बात एक रात की compleet

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rajaarkey
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Re: बात एक रात की

Unread post by rajaarkey » 12 Dec 2014 04:23

बात एक रात की-- 61

गतान्क से आगे...........

"क्या चल रहा है रोहित, कोई नयी डेवेलपमेंट?" शालिनी ने कहा.

"साइको ने अपनी करतूत की वीडियो सर्क्युलेट कर दी है मीडीया में और मीडीया वाले पागलो की तरह उसे दिखा रहे हैं." रोहित ने कहा.

"हां पता चला मुझे सब कुछ. अब कहा जा रहे थे तुम?"

"मेडम, पद्‍मिनी को फोटोस दिखाने जा रहा हूँ."

"गुड, उसकी सुरक्षा अरेंजमेंट भी चेक कर लेना. और सुरक्षा की ज़रूरत हो तो दी जा सकती है."

"बिल्कुल मेडम, मैं देख लूँगा."

"ओके...गुड लक" शालिनी कह कर अपने कॅबिन की तरफ चल दी.

रोहित अपनी जीप में बैठ कर पद्‍मिनी के घर की तरफ चल दिया.

..............................

.........................................

राज शर्मा बैठा था जीप में चुपचाप. पर उसके दिमाग़ में एक तूफान चल रहा था.

"ये अब मेरी पर्सनल बॅटल है. साइको की हिम्मत कैसे हुई पद्‍मिनी जी के बारे में ऐसा बोलने की. गोली मार दूँगा साले को मिल जाए एक बार मुझे वो. देखा जाएगा बाद में जो होगा. नही छोड़ूँगा उसे मैं जींदा. उसे नही पता की पद्‍मिनी जी के बारे में इतनी घिनोनी बाते करके उसने अपनी जान आफ़त में डाल ली है."

तभी पद्‍मिनी की खिड़की का परदा खुलता है. राज शर्मा तो देख ही रहा था बार-बार खिड़की की तरफ. जैसे ही उसे पद्‍मिनी दिखी आ गया फ़ौरन जीप से बाहर. पद्‍मिनी ने फिर बहुत प्यार से देखा राज शर्मा को. राज शर्मा तो बस देखता ही रह गया पद्‍मिनी को. वक्त जैसे थम सा गया था.

तभी एक जीप आकर रुकी पद्‍मिनी के घर के बाहर और रोहित उसमे से उतर गया.

"रोहित!" पद्‍मिनी ने कहा और परदा गिरा दिया.

राज शर्मा के दिल पे तो जैसे साँप लेट गया. बहुत प्यार से देख रही थी पद्‍मिनी राज शर्मा को. ये जीप बीच में ना आती तो शायद वो समझ जाता इस बार की क्या है पद्‍मिनी की म्रिग्नय्नि आँखो में.

"तो तुम हो राज शर्मा ?" रोहित ने पूछा.

"जी हां बिल्कुल."

"आइ आम इनस्पेक्टर रोहित पांडे."

"ओह...गुड मॉर्निंग सर. सॉरी आपको पहचान नही पाया. भोलू ने बातया था कि अब साइको वाला केस आप हॅंडल कर रहे हैं."

"इट्स ओके. यहाँ सब कैसा चल रहा है."

"ठीक चल रहा है सर"

"देखो वो साइको हाथ धो कर पड़ा है पद्‍मिनी के पीछे. तुम्हे बहुत ज़्यादा सतर्क रहना होगा. मैं 2 गन्मन लगा रहा हूँ यहाँ तुम्हारे साथ. कीप एवेरितिंग अंडर कंट्रोल."

"राइट सीर."

रोहित पद्‍मिनी के घर की बेल बजाता है. उसके डेडी दरवाजा खोलते हैं.

"जी कहिए."

"आइ आम इनस्पेक्टर रोहित पांडे. मुझे पद्‍मिनी से मिलना है"

"वो अपने कमरे में सो रही है."

"देखिए मेरा उनसे मिलना बहुत ज़रूरी है. प्लीज़ बुला दीजिए उन्हे."

"ठीक है, बैठो आप मैं बुला कर लाता हूँ पद्‍मिनी को"

जब पद्‍मिनी के डेडी ने पद्‍मिनी को बताया कि उस से कोई रोहित पांडे मिलने आया है तो उसने माना कर दिया मिलने से. "मेरे सर में दर्द है पापा. मैं किसी से नही मिलना चाहती."

पद्‍मिनी के दादी ने ये बात आकर रोहित को बता दी.

"लगता है अब तक नाराज़ है मुझसे." रोहित ने मन ही मन सोचा.

"आप बाद में आ जाना."

"बहुत अर्जेंट था. क्रिमिनल्स की फोटोस लाया था उन्हे दिखाने के लिए. क्या पता इन्ही में से हो वो साइको."

ये बात सुनते ही पद्‍मिनी के डेडी दुबारा गये पद्‍मिनी के पास और उसे किसी तरह ले आए अपने साथ.

पद्‍मिनी को देखते ही रोहित खड़ा हो गया. दोनो की आँखे टकराई पर कुछ कहा नही एक दूसरे को.

"ये फोटोस हैं क्रिमिनल्स की. इन्हे ध्यान से देखिए...हो सकता है साइको इन्ही में से कोई हो."

पद्‍मिनी ने फाइल पकड़ी और बैठ गयी सोफे पे. एक एक फोटो को वो गौर से देखने लगी. जब पद्‍मिनी के डेडी वहाँ से हटे तो रोहित ने कहा, "कैसी हो पद्‍मिनी"

"इनमे से कोई नही है." पद्‍मिनी ने कहा और फाइल टेबल पर रख दी. उसने रोहित की बात का कोई जवाब नही दिया.

"इतने दिनो बाद मिली हो, क्या बात भी नही करोगी." रोहित ने कहा.

पद्‍मिनी कुछ नही बोली और चुपचाप वहाँ से उठ कर चली गयी.

रोहित ने फाइल उठाई और घर से बाहर आ गया. "बिल्कुल नही बदली पद्‍मिनी. आज भी वैसी ही है. वही गुस्सा, वही अदा. सब कुछ वही है. आँखो की गहराई भी वही है. शूकर है उसने मेरी तरफ देखा तो. लगता है कभी माफ़ नही करेगी मुझे. ऐसी हसीना की नाराज़गी से तो मौत अच्छी"

रोहित राज शर्मा के पास आया और बोला, "अपने पास जो भी फोटोस थे क्रिमिनल्स के उनमे से कोई नही है साइको."

"सर अभी मैं एक बात सोच रहा था, बुरा ना माने तो बोलूं"

"बेझीजक कुछ भी बोलो यार. चौहान की तरह पागल नही हूँ मैं."

"ए एस पी साहिबा पर पोलीस महकमे की गोली चली थी. अगर अस्यूम करके चलें कि साइको एक पोलीस वाला है तो पीछले दिनो की कुछ बाते गौर की मैने"

"हां हां बोलते जाओ." रोहित ने कहा.

"एक पोलीस वाले पर शक है मुझे. वो है सब इनस्पेक्टर विजय."

"ऐसा कैसे कह सकते हो तुम. मैं जानता हूँ उसे. अच्छा बंदा है वो तो"

"देखिए सर जब मेरे दोस्त मोहित ने साइको का पेट चीर दिया था तभी से विजय छुट्टी पर चला गया. फोन किया उसने बस की मैं मुंबई शादी में जा रहा हूँ. पूरे 2 हफ्ते बाद लौटा वो ड्यूटी पर. फिर जब ए एस पी साहिबा पर गोली चली थी, तब भी वो गायब था. ये कुछ बाते हैं जो दर्साति हैं कि कुछ गड़बड़ है."

"मान-ना पड़ेगा दिमाग़ तेज चलता है तुम्हारा. यू विल बी वेरी सक्सेस्फुल इन पोलीस डेप्ट. मैं गौर कारूगा इस बात पर. आज ही खबर लेता हूँ विजय की."

"थॅंक यू सर. ये मेरा गेस है. मैं ग़लत भी हो सकता हूँ."

"इन्वेस्टिगेशन में गेस के सहारे ही आगे बढ़ना पड़ता है. जो गेस नही कर सकता वो इन्वेस्टिगेशन भी नही कर सकता. ख़ुसी हुई मुझे तुमसे मिल कर. मैं चलता हूँ अब. बी अलर्ट हियर ऑल दा टाइम."

रोहित अपनी जीप में बैठ कर वापिस चला गया.

"सर जो भी हो. ग़लत वक्त पर आए आप. पता नही कब हटेगा परदा ये अब. रोज रोज कहा पद्‍मिनी जी हमारी तरफ ऐसे देखती हैं. पता नही क्या बात है. "

मोहित भी टीवी पर साइको द्वारा बनाई गयी वीडियो देख कर परेशान हो गया.

"एक तो ये कमीना इतने वहान्सि तरीके से खून कर रहा है. उपर से ऐसी वीडियो बना कर मीडीया में भेज रहा है. बहुत भयानक खेल, खेल रहा है ये प्यचओ. काश मैं इसे उसी दिन मार डालता."

मोहित तैयार हो कर अपनी ड्यूटी के लिए निकल दिया. सुबह के 11 बज रहे थे. वो थोड़ा लेट हो गया था.

"लेट हो गया यार इस साइको के चक्कर में. जल्दी निकलता हूँ."

मोहित बाइक ले कर अपने ऑफीस की तरफ निकल देता है. रास्ते में कुछ ही दूरी पर एक बस स्टॉप पर उसे पूजा खड़ी दिखाई देती है. उसकी तो आँखे चमक जाती हैं पूजा को देख कर. रोक देता है बाइक पूजा के सामने. "कॉलेज जा रही हो? मैं भी उसी तरफ जा रहा हूँ. आओ बैठ जाओ छ्चोड़ दूँगा तुम्हे कॉलेज तक."

"अपना रास्ता देखो मिस्टर मोहित. पागल नही हूँ मैं जो कि तुम्हारे साथ जाउन्गि" पूजा ने कहा.

"तुम हसिनाओ की यही दिक्कत है. कभी प्यार की कदर नही करती. इतना कठोर दिल कहा से आया तुम्हारे पास. इतनी सुंदर हो कर इतनी कठोर बाते सोभा नही देती तुम्हे. हुसान को प्यार की ज़रूरत हमेशा रहती है. प्यार मिले तो उसे ठुकराना नही चाहिए. आ जाओ बैठ जाओ. कुछ बिगड़ नही जाएगा तुम्हारा मेरे साथ चलने से."

"गेट लॉस्ट, मुझे एक कदम भी नही चलना तुम्हारे साथ" पूजा ने गुस्से में कहा.

"आना पड़ेगा तुम्हे मेरी ही बाहों में एक दिन, देख लेना एक दिन तुम भी मेरे प्यार में तड़पोगी"

"ऐसा दिन आने से पहले मैं मर जाउन्गि. चले जाओ यहाँ से. मुझे परेशान मत करो."

"अच्छा एक ज़रूरी बात है, ध्यान से सुनो. साइको किल्लर और भी ज़्यादा दरिंदगी पर उतर आया है. बे केर्फुल ऑल दा टाइम. मुझे तुम्हारी चिंता रहती है."

"हे...हे...हे...मेरी चिंता. मैं सब समझ रही हूँ. तुम्हे मेरी नही अपनी चिंता है. अगर मैं मर गयी तो तुम किसके साथ हवस की प्यास बुझाओगे. मेरी चिंता मत करो मिस्टर मोहित. अपनी चिंता किया करो. तुम्हारा तो 2 बार सामना हो चुका है साइको से.तुम्हे मेरा शरीर चाहिए और कुछ नही."

"तुम तो देखने भी नही आई एक भी बार मुझे. हॉस्पियाल में जब भी कुछ आहट होती थी तो मैं इस उम्मीद में आँखे खोल कर देखता था कि कही तुम तो नही. पर तुम तो बड़ी निर्दयी निकली. एक बार भी नही आई तुम."

"क्यों आउ मैं तुम्हे देखने. क्या लगते हो तुम मेरे?"

"आशिक़ हूँ तुम्हारा. तुम मानो या ना मानो कुछ तो रिश्ता बनता ही है"

"तुम जाते हो कि नही या पोलीस को बुलाउ." पूजा ने गुस्से में कहा.

"जा रहा हूँ यार, मैं तो वैसे ही लेट हो रहा हूँ." मोहित ने कहा.

मोहित ने अपनी बाइक स्टार्ट कर दी और अपना सा मूह लेकर निकल गया आगे.

"अफ यार ये नही पटेगी. " मोहित ने कहा.

मोहित के जाने के बाद पूजा ने राहत की साँस ली. "ये बस कब आएगी. आधा घंटा हो गया खड़े हुए यहाँ." पूजा अकेली ही खड़ी थी बस स्टॉप पर और कोई नही था.

पूजा अंजान थी इस बात से कि एक नयी मुसीबत उसकी ओर बढ़ रही थी जिसका उसे अंदाज़ा भी नही था.

