आरती की वासना compleet

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rajaarkey
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Re: आरती की वासना

Unread post by rajaarkey » 13 Oct 2014 09:55

आरती की वासना-3

लेखिका: आरती शर्मा

पूजा को मंगल पे गुस्सा आया क्योंकि उसने पूजा को कई बार लड़कों के साथ देखा था और पूजा ने देखा कि मंगल की आँखें उसकी चूचियों पे टिकी थीं। पूजा जसवंत की और देखते हुए बोली, “क्या... क्या पता है मंगल? और सर ऐसा क्यों कह रहे हैं आप कि मामला खराब हो गया है? कौन सा मामला खराब हुआ है? मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है।” जसवंत आरती को वासना भरी नज़रों से देखते हुए बोला, “पूजा तेरा चाल-चलन दिन-ब-दिन खराब हो रहा है, तू लेक्चर बँक करती है, अवारा लड़कों के साथ घूमती है... तेरी कम्पनी भी अच्छे लड़के लड़कियों से नहीं है... इसलिए मुझे तेरी माँ से मिलना है। मुझे तेरे जैसी स्टूडेंट नहीं चाहिए मेरे कॉलेज में।”

पूजा चौंक के उनको देखते हुए सोचने लगी, इनको यह सब कैसे पता चला? शायद इस हरामी मंगल ने ही बताया होगा। वो डरते हुए जसवंत से बोली, “माना मैं लेक्चर बँक करती हूँ पर मेरा चाल-चलन क्या खराब है? सहेलियों के साथ कैन्टीन में होती हूँ मैं... कहीं घूमने नहीं जाती। प्लीज़ सर... इतनी छोटी सी बात के लिए मुझे क्यों पनिश कर रहे हो?” जसवंत ने अब ज़रा गुस्से से पूजा को देखा और तब मंगल पूजा का हाथ पकड़के उसे खींचते हुए उन दोनों के बीच बिठाते हुआ बोला, “इधर बैठ हमारे पास... पूजा मैं तेरे बारे में सब जानता हूँ, मेरे मुँह से सुनेगी अपनी कहानी?” उनके बीच में गिरने से पूजा का स्कर्ट उठ गया। उसने जल्दी से अपना स्कर्ट ठीक किया पर तब तक उनको पूजा की गोरी जाँघों का दर्शन हो गया। पूजा अब घबराते हुए बोली, “देखो ना सर... यह मंगल कैसे बर्ताव करता है मेरे साथ। और मंगल क्या जानता है तू? मैंने कुछ भी किया नहीं तो क्यों झूठ बोल रहा है? कुछ भी बकवास मत कर समझा ना? क्यों जसवंत सर को मेरे खिलाफ़ भड़का रहा है तू? कुछ है ही नहीं तो क्या बतायेगा तू?”

मंगल ने पूजा के कँधे प हाथ रखा और जसवंत पूजा की कमर में अपना हाथ डालते हुए बोला, “अब पूजा मेरी बात सुनो, यह मंगल भड़का नहीं रहा मुझे। तेरे बारे में सब जानता है वो। अगर मंगल झूठ बोल रहा है तो यह बता कि यह राजेश और वैभव कौन हैं? राजेश और वैभव से क्यों मिलती हो बार-बार? उनके साथ उनके घर, पिक्चर, गार्डन और कार में क्यों जाती दिखती हो?” पूजा ने इन दो मर्दों के हाथों को अपने बदन को सहलाते देखा तो थोड़ा डर गयी और उठने की कोशिश करने लगी लेकिन जसवंत ने उसे उठने नहीं दिया। पूजा समझ गयी कि इनको सब बात मालूम हो गयी है पर फिर भी वो ज़रा ऊँची आवाज़ में बोली, “अच्छा वो राजेश और वैभव की बात कर रहे हैं आप? क्या है ना सर यह राजेश और वैभव की बहनें मेरी सहेलियाँ हैं... इसलिए कई बार उनसे मुलाकात होती है, और मैं उनके साथ आपको दिखती हूँ। बाकी जैसा आप सोच रहे हैं वैसा कुछ नहीं है। और प्लीज़ सर आप दोनों अपने हाथ हटाओ और मुझे जाने दो। यह आप दोनों क्यों मुझे हाथ लगा रहे हैं?”

जसवंत पूजा की कमर सहलाते हुए बोला, “अच्छा तो उन दोनों लड़कों की बहनें तेरी दोस्त हैं? पूजा अब तू झूठ भी बोलने लगी? अगर उनकी बहनें तेरी दोस्त हैं तो तू उन लड़कों के साथ कॉलेज कैन्टीन के पीछे हर दिन अकेली क्यों बैठी रहती है? तेरी सहेलियाँ क्यों नहीं होती तेरे साथ? मंगल ज़रा इसको बता दो कि हमें इसके बारे में क्या मालूम है, तभी इसकी आँखें खुलेंगी।” पूजा ने विनती भरी नज़रों से मंगल को देखा पर वो अपने हाथों से पूजा के कँधे मसलते हुए बोला, “सर यह पूजा बिल्कुल झूठ बोल रही है क्योंकि राजेश या वैभव की बहनें है ही नहीं। पूजा तो राजेश और वैभव के साथ उनके हॉस्टल जाके अपनी जवानी लुटाने जाती है। वो दोनों पूजा को एक साथ चोदते हैं... क्यों पूजा मैं सच कह रहा हूँ ना? उस दिन तू कार में भी कमर तक नंगी थी और वैभव तेरे मम्मे मसलते हुए तुझे किस कर रहा था कि नहीं? सर पढ़ायी-लिखाई और शरम-हया छोड़ के ये साली २-२ मर्दों से चुदवाती है और अब कहती है कि ये कुछ नहीं करती। आप कहो तो राजेश या वैभव को बुलाऊँ? वो क्या सच या क्या झूठ है बतायेंगे।” फिर मंगल राजेश को फोन करने के लिए खड़ा हुआ। इस कहानी का शीर्षक ’आरती की वासना’ है!

पूजा समझ गयी कि उसका पोल खुल चुकी है। उसका सिर शरम से झुक गया। उसको पता था कि अगर जसवंत सर राजेश ओर वैभव को फोन केरेंगे तो वो दोनों भी मंगल की बात को प्रमाणित करेंगे। पूजा को चुप देख कर जसवंत अपना हाथ उसकी टी शर्ट के अंदर डाल के उसके पेट को सहलाते हुए बोला, “पूजा तू बोल क्या मंगल झूठ बोल रहा है? हम तीनों को मालूम है कि यह बात सच है कि तू उन दोनों से एक साथ मस्ती करती है... एक ही बिस्तर में। पूजा मुझे तेरी जैसी स्टूडेंट कॉलेज में नहीं चाहिए, तुम्हारे लिए अब अब एक ही रास्ता बचा है मेरे पास। मैं तुमको कल कॉलेज से निकाल दूँगा।” जसवंत के शब्दों को सुन कर पूजा बिल्कुल सन्न रह गयी। वो जानती थी कि अगर उसे कॉलेज निकाल दिया गया तो कोई दूसरा कॉलेज उसे एडमिशन नहीं देगा और उसकी ज़िंदगी खराब हो जायेगी। उसे यह भी डर था कि वो अपनी माँ को और बाद में अपने डैडी को क्या जवाब देगी। पूजा जसवंत के पैरों पे गिर के विनती करने लगी, “नहीं सर ऐसा मत कहो प्लीज़। आज के बाद जो आप कहेंगे मैं वैसा ही करूँगी... मैं उन दोनों से कभी नहीं मिलूँगी लेकिन प्लीज़ आप मुझे कॉलेज से मत निकालना। अगर मेरी माँ को यह सब बात पता लग गयी तो वो मुझे मार डालेगी... प्लीज़ सर आप ही कोई रास्ता बताओ।”

जैसे ही पूजा जसवंत के पैरों पे झुकी तो पीछे से मंगल को उसकी टाईट लाल पैंटी दिख गयी। उसने जसवंत को आँख मारी जो कि अब पूजा की चूचियाँ देख रहा था। मंगल आ के पूजा के पीछे खड़ा हो गया और बोला, “सर यह पूजा कभी नहीं सुधरने वाली, लेकिन अगर यह आपका कहना माने तो आप चाहो तो इसे माफ़ करो।” जब जसवंत ने पूजा को सख्ती से देखा तो वो फिर से माफी माँगते हुए बोली, “जाने दो ना सर, प्लीज़ मुझे अब और शरमिंदा मत करो, इस बार आप मुझे माफ़ करो, अगली बार मेरी तरफ से आपको कोई शिकायत ना होगी।” जब मंगल पूजा के पीछे आ कर खड़ा हुआ तो उसकी टाँग पूजा की गाँड से छू गयी। पूजा ने मंगल के तरफ देखा तो वो बोला, “पूजा, सर तुझे किस शर्त पे माफ़ करें... बता? तू ऐसी क्या गारंटी देती है कि सर तुझ पे भरोसा रखें कि तू फिर से उन लड़कों पे अपनी जवानी नहीं लुटायेगी?” मंगल की भाषा वास्तव में पूजा को गरम कर रही थी पर साथ ही उसे कॉलेज से निकाले जाने का डर भी था। वो जसवंत को देखते हुए बोली, “जो शर्त आप कहें, मैं आपका कोई भी कहना मानने को तैयार हूँ लेकिन मुझे कॉलेज से मत निकालो।

जसवंत पूजा का चेहरा हल्के से सहलाते हुए बोला, “मंगल तू बोल क्या करूँ? इसको कॉलेज से निकालना ही होगा ना?” मंगल ने अपने हाथ पूजा की कमर में डाल कर सहलाते हुए उसे खड़ा किया और बोला, “सर मैं इसको बताऊँ कि ये क्या कर सकती है हमारे लिए जिससे आप इसे कॉलेज से नहीं निकालेंगे?” जसवंत ने अपना सर हिलाया तो मंगल पूजा को अपनी तरफ घुमा कर उसकी चूचियों पे हाथ रखते हुए बोला, “पूजा साली बेवकूफ़ तू जितना राजेश और वैभव के लिए करती है उतना तू जसवंत सर के लिए करेगी तो सर तुझे माफ़ कर देंगे। तू जैसे अपनी जवानी उनपे लुटाती है वैसे ही हम पे लुटा तो सर सिर्फ़ तुझे माफ़ ही नहीं करेंगे बल्कि तुझे अच्छे नम्बरों से पास भी करेंगे।” मंगल की बातों और हरकतों से पूजा को धका तो लगा पर वो समझ गयी के वो लोग उससे क्या चाहते हैं। पूजा सब समझती थी लेकिन उसे ऐसी उम्मीद नहीं थी कि ये दोनों वो सब चाहेंगे। पूजा शरमाते हुई जसवंत और मंगल के बीच खड़ी थी। वो इतनी कनफ्यूज़ हो गयी कि उसने मंगल का हाथ भी अपनी चूचियों से नहीं हटाया। मंगल पूजा के मम्मे मस्ती से मसलने लगा और जसवंत पीछे खड़ा होके दोनों हाथों से पूजा का स्कर्ट उठा के उसके पैंटी पे हाथ घुमाते हुए बोला, “एक मौका देता हूँ तुझे पूजा... अगर तू अपना यह हुस्न हमें देगी तो शायद तुझे कॉलेज से नहीं निकालुँगा। अब तू बता तेरा क्या इरादा है? बोल साली चुप-चाप हमसे चुदवाती है या तुझे कॉलेज से निकलूँ?”

