Jaal -जाल compleet

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raj..
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Re: Jaal -जाल

Unread post by raj.. » 15 Dec 2014 02:58

जाल पार्ट--72

गतान्क से आगे......

देवेन को भी विजयंत का अपनी महबूबा के साथ ये मस्ताना खेल खेलना ज़रा भी पसंद नही था मगर ना जाने क्या बात थी इस खेल मे कि दोनो को 1 साथ देख उसके दिल मे नफ़रत की जगह 1 अजीब सा रोमांच भर जाता था..उसे भी विजयंत से जलन होती थी मगर साथ ही वो खींचता था उनकी तरफ,उस खेल मे शामिल होने के लिए..फिर यूरी ने भी कहा था की बहुत मुमकिन था की रंभा के साथ चुदाई की वजह से विजयंत पूरा का पूरा ठीक हो जाए..फिर सारी गुत्थिया सुलझ जाती & वो दयाल को ढूँढने मे अपना सारा वक़्त & सारी ताक़त लगा सकता था.

“उउम्म्म्म..आहह..!”,रंभा की आहो & उसके बॉल खींचने से वो अपने ख़यालो से बाहर आया.विजयंत का हाथ रंभा की सारी मे घुस उसकी टाँगे सहला रहा था & वो अभी भी उसके दाए पैर को चूमे जा रहा था.देवेन ने उसके पेट पे अपने हाथ दायरे की शक्ल मे घुमाए तो रंभा मस्ती मे और ज़ोर से आहे भरने लगी.विजयंत का हाथ उसकी जाँघ के नीचे सहला रहा था & उसके होंठ उसके पैरो की उंगलिया चूसे जा रहे थे.जिस्म मे वो मीठा तनाव बहुत बढ़ गया था & चूत की कसक भी.देवेन ने उसकी नाभि मे अपनी उंगली उतार ज़ोर से कुरेदते हुए उसके दाए कान पे काटा & उसी वक़्त विजयंत ने उसके पाँव की सबसे छ्होटी उंगली को चूस उसके & उस से पहले वाली उंगली के बीच की जगह को जीभ से छेड़ा & उसकी जाँघ के निचले हिस्से को बहुत ज़ोर से दबाया.रंभा ने ज़ोर से आह भरी & देवेन की बाहो मे कसमसने लगी.दोनो मर्द समझ गये की वो झाड़ गयी है.

विजयंत ने उसके पैर को ज़मीन पे रखा & दोनो हाथ उसकी सारी मे घुसा उसकी टाँगो & जाँघो को सहलाते हुए उसके गोल पेट को चूमने लगा.देवेन के हाथ उसके खुले ब्लाउस के नीचे से उसकी चूचियो के निचले हिस्से को 2-2 उंगलियो से सहला रहे थे.रंभा के हाथ अब देवेन के गले से उतर विजयंत के सर से लग चुके थे & उसके बालो मे को बेचैनी से खींच रहे थे.विजयंत की लपलपाति ज़ुबान उसकी नाभि को चाते जा रही थी.देवेन के हाथ तो जैसे उसकी चूचियो को च्छू के भी नही च्छू रहे थे.वो उन्हे अपनी हथेलियो मे भर के दबा नही रहा था,ना ही उनके निपल्स को छेड़ रहा था बस उनके नीचे के हिस्से को अपनी उंगलियो से सहला रहा था & रंभा को मस्त किए जा रहा था.रंभा की मस्ती इतनी बढ़ गयी की उसे अब दोनो का च्छुना भी सहन नही हो रहा था & वो दोनो को अपने जिस्म से परे धकेल उनसे छिटक के अलग हो गयी.

उसकी साँसे बहुत तेज़ चल रही थी,उसका आँचल फर्श पे था & ढीले ब्लाउस के किनारो से उसकी उपर-नीचे होती चूचियो की झलकिया दिख रही थी.बॉल बिखर के चेहरे पे आ गये थे & होंठ कांप रहे थे.देवेन उसे देख मुस्कुराते हुए अपनी शर्ट के बटन्स खोलने लगा तो रंभा ने अपना दाया हाथ बालो मे घुमाया & उसे अपने चेहरे पे बेचैनी से चलाया.विजयंत ने देवेन की देखा-देखी अपनी कमीज़ भी उतार दी.दोनो के बालो भरे चौड़े सीनो को देख रंभा की चूत मे फिर से कसक उठने लगी.उसने बाए हाथ को अपनी सारी पे रख अपनी चूत पे दबा उसे शांत करने की नाकाम कोशिश करते हुए दाए हाथ को होंठो पे भींचते हुए अपनी आह को रोका.

देवेन उसके बिल्कुल करीब आ खड़ा हुआ था & उसके गले से ब्लाउस को निकाल रहा था,विजयंत के हाथ उसकी कमर मे घुस उसके नर्म पेट को छुते हुए उसकी सारी को निकाल रहे थे.रंभा बस ज़ोर-2 से साँसे लेती हुई दोनो मर्दो के हाथो नंगी हो रही थी.सारी के उतरते ही देवेन ने उसके पीछे जा उसकी कमर सहलाते हुए उसके पेटिकट को उसकी कमर से सरकया & फिर उसकी गंद की दरार मे फँसे उसके हरे तोंग को विजयंत ने नीचे सरकया.

देवेन पीछे से उसे बाहो मे भर उसके गालो को चूमते हुए अभी भी वैसे ही उसकी चूचियो के निचले हिस्सो को दोनो हाथो की 2-2 उंगलियो से सहला रहा था & नीचे बैठा विजयंत मेहरा उसकी कमर को पकड़े उसकी गंद को धीमे-2 सहलाते हुए उसकी कमर के दाई तरफ के मांसल हिस्से को चूम रहा था.रंभा मस्ती मे चूर थी & दोनो की ज़ुबानो का भरपूर लुत्फ़ उठा रही थी.देवेन ने नीचे से उसकी चूचियो को अपने हाथो मे भर दबाया तो वो आह भरते हुए सिहर उठी.विजयंत उसकी चूत के ठीक उपर पेट पे चूम रहा था & उसकी गर्म साँसे भी उस हिस्से को च्छू रही थी.

“उउन्नग्घह..!”,देवेन ने उसकी चूचियो को दोनो हाथो मे भर आपस मे दबाया & विजयंत की ज़ुबान ने चूत की दरार को सहलाते हुए उसके दाने को छेड़ा.रंभा ने दाए हाथ से उसके बाल पकड़ उसके सर को अपनी चूत पे दबाया & विजयंत ने उसकी चूत चाटना शुरू कर दिया.देवेन उसके पूरे चेहरे को अपने तपते होंठो से चूम रहा था,उसके हाथ महबूबा की चूचियो को हर तरीके से दबा रहे थे-कभी बहुत हल्के-2 उनकी नज़ाकत की इज़्ज़त करते हुए तो कभी उनकी कोमलता से बेपरवाह काफ़ी ज़ोर से.विजयंत उसकी चूत के गीलेपान को पीते हुए जीभ चट मे बहुत अंदर तक घुसा रहा था.रंभा कसमसा रही थी.उसकी कमर हिलने लगी थी & वो देवेन के मुँह पे चूत रगड़ने लगी थी.जिस्म मे बेचैनी & मदहोशी इतनी भर गयी थी की वो परेशान हो सर इधर-उधर घूमाते हुए कभी इस प्रेमी तो कभी उस प्रेमी के बालो को नोचते हुए आहे भर रही थी.देवेन ने उसकी चूचियो को आपस मे सटा के दबाते हुए दोनो हाथो की 2-2 उंगलियो से उसके किशमिश के दानो सरीखे निपल्स को मसला & उसी वक़्त विजयंत की ज़ुबान ने भी उसके दाने को ज़ोर से छेड़ा.रंभा ने च्चटपटाते हुए आह भरी & झाड़ गयी.वो दोनो की गिरफ़्त से निकल बार के सहारे खड़ी हो सिसकने लगी.

दोनो मर्द उसके करीब आए & उसके जिस्म पे हाथ रखा तो वो घूमी & दोनो के सर को 1-1 हाथ मे थाम लिया & पहले अपने दाए तरफ खड़े देवेन & फिर बाए तरफ खड़े विजयंत को चूमा & फिर अपने नखुनो से उनके सीने से पेट तक खरोंछते हुए उनके पॅंट खोल दिए.दोनो मर्दो के लिए ये इशारा काफ़ी था & दोनो ने अपनी -2 पॅंट्स उतार दी & अपने तगड़े लंड उसकी खिदमत मे पेश करते खड़े हो गये.रंभा ने दोनो की आँखो मे आँखे डालते हुए दोनो हाथो मे दोनो लुंडो को भर के दबाया.विजयंत के जिस्म के साथ ज़हन मे भी जैसे बिजली दौड़ गयी.ये एहसास उसे याद था!..उसे याद था कि वो उसके लंड से जिस मस्ताने अंदाज़ मे खेलती थी वैसे कभी किसी ने नही खेला था मगर वो बाकी लोग कौन थे जिनकी तुलना वो रंभा से कर रहा था?..कौन थी वो लड़कियाँ?..उसकी बीवी..क्या नाम बताया था रंभा ने उसका..हां..रीता..क्या वो उसे ऐसे नही प्यार करती थी?..आख़िर क्यू..वो सब भूल गया था..उस झरने पे क्या हुआ था उस रात?..,”आहह..!”,उसने कुच्छ बेबसी & काफ़ी मज़े मे वो आँखे बंद कर आह भरी.देवेन रंभा की तुलना किसी & औरत से नही कर रहा था..ऐसा करना उस हुसनपरी,जिसे वो बेइंतहा प्यार करने लग था.की तौहीन होती..शुरू मे उसे सुमित्रा का दर्जा देते हुए उसे ग्लानि हुई थी,लगा था वो अपनी सुमित्रा से बेवफ़ाई कर रहा था मगर उसका दिल हुमेशा उस से कहता रहता था कि ये सही था..सुमित्रा की बेटी उसे वो दे रही थी जिसका वो हक़दार था लेकिन जिस से वो अभी तक महरूम था.उसने रंभा के दाए गाल पे अपनी हथेली जमाई तो उसने नशीली आँखो से उसे देखते हुए हथेली पे अपना गाल रगड़ा.विजयंत ने अपना दाया हाथ उसके बाए गाल पे रखा & रंभा ने उसके साथ भी वही हरकत दोहराई.दोनो मर्द आगे झुके & उसके 1-1 गाल और गर्देन से लेके कंधो तक चूमने लगे.रंभा वैसे ही उनके लंड हिलाती रही.

डेवाले मे मेहरा परिवार के 1 बुंगले मे भी वासना का खेल चल रहा था.कामया समीर की बाहो मे उसके बिस्तर पे पड़ी थी.समीर के हाथो मे उसकी नर्म चूचिया कसने लगी थी & उसके जिस्म मे बेचैनी भरने लगी थी,”समीर..सब ठीक रहेगा ना?..ऊव्वववव..!..कितनी ज़ोर से दबाते हो!..दुख़्ता है..आननह..!”,समीर बेरेहमी से उसकी चूचिया मसल रहा था.वो जानता था की कामया कुच्छ भी बोले,उसे पसंद था इस तरह से चूचियाँ मसलावाना.उसने उसकी बाई छाती को मुट्ठी मे पकड़ के भींचा & दाई के निपल को दन्तो मे पकड़ उपर खींचा,”..औचह..!”कामया ने उसके बाल खींचे & उसकी गर्देन के नीचे अपने नाख़ून जमा दिए.

“सब ठीक रहेगा.तुम घबराओ मत.”,समीर ने उसकी छाती को छ्चोड़ उसे उल्टा किया & उसकी गंद से हाथ लगा दिए.