सब इनस्पेक्टर विजय पोलीस की जीप में उधर से गुजर रहा था. उसने पूजा को पहचान लिया, "अरे ये तो वही एस्कॉर्ट है जो उस दिन उस बंदे के साथ होटेल में थी. 50,000 वाली एस्कॉर्ट. टॉप क्लास रंडी."

विजय ने जीप पूजा के आगे रोक दी. "नाम भूल गया मैं तुम्हारा पर काम नही भुला. कौन से होटेल जा रही हो. रेट अभी भी 50,000 है या बढ़ा दिया. तेरे लिए 50,000 बहुत कम है वैसे. मुझे क्या मुझे तो फ्री में लेनी है तेरी. चल बैठ जा जीप में. बहुत दिन से ड्यू है तुम्हारी ठुकाई मेरे हाथो."

पूजा के चेहरे का तो रंग उड़ गया ये सब सुन कर. उसके पाँव काँपने लगे. उसे समझ नही आ रहा था कि क्या करे. वो भाग जाना चाहती थी वहाँ से पर उसके कदम ही नही हीले.

"सोच क्या रही है बैठ जल्दी. चल अपने घर ले चलता हूँ तुझे. खूब अच्छे से लूँगा तेरी."

"सर वो मेरा पहली और आखरी बार था. मुझे ब्लॅकमेल करके एस्कॉर्ट बन-ने पर मजबूर किया गया था."

"हर रंडी पकड़े जाने पे ऐसी ही कहानी सुनाती है. चुपचाप बैठ जा वरना प्रॉस्टिट्यूशन के केस में जैल में डाल दूँगा"

"सर प्लीज़." पूजा गिड़गिडाई

"अगर एक मिनिट के अंदर नही बैठी तो बाल पकड़ कर घसीट कर ले जाउन्गा" विजय कठोरता से बोला

पूजा बहुत डर गयी. डर स्वाभाविक भी था. वो काँपते कदमो से जीप में बैठ गयी. उसके पास इसके अलावा कोई चारा भी नही था.

विजय पूजा को लेकर चल पड़ा अपने घर की तरफ. "बीवी मायके गयी है मेरी. शाम तक लौटेगी. तब तक तू मेरे साथ मेरे घर पर रहेगी. छुट्टी ले लूँगा मैं ड्यूटी से. खूब चोदुन्गा तुझे सारा दिन."

पूजा कुछ नही बोल पाई बस दो आँसू टपक गये उसकी आँखो से.

विजय पूजा को अपने घर ले आया.

"सारे कपड़े उतार दे जल्दी से. मैं भी तो देखूं जो माल 50,000 में बिकता है वो कैसा दीखता है."

"आप समझते क्यों नही मैं एस्कॉर्ट नही हूँ. उस दिन ज़बरदस्ती भेजा गया था मुझे होटेल में."

विजय पर तो मानो कुछ असर ही नही हुआ. उसने पूजा को बाहों में भर लिया और उसके नितंबो को मसल्ने लगा. "क्या फरक पड़ता है. धंधा तो तूने किया ना. एक बार या सौ बार. धंधा तो धंधा है."

पूजा कुछ नही बोल पाई. खड़ी रही चुपचाप और पीसती रही विजय की बाहों में. बड़ी बेरहमी से मसल रहा था विजय पूजा के नितंबो को.

"मान-ना पड़ेगा. एक दम मखमली गान्ड है तेरी. 50,000 तो केवल इसी के दे देते होंगे लोग तुझे. क्यों सच कह रहा हूँ ना मैं."

पूजा ने कुछ भी कहना सही नही समझा. वो कुछ कह भी नही सकती थी. बस आँखे बंद किए चुपचाप अपने शरीर से खिलवाड़ होते देखती रही.

विजय ने उसके सारे कपड़े निकाल दिए और पटक दिया उसे बिस्तर पर. वो खुद भी नंगा हो कर पूजा के उपर आ गया. पूजा तो एक जींदा लाश की तरह हो गयी. विजय ने उसकी टांगे अपने कंधे पर रखी और समा गया उसके अंदर.

जब विजय पूजा के अंदर समाया तो उसकी आँखे छलक गयी और उसने मन ही मन सोचा,"प्यार किया था मैने. सच्चा प्यार. क्या ग़लती थी मेरी मेरे भगवान जो प्यार में मुझे इतना बड़ा धोका मिला. प्यार ने मुझे वेश्या बना दिया. नही जी पाउन्गि अब मैं. पहले चौहान और परवीन ने एक साथ मेरी इज़्ज़त की धज़िया उड़ाई. अब ये उड़ा रहा है. प्यार ऐसे दिन दिखाएगा सोचा नही था मैने. बस ये आखरी बार है. ये सब सहने के लिए मैं जींदा नही रहूंगी अब."

विजय तो पागलो की तरह अपने काम में लीन था. तूफान मच्चा रखा था उसने पूजा की योनि के अंदर. मगर पूजा कुछ भी महसूस नही कर रही थी. बहुत व्यथीत थी आज. चौहान और परवीन के साथ तो वो फिर भी संभोग के आनंद में खो गयी थी. जिसका उसे बाद में अफ़सोस भी रहा. मगर आज वो कुछ भी महसूस नही कर रही थी. शायद ये बात उसे अंदर ही अंदर खाए जा रही थी कि उसकी जिंदगी कहा से कहा पहुँच गयी. चौहान और परवीन के साथ तो वो अंजाने में ही खो गयी थी, बहक गयी थी...मगर आज ऐसा कुछ नही हो रहा था. आँसू पे आँसू टपक रहे थे उसकी आँखो से.

क्रमशः.........................

BAAT EK RAAT KI-- 61

gataank se aage...........

"kya chal raha hai rohit, koyi nayi development?" shalini ne kaha.

"psycho ne apni kartoot ki video circulate kar di hai media mein aur media wale paaglo ki tarah use dikha rahe hain." rohit ne kaha.

"haan pata chala mujhe sab kuch. Ab kaha ja rahe the tum?"

"madam, padmini ko photos dikhane ja raha hun."

"good, uski suraksha arrangment bhi check kar lena. Aur suraksha ki jaroorat ho to di ja sakti hai."

"bilkul madam, main dekh lunga."

"ok...good luck" shalini kah kar apne cabin ki taraf chal di.

Rohit apni jeep mein baith kar padmini ke ghar ki taraf chal diya.

.......................................................................

Raj sharma baitha tha jeep mein chupchaap. Par uske dimaag mein ek toofan chal raha tha.

"ye ab meri personal battle hai. Psycho ki himmat kaise hui padmini ji ke baare mein aisa bolne ki. Goli maar dunga saale ko mil jaaye ek baar mujhe vo. Dekha jaayega baad mein jo hoga. Nahi chodunga use main jeenda. Use nahi pata ki padmini ji ke baare mein itni ghinoni baate karke usne apni jaan aafat mein daal li hai."

tabhi padmini ki khidki ka parda khulta hai. Raj sharma to dekh hi raha tha baar-baar khidki ki taraf. Jaise hi use padmini dikhi aa gaya fauran jeep se baahar. Padmini ne phir bahut pyar se dekha Raj sharma ko. Raj sharma to bas dekhta hi rah gaya padmini ko. Vakt jaise tham sa gaya tha.

Tabhi ek jeep aakar ruki padmini ke ghar ke baahar aur rohit usme se utar gaya.

"rohit!" padmini ne kaha aur parda gira diya.

Raj sharma ke dil pe to jaise saanp late gaya. Bahut pyar se dekh rahi thi padmini Raj sharma ko. Ye jeep beech mein na aati to shaayad vo samajh jaata is baar ki kya hai padmini ki mrignayni aankho mein.

"to tum ho Raj sharma ?" rohit ne pucha.

"ji haan bilkul."

"i am inspector rohit panday."

"oh...good morning sir. Sorry aapko pahchaan nahi paaya. Bholu ne baataya tha ki ab psycho wala case aap handle kar rahe hain."

"its ok. Yahan sab kaisa chal raha hai."

"theek chal raha hai sir"

"dekho vo psycho haath dho kar pada hai padmini ke peeche. Tumhe bahut jyada satark rahna hoga. Main 2 gunman laga raha hun yahan tumhaare saath. Keep everything under control."

"right sir."

rohit padmini ke ghar ki bell bajaata hai. Uske dady darvaaja kholte hain.

"ji kahiye."

"i am inspector rohit panday. Mujhe padmini se milna hai"

"vo apne kamre mein sho rahi hai."

"dekhiye mera unse milna bahut jaroori hai. Please bula dijiye unhe."

"theek hai, baitho aap main bula kar laata hun padmini ko"

jab padmini ke dady ne padmini ko bataaya ki us se koyi rohit panday milne aaya hai to usne mana kar diya milne se. "mere sar mein dard hai papa. Main kisi se nahi milna chaahti."

padmini ke dady ne ye baat aakar rohit ko bata di.

"lagta hai ab tak naraaz hai mujhse." rohit ne man hi man socha.

"aap baad mein aa jaana."

"bahut urgent tha. Criminals ki photos laaya tha unhe dikhane ke liye. Kya pata inhi mein se ho vo psycho."

ye baat sunte hi padmini ke dady dubara gaye padmini ke paas aur use kisi tarah le aaye apne saath.

Padmini ko dekhte hi rohit khada ho gaya. Dono ki aankhe takraayi par kuch kaha nahi ek dusre ko.

"Ye photos hain criminals ki. Inhe dhyaan se dekhiye...ho sakta hai psycho inhi mein se koyi ho."

padmini ne file pakdi aur baith gayi sofe pe. Ek ek photo ko vo gaur se dekhne lagi. Jab padmini ke dady vahaan se hatey to rohit ne kaha, "kaisi ho padmini"

"inme se koyi nahi hai." padmini ne kaha aur file table par rakh di. Usne rohit ki baat ka koyi jawaab nahi diya.

"itne dino baad mili ho, kya baat bhi nahi karogi." rohit ne kaha.

Padmini kuch nahi boli aur chupchaap vahaan se uth kar chali gayi.

Rohit ne file uthaayi aur ghar se baahar aa gaya. "bilkul nahi badli padmini. Aaj bhi vaisi hi hai. Vahi gussa, vahi ada. Sab kuch vahi hai. Aankho ki gahraayi bhi vahi hai. Shukar hai usne meri taraf dekha to. Lagta hai kabhi maaf nahi karegi mujhe. Aisi hasina ki naraajgi se to maut achchi"

rohit Raj sharma ke paas aaya aur bola, "apne paas jo bhi photos the criminals ke unme se koyi nahi hai psycho."

"sir abhi main ek baat soch raha tha, bura na maane to bolun"

"bejhijak kuch bhi bolo yaar. Chouhaan ki tarah paagal nahi hun main."

"A S P saahiba par police mahakme ki goli chali thi. Agar assume karke chalein ki psycho ek police wala hai to peechle dino ki kuch baate gaur ki maine"

"haan haan bolte jaao." rohit ne kaha.

"ek police wale par shak hai mujhe. Vo hai sub inspector vijay."

"aisa kaise kah sakte ho tum. Main jaanta hun use. Achcha banda hai vo to"

"dekhiye sir jab mere dost mohit ne psycho ka pet cheer diya tha tabhi se vijay chutti par chala gaya. Phone kiya usne bas ki main mumbai shaadi mein ja raha hun. Pure 2 hafte baad lauta vo duty par. Phir jab A S P saahiba par goli chali thi, tab bhi vo gaayab tha. Ye kuch baate hain jo darsaati hain ki kuch gadbad hai."

"maan-na padega dimaag tej chalta hai tumhaara. You will be very successful in police dept. Main gaur karooga is baat par. Aaj hi khabar leta hun vijay ki."

"thank you sir. Ye mera guess hai. Main galat bhi ho sakta hun."

"investigation mein guess ke sahaare hi aage badhna padta hai. Jo guess nahi kar sakta vo investigation bhi nahi kar sakta. Khusi hui mujhe tumse mil kar. Main chalta hun ab. Be alert here all the time."

rohit apni jeep mein baith kar vaapis chala gaya.

"sir jo bhi ho. Galat vakt par aaye aap. Pata nahi kab hatega parda ye ab. Roj roj kaha padmini ji hamaari taraf aise dekhti hain. Pata nahi kya baat hai. "

mohit bhi tv par psycho dwara banaayi gayi video dekh kar pareshaan ho gaya.

"ek to ye kamina itne vahaansi tarike se khun kar raha hai. Upar se aisi video bana kar media mein bhej raha hai. Bahut bhayaanak khel, khel raha hai ye pycho. Kaash main ise usi din maar daalta."

mohit taiyaar ho kar apni duty ke liye nikal diya. Subah ke 11 baj rahe the. Vo thoda late ho gaya tha.

