईईईईईईईई करूऊऊऊऊऊ बहुउउउउउउउउउउउत मज़ाआआआअ आआआआआआअ हाआआआई. मैने अपना मुँह पूरा खोल कर उसकी चूत पर रख दिया और अपनी जीभ को उसकी चूत में घुसा दिया. नाज़िया उच्छल पड़ी पर मेरे हाथों की पकड़ और उसकी टाँगों के मेरे कंधों पर लटके होने से वो ज़्यादा कुच्छ नही कर पाई. मैने अपनी जीभ से नाज़िया की नाज़ुक चूत को चोदना शुरू किया. उसके दोनो हाथ पकड़ कर उसकी चूत के दोनो ओर रख कर उसको कहा कि इसको खोल कर रखो और अपनी जीभ से उसकी चूत को चोदना चालू रखते हुए मैने अपने दोनो हाथ उसके सख़्त हो चुके मम्मों पर जमा दिए और निपल्स को अपनी उंगलियों से छेड़ने लगा. मेरे दाँतों की रगड़ और जीभ की चुदाई से वो बहुत तेज़ी से मंज़िल की ओर बढ़ रही थी. थोड़ी देर में ही नाज़िया का जिस्म झूमने लगा और उसके मुँह से ऊऊऊऊऊऊं आआआआआं की आवासें निकली और साथ ही वो काँपने लगी. नाज़िया की चूत भालभाला के पानी छ्चोड़ने लगी.

नाज़िया के शांत होने पर मैने उसकी टाँगें नीची कर दीं और खड़ा हो गया. वो भी बैठ गयी और प्यार से मुझे देखने लगी. फिर नाज़िया ने हाथ बढ़ाकर मेरे आकड़े हुए लंड पर रख दिया और बोली के हाए मा कितना गरम है यह तो जैसे मेरा हाथ ही जला देगा. मैने कहा के तुम्हारी चूत की गर्मी तो निकल गयी है इसकी गर्मी अभी नही निकली इसलिए इतना गुस्से से और भी गरम हो रहा है. वो हंस के बोली तो इसकी भी गर्मी निकाल देते ना. मैने कहा के इतना टाइम ही कहाँ है पर थोड़ी सी गर्मी तो निकाल ही सकते हैं जैसे तुम्हारी थोड़ी सी गर्मी निकाली है. वो बोली कैसे? तो मैने उसको खड़ा कर दिया और वो मुझसे लिपट गयी. मैने उसे डीप किस किया और उसे अपने साथ चिपकाए हुए ही बेड पर लेट गया. फिर मैने उसके मम्मे अपने हाथों में ले लिए और एक को जीभ से चाटने लगा. वो फिर से उत्तेजित होने लगी. मैने उसका मुँह अपने पैरों की तरफ करके उसके घुटने मोड़ दिए तो उसकी चूत एक बार फिर मेरे सामने थी. पर इस बार उसकी मुलायम गोल गांद भी मेरी आँखों के सामने थी और उसमे से उसकी गांद का प्यारा सा छेद भी मुझे दिख रहा था.

मैने नाज़िया को कहा के मेरे लंड की गर्मी को अपने मुँह में लेकर शांत करे. उसने मेरे लंड को अपने दोनो हाथों में लेकर सहलाना शुरू कर दिया और अपने हाथ ऊपेर नीचे करने लगी. फिर एक हाथ बेड पर सहारे के लिए टिका कर अपना मुँह मेरे लंड के पास ले आई और लंड के सुपारे को चूम कर अपनी जीभ से चाटने लगी. मेरा लंड उत्तेजना से और अधिक अकड़ गया और उच्छलने लगा. मैने उससे कहा कि नाज़िया देर ना करो इसको अपने मुँह में ले लो. लेती हूँ कहकर उसने अपने पूरा मुँह खोला और लंड को अंदर करने की कोशिश करने लगी. थोड़ी सी कोशिश के बाद लंड का सुपरा उसके मुँह में चला गया और वो उसको अपनी जीभ से मुँह के अंदर ही चाटने लगी. इधर मैने उसकी चूत पर अपनी जीभ चलानी शुरू कर दी थी. मेरी जीभ उसके भज्नासे को रगड़ती हुई उसकी दरार में होकर उसकी गांद के छेद को छूती तो वो चिहुनक जाती. उधर मैने नीचे से अपनी गांद उठाकर अपना लंड उसके मुँह में और ज़्यादा डालने की कोशिश शुरू कर दी. नाज़िया को मैने कहा के जितना ज़्यादा अंदर कर सकती हो लंड को कर लो और इसको चूस्ति रहो जैसे लॉलीपोप चूस्ते हैं.

अपने दोनो हाथों से मैने नाज़िया की चूत को खोला और अपनी जीब उसमे घुसा दी और जीभ से उसको चोदने लगा. एक अंगूठे से मैने उसस्के भज्नासे को सहलाना शुरू कर दिया. जितनी उसकी उत्तेजना बढ़ती उतना ज़्यादा मेरा लंड नाज़िया अपने मुँह में लेती जाती. फिर मैने अपने लंड से उसके मुँह को चोदना शुरू कर दिया. अपनी थूक से एक उंगली गीली करके मैने उसकी गांद के छेद को रगड़ना शुरू किया तो वो काँप गयी. मैने अपनी उंगली दुबारा गीली की और उसकी गांद के छेद पर रख कर थोड़ा सा दबाव डाला. उसकी गांद का टाइट छल्ला थोड़ा खुला और मेरी उंगली आधा इंच उसकी गांद में घुस गयी. वो उच्छल पड़ी पर मेरे हाथों की मज़बूत पकड़ ने उसे हिलने नही दिया. उंगली मैने वहीं रहने दी और उसकी चूत में अपनी जीभ अंदर बाहर करने की रफ़्तार तेज़ कर दी. उससे मज़ा आना शुरू हो गया और वो मस्ती में झूम झूम कर मेरे लंड को अपने मुँह में अंदर बाहर करते हुए चूसने लगी. मैं भी झड़ने की कगार पर आ गया और वो भी मस्ती के चरम की ओर अग्रसर हो रही थी. 5-7 मिनट में ही वो झाड़ गयी और मैने अपने हाथ नीचे करके उसके सर को पकड़ कर 8-10 बार अपने लंड को उसके मुँह में अंदर बाहर किया और फिर मेरी उत्तेजना का बाँध भी टूट गया और मेरे लंड से गरम गरम गाढ़े वीर्य की पिचकारी उसके मुँह में गिरी जो वो सतक गयी. मैने अपना लंड उसके हलक तक उतार दिया और झटके लेने लगा. हर झटके के साथ मेरा वीर्य उसके हलक में जाता और वो गतक जाती. मेरा स्खलन पूरा होने पर मैने अपने आप को ढीला छ्चोड़ दिया और वो भी आ कर मेरी छाती से आ लगी और गहरी गहरी साँसें लेने लगी.

थोड़ी देर बाद जब हम संयत हुए तो वो बोली के आज तो मेरी चूत की गर्मी दो बार निकाल दी सच में बहुत मज़ा आया. मैने कहा के असली गर्मी तो चूत की निकलती है लंड से चुदाई करने से और मज़ा भी इतना आता है कि यह सब मज़े भूल जाओगी. तो वो तुनक कर बोली के फिर वैसे ही क्यों नही किया? मैने पूछा के कैसे? तो वो बोली के वैसे ही जैसे कह रहे हो. मैने कहा के क्या कह रहा हूँ? वो बोली के बहुत शरारती हो मेरे मुँह से ही कहलाना चाहते हो? मैने कहा के दोनो नंगे होकर एक दूसरे से चिपके हुए हैं और एक दूसरे को मज़े दे चुके हैं और तुम अभी भी शर्मा रही हो? तो वो बोली के ठीक है बताओ अपने लंड से मेरी चूत क्यों नही मारी? मैने उसे ज़ोर से अपने साथ भींच लिया और कहा के यह हुई ना बात नाज़िया, वो इसीलिए के तुम्हारी मर्ज़ी भी तो पक्की पता नही थी और मैं बिना लड़की की मर्ज़ी के कभी नही करता और ज़बरदस्ती तो हरगिज़ नही. जब तक और जहाँ तक लड़की चाहेगी मैं करूँगा और जहाँ उसने रोक दिया उसके आगे फुल स्टॉप. वो बोली के मैं तो चाहती थी पर शरम के मारे बोली नही और सोचा के आप खुद ही कर दोगे सब कुच्छ. मैने उसको कहा के देखो यह आप आप करके तुम इतना फासला क्यों बना रही हो हमारे बीच में. और अगर तुम चाहती थीं के मैं तुम्हें चोद्कर लड़की से औरत बना दूं तो कहना था या इशारा तो किया होता पर कोई बात नही देर ईज़ ऑल्वेज़ आ टुमॉरो. मैने हंस कर कहा के कल जब आओगी तो तुम्हें चोद भी देंगे मेरी जान. वो इसी मे सिहर उठी और मुझसे अमरबेल की तरह चिपक गयी.

मैं उसको लेकर बाथरूम में आया और मुँह हाथ धोकर हम बाहर आए. कपड़े पहनते हुए मैने उससे कहा कि अभी थोड़ा दर्द का बहाना करती रहना ताकि कल भी मालिश के लिए आ सको. हम रेडी हुए ही थे कि मुझे तनवी की आवाज़ आई. मैने जल्दी से नाज़िया को बेड पर लिटा दिया और जल्दी से दरवाज़ा खोल दिया. जब तनवी ज़ाकिया के साथ अंदर आई तो मैं टवल से अपने हाथ पोंच्छ रहा था. मैने ज़ाकिया से पूछा के आज कैसे जाना है तो वो बोली के आज कार लेकर आई हूँ इसलिए कोई फिकर की बात नही है. मैने कहा के फिकर तो वैसे भी नही था पर चलो तुम कार लाई हो तो भी ठीक है. फिर वो नाज़िया को सहारा देकर ले गयी. जाते हुए नाज़िया बहुत अच्छा हल्का सा लंगदाने की आक्टिंग कर रही थी. तनवी ने उनके साथ बाहर निकलते हुए कहा के कल भी मालिश करवा लेना बिल्कुल ठीक हो जाओगी. नाज़िया ने निकलते हुए पीछे मुड़कर मुझे थॅंक यू कहा ऑरा आँख मार दी. तनवी वापिस आई और मुझे बाहों में लेकर बोली के आज कहाँ तक पहुँचे? एनी प्रोग्रेस? मैने उसे बताया तो वो हंस दी और बोली की बहुत अच्छे जा रहे हो. वो चल दी ऑफीस के लिए तैयार होने और मैं भी तैयार होने लगा.

ऑफीस पहुँच कर मैने सोचा के तनवी को कुच्छ काम का बहाना कर के अपने पीसी पर बिठा देता हूँ. मैने उसको बुलाया और कुच्छ काम दे दिया जो डेढ़-दो घंटे का था और उसको कहा के जैसे ही टाइम मिले वो इसको कर्दे और अगर थोड़ा बच जाए तो छुट्टी के बाद कर्दे. उसने कहा के ठीक है. उसने कुच्छ तो मेरे राउंड्स पे जाने पर कर दिया और बाकी का छुट्टी के बाद करने के लिए रख दिया. छुट्टी के बाद मैं घर आके सीक्ट्व के मॉनिटर पर बैठ गया और तनवी को देखने लगा के वो क्या करती है. उसने फटाफट काम ख़तम किया और फिर पीसी चेक करने लगी. कुच्छ नही मिला. फिर उसने टेबल की ड्रॉयर्स चेक करनी शुरू कर दीं. कुच्छ ऑफीस की फाइल्स थीं वो उसने देख कर वापिस रख दीं. मैं एक बात देख रहा था कि वो जिस चीज़ को भी चेक करती थी उसे बिल्कुल वैसे ही वापिस रख देती थी जैसे वो पहले थी ताकि पता ना चले कि किसी ने वहाँ कुच्छ छेड़ छाड़ की है. शायद उससे मतलब की कोई चीज़ हाथ नही लगी इसलिए कुच्छ मायूस सी वो वहाँ से निकल गयी. मैं उठकर अपने बेडरूम में आ गया और लेट कर आराम करने लगा और सोचने लगा.

मैने बहुत सोचा कि तनवी क्या ढूँढ रही है और किसके लिए पर कुच्छ समझ नही आ रहा था. इसके अलावा उसकी कोई भी बात ग़लत नही थी बल्कि वो बहुत अच्छे से मेरे काम में मेरी मदद कर रही थी. सिर्फ़ यही एक बात परेशान कर रही थी और इसका कोई उपाय नज़र नही आ रहा था. कोई तो है जो यह सब करवा रहा है. पर क्यों का कोई भी जवाब नही नज़र आ रहा था. मेरी आज तक किसी से लड़ाई नही हुई थी इसलिए दुश्मनी का तो सवाल ही नही पैदा होता. फिर यह सब क्या था मेरी समझ से बाहर था. मुझे लगा के वेट आंड . ही ठीक रहेगा मेरे लिए शायद कुच्छ सामने आ जाए. शायद तनवी कुच्छ ऐसा कर बैठे की उसकी पॉल-पट्टी खुल जाए. अगर नही आया तो देखेंगे क्या करना है. यही सब सोचते सोचते कब 5 बज गये पता ही नही चला. होश तो तब आया जब नौकर पूच्छने आया के चाय कमरे में लूँगा या बाहर. मैने उसको कहा के बाहर ही रखो मैं आता हूँ. मैने उठकर मुँह हाथ धोए और बाहर आकर चाय पीने लगा. चाय के बाद एक बार सोचा के ऊपेर तनवी के पास चला जाए पर फिर पता नही क्यों मैने यह विचार त्याग दिया.