“फिर उसे इस तरह क्यू ढूंड रहे हो?..उउम्म्म्मम..!”,समीर जिस बेरेहमी से उसकी चूचियो को मसल रहा था,अब उतनी ही कोमलता से उसकी गंद सहला रहा था,”..जलन हो रही है सोच के कि वो वाहा किसी & की बाहो मे तो नही?”,गर्देन घुमा के वो शोखी से मुस्कुराइ तो समीर ने उसकी गंद पे चिकोटी काट ली,”..औचह..गंदे..!”,उसने प्यार से अपने प्रेमी को झिड़का.

“नही.”,समीर उसकी पीठ पे लेट गया & अपना लंड उसकी गंद पे दबाया तो कामया ने टाँगे फैला दी.समीर ने हाथ नीचे ले जाके अपने लंड को उसकी चूत पे रखा तो कामया थोडा उठ गयी & लंड को चूत मे घुसाने मे मदद की,”..तुम उसे जानती नही.वो बहुत होशियार है.पता नही क्यू मुझे लग रहा है कि वो गोआ कुच्छ ऐसा करने गयी है जोकि हमारे लिए बहुत मुश्किले पैदा कर सकता है.”,वो अपने हाथो को उसके जिस्म के नीचे ले जा उसकी चूचियो को वैसे ही बेरेहमी से मसल्ते हुए धक्के लगा रहा था.

“ऊन्नह..मगर क्या?..& मुझे नही लगता ऐसा डार्लिंग..नही तो वो बताती ही क्यू कि वो गोआ मे है?”,कामया ने अपने बाए कंधे के उपर से अपने आशिक़ के सर को थाम अपनी तरफ किया & उसे चूम लिया.

“क्यूकी होशियार होने के साथ-2 वो काफ़ी हिम्मतवाली भी है & फिर मैने उस से बेवफ़ाई भी की है & चोट खाई औरत से ख़तरनाक चीज़ कोई नही होती. ”

“तो फिर जल्दी से ढूँड़ो उसे & अपने शुबहे दूर कर लो.कही सब कुच्छ बर्बाद ना हो जाए!”

“नही जानेमन,मैं ऐसी अनहोनी नही होने दूँगा.”,समीर झुका & महबूबा के रसीले होंठो को चूमते हुए उसे चोदने लगा.

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क्रमशः.......

JAAL paart--72

gataank se aage......

Deven ko bhi vijayant ka apni mehbooba ke sath ye mastana khel khelna zara bhi pasand nahi tha magar na jane kya baat thi is khel me ki dono ko 1 sath dekh uske dil me nafrat ki jagah 1 ajib sa romanch bhar jata tha..use bhi vijayant se jalan hoti thi magar sath hi vo khinchta tha unki taraf,us khel me shamil hone ke liye..fir Yuri ne bhi kaha tha ki bahut mumkin tha ki rambha ke sath chudai ki vajah se vijayant pura ka pura thik ho jaye..fir sari gutthiya sulajh jati & vo Dayal ko dhoondane me apna sara waqt & sari taqat laga sakta tha.

“uummmm..aahhhhhhh..!”,rambha ki aaho & uske baal khinchne se vo apne khayalo se bahar aaya.vijayant ka hath rambha ki sari me ghus uski tange sehla raha tha & vo abhi bhi uske daye pair ko chume ja raha tha.deven ne uske pet pe apne hath dayre ki shakl me ghumaye to rambha masti me & zor se aahe bharne lagi.vijayant ka hath uski jangh ke neeche sehla raha tha & uske honth uske pairo ki ungliya chuse ja rahe the.jism me vo mitha tanav bahut badh gaya tha & chut ki kasak bhi.deven ne uski nabhi me apni ungli utar zor se kuredte hue uske daye kaan pe kata & usi waqt vijayant ne uske panv ki sabse chhoti ungli ko chus uske & us se pehle vali ungli ke beech ki jagah ko jibh se chheda & uski jangh ke nichle hisse ko bahut zor se dabaya.rambha ne zor se aah bhari & deven ki baaho me kasmasane lagi.dono mard samajh gaye ki vo jhad gayi hai.

Vijayant ne uske pair ko zamin pe rakha & dono hath uski sari me ghusa uski tango & jangho ko sehlate hue uske gol pet ko chumne laga.deven ke hath uske khule blouse ke neeche se uski chhatiyo ke nichle hisse ko 2-2 ungliyo se sehla rahe the.rambha ke hath ab deven ke gale se utar vijayant ke sar se lag chuke the & uske baalo me ko bechaini se khinch rahe the.vijayant ki laplapati zuban uski nabhi ko chate ja rahi thi.deven ke hath to jaise uski chhatiyo ko chhu ke bhi nahi chhu rahe the.vo unhe apni hatheliyo me bhar ke daba nahi raha tha,na hi unke nipples ko chhed raha tha bas unke neeche ke hisse ko apni ungliyo se sehla raha tha & rambha ko mast kiye ja raha tha.rambha ki masti itni badh gayi ki use ab dono ka chhuna bhi sahan nahi ho raha tha & vo dono ko apne jism se pare dhakel unse chhitak kea lag ho gayi.

uski sanse bahut tez chal rahi thi,uska aanchal farsh pet ha & dhile blouse ke kinaro se uski upar-neeche hoti choochiyo ki jhalkiya dikh rahi thi.baal bikhar ke chehre pe aa gaye the & honth kanp rahe the.deven use dekh muskurate hue apni shirt ke buttons kholne laga to rambha ne apna daya hath balo me ghumaye & use apne chehre pe bechaini se chalaya.vijayant ne deven ki dekha-dekhiapni kamiz bhi utar di.dono ke baalo bhare chaude seeno ko dekh rambha ki chut me fir se kasak uthne lagi.usne baye hath ko apni sari pe rakh apni chut pe daba use shant karne ki nakaam koshish karte hue daye hath ko hotho pe bhinchte hue apni aah ko roka.

Deven uske bilkul karib aa khada hua tha & uske gale se blouse ko nikal raha tha,vijayant ke hath uski kamar me ghus uske narm pet ko chhute hue uski sari ko nikal rahe the.rambha bas zor-2 se sanse leti hui dono mardo ke hatho nangi ho rahi thi.sari ke utarte hi deven ne uske peechhe ja uski kamar sehlate hue uske pettiocaot ko uski kamar se sarkaya & fir uski gand ki darar me phanse uske hare thong ko vijayant ne neeche sarkaya.

Deven peechhe se use baaho me bhar uske galo ko chumte hue abhi bhi vaise hi uski chhatiyo ke nichle hisso ko dono hatho ki 2-2 ungliyo se sehla raha tha & neeche baitha Vijayant Mehra uski kamar ko pakde uski gand ko dhime-2 sehlate hue uski kamar ke dayi taraf ke mansal hisse ko chum raha tha.Rambha masti me chur thi & dono ki zubano ka bharpur lutf utha rahi thi.deven ne neeche se uski chhatiyo ko apne hatho me bhar dabaya to vo aah bharte hue sihar uthi.vijayant uski chut ke thik upar pet pe chum raha tha & uski garm sanse bhi us hisse ko chhu rahi thi.

“uunngghhhhhh..!”,deven ne uski chhatiyo ko dono hatho me bhar aapas me dabaya & vijayant ki zuban ne chut ki darar ko sehlate hue uske dane ko chheda.rambha ne daye hath se uske baal pakad uske sar ko apni chut pe dabaya & vijayant ne uski chut chatna shuru kar diya.deven uske pure chehre ko apne tapte hotho se chum raha tha,uske hath mehbooba ki choochiyo ko har tarike se daba rahe the-kabhi bahut halke-2 unki nazakat ki izzat karte hue to kabhi unki komalta se beparvah kafi zor se.vijayant uski chut ke gilepan ko pite hue jibh chut me bahut andar tak ghuas raha tha.rambha kasmasa rahi thi.uski kamar hilne lagi thi & vo deven ke munh pe chut ragadne lagi thi.jism me bechaini & madhoshi itni bhar gayi thi ki vo pareshan ho sar idhar-udhar ghumate hue kabhi is premi to akbhi us premi ke baalo ko nochte hue aahe bhar rahi thi.deven ne uski choochiyo ko aapas me sata ke dabate hue dono hatho ki 2-2 ungliyo se uske kishmish ke dano sarikhe nipples ko masla & usi waqt vijayant ki zuban ne bhi uske dane ko zor se chheda.rambha ne chhatpatate hue aah bhari & jhad gayi.vo dono ki giraft se nikal bar ke sahare khadi ho sisakne lagi.

Dono mard uske karib aaye & uske jism pe hath rakha to vo ghumi & dono ke sar ko 1-1 hath me tham liya & pehle apne daye taraf khade deven & fir baye taraf khade vijayant ko chuma & fir apne nakhuno se unke seene se pet tak kharonchte hue unke pant khol diye.dono mardo ke liye ye ishara kafi tha & dono ne apni -2 pants utar di & apne tagde lund uski khidmat me pesh karte khade ho gaye.rambha ne dono ki aankho me aankhe dalte hue dono hatho me dono lundo ko bhar ke dabaya.vijayant ke jism ke sath zehan me bhi jaise bijli daud gayi.ye ehsas use yaad tha!..use yaad tha ki vo uske lund se jis mastane andaz me khelti thi vaise kabhi kisi ne nahi khela tha magar vo baki log kaun the jinki tulna vo rambha se kar raha tha?..kaun thi vo ladkiyan?..uski biwi..kya naam batay tha rambha ne uska..haan..Rita..kya vo use aise nahi pyar karti thi?..aakhir kyu..vo sab bhool gaya tha..us jharne pe kya hua tha us raat?..,”aahhhhhhhhh..!”,usne kuchh bebasi & kafi maze me vo aankhe band kar aah bhari.deven rambha ki tulna kisi & aurat se nahi kar raha tha..aisa karna us husnpari,jise vo beintaha pyar karne lag tha.ki tauheen hoti..shuru me use Sumitra ka darja dete hue use glani hui thi,laga tha vo apni sumitra se bewafai kar raha tha magar uska dil humesha us se kehta rehta tha ki ye sahi tha..sumitra ki beti use vo de rahi thi jiska vo haqdar tha lekin jis se vo abhi tak mehrum tha.usne rambha ked aye gaal pe apni hatheli jamayi to usne nashili aankho se use dkehte hue hatheli pe apna gaal ragda.vijayant ne apna daya hath uske baye gaal pe rakha & rambha ne uske sath bhi vahi harkat dohrayi.dono mard aage jhuke & uske 1-1 gaal & garden se leke kandho tak chumne lage.rambha vaise hi unke lund hilati rahi.

Devalay me Mehra parivar ke 1 bungle me bhi vasna ka khel chal raha tha.Kamya Sameer ki baaho me uske bistar pe padi thi.sameer ke hatho me uski narm choochiya kasne lagi thi & uske jism me bechaini bharne lagi thi,”sameer..sab thik rahega na?..ooww.!..kitni zor se dabate ho!..dukhta hai..aannhhhhh..!”,sameer berehmi se uski choochiya masal raha tha.vo janta tha ki kamya kuchh bhi bole,use pasand tha is tarah se chhatiyan maslawana.usne uski bayi chhati ko mutthi me pakad ke bhincha & dayi ke nipple ko danto me pakad upar khincha,”..ouchhhhh..!”kamya ne uske baal khinche & uski garden ke neeche apne nakhun jama diye.

“sab thik rahega.tum ghabrao mat.”,sameer ne uski chhatiyo ko chhod use ulta kiya & uski gand se hath laga diye.