पूजा को जसवंत की भाषा सुन कर हैरानी हुई पर वो जसवंत का मक्सद समझ गयी। वो थोड़ी पीछे हटी और दोनों मर्दों से बोली, “यह आप दोनों क्या कर रहे हो मेरे साथ? मुझे शरम आ रही है आपकी बातों से। आप जैसा बोल रहे हो वैसा कुछ नहीं होता राजेश और वैभव के साथ मेरा। प्लीज़ सर कोई दूसरा तरीका बताना, मैं आपकी स्टूडेंट हूँ... ऐसा कैसे कर सकती हूँ?” जसवंत ने पूजा के पास आ के उसकी गर्दन पकड़ के उसे अपनी तरफ खींच के उसके गाल चूम लिए। फिर पूजा के बदन को अपने से सटाता हुआ बोला, “साली तुझे मेरे मुँह से सुनना है ना कि वो दोनों तेरे साथ क्या-क्या करते हैं? चल अब बताता हूँ तुझे सब बात।” पूजा ने कुछ जवाब नहीं दिया और ना ही उसने जसवंत से दूर हटने की कोशिश की। मंगल पीछे से आ कर पूजा की गाँड सहलाने लगा। जसवंत पूजा की चूचियों पे हाथ रखते हुए बोला, “मंगल ज़रा पूजा की स्कर्ट उतार।”

पूजा चौंकते हुए बोली, “नहीं सर प्लीज़, यह क्या कह रहे हैं आप? मेरी स्कर्ट क्यों उतारने को बोल रहे हैं आप?” जसवंत ने पूजा की चूचियों को मसलना ज़ारी रखा और बोला, “साली चुप-चाप खड़ी रह। नाटक किया तो कॉलेज से निकाल दूँगा तुझे। क्या तू कॉलेज से निकलना चाहती है? मंगल हुक खोलके पूजा का स्कर्ट उतार।” पूजा बिना कुछ जवाब दिए चुप-चाप खड़ी रही। जसवंत ने उसका टी-शर्ट ऊपर किया और पूजा के नंगे मम्मे देख के खुश हुआ। पूजा के कड़क मम्मे और ब्राउनिश गुलाबी निप्पल उसे भा गए। जैसे ही मंगल ने स्कर्ट के हुक खोले तो पूजा का स्कर्ट पैरों में गिर गया। पूजा आँखें बँद करके खड़ी थी और जसवंत ने भी पूजा के बदन से उसका टी- शर्ट हटा दिया। अब पूजा सिर्फ़ एक लाल पैंटी और काले हाई हील के सैंडल पहने इन दो मर्दों के सामने शरमाते हुए खड़ी थी। अपने हाथों से अपना सीना छुपा के पूजा बोली, “प्लीज़ सर, आप दोनों यह क्या कर रहे हैं? मुझे बहुत शरम आ रही है, मुझे जाने दो।” जसवंत पूजा के मम्मे मसलते हुए बोला, “साली, तुझे शरम आ रही है? राजेश और वैभव के सामने शरम नहीं आती? तब तो दिल खोलके चुदवाती है ना? आज तक उनसे चुदवाती थी... आज से हमसे चुदवा।” पूजा दोनों की हर्कतों से अब गरम तो हो गयी थी लेकिन फिर भी वो ज़रा नखरे करते हुए बोली, “ऊम्म्म्म्म सर... यह सब मत करो... मैं वैसी लड़की नहीं हूँ। आप बार-बार उन दोनों का नाम क्यों ले रहे हैं? मैंने कुछ नहीं किया उनसे ऐसा वैसा... जैसा आप कह रहे हैं।” इस कहानी का शीर्षक ’आरती की वासना’ है!

मंगल पूजा की गाँड पे लंड रगड़ते हुए गुस्से से बोला “बहनचोद साली... राजेश और वैभव तेरी चुदाई करते हैं... तेरी यह चूत, गाँड, मम्मे चोदते हैं, तू उनका लंड चूसती है और साली अब बोलती है कि तू उनके साथ कुछ नहीं करती। सर... यह पूजा बड़ी नखरेवाली लड़की है... साली अपने बदन की नुमाइश करती है और हम सब मर्दों का लंड खड़ा करती है। उन दोनों को भी अपने बदन के जलवे दिखा-दिखा के इसने ही उकसाया और उनसे चुदवाती है... और अब हमसे अंजान बन रही है... बोल सच कह रहा हूँ ना मैं पूजा?” पूजा मंगल के मुँह से गालियाँ सुनके हैरान हुई, उसे अंदाज़ नहीं था कि सर के सामने मंगल ऐसी गंदी बातें करेगा। वो जसवंत की तरफ देखते हुए ज़रा नीची आवाज़ मैं बोली, “सर किसी ने आपसे झूठ कहा है... मैं उस तरह की लड़की नहीं हूँ। यह मंगल मेरे बारे में कुछ भी बोलता है। अब वो लड़के मेरे पीछे पड़े हैं तो इसमें मेरा क्या कसूर? और मंगल तू ऐसी गंदी-गंदी बातें मत कर... सर देखो ना यह मुझे गालियाँ दे रहा है।”

मंगल पूजा की पैंटी नीचे खींच के उसकी गाँड मसलते हुए बोला, “तेरी माँ की चूत साली... और गालियाँ दूँगा तुझे, वही तेरी औकात है... चुदक्कड़ राँड... २-२ मर्दों से चुदवाती है और खुद को शरीफ समझती है... तेरी गाँड मारूँ रंडी साली... उन दोनों के साथ तेरी चुदाई की तस्वीर दिखाऊँ? वैभव तेरी गाँड मार रहा था... उस वक्त की तस्वीर मैंने देखी है... बोल दिखाऊँ वो तस्वीर रंडी?” अब पूजा समझ गयी कि इनको सब बातें मालूम हैं और ज्यादा नकारने से जसवंत शायद उसे कॉलेज से निकाल भी सकता है। पूजा ने अपने सीने से हाथ हटा दिए और अपना एक-एक पैर उठा कर मंगल को अपने पैरों से पैंटी निकालने में मदद की। अब पूजा सिर्फ अपने काले हाई हील के सैंडल पहने बिल्कुल नंगी खड़ी थी और बहुत ही सैक्सी लग रही थी। जसवंत उसके मम्मे मसलने लगा और तब पूजा बेशरम होके बोली, “नहीं नहीं सर... मंगल जो कह रहा है सही है... लेकिन प्लीज़ आप यह बात मेरी माँ को मत बताना... मैं आपका सब कहा मानूँगी। ऊउउउउउम्म्म्म्म्‌म जऽऽऽऽसवंत सर... प्लीज़ आराम से मसलो ना... मैं आप दोनों के साथ सब करने को तैयार हूँ... लेकिन प्लीज़ मुझे दर्द मत देना।”

जसवंत और मंगल पूजा को छोड़ के जल्दी से खुद भी नंगे हो गये। उनके वो मोटे लम्बे लंड देखके पूजा को डर भी लगा लेकिन खुशी भी हुई। जसवंत पूजा के निप्पल से खेलते हुए बोला, “क्यों साली अब समझ में आयी हमारी बात? बहुत नाटक कर रही थी... अब सब अकड़ निकल गयी तेरी पूजा... या और कुछ बाकी है?” अब भी थोड़ी शरमाते हुए पूजा बोली, “नहीं सर... अब जो आप बोलेंगे वही होगा, अब मेरी तरफ से आपको कोई शिकायत नहीं होगी, लेकिन सर यह सब करने के बाद आप मुझे कॉलेज से तो नहीं निकालेंगे ना?” तभी पीछे से मंगल पूजा की गाँड के छेद को अँगुली से सहलाते हुए बोला, “क्यों साली रंडी... अब क्या सौदा करेगी? चुदक्कड़ छिनाल पहले तुझे जी भरके चोद लेने दे... बाद में सोचेंगे कि तेरे लिए क्या करना है... समझी?” इस कहानी का शीर्षक ’आरती की वासना’ है!

पूजा मंगल के मुँह से ये गालियाँ सुनके शर्मा गयी। उसे कभी गालियाँ खाके चुदवाने की आदत नहीं थी क्योंकि राजेश और वैभव उसे प्यार से चोदते थे... पर आज एक चपड़ासी की औकाद का आदमी उसे बातों से बे-इज़्ज़त कर रहा था वो भी उसके प्रिंसिपल के सामने और जसवंत भी कुछ नहीं कह रहा था। इससे पूजा समझ गयी कि जसवंत सर को भी यह सब अच्छा लगता होगा। पूजा ने तय किया कि वो जसवंत सर को शिकायत का कोई मौका नहीं देगी और उन दोनों से जैसे वो चाहें वैसे चुदवा लेगी। वैसे भी उसे एक साथ २-२ लंड लेने की आदत थी। जब जसवंत उसके निप्पल चूसने लगा तो पूजा भी बेशरम होके उसका मुँह अपने मम्मों पे दबाते हुए आँखें बँद करके सिसकरियाँ लेने लगी। पीछे से मंगल उसकी गाँड को अँगुली से सहलाते हुए पूजा का हाथ अपने लौड़े पे ले गया। पूजा उसका गरम लंड सेहलाते हुए बोली, “मंगल तू मुझे छिनाल क्यों बोल रहा है? मुझे शरम आती है ऐसी गालियाँ सुनके... प्लीज़ मुझे गालियाँ मत दो।”

मंगल अपनी अँगुली थूक से गीली करके आहिस्ता-आहिस्ता पूजा की गाँड में घुसाते हुए बोला, “अब ज्यादा नाटक मत कर रंडी, चुदक्कड़ साली... दोस्तों के साथ ना जाने कहाँ-कहाँ चुदवाती है और अब भी खुद को अच्छी लड़की समझती है? साली तू सिर्फ़ अब एक अच्छी राँड है और कुछ नहीं... आज के बाद तू सिर्फ़ हमारी रखैल बनके रहेगी। हमें पता है कि तू कैसी लड़की है समझी? इसलिए चुदासी रंडी अब अपनी नकली शरम छोड़ और दिल खोलके हमसे चुदवा ले और देख कैसे हम तुझे उन चूतिया लड़कों से ज्यादा माज़ा देते हैं।” जब मंगल ने उसकी गाँड में अँगुली घुसायी तो पूजा ने उसका लंड कस के पकड़ लिया। आगे से जसवंत उसके निप्पल चूसते हुए उसकी नंगी कमसिन चूत सहलाने लगा। पूजा अब इन दोनों मर्दों की हर्कतों से काफी गरम होने लगी थी। जसवंत और मंगल के कड़क हाथ और लंड उसे बेकरार कर रहे थे।

पूजा ने भी अब बेशरम होना बेहतर समझा और खुद ही जसवंत का लंड पकड़ लिया। अब पूजा एक साथ २-२ राजपुताना लंडों को सहला रही थी। वो दो मोटे-मोटे लंड पा के बड़ी खुश हुई। अब उसे डर सिर्फ़ इस बात का था कि कहीं इस चुदाई के दौरान उसकी माँ, आरती ना आ जाये। जसवंत के लंड को मुठ मारती हुई पूजा बोली, “ऊफ्फ्फ्फ.... सर कितना अच्छा लग रहा है आपका हाथ मेरे बदन पे। कैसा है मेरा बदन जसवंत सर? ऊईईई... माँआआआ... सर आपका लौड़ा तो राजेश और वैभव के लंडों से भी बड़ा है... मुझे दर्द तो नहीं होगा ना? सर मुझे डर इस बात का है कि कहीं हमे इस हालत में मेरी माँ ना देख ले, अगर हमारे इस खेल के दौरान मेरी माँ क्लब से आ गयी तो वो क्या करेगी पता नहीं... वो क्लब से शराब पी के आती है और नशे में उसे कुछ होश नहीं होता और काफी झगड़ालू हो जाती है”

जसवंत ने उसके मम्मे मसलते हुए उसकी चूत में अँगुली डाल दी और पीछे से मंगल अपना लंड पूजा की गाँड पे रगड़ने लगा। अपनी अँगुली से पूजा की चूत को चोदते हुए जसवंत बोला, “तू बड़ी हसीन और सैक्सी है... राजेश और वैभव तो क्या... तेरा यह जिस्म देख के किसी का भी इमान डोल जाये... देख... तेरी चूंची और चूत और गाँड कितनी खूबसूरत है... साली मेरा लौड़ा देख कैसे मसल रही है रंडी... मुझे मालूम है उन दोनों के लंड हमारे जितने लम्बे-मोटे नहीं हैं... आज तुझे असली लंड का मज़ा देंगे।” मंगल भी अपना लंड पूरी तरह पूजा की गाँड पे रगड़ते हुए बोला, “और सुन मेरी कमसिन छिनाल, हमें तेरी माँ से कोई डर नहीं लगता... उस कुत्तिया की चूत साली... तुझे चोदते वक्त तेरी माँ कितनी भी नशे में आये... या तो उसे हमारे लंड पसंद आयेंगे और वो खुद हमसे चुदवाने को तैयार हो जायेगी नहीं तो हम तेरी माँ का रेप करेंगे। वैसे तेरी माँ भी एक मस्त माल है... क्यों...? और नशे में होगी तो उसे चोदने में और मज़ा आयेगा।”

मंगल के मुँह से अपनी माँ के लिए ऐसी बात सुनके पूजा शरमा गयी। उसे अपनी माँ के नाजायज़ सम्बंधों के बारे मे शक तो था पर उसे यह बिल्कुल नहीं पता था कि उसकी माँ इतनी चुदासी है कि कहीं भी किसी से भी चुदवा सकती है। अब दोनों मर्द पूजा को आगे पीछे से लिपटे थे। माँ के लिए गालियाँ सुनके भी पूजा आगे से जसवंत की अँगुली से चूत चुदवा रही थी और पीछे से मंगल का लंड अपनी गाँड पे रगड़वा रही थी। मंगल ने पूजा को फिर अपनी तरफ घुमाया और उसके मम्मे मसलते हुए चूसने लगा। पूजा भी उससे मस्ती से अपने मम्मे चुसवाती हुई बोली, “मंगल मेरी माँ के बारे में इतना गंदा क्यों बोल रहा है? मुझे शरम आती है उसके लिए ऐसी बातें सुनके।” मंगल उसके दोनों मम्मे चूसते हुए बोला, “छिनाल... उसके बारे में बात करता हूँ तो शरम आती है ना... तो तेरी माँ गयी चुदाने... तू बेशरम होके हमसे चुदवा... तेरी माँ आयेगी तो तब की बात तब देखेंगे। अब खुल के हमसे चुदवा और अपनी सज़ा कम करवा ले।”

फिर मंगल ने पूजा को सोफ़े पे बिठाया और वो दोनों पूजा के हाथों में अपने लंड पकड़ा के उसके सामने खड़े हो गये। पूजा दोनों के लंड सहलाते हुए बोली, “ऊफ्फ्फ्फ.... सर, आप दोनों के लंड काफी लम्बे और मोटे हैं... मुझे दर्द होगा... लेकिन कोई बात नहीं... मैं यह दर्द सह लूँगी। सर आज मेरा नसीब है कि २-२ तगड़े मर्द मुझे चोदने वाले हैं... लगता है कि आज मेरे बदन की खैर नहीं।” जसवंत पूजा के मम्मे मसलते हुए अपना लंड पूजा के चेहरे पे रगड़ने लगा और बोला, “तेरी माँ कि चूत में गधे का लंड... साली... रंडी... तू २-२ लंड से चुदवाती है... तुझे दर्द नहीं होगा। तू तो कमसिन छिनाल है... साली २-२ मर्दों से चुदवाती है राँड... आज हम दोनों तुझे रंडी की तरह चोदेंगे... क्यों मंगल सच बोल रह हूँ ना मैं?”