"late ho gaya yaar is psycho ke chakkar mein. Jaldi nikalta hun."

mohit bike le kar apne office ki taraf nikal deta hai. Raaste mein kuch hi duri par ek bus stop par use puja khadi dikhayi deti hai. Uski to aankhe chamak jaati hain puja ko dekh kar. Rok deta hai bike puja ke saamne. "college ja rahi ho? Main bhi usi taraf ja raha hun. Aao baith jaao chhod dunga tumhe college tak."

"apna rasta dekho mr mohit. Paagal nahi hun main jo ki tumhaare saath jaaungi" puja ne kaha.

"tum hasinaao ki yahi dikkat hai. Kabhi pyar ki kadar nahi karti. Itna kathor dil kaha se aaya tumhaare paas. Itni sundar ho kar itni kathor baate sobha nahi deti tumhe. Husan ko pyar ki jaroorat hamesha rahti hai. Pyar mile to use thukrana nahi chaahiye. Aa jaao baith jaao. Kuch bigad nahi jaayega tumhaara mere saath chalne se."

"get lost, mujhe ek kadam bhi nahi chalna tumhaare saath" puja ne gusse mein kaha.

"aana padega tumhe meri hi baahon mein ek din, dekh lena ek din tum bhi mere pyar mein tadpogi"

"aisa din aane se pahle main mar jaaungi. Chale jaao yahan se. Mujhe pareshaan mat karo."

"achcha ek jaroori baat hai, dhyaan se suno. Psycho killer aur bhi jyada darindagi par utar aaya hai. Be careful all the time. Mujhe tumhaari chinta rahti hai."

"he...he...he...meri chinta. Main sab samajh rahi hun. Tumhe meri nahi apni chinta hai. Agar main mar gayi to tum kiske saath hawas ki pyas bujhaaoge. Meri chinta mat karo mr mohit. Apni chinta kiya karo. Tumhaara to 2 baar saamna ho chuka hai psycho se.tumhe mera sharir chahiye aur kuch nahi."

"tum to dekhne bhi nahi aayi ek bhi baar mujhe. Hospial mein jab bhi kuch aahat hoti thi to main is ummeed mein aankhe khol kar dekhta tha ki kahi tum to nahi. Par tum to badi nirdayi nikli. Ek baar bhi nahi aayi tum."

"kyon aaun main tumhe dekhne. Kya lagte ho tum mere?"

"aashiq hun tumhaara. Tum maano ya na maano kuch to rishta banta hi hai"

"tum jaate ho ki nahi ya police ko bulaaun." puja ne gusse mein kaha.

"ja raha hun yaar, main to vaise hi late ho raha hun." mohit ne kaha.

Mohit ne apni bike start kar di aur apna sa muh lekar nikal gaya aage.

"uff yaar ye nahi pategi. " mohit ne kaha.

Mohit ke jaane ke baad puja ne raahat ki saans li. "ye bus kab aayegi. Aadha ghanta ho gaya khade hue yahan." Puja akeli hi khadi thi bus stop par aur koyi nahi tha.

puja anjaan thi is baat se ki ek nayi musibat uski aur badh rahi thi jiska use andaaja bhi nahi tha.

Sub inspector vijay police ki jeep mein udhar se gujar raha tha. Usne puja ko pahchaan liya, "arey ye to vahi escort hai jo us din us bande ke saath hotel mein thi. 50,000 wali escort. Top class randi."

vijay ne jeep puja ke aage rok di. "naam bhul gaya main tumhaara par kaam nahi bhula. Kaun se hotel ja rahi ho. Rate abhi bhi 50,000 hai ya badha diya. Tere liye 50,000 bahut kam hai vaise. Mujhe kya mujhe to free mein leni hai teri. Chal baith ja jeep mein. Bahut din se due hai tumhaari thukaayi mere haatho."

puja ke chehre ka to rang ud gaya ye sab sun kar. Uske paanv kaanpne lage. Use samajh nahi aa raha tha ki kya kare. Vo bhaag jaana chaahti thi vahaan se par uske kadam hi nahi hile.

"soch kya rahi hai baith jaldi. Chal apne ghar le chalta hun tujhe. Khub achche se lunga teri."

"sir vo mera pahli aur aakhri baar tha. Mujhe blackmail karke escort ban-ne par majboor kiya gaya tha."

"har randi pakde jaane pe aisi hi kahaani sunaati hai. Chupchaap baith ja varna prostitution ke case mein jail mein daal dunga"

"sir please." puja gidgidaayi

"agar ek minute ke ander nahi baithi to baal pakad kar ghasit kar le jaaungaa" vijay kathorta se bola

puja bahut dar gayi. Dar swabhavik bhi tha. Vo kaanpte kadmo se jeep mein baith gayi. Uske paas iske alawa koyi chara bhi nahi tha.

Vijay puja ko lekar chal pada apne ghar ki taraf. "biwi maayke gayi hai meri. Shaam tak lautegi. Tab tak tu mere saath mere ghar par rahegi. Chutti le lunga main duty se. Khub chodunga tujhe saara din."

puja kuch nahi bol paayi bas do aansu tapak gaye uski aankho se.

vijay puja ko apne ghar le aaya.

"saare kapde utaar de jaldi se. Main bhi to dekhun jo maal 50,000 mein bikta hai vo kaisa deekhta hai."

"aap samajhte kyon nahi main escort nahi hun. Us din jabardasti bheja gaya tha mujhe hotel mein."

vijay par to maano kuch asar hi nahi hua. Usne puja ko baahon mein bhar liya aur uske nitambo ko masalne laga. "kya farak padta hai. Dhanda to tune kiya na. Ek baar ya sho baar. Dhanda to dhanda hai."

puja kuch nahi bol paayi. Khadi rahi chupchaap aur pisti rahi vijay ki baahon mein. Badi berahmi se masal raha tha vijay puja ke nitambo ko.

"maan-na padega. Ek dam makhmali gaanD hai teri. 50,000 to kewal isi ke de dete honge log tujhe. Kyon sach kah raha hun na main."

puja ne kuch bhi kahna sahi nahi samjha. Vo kuch kah bhi nahi sakti thi. Bas aankhe band kiye chupchaap apne sharir se khilvaad hote dekhti rahi.

Vijay ne uske saare kapde nikaal diye aur patak diya use bistar par. Vo khud bhi nanga ho kar puja ke upar aa gaya. Puja to ek jeenda laas ki tarah ho gayi. Vijay ne uski taange apne kandhe par rakhi aur sama gaya uske ander.

Jab vijay puja ke ander samaaya to uski aankhe chalak gayi aur usne man hi man socha,"pyar kiya tha maine. Sachcha pyar. Kya galti thi meri mere bhagvaan jo pyar mein mujhe itna bada dhoka mila. Pyar ne mujhe vaisya bana diya. Nahi ji paaungi ab main. Pahle chouhaan aur parveen ne ek saath meri izzat ki dhajiya udaayi. Ab ye uda raha hai. Pyar aise din dikhaayega socha nahi tha maine. Bas ye aakhri baar hai. Ye sab sahne ke liye main jeenda nahi rahungi ab."

vijay to paaglo ki tarah apne kaam mein leen tha. Toofan machcha rakha tha usne puja ki yoni ke ander. Magar puja kuch bhi mahsus nahi kar rahi thi. Bahut vyathit thi aaj. Chouhaan aur parveen ke saath to vo phir bhi sambhog ke aanand mein kho gayi thi. Jiska use baad mein afsos bhi raha. Magar aaj vo kuch bhi mahsus nahi kar rahi thi. Shaayad ye baat use ander hi ander khaaye ja rahi thi ki uski jindagi kaha se kaha pahunch gayi. Chouhaan aur parveen ke saath to vo anjaane mein hi kho gayi thi, bahak gayi thi...magar aaj aisa kuch nahi ho raha tha. Aansu pe aansu tapak rahe the uski aankho se.

Kramashah.........................


rajaarkey
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Re: बात एक रात की

Unread post by rajaarkey » 12 Dec 2014 04:24

बात एक रात की-- 62

गतान्क से आगे...........

मगर कब तक बचती वो लिंग के घर्सन से. देर से ही सही कमरे में उसकी शिसकियाँ गूंजने लगी. ये बात और थी कि उसकी शिसकियों में आनंद के साथ साथ शरम और ग्लानि भी मौजूद थी. पूजा की शिसकियाँ उसकी व्यतीत मनोस्थिति को बखूबी दर्साति थी. मगर विजय को तो लग रहा था कि वो आनंद के सागर में गोते लगा रही है.

आनंद था योनि में लिंग के घर्षण का. शरम और ग्लानि थी इस बात की, की उसकी योनि में घर्षण करने वाला उसका प्रेमी नही था बल्कि वो इंसान था जो की उसे वैश्या समझता था और वैश्या के ही नाते उस पर चढ़ा हुआ था.

"अब कुछ नही बचा...सब ख़तम हो गया...आआहह"

"क्या कहा तूने, मुझे डिस्टर्ब मत कर आराम से फक्किंग करने दे"

पूजा ने कुछ नही कहा. हां उसकी 2 अहसासो में डूबी शिसकिया बरकरार रही.

तीन बार सहना पड़ा उसे विजय की हवस को. 6 बजे फ्री किया विजय ने पूजा को. विजय ने पूजा को अपने घर से थोड़ी दूर एक मार्केट में छ्चोड़ दिया. "अगले हफ्ते मेरे 2 दोस्त आ रहें हैं देल्ही से. मिल कर एंजाय करेंगे तेरे साथ."

पूजा ने कुछ नही कहा और मुरझाया चेहरा ले कर लड़खड़ाते कदमो से चल पड़ी. घर नही जाना चाहती थी वो अब. मर जाना चाहती थी कही जाकर. एक कार ने तो उसे उड़ा ही दिया होता. शूकर है वक्त पर ब्रेक लग गयी. "पागल हो गयी हो तुम. मरना है तो कही और जा कर मरो." कार वाला चिल्लाया. सड़क पार कर रही थी पूजा बिना सोचे समझे. ध्यान ही नही था उसका कार पर. वो तो बस चले जा रही थी. शायद वो कही जा कर मार ही जाती. पर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था.

मोहित गुजर रहा था वहाँ से. उसने पूजा को ऐसी हालत में गुमशुम भटकते देख लिया.

"पूजा कहाँ जा रही हो. देख कर भी नही चल रही. ठीक तो हो."

"ओह मोहित...बहुत अच्छे वक्त पे आए तुम, देखो मेरा तमासा तुम भी."

"क्या बोल रही हो. चलो बैठो तुम्हे घर छ्चोड़ देता हूँ."

"नही घर नही जाउन्गि आज. तुम जाओ."

मोहित को पूजा का ऐसा बर्ताव बहुत अजीब लग रहा था.

"बात क्या है पूजा, कुछ बदली बदली सी लग रही हो."

"हे...हे...बदली बदली और मैं. जिंदगी है चलता है सब. मैं घर नही जाउन्गि."

"बैठो तो सही...जहा कहोगी वहाँ ले चलूँगा." मोहित ने कहा.

"ओह हां एक काम करते हैं, तुम्हारे घर चलें." पूजा ने कहा.

"चलो चलने में कोई बुराई नही है...आओ." मोहित ने कहा.

"लेकिन मैं अपने घर नही जाउन्गि पहले ही बता देती हूँ."

"बैठो तो सही...फिर देखते है." मोहित ने कहा.

"नही जाना है मुझे घर जान लो तुम." पूजा बोलते हुए बैठ गयी मोहित की बाइक पर.

पूजा कुछ नही बोली बाद में. मोहित ने भी कुछ नही कहा. ले आया मोहित पूजा को अपने घर.

"कुण्डी लगा दो मोहित." पूजा ने कहा.

मोहित तो कुछ भी नही समझ पा रहा था. कुण्डी लगा कर वो पूजा के पास आया जो की बिस्तर के पास खड़ी थी. पूजा ने मोहित की आँखो में देखा और अपना टॉप उतार दिया.

"ये क्या कर रही हो."

"अपने आशिक़ को तोहफा देना चाहती हूँ." पूजा ने कहा और अपनी ब्रा उतार कर फेंक दी. अब उसके उभार मोहित की नज़रो के सामने थे.

"तुम ये सब क्यों कर रही हो पूजा."

पूजा कुछ नही बोली और झट से अपनी जीन्स और पॅंटी भी उतार दी. अब वो मोहित के सामने बिल्कुल नंगी खड़ी थी. मोहित तो देखता ही रह गया उसके नागन शरीर को. इतनी सुंदर बॉडी आज तक नही देखी थी उसने.

"पूजा मेरी कुछ समझ में नही आ रहा. क्यों कर रही हो तुम ये सब. तुम बहुत अजीब बिहेव कर रही हो."

पूजा मोहित से लिपट गयी और बोली, "जल्दी से प्यास भुजा लो अपनी. फिर कभी नही मिलूंगी तुम्हे."

मोहित तो अजीब उलझन में फँस गया था. ना चाहते हुए भी उसका लिंग उत्तेजित हो गया था. पूजा को वो अपनी योनि पर महसूस हुआ. वो बैठ गयी मोहित के आगे और मोहित की ज़िप खोल कर उसके लिंग को बाहर निकाल लिया.

