दामिनी compleet

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rajaarkey
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Re: दामिनी

Unread post by rajaarkey » 08 Dec 2014 04:19

दामिनी--10

गतान्क से आगे…………………..

अब भैया की हिम्मत कुछ बढ़ी उन्होने मम्मी को बड़े प्यार से अपनी ओर खींचते हुए कहा

"मोम मेरी सब से बड़ी गर्ल फ्रेंड तो आप हो ... आप के सामने मुझे कोई और जाँचती ही नहीं ..." और हँसने लगे

मम्मी ने अपने को छुड़ाते हुए कहा

" बस बस अब बहुत हो गया ..ये आज कल के बच्चे ... बेटी अपने बाप को बॉय फ्रेंड बोलती है और ये बेटा है मुझे ही गर्ल फ्रेंड बना रहा है ... " और वो मुस्कुराते हुए किचन की ओर चल पडी ..पर साफ ज़हीर था अंदर ही अंदर अपनी तारीफ सुन उनके मन में भी लड्डू फूट रहे थे.

"ह्म्‍म्म्मम..भैया कुछ बात समझ में आई..?? " मैने उन्हें आँख मारते हुए कहा .

"कुछ , कुछ .." उन्होने हंसते हुए कहा.

"हाँ भैया ...आइ आम शुवर मम्मी की चूत भी आपकी बातों से गीली हो गयी है.."

और हम दोनों जोरों से हँसने लगे..

उस दिन शाम को चाइ पे हम सभी थे..ऐसा कोयिन्सिडेन्स कभी कभी होता था ... कभी भैया गायब तो कभी पापा ....हँसी मज़ाक चल रही थी ...के पापा ने बातया उन्हें अगले दिन ही टूर पर जाना है...

मम्मी का चेहरा उतर गया ...भैया की बाँछें खिल गयीं ..उन्होने मेरी ओर देख मुस्कुरा दिया ...

"आरीए आरीई ओओह मम्मी ....आप उदास क्यूँ हो गयीं... पापा कोई हमेशा के लिए थोड़ी जा रहें हैं ...और हम सब तो हैं ना आप के साथ ...मेरी भी एक्सट्रा क्लासस अब ख़त्म होनेवाले हैं ..मैं जल्दी आ जाया करूँगा ... मम्मी आप उदास मत हों ..प्ल्ज़्ज़ ... " उन्होने मम्मी के कंधों को दबाते हुए कहा ..

"वाह ..वाह ..बेटा है आख़िर मेरा ..देख कम्मो कितना प्यार है इसे तुझ से..तेरी कितनी चीन्ता है.... हाँ बेटा अभी ..तू अपनी मम्मी का पूरा ख़याल रखना ..देखना इन्हें कोई तकलीफ़ नहीं होनी चाहिए... " पापा ने बड़े फक्र से कहा .

"अरे हाँ पापा ..यू डॉन'त वरी ...आप बेफिक्र रहो ..मैं मम्मी का पूरा ख़याल रखूँगा और दामिनी भी तो है ना साथ..क्यूँ दामिनी है ना..???"

"बिल्कुल भैया ..हम साथ साथ है ..... " और हमारी आँखें चमक रही थी एक दूसरे को देख .... !

और उस रात जब मम्मी और पापा अपने रूम में गुड - बाइ चुदाई कर रहे थे , भैया ने पापा के जाने की खुशी में मुझे ही मम्मी समझ खूब मस्ती में चोदा ..खूब प्यार से ...वह अपना लौडा मेरी चूत में डाले पड़े रहते और हम बातें करते ,,बीच बीच में हल्के हल्के पुश लगाते रहते .... मैं भी बातें करते करते उनके होंठ चूस लेती ...उनके सीने में हाथ फिराती ...उनकी निपल्स उंगलियों से सहलाती ....और बातें भी करते ..हमें कोई जल्दी नहीं थी ...कोई टेन्षन नहीं था ...

"दामिनी ..."उन्होने अपना लौडा मेरी चूत में घूमाते हुए कहा ..अंदर ही था ...उनकी चूतड़ गोल गोल घूम रही थी ....

"उईईईई...अया ...हाँ भैया बोलो ना ..."

उन्होने मेरे गाल पर हाथ फिराते हुए कहा " अगर मम्मी राज़ी नहीं हुई तो....??" उन्होने अपने लौडे का अंदर घिसना बंद कर पूछा..

"भैया ..प्ल्ज़्ज़ घिसते रहो ना ..अच्छा लग रहा है.....मानेंगी कैसे नहीं मेरे भोले भैया ...उनकी चूत भी फड़फदा रही हैं ना तुम्हारे जैसे जवान और कड़क लंड के लिए..."