पूजा ने बिना बोले जसवंत का लंड पकड़के चूमा और आहिस्ता-आहिस्ता मुँह में लेके चूसने लगी। धीरे-धीरे करके पूजा अब जसवंत का पूरा लंड चूस रही थी। बीच-बीच में वो जसवंत की गोटियाँ भी चूस रही थी। जसवंत भी मस्ती में पूजा का मुँह चोदने लगा। तब पूजा दूसरे हाथ से मंगल का लंड हिलाने लगी और मंगल उसके मम्मे मसलने लगा। जसवंत का लंड चूसके उसे और कड़क बना के पूजा बोली, “ओह सर मुझे आप बहुत अच्छे लगते थे और मेरी तमन्ना थी कि आपसे चुदवाऊँ लेकिन कभी हिम्मत नहीं हुई आपसे वैसी हर्कत करने की। यह मंगल आते-जाते मुझे छूता तो था लेकिन मैंने इसे लिफ्ट नहीं दी और आज मैं आप दोनों से चुदवाने जा रही हूँ। सर अब आप दोनों अपने-अपने लौड़े मेरी चूत, मुँह और गाँड में डालके मुझे चोदो और अपनी रंडी बनाओ।” इस कहानी का शीर्षक ’आरती की वासना’ है!

जसवंत ने अपना लंड पूजा के मुँह से निकाला और पूजा को नीचे ज़मीन पे बिठा के बोला, “चल मेरी प्यारी रंडी... आज तुझे अपने लंडों से चोदके तेरी इच्छा पूरी करते हैं। मंगल मैं इस रंडी की चूत चोदूँगा और तू इस छिनाल की गाँड मार। चल पूजा पहले कुत्तिया बनके मंगल का लंड अपनी गाँड में डलवा ले... बाद में तेरी चूत में लंड घुसाता हूँ।” पूजा कुत्तिया बन गयी और मंगल ने उसके पीछे आके उसकी गाँड खोल के अपना लंड उसकी गाँड के छेद में दबाने लगा। पूजा ने अपनी गाँड ढीली छोड़ दी और मंगल के लंड का सुपाड़ा अंदर घुस गया। फिर पूजा की कमर पकड़ के मंगल ने हल्के से आगे पीछे होके १५-२० धक्कों से पूरा लंड पूजा की गाँड में घुसा दिया। पूजा राजेश और वैभव से कई बार गाँड मरवा चुकी थी पर फिर भी उसे दर्द हुआ क्योंकि मंगल का लंड उन दोनों से बड़ा था। पूजा दर्द से बोली, “मंगल... प्लीज़ आराम से डाल मेरी गाँड में अपना लंड। ऊउउफ्फ्फ्फ... मंगल... हाँ... अब डाल अपना लौड़ा मेरी गाँड में... अब दर्द नहीं हो रहा है।”

मंगल का लंड अब आराम से पूजा की गाँड में चला गया और धीरे-धीरे पूजा के ऊपर मंगल पूरा ज़ोर डाल के उसके मम्मे मसलते हुए बोला, “ले कुत्तिया राँड... तुझे मेरा लौड़ा चाहिए था ना? अब देख कैसे तेरी गाँड मारता हूँ छिनाल... तेरी माँ की चूत... रंडी है साली तू... मेरी रंडी है... मेरे लंड की रखैल है समझी...?” पूजा को मंगल के धक्कों से जितना मज़ा आ रहा था उतना ही मज़ा उसके मुँह से गालियाँ सुनके भी आ रहा था। वो बेशरम होके बड़ी मस्ती से गाँड पीछे करके मंगल का लंड ज्यादा से ज्यादा अपनी गाँड में लेने लगी। जब मंगल मस्ती से पूजा की गाँड मारने लगा तो पूजा जसवंत का लंड पकड़के उसे सहलाते हुए एकदम रंडी की अदा से बोली, “जसवंत सर अब आप भी कुछ करो ना... आप जैसे चाहो वैसे आज मुझे चोदो... आप दोनों के खेल से मैं बड़ी चुदासी हो गयी हूँ।”

जसवंत पूजा के मम्मे मसलते हुए मंगल को नीचे लेटने के लिए बोला तो मंगल पूजा को अपने ऊपर लेके लेट गया। जसवंत ने पूजा की टाँगें फैला के अपने हाथों से पूजा चूत खोली। उसकी गीली गुलाबी चूत देख के जसवंत खुश हुआ और अपना राजपुताना लंड पूजा की कम्सिन चूत पे रख के बेरहमी से पूजा के मम्मे मसलते हुए अपना लंड पूजा की चूत में घुसाने लगा। जसवंत के बड़े लंड से पूजा को थोड़ी तकलीफ हुई लेकिन उसके मम्मों के मसले जाने से और गाँड में लंड के धक्कों की वजह से वो दर्द उसे ज्यादा महसूस नहीं हुआ। जसवंत आधा लंड उसकी चूत में घुसा के बोला, “छिनाल... साली... तेरी माँ की चूत... हरामी राँड... अब कैसे खुल के चुदवा रही है। तेरी माँ की चूत चोदूँ... साली कितना नाटक कर रही थी और अब मज़े ले रही है २-२ मर्दों से... बहनचोद आज तेरी चूत और गाँड फाड़के रख देंगे हम दोनों।”

जसवंत ने पूजा की गरम गीली और टाईट चूत में लंड घुसा के धक्के पे धक्का मारके पूरा लौड़ा अंदर घुसेड़ दिया और पूजा के निप्पल खींचते हुए बोला, “ले साली पूजा रंडी... मेरा लौड़ा ले... कसम से तेरे जैसी कम्सिन माल आज पहली बार चोद रहा हूँ। बहनचोद तेरी जैसी लड़की मिले तो काम छोड़के दिन रात सिर्फ़ तुझे ही चोदता रहूँगा।” दोनों मर्द बड़ी बेरहमी से पूजा के बदन से खेलते हुए उसको चोद रहे थे। मंगल तो ज़ोरदार धक्कों से पूजा की गाँड मार रहा था। पूजा जसवंत के मुँह से अपने लिए और अपनी माँ के लिए गंदी गालियाँ सुनके और उत्तेजित हो गयी। अपनी कमर आगे पीछे करके चुदवाती हुई पूजा बोली, “आओ जसवंत सर... मेरे राजा... मेरे बदन के नए मालिक... आओ अपनी इस नई सैक्सी चुदास राँड की चूत में डालो अपना लौड़ा... उउउउउउउफ्फ्फ्फ्फ्‌फ्फ.... जसवंत... हाँ ऊँऊँऊँऊँ.... और डालो राजाआआआ... फाड़ डालो मेरी चूत और मंगल तू ऐसे ही मार मेरी गाँड... ऐसा मस्त तो राजेश और वैभव भी नहीं चोदते मुझे... सर आप और मंगल मुझे जितनी चाहे उतनी गालियाँ दो लेकिन मेरी माँ को क्यों गालियाँ दे रहे हो?”

अब पूजा की गाँड में मंगल का मोटा लंड और चूत में जसवंत का तगड़ा राजपुताना लौड़ा कयामत ढा रहे थे। दोनों वहशियों की तरह पूजा को अपने बदन के बीच रख के बड़ी बेरहमी से एक रास्ते की रंडी जैसे चोद रहे थे। अब मंगल नीचे से पूजा की गाँड मारते-मारते उसके मम्मे बेरहमी से मसलते हुए बोला, “कुत्तिया राँड... जसवंत सर और मैं जो गालियाँ चाहेंगे वो देंगे... तेरी माँ की भी गाँड मारूँ छिनाल... तेरी माँ को गधे के लंड से चुदवाऊँ... हमें तू मत सिखा कि तुझसे कैसे बर्ताव करना है... ऐसे तगड़े लंड मिले हैं तो हमसे गालियाँ खाके चुदवा। हम तुझे और तेरी माँ को जो दिल में आये वो गालियाँ देंगे समझी रखैल?”

जसवंत अब चोदते-चोदते झड़ने के करीब था। इसलिए उसने अपना लंड पूजा की चूत से निकाला और उसके सीने पे बैठ के पूजा का मुँह खोलके अपना लंड उसमें घुसा के बोला “हाय... सालीईईईईई राँड... तेरीईईई माँ की चूत.... ये ली... चूस मेरा लौड़ा छिनाल और ले पी मेरा पानी।” पूजा जसवंत का लंड अपने हाथ में पकड़ के अपने मुँह में ज़ोर से चूसने लगी। जसवंत भी जोश में आ के पूजा के मम्मे बेरहमी से दबाते हुए पूजा का मुँह चोदने लगा और ८-१० धक्कों में झड़ने लगा। झड़ते-झड़ते जसवंत ने पूरा लंड पूजा के मुँह में घुसा दिया। उसके लंड का पानी पूजा के हलक तक गया और पूजा ने वो पानी आहिस्ता-आहिस्ता पी डाला। अपना पूरा पानी पूजा के मुँह मै छोड़के जसवंत ने लंड पूजा के मुँह से निकाला और सोफ़े पे बैठ के पूजा और मंगल की चुदाई देखने लगा। इस कहानी का शीर्षक ’आरती की वासना’ है!

जसवंत के झड़ने के बाद और उसका पूरा पानी पीने के बाद पूजा पूरी तरह गाँड खोल के मंगल से चुदवानी लगी। हाथ पीछे डाल के वो मंगल की कमर सहलाते हुए बोली, “मंगल चोद साले हरामी... मेरी गाँड... तेरी बहुत दिनों से नज़र थी ना मुझ पे... साले मार मेरी गाँड... जसवंत सर आप प्लीज़ मेरी चुचियों को मसलते हुए उनको चूसो... जब मंगल मेरी गाँड में झड़ेगा तब मुझे अपनी चुचियाँ आपके मुँह में चाहिए... प्लीज़ आओ ना सर...” पूजा ने बेशरम हो के अपने मम्मे उठा के जसवंत की तरफ़ कर दिए। जसवंत भी इस गरम लड़की की हिम्मत देखके खुश हुआ। वो सोफ़े पे बैठ के पूजा को पास आने को बोला तो मंगल पूजा को खड़ी करके कुत्तिया के पोज़ में उसकी गाँड मारने लगा। पूजा सोफ़े को पकड़ के झुक गयी जिससे उसके मम्मे जसवंत के मुँह में अपने आप आ गये और वो पूजा की चूचियाँ बारी-बारी मसलके चूसने लगा।

मंगल अब बड़े ज़ोरों से पूजा की गाँड चोदने लगा। धक्कों पे धक्के मारते-मारते वो तो जैसे पूजा की गाँड को ड्रिल करते हुए बोला, “तेरी माँ की चूत... हरामी राँड... राजेश और वैभव से चुदवाती है और हम से नखरा कर रही थी... साली जब से गाँड और चूत में हमारे लंड लिए तब से बड़ी मस्त हो रही है ना छिनाल...? तेरी माँ को चोदूँ साली... अब देख कैसे गाँड पीछे करके मरवा रही है और जसवंत सर से छिनाल जैसी अपने मम्मे चुसवा रही है... कसम से पूजा आज से मैं तुझे अपनी रंडी बनाके रखुँगा। तू है इतनी मस्त माल कि साली बार-बार तुझे चोदने को दिल करता रहेगा। ये ले... और ले... और ले मेरा लौड़ा अपनी गाँड में मादरचोद... आज तेरी गाँड को बताता हूँ कि राजपुताना लंड कैसे चोदता है तेरी जैसी छिनाल लड़की को।”

जसवंत ने पूजा के मम्मे चूसते हुए उसकी चूत में अँगुली डाल दी और पूजा भी छिनाल जैसी जसवंत का लंड सहलाती हुई बोली, “हाँ साले जैसे कि मुझे मालूम ही नहीं कि राजपुताना लौड़े लड़की की चूत और गाँड कैसे चोदते हैं... अरे मैं ३ साल से राजेश और वैभव से चुदवा रही हूँ समझा? वो दोनों राजपूत भी साले... पूरी बेरहमी से मेरी चूत और गाँड मारते हैं पर मंगल तेरे और जसवंत सर के लंड में जो मज़ा आया वो मज़ा उनमें नहीं... तुम्हारे इन मोटे लम्बे लंडों के लिए मैं हमेशा के लिए तुम्हारी रंडी बनने को तैयार हूँ। तुम दोनों जब... जहाँ और जैसे चाहो... मुझे चोदो... मैं खुशी-खुशी तुमसे चुदवाउँगी मेरे राजा... आज के बाद मैं तुम दोनों की राँड बनके रहूँगी। मंगल तुझे कैसा लगा मेरा यह बदन और मेरी गाँड राजा?”