"ये सच में बड़ा है मोहित. रियली इट्स आ नाइस डिक."

मोहित तो भड़क ही उठा और पूजा को गोदी में उठाया और लेटा दिया बिस्तर पर. इतना उत्तेजित हो रहा था वो कि तुरंत समा जाना चाहता था पूजा के अंदर.

उसने अपने लिंग को पकड़ा और दो उंगलियों से पूजा की योनि की पंखुड़ियों को फैला कर उस पर लिंग टिकाने लगा. मगर तभी उसकी नज़र योनि के आस पास सफेद सी चीज़ पर गयी. उसने गौर से देखा तो उसे समझते देर नही लगी की वो वीर्य की बूंदे थी जो की शूख गयी थी.

मोहित ने पूजा के चेहरे पे हाथ रखा और बोला, "पूजा बताओगि कि क्या हुआ है तुम्हारे साथ."

"क्या फरक पड़ता है उस से. तुम्हारे पास टाइम कम है. अपनी प्यास बुझा लो जल्दी से. बाद में मोका नही मिलेगा तुम्हे."

"तुम यकीन करो या ना करो प्यार करता हूँ तुम्हे मैं. प्लीज़ बताओ क्या हुआ तुम्हारे साथ. कौन था वो बताओ मैं उसे जींदा नही छोड़ूँगा."

"हे...हे...हे...प्यार का नाम मत लो. प्यार ने तो मुझे रंडी बना दिया. जिसका मन होता है चढ़ जाता है मुझ पे. किसी का कसूर नही है. सब प्यार का ही दोष है. आओ ना तुम भी चढ़ जाओ भरपूर मज़ा दूँगी तुम्हे."

सुना नही गया मोहित से ये सब और उसने थप्पड़ जड़ दिया पूजा के गाल पर, "कपड़े पहनो अपने और घर जाओ अपने. मेरा प्यार ऐसा नही है जैसा तुम समझ रही हो."

मोहित बिस्तर से उतर गया. पूजा फूट -फूट कर रोने लगी. वो उठी और अपने कपड़े पहन लिए.

"मैं तुम्हे घर छोड़ आता हूँ"

"नही चली जाउन्गि खुद ही." पूजा सूबक रही थी. सुबक्ते सुबक्ते निकल गयी घर से. मोहित पीछे पीछे गया उसके ये देखने की वो घर ही जा रही है या कही और.

पूजा अपने घर आ कर बिस्तर पर गिर गयी और फूट फूट कर रोने लगी.

नगमा ने तुरंत आकर पूछा, "क्या बात है पूजा...रो क्यों रही हो"

"मुझे अकेला छ्चोड़ दो दीदी...प्लीज़." पूजा रोते हुए बोली.

मोहित भी वापिस आकर बिस्तर पर सर पकड़ कर बैठ गया. बहुत दुखी था पूजा के लिए. प्यार जो करता था उसे.

परेशान था मोहित. बहुत ही परेशान. इतना परेशान कि उसे समझ नही आ रहा था कि क्या करे और क्या ना करे. कुछ करना चाहता था वो पूजा के लिए. सोच रहा था वो बार बार कि क्या किया जाए. इसी उधेड़बुन में वो उठा और अपने कमरे का ताला लगा कर पूजा के घर की तरफ चल दिया. जब वो पूजा के घर पहुँचा तो घर का दरवाजा बंद था. उसने दरवाजा खड़काया. नगमा ने दरवाजा खोला.

"मोहित तुम! यहाँ कैसे?" नगमा ने पूछा.

"पूजा से बात करनी है मुझे, क्या मैं मिल सकता हूँ उस से"

"पूजा से बात! पूजा से तुम्हे क्या लेना देना?" नगमा हैरानी में पड़ गयी.

"मैं बहुत परेशान हूँ पहले ही, और परेशान मत करो. प्लीज़ मुझे पूजा से मिलने दो."

"तो क्या जिसे तुम प्यार करते हो वो पूजा है?" नगमा ने पूछा.

"हां"

नगमा ने गर्दन पकड़ ली मोहित की और बोली, "क्या किया तुमने मेरी बहन के साथ. जब से आई है वो रो रही है."

"काश वो मेरे कारण रो रही होती. बात कुछ और ही है. प्लीज़ मुझे मिलने दो उस से वरना मैं मर जाउन्गा." मोहित ने भावुक हो कर कहा.

"ठीक है...ठीक है, आ जाओ अंदर." नगमा ने कहा.

मोहित अंदर आ गया. नगमा उसे पूजा के पास ले आई. पूजा पेट के बाल हाथो में चेहरा छुपाए लेटी हुई थी.

"नगमा मैं अकेले में बात करना चाहता हूँ. प्लीज़ थोड़ी देर के लिए....." मोहित ने कहा.

नगमा बिना कुछ कहे वहाँ से चली गयी.

मोहित पूजा के पास बैठ गया और उसके सर पर हाथ रख कर बोला," पूजा आइ लव यू. बात करना चाहता हूँ तुमसे कुछ."

"मोहित प्लीज़ चले जाओ. मैं बात करने की हालत में नही हूँ." पूजा सुबक्ते हुए बोली.

मोहित वहाँ से उठ कर पूजा के पैरो पर सर रख कर बैठ गया और बोला, "मुझसे कोई भूल हुई हो तो मुझे माफ़ कर दो. हां शुरू शुरू में मैने तुम्हे बस एक शरीर समझा. पाना चाहता था तुम्हे. मगर कब प्यार की भावना जाग गयी मुझे भी नही पता. शायद हवस शामिल है इस प्यार में मेरे. माफी चाहता हूँ उसके लिए. तुम मुझे बदले में प्यार बेशक मत दो. लायक भी नही हूँ तुम्हारे प्यार के मैं. मगर प्लीज़ एक बार बता दो कि क्या हुआ तुम्हारे साथ और किसने किया. मैं बहुत बेचैन हूँ पूजा. जब तक नही बताओगि मैं तड़प्ता रहूँगा. प्लीज़ बताओ मुझे कौन है इन आँसुओ का कारण."

"क्यों जान-ना चाहते हो तुम. क्या करोगे जान कर. कुछ बदल नही जाएगा तुम्हे बता कर. प्लीज़ मुझे अकेला छोड़ दो."

"मैं मर जाउन्गा पूजा. नही देख सकता हूँ तुम्हे ऐसी हालत में. जब तक बताओगि नही जाउन्गा नही मैं यहाँ से."

पूजा उठ कर बैठ गयी और अपने पाँव सिकोड कर घुटनो पर सर टिका कर बोली, "कौन हो तुम मेरे जिसे सब बताउ मैं."

"प्यार करता हूँ तुम्हे मैं. इतना रिश्ता काफ़ी होना चाहिए."

"ठीक है सुनो फिर..............

कविता ने मिलाया था मुझे विक्की से. बहुत प्यार से देखता था मेरी तरफ वो. अच्छा दोस्त बन गया मेरा वो. धीरे धीरे मैं उसे चाहने लगी. मुझे नही पता था कि उसका मुझसे मिलना, दोस्ती और फिर प्यार सब एक साजिस का हिस्सा था. ये बात मुझे अब समझ आई. काश पहले समझ जाती. खूब प्यार का नाटक किया विक्की ने मेरे साथ. प्यार में पागल हो कर सब कुछ न्योछावर कर दिया मैने विक्की पर. पर मुझे क्या पता था की मेरे प्यार की वीडियो बनाई जा रही है. बहुत धक्का लगा दिल को मेरे. फिर ब्लॅकमेलिंग का गंदा खेल शुरू हुआ. मुझसे कहा गया कि तुम एक एस्कॉर्ट बन जाओ वरना ये वीडियो इंटरनेट पर डाल देंगे. बहुत विचलित रही मैं इन बातो के कारण. प्यार में ऐसा होगा सोचा नही था मैने. बहुत रेज़िस्ट किया मैने पर एक दिन मुझे एस्कॉर्ट बन कर जाना ही पड़ा............

..............................

.................................फार्म हाउस पर मेरी इज़्ज़त की वो धज्जिया उड़ाई चौहान और परवीन ने कि मैं कुछ कह नही सकती. दुख की बात ये है कि थोड़ा थोड़ा तो मैने भी एंजाय किया. यही मेरी चिंता का कारण है. बीखर गया है चरित्र मेरा. शायद मैं सच में वैश्या बन गयी हूँ."

"प्लीज़ ऐसा मत कहो. आज क्या हुआ वो बताओ."

"आज जब तुम गये तो एक पोलीस वाला आ गया वहाँ. उसने मुझे पहचान लिया. ज़बरदस्ती घर ले गया मुझे वो और.......................बस कह नही पाउन्गि."

"क्या नाम है उसका?" मोहित ने पूछा.

"उसका नाम नही पता बस इतना पता है कि वो पोलीस वाला है."

"कोई और पहचान उसकी."

"क्या करोगे जान कर?"

"वैसे ही पूछ रहा हूँ, क्या कुछ और बता सकती हो उसके बारे में."

"और तो कुछ नही पता. ओह हां पेट पर अजीब सा निसान था उसके."

"कैसा निसान?" मोहित का माता ठनका.

"लंबा सा निसान था. ज़्यादा गौर नही दिया मैने. क्या करना उस से तुम्हे... छोड़ो."

"घर की लोकेशन बता सकती हो."

पूजा ने विजय के घर में घुसते वक्त हाउस नंबर देखा था. उसने मोहित को लेकेशन और हाउस नंबर बता दिया.

"वो तो बबलू के साथ वाला घर है. इसका मतलब विजय सरिता का हज़्बेंड है." मोहित ने सोचा.

"थॅंक यू पूजा तुमने मुझे इतना कुछ बताया. आराम करो तुम अब." मोहित ने कहा.

"तुम ये सब क्यों जान-ना चाहते थे."

"ताकि तुम्हारा मन हल्का हो जाए बता कर. आराम करो तुम अब. मैं चलता हूँ." मोहित जल्दी में लग रहा था.

पूजा बैठी रही घुटनो पर सर टिकाए. मोहित ने उसके सर पर हाथ रखा और बोला, "सब ठीक हो जाएगा तुम चिंता मत करो." मोहित आ गया बाहर.

मोहित जैसे ही उस कमरे से बाहर निकला उसने नगमा को वहाँ खड़े पाया. नगमा की आँखो में आँसू थे. उसने पूजा की सारी बाते सुन ली थी. मोहित ने नगमा को गले लगाया और बोला, "न्याय होगा पूजा के साथ." और बाहर आ गया.

..............................................................

विक्की ने एक नयी लड़की फँसाई थी और उसे बर्बाद करने की तैयारी में था. धोके से उसे नासीली चीज़ खिला कर उसके साथ अपना मूह काला करने की तैयारी में था. कॅमरा सेट कर रखा था उसने. कपड़े उतार कर नंगा कर रखा था उसे और उसके अंगो से खेल रहा था.

"नशा अच्छा शॉर्टकट है हे....हे...हे. ऐसे कभी नही मानती ये." विक्की लड़की के उभारो को चूस रहा था और लड़की नशे की हालत में शिसकियाँ भर रही थी. कॅमरा में सब कुछ रेकॉर्ड हो रहा था.

"ले चूस ये लंड साली और अच्छा पोज़ दे....हे...हे...हे."

लड़की नशे की हालत में कुछ नही समझ पा रही थी. मूह खोला उसने और विक्की के लिंग को मूह में ले लिया. बहुत देर तक सक करवाया विक्की ने. फिर उसने उसकी टांगे फैलाई और समा गया लड़की में.

"आआअहह."

"जबरदस्त एस्कॉर्ट बनेगी तू. क्या एंट्री दी है मेरे लंड को."

और नशे में लड़की का बलात्कार जारी रहा.........

विक्की बेख़बर था कि उसके घर में एक नकाब पोश घुस्स गया है. वो अपने पाप में लिप्त था. नकाब पोश उसके पास आ कर खड़ा हो गया और उसे खबर भी नही हुई. नकाब पोश ने खींच लिया उसे लड़की के उपर से और ज़मीन पर पटक दिया.

"बेटा ये सब ठीक नही है." नकाब पोश ने कहा.

"क...कौन हो तुम और यहाँ क्या कर रहे हो?" विक्की घबरा गया.

"नाम में क्या रखा है, काम देखो मेरा." और टूट पड़ा नकाब पॉश विक्की पर. इतने वार हुए चाकू के कि कमरे का पूरा फार्स लाल हो गया. लड़की नशे में थी. उसे तो पता ही नही चला कि क्या हुआ.

.........................................................

परवीन फार्म हाउस पर था. 2 कॉल गर्ल्स बुला रखी थी उसने. बैठा हुआ था सोफे पर और दोनो लड़कियाँ उसका लिंग चूस रही थी.

"एक से बढ़ कर एक हो तुम दोनो क्या बात है. पहले क्यों नही मिली मुझे. कॉलेज गर्ल्स मुझे बहुत पसंद है. अब मिलते रहना."