उन्होने घिसाई फिर से शुरू कर दी ..अब भैया भी एक्सपर्ट हो रहे थे और हम दोनों का एक बहुत ही अच्छा अंडरस्टॅंडिंग बनता जा रहा था चुदाई का....हम दोनों को एक दूसरे की इच्छाओं का पता चल जाता ..

"पर बहना ये तुम कैसे कह सकती हो ...?"

"अरे बाबा भैया तुम उनकी आँखें देखते नहीं..?? कैसे चमक उठती हैं ..? और चाल कैसी मदमस्त हो जाती हैं ...और होंठों पे कैसी सेक्सी मुस्कुराहट आ जाती है ..?? और भैया अब तो आप भी सेडक्षन में एक्सपर्ट हो ...देखना ना तुम्हारा लौडा जाते ही मम्मी कैसी पागल हो जाती हैं ..कैसे उनकी चूत से पानी की नदी बहती है ..."

ये बात सुनते ही शायद भैया काफ़ी एग्ज़ाइटेड हो गये ..उनका लौडा मेरी चूत के अंदर ही और कड़ा हो गया , और लंबा हो गया..मुझे लगा जैसे कोई साँप अंदर ही अंदर बढ़ता जा रहा है ..मेरे बदन में झूरजूरी हो रही थी ..

भैया ने भी मुझे मेरी चुटडो को अपनी हथेलियों से जकड़ते हुए अपनी ओर खिचा और लौडा पूरा बाहर निकाला और एक झट्के में अंदर पेल दिया ..फतच की आवाज़ हुई और अंदर का अब तक का जमा पानी उनके लौडे और मेरी चूत की दीवार के बीच से बाहर पिचकारी की तरह उनकी जांघों पर पड़ा ...

भैया ने मुझे चूम लिया और होंठ चूसते हुए कहा ..."दामिनी तेरी चूत कितनी गीली रहती है बहना ...आह्ह्ह्ह मुझे इतना अच्छा लगता है तेरी चूत के अंदर ..मन करता ही हमेशा अंदर डाले पड़ा रहूं .."

'हाँ भैया तुम्हारा लंड भी कितना कड़क है ..बस मुझे भी मन करता है इसे अपनी चूत में डाले रहूं ...ऊवू भैया ...उईईईईई ....अया ..हाँ ऐसे ही धक्का लगाओ ना ...और ज़ोर से .....अया ..हाँ ...बस ऐसे ही मम्मी को भी चोद्ना ...मेरे राजा भैया ...हाआँ ....अया .."

और भैया मेरी चूतड़ उठा उठा कर अपना कड़क लौडा पेले जाते ..मैं कराह उठती ...सीसक उठती हर धक्के में ...अब हर धक्का मुझे मस्ती और मदहोशी की नयी उँचाइयों की ओर ले जाता ...

हम दोनों मदहोशी की लहर में झूम रहे थे ...

"दामिनी तुम कितने प्यार से चुद्ति हो....मम्मी भी इतने प्यार से चुदेन्गि ना बहना ..?? "

"हाँ भैया तुम देखना ना वो कितना प्यार देंगी तुम को ..भैया तुम जब उनको चोद्ना ना तो दरवाज़ा खुला रखना मैं तुम दोनो की चुदाई देखूँगी ...अपनी आँखों से .....आ कितना मज़ा आएगा ना भैया ..उनकी फूली फूली चूत ..मुलायम चूत तुम्हारे स्टील रोड से चुदेन्गि ....आ भैया तुम उन्हें रौंद देना ...हाँ मेरे राजा भैया .......ऊऊओ ....आआआः भैया ..भैया ..उफफफफफ्फ़ ..आज तुम्हें क्या हो गया है ..कैसे धक्के पे धक्का लगा रहे हो .......अयाया ..हाँ मेरे राजा ...बस चोद्ते जाओ .....पेलते जाओ ..."

मेरी बात सुन सुन उनका धक्का ज़ोर और ज़ोर पकड़ता जाता .वो पागलों की तरह मुझे चोदे जा रहे .

"हाँ बहना .... हाँ मैं उन्हें भी ऐसे ही चोदून्गा ....बिल्कुल ऐसे ही..मेरे हर धक्के में उनकी चूत फैलेगी और रस की पिचकारी निकलेगी ....ऊह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह दामिनी .."

और मैने महसूस किया उनका लौडा मेरी चूत में और कड़ा और लंबा होता जा रहा था ....ओए मेरी चूत की गहराइयों में घुसता जा रहा था..उन गहराइयों में जो आज तक अनछुई थी ..मैं कांप रही थी ..मेरी जाँघ थर थारा रही थी ....मैं एक अजीब ही मदहोशी में थी ..जैसे आज भी मेरी पहली चुदाई हो..मैं उनके हर धक्के में निहाल हो रही थी ...