“fir use is tarah kyu dhoond rahe ho?..uummmmm..!”,sameer jis berehmi se uski choochiyo ko masal raha tha,ab utni hi komalta se uski gand sehla raha tha,”..jalan ho rahi hai soch ke ki vo vaha kisi & ki baaho me to nahi?”,garden ghuma ke vo shokhi se muskurayi to sameer ne uski gand pe chikoti kaat li,”..ouchhhh..gande..!”,usne pyar se apne premi ko jhidka.

“nahi.”,sameer uski pith pe let gaya & apna lund uski gand pe dabaya to kamya ne tange phaila di.sameer ne hath neeche le jake apne lund ko uski chut pe rakha to kamya thoda uth gayi & lund ko chut me ghusne me madad ki,”..tum use janti nahi.vo bahut hoshiyar hai.pata nahi kyu mujhe lag raha hai ki vo Goa kuchh aisa karne gayi hai joki humare liye bahut mushkile paida kar sakta hai.”,vo apne hatho ko uske jism ke neeche le ja uski choochiyo ko vaise hi berehmi se masalte hue dhakke laga raha tha.

“oonnhhhh..magar kya?..& mujhe nahi lagta aisa darling..nahi to vo batati hi kyu ki vo goa me hai?”,kamya ne apne baye kandhe ke upar se apne aashiq ke sar ko tham apni taraf kiya & use chum liya.

“kyuki hoshiyar hone ke sath-2 vo kafi himmatvali bhi hai & fir maine us se bewafai bhi ki hai & chot khayi aurat se khatarnak chiz koi nahi hoti. ”

“to fir jaldi se dhoondo use & apne shubahe door kar lo.kahi sab kuchh barbad na ho jaye!”

“nahi janeman,main aisi anhoni nahi hone dunga.”,sameer jhuka & mehbooba ke rasile hotho ko chumte hue use chodne laga.

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kramashah.......


raj..
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Re: Jaal -जाल

Unread post by raj.. » 15 Dec 2014 02:59

जाल पार्ट--73

गतान्क से आगे......

रंभा ने विजयंत को धकेल 1 बार स्टूल पे बिठा दिया & फिर झुक के उसके लंड को मुँह मे भर चूसने लगी.अपने नखुनो से वो उसके आंडो को खरोंच उसके मज़े को और बढ़ा रही थी.विजयंत आँखे बंद किए उसके बालो को पकड़ मस्ती मे आहे भर रहा था मगर उसके ज़हन मे वो सवाल की रंभा के अलावा और कौन-2 सी औरतें उसकी ज़िंदगी मे आई थी,अभी भी घूमड़ रहा था..वो सोनिया कौन थी जिसका नाम ले वो दोपहर को बेहोश हो गया था?..कौन थी वो?..उसने सवालो को थोड़ी देर शांत रहने को कहा & अपना ध्यान रंभा पे लगाया.वो दीवानो की तरह उसके लंड के सूपदे को चूस्ते हुए उसे हिला रही थी.

“उउम्म्म्मम..!”,लंड मुँह मे भरे हुए वो मस्ती मे करा ही.पीछे से देवेन झुक के उसकी चूत चाटने मे जुट गया था.रंभा अब कमर हिलाती,च्चटपटती हुई अपने ससुर का लंड चूस रही थी.देवेन 1 उंगली को उसकी गंद मे घुसा के अंदर-बाहर करते हुए उसकी चूत चाट रहा था.रंभा के जिस्म मे फिर वोही बेचैनी भर गयी & उसे शांत करने की गरज से वो अपने ससुर के लंड & आंडो को बुरी तरह दबाते हुए चूसने लगी.विजयंत के लिए अब खुद पे काबू रखना मुश्किल था & उसने बहू के बाल पकड़ उसके मुँह को लंड से अलग किया.रंभा के चेहरे पे अपने मनपसंद खिलोने के छिनने से नाखुशी के भाव थे.विजयंत ने उसकी बाई जाँघ पकड़ उसे अपनी गोद मे बीताया तो रंभा खुद ही उसके लंड को थाम चूत पे रखा & फिर उसके कंधे थाम बैठने लगी.

“आहह..!”,रंभा चीखी.वो लंड को चूत मे ले विजयंत की गोद मे बैठी ही थी कि पीछे से उसके प्रेमी ने उसकी गंद की फांको को फैलाते हुए उसके छेद मे अपना लंड उतार दिया था.विजयंत उसकी चूचियो को दबाते हुए चूस रहा था & देवेन उसकी गंद मार रहा था.रंभा मस्ती मे विजयंत के लंड पे उच्छलते हुए सर पीछे झुका बालो को झटकती मस्ती मे चीखे जा रही थी.देवेन आज लंड को आधी लंबाई से आगे घुसा रहा था.रंभा को प्यार से चूमते ,उसके कानो मे प्यार भरे बोल बोलते हुए,वो अपने लंड को उसकी गंद की अनच्छुई गहराइयो मे उतार रहा था.गंद मे होती हुलचूल की वजह से रंभा का पूरा जिस्म सिहर उठा था & उसकी चूत बुरी तरह कसमसा रही थी.विजयंत का लंड उसकी कसमसाहट से पागल हो गया था & अब विजयंत भी नीचे से कमर उचका के उसे तेज़ी से चोद रहा था.

देवेन उसकी गंद की कसावट से पागल हो गया था.बड़ी मुश्किल से वो खुद को तेज़ धक्के लगाने से रोक रहा था.वो अपने हाथो से कभी उसकी मांसल कमर तो कभी उसकी मोटी चूचियाँ दबा रहा था.उसका दिल किया कि वो अकेला ही रंभा की जवानी का लुत्फ़ उठाए & उसने आगे झुकते हुए उसकी मूडी टाँगो को दोनो हाथो मे थामा & उसे विजयंत के लंड से उठा हॉल मे रखे बड़े सोफे पे ले गया.विजयंत इस तरह से चुदाई मे खलल पड़ने से झल्ला गया था लेकिन देवेन रंभा का प्रेमी था & वो उसे चाह के भी मना नही कर सकता था.

रंभा सोफे पे घुटनो & हाथो पे थी & देवेन बाए हाथ को उसकी कमर की बगल से ले जाते हुए उसके दाने को रगड़ते हुए उसकी गंद मार रहा था.कुच्छ ही पॅलो मे रंभा झाड़ गयी & सोफे पे निढाल हो गयी.देवेन ने लंड उसकी गंद से बाहर खींचा & उसके चेहरे के पास बैठ के उसपे किस्सस की झड़ी लगा दी.अब विजयंत भी सोफे पे आ गया था & रंभा की गंद सहला रहा था.

वो झुका & उसकी गंद की फांको को चूमने लगा.रंभा ने देवेन को चूमा & उसे खड़े होने का इशारा किया & फिर उठते हुए उसके पेट मे अपना मुँह घुसा चूमने लगी.देवेन उसके बालो मे प्यार से हाथ फिराने लगा & उसने उसके लंड को मुँह मे भर लिया.

"उउन्नग्घह..!",वो घुटनो & हाथो पे हो देवेन के लंड को पकड़ के हिलाते हुए चूस ही रही थी कि पीछे से अपने घुटनो पे बैठ विअजय्न्त ने उसकी चूत मे लंड उतार दिया था.रंभा अब पूरी तरह से मदहोश थी.दोनो मर्द उसके जिस्म से पूरे जोश के साथ खेल रहे थे & वो भी उनकी हर्कतो से जोश मे पागल हो रही थी.विजयंत का तगड़ा लंड उसकी चूत को बुरी तरह फैलाता हुआ रगड़ रहा था & हर धक्के पे जब विजयंत का जिस्म उसकी गंद से टकराता तो वो सिहर उठती & देवेन के लंड को मुँह मे भरे हुए आह भरती.विजयंत उसकी गंद की फांको पे चपत मारता उसकी चूत चोद रहा था & देवेन उसके सर को थामे,बीच-2 मे उसकी छातिया दबाता उसका मुँह.कुच्छ देर बाद रंभा 1 बार फिर झाड़ गयी & देवेन के लंड को छ्चोड़ सोफे पे गिर गयी.

विजयंत ने उसकी कमर थाम उसे उठाया & उसे पकड़ते हुए सोफे से नीचे पैर लटका के बैठ गया.अब रंभा उसके सीने से पेट लगाए ,उसके लंड को चूत मे लिए बैठी थी.विजयंत ने उसकी कमर पकड़ उसे उपर उठाया & लंड को चूत से निकाला & फिर गोद मे बिठा के आगे झुकाया.रंभा समझ नही पा रही थी कि वो कर क्या रहा है मगर देवेन समझ गया था.वो सामने आया & रंभा के सामने बैठ के उसके होंठ चूमने लगा.

"ऊन्न्‍न्णनह..!",रंभा ने दर्द & मस्ती मे बहाल हो देवेन के कानो को पकड़ते हुए उसके मुँह मे अपनी जीभ घुसा दी थी.विजयंत ने उसकी कमर थाम उसकी गंद मे अपना लंड डाल दिया था.देवेन चूमते हुए उठा & उसे विजयंत के सीने पे गिरा दिया & उसकी टाँगे फैला दी & घुटने मोड़ दिए.रंभा ने अपने घुटने अपने हाथो मे पकड़ अपनी चूत अपने महबूब के लिए खोलो दी.देवेन आगे झुका & लंड को उसकी चूत मे घसा दिया.रंभा अभी भी उसके मोटे लंड के घुसने पे थोड़ा दर्द महसूस करती थी,उसका लंड था ही इतना मोटा!

देवेन आगे झुका & उसे चूमते हुए उसकी चूचियाँ मसल्ते हुए धक्के लगाने लगा.विजयंत उसकी कमर को जकड़े उसके कंधो & गर्दन को चूमता हुआ उसकी गंद मार रहा था.रंभा अब बिल्कुल बहाल हो गयी.2 ताक़तवर मर्दो से इस तरह अपने जिस्म को ऐसे भोगा जाना उसे मदहोशी के उस आलम मे ले गया था,जिसके बारे मे उसने कभी सपने मे भी नही सोचा था.दोनो उसके जिस्म को अपने हाथो मे भरते हुए,उसके चेहरे & बाकी जिस्म पे चूमते हुए उसके दोनो सुराखो मे अपने क़ातिल अंगो को इस गर्मजोशी से अंदर-बाहर कर रहे थे की वो बस झड़ती चली जा रही थी.उसका अपने जिस्म पे कोई इकतियार नही रह गया था.उसे होश भी नही था कि वो चीख रही थी & उसका जिस्म कांप रहा था.वो तो बस मज़े मे डूबी हुई थी.तीनो ने 1 साथ ज़ोर से आह भरी & रंभा ने 1 साथ अपनी चूत & गंद मे गर्म,गाढ़े वीर्य की बौच्चरें महसूस की & उसकी चूत भी उनके जवाब मे पानी बहाने लगी.खेल अपने अंजाम तक पहुँच गया था & तीनो अब सुकून ओर खुशी से भरे हुए थे.

हॉलिडे इन्न गोआ मे रॉकी को वो मिल गया जिसकी उसे तलाश थी-रंभा मेहरा का नाम.कितनी मुश्किल हुई थी उसे ये काम करने मे ये वोही जानता था.उसके क्लाइंट ने उसे रंभा के डेवाले से गोआ आने की तारीख & फ्लाइट के बारे मे बताया था & केवल उसी के सहारे वो इस होटेल तक पहुँच गया था.इसके पहले उसने 10 5 स्तर होटेल्स मे छन्बिन की थी मगर हर जगह से उसे खाली हाथ लौटना पड़ा था.उसे लगने लगा था कि रंभा ज़रूर किसी छ्होटे-मोटे होटेल या फिर किसी जान-पहचान वाले के घर चली गयी होगी मगर हॉलिडे इन्न के फ्लोर मॅनेजर से मिलने के बाद उसकी तलाश ख़त्म हो गयी थी या कहिए की शुरू हो गयी थी.