पूजा की बातें सुनके मंगल उसकी गाँड पे थप्पड़ मारते हुए पूजा को चोदने लगा और जसवंत उसके निप्पल चबाते हुए चूसने लगा। पूजा दर्द और वासना से बेहाल होके चुदवा रही थी। वो दोनों गंदी-गंदी गालियाँ देते हुए पूजा को छिनाल जैसे चोद रहे थे। जब जसवंत ने ज़रा ज़ोर से पूजा के निप्पल को चबाया तो दर्द से पूजा बोली. “ऊउउउउउउउफ्फ्फ्फ्फ.... जसवंत साले हरामीईईई... आराम से चबा न मेरा निप्पल... बहुत दर्द हो रहा है मुझे...।” पूजा के मुँह से अपने लिए गालियाँ सुनके जसवंत फिर से उसके निप्पल चबाते-चबाते चूसने लगा।

rajaarkey
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Re: आरती की वासना

Unread post by rajaarkey » 13 Oct 2014 09:56

आरती की वासना-4

लेखिका: आरती शर्मा

मंगल से गाँड पे हो रहे लगातार हमले और जसवंत से बेरहमी से निप्पल चूसवाने से अब पूजा भी झड़ने के करीब थी। वो सोफ़ा ज़ोर से पकड़के मंगल को और ज़ोर से गाँड मारने के लिए बोली। अब मंगल भी झड़ने के करीब था। वो एक हाथ की अँगुली पूजा की चूत में घुसा के पीछे से पूजा की गाँड में ज़ोरदार धक्के मारते हुए बोला, “ये ले साली... मादरचोद चूत... अब मैं तेरी गाँड में अपना पानी छोड़ुँगा। तेरी माँ को चोदूँ राँड... तू एकदम लाजवाब छिनाल है साली... मुझे पता है तू चुदवाती है मगर तेरा बदन अभी भी बहुत टाईट है... बड़ी गज़ब की चीज़ है तू पूजा... ले मैं आयाआआआआ..... पूजाआआआआआ....।”

मंगल अपना पूरा लंड पूजा की गाँड में जड़ तक घुसा के झड़ने लगा और साथ ही अँगुली से अपनी चूत चुदवाती हुई पूजा भी झड़ने लगी। जसवंत आगे से पूजा को कसके पकड़ के उसके मम्मे चूस रहा था और पीछे से मंगल पूजा की गाँड में लंड घुसेड़े झड़ रहा था। पूजा की चूत ने भी झड़ते हुए अपना पानी छोड़ दिया जिससे मंगल का पूरा हाथ गीला हो गया।

जब सबकी साँसें सामान्य हुईं तो मंगल ने पूजा की गाँड से अपना लंड निकाला और उसके लंड का पानी पूजा की गाँड से निकल के पूजा की जाँघों से नीचे बहने लगा। पूजा ने खड़ी होके एक अँगड़ाई ली और जा के एक टॉवल लायी और बड़े प्यार से मंगल का लंड साफ़ किया। फिर मंगल ने भी उसी टॉवल से पूजा की चूत और गाँड भी पोंछी। तीनों ने ठंडा पानी पीया और फिर नंगे ही हॉल में ज़मीन पे बैठ गये। इस कहानी का शीर्षक ’आरती की वासना’ है!

पूजा के साथ पूरी मस्ती करने के बाद जसवंत ने पेशाब करने के बहाने से बाथरूम में जाके मोबाइल से आरती को फोन करके घर आने को कहा। उन दोनों में यही तय हुआ था कि आरती अपनी बेटी को इन दोनों मर्दों से चुदवाती देख गुस्सा हो के उनको और अपनी बेटी को भला बुरा कहेगी और फिर जसवंत आरती के सामने पूजा को मसल के आरती को सब बतायेगा। पूजा के कम्सिन जिस्म को जी भर के चोदने के बाद भी जसवंत ने पूजा को बीच में बिठाया और दोनों मर्द बार-बार पूजा के बदन से खेलते- खेलते बातें करने लगे और पूजा के मम्मे और जाँघें सहलाने लगे। पूजा बेशरम हो के जसवंत और मंगल के साथ सिर्फ काले हाई हील के सैंडल पहने नंगी ही बैठी थी। उसे अब ज़रा भी शरम नहीं लग रही थी। मंगल का सिर अपने सीने पे दबाती हुई और जसवंत को किस करती हुई वो बोली, “जसवंत सर, आज पहली बार किसी मर्द से चुदाई का मज़ा मिला है। मैं राजेश और वैभव से चुदवाती थी लेकिन तुम दोनों के लंड के सामने उनके लंड कुछ भी नहीं। आप दोनों ने तो मेरा बदन झँझोड़ के रख दिया। सर अब तो मैंने आपका हर कहा माना... जैसे आपने कहा वैसे चुदवाया... और आगे चलके जैसे आप कहेंगे मैं करूँगी... लेकिन अब तो आप मुझे पास करेंगे ना?”

मंगल हल्के से पूजा का निप्पल चबाते हुए बोला, “तेरी माँ की चूत... साली... सौदा करती है क्या? अरे साली अब तुझे पास नहीं किया तो क्या झाँट उखाड़ेगी हमारी...? बहनचोद साली... कॉलेज में मेरे सामने जितने नाटक किए... उनका पूरा हिसाब लेने के बाद ही तुझे पास करने की सोचेंगे समझी? कॉलेज में तेरी गाँड बहुत बार सहलाने के बाद मुठ मारी थी मैंने... सोचा था एक दिन तेरा रेप करूँगा, पर आज हमसे चुदवा के तूने खुद को बचा लिया राँड।” पूजा ने इस बात पे झुक के मंगल का मुर्झाया लंड पकड़ के उसे एक बार पूरा चूसा और फिर बोली, “उफ्फ मंगल... कितना चाहता है तू मुझे। अगर मुझे पता होता कि तेरे और जसवंत सर के साथ चुदाई करके इतना मज़ा मिलेगा तो मैं उन दोनों को कब का छोड़ देती और तुम से ही चुदवाती। पर कोई बात नहीं... अब तो मैं तुम्हारी रंडी बन ही गयी हूँ... अब चाहे तुम मुझे प्यार से चोदो या बेरहमी से गंदी गालियाँ देके... मैं कोई शिकायत का मौका नहीं दूँगी तुमको। अब मैं पास हो जाऊँ या फेल... उसकी भी परवाह नहीं है मुझे।”

जसवंत उठ के सोफे पे बैठ गया और उसने पूजा को अपनी गोद में खींच लिया। पूजा को जसवंत का लंड अपनी गाँड पे महसूस हुआ। जब जसवंत ने उसकी चूचियों से खेलना शुरू किया तो मंगल ने भी पूजा के सामने खड़े हो कर उसे अपना लंड पेश किया। पूजा ने भी बड़ी लालसा से उसका लंड पकड़ लिया और उसे सहलाते हुए उसका सुपाड़ा चूमने के बाद अपने मुँह में डाल के चूसने लगी। तीनों का एक और चुदाई का सफर शुरू हो गया और उसी क्षण आरती ने दरवाजा खोल के हॉल में प्रवेश किया। पूजा को उन दोनों मर्दों के साथ बिल्कुल नंगी देख के वो बहुत खुश हुई। पूजा पूरे जोश के साथ मंगल का लंड चूसते हुए अपनी गाँड जसवंत के लंड पे रगड़ रही थी और जसवंत के हाथ पूजा के मम्मे मसल रहे थे। यह देख कर आरती को दो दिन पहले की इन दोनों मर्दों की साथ की गयी महा-चुदाई याद आ गयी और आरती का हाथ खुद-ब-खुद साड़ी के ऊपर से चूत सहलाने लगा। आरती ने काले रंग की नेट की साड़ी, स्लीव-लेस ब्लाउज़ और सढ़े चार इन्च ऊँची हील के सैंडल पहने हुए थी। आरती ने ब्रा नहीं पहनी थी क्योंकि उसे अपने नंगी चूचियों पे ब्लाउज़ के कपड़े का कोमल स्पर्श बहुत अच्छा लगता था। जैसा कि पूजा ने सोचा था... आरती ने क्लब में अपनी सहेलियों के साथ ताश खेलते हुए शराब पी थी और वो थोड़ी नशे में थी पर आज उतने नशे में भी नहीं थी कि खुद को सम्भाल न सके।

वापस होश में आते हुए उसने अपनी चूत पे से अपना हाथ हटाया और उनके पास जा के मंगल को पूजा सी दूर हटाते हुए चिल्लाई, “पूजा यह क्या कर रही हो तुम...? बेशरम लड़की... मैं घर से क्या गयी... तू यह सब करने लगी? तुझे शरम नहीं आती है पढ़ाई-लिखाई की उम्र में यह सब करती है और वो भी एक साथ दो-दो मर्दों के साथ...? कौन हो तुम दोनों...?” पूजा आरती के गुस्से को देख के बहुत डर गयी। आरती के मुँह से व्हिस्की की गन्ध आ रही थी। पूजा इन दो मर्दों के साथ ऐसी अवस्था में पकड़े जाने से बहुत शर्मिंदगी महसूस कर रही थी। पूजा खड़ी हुई और घबराती हुई बोली, “मम्मी यह... यह मेरे कॉलेज के सर हैं और यह चपड़ासी। वो बात ऐसी है ना कि.......।” अब पूजा नंगी ही जसवंत और मंगल के बीच में खड़ी थी। आरती और गुस्सा में दहाड़ी, “यह साले दोनों भड़वे कोई भी होंगे... मुझे उससे क्या...? लेकिन नालायक तू क्यों इनके सामने नंगी होके दोनों से एक साथ चुदवा रही है?”

अपनी माँ के मुँह से यह गंदी बात सुनके पूजा और भी शरमा गयी। इधर आरती की चूत जसवंत और मंगल के लंड देख के मचल रही थी और आरती मन कर रहा था कि अभी नंगी हो के फिर उनसे चुदवा लूँ। लेकिन उसने अपने दिल पे काबू रखा और झूठे गुस्से से सबको देखने लगी। पूजा के पीछे से जसवंत ने हाथ के इशारे से उसे कहा कि वो अच्छा नाटक कर रही है। अब जसवंत पूजा के पीछे से नंगा ही आरती के पास आके बोला, “आप इसकी माँ हो ना? देखिए आपकी बेटी क्लास में पढ़ाई ठीक से नहीं कर रही है... इसलिए हम उसे समझाने आये हैं... आपकी बेटी इस साल भी फेल होने जा रही है... ये पढ़ाई में कमज़ोर है... आप चाहें तो मैं इसको रोज़ एक घँटा पढ़ा सकता हूँ... आप इसकी माँ हैं... आप सोच लीजिए।” आरती जसवंत का नंगा लंड देख के और बेहाल हो गयी। जसवंत ऐसे खड़ा था कि पूजा को आरती दिख नहीं रही थी। तब आरती हल्के से जसवंत को आँख मारते हुए बोली, “उम्र में इतने बड़े हो के एक कमसिन लड़की के साथ यह सब करने में शरम नहीं आयी तुमको...? उसे इस तरह से पढ़ा के पास करेंगे आप...? अब मैं आपकी शिकायत करूँगी कॉलेज बोर्ड से... समझे?”इस कहानी का शीर्षक ’आरती की वासना’ है!

जसवंत वैसे ही आरती के सामने अपने नंगे लंड को हाथ में ले के दूसरा हाथ आरती के कँधे पे रख कर बोला, “सुनो मैडम... आपकी बेटी के मार्क्स और चाल-चलन अच्छा नहीं है... इसलिए वैसे भी कॉलेज बोर्ड ने उसे निकालने का फ़ैसला किया था। फैसला लेने के पहले आखिरी बार मैं इसे समझाने आया और फिर इसकी जवानी देखके इसे चोदने का दिल हुआ और कॉलेज से ना निकालने के बदले इसे चोद दिया। अब आप कॉलेज बोर्ड से शिकायत भी करोगी तो कोई आपकी बात नहीं मानने वाला... इसलिए आप सब भूल जाओ।” आरती जसवंत की इस बात पे कुछ नहीं बोली लेकिन दिल ही दिल में वो जसवंत का लंड मसलना चाह रही थी। लंड सहलाते जसवंत को अपनी माँ के कँधे पे हाथ रखे देख पूजा को आश्चर्य हुआ। उसने झुक के वहाँ पड़ी टॉवेल उठाके अपना जिस्म ढक लिया।

जब पूजा झुकी तो मंगल पूजा की गाँड सहलाने लगा और दूसरे हाथ से अब वो भी जसवंत की तरह अपना लंड आरती के सामने मसलने लगा। इन दो मर्दों को अपने सामने अपने नंगे लंड सहलाते और मंगल को उसकी बेटी की गाँड मसलते देख आरती की चूत भी गीली हो गयी और उसके निप्पल खड़े हो गये। वो अनजाने में अपने हाथ से अपनी एक चूंची सहलाने लगी लेकिन फिर हाथ नीचे कर के मंगल को गुस्से से बोली, “साले हरामी... मेरे सामने अपने आप से खेलते और मेरी बेटी को छूते हुए तुझे शरम नहीं आती...? बड़ा नालायक आदमी है तू... घर में माँ बहन है कि नहीं?”