"हाँ हाँ ..भैया ..मम्मी की चूत रौंद देना तुम अपने स्टील रोड से .. उनकी फूली फूली चूत ..मुलायम चूत , रस से भरी चूत ....चोद चोद कर उनका पूरा पानी निकाल देना ..ऊवू ...उईईईईईईईईईई ..ओह्ह गॉड ..हाँ भैया बस ऐसे ही ....हााईयईई ....." उनके हर धक्के में आज एक अजीब पागलपन था मम्मी की बात से वह और भी एग्ज़ाइटेड हो गये थे और मुझे चोद्ते जा रहे थे .....ज़ोर से और ज़ोर से ..मेरे चूतड़ थामे ..उपर उठा उठा के धक्का लगाते ..हर धक्के में मैं चीहूंक उठती ..कराह उठती ..मेरी चूत रब्बर की तरह फैलती जा रही थी ....

उनका धक्का इतना जोरदार था के उनके लौडे और मेरी चूत की दीवारों के बीच से मेरे रस की पिचकारी छूट रही थी ..इतना मोटा हो गया था उनका लंड ....

मैं अपनी चूतड़ उछाल उछाल कर उनका लौडा अंदर ले रही थी ....और फिर

"आआआआआआआआआह दामिनी.....आआआआः ........ऊऊऊऊऊऊओ..हाईईईई करते हुए भैया ने मुझे जाकड़ लिया ..." और मैने अपने अंदर पिघले लावा की पिचकारी महसूस की..अया गरम तो था पर अंदर इसकी गर्मी से मैं सिहर उठी ..मेरा पूरा बदन झन झना गया ...मैं कांप उठी ....और मैं भी अपने आप को रोक नहीं सकी और साथ ही झड़ती गयी / और चूतड़ उछाल उछाल कर ..दोनों एक दूसरे के बाहों में झाड़ रहे थे , हिचकोले ले रहे थे ..एक बार ..दो बार ,बार बार बार ..झट्के पे झटका .....थोड़ी देर बाद सब कुछ शांत था ..शीतल था ....जैसे दोनों के अंदर का तूफान , अंदर की ज्वालामुखी एक दूसरे में फूट कर शांत हो गया ..

सुख और मस्ती की चरम सीमा थी ... हम दोनों एक दूसरे की बाहों में थे ...एक दूसरे को महसूस कर रहे थे ....उनका लौडा मेरी चूत में था सिकुडा हुआ ..पर अंदर ..हम दोनों ऐसे ही पड़े रहे काफ़ी देर ..

भैया की सांस जब नॉर्मल हुई वे वैसे ही पड़े रहे मेरे पर और मुझे चूमने लगे ..मेरी आँखें खुली ..मैं मुस्कुराते हुए उन्हें देख रही थी ..मैने उन्हें अपनी तरफ खींच लिया अपने सीने से चिपका लिया ..और अपनी चूची अपने हाथों से उनके मुँह में डाल दिया ..भैया उन्हें चूस रहे थे ...मैं उन्हें अपनी चूची पीला रही थे ,उन्हें निहारे जा रही थी ....

भाई -बहेन का ये प्यार बड़ा ही सम्पूर्न प्यार है .... हर तरह से परिपूर्न ... कोई बंधन नहीं ..कोई सीमा नहीं .... हम दोनों इस असीम प्यार में खोए थे ..और उनके चूची चूसने से मैं भी आनंद विभोर हो उठती .....और फिर ऐसे ही चूस्ते चूस्ते वो मेरे सीने में सर रखे और मैं अपनी बाहें उनके गर्दन के गिर्द डाले , कब हमारी आँखें लग गयीं पता नहीं..हम दोनों एक दूसरे की बाहों में सो रहे थे ..नंगे ....उनका लौडा मेरी चूत में ...हर अंग एक दूसरे से लिपटा था ....

सुबह जब मेरी नींद खुली तो देखा हम दोनों वैसे ही एक दूसरे से चिपके सो रहे थे ..एक दूसरे की बाहों में ..भैया की सीकूडी लंड मेरी चूत के मुँह से लगी थी ...उसमें वीर्य और मेरे रस की पपडि जमी थे... और उनका च्चेहरा मेरे सीने से लगा था ...

मैने उन्हें जगाया "भैया उठो ..जल्दी उठो ..अरे बाबा मम्मी कभी भी आपके रूमे में आ सकती हैं ..आप को चाई देने ...उठो जल्दी करो...."

भैया अंगडायाँ लेते हुए उठे और बड़बड़ाने लगे.."ये क्या दामिनी ..चैन से सोने भी नहीं देती ..कितना हसीन सपना था ....अयाया मैं मम्मी को चोद रहा था....."

"ही ही ही...."मैं हंस पडि ..."अरे भैया ..जल्दी जाओ अपने रूम..वरना अभी जब हक़ीक़त में आप को मम्मी दिखाएँगी ना ..तो उनका रूप उतना हसीन नहीं होगा ...."