"पूरा कमरा तहस-नहस था मानो अंदर कोई तूफान आया हो."

"अंदर हाथापाई हुई थी क्या?",रॉकी ने 1 मोटा पॅकेट मॅनेजर को थमाया.

"हां..",वो हंसा,"..मगर वो हाथापाई जो मर्द & औरत करते हैं.",उसने पॅकेट को खोल अंदर देखा & फिर उसे अपने कोट की अंदर की जेब मे रख लिया.रॉकी उसकी बात समझ मुस्कुराने लगा.

"कैसा दिखता था वो मर्द?"

"बुड्ढ़ा था 50 बरस से उपर का,खिचड़ी मगर करीने से बने बाल & हां..",उसने अपने बाए गाल पे अपना हाथ रखा,"..यहा 1 निशान था."

"हूँ..",रॉकी कुच्छ सोच रहा था,"..1 काम & कर सकते हो?"

"क्या?"

"तुम्हारे होटेल के सेक्यूरिटी कॅमरास के फुटेज से मुझे उसकी तस्वीर दे सकते हो?"

"ये तो बहुत ख़तरे का काम है.पता चल गया तो मेरी नौकरी तो जाएगी ही आगे नौकरी मिलना भी नामुमकिन हो जाएगा."

"अच्छा,1 काम करो.तुम उस फुटेज तक पहुँच बस उस आदमी की शक्ल मुझे 1 बार दिखा दो."

"मगर कैसे?..मैं फुटेज आक्सेस नही कर सकता क्यूकी वो मेरा डिपार्टमेंट नही है."

"हां..मगर तुम फ्लोर मॅनेजर हो,वो शख्स तुम्हारे फ्लोर के 1 कमरे मे 1 पूरी रात रहा.तुम किसी भी बहाने से उस वीडियो को देख सकते हो & मुझे बस उसकी 1 फाइल किसी तरह दे दो."

"हूँ..मैं पक्का नही कह सकता पर कोशिश कर सकता हू."

"ओके.कल मिलूँगा,यही इसी वक़्त."

"ओके और पैसे?"

"उसकी फ़िक्र मत करो.",रॉकी ने उसकी तरफ का कार का दरवाज़ा खोला जिसमे वो बैठे थे.वो मॅनेजर उतर गया & दरवाज़ा बंद कर दिया तो रॉकी ने कार स्टार्ट की & होटेल की बेसमेंट पार्किंग से निकल गया.पार्किंग से निकलते हुए उसने आँखो पे काला चश्मा & सर पे बेसबॉल कॅप लगा ली ताकि पार्किंग के एंट्रेन्स,एग्ज़िट & अंदर लगे कॅमरास मे उसकी शक्ल सॉफ ना आए.उसे जिस काम को अंजाम देना था,उसके कामयाब होने पे बहुत मुमकिन था कि पोलीस सिरो को जोड़ने के इरादे से इस होटेल तक आ पहुँचे & वो किसी भी कीमत पे पोलीस की नज़र मे नही आना चाहता था.

रॉकी 6'4" का लंबा-चौड़ा,ताक़तवर जवान था.उसके गर्दन तक लंबे बाल & चेहरे की घनी दाढ़ी & उसका गथिला जिस्म लड़कियो को उसकी ओर खिचने मे हमेशा कामयाब होते थे.वो भी इसका खूब फयडा उठता था मगर अपने काम के आगे वो अपने इस शौक को कभी तवज्जो नही देता था.उसने अपनी कार 1 पब्लिक पार्किंग मे लगाई & 1 बीच शॅक मे बने बार मे गया जो इस वक़्त शाम को खचाखच भरा था.

वो बार तक गया & 1 बियर ऑर्डर की.पास बैठी 1 लड़की उस से फ्लर्ट करने की कोशिश कर रही थी & वो भी मुस्कुराते हुए उसका साथ दे रहा था.लड़की के बिकिनी के टॉप & सरॉंग मे कसा अधनंगा जिस्म काफ़ी दिलकश था लेकिन इस वक़्त रॉकी अपने काम के सिलसिले मे इस बार मे आया था & अभी उस लड़की का हुस्न उसके लिए कोई मायने नही रखता था.रॉकी उस लड़की से बाते करते हुए किसी को ढूंड रहा था.लड़की उसके दाए तरफ बैठी थी & बाते करते हुए बार-2 उसकी जाँघो पे हाथ रख रही थी.रॉकी जानता था कि बस उसे अपनी बातो से उसके बातो मे च्छूपे बुलावे को कबूल करना था & उसकी आज की रात को वो नशीली बनाने मे कोई कसर नही छ्चोड़ती मगर आज उसे उस लड़की की जवानी से महरूम रहना होगा क्यूकी वो जिसे ढूंड रहा था,उसे वो शख्स दिख गया था,"एक्सक्यूस मी पर मैं यहा अपनी ग्रिल्फ्रेंड का इंतेज़ार कर रहा हू.",लड़की बुरा सा मुँह बनाती चली गयी.

"शालोम,यहेल.",तगड़े फिरंगी बारटेंडर के पीछे आए 1 5'9' कद का चुस्त जवान उसकी आवाज़ सुन ठिठक गया.

"शालोम.",वो नज़रो से रॉकी को तोल रहा था.रॉकी ने देखा की बारटेंडर का दाया हाथ उसके एप्रन के पीछे चला गया था.रॉकी जानता था कि उसने ज़रा भी गॅडबॅड की & बारटेंडर का छिपा हत्यार उसकी ओर आग उगलने लगेगा.

"वॉट ईज़ दा मीनिंग ऑफ शालोम,यहेल?..शालोम का मतलब क्या होता है?",उसने अपनी आँखे यहेल की आँखो से मिला दी.

"पीस..अमन.",यहेल का बाया हाथ बार काउंटर के नीचे था & दाया काउंटर के उपर.अपने जवाब से उसने ये भी जता दिया था कि उसे भी यहा की ज़ुबान आती थी.

"तो मैं शांति से यहा बिज़्नेस की बात करने आया हू कोई गड़बड़ करने नही..",रॉकी ने दोनो हाथ काउंटर पे रख दिए थे,"..मेरे पास कोई हत्यार नही है.चाहो तो मेरी तलाशी ले लेना."

"वॉट सॉर्ट ऑफ बिज़्नेस?"

"मुझे फ़ारूख़ ने तुम्हारा पता दिया था.",उस नाम को सुनते ही यहेल के चेहरा थोड़ा नर्म पड़ा मगर वो & उसका बारटेंडर साथी अभी भी चौक्काने थे,"..मुझे 1 शख्स को ढूँढना है & फिर..",उसने बात अधूरी छ्चोड़ दी लेकिन यहेल समझ गया.

"हूँ..कम.",रॉकी जिस बार मे आया था ये इज़्रेली माफिया के गुर्गो का था.इसका पता उसे डेवाले के अंडरवर्ल्ड के अपने 1 कॉंटॅक्ट से मिला था.यहेल उसे शॅक के पीछे ले गया.यहेल आगे चल रहा था,उसके पीछे रॉकी & सबसे पीछे वो बारटेंडर.1 कमरे मे जा यहेल 1 कुर्सी पे बैठा & अपनी शर्ट के नीच्चे से पॅंट मे अटकी ऑटोमॅटिक पिस्टल निकाल के अपने हाथ मे ले ली & रॉकी को बैठने का इशारा किया.रॉकी के बैठते ही बारटेंडर ने दरवाज़ा बंद किया & उसपे खड़ा हो अपने पेरो के पीछे च्छूपी पिस्टल निकाल के हाथ मे ले ली.यहेल ने अपना मोबाइल निकाला & नंबर मिलाया.

"हूँ..ओके..राइट..बाइ..!",उसने फोन काटा & मोबाइल अपनी जेब मे डाला,"..तुम्हारा नाम क्या है?"

"रॉकी."

"कहा से आया हो?",हिन्दुस्तानी ज़ुबान पे उसकी पकड़ अभी उतनी मज़बूत नही हुई थी.

"डेवाले."

"हूँ..क्या चाहिए..ऑटोमॅटिक..सेमी-ऑटोमॅटिक..उस से हेवी वेपन..प्लीज़ नो बारगिनिंग..प्राइस पे..",वो अच्छे हिन्दुस्तानी लफ्ज़ सोचने की कोशिस कर रहा था.

"हुज्जत करना तुम्हे पसंद नही.",रॉकी ने मुस्कुराते हुए उसकी मदद की.

"यस."

"पर मुझे हत्यार से ज़्यादा कुच्छ और मदद चाहिए."

"ओके..वॉट?"

"मुझे 1 शख्स की तलाश है..आइ मीन 2 लोगो की तलाश है..",उसने जेब से रंभा की तस्वीर निकाली,"..1 तो ये लड़की ."

"ओके..",यहेल ने तस्वीर को देखा & फिर रॉकी को वापस किया,"..& दूसरा?"

"उसकी तस्वीर मेरे पास नही है अभी..",उसने वही हुलिया बताया जो हॉलिडे इन्न के फ्लोर मॅनेजर ने उसे बताया था,"..& अगर लक अच्छा रहा तो कल शायद तस्वीर भी मिल जाए."

"आफ्टर फाइंडिंग देम..क्या?"

"वो मुझे करना है.मेरे क्लाइंट की सख़्त ताकीद है कि उसके बाद का काम मैं अकेले ही करू."

"& युवर क्लाइंट इस वेरी राइट क्यूकी उसके बाद का काम..आइ नो वॉट तट'स गोन्न बी& उसमे हम इन्वॉल्व नही होंगे.",रॉकी जानता था.उसकी तरह ये लोग पोलीस से डरते नही मगर उसी की तरह ये लोग उनकी नज़रो मे आना या अपने रास्ते मे उन्हे आने देना नही चाहते थे.

"ओके."

"नाउ दा फीस."

बोलो क्या चाहिए.",यहेल के कहने के बावजूद रॉकी ने दाम पे हुज्जत की & थोड़ी देर बाद सब तय हो गया था.यहेल आज से ही उसके बताए हुलिए वाले शख्स & रंभा की खोज मे अपने आदमियो को लगाने वाला था.

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क्रमशः.......

JAAL paart--73

gataank se aage......

Rambha ne vijayant ko dhakel 1 bar stool pe bitha diya & fir jhuk ke uske lund ko munh me bhar chusne lagi.apne nakhuno se vo uske ando ko kharonch uske maze ko & badha rahi thi.vijayant aankhe band kiye uske baalo ko pakad masti me aahe bhar raha tha magar uske zehan me vo sawal ki rambha ke alawa & kaun-2 si auraten uski zindagi me aayi thi,abhi bhi ghumad raha tha..vo Soniya kaun thi jiska naam le vo dopahar ko behosh ho gaya tha?..kaun thi vo?..usne sawalo ko thodi der shant rehne ko kaha & apna dhyan rambha pe lagaya.vo deewano ki tarah uske lund ke supade ko chuste hue use hila rahi thi.

“uummmmm..!”,lund munh me bhare hue vo masti me karahi.peechhe se deven jhuk ke uski chut chatne me jut gaya tha.rambha ab kamar hilati,chhatpatati hui apne sasur ka lund chus rahi thi.deven 1 ungli ko uski gand me ghusa ke andar-bahar karte hue uski chut chaat raha tha.rambha ke jism me fir vohi bechaini bhar gayi & use shant karne ki garaj se vo apne sasur ke lund & ando ko buri tarah dabate hue chusne lagi.vijayant ke liye ab khud pe kabu rakhna mushkil tha & usne bahu ke baal pakad uske munh ko lund se alag kiya.rambah ke chehre pe apne manpasand khilone ke chhinane se nakhushi ke bhav the.vijayant ne uski bayi jangh pakad use apni god me bithaya to rambha khud hi uske lund ko tham chut pe rakha & fir uske kandhe tham baithne lagi.