मेरी सोच फिर वही थी के क्या करूँ और कैसे यह पहेली सुलझेगी? पर कुच्छ समझ नही आ रहा था. फिर बहुत सोचने के बाद मैने अपने एक दोस्त को कॉंटॅक्ट किया जो डीटेक्टिव एजेन्सी चलाता है और उसको तनवी की सारी डीटेल्स दे दी और कहा के इस लड़की की पास्ट और प्रेज़ेंट की पूरी जानकारी चाहिए डीटेल्ड. मैने उसे यह बता दिया कि यह मेरे स्कूल में नयी रखी गयी है और मेरे ही घर के 2न्ड फ्लोर पर रह रही है. बाकी की सारी डीटेल्स चाहिए. उसने कहा कि टाइम लगेगा पर कहो तो जैसे जैसे जानकारी मिलती है तुम्हें पास करता रहूं या पूरी जन्म कुंडली बना के एक ही बार में सारी जानकारी दूं. मैने उसको बोला के जैसे ही कोई जानकारी मिलती है मुझे पास करते रहो और अंत में सारी डीटेल्स इकट्ठी करके रिपोर्ट बना देना. फिर मैं इंतेज़ार करने लगा उसकी रिपोर्ट्स का.

क्रमशः......

KUNWARIYON KA SHIKAAR--30

gataank se aage..............

Agley din Nazia ko seedhey hi merey bedroom mein pahuncha diya gaya taki usski maalish ki ja sakey. Tanvi Zakia ko lekar neeche chali gayee aur maine Nazia ki maalish karne ke liye tel ki shishi utha li. Jaat jaate Tanvi keh gayi ke aaj patti bandhne ki zaroorat nahi padegi. Aaj Nazia ne track suit pehna hua tha jisska top front zip wala tha. Maine Nazia se poochha ke aaj wo kaisa mehsoos kar rahi hai. Ussne bataya ke dard to bilkul nahi hai aur ab to aisa lagta hi nahi ke usse chot bhi kabhi lagi thi. Maine kaha ke bahut achhi baat hai. Maine Nazia ko kaha ke usska pajama utarna padega. Ussne muskurate huey apna pajama utaar diya aur apni aankhein band karke let gayi. Maine usski patti kholi aur saath hi khapacchi bhi nikaal di. Phir usski taang ko uthakar apni god mein rakh liya aur maalish karne laga. Patti zyada tight karke bandhi hone se usski jaangh aur pindli par nishan padey thhe jinnko main maalish se theek kar raha tha. Maine usski maalish karte huey usski taang ghutne par se modke usski jaang par pyar se haath pherte kaha ke dard to nahi hai. Wo sihar gayee aur boli ke dard to nahi hai par ussko phir kal jaisa lagne laga hai. Maine kaha ke koyi baat nahi main kal ki tarah phir usse theek kar doonga. Wo sharma gayi aur kuchh nahi boli. Main jakar ek towel le aaya aur paas mein rakh liya. Kamre ka darwaza maine lock kar diya. Phir maine usski ore pyar se dekha aur usski dono jaanghon par pyar se haath pherne laga. Usski aankhein laal honey lageen aur wo masti mein aane lagi.

Maine ussko uthakar apne ooper ke kapde utaarey aur usski peeth ki ore baithkar usse apni god mein bitha liya aur usska bhi top utar diya. Kal ki tarah ussne aaj bhi andar kuchh nahi pehna hua tha. Ab Nazia ek panty mein meri god mein baithi hui thi. Maine apne dono hath usski baglon se lejakar usske kadak mammon par rakh diye to wo zor se kamp gayi aur usski sitkaar nikal gayi. Manie apne hathon se usske dono mammey dabaney shuru kar diye. Usske chhote chhote nipples ek dum khadey ho gaye thhe aur mere haathon mein gudgudi kar rahe thhe. Maine Nazia ke ooperi shareer ko apne ek baaju par karte huey apna munh neeche kiya aur usske ek ubhaar ko apne munh me le liya. Doosre ubhaar par merey haath ki sakhtiyaan badastoor chal rahi theen. Main dono mammon ko baari baari apne munh se chubhlaane laga. Ek mere munh mein hota to doosra mere haathon mein. 4-5 min mein hi Nazia poori masti mein aa gayi aur uttejana se usska chehra aur aankhein laal ho gayeen. Usske munh se aaaaaaaaah, oooooooooh ki awaazein nikalne lageen. Ussne apna haath neeche apni panty mein kassi choot par rakh diya aur apni choot ko dabane lagi. Maine ussey pyar se kaha ke panty geeli ho jayegi to ussne poochha ki kya karoon? Maine kaha ke aise mein yahi karna chahiye ke issko utaar do. Ussne sharam se apni aankhein band kar leen aur apni panty bhi utaar di.

Main ussko apne se alag karke khada ho gaya aur usse lita kar bola ke ruko pehle main bhi tumhari position mein aa jaaun. Wo chup rahi. Usski saansein tez chal rahi theen aur ussne apna ek haath apne bhari mammey par rakh kar usse daba rahi thi aur doosre haath se apni choot ko sehla rahi thi. Nazia ke sar ke neeche do takiye lagakar main usski tangon ke beech mein aa gaya aur usski tangein uthakar apne kandhon par aise rakheen ke usski taangein ghutnon se mudkar meri peeth par latak gayeen. Iss haalat mein usski choot mere munh ke bahut kareeb aa gayi. Choot ki lakeer par paani ki boondein chamak rahi theen. Maine apne dono haath usski janghon par rakh kar ungliyon se usski choot ke dono phanko ko khol diya. Usski dono gulabi puttiyan phadphada rahi theen aur usski choot andar se ekdum laal gulaabi rang ki nazar aa rahi thi. Maine zor se saan li aur usski choot se aa rahi maadak sugandh mujhe deewana karne lagi. Maine apni jeebh nikaali aur usski choot ke dono pankhudiyon ko chaatne laga. Ussne zor se ek siskaari li aur boli ki yeh kya kar rahey ho? Maine kaha ke tumhein maza aa raha hai na? Nazi ahista se boli ki haan. To maine kaha ke bas phir kuchh mat bolo aur maza leti raho. Main jo bhi jaise bhi kar raha hoon mujhe karne do. Wo chup ho gayi.

Maine apni jeebh wapis usski choot par laga di aur usski gulab ki pankhudiyon ko apni jeebh ko ooper neeche karke aur daba ke chaatne laga. Ooper jaat huey main apni jeebh se usske bhagnaase ko bhi apni jeebh se ragad raha tha. Nazia chhatpataane lagi aur boli ke haaaaaaaaaaaaye maaaaaaaaaaaa yeeeeeeeeeeeeh muuuuuuuuuujheeeeeeee kyaaaaaaaaa hooooooooo raaaaaaaaaaahaaaaaaaaaaaa haaaaaaaaaaaai. Aiseeeeeeee hiiiiiiiiiiiii karoooooooooooo bahuuuuuuuuuuuut mazaaaaaaaaa aaaaaaaaaaaaa haaaaaaaai. Maine apna munh poora khol kar usski choot par rakh diya aur apni jeebh ko usski choot mein ghusa diya. Nazia uchhal padi par merey haathon ki pakad aur usski taangon ke mere kandhon par latke hone se wo zyada kuchh nahi kar paayee. Maine apni jeebh se Nazia ki nazuk choot ko chodna shuru kiya. Usske dono haath pakad kar usski choot ke dono ore rakh kar ussko kaha ki issko khol kar rakho aur apni jeebh se usski choot ko chodna chaalu rakhte huey maine apne dono haath usske sakht ho chuke mammon par jama diye aur nipples ko apni ungliyon se chhedne laga. Merey daanton ki ragad aur jeebh ki chudayi se wo bahut tezi se manzil ki ore badh rahi thi. Thori der mein hi Nazia ka jism jhoomne laga aur usske munh se oooooooooooon aaaaaaaaaan ki awaasein nikli aur saath hi wo kaampne lagi. Nazia ki choot bhalbhala ke paani chhodne lagi.

Nazia ke shaant hone par maine usski tangein neechi kar deen aur khada ho gaya. Wo bhi baith gayi aur pyar se mujhe dekhne lagi. Phir Nazia ne haath badhakar mere akde huey lund par rakh diya aur boli ke haye ma kitna garam hai yeh to jaise mera haath hi jala dega. Maine kaha ke tumhari choot ki garmi to nikal gayi hai isski garmi abhi nahi nikli issliye itna gusse se aur bhi garam ho raha hai. Wo hans ke boli to isski bhi garmi nikaal dete na. Maine kaha ke itna time hi kahan hai par thori si garmi to nikaal hi sakte hain jaise tumhaari thori si garmi nikaali hai. Wo boli kaise? To maine ussko khada kar diya aur wo mujhse lipat gayee. Maine usse deep kiss kiya aur usse apne saath chipkaye huey hi bed par let gaya. Phir maine usske mammey apne haathon mein le liye aur ek ko jeebh se chaatne laga. Wo phir se uttejit hone lagi. Maine usska munh apne pairon ki taraf karke usske ghutne mod diye to usski choot ek baar phir merey saamne thi. Par iss baar usski mulayam gol gaand bhi meri aankhon ke saamne thi aur ussmein se usski gaand ka pyara sa chhed bhi mujhe dikh raha tha.

Maine Nazia ko kaha ke merey lund ki garmi ko apne munh mein lekar shaant karey. Ussne mere lund ko apne dono haathon mein lekar sehlana shuru kar diya aur apne haath ooper neeche karne lagi. Phir ek haath bed par saharey ke liye tika kar apna munh merey lund ke paas le aayi aur lund ke supaarey ko choom kar apni jeebh se chaatne lagi. Mera lund uttejana se aur adhik akad gaya aur uchhalne laga. Maine usse kaha ki Nazia der na karo issko apne munh mein le lo. Leti hoon kehkar ussne apne poora munh khola aur lund ko andar karne ki koshish karne lagi. Thori si koshish ke baad lund ka supara usske munh mein chala gaya aur wo ussko apni jeebh se munh ke andar hi chaatne lagi. Idhar maine usski choot par apni jeebh chalaani shuru kar di thi. Meri jeebh usske bhagnaase ko ragadti hui usski daraar mein hokar usski gaand ke chhed ko chhoti to wo chihunk jaati. Udhar maine neeche se apni gaand uthakar apna lund usske munh mein aur zyada daalne ki koshish shuru kar di. Nazia ko maine kaha ke jitna zyada andar kar sakti ho lund ko kar lo aur issko choosti raho jaise lollypop chooste hain.

Apne dono haathon se maine Nazia ki choot ko khola aur apni jeeb ussmein ghusa di aur jeebh se ussko chodne laga. Ek angoothe se maine usske bhagnaase ko sehlana shuru kar diya. Jitni usski uttejana badhti utna zyada mera lund Nazia apne munh mein leti jaati. Phir maine apne lund se usske munh ko chodna shuru kar diya. Apni thook se ek ungli geeli karke maine usski gaand ke chhed ko ragadna shuru kiya to wo kaamp gayi. Maine apni ungli dubara geeli ki aur usski gaand ke chhed par rakh kar thora sa dabaav daala. Usski gaand ka tight chhalla thora khula aur meri ungli aadha inch usski gaand mein ghus gayi. Wo uchhal padi par merey hathon ki mazboot pakad ne ussey hilne nahi diya. Ungli maine wahin rehne di aur usski choot mein apni jeebh andar bahar karne ki rafter tez kar di. Ussey maza aana shuru ho gaya aur wo masti mein jhoom jhoom kar merey lund ko apne munh mein andar bahar karte huey choosne lagi. Main bhi jhadne ki kagaar par aa gaya aur wo bhi masti ke charam ki ore agrasar ho rahi thi. 5-7 min mein hi wo jhad gayi aur maine apne haath neeche karke usske sar ko pakad kar 8-10 baar apne lund usske munh mein andar bahar kiya aur phir meri uttejana ka baandh bhi toot gaya aur merey lund se garam garam gaadhe veerya ki pichkaari usske munh mein giri jo wo satak gayi. Maine apna lund usske halak tak utaar diya aur jhatke leney laga. Har jhatke ke saath mera veerya usske halak mein jaata aur wo gatak jaati. Mera skhalan poora hone par maine apne aap ko dheela chhod diya aur wo bhi pala kar meri chhati se aa lagi aur gehri gehri saansein lene lagi.

Thori der baad jab hum sanyat huey to wo boli ke aaj to meri choot ki garmi do baar nikaal di sach mein bahut maza aaya. Maine kaha ke asli garmi to choot ki nikalti hai lund se chudayee karne se aur maza bhi itna aata hai ki yeh sab mazey bhool jaaogi. To wo tunak kar boli ke phir vaise hi kyon nahi kiya? Maine poochha ke kaise? To wo boli ke vaise hi jaise keh rahe ho. Maine kaha ke kya keh raha hoon? Wo boli ke bahut shararti ho merey munh se hi kehlaana chaahte ho? Maine kaha ke dono nange hokar ek doosre se chipke huey hain aur ek doosre ko mazey de chuke hain aur tum abhi bhi sharma rahi ho? To wo boli ke theek hai batao apne lund se meri choot kyon nahi maari? Maine usse zor se apne saath bheench liya aur kaha ke yeh hui na baat Nazia, wo issliye ke tumhaari marzi bhi to pakki pata nahi thi aur main bina ladki ki marzi ke kabhi nahi karta aur zabardasti to hargiz nahi. Jab tak aur jahan tak ladki chahegi main karoonga aur jahan ussne rok diya usske aage full stop. Wo boli ke main to chahti thi par sharam ke maare boli nahi aur socha ke aap khud hi kar doge sab kuchh. Maine usske kaha ke dekho yeh aap aap karke tum itna faasla kyon bana rahi ho hamare beech mein. Aur agar tum chahti theen ke main tumhein chodkar ladki se aurat bana doon to kehna tha ya ishaara to kiya hota par koyi baat nahi there is always a tomorrow. Maine hans kar kaha ke kal jab aaogi to tumhein chod bhi denge meri jaan. Wo issimein sihar uthi aur mujhse amarbel ki tarah chipak gayee.

Main ussko lekar bathroom mein aaya aur munh haath dhokar hum baahar aaye. Kapde pehante huey maine usse kaha ki abhi thora dard ka bahana karti rehna taaki kal bhi maalish ke liye aa sako. Hum ready huey hi thhe ki mujhe Tanvi ki awaz aayee. Maine jaldi se Nazia ko bed par lita diya aur jaldi se darwaza khol diya. Jab Tanvi Zakia ke saath andar aayee to main towel se apne haath ponchh raha tha. Maine Zakia se poochha ke aaj kaise jana hai to wo boli ke aaj car lekar aayee hoon issliye koyi fikar ki baat nahi hai. Maine kaha ke fikar to vaise bhi nahi tha par chalo tum car layee ho to bhi theek hai. Phir wo Nazia ko sahara dekar le gayee. Jaate huey Nazia bahut achhi halk sa langdane ki acting kar rahi thi. Tanvi ne unnke saath bahar nikalte huey kaha ke kal bhi maalish karwa lena bilkul theek ho jaogi. Nazia ne nikalte huey peechhe mudkar mujhe thank you kaha aura ankh maar di. Tanvi wapis aayee aur mujhe bahon mein lekar boli ke aaj kahan tak pahunche? Any progress? Maine usse bataya to wo hans di aur boli ki bahut achhe ja rahe ho. Wo chaldi office ke liye taiyaar hone aur main bhi taiyar hone laga.