" हाँ यार बात तो सही है ...." वो बौखलाते हुए उठे ..और जाने लगे ...

मैं और जोरों से हंस पडि ...." अरे भोले भैया ..अपने कपड़े तो पहनते जाओ....""

फिर जल्दी जल्दी उन्होने अपनी शॉर्ट्स टाँगों के बीच डालते हुए मेरी ओर बड़े प्यार से देखा और बाहर निकल गये..

क्रमशः……………………..


rajaarkey
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Re: दामिनी

Unread post by rajaarkey » 08 Dec 2014 04:22

Daamini--10

gataank se aage…………………..
Ab Bhaiyaa ki himmat kuch badhi unhone MAMMI ko bade pyaar se apni or kheenchte hue kaha

"Mom meri sab se badi girl friend to aap ho ... aap ke samne mujhe koi aur janchti hi nahin ..." aur hansne lage

MAMMI ne apne ko chhoodate hue kaha

" Bas bas ab bahut ho gaya ..ye aaj kal ke bachhe ... beti apne baap ko boy friend bolti hai aur ye beta hai mujhe hi girl friend bana raha hai ... " Aur wo muskurate hue kitchen ki or chal paDee ..par saf zaheer tha andar hi andar apni tarif sun unke man mein bhi laddoo phoot rahe THE.


"Hmmmmm..Bhaiyaa kuch bat samajh mein aayi..?? " Maine unhein ankh marte hue kaha .

"Kuch , kuch .." Unhone hanste hue kaha.

"Han Bhaiyaa ...I am sure MAMMI ki choot bhi aapki baton se geeli ho gayi hai.."

Aur hum donon joron se hansne lage..

Us din sham ko chai pe hum sabhi THE..aisa coincidence kabhi kabhi hota tha ... kabhi Bhaiyaa gayab to kabhi Papa ....hansi majak chal rahee thee ...ke Papa ne baataya unhein agle din hi tour par jana hai...


MAMMI ka chehra utar gaya ...Bhaiyaa ki banchein kheel gayin ..unhone meri or dekh muskura diya ...

"Areee areeee OOh MAMMI ....aap udas kyoon ho gayeen... Papa koi hamesha ke liye thodi ja rahein hain ...aur hum sab to hain na aap ke saath ...meri bhi extra classes ab khatm honewale hain ..main jaldi a jaya karoonga ... MAMMI aap udas mat hon ..plzz ... " Unhone MAMMI ke kandhon ko dabate hue kaha ..

"Wah ..wah ..beta hai aakhir mera ..Dekh Kammo kitna pyaar hai ise tujh se..teri kitni cheenta hai.... han beta Abhi ..tu apni MAMMI ka poora khayal rakhna ..dekhna inhein koi taklif nahin honi chahiye... " Papa ne bade fakra se kaha .

"Are han Papa ..you don't worry ...aap carefree raho ..main MAMMI ka poora khayal rakhoonga aur Daamini bhi to hai na saath..kyoon Daamini hai na..???"

"Bilkul Bhaiyaa ..hum saath saath hai ..... " Aur hamari ankhein chamak rahee thi ek doosre ko dekh .... !


Aur us raat jab MAMMI Aur Papa apne room mein good - bye chudaai kar rahe the , Bhaiyaa ne Papa ke jane ki khushi mein mujhe hi MAMMI samajh khoob masti mein choda ..khoob pyaar se ...weh apna lauDa meri choot mein Daale paDe rehte aur hum batein karte ,,beech beech mein halke halke push lagate rehte .... main bhi batein karte karte unke honth choos leti ...unke seene mein haath pheerati ...unki nipples ungliyon se sehlati ....aur batein bhi karte ..hamein koi jaldi nahin thee ...koi tension nahin tha ...

"Daamini ..."unhone apna lauDa meri choot mein ghoomate hue kaha ..andar hi tha ...unki chuTaD gol gol ghoom rahee thee ....

"Uiiiiii...aaah ...han Bhaiyaa bolo na ..."

Unhone mere gal par haath phirate hue kaha " agar MAMMI raji nahin huiin to....??" Unhone apne louDe ka andar ghisna band kar poocha..

"Bhaiyaa ..plzz ghiste raho na ..achha lag raha hai.....manengi kaise nahin mere bhole Bhaiyaa ...unki choot bhi phadphada rahee hain na tumhare jaise jawan aur kadak lund ke liye..."

Unhone ghisai phir se shuru kar di ..ab Bhaiyaa bhi expert ho rahe THE aur hum donon ka ek bahut hi achha understanding banta ja raha tha chudaai ka....hum donon ko ek doosre ki ichhaon ka pata chal jata ..

"Par bahanaa ye tum kaise keh sakti ho ...?"