"आप जेब ढीली करते रहना हम मिलते रहेंगे." एक लड़की ने कहा.

"पैसो की चिंता मत करो. मुझे खुस रखो बस. सब कुछ लूटा दूँगा तुम दोनो पर. चलो अब ऐसी पोज़िशन बनाओ कि मैं दोनो की एक साथ ले सकूँ."

एक लड़की पीठ के बाल बिस्तर पर लेट गयी. दूसरी भी उसके उपर पीठ के बल लेट गयी. दोनो लड़कियों की योनि एक दूसरे के उपर थी.

"वाह क्या पोज़िशन लगाई है"

परवीन ने पहले नीचे वाली की चूत में लंड डाल दिया.

"आआहह...यस."

बस 2 धक्के मार के उसने लंड बाहर खींच लिया और उपर वाली चूत में लंड डाल दिया.

"आआहह...वाउ यू आर फॅंटॅस्टिक." परवीन ने कहा.

इस तरह एक साथ परवीन 2 लड़कियों से मज़े ले रहा था. उसे अंदाज़ा भी नही था की एक नकाब पोश फार्म हाउस में घुस्स आया है और उसकी तरफ बढ़ रहा है.

"अब तुम दोनो की गान्ड भी एक साथ मारूँगा."

पहले परवीन ने उपर वाली लड़की की गान्ड में लंड डाल दिया और चार-पाँच धक्के लगा कर नीचे वाली लड़की की गान्ड में लंड घुसा दिया.

क्रमशः.........................

BAAT EK RAAT KI-- 62

gataank se aage...........

Magar kab tak bachti vo ling ke gharsan se. Der se hi sahi kamre mein uski shiskiyan gunjne lagi. Ye baat aur thi ki uski shiskiyon mein aanand ke saath saath sharam aur glaani bhi maujud thi. puja ki shiskiyan uski vyathit manosthiti ko bakhubi darsaati thi. magar vijay ko to lag raha tha ki vo aanand ke saagar mein gote laga rahi hai.

Aanand tha yoni mein ling ke gharshan ka. sharam aur glaani thi is baat ki, ki uski yoni mein gharshan karne wala uska premi nahi tha balki vo insaan tha jo ki use vaisya samajhta tha aur vaisya ke hi naate us par chadha hua tha.

"ab kuch nahi bachcha...sab khatam ho gaya...aaaahhh"

"kya kaha tune, mujhe disturb mat kar araam se fucking karne de"

puja ne kuch nahi kaha. Haan uski 2 ahsaaso mein dubi shiskiya barkaraar rahi.

Teen baar sahna pada use vijay ki hawas ko. 6 baje free kiya vijay ne puja ko. Vijay ne puja ko apne ghar se thodi dur ek market mein chhod diya. "agle hafte mere 2 dost aa rahein hain delhi se. Mil kar enjoy karenge tere saath."

puja ne kuch nahi kaha aur murjhaya chehra le kar ladkhadaate kadmo se chal padi. Ghar nahi jaana chaahti thi vo ab. Mar jaana chaahti thi kahi jaakar. Ek car ne to use uda hi diya hota. Shukar hai vakt par break lag gayi. "paagal ho gayi ho tum. Marna hai to kahi aur ja kar maro." car wala chillaya. Sadak paar kar rahi thi puja bina soche samjhe. Dhyaan hi nahi tha uska car par. Vo to bas chale ja rahi thi. Shaayad vo kahi ja kar mar hi jaati. Par kismat ko kuch aur hi manjoor tha.

Mohit gujar raha tha vahaan se. Usne puja ko aisi haalat mein gumshum bhatakte dekh liya.

"puja kaha ja rahi ho. Dekh kar bhi nahi chal rahi. Theek to ho."

"oh mohit...bahut achche vakt pe aaye tum, dekho mera tamaasa tum bhi."

"kya bol rahi ho. Chalo baitho tumhe ghar chhod deta hun."

"nahi ghar nahi jaaungi aaj. Tum jaao."

mohit ko puja ka aisa bartaav bahut ajeeb lag raha tha.

"baat kya hai puja, kuch badli badli si lag rahi ho."

"he...he...badli badli aur main. Jindagi hai chalta hai sab. Main ghar nahi jaaungi."

"baitho to sahi...jaha kahogi vahaan le chalunga." mohit ne kaha.

"oh haan ek kaam karte hain, tumhaare ghar chalein." puja ne kaha.

"chalo chalne mein koyi buraayi nahi hai...aao." mohit ne kaha.

"lekin main apne ghar nahi jaaungi pahle hi bata deti hun."

"baitho to sahi...phir dekhte hai." mohit ne kaha.

"nahi jaana hai mujhe ghar jaan lo tum." puja bolte hue baith gayi mohit ki bike par.

Puja kuch nahi boli baad mein. Mohit ne bhi kuch nahi kaha. Le aaya mohit puja ko apne ghar.

"kundi laga do mohit." puja ne kaha.

Mohit to kuch bhi nahi samajh pa raha tha. Kundi laga kar vo puja ke paas aaya jo ki bistrar ke paas khadi thi. Puja ne mohit ki aankho mein dekha aur apna top utar diya.

"ye kya kar rahi ho."

"apne aashiq ko tohfa dena chaahti hun." puja ne kaha aur apni bra utaar kar fenk di. Ab uske ubhaar mohit ki nazro ke saamne the.

"tum ye sab kyon kar rahi ho puja."

puja kuch nahi boli aur jhat se apni jeans aur panty bhi utaar di. Ab vo mohit ke saamne bilkul nangi khadi thi. Mohit to dekhta hi rah gaya uske nagan sharir ko. Itni sundar body aaj tak nahi dekhi thi usne.

"puja meri kuch samajh mein nahi aa raha. Kyon kar rahi ho tum ye sab. Tum bahut ajeeb behave kar rahi ho."

puja mohit se lipat gayi aur boli, "jaldi se pyas bhuja lo apni. Phir kabhi nahi milungi tumhe."

mohit to ajeeb uljhan mein phans gaya tha. Na chaahte hue bhi uska ling uttejit ho gaya tha. Puja ko vo apni yoni par mahsus hua. Vo baith gayi mohit ke aage aur mohit ki zip khol kar uske ling ko baahar nikaal liya.

"ye sach mein bada hai mohit. Really its a nice dick."

mohit to bhadak hi utha aur puja ko godi mein uthaaya aur leta diya bistar par. Itna uttejit ho raha tha vo ki turant sama jaana chaahta tha puja ke ander.

Usne apne ling ko pakda aur do ungliyon se puja ki yoni ki pankhudiyon ko faila kar us par ling tikaane laga. Magar tabhi uski nazar yoni ke aas paas safed si cheez par gayi. Usne gaur se dekha to use samajhte der nahi lagi ki vo virya ki bunde thi jo ki shookh gayi thi.

Mohit ne puja ke chehre pe haath rakha aur bola, "puja bataaogi ki kya hua hai tumhaare saath."

"kya farak padta hai us se. Tumhaare paas time kam hai. Apni pyas bujha lo jaldi se. baad mein moka nahi milega tumhe."

"tum yakin karo ya na karo pyar karta hun tumhe main. Please bataao kya hua tumhaare saath. Kaun tha vo bataao main use jeenda nahi chodunga."

"he...he...he...pyar ka naam mat lo. Pyar ne to mujhe randi bana diya. Jiska man hota hai chadh jaata hai mujh pe. Kisi ka kasoor nahi hai. Sab pyar ka hi dosh hai. Aao na tum bhi chadh jaao bharpur maja dungi tumhe."

suna nahi gaya mohit se ye sab aur usne thappad jad diya puja ke gaal par, "kapde pahno apne aur ghar jaao apne. Mera pyar aisa nahi hai jaisa tum samajh rahi ho."

mohit bistar se utar gaya. Puja phoot -phoot kar rone lagi. Vo uthi aur apne kapde pahan liye.

"main tumhe ghar chod aata hun"

"nahi chali jaaungi khud hi." puja subak rahi thi. Subakte subakte nikal gayi ghar se. Mohit peeche peeche gaya uske ye dekhne ki vo ghar hi ja rahi hai ya kahi aur.

Puja apne ghar aa kar bistar par gir gayi aur phoot phoot kar rone lagi.

nagma ne turant aakar pucha, "kya baat hai puja...ro kyon rahi ho"

"mujhe akela chhod do didi...please." puja rote hue boli.

Mohit bhi vaapis aakar bistar par sar pakad kar baith gaya. Bahut dukhi tha puja ke liye. Pyar jo karta tha use.

pareshaan tha mohit. Bahut hi pareshaan. Itna pareshaan ki use samajh nahi aa raha tha ki kya kare aur kya na kare. Kuch karna chaahta tha vo puja ke liye. Soch raha tha vo baar baar ki kya kiya jaaye. Isi udhedbun mein vo utha aur apne kamre ka taala laga kar puja ke ghar ki taraf chal diya. Jab vo puja ke ghar pahuncha to ghar ka darvaaja band tha. Usne darvaaja khadkaaya. Nagma ne darvaaja khola.

"mohit tum! Yahan kaise?" nagma ne pucha.

"puja se baat karni hai mujhe, kya main mil sakta hun us se"

"puja se baat! Puja se tumhe kya lena dena?" nagma hairaani mein pad gayi.

"main bahut pareshaan hun pahle hi, aur pareshaan mat karo. Please mujhe puja se milne do."

"to kya jise tum pyar karte ho vo puja hai?" nagma ne pucha.

"haan"

nagma ne gardan pakad li mohit ki aur boli, "kya kiya tumne meri bahan ke saath. Jab se aayi hai vo ro rahi hai."

"kaash vo mere kaaran ro rahi hoti. Baat kuch aur hi hai. Please mujhe milne do us se varna main mar jaaungaa." mohit ne bhaavuk ho kar kaha.

"theek hai...theek hai, aa jaao ander." nagma ne kaha.

Mohit ander aa gaya. Nagma use puja ke paas le aayi. Puja pet ke bal haatho mein chehra chupaaye leti hui thi.

"nagma main akele mein baat karna chaahta hun. Please thodi der ke liye....." mohit ne kaha.

Nagma bina kuch kahe vahaan se chali gayi.

Mohit puja ke paas baith gaya aur uske sar par haath rakh kar bola," puja i love you. Baat karna chaahta hun tumse kuch."

"mohit please chale jaao. Main baat karne ki haalat mein nahi hun." puja subakte hue boli.

Mohit vahaan se uth kar puja ke pairo par sar rakh kar baith gaya aur bola, "mujhse koyi bhool hui ho to mujhe maaf kar do. Haan shuru shuru mein maine tumhe bas ek sharir samjha. Paana chaahta tha tumhe. Magar kab pyar ki bhaavna jaag gayi mujhe bhi nahi pata. Shaayad hawas shaamil hai is pyar mein mere. Maafi chaahta hun uske liye. Tum mujhe badle mein pyar beshak mat do. Laayak bhi nahi hun tumhaare pyar ke main. Magar please ek baar bata do ki kya hua tumhaare saath aur kisne kiya. Main bahut bechain hun puja. Jab tak nahi bataaogi main tadapta rahunga. Please bataao mujhe kaun hai in aansuvo ka kaaran."

"kyon jaan-na chaahte ho tum. Kya karoge jaan kar. Kuch badal nahi jaayega tumhe bata kar. Please mujhe akela chod do."

"main mar jaaungaa puja. Nahi dekh sakta hun tumhe aisi haalat mein. Jab tak bataaogi nahi jaaungaa nahi main yahan se."

puja uth kar baith gayi aur apne paanv sikod kar ghutno par sar tika kar boli, "kaun ho tum mere jise sab bataaun main."

"pyar karta hun tumhe main. Itna rishta kaafi hona chaahiye."

"theek hai suno phir..............

Kavita ne milaaya tha mujhe vikky se. Bahut pyar se dekhta tha meri taraf vo. Achcha dost ban gaya mera vo. Dheere dheere main use chaahne lagi. Mujhe nahi pata tha ki uska mujhse milna, dosti aur phir pyar sab ek saajis ka hissa tha. Ye baat mujhe ab samajh aayi. Kaash pahle samajh jaati. Khub pyar ka naatak kiya vikky ne mere saath. Pyar mein paagal ho kar sab kuch nyochaavar kar diya maine vikky par. Par mujhe kya pata tha ki mere pyar ki video banaayi ja rahi hai. Bahut dhakka laga dil ko mere. Phir blackmailing ka ganda khel shuru hua. Mujhse kaha gaya ki tum ek escort ban jaao varna ye video internet par daal denge. Bahut vichlit rahi main in baato ke kaaran. Pyar mein aisa hoga socha nahi tha maine. Bahut resist kiya maine par ek din mujhe escort ban kar jaana hi pada............