Office pahunch kar maine socha ke Tanvi ko kuchh kaam ka bahana kar ke apne PC par bitha deta hoon. Maine ussko bulaya aur kuchh kaam de diya jo dedh-do ghante ka tha aur ussko kaha ke jaise hi time miley wo issko kardey aur agar thora bach jaaye to chhutti ke baad kardey. Ussne kaha ke theek hai. Ussne kuchh to merey rounds pe jaane par kar diya aur baaki ka chhutii ke baad karne ke liye rakh diya. Chutti ke baad main ghar aake cctv ke monitor par baith gaya aur Tanvi ko dekhne laga ke wo kya karti hai. Ussne fatafat kaam khatam kiya aur phir PC check karne lagi. Kuchh nahi mila. Phir ussne table ki drawers check karni shuru kar deen. Kuchh office ki files theen wo ussne dekh kar wapis rakh deen. Main ek baat dekh raha tha ki wo jis cheez ko bhi check karti thi usse bilkul vaise hi wapis rakh deti thi jaise wo pehle thi taki pata na chaley ki kissine wahan kuchh chhed chhad ki hai. Shayad usse matlab ki koyi cheez haath nahi lagi issliye kuchh maayoos si wo wahan se nikal gayi. Main uthkar apne bedroom mein aa gaya aur let kar aaram karne laga aur sochne laga.

Maine bahut socha ki Tanvi kya dhoondh rahi hai aur kisske liye par kuchh samajh nahi aa raha tha. Isske alaawa usski koyi bhi baat galat nahi thi balki wo bahut achhe se merey kaam mein meri madad kar rahi thi. Sirf yahi ek baat pareshan kar rahi thi aur isska koyi upaayay nazar nahi aa raha tha. Koyi to hai jo yeh sab karwa raha hai. Par kyon ka koyi bhi jawab nahi nazar aa raha tha. Meri aaj tak kissi se ladaayi nahi hui thi issliye dushmani ka to sawaal hi nahi paida hota. Phir yeh sab kya tha meri samajh se bahar tha. Mujhe laga ke wait and watch hi theek rahega merey liye shayad kuchh saamne aa jaaye. Shayad Tanvi kuchh aisa kar baithe ki usski pol-patti khul jaaye. Agar nahi aaya to dekhenge kya karna hai. Yahi sab sochte sochte kab 5 baj gaye pata hi nahi chala. Hosh to tab aaya jab naukar poochhne aaya ke chaye kamre mein loonga ya bahar. Maine ussko kaha ke bahar hi rakho main aata hoon. Maine uthkar munh haath dhoye aur bahar aakar chaye peene laga. Chaye ke baad ek baar socha ke ooper Tanvi ke paas chala jaaye par phir pata nahi kyon maine yeh vichaar tyaag diya.

Meri soch phir wahi thi ke kya karoon aur kaise yeh paheli suljhegi? Par kuchh samajh nahi aa raha tha. Phir bahut sochne ke baad maine apne ek dost ko contact kiya jo detective agency chalata hai aur ussko Tanvi ki saari details de di aur kaha ke iss ladki ki past aur present ki poori jaankaari chahiye detailed. Maine usse yeh bata diya ki yeh merey school mein nayi rakhi gayi hai aur mere hi ghar ke 2nd floor par reh rahi hai. Baaki ki saari details chahiye. Ussne kaha ki time lagega par kaho to jaise jaise jaankari milti hai tumhein pass karta rahoon ya poori janma kundli bana ke ek hi baar mein saari jaankari doon. Maine ussko bola ke jaise hi koyi jaankari milti hai mujhe pass karte raho aur ant mein saari details ikatthi karke report bana dena. Phir main intezaar karne laga usski reports ka.

kramashah......


rajaarkey
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Re: कुँवारियों का शिकार

Unread post by rajaarkey » 06 Dec 2014 15:04

कुँवारियों का शिकार--31

गतान्क से आगे..............

अगले दिन किसी त्योहार की छुट्टी थी. मैं सुबह उठा और फ्रेश होकर चाय पीने और अख़बार देखने लगा. मुझे इंतेज़ार था नाज़िया का. आज उसको चोद्कर लड़की से औरत बनाना था. यह सोच कर ही मेरा लंड जॉकी में करवटें लेने लगा. खैर इंतेज़ार ख़तम हुआ और वो टाइम भी आ ही गया जिसका मैं बेसब्री से इंतेज़ार कर रहा था. ज़ाकिया नाज़िया को सहारा देकर ला रही थी. मैने पूछा के तनवी नही आई तो ज़ाकिया ने कहा के नही वो नही आई पर आज तुम्हारी पुरानी पहचान वाली को लाई हूँ. कहकर उसने आवाज़ दी के आ जाओ कब तक बाहर खड़ी रहोगी? मैने दरवाज़े की तरफ देखा तो मैं चौंक गया. दरवाज़े में मरियम खड़ी थी. उसके चेहरे का रंग उड़ा हुआ था. वो डरते-डरते अंदर आई. मुझे उसकी सूरत देखकर खुद डर लगने लगा के यह क्या हो गया है और अब आगे क्या होने वाला है? ज़ाकिया ने आगे बढ़कर नाज़िया को बेड पर लिटा दिया और वापिस मेरे पास आकर मुझे गिरेबान से पकड़ कर बोली तुम समझते क्या हो अपने आप को? मैने कहा के मैं कुच्छ समझा नही तुम क्या कहना चाह रही हो ज़ाकिया?

उसका चेहरा लाल भभूका हो रहा था और वो एक-एक लफ्ज़ चबा कर बोली दिमाग़ खराब हो गया है मेरा. पागल हो गयी हूँ मैं. तुमने यह कैसी उल्टी गंगा बहा रखी है? पहले मेरी सबसे छ्होटी बेहन को चोदा और आज मेरी दूसरी छ्होटी बेहन को चोदने का प्रोग्राम बनाया हुआ है. मैं क्या करूँ. अगले महीने मेरी शादी है और मैं अपने होने वाले शौहर को मिलने गयी थी कल. वहाँ उसने मुझे अकेले में चोदने की कोशिश की पर मेरी सील तोड़ने में कामयाब नही हो सका. तड़पति हुई घर पहुँची तो यह महारानियाँ दोनो अपनी-अपनी आप बीती एक दूसरे को सुना रही थीं और मैं चुप खड़ी सुनती रही. मेरी जलती आग में यह घी डालती रहीं और मैं जलती रही. यह सब सुनकर नाज़िया और मरियम दोनो के चेहरे पर छाए परेशानी के बादल छट गये और दोनो एक दूसरे को देख कर हल्के से मुस्कुराने लगीं. ज़ाकिया बोले जा रही थी कि अल्लाह-अल्लाह करके अब टाइम आया है और तुम पूछ रहे हो के मैं क्या कहना चाह रही हूँ? मैं बड़ी हूँ और पहले मेरी आग को बुझाओ फिर कुच्छ और करना. मैं मुस्कुराते हुए आगे बढ़ा और उसको अपनी बाहों में भरकर कहा के मना किसने किया है ज़ाकिया रानी और उसको अपने साथ चिपका कर उसके गुलाब की पट्टियों जैसे दोनो होंठ अपने होंठों मे क़ैद कर लिए और चूसने लगा. अपनी जीभ उंनपर फेरी तो वोकाँप उठी और मुझे अपनी बाहों में कस लिया. मैने मरियम को कहा के दरवाज़ा लॉक कर्दे.

वो खुशी खुशी गयी और जैसे ही उसने दरवाज़ा लॉक किया मैने कहा के तुम तीनो अपने अपने कपड़े उतार कर बिल्कुल नंगी हो जाओ और मैं अपने कपड़े भी उतारने लग गया. तीनो ने सारे कपड़े उतार दिए और मेरा बेडरूम जैसे रोशनी से भर गया. तीन कड़क जवान गोरी चित्ति लड़कियाँ नंगी मेरे आगे खड़ी थीं और मेरा लंड क़िस्सी साँप की तरह अपना फन उठाकर उनको सलामी दे रहा था. ज़ाकिया मेरे लंड को बड़ी दिलचस्पी से देख रही थी और बोली के वाह तुम्हारा औज़ार तो बहुत बढ़िया लगता है. अभी देखते हैं इसकी धार. मैने कहा के घबराओ मत तुम तीनो को दो-दो बार तो ठंडा कर ही सकता है कम-से-कम. वो बोली के कहने और करने में बहुत फ़र्क होता है राज करो तो जानें. मैने आगे बढ़ कर उसको पकड़ा और बेड पर ले आया. उसको सीधा लिटा दिया और मरियम और नाज़िया को बोला के इसके मम्मे चूसो और चूस-चूस कर लाल कर दो और इसके पूरे बदन को भी प्यार से सहलाओ. इसको इतना उत्तेजित करो के यह छटपटाने लगे पर तुम डरना नही और रुकना भी नही. मज़ा इसको तभी आएगा जब यह पूरी तरह से उत्तेजित हो जाएगी.

दोनो ने ज़ाकिया को जाकड़ लिया और मेरे कहे का अनुसरण करने लगीं. मैने नाज़िया से कहा के इसके नीचे दो तकिये लगा दो जैसे तुम्हारे नीचे लगाए थे. उसने जल्दी से तकिये लगाए और अपने काम में लग गयी. मैने उसकी टाँगें उठा कर अपने कंधों पर लटका दीं और उसकी चूत की दरार में अपनी जीभ चलाने लगा. तिहरे आक्रमण से वो बहुत जल्दी उत्तेजित हो गयी और छटपटाने लगी और हााआआं हुउउउउउउउउउउउउउन ऊऊऊऊऊऊऊऊओ की आवाज़ें निकालने लगी. मैने अपने दोनो हाथों से उसकी चूत को खोला और मैं देखता ही रह गया उसकी चूत का नज़ारा. हल्के गुलाबी रंग की पंखुड़ीयाँ और अंदर गहरे लाल रंग की उसकी चूत जो उसकी बढ़ती उत्तेजना के कारण गीली हो चुकी थी और फड़फदा रही थी. मैने अपनी एक उंगली उठाकर उसकी पुट्तियों को सहलाया और उसके दाने के आसपास फिराना शुरू कर दिया. वो काँपने लगी और बोली के हाए रीईईईईईईईईई नाज़ी तू सच बता रही थी के बड़ा मज़ा आता है. मैं तो हवा में उड़ रही हूँ और डर लग रहा है कहीं गिर ना जाऊ. मेरी आग और बढ़ गयी है जल्दी कुच्छ करो राज. मैने उसके दाने को उंगली से सहलाया तो वो और काँपने लगी. फिर मैने उसके दाने को सहलाते सहलाते उसकी चूत अपने मुँह से पूरी धक दी और अपनी जीभ को अंडा डाल कर दबाने लगा. वो कराह उठी और उसने कोशिश की के अपनी चूत को मेरे मुँह पर दबा दे पर जिस पोज़िशन में वो थी वो ज़्यादा हिल नही सकती थी.

मैने अपनी जीभ से उसे चोदना शुरू कर दिया. बहुत जल्दी वो उत्तेजना की ऊँचाइयाँ छूने लगी. हाआआआआअँ आईसीईईईई हीईीईईईईईईईईईईईईईईईईई करूऊऊऊऊऊऊओ, माआआआआआऐं गइईईई, माआआआअर डूऊऊऊऊ, मेरिइईईईईईईईई चूऊऊऊऊथ, ईईईईई क्य्ाआआआआआ हूऊऊऊऊऊ गय्ाआआआअ मुझीईईईईई, आआआआअँ आआआआअँ आआआआअँ. और उसकी चूत काबाँध टूट गया और वो झाड़ गयी. मैने अपने मुँह को नही हटाया और उसकी चूत को चाटना चालू रखा. थोड़ी ही देर में वो फिर से उत्तेजित होने लगी तो मैने उसकी टाँगें नीचे करके तकिये हटा दिया. जेल की ट्यूब उठाकर उसकी चूत मैं अंदर तक जेल लगा दी और थोड़ी सी अपने लंड पर भी लगाकर उसे चिकना कर दिया. फिर अपने लंड को उसकी चूत पर रगड़ना शुरू किया, नीचे से ऊपेर और ऊपेर से नीचे. उसकी चूत पाओ रोटी की तरह फूल गयी थी और झटके लेकर खुल-बंद हो रही थी. चूत के छ्ल्ले पर अपने लंड का सुपरा रख कर मैने दबाव डाला तो आधा टोपा अंदर चला गया. मैने बाहर निकालकर फिर अंदर डाला तो थोड़ा और अंदर चला गया. फिर मैं उसे ऐसे ही आगे पीछे करने लगा. आगे करते उसका छल्ला अंदर दबाता और मैं हल्का सा झटका देता तो मेरा लंड एक-दो सूत और अंदर चला जाता और बाहर करता तो उसका छल्ला बाहर को आता पर मैं लंड को बाहर नही आने देता. 4-5 बार ऐसा करने पर मेरे लंड का सुपरा और एक इंच लंड उसकी चूत में घुस गया और मैने वही एक इंच लंड अंदर बाहर करना शुरू कर दिया.