"Are baba Bhaiyaa tum unki ankhein dekhte nahin..?? Kaise chamak uthti hain ..? Aur chaal kaisi madmast ho jatee hain ...aur honthon pe kaisi sexy muskurahat aa jati hai ..?? Aur Bhaiyaa ab to aap bhi seduction mein expert ho ...dekhna na tumhara lauDa jate hi MAMMI kaisi pagal ho jati hain ..kaise unki choot se pani ki nadi behti hai ..."

Ye baat sunte hi shayad Bhaiiyya kaphi excited ho gaye ..unka lauDa meri choot ke andar hi aur kada ho gaya , aur lamba ho gaya..mujhe laga jaise koi sanp andar hi andar badhta ja raha hai ..mere badan mein jhoorjhoori ho rahee thee ..

Bhaiyaa ne bhi mujhe meri chuTaDon ko apne hatheliyon se jakadte hue apni or kkheencha aur lauDa poora bahar nikala aur ek jhaTke mein andar pel diya ..fatch ki awaaz hui aur andar ka ab tak ka jama pani unke louDe aur meri choot ki deewar ke beech se bahar pichkari ki tarah unki janghon par paDa ...

Bhaiyaa ne mujhe choom liya aur honth choste hue kaha ..."Daamini teri choot kitni geeli rehti hai bahanaa ...aah mujhe itna achha lagta hai teri choot ke andar ..man karta hi hamesha andar Daale paDa rahoon .."

'Han Bhaiyaa tumhara lund bhi kitna kadak hai ..bas mujhe bhi man karta hai ise apni choot mein Daale rahoon ...oooh Bhaiyaa ...uiiiiiii ....aaah ..han aise hi dhakka lagao na ...aur jor se .....aaah ..han ...bas aise hi MAMMI ko bhi chodna ...mere raja Bhaiyaa ...haaan ....aaah .."

Aur Bhaiyaa meri chuTaD utha utha kar apna kadak lauDa pele jate ..main karah uthti ...seesak uthti har dhakke mein ...ab har dhakka mujhe masti aur madahoshi ki nayi unchaiyon ki or le jata ...

Hum donon madahoshi ki lehar mein jhoom rahe the ...

"Daamini tum kitne pyaar se chudti ho....MAMMI bhi itne pyaar se chudengi na bahanaa ..?? "

"Han Bhaiyaa tum dekhna na wo kitna pyaar dengi tum ko ..Bhaiyaa tum jab unko chodna na to darwaza khula rakhna main tum dono ki chudaai dekhoongi ...apni ankhon se .....aah kitna maja aayega na Bhaiyaa ..unki phooli phooli choot ..mulayam choot tumhare steel rod se chudengi ....aah Bhaiyaa tum unhein raund dena ...han mere raja bhaiyaa .......oooooh ....aaaaah Bhaiyaa ..Bhaiyaa ..uffffff ..aaj tumhein kya ho gaya hai ..kaise dhakke pe dhakka laga rahe ho .......aaaah ..han mere raja ...bas chodte jao .....pelte jao ..."

Meri bat sun sun unka dhakka jor aur jor pakadta jata .wo pagalon ki tarah mujhe chode ja rahe .

"Han bahanaa .... han main unhein bhi aise hi chodoonga ....bilkul aise hi..mere har dhakke mein unki choot phailegi aur ras ki pichkari niklegi ....ooh Daamini .."

AUr maine mehsoos kiya unka lauDa meri choot mein aur kada aur lamba hota ja raha tha ....aue meri choot ki gaehraiyon mein ghusta ja raha tha..un gehraiyon mein jo aaj tak unchui thi ..main kanp rahee thee ..mere jangh thar thara rahe the ....main ek ajeeb hi madhooshi mein thee ..jaise aaj bhi meri pehli chudaai ho..main unke har dhakke mein nihal ho rahee thee ...

"Han Han ..Bhaiyaa ..MAMMI ki choot raund dena tum apne steel rod se .. unki phooli phooli choot ..mulayam choot , ras se bhari choot ....chod chod kar unka poora pani nikal dena ..ooooh ...uiiiiiiiiiiii ..ohh God ..han Bhaiyaa bas aise hi ....haaaaiiiii ....." Unke har dhakke mein aaj ek ajeeb pagalpan tha MAMMI ki baat se weh aur bhi excited ho gaye the aur mujhe chodte ja rahe the .....jor se aur jor se ..meri chuTaD thaame ..upar utha utha ke dhakka lagate ..har dhakke mein main cheehoonk uthti ..karah uthti ..meri choot rubber ki tarah phailti ja rahee thee ....

Unka dhakka itna jordar tha ke unke louDe aur meri choot ki deewaron ke beech se mere ras ki pichkari choot rahi thee ..itna mota ho gaya tha unka lund ....