पूजा हैरानी से देखने लगी कि इतना होने के बाद भी उसकी माँ इन दो मर्दों को घर से निकल जाने के लिए नहीं बोल रही है बल्कि उनका नंगापन देखती हुई बात कर रही है उनसे। पूजा अब आरती के पास आके उसको हल्के से बोली, “मम्मी प्लीज़ आप ऐसा कुछ मत करना नहीं तो जसवंत सर मुझे कॉलेज से निकाल देंगे... वैसे भी अगर मेरी यह बात सबको मालूम हो गयी तो हमारी कितनी बदनामी होगी... प्लीज़ अब यह बात ज्यादा मत बढ़ाओ नहीं तो मैं बर्बाद हो जाऊँगी... अब तो ऐसा करने के बाद सर ने मुझे पास भी करने का वादा किया है... है ना जसवंत सर...?” जसवंत ने भी आरती की मस्त गाँड देखते हुए हाँ कहा। आरती ने साड़ी बहुत टाईट बाँधी थी और साथ ही इतनी ऊँची हील के सैंडलों के कारण उसकी गाँड बहुत ही स्पष्ट तरह से बाहर को उघड़ रही थी। तब मंगल ने आगे आके पूजा की कमर में हाथ डाला और दूसरे हाथ से आरती के सामने बिंदास आपना लंड मसलते हुए बोला, “सुन मैडम... तेरी बेटी हमसे फ्री में नहीं चुदवा रही है... इसकी जवनी चोदने के बदले हम इसे पास करने वाले हैं और इसका कॉलेज से निकलना भी रुकवा रहे हैं... वैसे भी तेरी बेटी कॉलेज के दो लड़कों से साथ चुदवाती है... समझी? तेरी पूजा उन दो लड़कों की रंडी थी और अब हम दोनों की रंडी बन गयी है... हमसे चुदवाके इसने अपनी तरक्की करवा ली है... अब मुझे या जसवंत सर को गाली दी या कुछ उल्टा-सीधा बोली तो साली तुझे भी तेरी बेटी जैसे चोदेंगे। बहन कि चूत तेरी... कुत्तिया... साली दारू पे के आयी है... अब नशे में ज्यादा नाटक मत कर तू हमारे सामने... तुझे हम तेरी बेटी जैसी छिनाल बनायेंगे और साली बेवड़ी... कुत्तों से चुदवायेंगे तुझे... याद रख।”

मंगल के मुँह से गालियाँ सुनके आरती को अच्छा लगा लेकिन पूजा डर गयी। एक तो मंगल ने पूजा की नंगी कमर पकड़ी हुई थी और आरती के सामने लंड मसलते हुए उसने गालियाँ देके पूजा के बारे में भी सब बातें बता दी थीं। पूजा को यकीन हो गया कि अब उसकी माँ उसे बहुत मारेगी और इन दोनों को पुलीस में ज़रूर देगी। उसने देखा कि उसकी माँ की चूचियाँ भी ऊपर-नीचे हो रही हैं। पूजा को क्या पता था कि आरती का दिल गुस्से से नहीं बल्कि मंगल की गालियों से और उन दोनों का नंगा लंड देख के धड़क रहा था। बड़ी मुश्किल से आरती ने अपने आप पे काबू रखा और बड़ी मुश्किल से अपनी नज़र मंगल के लंड से हटाती हुई पूजा से बोली, “पूजा क्या यह सच है...? तू कॉलेज में भी ऐसा करती है... वो भी दो-दो लड़कों के साथ...? और तेरे साथ यह सब करने के बाद यह तुझे पास करने वाले हैं? अरे बेटी तूने तो खुद का सौदा कर दिया... बेच दिया एक तरह से अपने आपको तूने।” यह कहते वक्त भी आरती की नज़र जसवंत के लंड पे थी और मंगल अभी भी पूजा की कमर में हाथ डाले हुए था और पूजा ने अपना सीना टॉवल से ढका हुआ था। तब जसवंत आरती की कमर में हाथ डालते हुए बोला, “क्या सब अपनी बेटी के सामने पूछेगी? वैसे बहुत अच्छी बेटी है तेरी... बस थोड़ा सा बहक गयी है लेकिन अब हम उसे ठीक करेंगे। तू कोई टेंशन मत ले आरती... ठीक है? पूजा तू जा और तेरी माँ के लिए पानी ले आ... तब तक मैं तेरी माँ को अच्छे से समझाता हूँ।” आरती पूजा से पानी के बजाय सब के लिए व्हिस्की के पैग बना के लाने को बोली पर जसवंत और मंगल ने इनकार कर दिया के वो लोग शराब छूते भी नहीं हैं।

पूजा अपने बदन पे टॉवेल लपेटे ही आरती के लिए पैग बनाने चली गयी। वो सोच रही थी कि आज तो उसकी माँ उसकी जान ही ले लेगी। अब उसे पूजा के बारे में सब पता चल गया था कि वो कॉलेज में दो-दो लड़कों से चुदवाती है और लेक्चर बँक करती है... उसको कॉलेज से निकालने वाले थे और अब उसकी माँ ने अपनी आँखों से उसे जसवंत सर और मंगल के साथ चुदवाते देखा था। पूजा चाहती थी कि किसी भी तरह जसवंत सर उसकी माँ को समझायें और उसकी माँ का गुस्सा कम करें। एक ग्लास में व्हिस्की और बर्फ डाल के और साथ में ठंडे पानी की बोतल लेके जब वो आयी तो जो नज़ारा उसने देखा उससे वो आश्चर्य चकित रह गयी। आरती अब जसवंत और मंगल के नंगे बदन के बीच में खड़ी थी और उन मर्दों ने उसे सैंडविच किया हुआ था। जसवंत आगे से आरती को किस कर रहा था और पीछे से मंगल आरती को दबोच के के उसके मम्मे मसलते हुए अपना नंगा लंड साड़ी के ऊपर से उसकी गाँड पे रगड़ रहा था। पूजा ने देखा कि उसकी माँ जो अभी तक उनसे गुस्से से बात कर रही थी अब खुशी से उन मर्दों के साथ खेल रही है। आरती ने जसवंत का लंड पकड़ा हुआ था और दूसरे हाथ से जसवंत का बदन अपने बदन पे दबा रही थी। यह सब देख के पूजा ज़ोर से बोली, “मम्मी यह क्या कर रही हो...? अभी मुझे इतना सुनाके अब खुद तुम इन दोनों के साथ मस्ती कर रही हो...? मुझे बेशरम कहती हो पर अब खुद को देखो कैसे लिपट रही हो?”

पूजा की बात सुनके मंगल उसके पास आके और पूजा का हाथ पकड़के बोला, “मेरी राँड... अब तुझे कोई डरने की जरूरत नहीं... हमने तेरी माँ को सब समझा दिया है और वो मान गयी है... अब हम तेरी चुदाई बिंदास कर सकते हैं... वो भी तेरी माँ के सामने... है ना आरती?” आरती मुस्कुराती हुई अपना सिर हिला कर से हाँ बोली पर पूजा को फिर भी यकीन नहीं हो रहा था। वो हैरान होके बोली, “मम्मी तुम क्यों यह सब कर रही हो? इन्होंने ऐसा क्या बताया तुम्हें कि तुमने इनकी बात मान ली...? मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है... प्लीज़ कोई मुझे बताओ कि यह सब क्या चल रहा है...।”

पूजा की हैरनी देखके आरती ने पूजा का हाथ पकड़ के उसे सोफ़े पे अपने पास बिठाया और मंगल भी सोफ़े के पीछे खड़ा हो गया और जसवंत आरती के सामने। आरती ने पूजा के हाथ से अपना पैग लिया और बिना पानी मिलाये ही एक ही घूँट में गटक गयी और फिर जसवंत का लंड पकड़के प्यार से एकदम बेशरम होके पूजा से बोली, “अरे पूजा... मुझे यह साले जसवंत ने परसों कॉलेज में बुलाया था तेरी शिकयत करने के लिए... और तुझे कॉलेज से निकालने की बात बतायी। मुझे यह भी बताया कि तू दो-दो लड़कों से एक साथ मस्ती करती है... सच बोलूँ तो तेरी कहानी सुनके मुझे जलन हुई... क्योंकि तेरे पापा साल में एक महीने के लिए ही आते हैं पर उसके बाद मैं भी इधर-उधर जब भी मौका मिलता है किसी से भी चुदवा के अपनी चूत को शाँत करती हूँ... वैसे मुझे कभी भी चोदने वालों की कमी नहीं हुई... मैं बहुत ही चुदास हूँ और बहुत अय्याशी करती हूँ पर दो-दो मर्दों से एक साथ चुदवाने का मुझे कभी-कभार ही मौका मिलता है पर... मेरी बेटी को दो-दो लड़के अक्सर चोदते हैं। तब तुझे कॉलेज से ना निकाले जाने और अपनी प्यास बुझाने के लिए मैंने जसवंत को अपना जिस्म दिया। जसवंत ने मुझे अपने ऑफिस में बहुत चोदा। एक बार चोदने के बाद भी हम दोनों का दिल नहीं भरा तो दूसरा राऊँड शुरू किया। इस बार जसवंत ने मुझे पीछे से लिया। उसका यह मोटा लंड मेरी गाँड में अंदर घुसा तो मुझे दर्द हुआ और मैं चिल्लाई... तब मेरी आवाज़ सुनके यह मंगल आया...।”

मंगल ने आरती का पल्लू हटाके उसके मम्मे दबाते हुए झुक के आरती का गाल किस किया। आरती फिर आगे बोली, “हाँ मंगल आज भी तुझे मेरा जिस्म मिलेग चोदने को... थोड़ा सब्र कर...। हाँ तो पूजा... मैं बता रही थी कि... तो मेरी आवाज़ सुनके मंगल भी आया और परसों मुझे इन दोनों ने मुझे एक साथ खूब चोदा। इतना चोदने के बाद भी इनका दिल नहीं भरा और यह मुझे और चोदना चाहते थे। तब मैंने सोचा कि क्यों ना तुझे भी इसमें शामिल करूँ। इससे हम दोनों के बीच की शरम की दीवार भी खतम हो जायेगी और हम एक-दूसरे से छिपाए बगैर मिल कर अयाशियाँ कर सकेंगी और इसलिए मैंने जसवंत और मंगल को आज आपने घर बुलाया ताकि यह दोनों मर्द हम माँ बेटी को चोद सकें। जिस तरह से इन्होंने मुझे कल चोदा... मैं समझ गयी कि तू भी इनसे चुदवाके खुश होगी... बोल मैंने ठीक सोचा न बेटी?” यह बोल के आरती ने अपनी बाहें पूजा की तरफ फैला दी। इस कहानी का शीर्षक ’आरती की वासना’ है!