एक-दो धक्कों के बाद मैं हल्का सा ज़ोर बढ़ा देता और थोड़ा थोड़ा करके मेरा लंड उसकी कुंआरी झिल्ली तक पहुँच गया और वो बोली के बस दर्द होता है. मैने कहा के पहली चुदाई है एक बार तो दर्द होगा ही. उसके बाद तुम्हे मज़ा ही मज़ा आएगा और दर्द कभी नही होगा. मैं अपनी पोज़िशन सेट करके उतना ही लंड अंदर बाहर करने लगा और जब वो पूरी तरह से मस्ती में आ गयी तो मैने अपना लंड सुपारे तक बाहर निकाल कर एक पूरी ताक़त लगाकर धक्का मारा और मेरा लंड गकच करके ज़ाकिया की सील तोड़कर अंदर घुस गया. ज़ाकिया की एक ज़ोरदार चीख निकली जिसे मरियम ने अपना मुँह उसके मुँह पर रख के बंद कर दिया. मैने अपना हाथ नीचे लाकर उसके दाने पर अपना अंगूठा रख दिया और रगड़ने लगे. उधर वो दोनो अपनी आपी को प्यार से सहला रही थीं और थोड़ी देर में ही ज़ाकिया की उत्तेजना फिर से बढ़नी शुरू हो गयी और दर्द भी कम हो गया. बहुत टाइट चूत थी उसकी और मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरा लंड किसी शिकंजे में कॅसा हुआ हो. मैने ज़ोर लगा कर अपने लंड को बाहर किया और थोड़ी जेल और लगाकर वापिस अंदर डाल दिया और आहिस्ता आहिस्ता अंदर बाहर करने लगा. उसकी दोनो पुट्तियाँ मेरे लंड से चिपकी हुई थीं और जब मैं लंड को अंदर करता तो दोनो अंदर को दब जातीं और साथ ही चूत काछल्ला भी अंदर हो जाता और जब मैं लंड को बाहर निकालता तो छल्ले के साथ साथ दोनो पुट्तियाँ भी बाहर आ जातीं. घर्षण का आनंद बहुत ही अधिक आ रहा था.

अभी मेरा लंड आधा अंदर जाना बाकी था. हर 4-5 धक्कों के बाद मैं थोड़ी जेल अपने लंड पर और लगा देता और साथ ही आधा इंच लंड को और अंदर घुसा देता. इस तरह करते करते मेरा लंड जड़ तक अंदर घुस गया और उसकी बच्चेदानी से जेया टकराया. टकराते ही ज़ाकिया ने एक ज़ोर की झुरजुरी ली और बोली यह क्या हुआ तो मैने कहा के लंड पूरा अंदर घुस गया है और उसकी बच्चेदानी से जा टकराया है इसलिए उसे गुदगुदा गया है. वो बोली के बहुत अच्छा लग रहा है करते रहो. अपनी बच्चेदानी के मुँह पर मेरे लंड की 8-10 ठोकरें ही वो सह पाई और उसका पूरा शरीर अकड़ गया और वो एक बहुत ही लंबी आआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआः के साथ झाड़ गयी. झटके खाते उसके शरीर के साथ उसकी चूत भी खुलने और बंद होने लगी. जब तक वो झड़ती रही मैं अपना लंड उसकी चूत में जड़ तक डाल कर निश्चल पड़ा रहा और हाथ बढ़ा कर उसके मम्मे अपने हाथों में पकड़ लिए. बहुत ही प्यारा पहला स्पर्श था उसके मम्मों का. जैसे दो कच्चे अमरूद मेरे हाथों में आ गये थे पर इतने चिकने थे उसके मम्मे के मेरे हाथों से फिसले जा रहे थे. उसके अंगूरी निपल मैने अपने अंगूठों और उंगलियों में दबाए तो उसकी एक मादक आआआआआआः निकली.

झड़ने के बाद उसने अपना शरीर ढीला छ्चोड़ दिया था और अब एक बार फिर से उसकी उत्तेजना बढ़ने लगी थी. मैने अपना लंड दो इंच बाहर निकालकर वापिस अंदर पेलना शुरू कर दिया और थोड़ी देर तक उसे ऐसे ही चोद ता रहा. कुच्छ समय में ही उसने भी अपनी गांद उठाकर मेरे लंड का स्वागत करना शुरू कर दिया और मैं अपना लंड पूरा बाहर निकालकर पेलता रहा. जब मैं अपना लंड बाहर निकालता तो सिर्फ़ टोपा अंदर रह जाता और मैं वापिस अंदर घुसा देता. लंड जब अंदर घुसना शुरू होता तो वो अपनी गांद उठाना शुरू कर देती और फिर हमारे शरीर आपस में टकराते. चुदाई का मस्त संगीत कमरे में गूँज रहा था. फॅक-फॅक फॅक-फॅक और मेरी गोलियों की थैली उसकी गांद से टकराती तो पाट-पाट की आवाज़ होती. मैं जानता था की अब मैं और ज़्यादा देर तक नही रुक सकता, इसीलिए मैने अपने धक्कों की रफ़्तार कम ही रक्खी थी ताकि मेरी उत्तेजना ज़्यादा ना बढ़े. पर ज़ाकिया की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी और अब उसे चुदाई का भरपूर मज़ा आ रहा था. दर्दका नाम-ओ-निशान ख़तम हो चुका था. हम तीनों के मिलेजुले प्रयास उसकी उत्तेजना को बढ़ाते जा रहे थे और वो उचक उचक कर चुदवा रही थी.

फिर वही हुआ जो होना था. ज़ाकिया ने बोलना शुरू कर दिया. मार दो मेरी चूत को, फाड़ दो मेरी चूत को. हाए राज तुम्हारा लंड तो बड़ा प्यारा है रे, ऐसे रगड़ कर अंदर बाहर हो रहा है के बहुत मज़ा आ रहा है. फिर उसकी साँसें अटकने लगीं और वो माआआआआआऐं गइईईईईईई रीईईईईईईई, पकड़ लूऊऊऊऊऊऊ मुझीईईईईई, माआआआआआ ईईईईई कैसाआआआआ मज़ाआआआआआअ हाआआआआआआआई, रोमीीईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई मेरईईईईईईय रजाआाआआआ माआआआआईं गइईईई. और वो झाड़ गयी. मैं तो पहले ही तैयार था सो मैने भी उसके बोलते ही अपनी रफ़्तार खूब तेज़ करदी थी. 10-12 ज़ोरदार धक्को के साथ ही मैं भी अपने चरम पर पहुँचा और अपना लंड उसकी चूत में जड़ तक डाल के अपने गरम गरम वीर्य की पिचकारियाँ उसकी चूत में छ्चोड़ने लगा. मेरा लंड उसकी बच्चेदानी से सटा हुआ था और वीर्य की गरम गरम धार उसकी बच्चेदानि के मुँह पर पड़ी तो वो काँप कर एक बार और झाड़ गयी और अपने शरीर को ढीला छ्चोड़ दिया. मैं भी उसके ऊपेर गिर गया और मुझे नाज़िया और मरियम ने ज़ाकिया के साथ जाकड़ लिया.

जब हम दोनो संयत हुए तो मैने मरियम से कहा के ज़ाकिया के लिए हॉट वॉटर ट्रीटमेंट का इंटेज़ाम करे तो वो तुरंत उठी और बाथरूम में चली गयी. मैं खड़ा होकर बेड से नीचे उतरा और ज़ाकिया को भी उठने को कहा. नाज़िया को कहा के इसको सहारा देना पड़ेगा तो वो बहुत हैरान हुई. मैने कहा के होता है पहली चुदाई के बाद ऐसा ही होता है अगर चुदाई ढंग की हो तो लड़की अपने आप खड़ी नही हो सकती. नाज़िया की आँखों में लाल डोरे तेर रहे थे तो मैने उसको तसल्ली दी और कहा के घबराओ नही अब अगला नंबर तुम्हारा है. तुमने देख ही लिया है कि चुदाई कैसे होती है और कितना दर्द होता है जब लंड चूत में पहली बार जाता है और फिर उसके बाद कितना मज़ा आता है. पूच्छ लो ज़ाकिया से. ज़ाकिया ने शर्मा कर आँखें बंद कर लीं. फिर हम दोनो उसको पकड़ कर बाथरूम में ले गये और उसको गरम पानी के टब में बिठा दिया जिसमे मैने एक शीशी से थोड़ा अस्ट्रिंजेंट लोशन मिला दिया था. वो टब में बैठ गयी और मैने उससे कहा के जब तक पानी ठंडा ना हो जाए वो इसमे बैठी रहे और अपनी चूत की सिकाई करे. फिर खड़ी होकर चेक करे कि ज़्यादा दर्द तो नही है. अगर ज़्यादा दर्द हो तो एक बार और गरम पानी की सिकाई करनी पड़ेगी. तुम सिकाई करो और मैं नाज़िया की खबर लेता हूँ कहकर नाज़िया को लेकर बाहर आ गया. हमारे पीछे पीछे मरियम भी आ गयी और हम तीनों बेड पर आ गये. नाज़िया हमारे बीच में थी.

मैने नाज़िया की गर्दन के नीचे से अपना बयाँ हाथ डाल कर उससे ऐसे अपने पास किया की उसकी पीठ मेरी छाती से लग गयी और मेरा हाथ उसके सख़्त बायें मम्मे पर आ गया. उसका दूसरा मम्मा अपने दायें हाथ में लेकर दबाना शुरू किया. वो ज़ाकिया की चुदाई देखकर बहुत गरम हो चुकी थी. मेरे द्वारा मम्मों को दबाए जाने पर वो सीत्कार कर उठी और अपना हाथ मेरे सर पर लाकर मेरे सर को अपने माम्मे पर झुका लिया. मैं समझ गया और बढ़कर उसके मम्मे को अपने मुँह में ले लिया. उसका अंगूर के जैसा निपल सर उठाए खड़ा था और मेरे मुँह में आते ही मैने उसे अपने दाँतों से हल्का सा दबाया और उसकी नोके पर अपनी जीभ को फिराया तो वो तड़प उठी. उसका भरा हुआ बदन मुझे स्पर्श सुख का बहुत ही मादक एहसास करा रहा था. मरियम को मैने कहा के मेरे लंड को अपने मुँह की गर्मी से गरम करो ताकि यह नाज़िया की चूत का उद्घाटन कर सके. मरियम ने तुरंत मेरे कहे का पालन किया और आकर मेरे लंड को अपने हाथ में लिया और दूसरे हाथ से मेरी गोलियों को सहलाने लगी और अपनी जीभ से मेरे लंड को चाटना शुरू कर दिया. मेरे लंड पर उसकी जीभ ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया और मेरे खून ने मेरे शरीर में अपनी रफ़्तार बढ़ा दी और वो डेकशिनेयन होकर मेरे लंड में भरने लगा. जैसे जैसे मरियम की जीभ मेरे सुपारे को चाट रही थी वैसे वैसे मेरे लंड में खून का संचार बढ़ रहा था और वो अकड़ना शुरू हो गया था.

मैने अपना एक हाथ बढ़कर मरियम के अपेक्षाकृत छ्होटे पर कड़क मम्मे को दबाया और उसको प्यार से पूछकर कर कहा कि सेवा का मेवा तुमको अभी दूँगा और आज तुम्हारी भी मस्त चुदाई करके तुमको बहुत मज़ा दूँगा. वो पूरे जोश से मेरे लंड को अपने मुँह में भरकर चूसने लगे. मेरा लंड अब पूरी तरह से अपने स्वरूप में आ गया था और झटके खाने लगा था. मैने मरियम को रोका और कहा के अब नाज़िया की चूत को मेरे लंड के लिए तैयार करे. मरियम ने मेरा लंड अपने मुँह से एक पोप की आवाज़ के साथ निकाला और नाज़िया की चूत पर अपना मुँह टीका दिया. नाज़िया ने एक झुरजुरी ली और अपनी दोनो टाँगें खोलकर अपनी चूत उठाकर मरियम के मुँह पर चिपका दी. उधर मैं अपने दोनो हाथों में उसके दोनो मम्मों को मस्सलने लगा और साथ ही उसको डीप किस करना शुरू कर दिया. नाज़िया तेज़ी से गरम होती जा रही थी. वासना की आग ने उसके जिस्म को पूरी तरह से अपने आगोश में ले लिया था और वो च्चटपटाने लगी थी. उसने अपना मुँह मेरे मुँह से अलग करके कहा अब और कितना तडपाओगे. अब रहा नही जा रहा जल्दी से मुझे चोदो और अपने लंड से मेरी चूत की चटनी बना दो.

क्रमशः......

KUNWARIYON KA SHIKAAR--31

gataank se aage..............

Agle din kisi tyohaar ki chutti thi. Main subah utha aur fresh hokar chaye peene aur akhbaar dekhne laga. Mujhe intjaar tha Nazia ka. Aaj usko chodkar ladki se aurat banana tha. Ye soch kar hi mera lund jockey me karvatein leney laga. Khair intjaar khatam hua aur wo time bhi aa hi gaya jiska main besabri se intjaar kar raha tha. Zakia Nazia ko sahara dekar la rahi thi. Maine poochha ke Tanvi nahi aayee to Zakia ne kaha ke nahi wo nahi aayee par aaj tumhaari puraani pehchaan wali ko laayee hoon. Kah kar usne awaz di ke aa jao kab tak bahar khadi rahogi? Maine darwaaze ki taraf dekha to main chaunk gaya. Darwaaze me Mariyam khadi thi. Uske chehre ka rang uda hua tha. Wo darte-darte andar aayee. Mujhe uski soorat dekhkar khud dar lagne laga ke ye kya ho gaya hai aur ab aage kya hone wala hai? Zakia ne aage badhkar Nazia ko bed par lita diya aur wapis mere paas aakar mujhe girebaan se pakad kar boli tum samajhte kya ho apne aap ko? Maine kaha ke main kuchh samajha nahi tum kya kahna chah rahi ho Zakia?

Uska chehra laal bhabhooka ho raha tha aur wo ek-ek lafz chaba kar boli dimaag kharaab ho gaya hai mera. Pagal ho gayi hoon main. Tumne ye kaisi ulti ganga baha rakhi hai? Pahle meri sabse chhoti bahan ko choda aur aaj meri doosri chhoti bahan ko chodne ka programme banaya hua hai. Main kya karoon. Agle mahine meri shaadi hai aur main apne hone wale shauhar ko milne gayee thi kal. Wahan usne mujhe akele me chodne ki koshish ki par meri seal todne me kamyaab nahi ho saka. Tadapti hui ghar pahunchi to ye maharaaniyan dono apni-apni aap biti ek doosre ko suna rahi theen aur main chup khadi sunti rahi. Meri jalti aag me ye ghee dalti raheen aur main jalti rahi. Ye sab sunkar Nazia aur Mariyam dono ke chehre par chhaye pareshani ke badal chhat gaye aur dono ek doosre ko dekh kar halke se muskurane lageen. Zakia bole ja rahi thi ki allah-allah karke ab time aaya hai aur tum pooch rahey ho ke main kya kahna chah rahi hoon? Main badi hoon aur pahle meri aag ko bujhaao phir kuchh aur karna. Main muskuraate hue aage badha aur usko apni bahon me bharkar kaha ke mana kisne kiya hai Zakia rani aur usko apne saath chipka kar uske gulab ki pattiyon jaise dono honth apne honthon main qaid kar liye aur choosne laga. Apni jeebh unpar pheri to wo kaamp uthi aur mujhe apni bahon me kass liya. Maine Mariyam ko kaha ke darwaza lock karde.