Main apni chuTaD uchaal uchaal kar unka lauDa andar le rahee thee ....aur phir

"AAAAAAAAAh Daamini.....aaaaaaah ........ooooooooooooo..haiiiii karte hue Bhaiyaa ne mujhe jakad liya ..." Aur maine apne andar pighale lawa ki pichkari mehsoos ki..aaah garam to tha par andar iski garmi se main sihar uthi ..mera poora badan jhan jhana gaya ...main kanp uthi ....aur main bhi apne aap ko rok nahin saki aur saath hi jhadti gayi / aur chuTaD uchaal uchaal kar ..donon ek doosre ke bahon mein jhad rahe the , hichkole le rahe the ..ek bar ..do bar ,baar baar baar ..jhaTke pe jhatka .....thodi der bad sab kuch shant tha ..shetheel tha ....jaise donon ke andar ka toofan , andar ki jwalamukhi ek doosre mein phoot kar shant ho gayi ..

sukh aur masti ki charam seema thee ... hum donon ek doosre ki bahon mein the ...ek doosre ko mehsoos kar rahe the ....unka lauDa meri choot mein tha seekoda hua ..par andar ..hum donon aise hi paDe rahe kaphi der ..

Bhaiyaa ki sans jab normal hui wey waise hi paDe rahe mere par aur mujhe choomne lage ..meri ankhein khuli ..main muskurate hue unhein dekh rahee thee ..maine unhein apni taraf kheench liya apne seene se chipaka liya ..aur apni choochi apne hathon se unke munh mein Daal diya ..Bhaiyaa unhein choos rahe the ...main unhein apni choochi pila rahee the ,unhein nihare ja rahee thee ....

Bhai -Behen ka ye pyaar bada hi sampoorna pyaar hai .... har tarah se paripoorna ... koi bandhan nahin ..koi seema nahin .... hum donon is aseem pyaar mein khoye THE ..aur unke choochi choosne se main bhi anand vibhor ho uthti .....aur phir aise hi chooste chooste wo mere seene mein sar rakhe aur main apni bahein unke gardan ke gird Daale , kab hamari ankhein lag gayeen pata nahin..hum donon ek doosre ki bahon mein so rahe the ..nange ....unka lauDa meri choot mein ...har ang ek doosre se lipata tha ....


Subah jab meri neend khuli to dekha hum donon waise hi ek doosre se chipake so rahe the ..ek doosre ki bahon mein ..Bhaiyaa ki seekoodi lund meri choot ke munh se lagi thee ...usmein virya aur mere ras ki papaDi jamee the... aur unka chhehra mere seene se laga tha ...

Maine unhein jagaya "Bhaiyaa utho ..jaldi utho ..are baba MAMMI kabhi bhi aapke roome mein aa sakti hain ..aap ko chaai dene ...utho jaldi karo...."


Bhaiyaa angdaiyan leTe hue uthe aur badbadane lage.."Ye kya Daamini ..chain se sone bhi nahin deti ..kitna haseen sapna tha ....aaaah main MAMMI ko chod raha tha....."

"Hi Hi Hi...."Main hans paDi ..."Are Bhaiyaa ..jaldi jao apne room..warna abhi jab haqeeqat mein aap ko MAMMI dikhaayengi na ..to unka roop utna haseen nahin hoga ...."

" Han Yaar bat to sahi hai ...." wo baukhlate hue uthe ..aur jane lage ...

main aur joron se hans paDi ...." Are bhole Bhaiyaa ..apne kapde to pehante jao....""

Phir jaldi jaldi ubhone apni shorts tangon ke beech Daalte hue meri or bade pyaar se dekha aur bahar nikal gaye..

kramashah……………………..


raj..
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Re: दामिनी

Unread post by raj.. » 09 Dec 2014 13:55

दामिनी--11

गतान्क से आगे…………………..

आज तो भैया चहक रहे थे नाश्ते के टेबल पर ....हम नाश्ते के टेबल पर बैठे मम्मी का इंतेज़ार कर रहे थे ...

पापा दीख नहीं रहे थे ....

मम्मी जैसे आईं नाश्ते का ट्रे हाथ में लिए ..भैया झट आगे बढ़ कर उन के हाथ से ट्रे ले लिए ...प्लेट में टोस्ट और फ्राइड एग्स थे ..भैया का फवर्ट ...

देखते ही भैया उछल पड़े " मम्मी जी तुस्सी ग्रेट हो...आह आज मेरी पसंद का नाश्ता ...." और उन्होने मम्मी के हाथ पकड़ कर उनके हाथ चूम लिया ..."ह्म्‍म्म ..पर मोम ..पापा कहाँ हैं .... अब तक सो रहे हैं क्या ..??"

