कामुक-कहानियाँ ससुराल सिमर का compleet

Discover endless Hindi sex story and novels. Browse hindi sex stories, adult stories ,erotic stories. Visit skoda-avtoport.ru
raj..
Platinum Member
Posts: 3402
Joined: 10 Oct 2014 01:37

Re: कामुक-कहानियाँ ससुराल सिमर का

Unread post by raj.. » 11 Oct 2014 03:12

ससुराल सिमर का—4

गतान्क से आगे……………

मैंने उन्हें मन भर के चोदा कभी उनका मुँह चूसता तो कभी चुची मुँह में ले लेता माँ को भी खूब देर चुदाने का शौक था इसलिए मुझे बिना झडे घंटों चोदने की आदत थी जब पहली बार शन्नो जी झडी तो सिहरकर मुझे चिपटा लिया "हाय राजा, मार डाला रे, तू तो बड़ा जुल्मी है बेटे"

मैंने और कस के धक्के लगाते हुए कहा "ठहर जाओ रंडी सासूजी, अभी क्या हुआ है, आज आपके भोसडे को इतना चौड़ा कर दूँगा कि आपके दोनों बेटे फिर उसमें घुस जाएँगे"

आधे घंटे चोदने के बाद मैं झडा तब तक चोद चोद कर शन्नो जी की हवा टाइट कर दी थी बाद बाद में तो वे रीरियाने लगी थीं "अब छोड़ दे रे बेटे, रुक जा ओ गान्डू, अब नहीं रहा जाता, कितना चोदेगा? आदमी है या घोडा?" पर मैंने उनका मुँह दबोच कर चोदना चालू रखा

बाद में सुसताने के बाद वे बोलीं "तू तो हीरा है रे हीरा, अब यहीं रह मेरी चूत में घर ना जा, तेरी अम्मा ने बहुत चुदा लिया, अब हमारी सेवा कर इतनी भयानक चुदाई बहुत दिनों में नसीब हुई है"

मैं भी उनकी चुची मुँह में लिए पड़ा था, उनके खजूर जैसे निपल को चूस रहा था क्या औरत थी! एकदम माल था! तभी पीछे से आवाज़ आई "लो अम्मा, तुम शुरू हो गयीं? मुझे मालूम था, ऐसे चिकने छोकरे को तुम क्या छोडोगी" पीछे देखा तो जेठजी खड़े थे मुझे अटपटा लगा और मैं उठने लगा तो बोले "अरे लेटा रहा यार, मज़ा कर, हमारी अम्मा भी चीज़ है, सब को नसीब नहीं होती"

शन्नो जी ने उनसे पूछा "हो गया तुम लोगों का? बहू सोई या नहीं? तुम लोग आ रहे हो यहाँ?"

"अरे वो रांड़ क्या सोएगी इतनी जल्दी! अभी अभी लंड चुसवा कर आ रहा हू अब रजत चुसवा रहा है इसके बाद एक बार और चोदेम्गे तब सोएगी साली आज अम्मा तुम आमित को निचोड़ लो रात भर, नया नया लौंडा है, तुम मज़ा कर लो अकेले में, मैं चलता हू, वहाँ वो साली रंडी फिर तडप रही होगी" रजत चले गये

मैंने अंमाजी की ओर देखा "तो अंमाजी, यहाँ भी "

मेरी बात काटकर वी बोलीं "तो क्या, तुझे लगता है कि तू ही एक मादरचोद है? अरे मेरे बेटों को तो मैं बचपन से साथ सुलाती हू रजत तो शादी नहीं कर रहा था, बोलता था क्या फ़ायदा, अम्मा से बढ़िया चुदैल कहाँ मिलेगी पर तेरी बहन का रिश्ता आया तो मैंने मना लिया सिमर को देखकर ही मैं समझ गयी थी कि हरामी छोकरी है, बहुत चुदवायेगी अब देख सब कैसे खुश हैं"

मैंने फिर पूछा "तो अब आप लोग क्या करते हो साथ साथ दीदी के आने के बाद?"