...............................................................farm house par meri izzat ki vo dhajjiya udaaayi chouhaan aur parveen ne ki main kuch kah nahi sakti. Dukh ki baat ye hai ki thoda thoda to maine bhi enjoy kiya. Yahi meri chinta ka kaaran hai. Beekhar gaya hai charitra mera. Shaayad main sach mein vaisya ban gayi hun."

"please aisa mat kaho. Aaj kya hua vo bataao."

"aaj jab tum gaye to ek police wala aa gaya vahaan. Usne mujhe pahchaan liya. Jabardasti ghar le gaya mujhe vo aur.......................bas kah nahi paaungi."

"kya naam hai uska?" mohit ne pucha.

"uska naam nahi pata bas itna pata hai ki vo police wala hai."

"koyi aur pahchaan uski."

"kya karoge jaan kar?"

"vaise hi puch raha hun, kya kuch aur bata sakti ho uske baare mein."

"aur to kuch nahi pata. Oh haan pet par ajeeb sa nisaan tha uske."

"kaisa nisaan?" mohit ka maatha thanka.

"lamba sa nisaan tha. Jyada gaur nahi diya maine. Kya karna us se tumhe... chodo."

"ghar ki location bata sakti ho."

puja ne vijay ke ghar mein ghuste vakt house no dekha tha. Usne mohit ko lacation aur house no bata diya.

"vo to babloo ke saath wala ghar hai. Iska matlab vijay sarita ka husband hai." mohit ne socha.

"thank you puja tumne mujhe itna kuch bataaya. Araam karo tum ab." mohit ne kaha.

"tum ye sab kyon jaan-na chaahte the."

"taaki tumhaara man halka ho jaaye bata kar. Araam karo tum ab. Main chalta hun." mohit jaldi mein lag raha tha.

Puja baithi rahi ghutno par sar tikaaye. Mohit ne uske sar par haath rakha aur bola, "sab theek ho jaayega tum chinta mat karo." mohit aa gaya baahar.

Mohit jaise hi us kamre se baahar nikla usne nagma ko vahaan khade paaya. Nagma ki aankho mein aansu the. Usne puja ki saari baate sun li thi. Mohit ne nagma ko gale lagaaya aur bola, "nyay hoga puja ke saath." aur baahar aa gaya.

..............................................................

Vikky ne ek nayi ladki phansaayi thi aur use barbaad karne ki taiyaari mein tha. Dhoke se use nasili cheez khila kar uske saath apna muh kaala karne ki taiyaari mein tha. Camera set kar rakha tha usne. kapde utaar kar nanga kar rakha tha use aur uske ango se khel raha tha.

"nasha achcha shortcut hai he....he...he. Aise kabhi nahi maanti ye." vikky ladki ke ubhaaro ko choos raha tha aur ladki nashe ki haalat mein shiskiyan bhar rahi thi. Camera mein sab kuch record ho raha tha.

"le choos ye lund saali aur achcha pose de....he...he...he."

ladki nashe ki haalat mein kuch nahi samajh pa rahi thi. Muh khola usne aur vikky ke ling ko muh mein le liya. Bahut der tak suck karvaaya vikky ne. Phir usne uski taange failaayi aur sama gaya ladki mein.

"aaaaahhhhhhh."

"jabardast escort banegi tu. Kya entry di hai mere lund ko."

aur nashe mein ladki ka balaatkaar jaari raha.........

Vikky bekhabar tha ki uske ghar mein ek nakaab posh ghuss gaya hai. Vo apne paap mein lipt tha. Nakaab posh uske paas aa kar khada ho gaya aur use khabar bhi nahi hui. Nakaab posh ne kheench liya use ladki ke upar se aur jamin par patak diya.

"beta ye sab theek nahi hai." nakaab posh ne kaha.

"k...kaun ho tum aur yahan kya kar rahe ho?" vikky ghabra gaya.

"naam mein kya rakha hai, kaam dekho mera." aur tut pada nakaab posh vikky par. Itne vaar hue chaaku ke ki kamre ka pura fars laal ho gaya. Ladki nashe mein thi. Use to pata hi nahi chala ki kya hua.

.........................................................

Parveen farm house par tha. 2 call girls bula rakhi thi usne. Baitha hua tha sofe par aur dono ladkiyan uska ling choos rahi thi.

"ek se badh kar ek ho tum dono kya baat hai. Pahle kyon nahi mili mujhe. College girls mujhe bahut pasand hai. Ab milte rahna."

"aap jeb dheeli karte rahna hum milte rahenge." ek ladki ne kaha.

"paiso ki chinta mat karo. Mujhe khus rakho bas. Sab kuch luta dunga tum dono par. Chalo ab aisi position banaao ki main dono ki ek saath le sakun."

ek ladki peeth ke bal bistar par late gayi. Dusri bhi uske upar peeth ke bal late gayi. Dono ladkiyon ki yoni ek dusre ke upar thi.

"waah kya position lagaayi hai"

parveen ne pahle neeche wali ki chut mein lund daal diya.

"aaaahhhh...yes."

bas 2 dhakke maar ke usne lund baahar kheench liya aur upar wali chut mein lund daal diya.

"aaaahhhh...wow u r fantastic." parveen ne kaha.

Is tarah ek saath parveen 2 ladkiyon se maje le raha tha. Use andaaja bhi nahi tha ki ek nakaab posh farm house mein ghuss aaya hai aur uski taraf badh raha hai.

"ab tum dono ki gaanD bhi ek saath maarunga."

pahle parveen ne upar wali ladki ki gaanD mein lund daal diya aur chaar-paanch dhakke laga kar neeche wali ladki ki gaanD mein lund ghusaa diya.

Kramashah.........................


rajaarkey
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Re: बात एक रात की

Unread post by rajaarkey » 12 Dec 2014 04:25

बात एक रात की-- 63

गतान्क से आगे...........

"वाह भाई वाह एक साथ दोनो का मज़ा. बहुत खूब."

परवीन चोंक गया और पीछे मूड कर देखा. एक नकाब पोश खड़ा था पीछे.

"कौन हो तुम? ये नकाब उतार कर बात करो." परवीन ने नीचे वाली लड़की की गान्ड से लंड बाहर खींच लिया.

"मेरे नाम, और पहचान में क्या रखा है. तुम मेरा काम देखो." नकाब पोश ने एक तेज धार चाकू निकाल लिया.

परवीन के तो होश उड़ गये. लड़कियाँ भी डर गयी. उन्होने फटाफट कपड़े पहने और रफू चक्कर हो गयी वहाँ से.

"क्या चाहते हो तुम मुझसे." परवीन डरता हुआ बोला.

"मुझे कुछ नही चाहिए. इस चाकू से बात करो. ये तुम्हारे खून का प्यासा है."

परवीन ये सुनते ही भागा मगर जल्द ही नकाब पोश ने उसे दबोच लिया. और फिर चाकू की बोछार हो गयी परवीन पर. खून की नादिया बह गयी वहाँ. तड़प-तड़प कर दम तौड दिया परवीन ने.

..............................

...............................

रोहित विक्की के घर से फार्म हाउस पहुँचा.

"यहाँ भी खून की नादिया बह रही है. सर क्या ये दोनो खून साइको ने ही किए हैं." भोलू ने पूछा.

"और कौन कर सकता है. इतनी दरिंदगी सिर्फ़ वही कर सकता है" रोहित ने कहा.

"हां सर, दरिन्दा है ये साइको, इंसान नही है" भोलू ने कहा.

"इस लाश को भी पोस्ट मॉर्टेम के लिए भेज दो." रोहित ने भोलू से कहा.

"जी सर."

रोहित फार्म हाउस से सीधा थाने पहुँचता है और ए एस पी साहिबा से मिलता है. वो शालिनी को क्राइम सीन की डीटेल्स बताता है.

“क्या ये साइको का ही काम है?” शालिनी ने पूछा.

“प्रीमा फेसी तो यही लगता है. दोनो लोगो के शरीर पर बड़ी बेरहमी से वार हुए हैं चाकू के. बाकी पोस्ट-मॉर्टेम में पता चलेगा.”

“एसपी साहिब आ रहे हैं आज यहाँ, और हमारे पास फिर से कुछ भी दिखाने को नही है. तुम भी ये केस हॅंडल नही कर पा रहे हो.”

“सॉरी तो से मेडम, पर मुझे दिन ही कितने हुए हैं अभी. मुझे थोडा वक्त और दीजिए.” रोहित ने कहा.

“वक्त ही नही है हमारे पास. एसपी साहिब आएँगे तो बताओ क्या बोलूं मैं उन्हे.”

तभी शालिनी के कमरे में पीयान आया, “मेडम एसपी साहिब आए हैं.”

शालिनी फ़ौरन खड़ी हुई और कॅबिन से बाहर आई. रोहित भी उसी के साथ बाहर आ गया.

“ह्म्म, ए एस पी साहिबा क्या चल रहा है. पूरे शहर को मरवा देंगी क्या आप. कब पकड़ा जाएगा ये साइको.” एसपी ने कहा.

“हम पूरी कोशिस कर रहें हैं सर.”

“कोशिस कर रहें हैं. कैसी कोशिस है ये जिसका कोई नतीजा नही निकलता. एंपी की बेटी भी मार डाली उस दरिंदे ने. सारी डाँट मुझे खानी पड़ती है. कोई आल्टर्नेटिव नही है वरना तुम्हे उठा कर बाहर फेंक देता.” एसपी ने बड़े कठोर शब्दो में कहा.

शालिनी चुपचाप खड़ी रही. अहसास था उसे भी कि एसपी साहिब पर भी दबाव है वरना वो ऐसी बाते नही करते. उसने कुछ भी कहना सही नही समझा.

“मैं बस यही कहने आया था कि डू वॉटेवर यू कॅन. मुझे जल्द से जल्द वो साइको सलाखो के पीछे चाहिए.” एसपी ने कहा और चला गया.

शालिनी ने राहत की साँस ली और वापिस अपने कॅबिन में आ गयी. रोहित भी उसके पीछे-पीछे कॅबिन में आ गया.

“सुना तुमने रोहित. अब जाओ और कुछ करो. वरना एसपी साहिब मुझे बाहर फेंके या ना फेंके मैं तुम्हे ज़रूर फेंक दूँगी बाहर.” शालिनी ने कठोर शब्दो में कहा.

रोहित गहरी साँस लेकर बाहर आ गया. उसके माथे पर पसीने थे.

“कुछ भी हो बात घूम फिर कर मेरे सर पर ही आनी है. ये केस मैं जो हॅंडल कर रहा हूँ. उफ्फ मेडम जब डाँट-ती हैं तो जान निकाल देती हैं. कुछ करना होगा अब. ये स्कॉर्पियो कार के बारे में पता करता हूँ. ”

रोहित निकल पड़ा ब्लॅक स्कॉर्पियो कार की जाँच पड़ताल में. उसने एजेन्सी से सभी ओनर्स की लिस्ट निकलवाई. बाहर में ब्लॅक स्कॉर्पियो केवल 4 लोगो के पास थी. एक स्कॉर्पियो का ओनर था गुआराव मेहरा, वो एक बिज़्नेसमॅन था और बाहर में उसका काफ़ी नाम था. एक ब्लॅक स्कॉर्पियो आर्मी के कर्नल देवेंदर के पास थी. एक ब्लॅक स्कॉर्पियो एक लेडी के नाम थी, नाम था सिमरन. वो इcइcइ बॅंक में काम करती थी. सबसे ख़ास बात ये थी की एक ब्लॅक स्कॉर्पियो सब-इनपेक्टोर विजय के नाम भी थी.

“ विजय के पास ब्लॅक स्कॉर्पियो राज शर्मा का शक सही है शायद. इस विजय पर नज़र रखनी पड़ेगी.” रोहित ने सोचा और एजेन्सी से वापिस थाने की तरफ चल दिया.

……………………………………………………………………………………………………………………

पद्‍मिनी की तबीयत खराब हो गयी थी अचानक. बहुत तेज टेंप्रेचर था. पड़ी हुई थी बिस्तर पर. डॉक्टर को बुलाया गया था घर पर ही. क्योंकि पद्‍मिनी के डेडी पद्‍मिनी को डॉक्टर के पास नही ले जाना चाहते थे. उन्हे साइको का डर जो था.

पद्‍मिनी के दर्शन मुस्किल हो गये राज शर्मा के लिए. आखरी बार तब ही देखा था उसने पद्‍मिनी को जब इनस्पेक्टर रोहित पांडे ने आकर अपनी टाँग अड़ा दी थी . देखता रहता था बार-बार खिड़की की तरफ पर हमेशा निराशा ही हाथ लगती थी. राज शर्मा ने काई बार सोचा की जाकर तबीयत पूछ आए मगर उसकी हिम्मत नही हुई. उसे डर था की कही पद्‍मिनी बुरा मान जाए. इसलिए नही गया पूछने कुछ भी.

पद्‍मिनी मेडिसिन ले कर लेती हुई थी. खोई हुई थी किन्ही ख़यालो में. रोहित से बड़े दिनो बाद मिली थी वो इसलिए कॉलेज के दिन याद आ गये थे उसे. बार बार सोच रही थी उन दिनो को पद्‍मिनी.