“AAHHHHHHHHHHH..!”,rambha chikhi.vo lund ko chut me le vijayant ki god me baithi hi thi ki peechhe se uske premi ne uski gand ki fanko ko failate hue uske chhed me apna lund utar diya tha.vijayant uski choochiyo ko dabate hue chus raha tha & deven uski gand maar raha tha.rambha masti me vijayant ke lund pe uchhalte hue sar peechhe jhuka baalo ko jhatakti masti me chikhe ja rahi thi.deven aaj lund ko aadhi lumbai se aage ghusa raha tha.rambha ko pyar se chumte ,uske kano me pyar bhare bol bolte hue,vo apne lund ko uski gand ki anchhui gehraiyo me utar raha tha.gand me hoti hulchul ki vajah se rambha ka pura jism sihar utha tha & uski chut buri tarah kasmasa rahi thi.vijayant ka lund uski kasmasahat se pagal ho gaya tha & ab vijayant bhi neeche se kamar uchka ke use tezi se chod raha tha.

Deven uski gand ki kasavat se pagal ho gaya tha.badi mushkil se vo khud ko tez dhakke lagane se rok raha tha.vo apne hatho se kabhi uski mansal kamar to kabhi uski moti chhatitya daba raha tha.uska dil kiya ki vo akela hi Rambha ki jawani ka lutf uthaye & usne aage jhukte hue uski mudi tango ko dono hatho me thama & use Vijayant ke lund se utha hall me rakhe bade sofe pe le gaya.Vijayant is tarah se chudai me khalal padne se jhalla gaya tha lekin deven rambha ka premi tha & vo use chah ke bhi mana nahi kar sakta tha.

rambha sofe pe ghutno & hatho pe thi & deven baye hath ko uski kamar ki bagal se le jate hue uske dane ko ragadte hue uski gand maar raha tha.kuchh hi palo me rambha jhad gayi & sofe pe nidhal ho gayi.deven ne lund uski gand se bahar khincha & uske chehre ke paas baith ke uspe kisses ki jhadi laga di.ab vijayant bhi sofe pe aa gaya tha & rambha ki gand sehla raha tha.

vo jhuka & uski gand ki fanko ko chumne laga.rambha ne deven ko chuma & use khade hone ka ishara kiya & fir uthate hue uske pet me apna munh ghusa chumne lagi.deven uske baalo me pyar se hath firane laga & usne uske lund ko munh me bhar liya.

"uunngghhhhhh..!",vo ghutno & hatho pe ho deven ke lund ko pakad ke hilate hue chus hi rahi thi ki peechhe se apne ghutno pe baith viajaynat ne uski chut me lund utar diya tha.rambha ab puri tarah se madhosh thi.dono mard uske jism se pure josh ke sath kehl rahe the & vo bhi unki harkato se josh me pagal ho rahi thi.vijayant ka tagda lund uski chut ko buri tarah failata hua ragad raha tha & har dhakke pe jab vijayant ka jism uski gand se takrata to vo sihar uthati & deven ke lund ko munh me bhare hue aah bharti.vijayant uski gand ki fanko pe chapat marta uski chut chod raha tha & deven uske sar ko thame,beech-2 me uski chhatiya dabata uska munh.kuchh der baad rambha 1 baar fir jhad gayi & deven ke lund ko chhod sofe pe gir gayi.

vijayant ne uski kamar tham use uthaya & use pakadte hue sofe se neeche pair latka ke baith gaya.ab rambha uske seene se pth lagaye ,uske lund ko chut me liye baithi thi.vijayant ne uski kamar pakad use upar uthaya & lund ko chut se nikala & fir god me bithake aage jhukaya.rambha samjh nahi pa rahi thi ki ov kar kya raha hai magar deven samajh gaya tha.vo samne aaya & rambha ke samne baith ke uske honth chumne laga.

"OONNNNNHHHHHHHH..!",rambha ne dard & masti me behal ho deven ke kaano ko pakadte hue uske munh me apni jibh ghusa di thi.vijayant ne uski kamar tham uski gand me apna lund daal diya tha.deven chumte hue utha & use vijayant ke seene pe gira diya & uski tange faila di & ghutne mod diye.rambha ne apne ghutne apne hatho me pakad apni chut apne mehboob ke liye kholo di.deven aage jhuka & lund ko uski chut me ghsua diya.rambha abhi bhi uske mote lund ke ghusne pe thoda dard mehsus karti thi,uska lund tha hi itna mota!

deven aage jhuka & use chumte hue uski choochiyan masalte hue dhakke lagane laga.vijayant uski kamar ko jakde uske kandho & gardan ko chumta hua uski gand maar raha tha.rambha ab bilkul behaal ho gayi.2 taqatwar mardo se is tarah apne jism ka aise bhoga jana use madhoshi ke us alam me le gaya tha,jiske bare me usne kabhi sapne me bhi nahi socha tha.dono uske jism ko apne hatho me bharte hue,uske chehre & baki jism pe chumte hue uske dono surakho me apne qatil ango ko is garmjoshi se anadr-bahar kar rahe the ki vo bas jhadti chali ja rahi thi.uska apne jism pe koi ikhtiyar nahi reh gaya tha.use hosh bhi nahi tha ki vo chikh rahi thi & uska jism kanp raha tha.vo to bas maze me dubi hui thi.teeno ne 1 sath zor se aah bhari & rambha ne 1 sath apni chut & gand me garm,gahde virya ki bauchharen mehsus ki & uski chut bhi unke jawab me pani bahane lagi.khel apne anjam tak pahunch gaya tha & teeno ab sukun or khushi se bhare hue the.

Holiday Inn Goa me Rocky ko vo mil gaya jiski use talsh thi-Ramba Mehra ka naam.kitni mushkil hui thi use ye kaam karne me ye vohi janta tha.uske client ne use rambha ke Devalay se Goa aane ki tarikh & flight ke bare me bataya tha & kevayl usi ke sahare vo is hotel tak pahunch gaya tha.iske pehle usne 10 5 star hotels me chhanbin ki thi magar har jagah se use khali hath lautna pada tha.use lagne laga tha ki rambha zaroor kisi chhote-mote hotel ya fir kisi jaan-pehchan vale ke ghar chali gayi hogi magar holiday inn ke floor manager se milne ke baad uski talash khatm ho gayi thi ya kahiye ki shuru ho gayi thi.

"pura kamra tahas-nahas tha mano andar koi toofan aaya ho."

"andar hathapai hui thi kya?",rocky ne 1 mota packet manager ko thamaya.

"haan..",vo hansa,"..magar vo hathapai jo mard & aurat karte hain.",usne packet ko khol andar dekha & fir use apne coat ki andar ki jeb me rakh liya.rocky uski baat samajh muskurane laga.

"kaisa dikhta tha vo mard?"

"buddha tha 50 baras se upar ka,khichdi magar karine se bane baal & haan..",usn4e apne baye gaal pe apna hath rakha,"..yaha 1 nishan tha."

"hun..",rocky kuchh soch raha tha,"..1 kaam & kar sakte ho?"

"kya?"

"tumhare hotel ke security cameras ke footage se mujhe uski tasvir de sakte ho?"

"ye to bahut khatre ka kaam hai.pata chal gaya to meri naukri to jayegi hi aage naukri milna bhi namumkin ho jayega."

"achha,1 kaam karo.tum us footage tak pahunch bas us aadmi ki shakl mujhe 1 baar dikha do."

"magar kaise?..main footage access nahi kar sakta kyuki vo mera department nahi hai."

"haan..magar tum floor manager ho,vo shakhs tumhare floor ke 1 kamre me 1 puri raat raha.tum kisi bhi bahane se us video ko dekh sakte ho & mujhe bas uski 1 file kisi tarah de do."

"hun..main pakka nahi keh sakta par koshish kar sakta hu."

"ok.kal milunga,yehi isi waqt."

"ok & paise?"

"uski fikr mat karo.",rocky ne uski taraf ka car ka darvaza khola jisme vo baithe the.vo manager utar gaya & darwaza band kar diya to rocky ne car start ki & hotel ki basement parking se nikal gaya.parking se nikalte hue usne aankho pe kala chashma & sar pe baseball cap laga li taki parking ke entrance,exit & andar lage cameras me uski shakl saaf na aaye.use jis kaam ko anjam dena tha,uske kamyab hone pe bahut mumkin tha ki police siro ko jodne ke irade se is hotel tak aa pahunche & vo kisi bhi keemat pe police ki nazar me nahi aana chahta tha.

rocky 6'4" ka lamba-chauda,taqatvar jawan tha.uske gardan tak lambe baal & chehre ki ghani dadhi & uska gathila jism ladkiyo ko uski or khichne me humesha kamyab hote the.vo bhi iska khub fayda uthata tha magar apne kaam ke aage vo apne is shauk ko kabhi tavajjoh nai deta tha.usne apni var 1 public parking me lagayi & 1 beach shack me bane bar me gaya jo is waqt sham ko khachakhach bhara tha.

vo bar tak gaya & 1 beer order ki.paas baithi 1 ladki us se flirt karne ki koshish kar rahi thi & vo bhi muskuarte hue uska sath de raha tha.ladki ke bikini ke top & sarong me kasa adhnanga jism kafi dilkash tha lekin is waqt rocky apne kaam ke silsile me is bar me aaya tha & abhi us ladki ka husn uske liye koi mayne nahi rakhta tha.rocky us ladki se baate karte hue kisi ko dhoond raha tha.ladki uske daye taraf baithi thi & baate karte hue baar-2 uski jangho pe hath rakh rahi thi.rocky janta tha ki bas use apni baato se uske baato me chhupe bulave ko kabul karna tha & uski aaj ki raat ko vo mashili banane me koi kasar nahi chhodti magar aaj use us lakdi ki jawani se mehrum rehna hoga kyuki vo jise dhoond raha tha,use vo shakhs dikh gaya tha,"excuse me par main yaha apni grilfriend ka intezar kar raha hu.",ladki bura sa munh banati chali gayi.

"Shalom,Yahel.",tagde firangi bartender ke peechhe aaye 1 5'9' kad ka chust jawan uski aavaz sun thithak gaya.

"shalom.",vo nazro se rocky ko tol raha tha.rocky ne dekha ki bartender ka daya hath uske apron ke peechhe chala gaya tha.rocky janta tha ki usne zara bhi gadbaad ki & bartender ka chhipa hathyar uski or aag ugalne lagega.

"what is the meaning of shalom,yahel?..shalom ka matlab kya hota hai?",usne apni aankhe yahel ki aankho se mila di.

"peace..aman.",yahel ka baya hath bar counter ke neeche tha & daya counter ke upar.apne jawab se usne ye bhi jata diya tha ki use bhi yaha ki zuban aati thi.

"to main shanti se yaha business ki baat karne aaya hu koi gadbad karne nahi..",rocky ne dono hath counter pe rakh diye the,"..mere paas koi hathyar nahi hai.chaho to meri talashi le lena."

"what sort of business?"

"mujhe Farukh ne tumhara pata diya tha.",us naam ko sunte hi yahel ke chehra thoda narm pada magar vo & uska bartender sathi abhi bhi chaukkane the,"..mujhe 1 shakhs ko dhoondana hai & fir..",usne baat adhuri chhod di lekin yahel samajh gaya.