वी बोलीं "सब समझ जाएगा अब इधर आ, मैं लंड चूस कर खड़ा कर देती हू, आज तो रात भर चुदवाऊन्गि तुझसे"

उस रात मैंने मांजी को दो बार और चोदा सोने में रात के तीन बाज गये एक बार शन्नो जी ने मुझपर चढ कर चोदा और एक बार मैंने पीछे से कुतिया स्टाइल में उनकी ली जब वे मुझपर चढ कर उचक रही थीं तो उनकी उछलती चूचिया देखते ही बनती थीं कुतिया स्टाइल में भी उनके मम्मे लटक कर ऐसे डोल रहे थे जैसे हवा में पपीते पीछे से उनकी चौडी मुलायम गान्ड को देखकर मेरा मन हुआ था कि गान्ड मार लूँ पर उन्होंने मना कर दिया

सुबह सब देर से उठे रविवार था इसलिए छुट्टी थी नाश्ते के टेबल पर सब ऐसे बोल रहे थे जैसे कुछ हुआ ही ना हो मैं ही कुछ शरमा रहा था सोच रहा था कि रात की बातें सपना तो नहीं थे वे मेरी परेशानी देख कर हँस रहे थे जीजाजी ने प्यार से समझाया "अमित, अब दोपहर को देखना, कल का तो कुछ भी नहीं था"

दीदी हँस रही थी "सम्हल कर रहना आमित भैया, यहाँ तो सब एक से एक हैं अम्माजी को ही देखो, जब से तेरे बारे में बताया, यहीं बोलती थीं कि अरे बुला लो उस छोरे को अच्छा हुआ तू कल आ गया नहीं तो कोई तुझे लेने आ जाता"

नाश्ते के बाद सब फिर दो घंटे को सो लिए रात भर की थकान जो थी दोपहर के खाने के बाद जब घर के नौकर चले गये तो सब दीदी के बेडरूम में जमा हुए मैंने देखा कि वहाँ का पलंग दो डबल बेड के बराबर का था सात आठ लोग सो जाएँ इतना बड़ा

कमरे में आकर सब ने कपड़े उतारना शुरू कर दिए सब से पहले अम्माजी और दीदी नंगी हो गयीं दीदी की जवान मादक जवानी और शन्नो जी का मोटा गोरा पके फल सा बदन देख कर मेरा तन्ना गया था पर मैं कपड़े निकालने में सकुचा रहा था उधर जीजाजी और जेठजी भी नंगे हो गये अच्छा ख़ासे हैम्डसम थे दोनों, रजत का कसरत किया हुआ शरीर था और दीपक जीजाजी का शरीर अच्छा चिकना छरहरा नाज़ुक सा था! दोनों के लंड खड़े थे, जीजाजी का करीब छह इंच का होगा रजत का करीब मेरे जितना, याने साढ़े सात आठ इंच का होगा पहली बार पास से मैं नंगे जवान लंडों को देख रहा था, एक अजीब सा रोमांच मुझे होने लगा

कपड़े निकालने की मेरी हिचकिचाहट देखकर शन्नो जी बोलीं "अरे बहू, शरमा रहा है तेरा भाई, तू ही निकाल दे इसके कपड़े"

दीदी लचकते हुए मेरे पास आई "क्या शरमाते हो भैया लड़कियों जैसे, चलो निकालो" उसने मुझे नंगा कर दिया

जीजाजी ने सीटी बजाई "साले, तेरा लंड तो एकदमा जोरदार है, तभी अम्मा कल हमारे कमरे में नहीं आईं, मज़ा ले रही थी अकेले अकेले"

शन्नो जी ने मुझे पकडकर एक कुर्सी पर बिठा दिया "रस्सी लाओ बहू या रूको, रस्सी नहीं, दो तीन ब्रा ले आ, तेरी और मेरी" दीदी जाकर अलमारी से ब्रा निकाल लाई घर में तो वे दोनों शायद पहनती ही नहीं थीं