मम्मी ने हाथ छुड़ाते हुए कहा .." वो तो मॉर्निंग फ्लाइट से गये ... तुम लोग सो रहे थे ,इसलिए जगाया नहीं ..चलो जल्दी दोनों नाश्ता करो ...कॉलेज का टाइम हो रहा है.."

भैया ने एक बीते ली टोस्ट और एग्स की ...फिर उन्होने मम्मी के हाथ चूम लिए ..

" वाह मों ..कितना राइट टोस्ट किया आप ने...इतना क्रिस्प ...ऊवू मोम यू आर दा ग्रेटेस्ट मोम .."" और उनका हाथ चूमते रहे ...

" अरे बाबा नाश्ता क्या मेरे हाथ का ही करेगा तू ..?? हाथ छोड़ और नाश्ता कर ..." उन्होने हंसते हुए कहा .

" सही में मम्मी ..मन करता है तुम्हारे हाथ ही खा जाऊं ..तुम्हारे हाथों में जादू है..."

" हाँ हाँ रहने दे रहने दे..जब तेरी बीबी आएगी ना ...फिर उसके हाथ ही थामे रहेगा तू..मेरी हाथ की याद भी ना आएगी तुझे..."

"अरे बीबी आएगी तब ना ..मेरी मोम के सामने दुनिया की किसी भी लड़की की कोई औकात नही ..हाँ दामिनी को छोड़ ..मेरी जिंदगी में बस तुम दोनों हो ..और कोई नहीं ..." और उन्होने मम्मी को गले लगा लिया ..और उनके गालों को चूमने लगे ...

" अरे बेवक़ूफ़ ..तू क्या बोल रहा है कुछ समझ में आती भी है ...तुझे ..? तुम दोनों भाई बहेन से भगवान ही बचाए ...वो है के बाप से लीपटि रहती है..और तू मेरे से ...छोड़ मुझे ..कितना काम पड़ा है ....जल्दी नाश्ता कर और कॉलेज जा.." उहोने हंसते हुए कहा ..और उनके गालों में चपत लगाते हुए अपने को छुड़ाते हुए किचन की ओर चली गयीं ..

"वाह भैया वाह ...बिल्कुल सही जा रहे हो ...लगे रहो ...मम्मी की चूत अब फ़तेह होनी ही वाली है ..." मैने उनके लौडे को टेबल के नीचे से दबाते हुए कहा ...पर उनका लौडा तो मम्मी ने पहले ही खड़ा कर दिया था ,,,पॅंट के अंदर तननया था ...

" दामिनी ..मैं सही में पागल हो जाऊँगा ..कितनी सॉफ्ट हैं मम्मी ... उनका पूरा बदन कितना खुश्बुदार है ...उनको दबाता हूँ तो ऐसा फील होता है मानों किसी सॉफ्ट स्पंजी गद्दे में धंसता जा रहा हूँ .."

" और मुझे दबाने से कैसा फील होता है मेरे भैया को ...? " मैने शरारत भरी मुस्कान अपने होंठों पे लाते हुए कहा ..

" तुम दोनों नायाब हो ...तुम्हें दबाने से फील होता है किसी सॉफ्ट रूई (कॉटन) के गद्दे का..सॉफ्ट भी ..हार्ड भी ...ऊवू दामिनी ... मेरी जिंदगी में तुम दोनों मेरे लिए नायाब तोहफा हो ... " और उन्होने मुझे अपने से चिपका लिया ...मैं आँखें बंद किए इस प्यार का मज़ा ले रही थी ...

तभी मम्मी के किचन से बाहर आने की आहट हुई..हम दोनों झट से अलग होते हुए अपनी अपनी जागेह बैठ ..नाश्ता करने लगे...

" ये लड़का तो बस सही में दीवाना है ..पागल है ..कहता है मेरे और दामिनी के सामने कोई लड़की ही नहीं ..." और फिर फ्रेश गरम और क्रिस्प टोस्ट्स मेरे और भैया के प्लेट्स में रखते हुए कहा " ओये ...मम्मी और बहेन के आशिक ..क्या जिंदगी भर कुँवारा ही रहने का ख़याल है ..??"

" हाँ मम्मी फिलहाल तो कुछ ऐसा ही है मेरे मन में ..." उन्होने मुस्कुराते हुए मम्मी की ओर एक तक देखते हुए कहा..

" ये लड़का सही में पागल है ... " पर अंदर ही अंदर उनके गुब्बारे फूट रहे थे ..ये भी हम महसूस कर रहे थे ..फिर उन्होने कहा " देख अभी आज शाम को ज़रा जल्दी आ जाना ..मुझे क्लब जाना है.."

ये सुनते ही भैया तो जैसे उछल पड़े ...उन्होने मुझे आँखें मारते हुए मम्मी से कहा " शुवर मोम ... बंदा हाज़िर हो जाएगा अपनी मोम के कदमों में..." और उनके कदमों में झूकते हुए उनको सलाम किया ...