Wo khushi khushi gayee aur jaise hi usne darwaza lock kiya maine kaha ke tum teeno apne apne kapde utaar kar bilkul nangi ho jao aur main apne kapde bhi utaarne lag gaya. Teeno ne saare kapde utaar diye aur mera bedroom jaise roshni se bhar gaya. Teen kadak jawaan gori chitti ladkiyaan nangi mere aage khadi theen aur mera lund kisi saanp ki tarah apna phun uthakar unko salaami de raha tha. Zakia mere lund ko badi dilchaspi se dekh rahi thi aur boli ke wah tumhara auzar to bahut badhiya lagta hai. Abhi dekhte hain iski dhar. Maine kaha ke ghabrao mat tum teeno ko do-do baar to thanda kar hi sakta hai kam-se-kam. Wo boli ke kahne aur karne me bahut fark hota hai Raj karo to jaanein. Maine aage badh kar usko pakda aur bed par le aaya. Usko seedha lita diya aur Mariyam aur Nazia ko bola ke iske mamme chooso aur choos-choos kar laal kar do aur iske poor badan ko bhi pyar se sehlao. Isko itna uttejit karo ke ye chatpatane lagey par tum darna nahi aur rukna bhi nahi. Maza isko tabhi aayega jab ye poori tarah se uttejit ho jaayegi.

Dono ne Zakia ko jakad liya aur mere kahe ka anusaran karne lageen. Maine Nazia se kaha ke iske neeche do takiye laga do jaise tumhaare neeche lagaye the. Usne jaldi se takiye lagaye aur apne kaam me lag gayee. Maine uski taangein utha kar apne kandhon par latka deen aur uski choot ki darar me apni jeebh chalane laga. Tihre aakraman se wo bahut jaldi uttejit ho gayee aur chatpataane lagi aur haaaaaaaan huuuuuuuuuuuuuun oooooooooooooooooh ki awazein nikaalne lagee. Maine apne dono haatho se uski choot ko khola aur main dekhta hi reh gaya uski choot ka nazaara. Halke gulabi rang ki pankhudiyan aur andar gehre lal rang ki uski choot jo uski badhti uttejana ke kaaran geeli ho chuki thi aur phadphada rahi thi. Maine apni ek ungli uthakar uski puttiyon ko sehlaya aur uske daane ke aaspaas phirana shuru kar diya. Wo kaampne lage aur boli ke haye riiiiiiiiiiiii Nazi tu sach bata rahi thi ke bada maza aata hai. Main to hawa me ud rahi hoon aur dar lag raha hai kahin gir na jaaun. Meri aag aur badh gayi hai jaldi kuchh karo Raj. Maine uske daane ko ungli se sehlaya to wo aur kaampne lagi. Phir maine uske daane ko sehlaate sehlaate uski choot apne munh se poori dhak di aur apni jeebh ko anda daal kar dabane laga. Wo karah uthi aur usne koshish ki ke apni choot ko mere munh par dabaa de par jis position me wo thi wo zyada hil nahi sakti thi.

Maine apni jeebh se use chodna shuru kar diya. Bahut jaldi wo uttejana ki oonchaiyaan chhone lagi. Haaaaaaaaaaan aiseeeeeeeeeee hiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii karooooooooooooooo, maaaaaaaaaaaaain gayeeeeeeee, maaaaaaaaar doooooooooo, meriiiiiiiiiiii choooooooooot, yeeeeeeeeee kyaaaaaaaaaaaa hoooooooooooo gayaaaaaaaaa mujheeeeeeeeeeeee, aaaaaaaaan aaaaaaaaan aaaaaaaaan. Aur uski choot ka baandh toot gaya aur wo jhad gayee. Maine apne munh ko nahi hataya aur uski choot ko chatna chalu rakha. Thodi hi der me wo phir se uttejit hone lagi to maine uski taangein neeche karke takiye hataa diya. Gel ki tube uthakar uski choot main andar tak gel laga di aur thodi si apne lund par bhi lagakar use chikna kar diya. Phir apne lund ko uski choot par ragadna shuru kiya, neeche se ooper aur ooper se neeche. Uski choot pao roti ki tarah phool gayi thi aur jhatke lekar khul-band ho rahi thi. Choot ke chhlle par apne lund ka supara rakh kar maine dabaav daal to adha topa andar chala gaya. Maine bahar nikaalkar phir andar daala to thora aur andar chala gaya. Phir main use aise hi aage peechhe karne laga. Aage karte uska chhalla andar dabta aur main halka sa jhatka deta to mera lund ek-do soot aur andar chala jata aur bahar karta to uska chhalla bahar ko aata par main lund ko bahar nahi aane deta. 4-5 baar aisa karne par mere lund ka supara aur ek inch lund uski choot me ghus gaya aur maine wahi ek inch lund andar bahar karna shuru kar diya.

Ek-do dhakkon ke baad main halka sa zor badha deta aur thora thora karke mera lund uski kumara jhilli tak pahunch gaya aur wo boli ke bas dard hota hai. Maine kaha ke pehli chudayee hai ek baar to dard hoga hi. Uske baad tumhe maza hi maza aayega aur dard kabhi nahi hoga. Main apni position set karke utna hi lund andar bahar karne laga aur jab wo poori tarah se masti me aa gayi to maine apna lund supaare tak bahar nikaal kar ek poori takat lagakar dhakka maara aur mera lund gacch karke Zakia ki seal todkar andar ghus gaya. Zakia ki ek zordar cheekh nikli jise Mariyam ne apna munh uske munh par rakh ke band kar diya. Maine apna haath neeche laakar uske daane par apna angootha rakh diya aur ragadne lage. Udhar wo dono apni aapi ko pyar se sehla rahi theen aur thodi der me hi Zakia ki uttejana phir se badhni shuru ho gayee aur dard bhi kam ho gaya. Bahut tight choot thi uski aur mujhe aisa lag raha tha jaise mera lund kisi shikanje me kassa hua ho. Maine zor laga kar apne lund ko bahar kiya aur thodi gel aur lagakar wapis andar daal diya aur ahista ahista andar bahar karne laga. Uski dono puttiyaan mere lund se chipki hui theen aur jab main lund ko andar karta to dono andar ko dab jaateen aur saath hi choot ka chaal bhi andar ho jaata aur jab main lund ko bahar nikaalta to challe ke saath saath dono puttiyaan bhi bahar aa jaateen. Gharshan ka anand bahut hi adhik aa raha tha.

Abhi mera lund aadha andar jaana baaki tha. Har 4-5 dhakkon ke baad main thori gel apne lund par aur laga deta aur saath hi adha inch lund ko aur andar ghusa deta. Is tarah karte karte mera lund jad tak andar ghus gaya aur uski bacchedani se jaa takraya. Takraate hi Zakia ne ek zor ki jhurjhuri li aur boli ye kya hua to maine kaha ke lund poora andar ghus gaya hai aur uski bacchedani se ja takraya hai isliye use gudguda gaya hai. Wo boli ke bahut achha lag raha hai karte raho. Apni bacchedani ke munh par mere lund ki 8-10 thokarein hi wo she paayee aur uska poora shareer akad gaya aur wo ek bahut hi lambi aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaah ke saath jhad gayi. Jhatke khate uske shareer ke saath uski choot bhi khulne aur band hone lagi. Jab tak wo jhadti rahi main apna lund uski choot me jad tak daal kar nishchal pada raha aur haath badha kar uske mamme apne haatho me pakad liye. Bahut hi pyara pahala sparsh tha uske mammon ka. Jaise do kacchey amrood mere haatho me aa gaye the par itne chikne the uske mamme ke mere haatho se phisale ja rahey the. Uske angoori nipple maine apne angoothon aur ungliyon me dabaaye to uski ek maadak aaaaaaaaaaaah nikli.

Jhadne ke baad usne apna shareer dheela chod diya tha aur ab ek baar phir se uski uttejana badhne lagi thi. Maine apna lund do inch bahar nikalkar wapis andar pelna shuru kar diya aur thori der tak use aise hi chod ta raha. Kuchh samay me hi usne bhi apni gaand uthakar mere lund ka swagat karna shuru kar diya aur main apna lund poora bahar nikalkar pelta raha. Jab main apna lund bahar nikaalta to sirf topa andar rah jaata aur main wapis andar ghusa deta. Lund jab andar ghusna shuru hota to wo apni gaand uthana shuru kar deti aur phir hamare shareer aapas me takraate. Chudayee ka mast sangeet kamre me goonj raha tha. Fach-fach fach-fach aur meri goliyon ki thaili uski gaand se takrati to pat-pat ki awaz hoti. Main jaanta tha ki ab main aur zyada der tak nahi ruk sakta, isliye maine apne dhakkon ki raftaar kam hi rakkhi thi taki meri uttejana zyada na badhey. Par Zakia ki uttejana badhti jaa rahi thi aur ab use chudayee ka bharpoor maza aa raha tha. Dard ka nam-o-nishaan khatam ho chuka tha. Hum teenon ke milejule prayaas uski uttejana ko badhate jaa rahe the aur wo uchak uchak kar chudwa rahi thi.

Phir wahi hua jo hona tha. Zakia ne bolna shuru kar diya. Maar do meri choot ko, phaad do meri choot ko. Haye Raj tumhara lund to bada pyara hai re, aise ragad kar andar bahar ho raha hai ke bahut maza aa raha hai. Phir uski saansein atakne lageen aur wo maaaaaaaaaaaaain gayeeeeeeeeeeeeeee reeeeeeeeeeeeeeeee, pakad loooooooooooooo mujheeeeeeeeeeee, maaaaaaaaaaaa yeeeeeeeeeeeh kaisaaaaaaaaaa mazaaaaaaaaaaaaa haaaaaaaaaaaaaaaai, Rajiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii mereeeeeeeeeeeey rajaaaaaaaaaaaa maaaaaaaaaain gayeeeeeeeee. Aur wo jhad gayee. Main to pahle hi taiyaar tha so maine bhi uske bolte hi apni raftaar khoob tez kardi thi. 10-12 zordar dhakko ke saath hi main bhi apne charam par pahuncha aur apna lund uski choot me jad tak daal ke apne garam garam veerya ki pichkaariyaan uski choot me chodne laga. Mera lund uski bachchedaani se sataa hua tha aur veerya ki garam garam dhaar uski bachchedaani ke munh par padi to vo kaamp kar ek bar aur jhad gayee aur apne shareer ko dheela chod diya. Main bhi uske ooper gir gaya aur mujhe Nazia aur Mariyam ne Zakia ke saath jakad liya.

Jab hum dono sanyat hue to maine Mariyam se kaha ke Zakia ke liye hot water treatment ka intezaam karey to wo turant uthi aur bathroom me chali gayee. Main khada hokar bed se neeche utara aur Zakia ko bhi uthne ko kaha. Nazia ko kaha ke isko sahara dena padega to wo bahut hairaan hui. Maine kaha ke hota hai pehli chudayee ke baad aisa hi hota hai agar chudayee dhang ki ho to ladki apne aap khadi nahi ho sakti. Nazia ki aankhon me lal dory tair rahey the to maine usko tasalli di aur kaha ke ghabrao nahi ab agla number tumhaara hai. Tumne dekh hi liya hai ki chudayee kaise hoti hai aur kitna darda hota hai jab lund choot me pehli baar jaata hai aur phir uske baad kitna maza aata hai. Poochh lo Zakia se. Zakia ne sharma kar aankhe band kar leen. Phir hum dono usko pakad kar bathroom me le gaye aur usko garam paani ke tub me bitha diya jisme maine ek shishi se thora astringent lotion mila diya tha. Wo tub me baith gayee aur maine use kaha ke jab tak paani thanda na ho jaaye wo isme baithi rahey aur apni choot ki sikayee karey. Phir khadi hokar check karey ki zyada dard to nahi hai. Agar zyada dard ho to ek baar aur garam paani ki sikayee karni padegi. Tum sikayee karo aur main Nazia ki khabar leta hoon kah kar Nazia ko lekar bahar aa gaya. Hamaare peechhe peechhe Mariyam bhi aa gayee aur hum teenon bed par aa gaye. Nazia humaare beech me thi.

Maine Nazia ki gardan ke neeche se apna bayan haath daal kar use aisey apne paas kiya ki uski peeth meri chhati se lag gayee aur mera haath uske sakht baayein mamme par aa gaya. Uska doosra mamma apne dayein haath me lekar dabana shuru kiya. Wo Zakia ki chudayee dekhkar bahut garam ho chuki thi. Mere dwara mammon ko dabaye jaane par wo sitkar kar uthi aur apna haath mere sar par lakar mere sar ko apne maamey par jhuka liya. Main samajh gaya aur badhkar uske mamme ko apne munh me le liya. Uska angoor ke jaisa nipple sar uthaye khada tha aur mere munh me aatey hi maine use apne danton se halka sa dabaya aur uski noke par apni jeebh ko phiraya to wo tadap uthi. Uska bhara hua badan mujhe sparsh sukh ka bahut hi maadak ehsaas karaa raha tha. Mariyam ko maine kaha ke mere lund ko apne munh ki garmi se garam karo taki ye Nazia ki choot ka udghatan kar sake. Mariyam ne turant mere kahe ka paalan kiya aur aakar mere lund ko apne haath me liya aur doosre haath se meri goliyon ko sehlaane lagi aur apni jeebh se mere lund ko chatna shuru kar diya. Mere lund par uski jeebh ne apna asar dikhana shuru kar diya aur mere khoon ne mere shareer me apni raftaar badha di aur wo dakshinayan hokar mere lund me bharane laga. Jaise jaise Mariyam ki jeebh mere supaare ko chaat rahi thi vaise vaise mere lund me khoon ka sanchar badh raha tha aur wo akadna shuru ho gaya tha.