दीदी और उसकी सास ने मिलकर ब्रा से मेरे हाथ और पाँव कुर्सी के पैरों से बाँध दिए बड़ा मज़ा आ रहा था, उन रेशमी मुलायम ब्रा का स्पर्श ही मुझे मदहोश कर रहा था शन्नो जी मुझे छूआ कर बोलीं "घबरा मत बेटे, ज़रा तरसाना चाहते हैं तुझे अब बैठ और हमारा खेल देख देख कैसे हमारा परिवार आपस में प्यार करता है ज़रा मज़ा ले, फिर तुझे भी परिवार में शामिल कर लेंगे" दीदी ने मुझे देखा और मुँह बना कर चिढाने लगी कि ले भुगत

अम्माजी ने उसे पकडकर पलंग पर खींचते हुए कहा "आजा बहू, यहाँ लेट जा रजत, दीपक, आओ, साले राजा को दिखाओ कि हम उसकी बहन को कितना प्यार करते हैं, ससुराल में उसका कितना ख़याल रखते हैं"

दीदी को पलंग पर लिटा के शन्नो जी ने उसे बाँहों में भर लिया और चूमने लगीं "मेरी बेटी, मेरी दुलारी, तेरे कारण इस घर में रौनक आ गयी है, आ मुझे अपना चूमा दे एक मीठा सा"

सिमर दीदी ने अपनी सास के गले में बाँहें डाल दीं और उनका मुँह चूमने लगीं जीजाजी और जेठजी उनके पास में बैठ कर दीदी के शरीर को सहलाने लगे दोनों ने एक एक मम्मा मुँह में लिया और दबाते हुए चूसने लगे रजत ने दो उंगलियाँ दीदी की चूत में डाल दीं दीदी अब अपना मुँह खोल कर शन्नो जी की जीभ चूस रही थी

मन भर के दीदी को अपनी जीभ चुसवाकर अम्माजी उठीं मुझे बोलीं "देख, कैसे तेरी बहन कैसी प्यासी है मेरे चूबनों की, अब इसे अपनी बुर का प्रसाद देती हू तेरे सामने, बड़ी भाग्यवान है तेरी बहन जो अपनी सास की बुर से प्रसाद पाती है रोज दीपक तू बहू की बुर चूस, गरम कर, देख झडाना नहीं, उसका पानी बाद के लिए रख, तू लेटी रह बेटी, मैं आती हू तुझे तेरा मन पसंद रस चखाने को"

दीदी के सिर को तकिये पर रख कर शन्नो जी उसके दोनों ओर घुटने टेक कर बैठ गयीं और अपनी चूत को दीदी के मुँह में दे दिया दीदी उसे ऐसे चूसने लगी जैसे जनम जनम की प्यासी हो मुझे अब शन्नो जी के महाकाय गोरे चूतड दिख रहे थे जो धीरे धीर उपर नीचे हो रहे थे वे दीदी के मुँह को चोद रही थीं "अरी ओ रांड़, भूल गयी मैंने जो सिखाया था, जीभ डाल मेरी चूत में और चोद, ज़रा मुझे भी तो तेरी जीभ को चोदने का मौका मिले"

रजत जीजाजी सिमर दीदी के मम्मों को दबाते और चूसते रहे रजत खिसककर दीदी की टाँगों के बीच आ गये और उसकी बुर पर जीभ चलाने लगे शन्नो जी ने दीदी की जीभ को पाँच मिनिट चोदा और फिर सिसककर उठ बैठीं "हट रजत, अब तू बहू के मम्मे दबा, दीपक, अपनी पत्नी को अपना लंड दे चूसने को" और खुद रजत की जगह लेकर दीदी की बुर को चाटने लगीं "आमित बेटे, बड़ी मीठी है रे तेरी बहन, तुझे तो मालूम है, अरे हम तीनों को इसकी बुर का ऐसा चसका लगा है कि स्वाद लिए बिना मज़ा ही नहीं आता"