“तुम अपनी शकल ना ही दिखाते मुझे तो अच्छा था. मैं तुमसे बात क्यों करूगी. दुबारा सामने मत आना मेरे. दगाबाज हो तुम.” पद्‍मिनी ने रोहित के लिए कहा.

……………………………………………………

रोहित एजेन्सी से ब्लॅक स्कॉर्पियो के ओनर्स की लिस्ट ले कर थाने की तरफ बढ़ रहा था. वो कॉलेज के सामने से निकला तो अचानक एक लड़की पर नज़र पड़ी उसकी.

“ये तो रीमा है, मिलता हूँ इस से. ट्रेन की मुलाकात के बाद बात ही नही हुई इस से.” रोहित ने सोचा.

रोहित ने जीप रोक दी कॉलेज के बाहर और रीमा को आवाज़ दी. वो अकेली ही निकल रही थी कॉलेज से. रोहित को देख कर चोंक गयी. रोहित के पास आई और बोली, “तुम पोलीस की जीप में क्या कर रहे हो.”

“तुम्हारे निक्कम्मे भैया की तरह मैं भी पोलीस वाला हूँ.”

“मेरे भैया को निकम्मा मत कहो. दिन रात ड्यूटी करते हैं वो.”

“वो तो है चलो छोड़ो…और बताओ कैसी हो. ट्रेन की उस मुलाकात के बाद तो आपने याद ही नही किया मुझे.”

“ठीक हूँ मैं. वक्त ही नही मिला. वैसे भी आपने कौन सा नंबर या पता दिया था अपना जो याद करती.”

“ऐसा है क्या, ठीक है आज अपना अड्रेस और नंबर दे देता हूँ. पर मेरे घर पर जगह नही रहती. मेरे पेरेंट्स साथ रहते हैं. एक छोटी बहन भी है ज्योति. वहाँ काम-क्रीड़ा नही की जा सकती.”

“भैया अक्सर बाहर रहते हैं मेरे. घर पर अकेली ही रहती हूँ अक्सर. आज भी अकेली हूँ. भैया देल्ही गये हुए हैं. अभी घर ही जा रही हूँ.”

“यार अभी कैसे मुमकिन होगा…मैं इस साइको के केस में उलझा हुआ हूँ.”

“पहले छोटी सी भूल में उलझे हुए थे अब साइको के केस में उलझ गये.”

“क्या करू अपनी लाइफ ही कुछ ऐसी है. पढ़ रहा हूँ छोटी सी भूल भी धीरे-धीरे टाइम की कमी रहती है.”

“मैं चलूं फिर. आपके पास तो वक्त ही नही है.” रीमा ने कहा.

रोहित ने रीमा की तरफ देखा. रीमा के होंठो पर एक सेडक्टिव मुस्कान थी.

“ऐसे मत देखिए मेरी नौकरी दिक्कत में पड़ जाएगी. कभी भी सस्पेंड हो सकता हूँ मैं.”

“मैने तो कुछ नही कहा आपसे. जनाब आप चलिए…हमें देर हो रही है.” रीमा ने मुस्कुराते हुए कहा.

“उफ्फ आप नही मानेंगी…लगता है फिर से रेल बनानी पड़ेगी आपकी. आओ बैठो आपके घर चलते हैं.” रोहित ने कहा.

“ना बाबा ना, मुझे अपनी रेल नही बनवानी है. मैं तो मज़ाक कर रही थी. मुझे कही नही जाना आपके साथ.” रीमा ने शरारती अंदाज़ में कहा.

“उफ्फ क्या अदा है आपकी. देखिए अब तो रेल बनके रहेगी आपकी. आप अब हमसे बच नही सकती. एक बार लंड हरकत में आ जाए हमारा तो हम पीछे नही हट-ते. आपने लंड खड़ा कर दिया हमारा. अब ये आपकी रेल बना कर ही बैठेगा.”

“कैसी बात करते हैं आप आपको शरम नही आती.” रीमा शर्मा कर बोली.

“उफ्फ शरमाती भी हैं आप तो. गुड…मज़ा आएगा अब. चलो बैठो जल्दी. काम-क्रीड़ा का ऐसा रूप दिखाउन्गा आपको आज कि सब कुछ भूल जाओगी.”

“आपके इरादे नेक नही लगते, आपके साथ नही जाउन्गि मैं.” रीमा ने कहा.

“अब बैठिए भी. हम तड़प रहें है और आप समझ नही रही.”

रीमा मुस्कुराते हुए जीप में बैठ जाती है. “वैसे मुझे आपसे डर लग रहा है…मगर फिर भी चल रही हूँ आपके साथ. ज़्यादा परेशान मत करना मुझे.”

“रीमा जी परेशानी में ही तो मज़ा आता है. कैसी बात करती हैं आप भी. जो परेशानी मैं दूँगा आपको वो आप जिंदगी भर याद रखेंगी.” रोहित ने रीमा की तरफ देख कर कहा.

रीमा कुछ नही बोली. बस अपने निचले होन्ट को दांतो तले दबा कर हल्का सा मुस्कुरा दी.

“उफ्फ आज तो आप शितम ढा रही हैं. रेल में कहाँ छुपा रखी थी ये जालिम अदायें आपने. मेरे लंड में तूफान खड़ा कर दिया आपने.” रोहित ने फिर से रीमा की तरफ देख कर कहा.

“सामने देख कर चलिए कही आक्सिडेंट ना हो जाए.” रीमा ने कहा.

“आक्सिडेंट तो हो ही चुका है आपके साथ. बस अब जान जानी बाकी है. घर पहुँच कर इन जालिम अदाओं से वो भी निकाल देना. उफ्फ यू आर टू हॉट”

“रहने दीजिए हर लड़की को यही बोलते होंगे आप.”

“जिसमे जो दिखता है वही बोलता हूँ मैं. आपमे जो दिखा बोल दिया. आपका घर कब आएगा?”

“बस पहुँच गये हम. अगले वाली गली से अंदर मोड़ लीजिए.”

घर में पहुँचते ही रोहित ने रीमा को बाहों में भर लिया.

“रुकिये चाय पानी तो पी लीजिए, पहली बार घर आए हैं हमारे.”

“आपके हुश्न का रस पीना है मुझे. चाय पानी मज़ा खराब करेगा.”

“आप तो बहुत बेचैन हो रहे हैं.”

“क्या आप नही हैं?”

“बिल्कुल भी नही…मुझे तो ऐसा कुछ नही हो रहा.”

“अच्छा अभी आपकी चूत में उंगली डाल कर देखता हूँ. सब क्लियर हो जाएगा. खोलिए नाडा अपना.”

“पागल नही हूँ मैं जो एक दम से नाडा खोल दूँगी अपना. क्या समझते हैं आप खुद को.” रीमा मुस्कुराते हुए बोली.

“उफ्फ अब कब तक बिजली गिराएँगी आप. चलिए आपके बेड रूम में चलते हैं.”

रोहित ने रीमा को अपनी गोदी में उठा लिया और बोला, “कहा है बेडरूम आपका. आज आपके खुद के बेडरूम में रेल बनाता हूँ आपकी.”

“ढूँढ लीजिए खुद ही. मैं आपका साथ क्यों दूं आपके मकसद में.”

“क्योंकि आपको भी अपनी रेल बनवानी है इसलिए.”

“मुझे कोई रेल नही बनवानी छोड़िए मुझे.”

रोहित ने रीमा का कमरा ढूँढ ही लिया. और उसे लाकर बिस्तर पर लेटा दिया और टूट पड़ा उस पर. उसने रीमा के होंठो को जाकड़ लिया होंठो में और दोनो के बीच बहुत ही गहरी किस हुई. किस करते करते ही रोहित ने अपने दोनो हाथ नीचे बढ़ाए और रीमा का नाडा खोल दिया. नाडा खुलते ही उसने पनटी में हाथ डाल कर रीमा की चूत में उंगली डाल दी.

“मुझसे भी ज़्यादा एग्ज़ाइटेड हो तुम तो. इतनी गीली चूत नही देखी मैने आज तक. अफ मज़ा आएगा आज बहुत.” रोहित ने कहा और रीमा के सारे कपड़े उतारने लगा.

जब रीमा पूरी तरह निर्वस्त्र हो गयी तो रोहित तो देखता ही रह गया, “रेल में नही देख पाया था ये मदहोश जवानी आपकी. आपका शरीर तो बहुत सुंदर है. कमर का कटाव उफ्फ…जालिम है जालिम. इन उभारो का तो क्या कहना. मॅग्निफिसेंट टिट्स इनडीड. तोड़ा सा घूमिएे आपकी गान्ड भी देखना चाहता हूँ मैं.”

“रहने दीजिए मुझे शरम आती है. आप ज़्यादा मत बोलिए.”

“इन्ही अदाओ पे तो मर मिटा हूँ मैं. घूमिएे ना. क्या मुझे आपकी सुंदर गान्ड के दर्शन नही करवाएँगी.” रोहित ने कहा.

रीमा घूम गयी रोहित के सामने. “अफ जैसा सोचा था उस से कही ज़्यादा कामुक गान्ड है आपकी.” रोहित ने कहा.

“आप इतना मत बोलिए. मुझे शरम आती है.” रीमा ने अपना चेहरा छुपा लिया हाथो में.

रोहित ने दोनो हाथो से रीमा की गान्ड को थाम लिया और उसे सहलाने लगा, “नाइस आंड सॉफ्ट आस चीक्स.”

रोहित ने अपने कपड़े भी उतार दिया फटाफट और चढ़ गया रीमा के उपर. उसने रीमा की गान्ड पर लंड रगड़ना शुरू कर दिया.

“क्या कर रहे हैं आप.”

“आग लगाने की कोशिस कर रहा हूँ इस गान्ड में. ये गरम हो जाएगी तो चोदा जा सकता है इसे भी.”

“नही ऐसा नही होगा कुछ भी. मैने आज तक अनल नही किया है. और करने का इरादा नही है.”

“क्या बात करती है आप भी. इतनी सुंदर गान्ड को आप लंड के सुख से दूर रखेंगी. ऐसा जुलम मत कीजिए इस बेचारी मासूम सी गान्ड पर.”

“आप कैसी बाते कर रहे हैं हटिए.”

मगर हटने की बजाए रोहित ने आगे बढ़ कर रीमा की आस चीक्स को चूमना शुरू कर दिया. रीमा सिहर उठी.

“आअहह…..मत कीजिए ऐसा.”

“क्यों कुछ-कुछ होता है क्या?”

“हां”

“दट मीन्स दिस आस डिज़र्व्स आ डिक इनसाइड. ट्रस्ट मी यू विल लाइक इट. चलिए आज आपकी गान्ड को भी काम-क्रीड़ा का आनंद दे दिया जाए.”

क्रमशः.........................

BAAT EK RAAT KI-- 63

gataank se aage...........

"waah bhai waah ek saath dono ka maja. Bahut khub."

parveen chonk gaya aur peeche mud kar dekha. Ek nakaab posh khada tha peeche.

"kaun ho tum? Ye nakaab utaar kar baat karo." parveen ne neeche wali ladki ki gaanD se lund baahar kheench liya.

"mere naam, aur pahchaan mein kya rakha hai. Tum mera kaam dekho." nakaab posh ne ek tej dhaar chaaku nikaal liya.

Parveen ke to hosh ud gaye. Ladkiyan bhi dar gayi. Unhone fatafat kapde pahne aur rafoo chakkar ho gayi vahaan se.

"kya chaahte ho tum mujhse." parveen darta hua bola.

"mujhe kuch nahi chaahiye. Is chaaku se baat karo. Ye tumhaare khun ka pyasa hai."

parveen ye sunte hi bhaaga magar jald hi nakaab posh ne use daboch liya. Aur phir chaaku ki bochhaar ho gayi parveen par. Khun ki nadiya bah gayi vahaan. Tadap-tadap kar dam taud diya parveen ne.

.............................................................

Rohit vikky ke ghar se farm house pahuncha.

"yahan bhi khun ki nadiya bah rahi hai. Sir kya ye dono khun psycho ne hi kiye hain." bholu ne pucha.

"aur kaun kar sakta hai. Itni darindagi sirf vahi kar sakta hai" rohit ne kaha.

"haan sir, darinda hai ye psycho, insaan nahi hai" bholu ne kaha.

"is laash ko bhi post mortem ke liye bhej do." rohit ne bholu se kaha.

"ji sir."

Rohit farm house se seedha thaane pahunchta hai aur A S P saahiba se milta hai. vo shalini ko crime scene ki details bataata hai.

“kya ye psycho ka hi kaam hai?” shalini ne pucha.

“prima facie to yahi lagta hai. dono logo ke sharir par badi berahmi se vaar hue hain chaaku ke. Baaki post-mortem mein pata chalega.”

“SP saahib aa rahe hain aaj yahan, aur hamaare paas phir se kuch bhi dikhane ko nahi hai. tum bhi ye case handle nahi kar pa rahe ho.”