पहले तो पूजा को अपनी माँ की गंदी बातें सुन के अचम्भा हुआ लेकिन फिर उसका डर खतम हो गया और वो खुशी से आरती की बाहों में जाके बेशरम होके बोली, “मम्मी तुम भी दूसरे मर्दों से चुदवाती हो... मुझे इस बात की भनक थी पर मुझे मालूम नहीं था कि तुम मेरे लिए इतना करोगी... मुझे डर था कि कहीं आपको पता चला तो आप मुझे मारोगी... पर अब कोई डर नहीं है मुझे। अब मैं समझी कि सर और मंगल बार-बार क्यों मुझे आपके बारे में गंदी बातें बोल रहे थे। मम्मी... तुम तीनों ने तो मेरी जान ही निकाल दी थी लेकिन अब मैं एकदम खुश हूँ... और आज से हम माँ-बेटी नहीं बल्कि सहेलियाँ हैं।” आरती पूजा के होंठ चूमते हुए बोली, “हमारे इस नए रिश्ते के नाम एक-एक जाम हो जाए... यह साले... दोनों तो पीते नहीं हैं पर मुझे पता है तू कभी-कभी मेरी व्हिस्की की बोतल में से चुरा के पीती है... क्या बोलती है... हो जाये एक-एक पैग.... और फिर शराब के सुरूर में चुदाई क मज़ा दूगुना हो जाता है... आरती ने उठ कर खुद ही व्हिस्की के दो तगड़े पैग बनाये और पूजा को उसका पैग देते हुए बोली, एक ही बार में ग्लास खाली करना है... पूजा... हमारे नये रिश्ते के नाम.... चीयर्स...।” फिर दोनों माँ बेटी अपने ग्लास आपस में टकरा के गटा-गट अपने पैग पी गयीं और फिर आरती ने खुद पूजा का टॉवल निकाल दिया। पूजा का नंगा जिस्म अपनी आँखों में भरती हुई आरती बेशरम हो के पूजा का निप्पल किस करने लगी। पूजा भी पहली बार एक औरत और वो भी अपनी माँ से निप्पल चुसवाते हुए और व्हिस्की के सुरूर से गरम हो गयी और आरती के मुँह में अपना निप्पल चुसवाने लगी। पूजा के दोनों निप्पल खूब चूस के आरती बोली, “अरे सालों... क्या सिर्फ़ हम माँ-बेटी का खेल ही देखते रहोगे या हमें चोदोगे भी...? जसवंत मेरे राजा तुझे क्या मेरी बेटी इतनी पसंद आयी कि तूने अभी तक मुझे नंगा भी नहीं किया...? परसों तो मेरे लिए बड़ी-बड़ी बातें कर रहा था तू... आज क्या मेरी बेटी पे ज्यादा दिल आ गया क्या तेरा? जसवंत चल तू उठ जा और मुझे नंगी करके चोद... और मंगल तू मेरी बेटी की गाँड मार... आज तुम मर्द हम माँ बेटी की प्यास बुझओ।” आरती का नशा पहले से बढ़ गया था और उसकी आवाज़ थोड़ी बहकने लगी थी और उसकी आँखें भी नशे और वासना से गुलाबी हो गयी थीं।

मंगल ने पीछे से आके पूजा को दबोच लिया और जसवंत ने आरती को अपनी तरफ घुमाके उसे किस करते हुए उसकी साड़ी पेटीकोट से खींच के उतार दी। फिर आरती का ब्लाऊज खोल के उसके पेटीकोट के नाड़े को भी खींच दिया। अब आरती सिर्फ़ लाल पैंटी और सढ़े चार इन्च ऊँची हील के काले सैंडल पहने हुए थी। पूजा पे भी अब व्हिस्की क नशा छा रहा था और उसे अपने सिर का हल्कापन बहुत अच्छा लग रहा था। पहली बार अपनी माँ को नंगी देखा तो पूजा अपनी माँ का नंगा शबाब देख कर बहुत प्रभावित हुई। आरती का हर अँग जैसे तराशा हुआ था और वो उन काले हाई हील सैंडलों और लाल जी-स्ट्रिंग पैंटी में किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी। जसवंत जब पीछे से आरती को पकड़के उसके मम्मे मसलने लगा तो पूजा भी आगे आके आरती के निप्पल चूसने लगी। मंगल पूजा के मम्मे मसलते बोला, “देखो सर... मेरी रंडी पूजा कैसे आपकी रंडी आरती के मम्मे चूस रही है... और यह आपकी रंडी आरती भी कैसे मस्त हो रही है मेरी राँड से अपने मम्मे चुसवा के। बहनचोद साली... मस्त रंडियाँ हैं दोनों।” जसवंत आरती की पैंटी उतारके उसकी गाँड को अँगुली से सहलाते हुए बोला, “हाँ मंगल... यह दोनों तो एकदम छिनाल निकलीं पर यह हमारी खुश किस्मती है कि यह हमारी रंडियाँ हैं। मादरचोद पूजा अच्छे से अपनी माँ के मम्मे चूसके उसे गरम कर ताकि बाद में यह चूत और गाँड खोलके हमसे चुदवा सके। पूजा... तेरी माँ की चूत ऐसे चोदूँगा मैं कि आज के बाद तेरी माँ मेरी पर्सनल रखैल बनके रहेगी और तू मंगल की छिनाल बनेगी समझी? चलो छिनाल रंडियों... अब आ जाओ हमारे मूसल लौड़ों से अपनी जवानी चुदवाने।” आरती पूजा को बाहों में भरती हुई बोली, “हाँ हम तैयार हैं तुमसे चुदवाने को लेकिन यह तो बोलो कि किसका लौड़ा किसको चोदेगा?” जसवंत आके आरती के हाथ में अपना लंड देके आरती के मम्मे मसलते हुए बोला, “आरती तू तो मेरी पर्सनल रंडी है... मेरे साथ अपने बेडरूम में बिस्तर पे चल और पूजा तू मंगल की रंडी बनके उससे यहाँ चुदवा।” मंगल ने आके नंगी पूजा को बाहों में उठाया और उसे सोफ़े पे ले गया। पूजा को सोफ़े पे बिठाके उसके मुँह में लंड देके वो बोला, “सर... आज आप इस रंडी आरती को चोदो और मैं पूजा की गाँड मारके उसे पास करवाता हूँ। आप अपनी रखैल की आरती उतारो और मैं अपनी छिनाल की पूजा करता हूँ।”

rajaarkey
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Re: आरती की वासना

Unread post by rajaarkey » 13 Oct 2014 09:57

आरती की वासना-5end

लेखिका: आरती शर्मा

मंगल की बात सुनके सब हँसने लगे और पूजा नशे में मतवाली होके बिंदास बोली, “सर आप आरती की चुदाई के बाद मुझे चोदना और मंगल आरती को चोदेगा । इससे हम माँ बेटी को भी चेंज मिलेगा और आप दोनों को भी।” आरती ने उन दोनों के पास जा के झुक के पूजा को किस किया और फिर जसवंत उसे बेडरूम की तरफ ले जाते हुए बोला, “ठीक है पूजा... जब तक माँ बेटी को पूरी तसल्ली नहीं होगी हम तुम दोनों को एक के बाद एक करके चोदते रहेंगे। अब मैं तेरी रंडी माँ को बेडरूम में चोदने को ले जाता हूँ तब तक तू मंगल से चुदवा ले। उसके बाद मैं तेरी चूत चोदूँगा और मंगल तेरी माँ की गाँड मारेगा।”

आरती पे अब पूरी तरह से शराब और चुदाई का नशा सवार हो चुका था और वो अपने सढ़े चार इन्च ऊँची हील के सैंडल में ठीक से चल भी नहीं पा रही थी। वो बेडरूम की तरफ जाते-जाते बुरी तरह लड़खड़ा रही थी और जसवंत का लंड उसे देख कर कड़ा हो गया। जसवंत ने आगे बढ़ कर झूमती हुई आरती को पकड़ा और बेडरूम में ले जाते हुआ बोला, “साली आरती... तू तो बेवड़ी निकली... देख कितनी चढ़ गयी है तुझे... कुत्तिया राँड।” आरती अपनी ही मदहोशी में बड़बड़ाने लगी, “हाँ मेरे राजा... मैं कुत्तिया हूँ और तू भी मेरा कुत्ता है... (हुच्च)...” फिर जोर से हँसते हुए रासते में ही घूम के जसवंत से बेल की तरह लिपट गयी और उसके होंठ चूमते हुए बोली, “मेरे प्यारे कुत्ते... (हिच्च)... कभी पी के देख... कितनी मस्ती चड़ती है... मुझे कुत्तिया बोलता है... अरे पीने के बाद तो मेरी अंदर इतनी मस्ती भर जाती है कि मैं गधे-घोड़े के लंड भी ले के चुदवा लूँ... (हुँच्च).... उम्म्म... तू मेरा घोड़ा है... ले चल मुझे अंदर मेरे प्यारे घोड़े... (हुच्च)... चोद अपने लंड से अपनी घोड़ी को... साला हरामी... तू भी क्या याद रखेगा... किस चुदक्कड़ चूत से पाला पड़ा था...।” जसवंत उसे लगभग धकेलता हुआ बेडरूम में लाया और फिर आरती को बाहों में भरके किस करने लगा। आरती भी अपना नंगा जिस्म उससे भिड़ाती हुई उसे किस करने लगी। जसवंत आरती को इस हालत में देख कर बहुत गरम हो गया था। एक हाथ से आरती की गाँड और दूसरे से उसके मम्मों को निचोड़ते हुए जसवंत बोला, “आरती तू साली बहुत चुदास औरत है... जबसे तुझे चोदा है... मेरा लंड बार-बार तेरी चूत की याद में खड़ा हो रहा है। तू जानती नहीं कि तेरे इस मस्त बदन ने मुझ पे क्या जादू किया है। आज तक मैंने बहुत चूतें चोदी हैं पर जैसे खुल के तू चूत चुदवाती है... किसी ने वैसे चूत नहीं चुदवायी मुझसे। आरती आज के बाद तू मेरी रंडी बनके रहेगी? बोल मेरी जान तू मेरी रखैल बनेगी?” आरती जसवंत की बात सुनके बिस्तर पे बैठती हुई उसके लंड को सहलाते हुए किस करने लगी और बोली, “जसवंत मुझे भी दो दिनों से हर पल तेरा यह राजपुताना लौड़ा याद आ रहा था। मेरा भी हाल तेरे जैसा ही है... पता है पर्सों से कितनी ही बार अपनी चूत को बैंगन और मोटी मोमबती से चोद चुकी हूँ... (हुच्च)... मुझे भी कितने मर्दों ने चोद लेकिन जो बात तेरे इस तगड़े लंड में है... (हुच्च)... वो किसी में नहीं थी...। तेरा लंड मुझे कितना भा गया इसका सबूत... उम्म्म... (हुच्च)... यह है कि मैंने अपनी बेटी को भी तुझसे चुदवा दिया। सोच... साले... सोच... कोई माँ अपनी बेटी देगी क्या किसी मर्द को चोदने के लिए? उसे भी तेरे जैसे लंड की जरूरत थी जसवंत... रही बात तेरी रंडी बनने की तो राजा मुझे तेरे पैसे नहीं चाहिए... बस जब दिल करे अपने इस लंड से खूब चोद मेरी छिनाल चूत और गाँड को और मुझे खुश रख...।”

जसवंत आरती का चेहरा पकड़ के उसके मुँह में अपना लौड़ा देते हुए बोला, “ले आरती ले... आज मेरे इस लौड़े को तसल्ली बख्श दे... बहनचोद कसम से तू मस्त औरत है... राँड साली जैसे तू मर्द को मज़ा देती है कोई भी औरत नहीं दे सकती। मुझे मालूम है कि तूने अपनी बेटी को भी हमसे चुदवाके एक चुदास रंडी होने का सबसे बड़ा सबूत दिया है। मुझे उस दिन तेरी चूत मिली तो मैं खुश हुआ लेकिन आज अपनी बेटी को चुदवा के तूने मुझे जीत लिय मेरी छिनाल... आज के बाद तू मेरी खास रंडी है... तेरी बेटी मंगल की रंडी बनेगी।” आरती होंठ टाईट करके जसवंत के लंड से अपना मुँह चुदवाने लगी। पूरा लंड चूसने के बाद वो जसवंत की गोटियाँ चूस के बोली, “हाँ जसवंत आज से मैं और मेरी बेटी तेरी रंडियाँ बन गयी हैं। तू हमसे जो चाहे वो करवा सकता है... हम दोनों तुझे कभी शिकायत का मौका नहीं देंगी... साले... जसवंत मेरे मम्मे मसल के और ज़ोर से चोद मेरा मुँह... यह तेरी राँड कुत्तिया का मुँह है... (हुच्च)... बिंदास चोद इसे... जसवंत साले... यह तो बता कि मेरी बेटी कैसी लगी तुझे...? मस्त माल है ना पूजा? पूजा... साली... अपनी राँड माँ पे गयी है कि नहीं?” इस कहानी का शीर्षक ’आरती की वासना’ है!