"hun..come.",rocky jis bar me aaya tha ye Israeli mafia ke gurgo ka tha.iska pata use devalay ke underworld ke apne 1 contact se mila tha.yahel use shack ke peechhe le gaya.yahel aage chal raha tha,uske peechhe rocky & sabse peechhe vo bartender.1 kamre me ja yahel 1 kursi pe baitha & apni shirt ke neechhe se pant me atki automatic pistol nikal ke apne hath me le li & rocky ko baithne ka ishara kiya.rocky ke baithate hi bartender ne darwaza band kiya & uspe khada ho apne paron ke peechhe chhupi pistol nikal ke hath me le li.yahel ne apna mobile nikala & number milaya.

"hun..ok..right..bye..!",usne fone kaata & mobile apni jeb me dala,"..tumhara naam kya hai?"

"rocky."

"kaha se aaya ho?",hindustani zuban pe uski pakad abhi utni mazbut nahi hui thi.

"devalay."

"hun..kya chahiye..automatic..semi-automatic..us se heavy weapon..please no bargaining..price pe..",vo ashi hindustani lafz sochne ki koshsih kar raha tha.

"hujjat karna tumhe pasand nahi.",rocky ne muskuarte hue uski madad ki.

"yes."

"par mujhe hathyar se zyada kuchh aur madad chahiye."

"ok..what?"

"mujhe 1 shakhs ki talash hai..i mean 2 logo ki talash hai..",usne jeb se rambha ki tasvir nikali,"..1 to ye ladki ."

"ok..",yahel ne tasvir ko dekha & fir rocky ko vapas kiya,"..& dusra?"

"uski tasvir mere paas nahi hai abhi..",usne vahi huliya bataya jo holiday inn ke floor manager ne use bataya tha,"..& agar luck achha raha to kal shayad tasvir bhi mil jaye."

"after finding them..kya?"

"vo mujhe karna hai.mere client ki sakht takeed hai ki uske baad ka kaam main akele hi karu."

"& your client is very right kyuki uske baad ka kaam..i know what that's gonna be& usme hum involve nahi honge.",rocky janta tha.uski tarah ye log police se darte nahi magar usi ki tarah ye log unki nazro me aana ya apne raste me unhe aane dena nahi chahte the.

"ok."

"now the fees."

bolo kya chahiye.",yahel ke kehne ke bavjud rocky ne daam pe hujjat ki & thodi der baad sab tay ho gaya tha.yahel aaj se hi uske bataye huliye vale shakhs & rambha ki khoj me apne aadmiyo ko lagane vala tha.

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kramashah.......


raj..
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Re: Jaal -जाल

Unread post by raj.. » 15 Dec 2014 03:00

जाल पार्ट--74

गतान्क से आगे......

"क्या?!",देवेन बिस्तर मे उठ बैठा.वो बिल्कुल नंगा था & रंभा केवल ब्रा और पॅंटी मे.वो उसके क्लेवगे को चूमते हुए उसके पेट को सहला रहा था जब उसके दिमाग़ मे समीर के बलबीर मोहन को रंभा को खोजने के काम पे लगाने & रंभा के उस से निपटने वाली बात आई & उसने उस बारे मे उस से पुछा,"..और तुमने उसे बता दिया कि तुम यहा हो गोआ मे?!"

"हां..",रंभा उठ बैठी,"..अब वो हमे ढूँढने नही आएगा.मैं जानती हू उसे.वो समीर को ये बात बता और फिर इस काम को करने से इनकार देगा."

"ओह..रंभा..तुम इतनी बड़ी ग़लती कैसे कर सकती हो?!",देवेन परेशान सा बिस्तर से उतर कमरे मे चहलकदमी करने लगा.

"मगर हुआ क्या?..बताइए तो?"

"रंभा,समीर बलबीर को नही तो किसी और को भेजेगा तुम्हे ढूँढने और कही उन्हे तुम्हारे साथ-2 विजयंत मेहरा के बारे मे पता चल गया तो?",रंभा उसकी बात समझ चिंतित हो गयी.

"रंभा,मेहरा परिवार मे कोई भी शक़ के दायरे से बाहर नही है और मान लो समीर अपने पिता के इस हाल का ज़िम्मेदार नही है तो भी..वो जब ये देखेगा कि तुम 1 सज़ायाफ़्ता मुजरिम के साथ उसके पिता को यहा च्छुपाए बैठी हो तो फिर क्या होगा?"

"अब क्या करें?",रंभा घबरा गयी थी.

"सोचने दो मुझे.",वो कमरे मे नंगा ही चहलकदमी करने लगा.कोई 10 मिनिट के बाद वो रुका,"अपना समान समेटो और फिर विजयंत को भी चलने को तैय्यार करो.",वो अपने कपड़े पहनाने लगा और 1 बॅग मे अपना समान डालने लगा.रंभा बिस्तर से उतरी & उसके कहे मुताबिक करने लगी.

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"अब यहा रहना है हमे..",उसने अपने घर से दूरी पे बने अगले बंगल के अंदर कार घुसाई,"..पर ध्यान रहे,दुनिया के लिए सिर्फ़ मैं यहा हू.तुम दोनो मे से कोई भी बाहर नही दिखना चाहिए.ये लो चाभी..",उसने रंभा को चाभियो का 1 गुच्छा दिया & जल्दी से अंदर जाओ.विजयंत,प्लीज़ ये समान उठाओ,मैं मेन गेट लॉक कर के आता हू.",कुच्छ देर बाद विजयंत अपने कमरे मे सो रहा था & देवेन & रंभा अपने कमरे मे थे.रात के अंधेरे का फयडा उठाके वो सब को छुपा के यहा ले आया था & अब उसका तनाव थोडा कम हुआ था.

"आइ'एम सॉरी.",रंभा उसके पहलू मे उस से सॅट गयी & उसके सीने पे सर रख दिया.

"इसमे सॉरी की क्या बात है?..हो जाती है ग़लती."

"अच्छा,1 बात पुच्छू?",रंभा उसके सीने पे उंगली चला रही थी.

"कैसा बेवकुफ़ाना सवाल है!",देवेन ने उसके गाल पे प्यार से चपत लगाई,"..पुछो क्या पुच्छना है."

"आप काम क्या करते हैं?"

"तुम सोचती हो कि मैं कोई ग़लत काम करता हू..हूँ?",उसने महबूबा के चेहरे को सीने से उपर उठाया ताकि वो उसकी आँखो मे देख सके.रंभा ने धीरे से नज़रे झुकाते हुए सर हां मे हिलाया.

"देखो,रंभा.मैने तुम्हे बताया था ना कि जैल से निकलने के बाद मैने हर तरह का धंधा किया,कुच्छ सही कुच्छ ग़लत मगर अब मैं कोई ग़लत काम नही करता.हां,अपने इन्टेक़ाम के लिए और फिर मेरी जान-पहचान तो शुरू से ही ऐसे लोगो से रही है,मैं ग़लत लोगो से मिलता रहता हू.उनसे कॉम्न्टेक्ट मे भी रहता हू मगर अब मैं खुद कोई ग़लत काम नही करता बालम सिंग जैसे लोगो को मारने के सिवा.",रंभा ने उसके चेहरे पे प्यार से हाथ फिराया,"..मैने तमिल नाडु मे और फिर यहा जो भी पैसे कमाए उनसे यहा 5-6 प्रॉपर्टीस कहरीदी हैं & इन 2 को छ्चोड़ के..",उसका इशारा अभी-2 छ्चोड़े मकान और उस बुंगले मे था जिसके कमरे मे वो लेटे थे,"..सभी को किराए पे लगा रखा है.1 छ्होटा सा फिशरी का भी धंधा है.इसी से खर्चा चलता है मेरा."

"आप ये तो नही सोच रहे क़ी मैं आप पे शक़ कर रही थी या फिर आपको ग;लत समझ रही थी?",

"नही,मैं जानता हू की तुम्हारे दिल मे बस सवाल उठ रहे थे & ये कुद्रती बात है."

"आइ लव यू,देवेन!",रंभा उसके गले से लग गयी तो देवेन ने भी उसे बाँहो मे कस लिया,"..मेरी ग़लती से कोई बड़ी परेशानी तो नही खड़ी होगी ना?",वो देवेन के दाए कंधे के उपर अपना चहरा उसकी गर्दन मे च्छुपाए थी.

"नही,रंभा..",देवेन ने उसकी पीठ थपथपाई,"..और हुई भी तो मैं उसे डोर कर दूँगा."

"हूँ.",रंभा उस से & ज़ोर से चिपक गयी तो देवेन ने भी अपनी बाहो की कसावट को बढ़ा दिया.

"मैं शहर का चक्कर लगा के आता हू..",देवेन ने जूते के फीटे बाँधे & खड़ा हो गया,"..विजयंत,इधर आओ.",विजयंत मेहरा उसके पीछे-2 बंगल के उस कमरे मे गया जिसकी खिड़की से उनका पुराना घर दिखता था.रंभा भी उनके पीछे-2 वाहा आ गयी.देवेन दिन मे भी बाहर गया था & कुच्छ समान ले कर आया था जोकि कुच्छ कारटन्स मे कमरे मे ही रखे थे.अभी तैय्यार होने से पहले उसने इस बंगल के चारो तरफ सीक्ट्व कॅमरास लगाए थे.देवेन ने पहले कमरे की बड़ी खिड़की के पर्दे बराबर किए,फिर बत्ती जलाई & फिर कारटन्स को खोलना शुरू किया.

"देखो विजयंत,मेरा सोचना है कि समीर अभी भी रंभा को ढूँदने की कोशिश करेगा.कंधार वाले हादसे मे भी वो शक़ के दायरे मे है.मैं कोई भी बात चान्स पे छ्चोड़ना नही चाहता..",उसने कारटन्स खोल के मोटे पाइप सी चीज़ें & 1 स्टॅंड निकाल लिया था.कमरे मे मौजूद बाकी 2 लोग उसके निकाले समान को देख समझने की कोशिश कर रहे थे कि वो कर क्या रहा था,"..ये लो.",जब उसने स्टॅंड पे पाइप्स जैसी चीज़ो को जोड़ के लगाया तब दोनो की समझ मे आया कि वो हाइ पवर की दूरबीन थी,"..मैं चाहता हू कि तुम इस की मदद से हमारे पुराने घर पे नज़र रखो."

उसने 1 मेज़ खींच के उसी खिड़की के बगल की दीवार से लगाई & उसपे 1 लॅपटॉप रख के ऑन किया,"..इस लॅपटॉप के ज़रिए तुम घर के चारो तरफ लगे सीक्ट्व कॅमरास की फुटेज देख सकते हो."

"ध्यान रहे कमरे मे बिल्कुल अंधेरा होना चाहिए.इन 2 भारी पर्दो के बीच से बस दोर्बीन का लेंस निकला रहे & कंप्यूटर हमेशा इसी जगह पे रहे ताकि इस खिड़की की तरफ देखने वाले को बिल्कुल भी ये अंदाज़ा ना हो की इस कमरे मे कोई है भी.",विजयंत को उसने 1 कुर्सी पे बैठाके दूरबीन को उसके हिसाब से अड्जस्ट किया & फिर रंभा से मुखातिब हुआ,"..तुम्हे इसकी मदद करनी है & इस लॅपटॉप की फुटेज को चेक करती रहना..",1 एक्सटर्नल हार्ड डिस्क उस लॅपटॉप से जुड़ी थी,"..इस डिस्क मे सारी फुटेज रेकॉर्ड होती रहेगी बस तुम्हे इस बात का ख़याल रखना है कि तुम इसे बहकाओ ना.",देवेन मुस्कुराया & कमरे से बाहर चला गया.रंभा भी शोखी से मुस्कुराते उसके पीछे आई.

"इतने ताम-झाम की क्या ज़रूरत है?",उसने देवेन के सीने पे दोनो हाथ जमाए,"..हमने तो घर भी बदल लिया है.अब अगर कोई आएगा भी तो वो नाकाम हो के चला जाएगा."