Maine apna ek haath badhakar Mariyam ke apekshakrit chhote par kadak mamme ko dabaya aur usko pyar se puchkar kar kaha ki sewa ka mewa tumko abhi doonga aur aaj tumhari bhi mast chudayee karke tumko bahut maza doonga. Wo poor josh se mere lund ko apne munh me bharkar choosne lage. Mera lund ab poori tarah se apne swaroop me aa gaya tha aur jhatke khane laga tha. Maine Mariyam ko roka aur kaha ke ab Nazia ki choot ko mere lund ke liye taiyaar karey. Mariyam ne mera lund apne munh se ek pop ki awaz ke saath nikaala aur Nazia ki choot par apna munh tika diya. Nazia ne ek jhurjhuri li aur apni dono taangein kholkar apni choot uthakar Mariyam ke munh par chipka di. Udhar main apne dono hathon me uske dono mammon ko massalne laga aur saath hi uske deep kis karna shuru kar diya. Nazia tezi se garam hoti ja rahi thi. Vaasna ki aag ne uske jism ko poori tarah se apne aagosh me le liya tha aur wo chhatpataane lagi thi. Usne apna munh mere munh se alag karke kaha ab aur kitna tadpaoge. Ab raha nahi ja rah jaldi se mujhe chodo aur apne lund se meri choot ki chatni bana do.

kramashah......


rajaarkey
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Re: कुँवारियों का शिकार

Unread post by rajaarkey » 06 Dec 2014 15:06

कुँवारियों का शिकार--32

गतान्क से आगे..............

मैने उसकी हालत पर तरस खाते हुए उसकी दोनो टाँगों के बीच आ गया और उसकी टाँगें खोल कर उसकी चूत को देखने लगा. चूत मरियम के चूसने से काफ़ी गीली हो चुकी थी और फूल कर कुप्पा हो गयी थी. मैने जेल की ट्यूब उठा कर जेल उसकी चूत और अपने लंड पर लगा दी और अपने लंड को उसकी चूत की लकीर पर रगड़ने लगा. लंड को मैने अपने हाथ में पकड़ा हुआ था और लंड के टोपे को उसकी चूत की दरार में दबा के रगड़ रहा था. नीचे से ऊपेर और ऊपेर से नीचे. जब मेरे लंड की दबाव वाली रगड़ उसस्के भज्नसे पर पड़ती तो वो अपनी चूत को ऊपेर उठा देती. फिर मैने अपने लंड का टोपा उसकी चूत के मुहाने पर रखा और दबाव डाला तो सुपरा उसकी चूत के छल्ले को फैला कर अंदर घुसा तो नाज़िया एक बार काँप गयी. मैने थोड़ा दबाव और डाला तो लंड एक इंच और अंदर चला गया. नाज़िया का जिस्म भरा हुआ होने केकारण उसकी चूत बहुत टाइट थी और मेरे लंड को उसने ज़ोर से पकड़ रखा था. मैने ऐसे ही 5-6 घस्से मारे अपने लंड को एक इंच अंदर बाहर करके तो नाज़िया को मज़ा आना शुरू हो गया और वो मस्ती में चिल्लाई हां हां ऐसे ही करो बहुत मज़ा आ रहा है. मैने कहा के नाज़िया अभी जब मैं अपना लंड तुम्हारी चूत में और अंदर डालूँगा तो तुम्हारी सील टूट जाएगी और सील टूटने पर दर्द भी होगा.

मरियम को मैने कहा के नाज़िया के मुँह पर बैठ जाए और अपनी चूत उसके मुँह पर लगा दे. नाज़िया को बोला के मरियम की चूत को अपनी जीभ से चाट कर और चोद्कर मरियम को गरम करदो ताकि तुम्हारे बाद मैं इसको भी चोद सकूँ. फिर मैने उसको कहा के मेरी पूरी कोशिश होगी के तुम्हें दर्द कम से कम हो जब मैं तुम्हारी चूत मैं अपना लंड पेलूँगा पर दर्द तो होगा ही और वो तुमको सहना पड़ेगा. क्या तुम उसके लिए तैयार हो? वो बोली के हां मैं तो 3 दिन से तैयार हूँ पर तुम हो की मेरा कोई ख़याल ही नही कर रहे हो. आज कुच्छ भी हो जाए मेरी चूत को अच्छी तरह से चोद कर मुझे लड़की से औरत बना दो राज्ज्जज्ज्ज्ज्ज्ज्ज मैं और नही रुक सकतिईईईईईईईईईईईई. उसके इस तरह के इसरार पर मैं अपने आप को रोक नही पाया और अपने लंड को बाहर खीच कर अपनी पूरी ताक़त से अंदर घुसाने के लिए एक भरपूर ज़ोरदार धक्का मारा और मेरा लंड उसकी सील को तोड़कर आधे से ज़्यादा उसकी चूत में घुस गया. नाज़िया के मुँह से निकली चीख मरियम की चूत में दबकर रह गयी.

नाज़िया की आँखों से आँसू बहने लगे और बेड पर गिरने लगे. मैं रुक गया और अपने हाथों से उसके जिस्म को सहलाने लगा. उसके दोनो मम्मो को भी सहालाया और दबा कर उनके निपल्स को भी अपनी उंगली और अंगूठे के बीच में लेकर मस्सला. फिर जब उसका दर्द कुच्छ कम हुआ और उसकी साँसें नॉर्मल चलने लगीं तो मैने अपने लंड को उसकी चूत में हल्के हल्के घिसना शुरू किया. मतलब यह कि मेरा लंड आगे पीछे तो हो रहा था पर अंदर बाहर नही हो रहा था. उसकी चूत के छल्ले ने मेरे लंड को जहाँ से पकड़ रखा था वहीं था बस हल्का सा आगे पीछे होने से छल्ला और उसकी गुलाबी पुट्तियाँ अंदर बाहर हो रही थीं और उतना ही मेरा लंड आगे पीछे हो रहा था. इस हल्के घिस्सों से नाज़िया को मज़ा मिलना शुरू हुआ और वो भी अपनी गांद को हिलाने लग गयी और मैने भी अपने लंड को थोड़ा और अंदर बाहर करने लगा. मैने थोड़ा और अंदर करने की कोशिश में दबाव बढ़ाया तो नाज़िया ज़ोर से उूुुुुुुुुुउउन्ह कर उठी. मैं रुक गया और दबाव कम कर दिया. ऐसे ही अंदर बाहर करने पर नाज़िया की चूत में नॅचुरल ल्यूब्रिकेशन से मेरा लंड आराम से अंदर बाहर होने लगा.

फिर मैने मौका देखकर अपना लंड सुपारे तक बाहर खींचा और पूरी ताक़त से अंदर घुसेड दिया. लंड सीधा उसकी बच्चेदानी के मुँह से जा टकराया और नाज़िया एक बार फिर चीख नही सकी क्योंकि मुँह तो मरियम की चूत ने दबा रखा था. नाज़िया ने दोनो हाथों से ज़ोर लगा कर मरियम को हटा दिया और रोते हुए बोली के मार डालोगे क्या मुझे. चूत मारने की थी जान से मारने की थोडा ना कही थी. मेरी हँसी निकल गयी नाज़िया की बात सुनकर और मैने उसको बड़े प्यार से कहा कि जानू चूत ही मार रहा हूँ और घबराओ मत तुम्हें मरने भी नही दूँगा. अब लंड तुम्हारी चूत में पूरा घुस चुका है और जितना दर्द होना था हो गया. अब तुम्हें कभी भी लंड लेने में दर्द नही होगा. आराम से चुदवा सकती हो बिना किसी डर या दर्द के. थोड़ी देर में तुम्हारा दर्द ख़तम हो जाएगा और उसकी जगह तुमको मज़ा आना शुरू होगा और वो ऐसा मज़ा होगा जो तुम्हें पिछले दो दिनों में भी नही आया होगा. मैने उसके मम्मे अपने हाथों में लेकर सहलाने शुरू कर दिए और धीरे धीरे उसका दर्द कम होने लगा और दर्द की जगह उसके चेहरे पर एक हल्की सी कामुक मुस्कुराहट आ गयी.

जब मैने देखा कि उसका दर्द कम हो गया है और उसका जिस्म अब पहले से ढीला पड़ चुक्का है तो मैने अपने लंड को थोड़ा सा 2 इंच के करीब बाहर निकालकर अंदर डाला और ऐसे ही पेलने लगा. थोरी देर में ही नाज़िया भी नीचे से अपनी गांद हिलाने लगी. आहिस्ता आहिस्ता मैने अपनी रफ़्तार के साथ साथ ज़ोर भी बढ़ाना शुरू कर दिया. अपने लंड को अंदर बाहर करने की लंबाई भी बढ़ानी चालू कर दी. 15-20 धक्कों के बाद ही मेरा लंड सुपारे तक तेज़ी से बाहर आता और उतनी ही तेज़ी से और ज़ोर से अंदर घुस जाता. जब लंड अंदर घुसता तो नाज़िया भी अपनी गांद उठाकर उसका स्वागत करती. 10-15 मिनट की जोशीली चुदाई में नाज़िया चार बार झाड़ गयी. जब वो झड़ने लगती मैं अपनी रफ़्तार बहुत ही धीमी कर देता और जैसे ही उसका झड़ना बंद होता मेरी रफ़्तार वापिस तेज़ हो जाती. चौथी बार झड़ने के बाद उसने मुझे रोक दिया कि बस अब और नही. मैने भी पहली चुदाई होने के कारण रोक लिया और अपने लंड को बाहर निकाल लिया. मेरा लंड बाहर निकल कर उच्छलने लगा जैसे नाराज़ हो तो मैने कहा के रुक जाओ दोस्त अभी तुम्हें मरियम की प्यारी चूत को खोदने का मौका मिलेगा नाराज़ मत हो मेरे यार.

मैने मुड़कर देखा तो ज़ाकिया बाहर आ चुकी थी और मस्ती में हमे देख रही थी. मैने नाज़िया को सहारा देकर उठाया और बाथरूम में ले आया. तब तक मरियम टब में गरम पानी भर चुकी थी. आस्त्रगेन्त लोशन डाल कर मैने नाज़िया को उस में बिठा दिया और कहा के जब तक पानी ठंडा ना हो जाए अपनी चूत की सिकाई करती रहे. अब मरियम की बारी थी. मैने मरियम की ओर देखा तो वो बड़ी हसरत भरी निगाहों से मुझे देख रही थी और मुझसे नज़र मिलते ही उसने मुस्कुरा कर अपनी आँखें झुका लीं. मैने आगे बढ़कर उसको अपने साथ चिपका लिया और वो एक झुरजुरी लेकर मुझसे लिपट गयी. मैं उस फूल जैसे हल्के बदन को उठाकर बेडरूम में आ गया और बेड पर ले आया. उसने अपनी दोनो बाहें मेरे गले में डाल दी थीं और उसके छ्होटे छ्होटे मम्मे मेरी छाती पर मचल रहे थे और मरियम का चेहरा आवेश में तमतमा रहा था. ज़ाकिया ने आगे बढ़कर उसकी पीठ सहलाते हुए कहा के लाडो अब तू जी भर के चुदवा ले और मैं तेरी पूरी मदद करूँगी. जो तू कहेगी मैं वैसे ही करूँगी. मरियम को मैने बेड पर लिटा दिया और उसके साथ ही मैं भी लेट गया. ज़ाकिया उसके दूसरी तरफ आ गयी और उसके मम्मे को मुँह में भर कर चूसने लगी. मरियम सीत्कार कर उठी और च्चटपटाने लगी. उसने काटर दृष्टि से मुझे देखा और मैने देर करना उचित नही समझा और सीधा उसकी टाँगों के बीच में आ गया.

मैने अपना आकड़ा हुआ लंड अपने हाथ में लेकर उसकी चूत की दरार में फिराना शुरू कर दिया. वो सिसकारियाँ लेने लगी. मैने हल्के से अपने लंड को उसकी चूत के मुहाने पर रख कर दबाया तो गकच करके सुपरा अंदर घुस गया और वो चिहुनक गयी. मैने हल्का सा दबाव डाला तो मेरा लंड उसकी चूत में अंदर घुस्सने लगा. उसकी आँखें मूंद गयीं और वो गहरी साँसें लेने लगी. 3-4 इंच लंड अंदर चला गया तो मैने उसे टोपे तक बाहर खींचा और एक हल्का सा धक्का मारा. लंड 6-7 इंच अंदर घुस गया और मरियम के मुँह से हुउऊँ की आवाज़ निकली. मैने पूछा के दर्द हो रहा है क्या? तो वो बोली के नही दर्द तो नही हो रहा पर भारी भारी लग रहा है. उसकी चूत की ग्रिप मेरे लंड पर बहुत टाइट थी तो मैने कहा के भरा हुआ तो लगेगा ही तुम्हारी चूत मेरा लंड खा रही है तो कुच्छ तो लगेगा ही ना. तो वो मुस्कुरा दी और बोली के अब जल्दी जल्दी चोद डालो मुझसे रुका नही जा रहा. मैने कहा के एक बार लंड पूरा तुम्हारी चूत में अड्जस्ट हो जाए फिर तुम्हे जन्नत के मज़े करवा दूँगा मेरी रानी.

मैने अपने लंड को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया और आहिस्ता आहिस्ता हर धक्के पर थोड़ा और अंदर करते करते थोड़ी देर में ही पूरा लंड उसकी चूत में पेल दिया. जैसे ही मेरा लंड पूरा मरियम की चूत में घुसा मैने अपने हाथ उसकी मुलायम गांद के नीचे लगाकर उसकी गांद को कस के पकड़ लिया और धक्के लगाने लगा. मरियम आनंद विभोर होकर बोली के हाँ ऐसे ही मारो मेरी चूत में आग लग रही है इसकी आग बुझा दो. मैने कहा के अभी तुम्हारी चूत की आग को ठंडा करता हूँ मेरी रानी और मैने उसके चूतड़ उठाकर अपने लंड से लंबे लंबे शॉट लगाने शुरू कर दिए. धीरे धीरे मेरी रफ़्तार भी तेज़ होती गयी और फिर इतनी तेज़ हो गयी के पता ही नही लग रहा था कब लंड अंदर और कब लंड बाहर हो रहा है. ज़ाकिया उसके मम्मों को दबाती चूस्टी आँखें फाड़ कर चुदाई का नज़ारा ले रही थी जैसे डर रही हो कि इतने भयंकर धक्के और वो भी इतनी तेज़ी से उसकी छ्होटी बेहन कैसे सह पाएगी, कहीं उसकी चूत ही ना फॅट के दो टुकड़े हो जाए.