जसवंत आरती को बिस्तर पे लिटाते हुए उसकी चूत में अँगुली डाल के मम्मे मसलते हुए बोला, “आरती तेरी बेटी तेरे जैसी हसीन है... बड़ी कुत्तिया बेटी है तेरी... बिल्कुल माँ पे गयी है... पूजा भी आगे चल के तेरे जैसी ही मस्त छिनाल बनेगी... बहनचोद मुझे लगता है कि शादी के बाद पूजा को उसके पति के दोस्त भी चोदेंगे... मेरी रंडी आरती... तेरी बेटी तेरे जैसी चुदक्कड़ है... तूने बड़ी मादरचोद लड़की को पैदा किया है आरती... तेरी बेटी तेरे नक्शे कदम पे चलके मर्दों को बराबर रिझाना सीख रही है और चुदाई में तेरा नाम रोशन करेगी। वैसे मेरी राँड अब मुझे पूजा की माँ की चूत चोदनी है... मेरा लंड पूजा की माँ की चूत चोदने को बेकरार है... बोल चोदूँ मैं पूजा की माँ की चूत... आरती?” जसवंत के मुँह से अपने और पूजा के लिए गालियाँ सुनके आरती और गरम हो गयी। वो जसवंत का लंड पकड़ के बोली, “हाँ साले भड़वे... तू सच बोला... मैं भी चाहती हूँ कि पूजा मेरी जैसी छिनाल राँड बने। और अब जब तू साथ रहेगा तो जरूर पूजा एक मस्त राँड बनेगी। रही बात पूजा की माँ की चूत चोदने की तो मेरे प्यारे कुत्ते... पूजा के माँ की चूत को भी बड़ी बेसब्री से तेरे इस तगड़े राजपुताना लंड का इंतज़ार है... साले अब तू टाइम खराब किए बिना जल्दी से पूजा की चुदक्कड़ माँ की चूत चोद।”

आरती बेड पे लुढ़कते हुए लेट गयी और जसवंत आरती की टाँगें उठाके अपने कँधों पे रखते हुए बोला, “मेरी छिनाल आरती... अब तू देखती जा मेरे लंड का कमाल... चूत खोल राँड... बहनचोद रंडी... आज फिर तुझे जी भरके चोदूँगा।” आरती अपने हाथों से चूत खोलके बोली, “यह ले जसवंत खोल दी मैंने अपनी चूत तेरे लंड के लिए... आजा साले... अपनी छिनाल की चूत चोद अपने राजपुताना लौड़े से और दिखा दे फिर से तेरे लंड का कमाल... कुत्ते अपनी छिनाल कुत्तिया की चूत मस्ती से चोद।” जसवंत आरती की चूत का दाना रगड़ते हुए बोला, “साली रंडी आरती... तेरी चूत अभी भी कितनी टाईट है... लगता है जैसे कुँवारी चूत है... जब तुझे पहली बार चोदा तब अगर मुझे मालूम नहीं होता कि पूजा तेरी बेटी है... तो मुझे लगता कि मैं किसी २०-२२ साल की लड़की को ही चोद रहा हूँ। इस उम्र में इतनी टाईट चूत मिलना मतलब लॉटरी लगना है रंडी...।” आरती तो मदहोशी से आँखें बँद करके सिसकरियाँ लेते हुए अपने मम्मे मसलने लगी और कमर उठा के जसवंत के हाथ पे चूत दबाते हुए बड़बड़ायी, “साला... कुँवारी बोलता है... मैं... साली चुदाई का कोई मौका नहीं छोड़ती.... कुँवारी...?” और फिर हँसने लगी और और हँसते हुए ही आगे बोली, “शायद तेरे जैसा तगड़ा राजपुताना लौड़ा नहीं मिला... इसलिए यह टाईट है... हुच्च... और शायद इसी वजह से मैंने खुद को और साथ में अपनी हरामी बेटी को भी तुझसे चुदवाया ना?”

जसवंत ने एक हाथ से अपना लंड आरती की चूत पे रखा और फिर दूसरे हाथ से आरती के दोनों हाथ पकड़ के ऊपर कर के बोला, “आरती तू हमेशा खुश रहेगी मेरी रंडी बनके... बहनचोद... तेरी जैसी मस्त और बिंदास औरत को पैर की जूती बना के ही चोदना चाहिए। साली... इतने साल से तेरी गरम चूत को जिस तगड़े लंड की तालाश थी वो अब खतम हो गयी... मेरी रंडी बनके तू ने वो तालाश खुद खतम की है। आज के बाद तुझे कभी भी प्यासी नहीं रहना पड़ेगा मेरी छिनाल... तू चाहेगी तो एक साथ दो-दो मर्द तो क्या.... तुझे एक साथ पाँच-पाँच मर्दों से चुदवाऊँगा।”

आरती अपनी चूत ऊपर उठा के जसवंत के लंड से भिड़ाती हुई बोली, “डाल दे अपना लौड़ा मेरी चूत में और चोद के मेरी चूत की गरमी निकाल दे... अब तेरे जैसे मस्त लौड़े से मेरी चूत चुदेगी तो मेरी प्यास ज़रूर मिटेगी... जसवंत अब आज के बाद मैं और मेरी बेटी पूजा तेरी रंडियाँ बन गयी हैं... तू जब.. जितना और जिससे भी चाहे हमें चुदवा।”

जसवंत ने अपना लंड आरती की चूत पे रख के आरती की चूत का मुँह खोला और फिर अपना लंड अंदर घुसेड़ने लगा। उसका लंड ज़रा मुश्किल से अंदर घुस रहा था। जैसे-जैसे जसवंत ने ज़ोर लगाया, उसका लंड आरती की चूत में घुसने लगा। आरती की चूत एक दम गीली हो गयी थी, इसलिए फिर १-२ धक्कों में जसवंत का पूरा लंड आरती की चूत में घुस गया। लंड पूरा घुसने के बाद जसवंत आरती के हाथ छोड़ के उसके निप्पल चूसते हुए आरती को दनादन चोदने लगा। आरती भी नीचे से कमर उठा-उठाके चुदवाने लगी और जसवंत से बोली, “हाँ डाल साले... और अंदर पेल लंड... चोद मुझे... जी भर के मेरी चूत चोद... ऊफ्फ्फ्फ्फफ क्या मस्त लंड है तेरा भोंसड़ी के... बेरहमी से चोद मेरी चूत।” जसवंत भी ताव में आ के आरती की चूत चोदते और मम्मे मसलते हुए बोला, “ले साली... ले... आज तुझे रंडी की परिभाषा पता चल जायेगी। बहनचोद साली... गरम माल है तू और तेरी बेटी... कसम से… ऐसी मस्त चूत नहीं चोदी। हरामी तू अगर शादी के पहले मिलती तो तुझे अपनी बीवी बनाता लेकिन अब तुझे मेरी राँड बनना होगा।”

जसवंत अब मस्ती में ज़ोर-ज़ोर से आरती को चोदने लगा। वो धक्कों पे धक्के मारते हुए पूरा लंड अंदर घुसाते हुए चोद रहा था। आरती भी नीचे से उसके धक्कों के जवाब में अपनी कमर उठाके चुदवाती हुई बोली, “जसवंत हाँ ऐसे ही मेरे मम्मे दबाते हुए और निप्पल चूसते हुए मुझे चोद... चोद और चोद तेरी यह राँड बड़ी भूखी है... चूत फाड़ दे अपनी रंडी आरती कि... मेरे कुत्ते राजा... तू कहेगा तो मैं कुत्तों से भी चुदवाने को तैयार हूँ।” जसवंत बारी-बारी से उसके मम्मे मसलते और चूसते हुए बोला, “तू अब मेरी रखैल बनके रहेगी... ले साली हरामज़ादी चूत... चुदवा ऐसे ही... साली बेटीचोद औरत... तुझे तो दिन रात चोदना चाहिए... यह ले और ले छिनाल... चुदवा ले मेरे राजपुताना लौड़े से बहनचोद...।” इस कहानी का शीर्षक ’आरती की वासना’ है!

जसवंत का लंड आरती की क्लिट पे रगड़ते हुए चूत में बहुत गहरायी तक जाके टक्कर मार रहा था। जसवंत के धक्कों का जवाब आरती नीचे से अपने धक्कों से दे रही थी और जसवंत के धक्कों से आरती का पूरा बदन उछल रहा था। जसवंत ने थोड़ा पीछे होके धक्का मारा तो आरती के सीने की हलचल देखके खुश हुआ। जसवंत के धक्कों से आरती की चूचियाँ थर-थरा जाती थीं। जिस ताल से वो आरती को चोद रहा था उसी लय से आरती के मम्मे उछल रहे थे। आरती जसवंत का चेहरा नीचे करके उसे किस करते हुए बोली, “हाँ जसवंत मैं तेरी रंडी रखैल हूँ और ऐसी माँ हूँ जिसने अपनी जवान बेटी को तुझसे और बाहर उस हरामी मंगल से खुद चुदवाया है... पर मैं क्या करती... एक तो मैं गरम औरत हूँ और मेरी बेटी भी कम नहीं है... वो छिनाल तो इतने दिनों से २-२ लड़कों से रोज़ –रोज़ चुदवा रही है... मैंने तो कभी-कभार ही दो-दो मर्दों से एक-साथ चुदवा पाती हूँ। अब बस तू मुझे ऐसे ही चोदता रह... और कभी अपनी इस रखैल को प्यासी मत रखना।”

जसवंत ने जोश में आरती के मम्मे मसलते हुए एक अँगुली आरती की गाँड में डालके आरती को चोदते हुए बोला, “नहीं मेरी जान... आज के बाद तू कभी प्यासी नहीं रहेगी... अब तुझे जब भी मेरा लंड चाहिए मेरे पास आ और मैं तुझे चोदके तेरी प्यास बुझाऊँगा।” फिर १५ मिनट तक उनकी चुदाई बड़ी ज़ोरों से चली। जसवंत ने आरती का पूरा बदन चोद-चोद के तोड़ के रख दिया था। जब उसे एहसास हुआ कि वो झड़नेवाला है तो वो अपना लंड आरती की चूत के अंदर ही अंदर ऐसे घुमाने लगा जैसे कि पेंच कस रहा हो। फिर एक बार कसके धक्का मारते हुए बोला, “हरामी रंडी... साली अब मैं झड़ने वाला हूँ तेरी गरम चूत में... यह ले साली बहनचोद रंडी... तेरी गाँड मारूँ छिनाल... यह ले... और ले... और ले... मेरी रंडी आरती।” आरती भी जसवंत को कसके पकड़के अपनी कमर उठाके चुदवती हुई बोली, “जसवंत साले रंडीबाज... आरती की चूत आज से तेरी अमानत है डीयर... उउउउउफ्फ्फ्फ अब मैं भी झड़नेवाली हूँ जसवंत... मुझे कसके पकड़ और चोद मुझे। ऊउउम्म्म्म... आआआआआआहहहह... जसवंत बड़ा मज़ा आ रहा है तेरी राँड को तुझसे चुदवाके। जी भरके मुझे चोद...।”

अब दोनों ने एक दूसरे को कसके पकड़ लिया और जसवंत भी जितना हो सके उतने ज़ोर से आरती को चोदने लगा। दोनों बहुत सिसकारियाँ भरते हुए चुदाई का मज़ा ले रहे थे। पूरे कमरे में आहहहहहहह... उहहहह... ओफ्फ्फ्फ्फ... उम्म्म्म्म.... और चोद साले... ले मेरी छिनाल... मेरी रंडी.... की आवाज़ें और भारी-भारी साँसों की आवाज़ सुनायी दे रही थी। जसवंत आखिरी बार अपना लंड आरती की चूत की सबसे गहरे भाग में धकेल के झड़ते हुए बोला, “आआआआह मेरी चुदक्कड़ रानी... आरती... मेरी रंडी... मेरी जान... पूरा पनी तेरी चूत में भर रहा है... मैं इस राजपुताना लंड के पानी से तेरी चूत की आग शाँत कर रहा हूँ मेरी छिनाल...।” जब जसवंत के पानी का एहसास आरती को हुआ तो उसकी चूत भी पिघल गयी और वो अपनी कमर उठा के जसवंत के लंड को ज्यादा से ज्यादा अंदर लेती हुई बोली, “हाँ चोद जसवंत और ज़ोर से चोद... दे तेरा पूरा पानी मेरी प्यासी चूत को... आआहहहहह जसवंत..... मैं झड़ गयीईईईई राजा... आआआहहहहह कितना सकून मिल रहा है मेरे यार... दे अपना पूरा पानी... मेरी चूत को मेरे राजपुताना चोदू।”

आरती और जसवंत पूरी तरह झड़के शाँत हो गये पर जसवंत अब भी आरती के जिस्म पे लेटा हुआ था और जसवंत ने पूरा लंड आरती की चूत में घुसाया हुआ था। जब जसवंत भी ढीला पड़ा तो आरती की चूत से उन दोनों के चुदाई-रस का मिश्रण हल्के-हल्के बाहर आने लगा। दिल की धड़कन शाँत होने के बाद जसवंत आरती की चूत से लंड निकाल के उसकी बगल में लेट गया। जसवंत आरती को चोद चुका था और दोनों बेहाल पड़े थे। १५- २० मिनट के बाद आरती जसवंत की बाहों में आयी और बालों से भरा जसवंत का सीना हल्के हाथों से सहलाने लगी। जसवंत भी करवट लेके आरती के मम्मे मसलने लगा। फिर आरती का हाथ अपने लंड पे रखते हुर जसवंत बोला, “मेरी जानेमन... अब भी मेरा दिल भरा नहीं है... मेरा लंड फिरसे तुझे चोदना चाहता है... ज़रा मुँह में मेरा लंड लेके उसे गरम कर... ताकि फिर तुझे चोदूँ।” आरती उठके जसवंत का पूरा लंड अच्छी तरह चाट के बोली, “मेरी चूत के राजा.. तूने मुझे इतना तगड़ा चोदा कि मज़ा आ गया पर अब मेरी चूत भी दोबारा चुदाई के लिए तड़प रही है। लेकिन थोड़ा सा रुक जा फिर फ़्रैश होके मुझे चोद... वैसे भी मुझे मंगल से भी चुदवाना है। मेरी बेटी भी तो देखे कि उसकी माँ कैसे चुदासी बन के चुदवाती है।” जसवंत आरती के निप्पल हल्के से खींचते हुए बोला, “बड़ी हरामी चूत है तू... साली... तो अब मुझसे नहीं चुदवाना है... लेकिन मंगल से बेटी के सामने चुदवाना चाहती है तू... बहनचोद तेरी जैसी बेशरम औरत नहीं देखी मैंने... ठीक है चल देखते हैं तेरी मादरचोद बेटी का क्या हाल किया है उस मंगल ने।” इस कहानी का शीर्षक ’आरती की वासना’ है!