क्रमशः………………

raj..
Platinum Member
Posts: 3402
Joined: 10 Oct 2014 01:37

Re: कामुक-कहानियाँ ससुराल सिमर का

Unread post by raj.. » 11 Oct 2014 03:13

ससुराल सिमर का—5

गतान्क से आगे……………

दीदी की यहाँ मीठी हालत देखकर मैं पागल सा हो गया था लंड लोहे जैसा हो गया था उधर वे चारों भी अब फनफना रहे थे अम्माजी ने जेठजी का लंड मुँह में ले लिया और दीदी की बुर में अपनी उंगलियाँ अंदर बाहर करने लगीं जीजाजी अब दीदी को लंड चुसाते हुए अपनी माँ की बुर चूस रहे थे चारों शरीर ऐसे आपस में उलझे थे कि पता ही नहीं चल रहा था कि कौन क्या कर रहा है

शन्नो जी बोलीं "अब नहीं रहा जाता चलो शुरू करो ठीक से तुम दोनों नालायको, चलो आओ और ठीक से हम दोनों औरतों की सेवा शुरू करो" जीजाजी ने लंड दीदी के मुँह से निकाला और अपनी माँ से चिपट कर उनकी चुचियाँ चूसने लगे और रजत दीदी पर चढ कर उसके मम्मे दबाते हुए उसे चूमने लगे

जल्द ही फिर लंड और बुर चूसाई शुरू हो गयी रजत अपनी माँ की बुर चूस रहे थे दीदी उनका लंड चूस रही थी और जीजाजी दीदी की बुर में मुँह डाले पड़े थे बार बार वे जगह बदल लेते, बस चुदाई नहीं कर रहे थे

शन्नो जी ने दीदी की कमर में हाथ डाल कर उसे अपनी ओर खींचा "बहू, अब अपनी बुर का पानी पिला दे तरीके से, परसों चुसी थी, तरस गयी तेरे जवान रस को, और रजत, तू आजा, मेरी चूत चूस ले, आज बहुत पानी पिलाऊन्गि तुझे और दीपक बेटे, आ अपना लंड दे दे मेरे मुँह में"

आधे घंटे यही कार्यक्रमा चलता रहा मांजी ने मन भर कर दीदी की बुर चुसी दीदी उनके सिर को जांघों में जकड कर धक्के मार रही थी "चूसो सासूमा, अरे तेरी यह बहू तेरे को इतना अमृत पिलाएगी कि तीरथ जाने की ज़रूरत नहीं पडेगी चल छिनाल, जीभ डाल अंदर, जीभ से चोद मुझे रांड़"

रजत जीजाजी अपनी माँ के सिर को अपने पेट से चिपटाकर चोद रहे थे "तेरा मुँह चोदू मेरी छिनाल माँ, क्या साली का गला है नरम नरम, अभी तेरे को मलाई खिलाता हू अपने लौडे की"

रजत जीजाजी जल्द ही झड गये उनका लंड खाली करके शन्नो जी बोलीं "इतने से क्या होगा बेटे, दीपक तू उपर आ जा, काफ़ी बुर का शरबत पी लिया मेरा, अब मुझे मलाई खिला बहू तू अब अपनी सासूमा का और प्रसाद ले ले, जल्द कर छिनाल, मेरे सिर को कैसे अपनी टाँगों में दबा रही थी, अब तेरा मैं क्या हाल करती हू देख रंडी की औलाद रजत, तूने मज़ा ले लिया ना, अब अपनी बीबी की चूत चूसकर ज़रा विटामिन पा ले"

रजत का लंड उन्होंने मुँह में लिया और अपनी टाँगें फैलाकर दीदी का मुँह अपनी बुर से सटा दिया फिर कस के उसे अपनी मोटी मोटी जांघों में भींचकर पैर चलाने लगीं दीदी के मुँह से गों गों की आवाज़ निकलने लगी वह अम्माजी के पैरों को अलग करके अपना सिर छुड़ाने की कोशिश करने लगी पर शन्नो जी की मोटी मोटी जांघों की ताक़त का उसे अंदाज़ा नहीं था आख़िर उसने हार मान ली और चुपचाप शन्नो जी की बुर में मुँह दिए पडी रही रजत को अपनी बुर चुसवाते हुए उसने अम्माजी के चूतडो को बाँहों में भर लिया