कुच्छ देर बाद मरियम हाआआआआआआआं हाआआआआआआआं करती हुई झड़ने लगी. उसका शरीर झटके खाने लगा और उसकी चूत की पकड़ मेरे लंड पर बढ़कर कम होने लगी. मेरा लंड उसकी चिकनी हो चुकी चूत में और आसानी से अंदर बाहर होने लगा और मुझे लगा के मैं ज़्यादा देर तक नही रुक सकूँगा तो मैने उसके झड़ने के दौरान अपनी रफ़्तार कम करदी. मरियम संयत हुई तो उसने अपनी आँखें खोल कर मेरी और देखा और मुस्कुरा दी. क्या मस्त और क़ातिल मुस्कुराहट थी. फिर वो बोली कि अभी और भी चोदोगे? मैने भी वैसे ही मुस्कुराहट के साथ जवाब दिया कि अगर तुम नही चाहती तो रहने दो. वो एकदम बोली की नही नही मैं तो सिर्फ़ पूछ रही थी की कहीं तुम थक तो नही गये. मैने कहा के जब तुम तीनो बहनों जैसी खूबसूरत और कड़क जवान लड़कियाँ इतने प्यार और इसरार से चुदवा रही हों तो कोई चूतिया ही थकेगा. तो वो हंस पड़ी और बोली की चोदो आज मुझे जी भर के चोदो. कल से आग लग रही थी मेरी चूत में और दो बार उंगली करके भी खुजली ख़तम नही हुई थी. आज फाड़ दो इसको. मैने कहा के फाड़ दूँगा तो चोदुन्गा किसको? हां खुजली मिटा दूँगा ये मेरा वादा है.

उधर ज़ाकिया उसके मम्मों को लगातार दबाए और चूसे जा रही थी जिस कारण वो फिर मस्ताने लगी और उसकी आँखें फिर से कामुकता से लाल होकर चढ़ने लगीं. मैने ज़ाकिया से कहा के तुम ज़रा नाज़िया की खबर लो वो ठीक तो है और मैं तब तक इसकी चूत की गर्मी निकालता हूँ. ज़ाकिया उठकर बाथरूम में चली गयी और मैने मरियम की गांद को वापिस बेड पर टीका दिया और उसकी टाँगें उठाकर अपनी बाहों पर लटका दीं और अपने हाथ उसकी बगलों से लेजाकर नीचे से उसके कंधों पर ले आया और मज़बूती से उसके कंधे पकड़ लिए. इस तरह उसकापूरा जिस्म दोहरा हो गया और उसकी गांद अपने आप ही हवा में उठ गयी जिसे वो चाह कर भी नीचे नही कर सकती थी और हिला भी नही सकती थी. उसकी चूत अब पूरी खुल कर मेरे सामने थी और मेरे लंड के प्रचंड धक्के झेल रही थी. अब मैने अपने धक्कों की रफ़्तार थोड़ी बढ़ा दी तो मरियम जो पूरी तरह से अब मेरे रहम-ओ-करम पर थी हाआआआआआं आईसीईईईईई हीईीईईईईईईईईईईईईईईई करूऊऊऊऊऊओ ज़ूऊऊऊऊओर ज़ूऊऊऊऊओर सीईईईईईई चूऊऊऊऊदूऊऊऊऊऊऊ. आआआआआआआ आआआआआआअँ माआआआआआईं फिररर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर झड़नीईईईई वालिइीईईईईईईईईईईईईई हूऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊं. उसका जिस्म एक बार फिर अकड़ गया और वो झड़ने लगी और उसकी चूत ने मेरे लंड पर फिर से अपना दबाव बढ़ाना और कम करना शुरू कर दिया जिसके चलते मैं भी झड़ने को हो गया. मैने उसके झड़ने की परवाह ना करते हुए 8-10 धक्के पूरे ज़ोर से मारे और झाड़ गया. मैने अपने लंड पूरा जड़ तक उसकी टाइट चूत में डाल दिया और अपने वीर्य की पिचकारियाँ उसकी बच्चेदानि के मुँह पर मारने लगा.

उसकी दोनो टाँगें मैने आज़ाद करदी तो वो बेजान सी मेरे दोनो तरफ गिर पड़ीं. मैने अपने हाथ उसके छ्होटे छ्होटे सख़्त अमरूदों पर रख दिए और उनके निपल्स को अपनी उंगलियों और अंगूठों में दबा कर मसल्ने लगा. फिर हम दोनो के जिस्म ढीले पड़ गये और मैं उसकी बगल में लुढ़क गया और उसको अपने ऊपेर खींच लिया. मरियम को अपनी बाहों में कस्स के मैने उससे डीप किस करना शुरू कर दिया. उसके मम्मे मेरी छाती को गुगुडाते रहे और वो आँखें बंद करके झड़ने के बाद की तृप्ति का आनंद लेने लगी. ज़ाकिया और नाज़िया ने हमारे दोनो तरफ से हमको अपनी बाहों में ले लिया और हमारे साथ चिपक गयीं. 5 मिनट के बाद हम सब अलग हुए तो मैने ज़ाकिया और नाज़िया से पूछा के हां अब बताओ कैसी रही तुम्हारी पहली चुदाई. दोनो ने मुस्कुराते हुए कहा के हमें नही पता था कि इतना मज़ा आता है चुदवाने में.

मैने ज़ाकिया को अपने पास बुलाया और उसको अपने साथ चिपका कर उसके मम्मों से खेलते हुए उससे कहा के अगले शनिवार को वो फिर जाए अपने होने वाले शौहर के पास जब वो अकेला होता है और उसको बताए के उसके पास से आकर तुमने अपनी आग बुझाने के लिए एक मोमबत्ती से अपनी सील तोड़ ली थी. साथ ही उसको कहना के तुम डरो नही कि जल्दी झाड़ जाओगे तो मैं क्या सोचूँगी. जल्दी झाड़ जाओगे तो मैं फिर से तुम्हारे लंड को सहला कर चूम कर खड़ा कर लूँगी और फिर तुम अच्छे से चुदाई कर सकोगे और इतनी जल्दी झदोगे भी नही. मेरी सहेली ने मुझे बताया है कि डरने की कोई बात नही है धीरे धीरे सब ठीक हो जाएगा. ज़ाकिया बड़ी खुश हुई और बोली के क्या वाकई सब ठीक हो जाएगा. तो मैने उसको कहा के हां इस उमर में जिस्मानी कमज़ोरी नही होती यह ज़हनी डर है जिसकी वजह से वो जल्दी झाड़ गया. अगर तुम उसको इस तरह तसल्ली दोगि तो उसका डर भी कम हो जाएगा और वो ठीक भी हो जाएगा. ज़ाकिया बहुत खुश हुई और उसने मुझे अपनी बाहों में कस के एक ज़ोरदार बोसा दिया मेरे होंठों पर. ज़ाकिया बोली के ठीक है मैं ऐसा ही करूँगी पर शादी से पहले एक बार तुमसे और चुदवाना चाहूँगी अगर तुम चाहो तो. मैने कहा के मेरी जान जब भी तुम्हारा दिल करे चुदवा लेना मैं हसीन लड़कियों को कभी मना नही करता. इस पर हम सब हंस पड़े और फिर हमने अपने अपने कपड़े पहने और वो चली गयीं.

मैं पूरी तरह से थका हुआ था और इसलिए आराम करने लगा. अगले दिन से फिर पुराना रुटीन शुरू हो गया. मैं हर दूसरे-तीसरे दिन तनवी को कुच्छ काम देकर अपने पीसी पर बिठा देता के छुट्टी के बाद या जब भी टाइम मिले वो उसको कर दे. उस दिन मैं पासवर्ड प्रोटेक्षन हटा देता. काम छ्होटा ही होता जिसमे दो घंटे से कम समय ही लगना होता. वो थोड़ा बहुत तो स्कूल टाइम में ही कर देती जब मैं राउंड पर होता और बाकी आधे-पौने घंटे का ये कहकर बचा देती कि बाकी छुट्टी के बाद करेगी. काम के साथ-साथ वो मेरे पीसी को अच्छी तरह से चेक करती पर कुच्छ ना मिलने पर खीज जाती. पर उसको मिलता कैसे, मैं अपने पीसी का ध्यान जो रखता था कि उसमे कुच्छ भी ऐसा ना हो जिसकेकारण कोई मुझे फँसा सके.

उधर मेरा दोस्त तनवी की इन्वेस्टिगेशन में लगा हुआ था और धीरे धीरे रिपोर्ट्स भी आनी शुरू हो गयी थीं. शुरू में तो तनवी के द्वारा बताई गयी सारी बातें सच निकलीं और उनमें कोई भी झूट नही पाया गया. मैं निराश हो गया था और इस तहकीकात को ख़तम ही करवाने वाला था कि एक छ्होटी सी बात ने मेरा ध्यान आकर्षित किया और वो था कि उसकी एक बेहन जो तनवी से 3 साल बड़ी है चंडीगढ़ में ब्याही हुई है और उसकी शादी उसके पापा की डेत से पहले ही हो चुकी थी. इसके बारे में उसने कभी कोई ज़िकार नही किया था और ना ही बताया था कि उसकी कोई बड़ी बेहन भी है जो कि थोड़ा अटपटा लग रहा था. मैने अपने दोस्त को उसके बारे में और अधिक जानकारी लेने के लिए कहा. वहाँ से आई रिपोर्ट्स में भी खास कुच्छ पता नही चला लेकिन सबसे अंत में आई चंडीगढ़ की फाइनल रिपोर्ट ने मुझे चौंका दिया. उसमे तनवी की बेहन का जो अड्रेस दिया हुआ था वो मेरी ससुराल के पड़ोस का था.

क्रमशः......

KUNWARIYON KA SHIKAAR--32

gataank se aage..............

Main uski haalat par taras khaate hue uski dono taangon ke beech aa gaya aur uski taangein khol kar uski choot ko dekhne laga. Choot Mariyam ke choosne se kafi geeli ho chuki thi aur phool kar kuppa ho gayi thi. Maine gel ki tube utha kar gel uski choot aur apne lund par laga di aur apne lund ko uski choot ki lakeer par ragadne laga. Lund ko maine apne haath me pakda hua tha aur lund ke topey ko uski choot ki daraar me dabaa ke ragad raha tha. Neeche se ooper aur ooper se neeche. Jab mere lund ki dabaav waali ragad uske bhagnase par padti to wo apni choot ko ooper utha deti. Phir maine apne lund ka topa uski choot ke muhane par rakha aur dabaav daala to supara uski choot ke chhalle ko phaila kar andar ghusa to Nazia ek baar kaamp gayee. Maine thora dabaav aur daala to lund ek inch aur andar chala gaya. Nazia ka jism bhara hua hone ke kaaran uski choot bahut tight thi aur mere lund ko usne zor se pakad rakha tha. Maine aise hi 5-6 ghasse maare apne lund ko ek inch andar bahar karke to Nazia ko maza aana shuru ho gaya aur wo masti me chillayi haan haan aise hi karo bahut maza aa raha hai. Maine kaha ke Nazia abhi jab main apna lund tumhari choot me aur andar daaloonga to tumhari seal toot jayegi aur seal tootne par dard bhi hoga.

Mariyam ko maine kaha ke Nazia ke munh par baith jaye aur apni choot uske munh par laga de. Nazia ko bola ke Mariyam ki choot ko apni jeebh se chaat kar aur chodkar Mariyam ko garam kardo taki tumhare baan main isko bhi chod sakoon. Phir maine usko kaha ke meri poori koshish hogi ke tumhe dard kam se kam ho jab main tumhaari choot main apna lund peloonga par dard to hoga hi aur wo tumko sehna padega. Kya tum uske liye taiyaar ho? Wo boli ke haan main to 3 din se taiyar hoon par tum ho ki mera koyi khayal hi nahi kar rahey ho. Aaj kuchh bhi ho jaye meri choot ko achchi tarah se chod kar mujhe ladki se aurat bana do Rajiiiiiiiiiiiiiii main aur nahi ruk saktiiiiiiiiiiiiii. Uske is tarah ke israar par main apne aap ko rok nahi paya aur apne lund ko bahar kheenkar apni poori takat se andar ghusaane ke liye ek bharpoor zordar dhakka mara aur mera lund uski seal ko todkar aadhe se zyada uski choot me ghus gaya. Nazia ke munh se nikli cheekh Mariyam ki choot me dabkar reh gayi.

Nazia ki aankhon se aansoo behne lagey aur bed par girne lagey. Main ruk gaya aur apne haatho se uske jism ko sehlaane laga. Uske dono mammon ko bhi sehalaya aur dabaa kar unke nipples ko bhi apni ungli aur angoothe ke beech me lekar massala. Phir jab uska dard kuchh kam hua aur uski saansein normal chalne lageen to maine apne lund ko uski choot me halke halke ghisna shuru kiya. Matlab ye ki mera lund aage peeche to ho raha tha par andar bahar nahi ho raha tha. Uski choot ke challe ne mere lund ko jahan se pakad rakha tha wahin tha bas halka sa aage peechhe hone se challa aur uski gulabi puttiyan andar bahar ho rahi theen aur utna hi mera lund aage peechhe ho raha tha. Is halke ghison se Nazia ko maza milna shuru hua aur wo bhi apni gaand ko hilaane lag gayee aur maine bhi apne lund ko thora aur andar bahar karne laga. Maine thora aur andar karne ki koshish me dabaav badhaya to Nazia zor se UUUUUUUUUUUUUNH kar uthi. Main ruk gaya aur dabaav kam kar diya. Aise hi andar bahar karne par Nazia ki choot me natural lubrication se mera lund aaraam se andar bahar hone laga.