“sorry to say madam, par mujhe din hi kitne hue hain abhi. Mujhe thoda vakt aur dijiye.” Rohit ne kaha.

“vakt hi nahi hai hamaare paas. SP saahib aayenge to bataao kya bolun main unhe.”

Tabhi shalini ke kamre mein peon aaya, “madam SP saahib aaye hain.”

Shalini fauran khadi hui aur cabin se baahar aayi. Rohit bhi usi ke saath baahar aa gaya.

“hmm, A S P saahiba kya chal raha hai. purey baahar ko marva dengi kya aap. Kab pakda jaayega ye psycho.” SP ne kaha.

“hum puri koshis kar rahein hain sir.”

“koshis kar rahein hain. Kaisi koshis hai ye jiska koyi natija nahi nikalta. Mp ki beti bhi maar daali us darinde ne. saari daant mujhe khaani padti hai. koyi alternative nahi hai varna tumhe utha kar baahar fenk deta.” SP ne bade kathor shabdo mein kaha.

Shalini chupchaap khadi rahi. Ahsaas tha use bhi ki SP saahib par bhi dabaav hai varna vo aisi baate nahi karte. Usne kuch bhi kahna sahi nahi samjha.

“main bas yahi kahne aaya tha ki do whatever you can. Mujhe jald se jald vo psycho salaakho ke peeche chaahiye.” SP ne kaha aur chala gaya.

Shalini ne raahat ki saans li aur vaapis apne cabin mein aa gayi. Rohit bhi uske peeche-peeche cabin mein aa gaya.

“suna tumne rohit. Ab jaao aur kuch karo. Varna SP saahib mujhe baahar febke ya na fenke main tumhe jaroor fenk dungi baahar.” Shalini ne kathor shabdo mein kaha.

Rohit gahri saans lekar baahar aa gaya. uske maathe par pasine the.

“kuch bhi ho baat ghum phir kar mere sar par hi aani hai. ye case main jo handle kar raha hun. Uff madam jab daant-ti hain to jaan nikaal deti hain. Kuch karna hoga ab. Ye scorpio car ke baare mein pata karta hun. ”

Rohit nikal pada black scorpio car ki jaanch padtaal mein. Usne agency se sabhi owners ki list nikalwayi. Baahar mein black scorpio keval 4 logo ke paas thi. ek scorpio ka owner tha guarav mehra, vo ek businessman tha aur baahar mein uska kaafi naam tha. ek black scorpio army ke colonel devender ke paas thi. ek black scorpio ek lady ke naam thi, naam tha simran. Vo icici bank mein kaam karti thi. sabse khaas baat ye thi ki ek black scorpio sub-inpector vijay ke naam bhi thi.

“ vijay ke paas black scorpio Raj sharma ka shak sahi hai shaayad. Is vijay par najar rakhni padegi.” Rohit ne socha aur agency se vaapis thaane ki taraf chal diya.

……………………………………………………………………………………………………………………

Padmini ki tabiyat kharaab ho gayi thi achaanak. Bahut tej temprature tha. padi hui thi bistar par. Doctor ko bulaaya gaya tha ghar par hi. Kyonki padmini ke dady padmini ko doctor ke paas nahi le jaana chaahte the. Unhe psycho ka dar jo tha.

Padmini ke darshan muskil ho gaye Raj sharma ke liye. Aakhri baar tab hi dekha tha usne padmini ko jab inspector rohit panday ne aakar apni taang ada di thi . Dekhta rahta tha baar-baar khidki ki taraf par hamesha niraasa hi haath lagti thi. Raj sharma ne kayi baar socha ki jaakar tabiyat puch aaye magar uski himmat nahi hui. Use dar tha ki kahi padmini bura maan jaaye. Isliye nahi gaya puchne kuch bhi.

Padmini medicine le kar leti hui thi. khoyi hui thi kinhi khayaalo mein. Rohit se bade dino baad mili thi vo isliye college ke din yaad aa gaye the use. Baar baar soch rahi thi un dino ko padmini.

“tum apni shakal na hi dikhate mujhe to achcha tha. main tumse baat kyon karoogi. Dubaara saamne mat aana mere. Dagaabaj ho tum.” padmini ne rohit ke liye kaha.

……………………………………………………

Rohit agency se black scorpio ke owners ki list le kar thaane ki taraf badh raha tha. vo college ke saamne se nikla to achaanak ek ladki par najar padi uski.

“ye to reema hai, milta hun is se. train ki mulaakat ke baad baat hi nahi hui is se.” rohit ne socha.

Rohit ne jeep rok di college ke baahar aur reema ko awaaj di. vo akeli hi nikal rahi thi college se. rohit ko dekh kar chonk gayi. Rohit ke paas aayi aur boli, “tum police ki jeep mein kya kar rahe ho.”

“tumhaare nikkamme bhaiya ki tarah main bhi police wala hun.”

“mere bhaiya ko nikkamma mat kaho. Din raat duty karte hain vo.”

“vo to hai chalo chodo…aur bataao kaisi ho. Train ki us mulaakat ke baad to aapne yaad hi nahi kiya mujhe.”

“theek hun main. Vakt hi nahi mila. Vaise bhi aapne kaun sa number ya pata diya tha apna jo yaad karti.”

“aisa hai kya, theek hai aaj apna address aur number de deta hun. Par mere ghar par jagah nahi rahti. Mere parents saath rahte hain. Ek choti bahan bhi hai jyoti. Vahaan kaam-krida nahi ki ja sakti.”

“bhaiya aksar baahar rahte hain mere. Ghar par akeli hi rahti hun aksar. Aaj bhi akeli hun. Bhaiya delhi gaye hue hain. Abhi ghar hi ja rahi hun.”

“yaar abhi kaise mumkin hoga…main is psycho ke case mein uljha hua hun.”

“pahle choti si bhool mein uljhe hue the ab psycho ke case mein ulajh gaye.”

“kya karoo apni life hi kuch aisi hai. padh raha hun choti si bhool bhi dheere-dheere time ki kami rahti hai.”

“main chalun phir. Aapke paas to vakt hi nahi hai.” reema ne kaha.

Rohit ne reema ki taraf dekha. Reema ke hontho par ek seductive muskaan thi.

“aise mat dekhiye meri naukri dikkat mein pad jaayegi. Kabhi bhi suspend ho sakta hun main.”

“maine to kuch nahi kaha aapse. Janaab aap chaliye…hamein der ho rahi hai.” reema ne muskuraate hue kaha.

“uff aap nahi maanengi…lagta hai phir se rail banaani padegi aapki. Aao baitho aapke ghar chalte hain.” Rohit ne kaha.

“na baba na, mujhe apni rail nahi banvaani hai. main to majaak kar rahi thi. mujhe kahi nahi jaana aapke saath.” Reema ne sharaarti andaaz mein kaha.

“uff kya ada hai aapki. Dekhiye ab to rail banke rahegi aapki. Aap ab hamse bach nahi sakti. Ek baar lund harkat mein aa jaaye hamaara to hum peeche nahi hat-te. Aapne lund khada kar diya hamaara. ab ye aapki rail bana kar hi baithega.”

“kaisi baat karte hain aap aapko sharam nahi aati.” Reema sharma kar boli.

“uff sharmaati bhi hain aapto. Good…maja aayega ab. Chalo baitho jaldi. Kaam-krida ka aisa roop dikhaunga aapko aaj ki sab kuch bhul jaaogi.”

“aapke iraade nek nahi lagte, aapke saath nahi jaaungi main.” Reema ne kaha.

“ab baithiye bhi. Hum tadap rahein hai aur aap samajh nahi rahi.”

Reema muskuraate hue jeep mein baith jaati hai. “vaise mujhe aapse dar lag raha hai…magar phir bhi chal rahi hun aapke saath. Jyada pareshaan mat karna mujhe.”

“reema ji pareshaani mein hi to maja aata hai. kaisi baat karti hain aap bhi. Jo pareshaani main dunga aapko vo aap jindagi bhar yaad rakhengi.” Rohit ne reema ki taraf dekh kar kaha.

Reema kuch nahi boli. Bas apne nichle hont ko daanto tale daba kar halka sa muskura di.

“uff aaj to aap shitam dha rahi hain. Rail mein kaha chupa rakhi thi ye jaalim adaayein aapne. Mere lund mein toofan khada kar diya aapne.” Rohit ne phir se reema ki taraf dekh kar kaha.

“saamne dekh kar chaliye kahi accident na ho jaaye.” Reema ne kaha.

“accident to ho hi chuka hai aapke saath. Bas ab jaan jaani baaki hai. ghar pahunch kar in jaalim adaaon se vo bhi nikaal dena. Uff you are too hot”

“rahne dijiye har ladki ko yahi bolte honge aap.”

“jisme jo dikhta hai vahi bolta hun main. Aapme jo dikha bol diya. Aapka ghar kab aayega?”

“bas pahunch gaye hum. Agle wali gali se ander mod lijiye.”

Ghar mein pahunchte hi rohit ne reema ko baahon mein bhar liya.

“rukiye chaay paani to pee lijiye, pahli baar ghar aaye hain hamaare.”

“aapke husan ka ras peena hai mujhe. Chaay paani maja kharaab karega.”

“aap to bahut bechain ho rahe hain.”

“kya aap nahi hain?”

“bilkul bhi nahi…mujhe to aisa kuch nahi ho raha.”

“achcha abhi aapki chut mein ungli daal kar dekhta hun. Sab clear ho jaayega. Kholiye naada apna.”

“paagal nahi hun main jo ek dam se naada khol dungi apna. Kya samajhte hain aap khud ko.” Reema muskuraate hue boli.

“uff ab kab tak bijali giraayengi aap. Chaliye aapke bed room mein chalte hain.”

Rohit ne reema ko apni godie mein utha liya aur bola, “kaha hai bedroom aapka. Aaj aapke khud ke bedroom mein rail banaata hun aapki.”

“dhundh lijiye khud hi. Main aapka saath kyon dun aapke maksad mein.”

“kyonki aapko bhi apni rail banvaani hai isliye.”

“mujhe koyi rail nahi banvaani chodiye mujhe.”

Rohit ne reema ka kamra dhundh hi liya. Aur use laakar bistar par leta diya aur tut pada us par. Usne reema ke hontho ko jakad liya hontho mein aur dono ke beech bahut hi gahri kiss hui. Kiss karte karte hi rohit ne apne dono haath neeche badhaaye aur reema ka naada khol diya. Naada khulte hi usne panty mein haath daal kar reema ki chut mein ungli daal di.

“mujhse bhi jyada excited ho tum to. Itni gili chut nahi dekhi maine aaj tak. Uff maja aayega aaj bahut.” Rohit ne kaha aur reema ke saare kapde utaarne laga.

Jab reema puri tarah nirvastra ho gayi to rohit to dekhta hi rah gaya, “rail mein nahi dekh paaya tha ye madhosh jawaani aapki. Aapka sharir to bahut sundar hai. kamar ka kataav uff…jaalim hai jaalim. In ubhaaro ka to kya kahna. Magnificent tits indeed. Thoda sa ghumiye aapki gaanD bhi dekhna chaahta hun main.”

“rahne dijiye mujhe sharam aati hai. aap jyada mat boliye.”

“inhi adaao pe to mar mita hun main. Ghumiye na. kya mujhe aapki sundar gaanD ke darshan nahi karvaayengi.” Rohit ne kaha.

Reema ghum gayi rohit ke saamne. “uff jaisa socha tha us se kahi jyada kaamuk gaanD hai aapki.” Rohit ne kaha.

“aap itna mat boliye. Mujhe sharam aati hai.” reema ne apna chehra chupa liya haatho mein.

rohit ne dono haatho se reema ki gaanD ko thaam liya aur use sahlaane laga, “nice and soft ass cheeks.”

Rohit ne apne kapde bhi utaar diya fataafat aur chadh gaya reema ke upar. Usne reema ki gaanD par lund ragadna shuru kar diya.

“kya kar rahe hain aap.”

“aag lagaane ki koshis kar raha hun is gaanD mein. Ye garam ho jaayegi to choda ja sakta hai ise bhi.”

“nahi aisa nahi hoga kuch bhi. Maine aaj tak anal nahi kiya hai. aur karne ka iraada nahi hai.”

“kya baat karti hai aap bhi. Itni sundar gaanD ko aap lund ke sukh se dur rakhengi. Aisa julam mat kijiye is bechaari maasum si gaanD par.”

“aap kaisi baate kar rahe hain hatiye.”

Magar hatne ki bajaaye rohit ne aage badh kar reema ki ass cheeks ko chumna shuru kar diya. Reema sihar uthi.

“aaahhh…..mat kijiye aisa.”

“kyon kuch-kuch hota hai kya?”

“haan”

“that means this ass deserves a dick inside. Trust me you will like it. Chaliye aaj aapki gaanD ko bhi kaam-krida ka aanand de diya jaaye.”

Kramashah.........................