आख़िर शन्नो जी ने सब को रुकने को कहा जब वे चारों अलग हुए तो मैं पागल होने को था शन्नो जी को पुकार कर मैंने मिन्नत की "अम्माजी, मैं मर जाऊन्गा, मुझे छोडो, अब चोदने दो, किसी को भी चोदने दो"

सब उठकर मेरे पास आए वे सब भी बुरी तरह मस्त थे रजत जेठजी और दीपक जीजाजी अपने अपने लौडे हाथ में लेकर मुठिया रहे थे दीदी की साँस तेज चल रही थी, वह अपने ही मम्मे दबा रही थी मांजी अपनी बुर में उंगली कर रही थीं मेरे पास आईं और बोलीं "चलो सब तैयार हैं मैच खेलने को, अब इस लौम्डे का क्या करें? ये भी पूरा तैयार है, लंड देख, घोड़े जैसा हो गया है"

सब बारी बारी से मेरे लंड को हाथ में लेकर देखने लगे ख़ास कर रजत और दीपक ने तो बड़ी देर तक उसे हाथ में लेकर मुठियाया "क्या जानदार जानवर है सिमर! अम्मा, इसे किसके किस छेद में डालें, जहाँ भी जाएगा, तकलीफ़ भी देगा और मज़ा भी देगा" रजत बोले

शन्नो जी बोलीं "इसी से पूछते हैं, अमित, पहले एक वायदा कर तब छोड़ूँगी तुझे"

मैंने मचल कर कहा "कुछ भी करा लो मुझसे अम्माजी, आपकी गुलामी करूँगा जनम भर, बस रहम करो, ये लंड मार डालेगा अब"

शन्नो जी बोलीं "अपनी माँ को यहाँ ले आना अगले हफ्ते, बेचारी मेरी समधन ही अकेली है उधर फिर जुडेगा पूरा कुनबा, तीन मर्द, तीन औरतें मुझे भी समधन से ठीक से गले मिलना है, शादी में तो कुछ भी बातें नहीं कर पाई"

सिमर दीदी अपनी चूत में उंगली करते हुए बोली "हाँ भैया, ले आओ अम्मा को, तीन महने हो गये उसका प्रसाद पाए इन लोगों को भी माँ का प्रसाद मिल जाए तो मुझे अच्छा लगेगा" फिर आँख मार कर हँसने लगी

दीपक जीजाजी बोले "अरे हाँ भाई, हमें भी तो अपनी सास की सेवा करने दो, दोनों भाई मिलकर उनकी खूब सेवा करेंगे, है ना भैया?"

रजत बोले "बिलकुल, शादी में देखा था, बड़ी सुंदर हैं बहू की माताजी, मैं तो अपनी अम्मा मान लूँगा उनको"

मेरा हाल और बुरा हो गया कल्पना की कि ये सब मिलके माँ के साथ क्या करेंगे, तो ऐसा लगा कि लंड सूज कर फट जाएगा

"तो बोल माँ को ले आएगा?" अंमाजी ने पूछा मैंने मूंडी हिलाकर हाँ कहा दीदी ने सब ब्रा खोल दीं मैं उठा और लंड हाथ में लेकर खड़ा हो गया शन्नो जी की ओर देखने लगा कि कौन मुझे गले लगाएगा?

वे दीदी को बोलीं "इतने दिनों से भाई मिला है, तू भाई के साथ मज़ा कर बहू दीपक को भी साथ ले ले, जीजा साले को भी आपस में मिलने दे मैं रजत बेटे को कहती हू कि ज़रा माँ की सेवा करे आ रजत"