Phir maine mauka dekhkar apna lund supaare tak bahar kheencha aur poori takat se andar ghused diya. Lund seedha uski bachchedaani ke munh se ja takraya aur Nazia ek baar phir cheek nahi sake kyonki munh to Mariyam ki choot ne daba rakha tha. Nazia ne dono hathon se zor laga kar Mariyam ko hata diya aur rote hue boli ke maar daaloge kya mujhe. Choot maarne ki thi jaan se maarne ki thoda na kahi thi. Meri hansi nikal gayi Nazia ki baat sunkar aur maine usko badey pyar se kaha ki Jaanu choot hi maar raha hoon aur ghabrao mat tumhe marne bhi nahi doonga. Ab lund tumhari choot me poora ghus chuka hai aur jitna dard hona tha ho gaya. Ab tumhe kabhi bhi lund lene me dard nahi hoga. Araam se chudwa sakti ho bina kisi dar ya dard ke. Thori der me tumhara dard khatam ho jayega aur uski jagah tumko maza aana shuru hoga aur wo aisa maza hoga jo tumhe pichle do dinon me bhi nahi aaya hoga. Maine uske mamme apne haatho me lekar sehalane shuru kar diye aur dheere dheere uska dard kam hone laga aur dard ki jagah uske chehre par ek halki si kaamuk muskurahat aa gayee.

Jab maine dekha ki uska dard kam ho gaya hai aur uska jism ab pahle se dheela pad chukka hai to maine apne lund ko thora sa 2 inch ke kareeb bahar nikalkar andar daala aur aise hi pelne laga. Thori der me hi Nazia bhi neeche se apni gaand hilaane lagi. Ahista ahista maine apni raftaar ke saath saath zor bhi badhana shuru kar diya. Apne lund ko andar bahar karne ki lambayi bhi badhaani chalu kar di. 15-20 dhakkon ke baad hi mera lund supaare tak tezi se bahar aata aur utni hi tezi se aur zor se andar ghus jaata. Jab lund andar ghusta to Nazia bhi apni gaand uthakar uska swagat karti. 10-15 min ki joshili chudayi me Nazia chaar baar jhad gayi. Jab wo jhadne lagti main apni raftaar bahut hi dheemi kar deta aur jaise hi uska jhadna band hota meri raftar wapis tez ho jaati. Chauthi baar jhadne ke baad usne mujhe rok diya ki bas ab aur nahi. Maine bhi pehli chudayee hone ke kaaran rok liya aur apne lund ko bahar nikal liya. Mera lund bahar nikal kar uchhalne laga jaise naraaz ho to maine kaha ke ruk jao dost abhi tumhe Mariyam ki pyari choot ko khodne ka mauka milega naraaz mat ho mere yaar.

Maine mudkar dekha to Zakia bahar aa chuki thi aur masti me hume dekh rahi thi. Maine Nazia ko sahara dekar uthaya aur bathroom me le aaya. Tab tak Mariyam tub me garam paani bhar chuki thi. Astrigent lotion daal kar maine Nazia ko us me bitha diya aur kaha ke jab tak paani thanda na ho jaaye apni choot ki sikayi karti rahey. Ab Mariyam ki baari thi. Maine Mariyam ki or dekha to wo badi hasrat bhari nigaahon se mujhe dekh rahi thi aur mujhse nazar milte hi usne muskura kar apni aankhe jhuka leen. Maine aage badhkar usko apne saath chipka liya aur wo ek jhurjhuri lekar mujhse lipat gayee. Main us phool jaise halke badan ko uthakar bedroom me aa gaya aur bed par le aaya. Usne apni dono bahein mere galey me daal di theen aur uske chhote chhote mamme meri chhati par machal rahey the aur Mariyam ka chehra aavesh me tamtama raha tha. Zakia ne aagey badhkar uski peeth sehlaate hue kaha ke laado ab tu jee bhar ke chudwa le aur main teri poori madad karoongi. Jo tu kahegi main vaise hi karoongi. Mariyam ko maine bed par lita diya aur uske saath hi main bhi let gaya. Zakia uske doosri taraf aa gayee aur uske mamme ko munh me bhar kar choosne lagi. Mariyam sitkar kar uthi aur chhatpataane lagi. Usne kaatar drishti se mujhe dekha aur maine der karna uchit nahi samjha aur seedha uski tangon ke beech me aa gaya.

Maine apna akda hua lund apne haath me lekar uski choot ki daraar me phirana shuru kar diya. Wo siskaariyan leney lagi. Maine halke se apne lund ko uski choot ke muhane par rakh kar dabaya to gacch karke supara andar ghus gaya aur wo chihunk gayee. Maine halka sa dabaav daala to mera lund uski choot me andar ghusne laga. Uski aankhe mund gayeen aur wo gehri saansein leney lagi. 3-4 inch lund andar chala gaya to maine use topey tak bahar kheencha aur ek halka sa dhakka maara. Lund 6-7 inch andar ghus gaya aur Mariyam ke munh se huuun ki awaz nikli. Maine poochha ke dard ho raha hai kya? To wo boli ke nahi dard to nahi ho raha par bhari bhari lag raha hai. Uski choot ki grip mere lund par bahut tight thi to maine kaha ke bharaa hua to lagega hi tumhaari choot mera lund kha rahi hai to kuchh to lagega hi na. To wo muskura di aur boli ke ab jaldi jaldi chod dalo mujhse ruka nahi ja raha. Maine kaha ke ek baar lund poora tumhaari choot me adjust ho jaaye phir tumhe jannat ke mazey karwa doonga meri rani.

Maine apne lund ko andar bahar karna shuru kar diya aur ahista ahista har dhakke par thora aur andar karte karte thori der me hi poora lund uski choot me pel diya. Jaise hi mera lund poora Mariyam ki choot me ghusa maine apne haath uski mulayam gaand ke neeche lagakar uski gaand ko kass ke pakad liya aur dhakke lagaane laga. Mariyam anand vibhor hokar boli ke haan aise hi maaro meri choot me aag lag rahi hai iski aag bujha do. Maine kaha ke abhi tumhaari choot ki aag ko thanda karta hoon meri rani aur maine uske chootad uthakar apne lund se lambe lambe shot lagaane shuru kar diye. Dheere dheere meri raftar bhi tez hoti gayi aur phir itni tez ho gayi ke pata hi nahi lag raha tha kab lund andar aur kab lund baha ho raha hai. Zakia uske mammon ko dabaati choosti aankhe phaad kar chudayee ka nazaraa le rahi thi jaise dar rahi ho ki itne bhayankar dhakke aur wo bhi itni tezi se uski chhoti bahan kaise seh paayegi, kahin uski choot hi na phat ke do tukde ho jaaye.

Kuchh der baad Mariyam haaaaaaaaaaaaaaaan haaaaaaaaaaaaaaaan karti hui jhadne lagi. Uska shareer jhatke khaane laga aur uski choot ki pakad mere lund par badhkar kam hone lagi. Mera lund uski chikni ho chuki choot me aur aasaani se andar bahar hone laga aur mujhe laga ke main zyada der tak nahi ruk sakoonga to maine uske jhadne ke dauraan apni raftaar kam kardi. Mariyam sanyat hui to usne apni aankhe khol kar meri aur dekha aur muskura di. Kya mast aur qaatil muskurahat thi. Phir wo boli ki abhi aur bhi chodoge? Maine bhi vaise hi muskurahat ke saath jawab diya ki agar tum nahi chahti to rahne do. Wo ekdum boli ki nahi nahi main to sirf pooch rahi thi ki kahin tum thak to nahi gaye. Maine kaha ke jab tum teeno bahanon jaisi khoobsoorat aur kadak jawaan ladkiyaan itne pyar aur israar se chudwa rahi hon to koyi chootiya hi thakega. To wo hans padi aur boli ki chodo aaj mujhe ji bhar ke chodo. Kal se aag lag rahi thi meri choot me aur do baar ungli karke bhi khujli khatam nahi hui thi. Aaj phad do isko. Maine kaha ke phad doonga to chodunga kisko? Haan khujli mita doonga ye mera vada hai.

Udhar Zakia uske mammon ko lagataar dabaye aur choose ja rahi thi jis kaaran wo phir mastaane lagi aur uski aankhe phir se kamukta se lal hokar chadhne lageen. Maine Zakia se kaha ke tum zara Nazia ki khabar lo wo theek to hai aur main tab tak iski choot ki garmi nikalta hoon. Zakia uthkar bathroom me chali gaye aur maine Mariyam ki gaand ko wapis bed par tika diya aur uski taangein uthakar apni bahon par latka deen aur apne haath uski baglon se lejaakar neeche se uske kandhon par le aaya aur mazbooti se uske kandhe pakad liye. Is tarah uska poor jism dohra ho gaya aur uski gaand apne aap hi hawaa me uth gayee jise wo chah kar bhi neeche nahi kar sakti thi aur hila bhi nahi sakti thi. Uski choot ab poori khul kar mere saamne thi aur mere lund ke prachand dhakke jhel rahi thi. Ab maine apne dhakkon ki raftaar thodi badha di to Mariyam jo poori tarah se ab mere raham-o-karam par thi haaaaaaaaaaaan aiseeeeeeeeeeee hiiiiiiiiiiiiiiiiiii karooooooooooooo zooooooooooor zooooooooooor seeeeeeeeeeeeee choooooooooodoooooooooooooo. Aaaaaaaaaaaaaa aaaaaaaaaaaaan maaaaaaaaaaaain phirrrrrrrrrrrrrrrrr jhadneeeeeeeeeee waliiiiiiiiiiiiiiiii hoooooooooooooooooooooooooon. Uska jism ek baar phir akad gaya aur wo jhadne lagi aur uski choot ne mere lund par phir se apna dabav badhana aur kam karna shuru kar diya jiske chalet main bhi jhadne ko ho gaya. Maine uske jhadne ki parwah na karte hue 8-10 dhakke poor zor se maare aur jhad gaya. Maine apne lund poora jad tak uski tight choot me daal diya aur apne veerya ki pichkaariyaan uski bacchedani ke munh par maarne laga.

Uski dono taangein maine azad kardi to wo bejaan si mere dono taraf gir padeen. Maine apne haath uske chhote chhote sakht amroodon par rakh diye aur unke nipples ko apni ungliyon aur angoothon me daba kar masalne laga. Phir hum dono ke jism dheele parh gaye aur main uski bagal me ludhak gaya aur usko apne ooper kheench liya. Mariyam ko apni bahon me kass ke maine use deep kis karna shuru kar diya. Uske mamme meri chhati ko gugudaate rahey aur wo aankhe band karke jhadne ke baad ki tripti ka anand lene lagi. Zakia aur Nazia ne humaare dono taraf se humko apni baahon me le liya aur humaare saath chipak gayeen. 5 min ke baad hum sab alag hue to maine Zakia aur Nazia se poochha ke haan ab batao kaisi rahi tumhaari pehli chudayee. Dono ne muskuraate hue kaha ke hame nahi pata tha ki itna maza aata hai chudwaane me.

Maine Zakia ko apne paas bulaya aur usko apne saath chipka kar uske mammon se khelte hue use kaha ke agle shanivaar ko wo phir jaaye apne hone waale shauhar ke paas jab wo akela hota hai aur usko bataye ke uske paas se aakar tumne apni aag bujhane ke liye ek mombatti se apni seal tod li thi. Saath hi usko kahna ke tum daro nahi ki jaldi jhad jaaoge to main kya sochoongi. Jaldi jhad jaoge to main phir se tumhaare lund ko sehla kar choom kar khada kar loongi aur phir tum achche se chudayee kar sakoge aur itni jaldi jadhoge bhi nahi. Meri saheli ne mujhe bataya hai ki darne ki koyi baat nahi hai dheere dheere sab theek ho jaayega. Zakia badi khush hui aur boli ke kya wakeyi sab theek ho jaayega. To maine usko kaha ke haan is umar me jismaani kamzori nahi hoti ye zahani dar hai jiski vajah se wo jaldi jhad gaya. Agar tum usko is tarah tasalli dogi to uska dar bhi kam ho jayega aur wo theek bhi ho jayega. Zakia bahut khush hui aur usne mujhe apni bahon me kasske ek zordar bosa diya mere honthon par. Zakia boli ke theek hai main aisa hi karoongi par shaadi se pahle ek baar tumse aur chudwana chahoongi agar tum chaho to. Maine kaha ke meri jaan jab bhi tumhara dil karey chudwa lena main haseen ladkiyon ko kabhi mana nahi karta. Is par hum sab hans padey aur phir humne apne apne kapde pahane aur wo chali gayeen.

Main poori tarah se thaka hua tha aur isliye aaram karne laga. Agle din se phir purana routine shuru ho gaya. Main har doosre-teesre din Tanvi ko kuchh kaam dekar apne PC par bitha deta ke chutti ke baad ya jab bhi time miley wo usko kar de. Us din main password protection hata deta. Kaam chhota hi hota jisme do ghante se kam samay hi lagna hota. Wo thora bahut to school time me hi kar deti jab main round par hota aur baaki aadhey-pauney ghante ka ye kah kar bachaa deti ki baaki chhutti ke baad karegi. Kaam ke saath-saath wo mere PC ko achchi tarah se check karti par kuchh na milne par kheej jaati. Par usko milta kaise, main apne PC ka dhyan jo rakhta tha ki usme kuchh bhi aisa na ho jiske kaaran koyi mujhe phansa sake.

Udhar mera dost Tanvi ki investigation me laga hua tha aur dheere dheere reports bhi aani shuru ho gayi theen. Shuru me to Tanvi ke dwara batayee gayee saari batein sach nikleen aur unme koyi bhi jhoot nahi paya gaya. Main niraash ho gaya tha aur is tehkikaat ko khatam hi karwaane waala tha ki ek chhoti si baat ne mera dhyan aakarshit kiya aur wo tha ki uski ek bahan jo Tanvi se 3 saal badi hai Chandigadh me byahi hui hai aur uski shadi uske papa ki death se pahle hi ho chuki thi. Iske baare me usne kabhi koyi zikar nahi kiya tha aur na hi bataya tha ki uski koyi badi bahan bhi hai jo ki thora atpata lag raha tha. Maine apne dost ko uske baare me aur adhik jaankari lene ke liye kaha. Wahan se aayee reports me bhi khas kuchh pata nahi chala lekin sabse ant me aayi Chandigadh ki final report ne mujhe chaunka diya. Usme Tanvi ki bahan ka jo address diya hua tha wo meri sasural ke pados ka tha.

kramashah......