मम्मी का हंसते हंसते बुरा हाल तहा " ये लड़का .....सुधरेगा नहीं ..लगता है अब कुछ तो करना ही पड़ेगा ... "

थोड़ी देर बाद हमारा नाश्ता हो गया ..मम्मी किचन में थी..

" भैया ...मान गये आपको ..आप का तीर निसाने पे लग गया .....आज तो बस आपका लंड होगा और मम्मी की चूत होगी.....ऊवू मज़ा आ जाएगा आज के शो में ..." मैने चहकते हुए कहा ...

" ओओह्ह्ह दामिनी तेरी मुँह में घी शक्कर ..." और ये कहते हुए उन्होने घी शक्कर तो नहीं ..पर अपनी जीभ ज़रूर डाल दी मेरे मुँह में और मेरी जीभ चूसने लगे ...

" आहह..भैया छोड़ो ना मुझे ....रात को मम्मी की जितनी चाहे चूसना ...." और मैं उन से अलग हुई..बड़ी मुश्किल से ...

और शाम को भैया कॉलेज से जब आए तो मम्मी को बस देखते ही रहे ..क्या सेक्सी लग रहीं थी ...उन्होने सारी नाभि से नीचे बाँध रखी थी ..ब्लाउस क्या था सिर्फ़ ब्रा ढकने भर ..उनके चूचियों की उभार ..लग रहा था अब उछल कर बाहर आई ... नाभि से ब्लाउस तक पेट बिल्कुल नंगा ..जैसे सफेद संगमरमर ....

भैया की मुँह से सीटी निकल गयी .... वो आँखें फाड़ फाड़ देखते रहे ...

" अरे आँखें फाड़ फाड़ क्या देख रहा है..कभी कोई लड़की नहीं देखी क्या ..??? जा जल्दी कार निकल ..मुझे देर हो रही है...और हाँ मुझे लाने की ज़रूरत नहीं ...म्र्स वेर्मा मुझे छोड़ देंगी...चल अब जल्दी कर .."

भैया मम्मी को क्लब ड्रॉप कर सीधे घर आ गये ..और हम दोनों बेसब्री से मम्मी के आने का इंतेज़ार कर रहे थे.....

मैं भैया के सीने में अपनी पीठ रखे और अपनी टाँगें उनकी जांघों पर रखे अपनी फॅवुरेट सीरियल टीवी पर देख रही ठेए ..और भैया मेरे बाल सहला रहे थे ओउर मेरी चुचियाँ भी मसल देते बीच बीच मैं ...हम दोनों को मम्मी के आने का बड़ी बेसब्री से इंतेज़ार था ..

तभी कार रूकने की आवाज़ आई..फिर कार का दरवाज़ा खुला ..हम बाहर आए ...मम्मी आ चूकी थी..पर जिस रूप में वो खड़ी थी ..हम बस आँखें फाडे देख रहे थे ...

उनका आँचल नीचे था ..उपर सिर्फ़ ब्लाउस ,उसके अंदर से झाँकति उनकी सुडौल चुचियाँ .. एक हाथ से आँचल उपर करने की नाकाम कोशिश कर रही थी..चाल में लड़कड़ाहट .. आँचल बार बार गिर जाता ..नंगा पेट ...नाभि की सुराख ...अयाया क्या सेक्सी लुक था मम्मी का ...पूरा का पूरा 5'6'' सेक्स , संगमरमर की मूर्ति सामने खड़ी थी ...उन्होने अंदर आने को अपने लड़खड़ाते कदम बढ़ाए ..पर इस से पहले की गिर पड़ती ..भैया ने उन्हें झट बढ़ उनको कमर से पकड़ लिया ...और मम्मी ने उनके कंधों पर अपना सर रखे उन्हें थाम लिया...भैया ने उन्हें और अपने करीब चिपका लिया .उनकी चुचियाँ उनके सीने से चिपकी थी ...

" अरे ...तुम लोग अभी तक जागे हो.." उनकी आवाज़ लड़खड़ा रही थी.." एयेए हह .ये मुझे किस ने थामा हुआ है...बेटा अभी ..तू है ...?? अरे तू तो पूरा मर्द लग रहा है रे..अपने बाप की तरह मुझे सीने से लगा रखा है....ऊऊओ ...हाँ बेटा तू बिल्कुल अभय की तरह लग रहा है आज ...हाां अयाया .." और उन्होने अपना सर उनके कंधे पर रख आँखें बंद कर लीं...और नशे में बड़बड़ाई जा रहीं थी ..

भैया ने उन्हें अपनी मजबूत बाहों से उठा लिया अपने कंधे पर और उन्हें उनके बेड रूम में ले जा कर बेड पर लीटा दीया ..