रजत ने शन्नो जी की कमर में हाथ डाल कर उठा लिया और चूमते हुए पलंग पर ले गये मैं देखता ही रह गया, इतनी आसानी से उनका अस्सी किलो का बदन रजत ने उठाया था कि जैसे नई नवेली दुल्हन हो शन्नो जी मेरे इस अचरज पर हँस कर बोलीं "अरे बचपन से ये दोनों उठाते हैं मुझे ऐसे ही पहले मैं दुबली थी अब मोटी हो गयी हू पर रजत अब भी अपनी अम्मा को उठा लेता है हाँ बेचारा दीपक ज़रा नाज़ुक है, अब उठाने में थक जाता है"

रजत ने अपनी माँ को पलंग पर पटका और चढ बैठा सीधे लंड चूत में डाला और शुरू हो गया "अरे मादरचोद, सीधे चोदने लग गया, माँ की बुर नहीं चूसेगा आज?" अम्माजी ने उलाहना दिया

"अम्मा, बाद में दीपक या आमित से चुसवा लेना या फिर तेरी बहू से, वो तो हमेशा तैयार रहती है, आज तो मैं तुझे घंटे भर बस चोदून्गा कल रात अमित तुझे चोद रहा था, वो देखकर मुझे ख़याल आया की मैंने तुझे तीन चार दिन से नहीं चोदा" कहकर रजत ने मुँह में माँ के होंठ लिए और हचक हचक कर चुदाई शुरू कर दी

दीदी मेरा हाथ पकडकर पलंग पर ले गयी "तू चूत चूस ले रे मेरे राजा पहले, बहुत दिन से बुर का पानी नहीं पिलाया तुझे पहले चूस ले, अभी सॉफ माल है मेरी चूत में, बाद में चुद कर स्वाद बदल जागेगा" वो पलंग के छोर पर पैर फैला कर बैठ गयी और मैंने सामने नीचे बैठ कर उसकी बुर में मुँह डाल दिया इतने दिनों बाद दीदी की बुर का रस मिला, मैं निहाल हो गया

जीजाजी मेरे साथ नीचे बैठ गये और एक हाथ मेरी पीठ पर फिराने लगे "आराम से चाट साले, मज़ा ले अपनी बहन की चूत के पानी का लंड तेरा बहुत मस्त है, इतना मस्त लंड नहीं देखा" उनका दूसरा हाथ मेरे लंड को पकडकर मुठिया रहा था इतने प्यार से वे कर रहे थे कि मैं झडने को आ गया "अरे हरामी, साले को झडा मत अभी, मुझे चुदवाना है" दीदी ने उन्हें मीठी गाली दी

क्रमशः………………

raj..
Platinum Member
Posts: 3402
Joined: 10 Oct 2014 01:37

Re: कामुक-कहानियाँ ससुराल सिमर का

Unread post by raj.. » 11 Oct 2014 03:14

ससुराल सिमर का—6

गतान्क से आगे……………

दीदी ने झडकर अपना पानी मेरे मुँह में फेका और उसे फटाफट पी के मैं उठ कर खड़ा हो गया "चल दीदी, अब गान्ड मरा ले आज मैं तुझे चोदून्गा नहीं, गान्ड मारूँगा कल मांजी को बहुत चोदा है, अब गान्ड की भूख है मुझे"

"गांडे तुझे बहुत मिलेंगी साले, हाँ चूते दो ही हैं आज अपनी बहन को चोद ले, तू इधर आ रंडी" कहकर जीजाजी पलंग के सिरहाने से टिक कर बैठ गये सिमर के बाल पकडकर उसका सिर अपनी गोद में खींचा और लंड उसके मुँह मे ठूस दिया "अमित, पीछे से चढ जा साली पर"

मैंने दीदी की कमर में हाथ डाल कर उठाया और उसे घुटनों और हाथों पर कर दिया उसके पीछे घुटने टेक कर एक बार प्यार से उसकी चूत को चूमा, बहुत दिन बाद मेरी प्यारी को पास से देखा था फिर लंड अंदर उतार दिया दीदी की मखमली म्यान ने मेरे लंड को दबोच लिया, जैसे कह रही हो, आजा प्यारे, बहुत दिन में मिले हैं दीदी के कूल्हे पकडकर मैं चोदने लगा