"तुम्हारी बात ठीक है मगर मुझे उस इंसान की शक्ल देखनी है जो तुम्हे ढूँढने यहा आ सकता है.",उसने उसके गुलाबी गाल थपथपाए & उनके उपर झुक गया.1 लंबी किस के बाद बंगल के दरवाजे से देवेन के बाहर जाने के बाद उसने दरवाज़ा बंद कर लिया.

देवेन ने कार निकली & बंगल के मेन गेट पे ताला लगाया & वाहा से चला गया.आज उसका इरादा गोआ के सुनहरे बीचस पे बने शॅक्स & बार्स थे मगर वो वाहा शराब पीने या ऐश करने नही बल्कि 1 बहुत अहम काम से जा रहा था.आज सवेरे ही उसे अपने रशियन दोस्तो से पता चला था कि इज़्रेली माफिया 1 गाल पे निशान वाले बुड्ढे को ढूंड रहे हैं.उसे लग रहा था कि हो ना हो ये काम अमोल बपत का था & अब वो इस मामले से निपट बपत को हद्द रहने की चेतावनी देना चाहता था.मगर उसे रंभा & विजयंत की फ़िक्र थी & इसीलिए उसने घर के चारो तरफ कमेरे लगाए थे.

मगर केवल बपत ही नही था जो उसके पीछे इसरालियो को लगा सकता था,ये काम उस ड्रग सिंडिकेट का भी हो सकता था जिसका बालम सिंग हिस्सा था.अगर ऐसा था तब तो बड़ी अच्छी बात थी.उसे यकीन था कि दयाल किसी ना किसी तरह से अभी भी ड्रग्स के धंधे से जुड़ा था & इस तरह से भी वो उस तक पहुँच सकता था.दयाल की तलाश अब 2 रस्तो से हो रही थी.1 उसके ड्रग्स के धंधे के लिंक्स के रास्ते से & दूसरे बीसेसर गोबिंद नाम के 1 मौरीतियाँ के तलाश के रास्ते से.

"उउन्न्ञनह..!",वो लड़की आँखे बंद किए यू पड़ी थी जैसे बेहोश हो मगर उसी च्चटपटाहत उसके होश मे होने की गवाही दे रही थी.हक़ीक़त तो ये थी कि वो अपने जिस्म के रोम-2 से फुट रही मस्ती ने उसे बेसूध कर दिया था.वो बस 2 दिन पहले ही 19 बरस की हुई थी.6 महीने पहले ही उसका कुँवारापन टूटा था और आज जैसा तजुर्बा उसके लिए ना केवल नया था बल्कि बहुत नशीला & मदहोश करने वाला भी.रॉकी जैसा गतिला,जवान मर्द जोकि चुदाई का माहिर खिलाड़ी था उसे नंगी करने के बाद ना जाने कितनी देर तक उसके पूरे जिस्म की तारीफ करने के साथ उसे चूमता,सहलाता रहा था.कब उसके सख़्त हाथो की च्छुअन से हँसती,उस से च्छेदखानी करती वो इस हालत मे पहुँच गयी थी उसे पता ही नही चला था.

रॉकी उस लड़की से दोपहर को 1 बीच शॅक मे हो रही पार्टी मे मिला था.वो यहा अपनी सहेलियो के साथ छुट्टियाँ मना रही थी.2-3 मोकक्थाइल्स & 2 घंटो के बाद ही दोनो बीच के होटेल के 1 कमरे मे आ गये थे & इस खेल मे जुट गये थे.

1 लंबे अरसे तक उसकी चूत चाटने के बाद रॉकी उठा तो उस लड़की ने अड़खुली आँखो से उसे देखा.उसकी आँखो मे रॉकी से आगे बढ़ने की इल्टीजा थी.उसके लंड को चूस्ते वक़्त ही वो लड़की उसकी दीवानी हो गयी थी & अब रॉकी की हर्कतो के बाद उसके 8 इंच के लंबे & मोटे लंड को अपने अंदर लेने मे उसे कोई हिचक नही थी.उसका दिल लंड के आकार को देख घबरा तो गया था मगर अब उसे अपनी चूत मे लिए बिना उसे चैन भी तो नही पड़ने वाला था.

"आईियययययई..नहियीईईईईई....!",रॉकी अब तक उस से बड़ी नज़ाकत से पेश आ रहा था मगर अब जान-बुझ के उसने बेरेहमी से अपना लंड 1 ही झटके मे उसकी चूत मे जड तक घुसा दिया था.लड़की दर्द से चीखी,बेइंतहा गीलेपान के बावजूद उसे चूत मे बहुत ज़ोर का दर्द हुआ था.रॉकी के लंड ने उसकी चूत को पूरा फैला दिया था.उसे ऐसा लगा जैसे की कोई दूसरी बार उसका कुँवारापन तोड़ रहा हो मगर साथ ही उसे 1 अजीब सा,बड़ा अच्छा,भरा-2 एहसास हो रहा था.उसके जिस्म मे अजीब सी बेचैनी भर गयी & वो कसमसाने लगी & दर्द के कम होते ही अपनी कमर हिलाने लगी.

रॉकी अब तक लंड घुसाए बिल्कुल शांत बस अपनी कोहनियो पे उचका लड़की को देख रहा था.जैसे ही लड़की ने कमर हिलाई रॉकी ने उसकी चुदाई शुरू कर दी.लड़की के मज़े का तो कोई ठिकाना नही था.बस 2 धक्को मे वो झाड़ गयी & मस्ती मे सुबक्ती हुई,आहे भरती हुई कभी रॉकी के बाल तो कभी उसकी पीठ नोचते हुए उसकी कमर & टाँगो पे अपनी टाँगे चढ़ाते हुए उसकी चुदाई का लुत्फ़ उठाने लगी.

"हेलो..",रॉकी का मोबाइल बजा तो उसने उसे कान से लगाया,"..गुड..ओके,मैं आता हू.!",होटेल के फ्लोर मॅनेजर का फोन थे जिसने सीक्ट्व फुटेज से उस बुड्ढे की तस्वीर निकाल ली थी.रॉकी ने फोन किनारे रखा & लड़की के उपर लेट गया & उसकी छ्होटी मगर गोल & मुलायम चूचियो को मसल्ते हुए उसके पतले-2 होंठ चूस्ते हुए उसे चोदने लगा.

तो ये है वो शख्स जिसके साथ रंभा होटेल से गयी थी..रॉकी फ्लोर मॅनेजर की दी गयी सीडी को अपने लॅपटॉप मे देख रहा था.क्लिप कोई 60-65 सेकेंड की ही थी & 2-3 अलग-2 कॅमरास से ली गयी फुटेज को जोड़ के बनाई गयी थी.क्लिप मे रंभा जिस अंदाज़ मे उस बुड्ढे की कही किसी बात पेउस्की बाँह पकड़ के हंस रही थी,उस से तो सॉफ ज़ाहिर था की दोनो के बीच काफ़ी नज़दीकी ताल्लुक़ात थे.उसने सीडी को कवर मे डाल अपनी जेब के हवाले किया & यहेल से मिलने चल दिया.

देवेन अब तक इजराइलियो के कंट्रोल वाले 3 बार्स का चक्कर लाघा चुका था मगर तीनो मे से किसी मे उसने अपनी मौजूदगी से कोई सुगबुगाहट होते नही देखी.गोआ आने के बाद उसने 1 ही जुर्म किया था-अगर उसे जुर्म कहा जा सकता हो तो-& वो था बालम सिंग का क़त्ल..उसकी समझ मे नही आ रहा था कि आख़िर इसरएलियो को उसमे इतनी दिलचस्पी क्यू हो गयी?..पहाड़ो के ड्रग्स के धंधे मे भी ये गैर मुल्की घुसे हुए थे मगर क्या वाहा का सिंडिकेट & यहा का सिंडिकेट मिल के काम करते थे & फिर उन्हे ये पता कैसे चला कि वो ही बालम सिंग की मौत का ज़िम्मेदार था..फेणी की बू से वो अपनी सोच से बाहर आया.गोआ मे रहते उसे इतने बरस हो गये थे मगर उसे वाहा की शराब कभी रास नही आई थी.उसने बियर की छ्होटी बॉटल से 1 घूँट भरा..शॅक के 1 कोने मे बने डॅन्स फ्लोर पे काई लोग नाच रहे थे.वो पीते हुए उन्हे देख रहा था.उसने बालम सिंग वाले नज़रिए पे बहुत सोचा था & अब उसे लगने लगा था कि ये काम समीर का था..वो रंभा के साथ होटेल के कमरे मे 1 पूरी रात रहा था & उस कमरे का दोनो ने जो हाल किया था,उसके बाद तो दोनो की शकलें वाहा कयि लोगो को अच्छे से याद हो गयी होगी.ये 1 कमाल ही था कि कोई मीडीया वाला अभी तक रंभा मेहरा की ज़िंदगी से जुड़ी इस मसालेदार खबर सुन्घ्ता उसके घर तक नही पहुँचा था.

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क्रमशः.......

JAAL paart--74

gataank se aage......

"kya?!",deven bistar me uth baitha.vo bilkul nanga tha & rambha keval bra & panty me.vo uske clevage ko chumte hue uske pet ko sehla raha tha jab uske dimagh me Sameer ke Balbir Mohan ko rambha ko khojne ke kaam pe lagane & rambha ke us se nipatne vali baat aayi & usne us bare me us se puchha,"..& tumne use bata diya ki tum yaha ho goa me?!"

"haan..",rambha uth baithi,"..ab vo hume dhoondane nahi ayega.main janti hu use.vo sameer ko ye baat bata dega & fir is kaam ko karne se inkar dega."

"oh..rambha..tum itni badi galti kaise kar sakti ho?!",deven pareshan sa bistar se utar kamre me chehalkadmi karne laga.

"magar hua kya?..bataiye to?"

"rambha,sameer balbir ko nahi to kisi & ko bhejega tumhe dhoondane & kahi unhe tumhare sath-2 Vijayant Mehra ke bare me pata chal gaya to?",rambha uski bata samajh chintit ho gayi.

"rambha,mehra parivar me koi bhi shaq ke dayre se bahar nahi hai & maan lo sameer apne pita ke is haal ka zimmedar nahi hai to bhi..vo jab ye dekhega ki tum 1 sazayafta mujrim ke sath uske pita ko yaha chhupaye baithi ho to fir kya hoga?"

"ab kya karen?",rambha ghabra gayi thi.

"sochne do mujhe.",vo kamre me nanga hi chehalkadmi karne laga.koi 10 minute ke baad vo ruka,"apna saman sameto & fir vijayant ko bhi chalne ko taiyyar karo.",vo apne kapde pehanane laga & 1 bag me apnsa man daalne laga.rambha bistar se utri & uske kahe mutabik karne lagi.

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"ab yaha rehna hai hume..",usne apne ghar se doori pe bane agle bungle ke andar car ghusayi,"..par dhyan rahe,duniya ke liye sirf main yaha hu.tum dono me se koi bhi bahar nahi dikhna chahiye.ye lo chabhi..",usne rambha ko chabhiyo ka 1 guchha diya & jaldi se andar jao.vijayant,please ye saman uthao,main main gate lock kar ke aata hu.",kuchh der baad vijayant apne kamre me so raha tha & deven & rambha apne kamre me the.raat ke andhere ka fayda uthake vo sab ko chhupa ke yaha le aaya tha & ab uska tanav thoda kam hua tha.

"i'm sorry.",rambha uske pehlu me us se sat gayi & uske seene pe sar rakh diya.

"isme sorry ki kya baat hai?..ho jati hai galti."

"achha,1 baat puchhu?",rambha uske seene pe ungli chala rahi thi.