आरती के चुदाई के नशे की तरह ही उसका शराब का नशा भी कम नहीं हुआ था। जसवंत लड़खड़ाती हुई नंगी आरती को लेके हॉल में आया। उन्होंने देखा कि मंगल पूजा को कुत्तिया बनाके अब उसकी गाँड मारने के तैयारी में है। दोनों बेशरम माँ बेटी एक दूसरे को देख के मुस्कुराईं। माँ और बेटी आपस में खुल चुकी थीं इसलिए दोनों में से किसी को भी शरम नहीं थी। आरती पूजा के सामने जाके उसे किस करने लगी। मंगल तब पूजा की गाँड पे अपना लंड ज़ोर ज़ोर से रगड़के बोला, “साली रंडी की छिनाल बेटी... आज तू सही मायने में रंडी बनेगी। साली राजेश और वैभव तुझे बराबर चोदते हैं तो फिर हमसे क्या झिझक...? तेरी माँ की चूत पूजा... आज के बाद तू मेरी रंडी बनके रहेगी और तेरी छिनाल माँ जसवंत सर की... समझी?” जसवंत पूजा के मम्मे मसलते हुए ललचाती नज़रों से पूजा को देखते हुए बोला, “क्या मंगल अब तक तूने पूजा को चोदा नहीं? बहनचोद मैंने तो आरती को चोद भी दिया और अब दूसरे राऊँड की तैयारी करने आया था। यह बहनचोद आरती अब तुझसे अपनी बेटी के सामने चुदवाना चाहती है।” इसके पहले कि मंगल कुछ जवाब देता, आरती पूजा के मम्मे मसल रहे जसवंत के हाथ को हल्के से मारते हुए हँसते हुए बोली, “साले कमीने... तूने अभी इस पूजा की माँ को इतनी चोद-चोद कर रंडी बना दिया... अब फिर बेटी को देख रहा है... हरामी जितनी कमीनी मुझे बोलता है... उतने ही कमीने तुम दोनों हो।”

आरती और जसवंत की बात सुनके मंगल ने पूजा को छोड़ा और आरती को धक्का देके सोफ़े पे गिराते हुए खुद सोफ़े पे चड़ गया और अपना लंड उसके मुँह में डालते हुए बोला, “छिनाल चूत... बहनचोद... साली एक तो तुझे हमने अपनी रंडी बनाया और हमको ही कमीना बोलती है? कुत्तिया... साली बेवड़ी... नशे में अपनी औकात मत भूल... तू और तेरी बेटी हमारी रंडियाँ हो। तुझे सर चोदने के लिए ले गये तब तेरी बेटी की चूत मैंने मारी और अब गाँड मारने जा रहा था। अब तू आयी है तो तुझे भी चोदके अपनी रंडी बनाऊँगा और जसवंत सर पूजा को चोदके उसे अपनी छिनाल बनायेंगे।” जसवंत नंगी पूजा को अपनी गोद में बिठा के उसके बदन से खेलते हुए आरती से बोला, “हरामज़ादी राँड... तेरी बेटी भी एकदम जवान और हसीन है... वैसे तुम माँ बेटी नहीं बल्कि एक दूसरे की बहन लगती हो... देख तेरी मादरचोद बेटी कैसे अपनी गाँड मेरे लंड पे रगड़ रही है। पूजा... तेरी माँ की चूत... मादरचोद चूत... तेरी माँ को मंगल कुत्तिया बनाके उसकी गाँड मारेगा... तू सोफ़े पे बैठके अपनी माँ के मम्मे मसलेगी और तेरी छिनाल माँ तेरी चूत चाटते हुए अपनी गाँड मरवायेगी और तू... हरामी मादरचोद रंडी... मेरा लंड चूसेगी... समझी?” पूजा यह सुनके खुश हुई कि उसकी माँ उसकी चूत चाटने वाली है और वो तुरँत हाँ बोली। जसवंत पूजा को खड़ी करके बोला, “मंगल की रंडी... अब चल तू आ मेरे साथ।” जसवंत पूजा को पकड़के मंगल और आरती के पास ले गया और उसे सोफ़े पे बिठा के उसकी टाँगें खोल दीं। फिर आरती को कुत्तिया जैसी झुका के उसका सिर पूजा की चूत पे दबाते हुए जसवंत बोला, “सुन पूजा रंडी... तू अपनी माँ के मम्मों से खेल... तेरी यह रंडी माँ तेरी चूत चाटेगी और पीछे से मंगल तेरी माँ की गाँड मारेगा। मैं सोफ़े के पास खड़ा रहूँगा और तू मेरा लंड चूसेगी... समझी...? चल मादरचोद अपनी माँ के मम्मे मसलने शुरू कर।”

आरती बिल्कुल वैसा ही करने लगी जो जसवंत कह रहा था। अब कमरे में दृश्य ऐसा था कि मंगल धीरे-धीरे करके अपना लंड आरती की गाँड में घुसाते हुए उसे चोद रहा था और आरती अपनी गाँड मरवाती हुई झुक के अपनी बेटी की चूत चाट रही थी। पूजा अपनी माँ से अपनी चूत चटवाती हुई आरती के मम्मों से खेल रही थी और साथ ही जसवंत का लंड भी चूस रही थी। जसवंत पूजा का मुँह चोदते-चोदते पूजा के मम्मों से खेल रहा था। बड़ी बेरहमी से वो दोनों मर्द इन माँ बेटी की गाँड और मुँह चोद रहे थे। आरती बेशरम होके अपनी बेटी की चूत चाट रही थी और पूजा भी मस्ती से उसके मम्मे मसल रही थी। मंगल आरती की कमर पकड़के गाँड में ज़ोरदार धक्के मारते हुए बोला, “आहह... आरती तेरी गाँड तेरी बेटी जैसी लाजवाब है... साली जब तुझे जसवंत सर के ऑफिस में जाते देखा था तबसे तुझे चोदने की तमन्ना हुई। उस दिन सर के ऑफिस में तेरी गाँड मारी तब मुझे सकून मिल... लेकिन जबसे तेरी बेटी को चोदा तबसे लंड को आराम ही नहीं मिलता। बहनचोद क्या मस्त रंडियाँ हो तुम माँ बेटी।” आरती पूजा की चूत चाटती हुई मंगल से पूरा लंड ले रही थी गाँड में। पूजा भी अब जोश में अपनी माँ के मम्मे मसलती हुई जसवंत का लंड चूस रही थी।

जसवंत आगे पीछे करते हुए पूरा लंड पूजा के मुँह में डालके उसे चोदते हुए बोला, “साली पूजा... रंडी की औलाद... तू भी अपनी माँ जैसी ही मस्त लंड चूसती है। आरती पहले तेरे मर्द ने और कोई अच्छा काम किया हो या नहीं पर साले ने तेरी जैसी गरम बीवी और पूजा जैसी कम्सिन चूत हमारे लिए यहाँ छोड़के जाने का अच्छा काम किया है। क्या मस्त गरम बेटी पैदा की है तुम पति-पत्नी ने... साली आगे जाके तेरी बेटी तेरा नाम रोशन करेगी। मेरा लंड चूस छिनाल और अपनी माँ को मंगल से गाँड मरवाते भी देख।” इन माँ बेटी के साथ वो दो मर्द बेरहमी से पेश आ रहे थे लेकिन यह बेरहमी उन माँ बेटी को अच्छी लग रही थी। सब गालियाँ और बेइज़्ज़ती उन्हें और चुदास बना रही थी और वो माँ बेटी बेशरम हो के अपना बदन उनसे चुदवा रही थीं। इस कहानी का शीर्षक ’आरती की वासना’ है!

मंगल आरती की गाँड मारने के साथ-साथ उसकी गीली टपकती चूत में अँगुली रगड़ रहा था और आरती भी मस्ती से गाँड में मंगल का लंड ले रही थी और टाँगें फ़ैला के उसकी अँगुली से अपनी चूत को भी चुदवा रही थी। आरती दोनों हाथों से पूजा की कमर पकड़के अपनी कम्सिन जवान बेटी की चूत का पानी बड़ी प्यार से चाट रही थी। पूजा की चूत के दाने को हल्के से चबाती हुई आरती पूजा को और गरम कर रही थी। साँस लेने के लिए उसने मुँह पूजा की चूत से हटाया और बोली, “हम माँ बेटी के यारों... आज मेरी प्यारी बेटी और उसकी रंडी माँ को इतना चोदो कि पूजा राजेश और वैभव को भूल जाये और मैं अपने बाकी यारों को। जब चाहो पूजा रंडी को कॉलेज में चोदना और जब दिल करे तो घर आके इस अपनी रखैल रंडी आरती को चोदना। तुम दोनों इसको चोदते रहोगे तो यह इधर उधर नहीं जायेगी, कॉलेज में अटेंडैंस और पढ़ाई भी इम्प्रूव करेगी और चूतिया लड़कों से अपनी जवानी बर्बाद नहीं करेगी।”

मंगल का लंड पिस्टन की तरह आरती की गाँड मार रहा था। अपनी माँ से चूत चटवाती पूजा अब झड़ने के करीब थी। वो उत्तेजना से चिल्लाई, “माँ, मुझे राजेश और वैभव ने कई बार चोदा... दोनों ने अक्सर एक साथ भी चोदा मुझे... मगर जो मज़ा आज इन दोनों ने दिया वो कभी पहले नहीं मिला... अब जब मेरी पूरी बात खुल चुकी है तो मुझे कोई डर नहीं... मेरी प्यारी माँ... आरती।” पूजा की बात सुनके आरती पूरी जीभ पूजा की चूत में डालके उसकी चूत को चोदते हुए बोली, “हाँ मेरी छिनाल बेटी... मुझे पता है। उस दिन जबसे इन दोनों ने मुझे कॉलेज में चोदा है तब से मेरी हालत भी एक चुदास कुत्तिया जैसी हो गयी है...। इनके लंड से चुदवाके मैंने तुझे भी इनसे चुदवाने का फ़ैसला किया। अब तो यह दोनों मर्दों की हम माँ बेटी रंडियाँ बन गयी हैं तो हमें कोई तकलीफ़ नहीं होगी।”

जसवंत ने आरती की बात सुनके खुश हो के उसे किस किया। अब मंगल और जसवंत भी झड़ने वाले थे। मंगल का तो पूरा लंड आरती की गाँड में घुसा हुआ था और गोटियाँ आरती की चिकनी गाँड पे टकरा रही थीं। जसवंत भी झड़ने वाला था तो वो पूजा को एक थप्पड़ मारते हुए बोला, “मादरचोद साली... कमीनी छिनाल... ज़रा ज़ोर से मेरा लंड चूस... बहनचोद झड़ते वक्त लंड कैसे चूसना चाहिए... तुझे तेरी छिनाल माँ ने सिखाया नहीं क्या?”

पूजा अपनी माँ के मम्मों को छोड़के अब जसवंत का लंड पकड़ के पूरा लंड मुँह में लेकर ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगी। जसवंत का लंड पूजा के हलक से टकरा रहा था। फिर आरती ने ज़ोर-ज़ोर से अपनी बेटी के मम्मे मसलते हुए उसकी चूत चाटनी शुरू की। मंगल की अँगुलियों ने आरती की चूत को पागल कर रखा था और लंड ने आरती की गाँड का भोंसड़ा बना रखा था।

सबसे पहले पूजा झड़ने लगी तो उसने जसवंत का लंड छोड़ा और अपनी माँ का मुँह चूत पे दबाते हुई पानी छोड़ने लगी। अपने बदन को अकड़ाते हुए पूजा ने पूरा पानी अपनी माँ के मुँह में चोड़ दिया। पूजा को आरती के मुँह में झड़ते देख मंगल से रहा नहीं गया और उसने आरती की कमर कसके पकड़ी और ८-१० धक्कों के बाद उसके लंड ने आरती की गाँड में पिचकारी छोड़ी। अपने लंड के पानी का आखिरी कतरा आरती की गाँड में डाल के मंगल ने लंड उसकी गाँड से निकाला और हाँफता हुआ नीचे लेट गया।

जब जसवंत ने देखा कि पूजा पूरी तरह झड़ गयी है तो उसने अपना लंड फिरसे पूजा के मुँह में घुसाया और जल्दी-जल्दी उसका मुँह चोदते हुए आरती की चूत में अँगुली करने लगा। अब जसवंत का लंड एक बेटी के मुँह में था और उसकी अँगुलियाँ उस लड़की की माँ की चूत में थीं। इतना समय चूत में अँगुली से चुद्वाने से आरती भी झड़ने लगी और फिर उसने अपना मुँह अपनी बेटी की चूत पे रखा और उसे चाटने लगी। देखते-देखते जसवंत ने भी अपना पानी पूजा के मुँह में छोड़ दिया और सब लोग झड़के थक के अलग-अलग हो गये।

वो पूरा दिन और पूरी रात वो दोनों मर्द आरती के घर में ही रहे और पूरा वक्त चारों मादरजात नंगे थे। किसने, किसको, कैसे, कहाँ और कितनी बार चोदा इसकी गिनती ही नहीं थी।

!!!! समाप्त !!!!