जीजाजी बोले "अरे चढ जा यार उसपर, जवान है, तेरा वजन सह लेगी मैं और रजत अक्सर चढते हैं, बड़ी मस्त घोडी है माँ की बात अलग है, उसकी उमर अब हो गयी है इसलिए वजन नहीं झेल पाती, नहीं तो जवानी में तो मुझे और रजत को खूब सवारी कराती थी

मैंने झुक कर अपना वजन दीदी पर डाल दिया और पैर उठाकर उसकी कमर के इर्द गिर्द जकड लिए दीदी आराम से मेरे वजन को संभालती हुए चुदवाती रही, चू तक नहीं की, वैसे उसका मुँह जीजाजी के लंड से भरा था मैं उसके मम्मे पकडकर दबाते हुए कस के चोदने लगा क्या आनंद आ रहा था जीजाजी की मन ही मन दाद दी क्या आसन सिखाया था मेरी बहन को

अब जीजाजी का सिर मेरे सामने था, एक फुट दूर उनकी आँखों में अजब खूआरी थी बोले "उधर देख, माँ बेटे की क्या जोरदार चल रही है" देखा तो पलंग के दूसरे छोर पर रजत अपनी माँ को कस कर चोद रहे थे शन्नो जी ने अपनी मोटी टाँगें उनके चूतडो के इर्द गिर्द समेट ली थीं और चूतड उछाल उछाल कर चुदवा रही थीं

तभी जीजाजी ने मेरा गाल चूम लिया फिर मेरे सिर को हथेलियों में ले कर मेरे होंठ चूमने लगे मैं सिहर उठा पहला मौका था कि किसी मर्द ने चूमा था पर अब मैं इतना मस्ती में था कि मुझे ज़रा भी हिचकिचाहट नहीं हुई आँख बंद करके मैं उनके चूमने का जवाब देने लगा जीजाजी के मुँह और गालों से बड़ी प्यारी खुशबू आ रही थी, लगता है इत्र या आफ्टर शेव की थी अब मैं झडने को था इतना मज़ा आया कि मैंने जीजाजी के होंठ दाँतों में पकड़ लिए फिर कसमसा कर झड गया

मेरे लस्त हुए बदन को सहारा देते हुए जीजाजी ने अपनी जीभ से मेरा मुँह खोला और मेरी जीभ मुँह में लेकर चूसने लगे साथ ही अपने चूतड उछालने लगे वे भी झडने को आ गये थे एक आख़िरी धक्के के साथ वे सिमर दीदी के मुँह में झड गये

कुछ देर बाद मैंने जीजाजी के मुँहसे अपना मुँह हटाया और उठ कर बाजू में बैठ गया दीदी को नीचे लिटा कर जीजाजी ने उसकी बुर में मुँह डाल दिया जीभ निकाल कर उसे चाटने लगे मैं देखने लगा मेरा सफेद वीर्य दीदी की चूत में से बह रहा था जीजाजी ने उसे पहले चाटा और फिर बुर चूसने लगे

उधर दीदी ने मुझे इशारा किया कि पास आऊ और उसे चूम्मा दू उसका मुँह बंद था मैंने जैसे ही उसके मुँह पर अपने होंठ रखे, उसने मुँह खोल कर जीजाजी का थोड़ा वीर्य मेरे मुँह में छोड़ दिया मैं थूक ना दूं इसलिए मेरे मुँह को वो अपने मुँह से जकडे रही आँखों से मुझे इशारा किया कि निगल जाऊ बहुत बदमाश थी, हँस रही थी कि कैसा उल्लू बनाया मैंने मन कड़ा किया और निगल गया चिपचिपा खारा स्वाद था मुझे बुरा नहीं लगा आख़िर ऐसी धुआँधार चुदाई में कुछ भी जायज़ है ऐसा मैंने सोचा