"kaisa bevkufana sawal hai!",deven ne uske gaal pe pyar se chapat lagayi,"..puchho kya puchhna hai."

"aap kaam kya karte hain?"

"tum sochti ho ki main koi galat kaam karta hu..hun?",usne mehbooba ke chehre ko seene se upar uthaya taki vo uski anakho me dekh sake.rambha ne dhire se nazre jhukate hue sar haan me hilaya.

"dekho,rambha.maine tumhe bataya tha na ki jail se nikalne ke baad maine har tarah ka dhandha kiya,kuchh sahi kuchh galat magar ab main koi galat kaam nahi karta.haan,apne inteqam ke liye & fir meri jana-pehchan to shuru se hi aise logo se rahi hai,main galat logo se milta rehta hu.unse comntact me bhi rehta hu magar ab main khud koi galat kaam nahi karta Baalam Singh jaise logo ko marne ke siwa.",rambha ne uske chehre pe pyar se hath firaya,"..maine Tamil Nadu me & fir yaha jo bhi paise kamaye unse yaha 5-6 properties kahridi hain & in 2 ko chhod ke..",uska ishara abhi-2 chhode makan & us bungle me tha jiske kamre me vo lete the,"..sabhi ko kiraye pe laga rakha hai.1 chhota sa fishery ka bhi dhandha hai.isi se kharcha chalta hai mera."

"aap ye to nahi soch rahe ki main aap pe shaq kar rahi thi ya fir aapko ga;lat samajh rahi thi?",

"nahi,main janta hu ki tumhare dil me bas sawal uth rahe the & ye kudrati baat hai."

"i love you,deven!",rambha uske gale se lag gayi to deven ne bhi use bahao me kas liya,"..meri galti se koi badi pareshani to nahi khadi hogi na?",vo deven ke daye kandhe ke upar apna chahra uski gardan me chhupaye thi.

"nahi,rambha..",deven ne uski pith thapthapayi,"..& hui bhi to main use door kar dunga."

"hun.",rambha us se & zor se chipak gayi to deven ne bhi apni baaho ki kasavat ko badha diya.

"Main shehar ka chakkar laga ke aata hu..",Deven ne jute ke phite bandhe & khada ho gaya,"..Vijayant,idhar aao.",Vijayant Mehra uske peechhe-2 bungle ke us kamre me gaya jiski khidki se unka purana ghar dikhta tha.Rambha bhi unke peechhe-2 vaha aa gayi.deven din me bhi bahar gaya tha & kuchh saman le kar aaya tha joki kuchh cartons me kamre me hi rakhe the.abhi taiyyar hone se pehle usne is bungle ke charo taraf cctv cameras lagaye the.deven ne pehle kamre ki badi khidki ke parde barabar kiye,fir batti jalayi & fir cartons ko kholna shuru kiya.

"dekho vijayant,mera sochna hai ki Sameer abhi bhi rambha ko dhoondne ki koshish karega.Kamdhar vale hadse me bhi vo shaq ke dayre me hai.main koi bhi baat chance pe chhodna nahi chahta..",usne cartons khol ke mote pipe si chizen & 1 stand nikal liya tha.kamre me maujood baki 2 log uske nikale saman ko dekh samajhne ki koshish kar rahe the ki vo kar kya raha tha,"..ye lo.",jab usne stand pe pipes jaisi chizo ko jod ke lagaya tab dono ki samajh me aaya ki vo high power ki doorbin thi,"..main chahta hu ki tum is ki madad se humare purane ghar pe nazar rakho."

usne 1 mez khinch ke usi khidki ke bagal ki deewar se lagayi & uspe 1 laptop rakh ke on kiya,"..is laptop ke zariye tum ghar ke charo taraf lage cctv cameras ki footage dekh sakte ho."

"dhyan rahe kamre me bilkul nadhera hona chahiye.in 2 bhari pardo ke beech se bas dorbin ka lens nikla rahe & computer humesha isi jagah pe rahe taki is khidki ki taraf dekhne vale ko bilkul bhi ye andaza na ho ki is kamre me koi hai bhi.",vijayant ko usne 1 kursi pe bithake doorbin ko uske hisab se adjust kiya & fir rambha se mukhatib hua,"..tumhe iski madad karni hai & is laptop ki footage ko check karti rehna..",1 external hard disk us laptop se judi thi,"..is disk me sari footage record hoti rahegi bas tumhe is baat ka khayal rakhna hai ki tum ise behkao na.",deven muskuraya & kamre se bahar chala gaya.rambha bhi shokhi se muskurate uske peechhe aayi.

"itne taam-jham ki kya zarurat hai?",usne deven ke seene pe dono hath jamaye,"..humne to ghar bhi badal liya hai.ab agar koi ayega bhi to vo nakaam ho ke chala jayega."

"tumhari baat thik hai magar mujhe us insan ki shakl dekhni hai jo tumhe dhoondne yaha aa sakta hai.",usne uske gulabi gaal thapthapaye & unke upar jhuk gaya.1 lambi kiss ke baad bungle ke darwze se deven ke bahar jane ke baad usne darwaza band kar liya.

deven ne car nikali & bungle ke main gate pe tala lagaya & vaha se chala gaya.aaj uska irada Goa ke sunehre beaches pe bane shacks & bars the magar vo vaha sharab pine ya aish karne nahi balki 1 bahut aham kaam se ja raha tha.aaj savere hi use apne russian dosto se pata chala tha ki israeli mafia 1 gaal pe nishan vale buddhe ko dhund rahe hain.use lag raha tha ki ho na ho ye kaam Amol Bapat ka tha & ab vo is mamle se nipat bapat ko haddme rehne ki chetavani dena chahta tha.magar use rambha & vijayant ki fikr thi & isiliye usne ghar ke charo taraf camere lagaye the.

magar keval bapat hi nahi tha jo uske peechhe israeliyo ko laga sakta tha,ye kaam us drug syndicate ka bhi ho sakta tha jiska Baalam Singh hissa tha.agar aisa tha tab to badi achhi baat thi.use yakin tha ki Dayal kisi na kisi tarah se abhi bhi drugs ke dhandhe se juda tha & is tarah se bhi vo us tak pahunch sakta tha.dayal ki talash ab 2 rasto se ho rahi thi.1 uske drugs ke dhandhe ke links ke raste se & dusre Bisesar Gobind naam ke 1 mauritian ke talash ke raste se.

"uunnnnhhhhhhhh..!",vo ladki aankhe band kiye yu padi thi jaise behosh ho magar usi chhatpatahat uske hosh me hone ki gawahi de rahi thi.haqeeqat to ye thi ki vo apne jism ke rom-2 se phut rahi masti ne use besudh kar diya tha.vo bas 2 din pehle hi 19 baras ki hui thi.6 mahine pehle hi uska kunwarapan tuta tha & aaj jaisa tajurba uske liye na keval naya tha balki bahut nashila & madhosh karne wala bhi.Rocky jaisa gathila,jawan mard joki chudai ka mahir khiladi tha use nangi karne ke baad na jane kitni der tak uske pure jism ki tarif karne ke sath use chumta,sehlata raha tha.kab uske sakht hatho ki chhuan se hansti,us se chhedkhani karti vo is halat me pahunch gayi thi use pata hi nahi chala tha.

rocky us ladki se dopahar ko 1 beach shack me ho rahi party me mila tha.vo yaha apni saheliyo ke sath chhuttiyan mana rahi thi.2-3 mocktails & 2 ghanto ke baad hi dono beach ke hotel ke 1 kamre me aa gaye the & is khel me jut gaye the.

1 lambe arse tak uski chut chatne ke baad rocky utha to us ladki ne adkhuli aankho se use dekha.uski aankho me rocky se aage badhne ki iltija thi.uske lund ko chuste waqt hi vo ladki uski deewani ho gayi thi & ab rocky ki harkato ke bad uske 8 inch ke lumbe & mote lund ko apne andar lene me use koi hichak nahi thi.uska dil lund ke aakar ko dekh ghabra to gaya tha magar ab use apni chut me liye bina use chain bhi to nahi padne wala tha.

"AAIIYYYYYEEEE..NAHIIIIIIIII....!",rocky ab tak us se badi nazakat se pesh aa raha tha magar ab jaan-bujh ke usne berehmi se apna lund 1 hi jhatke me uski chut me jud tak ghusa diya tha.ladki dard se chikhi,beintaha gilepan ke bavjud use chut me bahut zor ka dard hua tha.rocky ke lund ne uski chut ko pura faila diya tha.use aisa laga jaise ki koi dusri baar uska kunwarapan tod raha ho magar sath hi use 1 ajib sa,bada achha,bhara-2 ehsas ho raha tha.uske jism me ajib si bechiani bhar gayi & vo kasmasane lagi & dard ke kam hote hi apni kamar hilane lagi.

rocky ab tak lund ghusaye bilkul shant bas apni kohniyo pe uchka ladki ko dekh raha tha.jaise hi ladki ne kamar hilayi rocky ne uski chudai shuru kar di.ladki ke maze ka to koi thikana nahi tha.bas 2 dhakko me vo jhad gayi & masti me subakti hui,aahe bharti hui kabhi orcky ke baal to kabhi uski pith nochte hue uski kamar & tango pe apni tange chadhate hue uski chudai ka lutf uthane lagi.

"hello..",rocky ka mobile baja to usne use kaan se lagaya,"..good..ok,main aata hu.!",hotel ke floor manager ka fone the jisne cctv footage se us buddhe ki tasvir nikal li thi.rocky ne fone kinare rakha & ladki ke upar let gaya & uski chhoti magar gol & mulayam chhatiyo ko masalte hue uske patle-2 honth chuste hue use chodne laga.

To ye hai vo shakhs jiske sath Rambha hotel se gayi thi..Rocky floor manager ki di gayi cd ko apne laptop me dekh raha tha.clip koi 60-65 second ki hi thi & 2-3 alag-2 cameras se li gayi footage ko jod ke banayi gayi thi.clip me rambha jis andaz me us buddhe ki kahi kisi baat peuski banh pakad ke hans rahi thi,us se to saaf zahir tha ki dono ke beech kafi nazdiki tallukat the.usne cd ko cover me daal apni jeb ke havale kiya & Yahel se milne chal diya.

Deven ab tak israeliyo ke control vale 3 bars ka chakkar lagha chuka tha magar teeno me se kisi me usne apni maujudgi se koi sugbugahat hote nahi dekhi.Goa aane ke baad usne 1 hi jurm kiya tha-agar use jurm kaha ja sakta ho to-& vo tha Baalam Singh ka qatl..uski samajh me nahi aa raha tha ki aakhir israeliyo ko usme itni dilchaspi kyu ho gayi?..pahado ke drugs ke dhandhe me bhi ye gair mulki ghuse hue the magar kya vaha ka syndicate & yaha ka syndicate mil ke kaam karte the & fir unhe ye pata kaise chala ki vo hi baalam singh ki maut ka zimmedar tha..feni ki bu se vo apni soch se bahar aaya.goa me rehte use itne baras ho gaye the magar use vaha ki sharab kabhi raas nahi aayi thi.usne beer ki chhoti bottle se 1 ghunt bhara..shack ke 1 kone me bane dance floor pe kayi log nach rahe the.vo pite hue unhe dekh raha tha.usne baalam singh vale nazariye pe bahut socha tha & ab use lagne laga tha ki ye kaam Sameer ka tha..vo rambha ke sath hotel ke kamre me 1 puri raat raha tha & us kamre ka dono ne jo haal kiya tha,uske baad to dono ki shaklen vaha kayi logo ko achhe se yaad ho gayi hogi.ye 1 kamal hi tha ki koi media wala abhi tak Rambha Mehra ki zindagi se judi is masaledar khabar sunghta uske ghar tak nahi pahuncha tha.

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kramashah.......