उधर रजत भी अब झड गये थे मांजी टाँगें पसार कर पडी थीं बोलीं "इधर आओ अमित बेटे" मैं उठ कर पास गया रजत ने अचानक झुक कर मेरा झडा लंड मुँह में ले लिया और चूसने लगे सॉफ करने के बाद बोले "अमित, तेरी दीदी का माल लगा था इसपर, कौन छोडेगा इस खजाने को? वैसे थोड़ी मलाई तेरी भी थी, बहू की बुर के शहद में मिलकर बहुत मस्त लग रही थी" फिर उठकर सरककर दीदी के पास पहूच गये "लो रानी, मलाई तो गयी माँ की बुर में, तू लंड चूस कर संतोष कर ले"

उनका झडा लंड मुँह में लेकर दीदी चूसने लगी जीजाजी अब भी उसकी बुर जीभ से टटोल रहे थे रजत बोले "अरे छोटे, अपने साले की मलाई इतनी अच्छा लगी कि अब चूत में गहराई से घुस कर कतरे ढूढ रहा है"

मैं मांजी के पास पहूचा तो उन्होंने मेरी गर्दन पकडकर अपनी टाँगों के बीच मेरा सिर दबा दिया "चल, चाट ले, बहुत पानी बहाया है आज मैंने" उनकी बुर से गाढी सफेद मलाई टपक रही थी रजत का वीर्य था! मैं हिचकिचाया तो मेरा कान पकडकर बोलीं "अरे मेरा गुलाम बनकर रहने वाला था ना तू भोसडीवाले, चल, अपनी मालकिन का हुकुम मान सॉफ कर चुपचाप, और कोई बेकार चीज़ नहीं चखा रही हू, मस्त मर्दाना मलाई चखा रही हू तुझे"

मैंने जीभ निकाली और चाटने लगा बुर का और वीर्य का मिला जुला स्वाद था खराब नहीं था पास से उस बुरी तरह चुदी हुई लाल लाल बुर का नज़ारा भी ऐसा था कि मैं अपने आप को रोक नहीं पाया और चाटने लगा

पूरी बुर चटवाने पर शन्नो जी ने उंगलियों से चूत चौडी की और बोली "अभी और है, जीभ डाल" लाल लाल भोसडे के अंदर सफेद सफेद कतरे फँसे थे मैं जीभ डाल डाल कर चूसने लगा मांजी अब भी गरम थीं मेरा सिर पकडकर मेरे मुँह को अपनी चूत पर घिसने लगीं एक बार फिर झड कर ही मुझे छोड़ा मुझे अपनी गोद में खींच लिया और चूमते हुए पूछा "मज़ा आया?"

मैंने हामी भरी फिर मन ना माना तो धीमे स्वर में पूछा "अम्माजी, ये जीजाजी ने मेरा चूम्मा लिया फिर दीदी ने उनका वीर्य पूर निगले बिना ही मुझे चूम लिया रजत ने मेरा लंड चूस लिया, दीदी के बुर के पानी के लिए आप ने भी अपनी बुर चुसवाई जब की उसमें रजत का वीर्य था मैंने नहीं सोचा था कि ऐसा कुछ भी होता है"

मांजी हँसने लगीं "अरे तू भोला है रजत असल में तेरे लंड का स्वाद लेना चाहता था, बहू की चूत के पानी का तो बहाना था तेरी बहन ने भी जान बुझ कर तुझे अपने पति की मलाई चखाई, तुझे बता रही थी कि कितनी जायकेदार है इसीलिए तो रोज पीती है मैं भी तुझे अपने बड़े बेटे की मलाई चखाना चाहती थी, बुर चुसवाने का तो बहाना था और दीपक ने तुझे चूमा, उसमें क्या बात है, तू अच्छा खूबसूरत लौंडा है, उसका मन नहीं माना"

मैं चुप रहा शन्नो जी आगे बोलीं "तुझे भी अच्छा लगा ना? झूट मत बोल, देख तेरा लंड कैसे सिर उठाने लगा है अरे बेटे, जब पाँच पाँच नंगे बदन मिलेंगे तो किसे फरक पड़ता है कि कौन मर्द है कौन औरत और बुर की चासनी और लंड की मलाई का चस्का एक बार लग गया तो और कुछ अच्छा नहीं लगता"

क्रमशः………………